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OpIndia Exclusive- क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता योगी की तरह इन जेहादियों पर कार्यवाही करेंगी? सीमापुरी में मीडियाकर्मियों पर हमला, जान बचाने जिस DTC में चढ़े उसमें भी तोड़फोड़ : बुर्काधारी औरतों ने नोचे महिला पत्रकार के बाल, मुस्लिम भीड़ ने पत्थर-बेल्ट से मारा:

          घायल पत्रकारों का दिल्ली के जीटीवी अस्पताल में कराया गया इलाज (फोटो साभार: X_Keshav_Malaan)
काफी समय से दिल्ली में जेहादी शोभायात्राओं पर किसी न बहाने से पत्थरबाज़ी कर हिन्दुओं के त्योहारों पर विध्न डाल रहे हैं। अगर अब दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार के होते हुए भी योगी आदित्यनाथ की तरह कार्यवाही नहीं होगी इन जेहादियों और आकाओं के होंसले बुलंद होते रहेंगे। 

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग के दौरान हुआ, जब दोनों पत्रकार बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

पीड़ितों के मुताबिक, बुर्कानशीं महिलाओं और नाबालिग किशोरों की भीड़ने न केवल पत्रकारों को बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके उपकरण, नकदी और निजी सामान भी लूट लिए। इस घटना ने दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, क्योंकि अभी तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही पीड़ितों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई गई है।

दिल्ली की सड़क पर दिखा इस्लामी हिंसा का भयावह मंजर

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम करीब 6 बजे सुप्रिया पाठक और श्याम सीमापुरी के बंगाली बस्ती क्षेत्र में 200 फुटा रोड के पास पहुँचे। उनका मकसद सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध अतिक्रमण की सच्चाई को उजागर करना था, जो स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। इस इलाके में अवैध झुग्गियाँ, निर्माण कार्य और कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की मौजूदगी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

सुप्रिया और श्याम ने जैसे ही मस्जिद के सामने अपनी रिपोर्टिंग शुरू करने के लिए कैमरा सेट किया, कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। शुरुआत में यह आपत्ति मौखिक थी, लेकिन जल्द ही यह हिंसक रूप ले लिया। भीड़ में शामिल बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों ने पत्रकारों को घेर लिया। शुरुआत में 20-30 लोगों की भीड़ कुछ ही मिनटों में 200 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ में बदल गई।

भीड़ ने सुप्रिया और श्याम पर लाठियों, मुक्कों और लातों से हमला शुरू कर दिया। सुप्रिया को सड़क पर घसीटकर पीटा गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई और हड्डी टूट गई। उनके शरीर पर कई जगह घाव और चोट के निशान हैं। श्याम के चेहरे और शरीर पर भी गहरे घाव आए और उनके सिर पर मुक्कों की बौछार की गई। हमलावरों ने सुप्रिया का मोबाइल, कैमरा, माइक, बैटरी और जेब में मौजूद नकदी लूट ली, जबकि श्याम की घड़ी और पर्स भी छीन लिया गया।

पत्रकारों ने बचने की कोशिश में एक डीटीसी बस में शरण ली, लेकिन भीड़ ने बस को चारों ओर से घेर लिया। हमलावरों ने बस के शीशे तोड़ दिए और दोनों को जबरन बाहर खींच लिया। इस दौरान बस चालक ने कोई मदद नहीं की और उल्टा उन्हें बस से उतार दिया। भीड़ ने बस को भी नुकसान पहुँचाया, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँची। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।

दिल्ली के सीमापुरी में जिहादियों ने शुक्रवार की शाम को 2 पत्रकारों पर हमला किया। क्योंकि वो अवैध अतिक्रमण पर स्टोरी कर रहे थे। बुर्कानशीं महिलाओं ने महिला पत्रकार की टाँग तक तोड़ दी, तो उनका सामान भी लूट लिया गया। दोनों बचने की कोशिश में DTC की बस में चढ़ें, तो बस भी तोड़ी गई।… pic.twitter.com/dY0uPLx4sa

— Shravan Shukla (@epatrakaar) July 5, 2025

पीड़ित ने ऑपइंडिया से साझा की आपबीती

पीड़ित के मुताबिक, उन्हें अलग भीड़ ने मारा और उनकी साथी पत्रकार सुप्रिया को अलग से पीटा गया। बाद में कुछ बाइक वाले आए, उन्होंने मदद करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी बाइक समेत गिरा दिया गया। फिर पुलिसकर्मी आए और उन्होंने बाइक पर उन्हें आगे छोड़ने का प्रयास किया। हालाँकि इस दौरान भी भीड़ बाइक के पीछे रही, किसी ने पत्थर फेंके तो किसी ने बेल्ट मारी।

बचाव की नाकाम कोशिशें और प्रशासन की निष्क्रियता

घटना के दौरान सड़क पर जाम होने के बावजूद कोई भी स्थानीय व्यक्ति पत्रकारों की मदद के लिए आगे नहीं आया। कुछ राहगीरों ने कोशिश की, लेकिन भीड़ के आक्रामक रवैये और कथित कट्टरपंथी नारों के सामने उन्हें पीछे हटना पड़ा। एक राहगीर ने सुप्रिया को अपनी बाइक पर बिठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे भी खींचकर मारपीट की। आखिरकार एक पुलिसकर्मी ने हस्तक्षेप किया और दोनों को मौके से कुछ दूरी पर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
पत्रकारों को इसके बाद सीमापुरी थाने ले जाया गया, जहाँ से उन्हें मेडिकल जाँच के लिए जीटीबी अस्पताल भेजा गया। रात 9 बजे अस्पताल पहुँचने के बावजूद, इलाज और मेडिकल प्रक्रिया में इतनी देरी हुई कि सुबह 4 बजे तक उन्हें वहाँ से निकलने का मौका मिला। सुप्रिया के पैर में प्लास्टर चढ़ा है और वह चलने में असमर्थ हैं, जबकि श्याम को भी गंभीर चोटें आई हैं।

