प्रतीकात्मक कर्नाटक में गायों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। गायों के थन काटने और मंदिर के बछड़े की पूँछ काटने के बाद अब एक गाय की हत्या कर दी गई। इस गर्भवती गाय का पेट फाड़ कर उसके गर्भ से बछड़ा निकाल दिया गया। इसके बाद उसके शरीर से माँस निकाल ले गए।
यह घटना कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में रविवार (19 जनवरी, 2025) को हुई। यहाँ के होनावर ताल्लुक में कृष्णा आचारी नाम के एक शख्स की गाय गाँव के बाहर घास खाने के लिए गई थी, जिस दौरान गोतस्करों ने इस घटना को अंजाम दिया। उन्होंने इस सूनसान इलाके में इस गर्भवती गाय का सर काटा, फिर उसका पेट फाड़ दिया।
उसके पेट से बछड़ा निकाला गया। उसके शरीर से माँस अलग कर हड्डियाँ और टाँगे वहीं छोड़ दी गईं। माँस लेकर गोतस्कर फरार हो गए। जब गोपालक यहाँ पहुँचा तो उसने अपनी गाय की क्षत-विक्षत देह देखी। इसके बाद उन्होंने बाकी गाँव वालों और पुलिस को इस घटना की सूचना दी।
कृष्णा आचारी ने बताया कि वह इस गाय को 10 वर्षों से पाल रहे थे और उसे अपने घर का सदस्य मानते थे। इस घटना के बाद हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया है। स्थानीय लोगो ने आरोप लगाया है कि इस इलाके में पिछले कुछ समय से गोतस्करी चरम पर है। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।
मामले में स्थानीय भाजपा विधायक दिनाकर शेट्टी ने पहुँच कर राज्य की सिद्दारमैया सरकार पर गोवंश की लापरवाही करने का आरोप लगाया है। राज्य भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र कहा कि गाय पर हमला करने वालों के लिए राज्य सरकार के मन में सहानुभूति है।
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष R अशोक ने कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ” तुष्टीकरण और अराजकता के कारण दम तोड़ रही कांग्रेस सरकार की कमजोरी का फायदा उठाते हुए कट्टरपंथी ताकतें गायों पर हमला करके हिंदुओं को चुनौती दे रही हैं।”
ಚಾಮರಾಜಪೇಟೆಯಲ್ಲಿ ಗೋಮಾತೆಯ ಕೆಚ್ಚಲು ಕತ್ತರಿಸಿದ ಅಮಾನುಷ ಘಟನೆಯ ಆಘಾತದಿಂದ ಹೊರಬರುವ ಮುನ್ನವೇ ಈಗ ಮತ್ತೊಂದು ಹೇಯ ಕೃತ್ಯ ನಡೆದಿದ್ದು, ಹೊನ್ನಾವರ ತಾಲ್ಲೂಕಿನ ಸಾಲ್ಕೋಡ ಗ್ರಾಮದಲ್ಲಿ ಗಬ್ಬದ ಆಕಳು ಕಡಿದು, ಗರ್ಭದಿಂದ ಕರು ತೆಗೆದು ಬಿಸಾಡಿ, ಮಾಂಸ ಹೂತ್ತೊಯ್ಯುವ ಮೂಲಕ ಕಿಡಿಗೇಡಿಗಳು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಕ್ರೌರ್ಯ ಮೆರೆದಿದ್ದಾರೆ.
