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अविवाहित रिपोर्टर गई अफगानिस्तान में हो गई गर्भवती: महिला पत्रकार को एंट्री देने से न्यूजीलैंड का इनकार

रिपोर्टिंग के दौरान गर्भवती हुई पत्रकार अफगानिस्तान में शरण लेने को हुई मजबूर (फोटो साभार: शार्लोट बेलिस का ट्विटर हैंडल )
न्यूजीलैंड (New Zealand) की पत्रकार शार्लोट बेलिस (Charlotte Bellis) अफगानिस्तान में फँस गई हैं। वह गर्भवती हैं, इसके बावजूद न्यूजीलैंड सरकार ने कोरोनो महामारी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उनकी वापसी का आपातकालीन आवेदन खारिज कर दिया है।

गर्भवती पत्रकार ने बताया कि उसके देश ने वापसी का आवेदन ठुकरा दिया है। इसकी वजह से उन्हें तालिबान (Taliban) से मदद माँगने को मजबूर होना पड़ा। बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ (The New Zealand Herald) में एक कॉलम लिखकर सबको अपनी आपबी​ती बताई। शनिवार (29 जनवरी 2022) को प्रकाशित कॉलम में उन्होंने लिखा, “अजीब विडंबना है कि पहले मैंने महिलाओं के प्रति बर्बरता दिखाने को लेकर तालिबान से सवाल पूछा था, लेकिन अब मैं यही सवाल अपनी सरकार से पूछ रही हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलिस अल-जज़ीरा में बतौर संवाददाता काम करती थीं, जो कतर में स्थित है। बेलिस पिछले साल अल जजीरा के लिए काम करते हुए उन्हें अफगानिस्तान से तालिबान और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जुड़ी खबरों को दे रही थीं। अपने कॉलम में बेलिस ने कहा कि वह सितंबर में कतर लौटीं तो उन्हें पता चला कि वह अपने साथी और फ्रीलांस फोटोग्राफर जिम ह्यूलेब्रोक के साथ रहते हुए गर्भवती हो गई थीं।

जिम ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लिए काम कर रहे थे। बेलिस मई में एक बच्ची को जन्म देने वाली हैं। चूँकि, कतर में विवाहेतर यौन संबंध अवैध हैं, इससे बेलिस को लगा कि कतर छोड़ने में ही उनकी भलाई है। इसके बाद उन्होंने नागरिकों की वापसी से जुड़ी लॉटरी-शैली प्रणाली के जरिए बार-बार न्यूजीलैंड वापस जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद बेलिस ने नवंबर 2021 में अल जजीरा से इस्तीफा दे दिया और युगल ह्यूलेब्रोक के मूल देश बेल्जियम चली गईं, लेकिन वह वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं, क्योंकि वह वहाँ की निवासी नहीं थी। इस जोड़े के पास रहने के लिए सिर्फ अफगानिस्तान का वीजा था। इसके बाद बेलिस ने तालिबान के वरिष्ठ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर वह अफगानिस्तान लौटती हैं, तो वह ठीक रहेंगी।

किसान आंदोलन वापस लेने की मांग करने वाले हरनेक सिंह का शरीर खालिस्तानियों ने बनाया टांकों का जाल ; सिर में 150 टाँके, दाहिना कान गायब, पूरा शरीर जख्मी

                                         हरनेक सिंह न्यूजीलैंड के लोकप्रिय रेडियो जॉकी हैं 
भारत में चल रहे किसान आंदोलन के आयोजकों और समर्थकों को न्यूजीलैंड की इस खबर पर शायद ध्यान नहीं गया, या मोदी विरोध में उसे नज़रअंदाज़ कर दिया। जो बहुत ही शर्म की बात है।   

लगभग डेढ़ महीने पहले न्यूजीलैंड के रेडियो जॉकी हरनेक सिंह पर सिर्फ इसीलिए धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने किसानों से अपील की थी कि वो राजनीति से प्रेरित आंदोलन को वापस ले लें। हमले के वक़्त रात का अँधेरा था, लेकिन उन्होंने अपनी टोयोटा हिलक्स गाड़ी के दरवाजे लॉक कर लिए थे और मानसिक रूप से उन्होंने परिवार को अलविदा कह दिया था। उन्हें उस रात के बारे में कुछ खास याद नहीं।