कट्टरपंथी इरादों के साथ किया गया हमला

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने X लिखा कि यह हमला योजनाबद्ध था, क्योंकि पत्रकारों की रिपोर्टिंग से कई अवैध गतिविधियों का भेद खुलने का खतरा था।
इस घटना में मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से चिंताजनक है। बुर्का पहनी महिलाओं ने न केवल पत्रकारों पर शारीरिक हमला किया, बल्कि उन्हें अपशब्द कहे और धार्मिक आधार पर टिप्पणियाँ कीं। नाबालिग किशोरों ने भी हिंसा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जो यह दर्शाता है कि कट्टरपंथी विचारधारा युवा पीढ़ी में भी गहरे तक पैठ बना चुकी है।
लोगों का दावा है कि हमलावरों ने पत्रकारों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे हिंदू थे और हमलावरों को इस बात का भरोसा था कि उनकी मजहबी पहचान के चलते पुलिस कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेगी। यह भी आरोप लगाया गया कि ऐसे मामलों में मुस्लिम समुदाय की भीड़ थाने को घेर लेती है, जिससे प्रशासन दबाव में आ जाता है और कार्रवाई करने में असमर्थ रहता है। इस तरह की धारणा हमलावरों को और अधिक बेखौफ बनाती है, जिससे वे कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकते।
लोगों का कहना है कि दिल्ली में अवैध कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकता है। यह भी दावा किया गया कि कुछ राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की खातिर अवैध प्रवासियों को बसने की अनुमति दी, जिससे इस तरह की हिंसक घटनाएँ बढ़ रही हैं।
हालाँकि इस मामले में हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर हमले के बावजूद दिल्ली पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़ितों को न तो एफआईआर की कॉपी दी गई है और न ही किसी हमलावर की गिरफ्तारी हुई है। लोगों का दावा है कि पुलिस पीड़ित पत्रकारों को ही परेशान कर रही है, जबकि हमलावर खुले में घूम रहे हैं।

NEET पेपर लीक में अब पत्रकार जमालुद्दीन गिरफ्तार: स्कूल प्रिंसिपल एहसान उल हक से था लगातार संपर्क; विपक्ष की बढ़ती परेशानी

NEET पेपर लीक मामले में महामहिम के भाषण पर चर्चा होने से पहले विपक्ष द्वारा संसद में हंगामा करना एक बहुत गहरा षड़यंत्र है। विपक्ष की कोशिश है कि सरकार का इधर-उधर ध्यान भटकाकर दोषियों तक सरकार के हाथ न पहुँचने पाएं। जब तक राजनीतिक संरक्षण नहीं होगा पेपर लीक नहीं हो सकता। मोदी सरकार अच्छी तरह जानती है, इसीलिए सदन शुरू होने से पहले ही इस उलझन के सूत्रधारों तक कानून कदम बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख ने विपक्ष की नींद हराम कर दी। अब उनके पास हंगामा करने के अलावा कोई और काम नहीं। सदन का नियम है कि पहले महामहिम के भाषण पर चर्चा और उसके बाद ान गतिविधियां। लेकिन विपक्ष अपनी हेकड़ी दिखा अपने अनुसार सदन चलाना जा रहा है, जो लोक/राज्य सभा नियम के विरुद्ध है।   

NEET पेपर लीक मामले में CBI की कार्रवाई जारी है। सीबीआई ने शुक्रवार (28 जून) की शाम को शुक्रवार (28 जून) को झारखंड के हजारीबाग से ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और पत्रकार जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया है। इसके पहले चार और आरोपित पकड़े गए हैं। सभी आरोपितों को CBI प्लेन से दिल्ली लाने की तैयारी में है।

जाँच के दौरान सीबीआई ने एहसान उल हक और इम्तियाज आलम के साथ-साथ हजारीबाग के दो पत्रकारों- मोहम्मद जमालुद्दीन और मोहम्मद सलाउद्दीन को भी ट्रैक किया था। इसमें एक पत्रकार जमालुद्दीन को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। जमालुद्दीन झारखंड के एक हिंदी दैनिक अखबार से जुड़ा है। पेपर लीक मामले पर एहसान की जमालुद्दीन और सलाउद्दीन से लगातार बातचीत होती रहती थी।

सीबीआइ को जानकारी मिली कि नीट परीक्षा के तत्काल बाद एहसान उल हक विदेश घूमने गया था और करीब एक सप्ताह तक इंडोनेशिया के बाली में था। परीक्षा के पहले और बाद के उसके फोन डिटेल में बिहार से भी कनेक्शन मिला है। पेपर लीक कराने वाले गिरोह ने हजारीबाग में कई कोचिंग संचालकों से मोटी रकम लेकर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए थे। इनमें एक प्रोफेसर की भूमिका भी संदिग्ध है।

CBI और पुलिस के मुताबिक, 3 मई को NEET के प्रश्न पत्र कूरियर एजेंसी ब्लू डार्ट के हजारीबाग नूतन नगर सेंटर से बैंक ले जाने की बजाय पहले ओएसिस स्कूल लाए गए। इसके बाद यहाँ से बैंक भेजे गए थे। माना जाता है कि ओएसिस स्कूल में ही पेपर का पैकेट खोला गया था। ये सभी सरगना संजीव मुखिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। मुखिया का गैंग पेपर के बॉक्स का सील तोड़ने में माहिर है।

ओएसिस स्कूल भी NEET परीक्षा का एक सेंटर था। इस सेंटर का प्रश्न पत्र और बुकलेट पटना में अधजला बरामद हुआ था। इस मामले का यह सबसे बड़ा सबूत है। इससे पहले 27 जून को सीबीआई ने पटना से मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार किया था। उससे पहले दो अन्य आरोपित चिंटू और मुकेश को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।