उन्होंने आगे कहा “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, गायों पर बार-बार हो रहे इन हमलों को देखें तो लगता है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है। ऐसा लगता है कि यह कट्टरपंथी ताकतों की कोई बड़ी जिहादी साजिश है। अगर सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती और इन अत्याचारों पर अंकुश नहीं लगाती तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन होगा।”
कर्नाटक में 10 दिनों के भीतर गायों पर यह तीसरा क्रूर हमला है। इससे पहले बेंगलुरु में तीन गायों के थन काट दिए गए थे और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। इस हमले में सैयद नसरू नाम का एक कट्टरपंथी पकड़ा गया था। इसके अलावा मैसुरु के नंजानगुड़ में मंदिर के एक बैल की पूँछ काट दी गई थी।
जेल में गर्भवती हो रहीं महिला कैदी (फोटो साभार: adoptionchoicesoftexas.org)
कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका आई है। इसमें बताया गया है कि हिरासत में जेल में रहने के दौरान ही कई महिला कैदी गर्भवती हो गई हैं। मुख्य न्यायाधीश TS शिवज्ञानम और न्यायधीश सुप्रतिम भट्टाचार्य की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि जेल में रहने के दौरान ही महिला कैदी गर्भवती हो रही हैं। विभिन्न जेलों में पहले से ही 196 बच्चों का पालन-पोषण हो रहा है। साथ ही माँग की गई है कि महिला जेलों में पुरुषों की एंट्री प्रतिबंधित की जाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के ‘Amicus Curiae’ (न्याय मित्र) ने ये याचिका दायर की है। उन्होंने राज्य के ‘इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिजन्स’ (IG – Prisons) के साथ एक जेल का दौरा भी किया। वहाँ उन्होंने एक महिला कैदी गर्भवती मिली। साथ ही वहाँ 15 बच्चे अपनी माँओं के साथ रह रहे थे। उनकी माँएँ करेक्शनल होम्स में ही हिरासत में रह रही थीं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने के बाद माना कि ‘न्याय मित्र’ ने एक गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है।
साथ ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि आपराधिक मामलों पर सुनवाई करने वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले को रखा जाए। साथ ही राज्य के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को भी उस दौरान उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है। उच्च न्यायालय को बताया गया है कि जेल में ही बच्चों के जन्म हो रहे हैं। साथ ही करेक्शनल होम्स में जो पुरुष कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें महिलाओं के रहने वाले सेक्शन में प्रवेश न देने की माँग की गई है।
#Breaking: Calcutta High Court is informed that women prisoners in custody are getting pregnant while in jail. At least 196 babies have taken birth so far, the High Court is informed.
A bench of Chief Justice TS Sivagnanam and Justice Supratim Bhattacharya says the issue is… pic.twitter.com/keMPBCQ8dX
CJ passes an order: The issue brought to our notice is a serious one. We deem it fit to transfer all these matters (prison reforms PILs) to the bench hearing criminal matters. #CalcuttaHighCourt
Is it arising out of consensual sex or is it a case of rape happening in Prison ?
Further, how come female and male prisoners are meeting when they are supposed to be in separate barracks ? Or
Is it the handiwork of male authorities inside the prison ?
Let's not forget that…