वो दिसंबर 23, 2020 का दिन था, जब उन पर रात के 10:30 में हमला किया गया। जगह थी – ऑकलैंड ड्राइववे। उन्हें बस इतना याद है कि वो जोर-जोर से अपनी गाड़ी के हॉर्न को दबा रहे थे और खिड़कियों के शीशे बदमाशों द्वारा तोड़े जा रहे थे। बाद में उन्हें किसी ने ग्लेनरोस ड्राइव पर देखा। वो अपनी गाड़ी में ड्राइविंग सीट पर पड़े हुए थे, खून से लथपथ। रेडियो विरसा के ही उनके किसी साथी ने उन्हें देखा था।

                                        इलाज के बाद हरनेक सिंह के शरीर पर बिछा टाँकों का जाल
अब उनके शरीर को देख कर लगता है कि टाँकों का जाल बिछा दिया गया है। हमला ऐसे धारदार और नुकीले हथियारों से किया गया था कि उनकी उँगलियों से लेकर कुहनी तक माँस उधेड़ दिया गया। उनकी छाती और कंधे भी चीर डाले गए थे। वहाँ भी टाँके लगे हैं। हरनेक सिंह ने बताया कि डॉक्टरों ने अब उन्हें घर जाने को कह दिया है और उन्होंने कहा कि अब सब ठीक है। लेकिन, खतरा अभी टला नहीं है।

                                                          हाथ में भी हुआ था गहरा जख्म
पुलिस ने उन्हें सावधान रहने को कहा है, क्योंकि उन पर फिर से हमला किया जा सकता है। वो शारीरिक रूप से तो अब स्वस्थ होने की ओर अग्रसर हैं, भले ही कुछ निशान हमेशा के लिए उनके शरीर पर रह जाएँ। लेकिन, मानसिक रूप से वो अब भी उस घटना को याद करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिजन और रिश्तेदार डरे हुए थे। उन्होंने हौसला दिखाने के लिए अपनी पत्नी की भी तारीफ की।

                                              मिडिलमोर अस्पताल में 3 हफ़्तों बाद निकले हरनेक सिंह
उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी पिछले 20 वर्षों से उनके साथ रह रही हैं और उन्हें उनकी ज़रूरतों और प्रतिबद्धताओं के बारे में बखूबी पता है। लेकिन, जब उनकी पत्नी ने उन्हें 1.5 घंटे तक हमले के दिन हुई घटनाओं के बारे में बताया तो वो भी सिहर उठे। रविवार (जनवरी 21, 2021) को इस मामले में 6 लोगों पर हत्या के आरोप तय किए गए। अस्पताल में रहने के दौरान भी उन पर हमले की आशंका बनी हुई थी।

इसीलिए, जिस कमरे में वो दाखिल थे उसके बाहर लगातार सिक्योरिटी गार्ड्स का पहरा लगाया गया था। उनके सिर से लेकर नीचे तक सैकड़ों स्टीट्चेस लगाए गए हैं। उनका दाहिना कान तो लगभग कट गया है। वहीं अकेले सिर में ही 150 टाँके हैं। उनके दिमाग के कामकाज को लेकर उनका मेमोरी टेस्ट किया गया, जिसमें वो सफल रहे। हाथों की नसों को कितना नुकसान पहुँचा है, ये कुछ दिनों बाद पता चलेगा।

इस साल उन पर ये दूसरा हमला था। जुलाई 2020 में भी उनके जन्मदिन के दिन ही ‘लव पंजाब’ रेस्टॉरेंट में उन पर हमला किया गया था। हरनेक सिंह के साथी बलविंदर ने बताया कि वो उनके भाई के समान हैं और सिख समुदाय की सामाजिक और धार्मिक स्थितियों को लेकर अक्सर चर्चा में मशगूल रहा करते थे। साथ ही वो न्यूजीलैंड के सिख समुदाय की भलाई के लिए भी प्रयासरत थे। हरनेक धार्मिक गलतफहमियों को दूर करने के लिए भी रेडियो शो में बातें किया करते थे।

‘राजनीति से प्रेरित किसान आंदोलन वापस लो’ – जिस सिख रेडियो जॉकी ने यह कहा, उन्हें धारदार हथियार से कई बार गोदा

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में बतौर रेडियो जॉकी कार्यरत हरनेक सिंह पर हमला करने के बाद उन्हें कई बार धारदार हथियार से गोदा गया, जिसके बाद वो अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। न्यूजीलैंड की मीडिया ने इस हमले को मजहबी कट्टरता से प्रेरित बताया है। उन पर दिसंबर 23, 2020 को हमला किया गया। 53 वर्षीय हरनेक सिंह रात के 10:30 बजे रेडियो शो से लौट रहे थे, तभी उन पर ये हमला हुआ।