NEET के अलावा, UGC-NET की परीक्षा भी इस ओएसिस स्कूल में आयोजित हुई थी। इसी स्कूल से ही यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्र भी लीक होने का शक है। सीबीआई की टीम ने स्कूल के वाइस प्रिंसिपल सह सेंटर सुपरिंटेंडेंट इम्तियाज आलम का एक मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है। इसके अलावा, जाँच एजेंसी ने अन्य कई सामानों को जब्त किया है।

पटना में 28 जून को CBI की टीम आरोपित चिंटू और मुकेश को लेकर उनके दोस्त रॉकी के घर पहुँची। बताया जा रहा है कि पटना के कंकड़बाग में रॉकी के घर से कई सबूत हाथ लगे हैं। चिंटू की देवघर में गिरफ्तारी के बाद रॉकी फरार हो गया था। CBI ने चिंटू, मुकेश, आशुतोष और मनीष के मोबाइल की जाँच की। ये सभी आरोपित 6 महीने से आपस में संपर्क में थे।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है। इस पेपर पर दी गई जानकारी से पता चला था कि ये प्रश्न पत्र हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के परीक्षा केंद्र से लीक हुआ था।

मनीष प्रकाश ने इस स्कूल में 20 से 25 NEET परीक्षार्थियों को रुकवाकर उन्हें प्रश्न पत्र दिया था और उन्हें आंसर शीट रटवाया था। कहा जा रहा है कि मनीष प्रकाश ने संजीव मुखिया के कहने पर परीक्षार्थियों के लिए इसका इंतजाम किया था। मनीष नालंदा का रहने वाला है। उसका परिवार पटना के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के संदलपुर इलाके में रहता है। चिंटू संजीव मुखिया का रिश्तेदार है।

वहीं, बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। संजीव मुखिया यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपित रवि अत्री भी संजीव मुखिया से जुड़ा है। इसके अलावा, कई परीक्षाओं के पेपर लीक से भी मुखिया जुड़ा हो सकता है।

पत्रकार अजीत भारती को ‘नोटिस’ देने के लिए चोरों की तरह आई कर्नाटक पुलिस, UP पुलिस ले गई अपने साथ: बेंगलुरु में FIR दर्ज कर राष्ट्रवादी आवाज को दबाना चाहती है कांग्रेस

सादे कपड़ों में मौजूद कर्नाटक पुलिस के जवान (बाएँ) उनसे पूछताछ करती यूपी पुलिस (वर्दी में) और पत्रकार अजीत भारती (टीशर्ट में, दाएँ)
कॉन्ग्रेस सरकारे राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने पत्रकार अजीत भारती के घर पुलिस भेजी है। कर्नाटक पुलिस के कुछ जवान सादी वर्दी में बिना किसी पूर्व सूचना के अजीत भारती के घर पहुँचे हैं।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक पुलिस के तीन जवान गुरुवार (20 जून, 2024) को नोएडा स्थित अजीत भारती के आवास पर पहुँचे। यहाँ वह लोग कुछ देर खड़े रहे। इसके बाद उन्होंने एक नोटिस अजीत भारती को दिया। कर्नाटक पुलिस के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी नहीं थी।

इस विषय में ऑपइंडिया को अजीत भारती ने बताया कि कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने स्थानीय यूपी पुलिस के थाने को सूचना दी थी लेकिन बिना साथ लिए ही वह उनके आवास पर पहुँच गए थे। यह तीनों अजीत भारती के घर एक कैब से पहुँचे थे और उन्होंने वर्दी भी नहीं पहन रखी थी। अपने घर के आसपास अजीत भारती और उनके परिवार ने संदिग्ध गतिविधि देख कर स्थानीय पुलिस थाने को सूचना दी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस यहाँ पहुँची और कर्नाटक पुलिस के इन तीनों जवानों को अपने साथ ले गई। कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने अजीत भारती को हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले में एक नोटिस भी थमाया है। यह नोटिस बेंगलुरु के हाई ग्राउंड थाने से जारी किया गया है।

                                      अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है

नोटिस में कहा गया है कि अजीत भारती ने समाज में घृणा और शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल गाँधी को लेकर एक वीडियो बनाया है। इसी को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने आदेश दिया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर हाई ग्राउंड थाने में पेश हों।

अजीत भारती के खिलाफ यह FIR 15 जून, 2024 को दर्ज करवाई गई थी। ये एफआईआर कॉन्ग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई थी। FIR दर्ज कराते समय दावा किया गया था कि अजीत भारती ने 13 जून, 2024 को राहुल गाँधी को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया जबकि गुरूवार (20 जून, 2024) को उनको दिए गए नोटिस में कहा गया है उनका वीडियो घृणा फैला रहा है इसलिए FIR दर्ज हुई है।

तेलंगाना : बिजली विभाग की खोली पोल तो महिला पत्रकार पर हो गया पुलिस केस: कांग्रेस याद करवा रही इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी की प्रेस सेंसरशिप

महिला पत्रकार और रेवंड रेड्डी के साथ राहुल गाँधी (फोटो- मिंट, X/रेवती और X_TGSPDCL)
तेलंगाना पुलिस ने बुधवार (19 जून) को एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह पत्रकार राज्य में बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग द्वारा ग्राहकों के कथित उत्पीड़न से संबंधित जनता की शिकायतों को लगातार उजागर कर रहा था। इसको लेकर पुलिस ने पत्रकार पर जानबूझकर झूठ फैलाने और राज्य सरकार एवं उसके बिजली विभाग TGSPDCL को बदनाम करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैदराबाद स्थित पत्रकार रेवती ने इसे अपने पत्रकारीय प्रयासों के लिए ‘सम्मान का पदक’ बताया है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के चयनात्मक प्रयोग को लेकर कांग्रेस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को टैग किया।

पत्रकार रेवती ने लिखा, “एक विचित्र कदम उठाते हुए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि तेलंगाना पावर एंड कंपनी के असली अपराधी घूम रहे हैं, जिन्होंने दिनदहाड़े एक महिला उपभोक्ता को परेशान किया!” कांग्रेस नेताओं से उन्होंने पूछा, “क्या मीडिया की स्वतंत्रता पर आपका यही रुख है? क्या आपकी सरकार सच को उजागर करने वाले पत्रकारों को चुप कराने की कोशिश कर रही है?”