— Rakesh K Singh राकेश कुमार सिंह (@advocaterakesh9) February 8, 2024
कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष इस प्रकरण को लेकर 2 नोट्स भी रखे गए। वहीं पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर किसी ऐसी महिला को गिरफ्तार किया जाता है जिसके बच्चे की उम्र 6 वर्ष से कम है, तो उस स्थिति में बच्चे को भी अपनी माँ के साथ जेल में रहने की अनुमति दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि जेल में महिला कैदियों के गर्भवती होने के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ संज्ञान में आया तो इस पर विचार किया जाएगा। मामले की सुनवाई अब सोमवार (12 जनवरी, 2024) को होगी।
हिन्दुओं आंखें खोलो, विधर्मियों को उनकी औकात दिखाने का समय आ गया है। सनातन धर्म विरोधी सनातन देवी-देवताओं के चमत्कारों से या तो अज्ञान हैं या फिर उनके चमत्कारों को नज़रअंदाज़ कर सनातन धर्म को बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं।
आज विज्ञानं के विकसित होने से हमने चिकित्सा में कई उपलब्धियाँ जरूर प्राप्त कर ली हैं, लेकिन उतने पीछे भी चले गए हैं। आज महिला के गर्भवती होने पर लिंग मालूम करने अल्ट्रासाउंड के लिए जाते हैं, वैसे तो लिंग मालूम करना अपराध घोषित कर दिया गया है। जबकि लिंग धारण का घर पर ही मालूम किया जा सकता है। दूसरे, आज चिकित्सक मरीज से बीमारी पूछता है, जबकि एलोपैथी से पूर्व जब आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली थी, तब वैद्य मरीज से हाल पूछने की बजाय उसकी नब्ज पढ़कर बीमारी बता दिया करते थे। किन्तु आज के वातावरण में परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। आज ईलाज बाद में होता है, टेस्टिंग पहले। और कई स्थितियों में टेस्टिंग टेस्टिंग में ही मरीज की राम नाम सत्य हो जाती है। इस सच्चाई से कोई इंकार भी नहीं कर सकता। टेस्टिंग की दुकानें डॉक्टर के सहारे ही तो चल रही हैं। जहाँ इन दोनों की कमाई और मरीज की जेब पर कैंची। अब तो हाल ये है कि हॉस्पिटल में भी बाहर से टेस्टिंग बताई गयी लैब से ही करवाने के लिए कहा जाता है।
भारत देश जो सृष्टि की रचना से लेकर आज तक देवी-देवताओं की अनोखी विविधताओं से फलीफूत है, जिसे पश्चिमी सभ्यता एवं आधुनिकता की अंधी आँधी ने अनदेखा कर दिया। आध्यात्मिक ज्ञान क्या होता है, उससे अज्ञान हैं। हमने मिसाइल एवं परमाणु आदि बनाने पर छाती चौड़ी कर रहे हैं, लेकिन भूल गए कि यह तो भारत में पहले ही से विराजमान हैं। उदाहरण है , रामायण और महाभारत का युग, जहाँ तीरों से आग के शोले निकलते थे, राजा दशरथ शब्दभेदी बाण चलाते थे। राजा दशरथ के बाद इस तकनीक में निपुण थे सम्राट पृथ्वीराज चौहान। इसी शब्दभेदी निपुणता से जल्लाद मोहम्मद गौरी द्वारा सम्राट पृथ्वीराज चौहान की दोनों आंखें फोड़ने के बाद राष्ट्रकवि चंद्र वरदाई की कविता ने चौहान को सिंहासन पर बैठे गौरी की गर्दन की दूरी और सिंहासन की ऊंचाई बताते ही सीधा गर्दन पर तीर मार 72 हूरों के पास भेज दिया था। फिर कवि चंद्र वरदाई ने सैनिकों के पास आने से पहले ही अपनी कटार निकाल पहले अपने सम्राट और फिर अपने मार दोनों स्वर्ग सिधार गए।
भारत में कई ऐसे शक्तिशाली मंदिर है जिनके बारे में जानकर आश्चर्य होता है। ये इंडिया है, और यहां कुछ भी हो सकता है। आए दिन कोई ना कोई चमत्कार सुनने को मिलते ही रहते हैं। अजब-गजब किस्से भी सुनने को मिलते ही रहते हैं। आप ने अनेको अनेक मन्दिर देखे होंगे. मन्दिरों में सबकी मन्नते भी पूरी होती है। उसके लिए आपको कई कठिन नियम का पालन करना पड़ता है। हम आपको एक ऐसे मन्दिर के बारे में बता रहे है जहाँ निःसंतान महिलाओं की सन्तान प्राप्त करने की इच्छा पूरी होती है।और इसके लिए कोई कठिन नियम का पालन भी नही करना पड़ता है. इस मन्दिर के फर्श पर सोने से ही महिलाओ को सन्तान की प्राप्ति होती है।