इस साल उन पर ये दूसरा हमला है। जुलाई 2020 में भी उनके जन्मदिन के दिन ही ‘लव पंजाब’ रेस्टॉरेंट में उन पर हमला किया गया था। हरनेक सिंह के साथी बलविंदर ने बताया कि वो उनके भाई के समान हैं और सिख समुदाय की सामाजिक और धार्मिक स्थितियों को लेकर अक्सर चर्चा में मशगूल रहा करते थे। साथ ही वो न्यूजीलैंड के सिख समुदाय की भलाई के लिए भी प्रयासरत थे। उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया।

बलविंदर ने बताया कि ये हमला रेडियो पर उनके द्वारा कही गई बातों के विरोध में किया गया है, ऐसा लगता है। उन्होंने कहा कि हरनेक सिंह की सोच और विचारों को लेकर रोष के कारण ये हमला हुआ। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलन को वापस लेने की अपील की थी, जिसमें तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग की जा रही है। हरनेक धार्मिक गलतफहमियों को दूर करने के लिए भी रेडियो शो में बातें किया करते थे।

उनके दोस्त ने बताया कि ये हमला ऐसे मजहबी कट्टरपंथियों ने किया है, जो धर्म को मिथकों में देखता हो और उसे वास्तविकता में कोई रुचि न हो। उनकी पत्नी ने बताया कि उनकी हालत अभी स्थिर है। उनकी सर्जरी भी की गई है। न्यूजीलैंड की पुलिस ने कहा है कि इस मामले में और जाँच की जा रही है। उन पर हुए हमले के बाद रेडियो स्टेशन को भी सैकड़ों कॉल और मैसेजों के द्वारा धमकियाँ मिल रही हैं।

उनके साथियों ने बताया कि हरनेक सिंह सिर्फ धर्म पर ही बातें नहीं किया करते थे, बल्कि सिख समुदाय कैसे पीछे छूट रहा और और क्या सामाजिक समस्याएँ हैं, उनके क्या निदान हो सकते हैं – इन सब पर चर्चा किया करते थे। वो बदलाव की बातें किया करते थे। उनके सिख मित्रों ने कहा कि कुछ लोग अभी भी 100 वर्ष पीछे जीना चाहते हैं और हरनेक सिंह ऐसे लोगों को सही रास्ते पर लाना चाहते थे।

उधर विवादित ‘किसान आंदोलन’ के बीच में पंजाब में तीसरी बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर सांसद बने रवनीत सिंह बिट्टू ने मोदी सरकार को धमकाते हुए कहा है कि वो सोचते हैं कि हम यहाँ पर बैठे हैं इतने दिनों से तो बैठे-बैठे थक जाएँगे। उन्होंने कहा, “1 तारीख (जनवरी 1, 2020) के बाद हम लाशों के भी ढेर लगाएँगे। हम अपना खून भी देंगे। हम इसके लिए कहीं भी, किसी भी हद तक जा सकते हैं।”


ओडिशा : फेथ आउटरीच : नाबालिक के यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप में 68 वर्षीय जॉन पैट्रिक ब्रिटिश मिशनरी गिरफ्तार