रेवती ने राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सीएम रेवंत रेड्डी से कहा, “अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो न्याय के लिए हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े हों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करें! मैंने प्रताड़ित महिला की निजता की रक्षा के लिए उसका  वीडियो पोस्ट नहीं करने का फैसला किया। अगर यही अधिकारी मीडिया से गुंडागर्दी करते हैं तो लोगों की रक्षा कौन करेगा?”

रेवती की एक्स (ट्विटर) टाइमलाइन के अनुसार, वह बिजली विभाग से जुड़ी जनता की शिकायतों को उजागर करती रही हैं। इससे पहले की एक पोस्ट में रेवती ने एक महिला की चिंताओं को साझा किया था, जिसे अपने क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती के खिलाफ पोस्ट करने पर बिजली विभाग द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया था।

पत्रकार रेवती ने महिला की पहचान को उजागर नहीं करते हुए कहा कि उस महिला ने उन्हें बताया था कि एक लाइनमैन उसके घर आया था और उसे अपनी पोस्ट हटाने के लिए कहा था। आरोप यह भी है कि जब महिला ग्राहक ने बिजली विभाग के अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ट्वीट करने के बजाय उन्हें फोन करना चाहिए था।

महिला ग्राहक के अनुसार, उन्हें बताया गया, “बिजली विभाग पर ऊपर के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है।” पत्रकार रेवती ने कहा कि उन्होंने घटना की जाँच की है और उनके पास उस बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग है। हालाँकि, सुरक्षा कारणों से और महिला की निजता का सम्मान करते हुए वे इस रिकॉर्डिंग को साझा नहीं करना चाहती हैं।

पत्रकार रेवती के अनुसार, जिस महिला ग्राहक ने बिजली कटौती के बारे में ट्वीट किया था, वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, क्योंकि वह किराए के घर में रहती है और बिजली विभाग के कर्मचारी उसका पता जानते हैं। संयोग से हैदराबाद की एक पत्रकार नवीना ने कहा कि जब से उसने बिजली कटौती के बारे में ऑनलाइन शिकायत की है, तब से वह एक चिंतित हो गई हैं।

एक अन्य ट्वीट में रेवती ने तेलंगाना पुलिस की चुनिंदा प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया, क्योंकि उन्होंने अपनी दो शिकायतों पर उनकी प्रतिक्रिया को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक छिपी हुई धमकी जारी करके जवाब दिया। बाद में उसी के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सीएम के भाई के खिलाफ उनकी दूसरी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।

महिला पत्रकार के अनुसार, 12 जून 2024 को सैयद सलीम नामक व्यक्ति पर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई तिरुपति रेड्डी के गुर्गों ने कथित तौर पर हमला किया था।

FIR में उल्लेखित विवरण

रेवती द्वारा साझा की गई FIR की कॉपी के अनुसार, पुलिस को 19 जून 2024 की तड़के एलबी नगर क्षेत्र में कार्यरत एक सहायक अभियंता एम दिलीप (33) से शिकायत मिली। शिकायतकर्ता ने कहा कि 18 जून की शाम करीब 5 बजे उन्हें अपने उच्च अधिकारियों से एक मैसेज मिला था।
उन्होंने आगे कहा कि उच्च अधिकारियों ने कहा कि एक्स हैंडल @revathitweets ने एक मैसेज पोस्ट किया है कि एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे से बिजली बाधित है। हालाँकि, सबस्टेशन की डाटा शीट की जाँच के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पाया कि पिछले 6 महीनों में एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे की बिजली कटौती की समस्या नहीं आई थी।
शिकायतकर्ता ने आगे कहा, “यह केवल एक झूठा आरोप है और जानबूझकर राज्य सरकार एवं उसके संगठन टीजीएसपीडीसीएल को बदनाम किया जा रहा है।” इसलिए, उन्होंने ट्विटर (एक्स) अकाउंट धारक @revathitweets के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इसलिए एफआईआर दर्ज की जाए, एफआईआर कॉपी में जोड़ा गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने सीआर नंबर 662/2024 में धारा 505 आईपीसी और आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) के तहत मामला दर्ज किया और जाँच इंस्पेक्टर एल रामंजनेयुलु को सौंप दी गई। हैदराबाद के कई पत्रकारों-नेताओं और एक्स यूजर्स ने बिजली विभाग से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों को फैलाने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कॉन्ग्रेस की आलोचना की।
उनमें से कई लोगों ने तर्क दिया कि भले ही उसके दावे सच न हों, लेकिन बिजली विभाग द्वारा बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग के कर्मियों द्वारा ग्राहकों को परेशान करने के मुद्दों को उजागर करने पर आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय जवाबी कार्रवाई के साथ उन्हें स्पष्ट किया जा सकता था।
केसीआर मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री और बीआरएस नेता केटीआर ने पूछा कि क्या पुलिस विभाग ही ऊर्जा विभाग चला रहा है या फिर राज्य में पुलिस राज है।
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी के ‘खटाखट खटाखट’ मुफ्त चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “कांग्रेस शासित तेलंगाना में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायत करने पर महिला को परेशान किया गया।”

मुस्लिम कट्टरपंथियों का दोगलापन ! जिस बात पर नुपूर शर्मा को मिली ‘सर तन से जुदा’ की धमकी, उसी बात पर मुस्लिम महिला पत्रकार को कट्टरपंथी दे रहे ताली