माँ सिमसा माता के नवरात्रे व मेले
सिमसा माता मंदिर के नवराते और मेले विश्व भर मे प्रिसिद्ध है। शारदा माता सिमस में नवरात्रो वः मेलो का आयोजन हर वर्ष दो बार होता है। 1 चैत्र माह जो की (मार्च-अप्रैल) में आते है. और 2 अश्विन माह जो की (सितंबर-अक्टूबर) में आते है। यहां नवरातो में बहुत से लोग माता रानी के दर्शन करने आते है। श्रद्धालु दूर - दूर से माँ सिमसा शारदा के मंदिर में पहुचते है। और ज्यादा कर महिलाए संतान प्राप्ति के लिए और माँ के आशीर्वाद के लिए इन्ही नवरातो में आती है। माता रानी निःसंतान महिलाओ की झोली भरती है। साथ ही साथ माता सभी भग्तजनो की मनोकामना पूरी करती है। यहाँ पे लोग अलग - अलग जगह से आते है जैसे कि बिहार, शिमला, कुल्लू,चंडीगढ़, दिल्ली आदि। मंदिर में दूर से आये लोगो के रहने व खाने की निशुल्क व्यवस्था मंदिर कमेटी द्वारा की जाती है । नवरात्रों में शारदा देवी का मंदिर बहुत ही सुंदर लगता है। माँ का मंदिर फूलो से सजाया जाता है। श्रद्धालु तो हर दिन आते रहते है।लेकिन नवरात्रो में भारी सख्यां में आते है और ये परम्परा सदियों से चलती आ रही है।
विविधाताओं के देश भारत में काफी कुछ ऐसा है जो वैज्ञानिक तर्कों से हट कर आस्था के चरम का कमाल नजर आता है।अब आप इसे ईश्वर में विश्वास कहें या अंधविश्वास पर ऐसे ही विज्ञान को हैरान करते चमत्कार की कहानी सुनाता है हिमाचल में स्थित सिमसा माता का मंदिर।
दरअसल भारत के इस मंदिर में यह मान्यता है कि यहां फर्श पर सोने से महिलाएं प्रेग्नेंट हो जाती …हम कोई मजाक नहीं कर रहे, ये हकीकत है। एक ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आपको बता रहें है जंहा निसंतान लोग संतान के लिए क्या क्या नहीं करते।
संतान दात्री मंदिर की मान्यता
ऐसा ही कुछ हिमाचल प्रदेश के एक गांव के मंदिर में होता है, हिमाचल के सिमस गांव में एक सिमसा माता का मंदिर है जिसके फर्श पर सोने से निसंतान महिलाऐ प्रगनेंट हो जाती है। वैसे तो महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए न जाने कैसे-कैसे कष्टो से गुजरती हैं, लेकिन यहां तो सिर्फ फर्श पर सोने मात्र से संतान की प्राप्ति हो जाती है।
यहां दूर दूर से महिलाऐ इस मंदिर के फर्स पर सोने के लिए आती है। इस मंदिर को संतान-दात्री के नाम से जाने जाता है। नवरात्रा में यहां सलिन्दरा उत्सव मनाया जाता है जिसका अर्थ है सपने आना, निसंतान महिलाये दिन रात इस मंदिर के फर्स पर सोती है। नवरात्रों में हिमाचल के पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से ऐसी सैकड़ों महिलाएं इस मंदिर की ओर रूख करती हैं जिनके संतान नहीं होती है।
सपने में आती है सिमसा माता
नवरात्रों में निसंतान महिलायें मंदिर परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती हैं माता सिमसा उन्हें सपने में मानव रूप में या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान का आशीर्वाद प्रदान करती है।
लोगो का मानना है की माता सिमसा सपने में महिलाओ को फल देती है और महिलाए सपने में माता से उस फल को लेती है। इसे यह संकेत मिल जाता है की माता ने संतान का का आशिर्वाद दे दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं होता इस फल से इस बात का पता चल जाता की महिलाओं लड़का होगा की लड़की।
मान्यता के अनुसार, यदि कोई महिला सपने में कोई कंद-मूल या फल प्राप्त करती है तो उस महिला को संतान का आशीर्वाद मिल जाता है। यहां तक की देवी सिमसा आने वाली संतान के लिंग-निर्धारण का भी संकेत देती है।