ब्रिटिश मिशनरी ने नाबालिक के साथ किया यौन शोषण
जॉन पैट्रिक ब्रिज (साभार : प्रगतिवादी)
ओडिशा के झारसुगुडा ज़िले में इंग्लैंड का 68 वर्षीय मिशनरी शेल्टर होम और आवासीय विद्यालय चलाता है। उस व्यक्ति पर एक बच्चे के यौन शोषण का आरोप लगा था। जिसके संबंध में पुलिस ने बुधवार (19 अगस्त 2020) को उसे गिरफ्तार कर लिया। जिस बच्चे के साथ यह घटना हुई है वह शेल्टर होम का ही रहने वाला है।
फेथ आउटरीच ओडिशा संस्थापक जॉन पैट्रिक ब्रिज ने जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जिसे अदालत ने बुधवार(अगस्त 19) को ठुकरा दिया और आरोपित जॉन पैट्रिक को जेल भेज दिया गया है। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण संबंधी अधिनियम (POSCO Act) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।  
स्थानीय समाचार समूहों संवाद और प्रगतिवादी ने इस मुद्दे पर विस्तार से ख़बर प्रकाशित की है। इस घटना की शिकायत एक ऐसे युवक ने की थी जो फेथ आउटरीच संस्था संचालित एक शेल्टर होम में रहता था। वह साल 2015 तक इस शेल्टर होम में रहता था और तब वह नाबालिक था। जॉन पैट्रिक ने इस संस्था का गठन लगभग 25 साल पहले किया था। प्रगतिवादी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जॉन पर पहले भी इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। 
जॉन पैट्रिक और उसकी पत्नी
साभार – फेथ आउटरीच उड़ीसा
इसके पहले उस पर एक न्यूज़ीलैंड के नागरिक ने इस तरह के ही आरोप लगाए थे। और तो और यह आरोप न्यूज़ीलैंड दूतावास से लगाए गए थे। जॉन इंग्लैंड में पैदा हुआ था और साल 1977 में भारत आया। इस दौरान उसने अपनी तमिल पत्नी के साथ मिल कर सामाजिक समूह फेथ आउटरीच, उड़ीसा शुरू किया। शुरुआत में केवल 4 बच्चे ही इस अनाथालय में रहते थे लेकिन अब यह एक बड़ा संगठन बन चुका है। फिलहाल इसमें लगभग 800 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं। इसके अलावा कुल 4 डे केयर सेंटर भी चलते हैं जिसमें लगभग 250 बच्चे रहते हैं। इसमें से अधिकांश बच्चे गरीब और वंचित घर परिवारों से आते हैं।
जॉन के शेल्टर होम में हर उम्र के बच्चे रहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चे भी मौजूद हैं। उसने अपनी पत्नी के साथ मिल कर काफी संख्या में बच्चों को ईसाई धर्म कबूल कराया है। उसके शेल्टर होम और डे केयर सेंटर में रहने वाले ज़्यादातर बच्चे गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों से आते हैं। उसे साल 1992 में भारत की नागरिकता मिली थी। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। 

पुलवामा आतंकी हमला: रूस ने कहा, मसूद अजहर को बैन करो

पुतिन ने दिया साथ पाकिस्‍तान पर पुलवामा आतंकी हमले के बाद दबाव बढ़ता जा रहा है तो यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) पर भी अब जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। अब भारत के करीबी और पिछले कई दशकों से रणनीतिक साझेदार रहे, रूस ने यूएन से मांग की है कि अजहर को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किया जाए। फरवरी 19 को फ्रांस, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की ओर से इसी तरह की बात कही गई थी। इन देशों ने कहा था कि वे, यूएन में अजहर को आतंकी घोषित करने वाला प्रस्‍ताव पेश करेंगे।
पुतिन ने दिया साथ 

रूस के मंत्री डेनिस मानटुरोव ने कहा है कि रूस, आतंकवाद की लड़ाई में हमेशा भारत के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा। डेनिस ने यह बात उस समय कही जब उनसे पूछा गया था कि क्‍या वह यूएनएससी में अजहर को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित करने वाले प्रस्‍ताव पर भारत का समर्थन करेंगे। डेनिस ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमेशा भारत का समर्थन किया जाएगा। इससे पहले रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन ने भी पुलवामा हमले पर बड़ा बयान दिया था।पीएम मोदी को दिलाया भरोसा 
हमले के बाद पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजा था। पुतिन ने मोदी से कहा था, 'इस हमले पर हमारी संवेदनाएं स्‍वीकार करें जिसमें जम्‍मू कश्‍मीर में भारत की सेनाओं के जवानों ने अपनी जान गंवा दी है।' पुतिन ने कहा था कि रूस इस हमले की कड़ी निंदा करता है। इस हमले के साजिशकर्ताओं को निश्चित तौर पर सजा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्‍होंने दोहराया था कि भारत के साथ मिलकर काउंटर-टेररिज्‍म सहयोग को और मजबूत करने के लिए तैयार है।
अमेरिका ने फिर फटकारा 

पाक को फरवरी 20 को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से भी पुलवामा हमले पर बयान दिया गया है। ट्रंप ने इस हमले को डरावना बताया है। साथ ही कहा है कि वह इस हमले में एक विस्‍तृत बयान जारी करेंगे। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से कहा गया है कि पाकिस्‍तान हमले की जांच में सहयोग करे और साजिशकर्ताओं को सजा दे।
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इस वेबसाइट का परिचय
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बीकानेर के जिला कलेक्टर ने बीकानेर में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक....

न्‍यूजीलैंड और फ्रांस भी समर्थन में 
रूस से पहले न्‍यूजीलैंड और फ्रांस की ओर से भी हमले की निंदा की गई है। इन देशों ने भी पाकिस्‍तान से कहा है कि वह साजिशकर्ताओं पर एक्‍शन ले। 14 फरवरी को जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ कॉन्‍वॉय पर हुए इस सुसाइड अटैक को जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था।