                                                           नुपूर शर्मा और इरेना अकबर
इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार इरेना अकबर ने 1 दिसंबर 2023 को पैगंबर मोहम्मद से जुड़े कुछ पोस्ट किए। एक ट्वीट में उसने एक मीम के जरिए ये दिखाने की कोशिश की कि एक तिलक लगाया साँवला शख्स पैगंबर मोहम्मद के निकाह पर सवाल उठाता है जिसका जवाब ‘गोरा’ मुस्लिम शांति से देता है और कहता है-

“हाँ, पैगंबर मोहम्मद ने निकाह किया था, लेकिन इससे न तो आयशा के अब्बा को दिक्कत थी, न आयशा के परिवार को, न उनके समुदाय को… यहाँ तक जो लोग हमेशा पैगंबर मोहम्मद पर हमले की फिराक में रहते थे, उन्हें भी इससे कोई दिक्कत नहीं थी।” इसके बाद तिलक लगाया शख्स और दो और लोग रोते हुए कहते दिखाए जाते हैं- “हमें परेशानी है।”

इस मीम को शेयर करते हुए इरेना ने लिखा- हाँ! अलहमदुलिल्लाह।

इरेना के पैगंबर मोहम्मद और आयशा के निकाह पर किए गए पोस्ट

इरेना अकबर को ट्विटर पर कुछ मुस्लिम लोगों को भी गलत ठहराते देखा गया जो दावा कर रहे थे कि निकाह के वक्त आयशा की उम्र 18 की थी। इरेना के अर्काइव ट्वीट में देख सकते हैं कि वो जोर देकर कहती हैं,
“नहीं, सीराह के प्रामाणिक स्रोतों के अनुसार, जब निकाह हुआ तब वह (आयशा) 9 वर्ष की थीं। कुछ ‘विद्वानों’ ने इस्लाम को त्रुटिपूर्ण पश्चिमी-उदारवादी-धर्मनिरपेक्ष-नारीवादी ढाँचे में ‘फिट’ करने के लिए उनकी उम्र को 18 वर्ष तक बढ़ाने का प्रयास किया। हमें इस्लाम से घृणा करने वालों को खुश करने के लिए तथ्यों को नहीं बदलना चाहिए। आयशा और उनके परिवार को निकाह से कोई समस्या नहीं थी। पैगंबर मोहम्मद के दुश्मन भी इस निकाह का इस्तेमाल करके उन्हें आसानी से निशाना बना सकते थे लेकिन उन लोगों ने भी ऐसा नहीं किया। यह केवल आजकल के इस्लाम से घृणा करने वाले वो लोग हैं जो इस बारे में बकवास करते रहते हैं। हमें इन सबपर शर्मिंदा होना बंद करना पड़ेगा।”

आगे इरेना ने अर्काइव ट्वीट में ‘द सील्ड नेक्टर’ जैसे सीराह स्रोतों का जिक्र किया। इसके बाद अपील की कि इस संबंध में मदीना की इस्लामिक यूनिवर्सिटी के स्कॉलरों की बातें सुनीं और पढ़ी जानी चाहिए।

इसके अलावा इरेना अकबर ने आयशा (आरए) की जीवनी संबंधी स्रोत भी पढ़ने को कहा और बताया कि उन्हें कैसे कम उम्र में बुद्धिमत्ता का तोहफा मिला था और वह बहुत प्रतिभाशाली थीं। इरेना ने मुस्लिम यूजर (जिसने उम्र 18 बताई थी) को जवाब देते हुए ये भी कहा, “हो सकता है कि आप किसी को खुश करने के लिए ऐसा नहीं कर रहे हो, लेकिन पूरे अदब के साथ बता रही हूँ आपका थ्रेड शादी को लेकर पश्चिमी-आधुनिक विचारों से उपजा है।”

नुपूर शर्मा के बात रखने पर हुआ था बवाल

इरेना अकबर ने आज जिस मुद्दे पर बात की है, उसी मुद्दे को कभी नुपूर शर्मा ने ऑन टीवी अपनी बात रखी थी, लेकिन ऑल्ट न्यूज वाले मोहम्मद जुबैर ने उनकी आधी वीडियो को शेयर किया और इस्लामी कट्टरपंथी इसे पैगंबर मोहम्मद का अपमान बताकर नुपूर शर्मा की जान लेने पर तुल गए।
उन्हें देश के कट्टरपंथियों से ही नहीं बल्कि दूसरे इस्लामी देशों तक से धमकियाँ आईं। विवाद इतना बढ़ा कि जिन लोगों ने नुपूर शर्मा का समर्थन किया उन्हें भी धमकियाँ दी गईं और कन्हैया लाल जैसों को तो मौत के घाट उतार दिया गया।

उस समय यही इरेना अकबर ने इस मुद्दे की आग को भड़काया था। उन लोगों के बारे में कट्टरपंथियों को बताया था जो इस मुद्दे पर बोल रहे थे। आज इरेना ने भी इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी। लेकिन इस बार इस्लामी कट्टरपंथियों ने न कोई धमकी दी और न दी ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए।
अवलोकन करें:-

कट्टरपंथियों ने की इरेना की वाहवाही

उलटा इरेना के पोस्ट को समर्थन देते हुए कहा गया – हाँ बिलकुल सही बात हैं। ये सब पैगंबर मोहम्मद की इच्छा से थोड़ी था, वो तो वही कर रहे थे जो अल्लाह उनसे करवाना चाहता था।
एक यूजर ने कहा, “तुम्हें सलाम। ये एक महिला से सुनना वाकई काबिल-ए-तारीफ है। लिबरलिज्म और फेमिनिज्म वाली दुनिया में जब मुस्लिम पुरूष और महिलाओं को भटकाया जा रहा है तब आप इस बात को बिन शर्मिंदगीं के कह रहीं हैं।

हरियाणा: नूहं: मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक कांग्रेस हिन्दुओं को बता रही दंगाई