सपने में मिलता है महिला को फल
जैसे कि, यदि किसी महिला को अमरुद का फल मिलता है तो समझ लें कि लड़का होगा। अगर किसी को सपने में भिन्डी प्राप्त होती है, तो समझें कि संतान के रूप में लड़की प्राप्त होगी। यदि किसी को निसंतान होने, धातु, लकड़ी या पत्थर की बनी कोई वस्तु प्राप्त हो तो समझा जाता है कि उसके संतान नहीं होगी। और उसके बाद भी वो महिला उस मंदिर से नहीं जाती है तो उसके शरीर में खुजली भरे लाल लाल दाग दिखने लगते है। इसलिए उसे मजबूरन वहां से जाना पड़ता है।
केवल एक उंगली से हिलने वाली शिला
मंदिर के पास पत्थर हो हिलता है एक उंगली से
एक चमत्कार होता है यहां, सिमसा माता मंदिर के पास यह पत्थर बहुत प्रसिद्ध है। इस पत्थर को दोनों हाथों से हिलाना चाहो तो यह नही हिलेगा और आप अपने हाथ की सबसे छोटी ऊंगली से इस पत्थर को हिलाओगे तो यह हिल जायेगा।
कैसे पहुंचे सिमसा माता के मन्दिर
अगर आप हिमाचल प्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य के निवासी है तो हम आपको बता दे आपको सिमसा माता मंदिर पहुंचने के लिए आपको दिल्ली और चंडीगढ़ से बस में आना होगा| दिल्ली के महाराणा प्रताप बस अड्डे से आपको बैजनाथ के लिए बस पकड़नी होगी| दिल्ली से बैजनाथ के लिए वॉल्वो ए सी, डीलक्स और साधारण सभी प्रकार की बसे चलती है l दिल्ली से बैजनाथ से कुल दूरी लगभग 550 किलोमीटर है| बस यह दूरी पूरी करने में लगभग 13 घण्टे लगाती है| फिर बैजनाथ पहुंचकर आपको सिमसा माता के लिए लोकल बसें मिल जाएगी| सिमसा माता मंदिर बैजनाथ से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित है| ऐसे से चंडीगढ़ से आने के लिए आपको सेक्टर 43 के काउंटर नंबर 16 से बैजनाथ के लिए बस पकड़नी होगी| चंडीगढ़ से बैजनाथ की दूरी लगभग 350 किलोमीटर है|
केरल में एक मदरसे के मौलवी को अपनी बेटी के साथ रेप के मामले में तीन उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मल्लपुरम की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बलात्कारी अब्बा पर 6.6 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। बार-बार रेप के बाद लड़की गर्भवती हो गई थी। बाद में उसने गर्भपात करवा लिया था। मामले का खुलासा 2022 में हुआ, जब लड़की के गर्भवती होने का पता चला।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहली बार मार्च 2021 में मदरसे के मौलवी ने बेटी से रेप किया था। उस समय कोरोना की वजह से 15 वर्षीया पीड़िता अपने कमरे से ऑनलाइन पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसका अब्बा कमरे में घुसा और छेड़छाड़ करने लगा। बेटी ने विरोध किया तो मौलवी उसे जबरन खींचकर अपने बेडरूम में ले गया और उसके साथ दरिंदगी की।
विरोध किए जाने पर मौलवी ने अपनी बीवी को भी जान से मार डालने की धमकी दी। मार्च 2021 से अक्टूबर 2021 के बीच उसने कई बार बेटी को हवस का शिकार बनाया। नवंबर 2021 से स्कूल खुलने पर पीड़िता स्कूल जाने लगी। जनवरी 2022 में एक दिन अचानक उसके पेट में दर्द उठा। स्कूल स्टाफ पीड़िता को अस्पताल ले गए जहाँ उसके गर्भवती होने का खुलासा हुआ।
विरोध किए जाने पर मौलवी ने अपनी बीवी को भी जान से मार डालने की धमकी दी। मार्च 2021 से अक्टूबर 2021 के बीच उसने कई बार बेटी को हवस का शिकार बनाया। नवंबर 2021 से स्कूल खुलने पर पीड़िता स्कूल जाने लगी। जनवरी 2022 में एक दिन अचानक उसके पेट में दर्द उठा। स्कूल स्टाफ पीड़िता को अस्पताल ले गए जहाँ उसके गर्भवती होने का खुलासा हुआ।