नूहं हिंसा पर पत्रकार पुनीत ने हिन्दुओं के खिलाफ फैलाया झूठा (चित्र साभार- BBC)
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं के ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। हिंसा से संबंधित ‘मिनी पाकिस्तान’ कहे जाने वाले मेवात के नूहं से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच कट्टरपंथी मुस्लिमों के बचाव में कुख्यात गिरोह भी सक्रिय हो चुका है।

यह गैंग हिन्दुओं को ही हमलावर और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए साजिशें रचना शुरू कर चुका है। इन्हीं में से एक कथित पत्रकार पुनीत कुमार सिंह भी हैं। पुनीत ‘बोलता हिंदुस्तान’ नाम का प्रोपोगेंडा पोर्टल चलाते हैं। उन्होंने कई फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की।

पुनीत ने मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास गर्ग नाम के व्यक्ति की दुकान में तोड़फोड़ हुई थी। पुनीत ने आरोप लगाया कि दुकान को मुस्लिमों की दुकान समझकर हिन्दू संगठनों के सदस्यों इसमें तोड़-फोड़ की।

पुनित ने लिखा, “नूहं में हिंदू ‘विकास गर्ग’ की दुकान को मुस्लिम की दुकान समझकर भगवा गुंडों ने तहस-नहस कर दिया।” इसी के साथ पुनीत ने मृत शायर राहत इंदौरी के एक ‘शेर’ की कुछ पंक्तियाँ – ‘लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।’ भी लिखा।

                                         पुनीत कुमार सिंह का वो ट्वीट जो अब डिलीट कर लिया गया है

कुल मिलाकर पुनीत यह कहना चाहते थे कि नूहं के दंगे हिंदुओं की वजह से हुए और हिन्दू ही इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। अब डिलीट हो चुके ट्वीट में इस कथित पत्रकार ने नूहं से बीबीसी की एक वीडियो रिपोर्ट भी संलग्न की थी।

इस वीडियो में क्षतिग्रस्त दुकान के मालिक विकास गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उनकी ’24×7 बेकरी एंड कैफे’ नाम की दुकान में सोमवार को तोड़फोड़ की गई थी। विकास ने घटना का समय सोमवार की दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे बताया।

बीबीसी की रिपोर्ट में विकास ने बताया, “जब यात्रा गुजर रही थी तो यहाँ दंगा भड़क गया। मैं अपनी दुकान में ताला लगाकर चला गया था। इस दौरान मेरी दुकान लूट ली गई। दुकान का काउंटर, शीशे, LED और 7 फ्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दुकान में रखे लगभग 7.5 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। सारा सामान चुरा लिया गया है।”

विकास ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रेस्तरां को बनाने के लिए कई सालों की कड़ी मेहनत की थी। उनके इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। इसी वीडियो के आधार पर पुनीत ने विकास गर्ग की दुकान को हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा लूटे जाने का दावा किया।

पुनित ने अपने ट्वीट में हिंदुओं के लिए ‘भगवा गुंडों’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। हालाँकि, पुनीत का ये दावा फर्जी निकला। विकास की दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर दुकान के मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से विकास गर्ग और सचिन गर्ग लिखे हुए थे। इसलिए मुस्लिम की दुकान समझकर हिंदुओं को तोड़-फोड़ वाला नैरेटिव फिट नहीं बैठता।

पुनीत ने अपने खास एजेंडे को फैलाने की कोशिश की। पोल खुलने और कई ट्विटर यूजर्स द्वारा आइना दिखाने के बाद फर्जी न्यूज़ विक्रेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। एक अन्य पत्रकार आदित्य राज कौल ने पुनीत कुमार सिंह के डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गुरुग्राम में लोगों से फर्जी खबर पर ध्यान न देने की अपील की है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, “गुरुग्राम में लोगों को फर्जी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। फर्जी सूचनाओं पर आधारित कुछ ट्वीट्स से हरियाणा में दहशत फैल रही है। ट्वीट डिलीट कर दिया गया है, इसके बावजूद इसे फॉरवर्ड किया जा रहा है। आशा है कि पुलिस मेवात हिंसा को गुरुग्राम तक फैलाने की साजिश की जाँच करेगी। सतर्क रहें। घबराएँ नहीं।”

इधर फजीहत होने के बाद पुनीत ने आधी रात को अपनी सफाई में एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि जानकारी पता होने के बाद ट्वीट डिलीट कर लिया गया है। पुनीत का कहना है कि उन्हें हिन्दुओं द्वारा हिन्दू की दुकान लूटे जाने की जानकारी एक विश्वसनीय पत्रकार ने दी थी।

फर्जी अफवाह वाला ट्वीट डिलीट करने के बाद भी पुनीत खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बता रहे हैं। लोगों के बीच भ्रामक सूचना और समाज में नफरत फैलाने के बावजूद पुनीत ने माफ़ी नहीं माँगी और बेशर्मी पर अड़े रहे।

इसके उलट, वह दूसरे पत्रकारों पर फर्जी न्यूज़ चलाने और पैसे की उगाही के आरोप लगाते रहे। अपने विवादास्पद ट्वीट में लिखी गई राहत इंदौरी की लाइनों को भी पुनीत ने अहिंसक बताया। फिलहाल सोशल मीडिया पर कथित पत्रकार पुनीत की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है।

इस पत्रकार को लोग कॉन्ग्रेस के फंड पर पलने वाला पत्रकार कहते हैं।


गैर-मुस्लिमों पर बैन के बावजूद इजरायल का यहूदी पत्रकार पहुँच गया मक्का, वीडियो देख मुस्लिमों में उबाल

इजरायल के पत्रकार गिल तमारी ने किया मक्का का दौरा, बनाया वीडियो

इजरायल का एक पत्रकार छोरी-छिपे मक्का पहुँच गया, जिसका खुलासा होने के बाद मुस्लिमों में उबाल है। उसने वहाँ का अपना वीडियो भी शेयर किया है। बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने इजरायल और सऊदी के तटवर्ती शहर जेद्दाह का दौरा किया है। मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वहाँ की सरकार ने प्रतिबंधित कर रखा है। उक्त पत्रकार का नाम गिल तमारी है, जो ‘चैनल 13’ के वर्ल्ड एडिटर के रूप में कार्यरत है।

उक्त पत्रकार ने जिस वीडियो को शेयर किया, उसमें वो मक्का के भव्य दरवाजों से होकर गुजर रहा है और साथ ही वो ‘ग्रैंड मस्जिद’ से होकर भी गुजरता है, जहाँ काबा स्थापित है। इस्लाम में ये सबसे पवित्र जगह माना जाता है। इस दौरान पत्रकार ने ड्राइवर के चेहरे को ब्लर कर दिया। उसके टीवी नेटवर्क ने भी इस वीडियो को साझा किया है। पत्रकार ने मक्का से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माउंट अराफात का भी दौरा किया।

हज यात्रा के दौरान यहीं बड़ी संख्या में मुस्लिम जमा होते हैं। बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को कवर करने के लिए कई इजरायली पत्रकार सऊदी अरब पहुँचे थे। इजरायल और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में ठीक हुए हैं। हल ही में इजरायल का एक बिजनेस डेलीगेशन भी वहाँ गया था। 1948 में सऊदी अरब ने यहूदी राष्ट्र की मान्यता को नकार दिया था और फिलिस्तीन का पक्ष लिया था। लेकिन, हाल के दिनों में राजनयिक और सुरक्षा वाले संवाद के कारण इस रुख में बदलाव आया है।

गिल तमारी ने मक्का में घूमते हुए न सिर्फ वीडियो बनाया, बल्कि वहाँ के महत्वपूर्ण जगहों के बारे में भी बताते रहे। मक्का गेट के अंदर किसी भी गैर-मुस्लिम का प्रवेश बैन है। उन्होंने माउंट अराफत पर सेल्फी भी ली। सोशल मीडिया उन्हें गालियाँ पड़ रही हैं और मुस्लिम कह रहे हैं कि इजरायल ने मुस्लिमों को जेल में रखा है, जबकि एक यहूदी खुलेआम मक्का में घूम रहा। पत्रकार ने कहा है कि उनका ये दौरा मुस्लिमों को आहत करने के लिए नहीं था, वो माफ़ी माँगते हैं। उन्होंने कहा कि वो मक्का की सुंदरता को दिखा रहे थे।

एक बार जब मक्का पर कब्ज़ा हो गया था तो कुछ फ़्रांस के सैनिकों की मदद ली गई थी। चूँकि वहाँ गैर-मुस्लिमों की एंट्री वर्जित है, इसीलिए एक छोटे से समारोह में फ़्रांस के सैनिकों का धर्मांतरण करा के तब उन्हें अंदर लाया गया था। 7 साल पहले नवम्बर के महीने में इस्लामिक आतंकी हमला झेलकर फ्रांस ने 44 साल पहले मक्का की मस्जिद बचाने, और इसके अलावा अयातोल्ला खोमैनी को शरण देने की कीमत भर चुकाई थी।

अविवाहित रिपोर्टर गई अफगानिस्तान में हो गई गर्भवती: महिला पत्रकार को एंट्री देने से न्यूजीलैंड का इनकार

रिपोर्टिंग के दौरान गर्भवती हुई पत्रकार अफगानिस्तान में शरण लेने को हुई मजबूर (फोटो साभार: शार्लोट बेलिस का ट्विटर हैंडल )
न्यूजीलैंड (New Zealand) की पत्रकार शार्लोट बेलिस (Charlotte Bellis) अफगानिस्तान में फँस गई हैं। वह गर्भवती हैं, इसके बावजूद न्यूजीलैंड सरकार ने कोरोनो महामारी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उनकी वापसी का आपातकालीन आवेदन खारिज कर दिया है।

गर्भवती पत्रकार ने बताया कि उसके देश ने वापसी का आवेदन ठुकरा दिया है। इसकी वजह से उन्हें तालिबान (Taliban) से मदद माँगने को मजबूर होना पड़ा। बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ (The New Zealand Herald) में एक कॉलम लिखकर सबको अपनी आपबी​ती बताई। शनिवार (29 जनवरी 2022) को प्रकाशित कॉलम में उन्होंने लिखा, “अजीब विडंबना है कि पहले मैंने महिलाओं के प्रति बर्बरता दिखाने को लेकर तालिबान से सवाल पूछा था, लेकिन अब मैं यही सवाल अपनी सरकार से पूछ रही हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलिस अल-जज़ीरा में बतौर संवाददाता काम करती थीं, जो कतर में स्थित है। बेलिस पिछले साल अल जजीरा के लिए काम करते हुए उन्हें अफगानिस्तान से तालिबान और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जुड़ी खबरों को दे रही थीं। अपने कॉलम में बेलिस ने कहा कि वह सितंबर में कतर लौटीं तो उन्हें पता चला कि वह अपने साथी और फ्रीलांस फोटोग्राफर जिम ह्यूलेब्रोक के साथ रहते हुए गर्भवती हो गई थीं।

जिम ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लिए काम कर रहे थे। बेलिस मई में एक बच्ची को जन्म देने वाली हैं। चूँकि, कतर में विवाहेतर यौन संबंध अवैध हैं, इससे बेलिस को लगा कि कतर छोड़ने में ही उनकी भलाई है। इसके बाद उन्होंने नागरिकों की वापसी से जुड़ी लॉटरी-शैली प्रणाली के जरिए बार-बार न्यूजीलैंड वापस जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद बेलिस ने नवंबर 2021 में अल जजीरा से इस्तीफा दे दिया और युगल ह्यूलेब्रोक के मूल देश बेल्जियम चली गईं, लेकिन वह वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं, क्योंकि वह वहाँ की निवासी नहीं थी। इस जोड़े के पास रहने के लिए सिर्फ अफगानिस्तान का वीजा था। इसके बाद बेलिस ने तालिबान के वरिष्ठ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर वह अफगानिस्तान लौटती हैं, तो वह ठीक रहेंगी।

हिसार: सरकारी गोदाम में सड़ रहे गेहूं का जिस पत्रकार ने मामला उठाया उसके ही खिलाफ दर्ज हो गया केस, क्यों?