अभियोजन पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि अस्पताल में लड़की ने स्कूल के स्टाफ से अपने अब्बा की करतूत बता दी थी। इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। पुलिस ने FIR दर्ज कर के लड़की के अब्बा को गिरफ्तार कर लिया। मदरसा टीचर पर पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज हुई थी। कुछ समय बाद मेडिकल परीक्षण कर लड़की के गर्भ को भी गिरा दिया गया। इस दौरान पुलिस ने जाँच के लिए पीड़िता के गर्भ से निकले भ्रूण के सैम्पल लिए थे।
भ्रूण के सैम्पल का मिलान लड़की के अब्बा से करवाया गया तो वह मैच कर गया। इस मामले की जाँच पुलिस अधिकारी अब्दुल बशीर कर रहे थे। पुलिस ने लड़की के साथ उसकी अम्मी के भी बयान दर्ज किए। इस मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया। आखिरकार अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को सही माना और मौलवी की हरकत को घृणित बताते हुए उसे 3 आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आदेश के मुताबिक रेपिस्ट को अंतिम साँस तक जेल में ही रहना होगा।
रिपोर्टिंग के दौरान गर्भवती हुई पत्रकार अफगानिस्तान में शरण लेने को हुई मजबूर (फोटो साभार: शार्लोट बेलिस का ट्विटर हैंडल ) न्यूजीलैंड (New Zealand) की पत्रकार शार्लोट बेलिस (Charlotte Bellis) अफगानिस्तान में फँस गई हैं। वह गर्भवती हैं, इसके बावजूद न्यूजीलैंड सरकार ने कोरोनो महामारी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उनकी वापसी का आपातकालीन आवेदन खारिज कर दिया है।
गर्भवती पत्रकार ने बताया कि उसके देश ने वापसी का आवेदन ठुकरा दिया है। इसकी वजह से उन्हें तालिबान (Taliban) से मदद माँगने को मजबूर होना पड़ा। बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ (The New Zealand Herald) में एक कॉलम लिखकर सबको अपनी आपबीती बताई। शनिवार (29 जनवरी 2022) को प्रकाशित कॉलम में उन्होंने लिखा, “अजीब विडंबना है कि पहले मैंने महिलाओं के प्रति बर्बरता दिखाने को लेकर तालिबान से सवाल पूछा था, लेकिन अब मैं यही सवाल अपनी सरकार से पूछ रही हूँ।”
@jimhuylebroek and I are back in Kabul. Get stopped walking in our street by a #Taliban member and asked who we are. We explain journalists and he says with a huge smile “I am GDI, that’s like the CIA but in #Afghanistan” and flashes an ammunition bandolier under his jacket.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलिस अल-जज़ीरा में बतौर संवाददाता काम करती थीं, जो कतर में स्थित है। बेलिस पिछले साल अल जजीरा के लिए काम करते हुए उन्हें अफगानिस्तान से तालिबान और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जुड़ी खबरों को दे रही थीं। अपने कॉलम में बेलिस ने कहा कि वह सितंबर में कतर लौटीं तो उन्हें पता चला कि वह अपने साथी और फ्रीलांस फोटोग्राफर जिम ह्यूलेब्रोक के साथ रहते हुए गर्भवती हो गई थीं।
जिम ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लिए काम कर रहे थे। बेलिस मई में एक बच्ची को जन्म देने वाली हैं। चूँकि, कतर में विवाहेतर यौन संबंध अवैध हैं, इससे बेलिस को लगा कि कतर छोड़ने में ही उनकी भलाई है। इसके बाद उन्होंने नागरिकों की वापसी से जुड़ी लॉटरी-शैली प्रणाली के जरिए बार-बार न्यूजीलैंड वापस जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
इसके बाद बेलिस ने नवंबर 2021 में अल जजीरा से इस्तीफा दे दिया और युगल ह्यूलेब्रोक के मूल देश बेल्जियम चली गईं, लेकिन वह वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं, क्योंकि वह वहाँ की निवासी नहीं थी। इस जोड़े के पास रहने के लिए सिर्फ अफगानिस्तान का वीजा था। इसके बाद बेलिस ने तालिबान के वरिष्ठ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर वह अफगानिस्तान लौटती हैं, तो वह ठीक रहेंगी।