हिसार: सरकारी गोदाम में सड़ रहा था गेहूं, पत्रकार ने उठाया मामला तो उसके ही खिलाफ दर्ज हो गया केस
पत्रकार अनूप कुंडू
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
क्या भाजपा सरकार के विरुद्ध कुछ लिखना अपराध है? क्या भाजपा सरकार दूध की धुली है? क्या भाजपा में भ्रष्टाचार नहीं है? यदि नहीं, फिर किस आधार पर सच्चाई सामने पर पत्रकार के विरुद्ध केस दर्ज किया गया? क्या यह पत्रकारिता पर आघात नहीं? रपट मिथ्या होती, उस स्थिति में तो केस करना, क्या उचित है? अगर भाजपा ने रपट सही सिद्ध होने पर भी पत्रकारों को प्रताड़ित करेगी, मोदी-योगी-अमित के देश और जनहित में किए जाने वाले समस्त प्रयासों पर मीडिया ही उसी प्रकार पानी फेर देगा, जिस तरह 1977 में आपातकाल समाप्त होने पर चुनावों में कांग्रेस के कुकृत्यों को उजागर कर किया था। दूसरे, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान खूब "Feel Good" के नाम पर जनता पर जनता को भ्रमित किया गया, परन्तु चुनाव घोषित होने पर जो मीडिया वाजपेयी वाजपेयी के नाम की माला जप रहे थे, सरकार को धरातल पर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस कटु सच्चाई को नहीं भूलना चाहिए।  
सरकार को चाहिए यह था, जब रपट सत्यापित हो गयी थी, फिर पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज करने वालों पर कार्यवाही करती। आखिर कब तक गोदामों में पड़ा माल सड़ता रहेगा, जिसे कोई भूखा तो क्या कोई जानवर भी न खा पाए। क्या दान में मिला अनाज गोदामों में सड़ने के रखा हुआ है? आखिर वह गोदाम किस अधिकारी के अधीन था, क्यों नहीं गोदाम में नियुक्त अथिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गयी? क्या उनको वेतन नहीं मिलता?  
हिसार के पत्रकार अनूप कुंडू पर मानहानि और अवैध घुसपैठ का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस द्वारा इसलिए की गई है क्योंकि अनूप ने उकलाना में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम में खराब हो रही गेहूं की खबर को कवर किया था। वहीं एफआईआर में कहा गया है कि पत्रकार ने विभाग को बदनाम करने के लिए अपने चैनल पर फर्जी वीडियो चलाया। बता दें कि 17 जुलाई को पता लगा कि उकलाना के डीएफएससी गोदाम में पानी की वजह से गेहूं खराब हो रहा है। इस बारे में पत्रकार ने सिक्योरिटी गार्ड से बात की और घटना का वीडियो बनाया। उन्होंने फूड सप्लाई इंस्पेक्टर राम फल से भी बात की लेकिन उन्होंने उसे धमका दिया। 
FIR की कॉपी-
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18 जुलाई को इस बारे में चैनल पर 21 मिनट की स्टोरी चलाई गई। मंत्री करन देव कंबोज ने चैनल से बात की और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया। इसी दिन मंत्री ने डीएफएससी सुभाष को जांच का सुझाव दिया जिसके बाद पत्रकार समेत कुछ बीजेपी नेता और जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर ने गोदाम का निरीक्षण किया।
इस दौरान अधिकारियों को खराब अनाज मिला। अधिकारियों ने गलती को स्वीकार किया और साउंडबाइट दिया। लेकिन 19 जुलाई को जब करनाल में मंत्री से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पत्रकार ने गलत खबर दी है।
25 जुलाई को पत्रकार ने डीसी हिसार के पास शिकायत दर्ज कराई और इस शिकायत को डीएफएससी हिसार के पास भी भेजा लेकिन यह अभी तक पेंडिंग है। इसके बाद 8 सितंबर को पत्रकार के खिलाफ धारा 451, 465 और 500 के तहत मामला दर्ज किया गया।
अनूप कुण्डू पर दर्ज मुकदमे को लेकर जिले भर के पत्रकारों ने स्थानीय मीडिया सेंटर में एक बैठक का आयोजन कर रोष प्रकट किया और बैठक में जिले के सभी खंडों के पत्रकारों ने शिरकत की। यहां सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को एक शिकायत सौंपी गई जिसमें पत्रकार पर दर्ज मुकदमे को खारिज करते हुए फर्जी जांच रिपोर्ट पेश करने वाले जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुभाष सिहाग और जिला परिषद के निवर्तमान कार्यकारी अधिकारी विकास यादव के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग की गई। 
अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि पत्रकारों को डिमांड को संबंधित अधिकारी को प्रेषित करते हुए दोबारा निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी. साथ ही कहा कि किसी भी तरीके से मीडियाकर्मी के साथ गलत नही होने दिया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उस आरोप को भी नकारा जिसमे कहा गया है कि अवैध रूप से परिसर में घुसे हैं। उत्तम सिंह ने कहा कि इस तरीके की धाराएं प्राइवेट प्रॉपर्टी पर लागू होती हैं ना कि पब्लिक प्रॉपर्टी पर।  
हिसार के जिला पुलिस कप्तान के बाहर होने पर शिकायत की कॉपी पुलिस उपाधीक्षक अशोक कुमार को सौंपी गई जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि दोबारा से जांच कर दोनों पक्षों को शामिल किया जाएगा और निष्पक्षता से कार्यवाही करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा।