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पुतिन से मुलाकात के बाद बेलारूस के राष्ट्रपति अस्पताल में भर्ती, विपक्षी नेता ने जताई जहर देने की आशंका: प्रेसीडेंट ने ‘अफवाह’ को खारिज किया

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से मुलाकात के तुरंत बाद बेलारूस (Belarusian) के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको (Alexander Lukashenk) को गंभीर हालत में मॉस्को के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बेलारूस के विपक्षी नेता वालेरी त्सेपल्को दावा किया है पुतिन के साथ बंद दरवाजे में बैठक के बाद राष्ट्रपति लुकाशेंको को सेंट्रल क्लिनिकल अस्पताल ले जाया गया। बेलारूसी राष्ट्रपति को पुतिन के करीबी नेताओं के रूप में जाना जाता है, जो यूक्रेन पर उनके हमले का समर्थन कर रहे थे।

त्सेपल्को इस घटना के सिलसिले में शनिवार (27 मई 2023) से कई ट्वीट कर चुके हैं। उन्होंने ही ट्वीट करके बेलारूस के राष्ट्रपति के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी। उन्होंने इस बारे में सोमवार (29 मई 2023) को भी ट्वीट किया। त्सेपल्को ने लिखा “हमारी जानकारी के अनुसार, लुकाशेंको मॉस्को के सेंट्रल क्लिनिकल हॉस्पिटल में कई दिन से हैं। लुकाशेंको की स्थिति और अस्पताल में रहने के बारे में हमें आखिरी जानकारी शनिवार को मिली थी। डॉक्टरों ने उन्हें हवाई जहाज से यात्रा करने के लिए मना किया था। इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें कब, कैसे और किस तरह मिन्स्क (बेलारूस की राजधानी) पहुँचाया गया था, क्योंकि डॉक्टरों ने नॉनडिस्क्लोजर पेपर पर हस्ताक्षर किए थे।”

इससे पहले त्सेपल्को ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा था, “शुरुआती जानकारी के अनुसार, लुकाशेंकों को पुतिन के साथ बंद कमरे में मीटिंग के बाद तत्काल मॉस्को के क्लिनिकल अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल वह वहाँ चिकित्सकीय देखरेख में है। बेलारूस के राष्ट्रपति की गंभीर हालत के चलते ‘प्रमुख विशेषज्ञ’ उनकी देखरेख कर रहे हैं। उनका खून साफ किया जा रहा है। लुकाशेंको इस हालत में नहीं हैं कि उन्हें एक से दूसरी जगह ले जाया जा सके।”

वालेरी ने लुकाशेंको को जहर देने की आशंका भी जताई है। उन्होंने दावा किया कि बेलारूस के तानाशाह को बचाने के प्रयास इसलिए किए जा रहे हैं, ताकि किसी को शक न हो। पिछले कुछ समय से लुकाशेंको के स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें चल रही हैं। इस महीने की शुरुआत में लुकाशेंको मॉस्को में विक्ट्री डे परेड के तुरंत बाद रूस से निकल गए थे। उन्होंने पुतिन के साथ दोपहर का लंच भी नहीं किया था।

 मैं मरने वाला नहीं हूँ दोस्तों: लुकाशेंको

वहीं, बीते दिनों कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि लुकाशेंको काफी थके हुए दिख रहे थे और उनके दाहिने हाथ पर बैंडेज लगा हुआ था। हालाँकि, बाद में उन्होंने (लुकाशेंको) यह कहते हुए इन अफवाहों को खारिज कर दिया था, “अगर किसी को लगता है कि मैं मरने वाला हूँ, तो शांत हो जाइए। मैं मरने वाला नहीं हूँ दोस्तों। आपको आने वाले लंबे समय तक मेरे साथ संघर्ष करना होगा।”

रूसी हमले में फँसी उत्तर प्रदेश की ग्राम प्रधान वैशाली यादव की कुर्सी पर खतरा

                   यूपी की ग्राम प्रधान वैशाली यादव यूक्रेन में कर रही एमबीबीएस की पढ़ाई (फोटा साभार: न्यूज 18)
रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युुद्ध (Russia Ukraine War) ने उत्तर प्रदेश की एक ग्राम प्रधान की कुर्सी पर खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल, पिछले साल ग्राम प्रधान चुनी गई 24 साल की वैशाली यादव यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं। यह बात तब सामने आई जब 24 फरवरी को उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह फँसे छात्रों की मदद के लिए सरकार से गुहार लगा रही थी। वैशाली फिलवक्त इवानो फ्रैंकिव्स्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हरदोई के सांडी ब्लॉक के तेरापुरसेली की रहने वाली वैशाली यादव पूर्व ब्लॉक प्रमुख महेंद्र यादव की बेटी हैं। पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों में वैशाली यादव गाँव आई। उन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और इसमें जीत भी दर्ज कर ली। प्रधानी का चुनाव जीतने के बाद वह अपनी पढ़ाई के लिए वापस यूक्रेन चली गई। इस बात जानकारी गाँव में किसी को नहीं थी। जब यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यह बात सामने आई तो गाँव के लोग हैरान रह गए।

वैशाली के इस तरह गाँव छोड़कर विदेश में रहने को लेकर पंचायती राज विभाग ने कथित तौर पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा है। यह बात भी सामने आई है कि वैशाली के यूक्रेन में रहने के बावजूद उनके काम हुआ और इस दौरान कुछ धन का भी इस्तेमाल किया गया। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज विभाग उनकी अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत द्वारा उपयोग किए गए धन की जाँच करेगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए वैशाली ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहाँ गोलीबारी में फँस जाऊँगी। मैंने MBBS के लिए यूक्रेन को इसलिए चुना क्योंकि इसकी डिग्री यूरोपीय संघ में कहीं भी प्रैक्टिस के लिए स्वीकार्य है। मुझे अभी घर वापस जाने के लिए फ्लाइट चाहिए।”

वीडियो कॉल के जरिए मीटिंग करना

दिसंबर 2021 मे, अमर उजाला ने वीडियो कॉल के माध्यम से ग्राम पंचायत की बैठकों में भाग लेने के लिए वैशाली की ‘तारीफ’ की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि यादव अपने गाँव तेरा पुरसाली को यूक्रेन के गाँवों की तर्ज पर विकसित करना चाहती हैं। हरदोई जिले और लखनऊ से स्कूली पढ़ाई करने वाली वैशाली पिछले तीन साल से यूक्रेन में MBBS कर रही हैं।
पिछले साल उन्होंने अपने पिता और पूर्व ब्लॉक प्रसिडेंट महेंद्र सिंह यादव के सामने ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। हालाँकि उनके पिता इस बात से सहमत नहीं थे, क्योंकि वह चाहते थे कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे। इसके लिए वैशाली को वापस यूक्रेन लौटना था। मगर वैशाली ने जोर देकर कहा कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्राम पंचायत की बैठकों में भाग ले सकती है और यूक्रेन में अपनी पढ़ाई जारी रख सकती है।
हालाँकि अमर उजाला की रिपोर्ट में कहा गया कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस आना चाहती थी और अपने गाँव की बेहतरी के लिए काम करना चाहती थी, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो वैशाली ने यूक्रेन को इसलिए चुना क्योंकि इसकी डिग्री यूरोपीय संघ में स्वीकार्य है।

हमले से पहले चेतावनी पर यूक्रेनी सैनिकों ने ललकारा, रूस ने 13 को उड़ाकर किया आइलैंड पर कब्जा

                                                       स्नैक आइलैंड (फोटो साभार: आजतक)
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia Ukraine War) के दूसरे दिन शुक्रवार (25 फरवरी) को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडमिर जेलेंसकी ने बंकर में शरण ले ही है। रूस के सरकारी चैनल रशिया टुडे का दावा है कि कीव के नजदीक रूसी सेना के पहुँचते ही राष्ट्रपति को बंकर में ले जाया गया। वहीं, रूस विरोधी हैकरों ने रूस की कई सरकारी वेबसाइट को निशाना बनाया है।

खबर यह है कि अमेरिका ने यूक्रेन के सीमा के निकट रोमानिया में अपने F35 फाइटर जेट को तैनात कर दिया है। हालाँकि, गुरुवार (24 फरवरी) को ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया कि यूक्रेन की सेना की मदद के लिए वह अमेरिकी सेना को नहीं भेजेंगे। उधर इटली ने यूक्रेन का समर्थन किया है और कहा कि नाटो की ताकत को बढ़ाने के लिए वह अपने सैनिक भेजने को तैयार है।

वहीं, रूस के विदेश के मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन के सैनिक युद्ध करना बंद कर दे तो रूस यूक्रेन के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। हालाँकि, रूस सरेंडर करने के कतई तैयार नहीं दिख रहा है। उसके सैनिक भी बहादुरी के साथ मुकाबला कर रहे हैं। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें रूस के चेतावनी के बावजूद यूक्रेन के सैनिक पीछे नहीं हटे और रूस का निशाना बनकर शहीद हो गए।

सोशल मीडिया वीडियो में दिख रहा है कि चेतावनी के बाद 13 यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी सेना को ललकारते हुए कहा कि ‘भांड़ में जाओ’ और अपने हथियार डालने से इनकार करते हुए मारे गए। आत्मसमर्पण करने पर रूस के युद्धपोत से इन पर हमला किया गया और स्नेक आइलैंड के रूप में भी पहचाने जाने वाले द्वीप पर तैनात इन यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो गई। इस हमले के बाद रूस ने स्नेक आइलैंड को भी अपने कब्जे में ले लिया है।

स्नेक आइलैंड यूक्रेन के दक्षिण में काला सागर में स्थित है और इसे Zmiinyi Island के नाम से भी पहचाना जाता है। हमले से पहले चेतावनी देते हुए रूसी सैनिकों ने कहा कि यह रूस का युद्धपोत है और आप लोग अपने हथियार रखकर आत्मसमर्पण कर दें, ताकि किसी भी तरह का रक्तपात न हो। रूसी सैनिकों ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो बम बरसाए जाएँगे। इसके जवाब में यूक्रेनी सैनिकों ने सरेंडर करने से साफ मना कर दिया और रूसी अधिकारियों को कहा, Go F**k Yourself (जाओ अपनी….)।

इस हमले के बाद रूस ने अपने युद्धपोत को Moskva और Vasily Bykov आईलैंड की तरफ भेजा है। इस घटना के बाद यूक्रेन ने इन 13 सैनिकों को ‘Hero of Ukraine’ सम्मान से सम्मानित किया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, “रूस ने यूक्रेन के Zmiinyi (Snake) आईलैंड पर कब्जा कर 13 बॉर्डर गार्ड्स को मार दिया है। उन्होंने सरेंडर करने से मना कर दिया था। उनको ‘Hero of Ukraine’ सम्मान से सम्मानित किया जाता है।”

इमरान खान की पुतिन से मुलाकात पड़ी भारी: US फेडरल रिजर्व ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक पर लगाया 55 मिलियन डॉलर का जुर्माना

पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा चल रहे ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के बीच रूस में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक (NBP) और इसकी न्यूयॉर्क ब्रांच पर $55 मिलियन का जुर्माना लगाया है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार, यूएस फेडरल रिजर्व और न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा यह जुर्माना एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का उल्लंघन करने पर लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने 20.4 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है तो वहीं न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक ने $35 मिलियन का भुगतान करने के लिए कहा है। 4 मार्च, 2021 को की गई जाँच के आधार पर जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि NBP ने 16 मार्च, 2016 को ‘कमियों’ को ठीक करने के लिए अधिकारियों के साथ एक लिखित समझौता किया था। हालाँकि, हाल की जाँच में पाया गया है कि NBP ‘लिखित समझौते के प्रत्येक प्रावधान का पूर्ण अनुपालन करने’ में विफल रहा है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चूँकि पाकिस्तान का नेशनल बैंक अमेरिकी कानूनों का पालन करने में विफल रहा है। यूएस फेडरल रिजर्व ने एनबीपी को कॉरपोरेट गवर्नेंस और मैनेजमेंट ओवरसाइट में सुधार करने का आदेश दिया है। रिजर्व बैंक ने एनबीपी से आदेश के 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों को लागू करने की माँग की है। इसमें NBP को दस दिनों के भीतर एक अधिकारी को नामित करने के लिए भी कहा है जो रिजर्व बैंक की लिखित योजनाओं को ‘कोऑर्डिनेट और सबमिट करने के लिए जिम्मेदार’ होगा। इस बीच, NYDFS के अधीक्षक एड्रिएन ए हैरिस ने घोषणा की कि NBP और उसकी न्यूयॉर्क शाखा द्वारा लगाए गए दंड का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई है। 

इमरान खान बुधवार (24 फरवरी 2022) को दो दिवसीय यात्रा पर रूस पहुँचे। हालाँकि, मॉस्को पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद, रूसी राष्ट्रपति ने पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ का आदेश दिया। वर्तमान हालात में व्लादिमीर पुतिन और इमरान खान की मुलाकात के सामरिक मायने निकाले जा रहे हैं। बाद में व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में प्रधानमंत्री खान के साथ आमने-सामने बैठक की। 

चर्च के सामने ‘ओरल सेक्स’ : रूस की अदालत ने कहा – धार्मिक भावनाएँ भड़काई

                            रूस में टिकटॉकर और उसकी गर्लफ्रेंड ने दिया अश्लील पोज
रूस में एक चर्च के सामने अश्लील पोज देने के लिए एक टिकटॉकर और उसकी गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों को 10 महीने जेल में काटने होंगे। इन्होंने राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर स्थित एक कैथेड्रल चर्च के बाहर ‘सेक्स एक्ट’ की नकल की। तजाकिस्तान मूल के टिकटॉकर रुस्लन मरोडझाओनजोडा और रूस की अनास्तासिया चिस्तोवा को मॉस्को की ‘Tverskoi’ अदालत ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का दोषी मानते हुए सज़ा सुनाई।

इन दोनों ने मॉस्को के सेंट बेसिल कैथेड्रल चर्च के बाहर ओरल सेक्स करने की नकल उतारी थी। बता दें कि रूस में इन चीजों को लेकर सख्त नियम-कानून हैं और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के काल में ऐसी हरकतों पर सज़ा का सख्त प्रावधान है। इन दोनों को सितंबर 2021 में ही गिरफ्तार किया गया था। इन्होंने जो तस्वीरें पोस्ट की थीं, उनमें देखा जा सकता है कि रुसलन चर्च के सामने खड़े हैं और उनकी गर्लफ्रेंड अनास्तासिया घुटनों के बल उनके कमर तक झुकी हुई हैं।

इन्होंने अपनी तस्वीर का कैप्शन दिया था – ”The Labor Code is not the Criminal [Code], you can break it’. साथ ही महिला को इस तस्वीर में रूस की पुलिस का जैकेट पहने हुए भी देखा जा सकता है। इस तस्वीर को पोस्ट करने के 10 दिनों बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया था। ब्लॉगर ने इसके लिए माफ़ी माँगी थी और $71 (5244 रुपए) का जुर्माना भी भरा था। अदालत ने कहा कि इन दोनों ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत कर के समाज का अपमान किया है।

जहाँ रुस्लन सोशल मीडिया पर प्रैंक वीडियो के लिए जाने जाते हैं, उनकी गर्लफ्रेंड एक इंस्टाग्राम मॉडल है। जेल की सज़ा काटने के बाद टिकटॉकर को तजाकिस्तान डिपोर्ट किया जा सकता है। 2012 में तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही पुतिन ने रूस की परंपरा को प्रमोट करने की घोषणा की थी। रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च और पुतिन के बीच अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस जोड़े की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।

रूस : पति की हत्या कर लाश के साथ सेक्स, शव के टुकड़े-टुकड़े कर उँगलियाँ चूहों को खिला दी

                      मरीना कोखल ने अपने रैपर पति की हत्या कर पिया खून (फोटो साभार: The Sun US)
रूस में एक रैपर की विधवा पर आरोप लगा है कि उसने न सिर्फ अपने पति की हत्या की थी, बल्कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर के उसका खून भी पिया। पति एंडी कार्टवाइट की हत्या के मामले में पत्नी मरीना कोखल को कस्टडी से छोड़ दिया गया है, लेकिन वो हाउस अरेस्ट में है। अपने पति की हत्या की वो मुख्य आरोपित है। 37 वर्षीय मरीना को अगस्त 2020 में गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पाया गया था कि उसने अपने पति की लाश के साथ सेक्स भी किया था।

मरीना ने अपनी माँ 68 वर्षीय एलेना कोखल के साथ मिल कर खतरनाक जहर देकर एंडी कार्टवाइट की हत्या कर दी थी। हालाँकि, रूस की जाँच एजेंसियाँ अपनी गलती मानती हैं कि वो अब तक ये साबित करने में नाकाम रही हैं। मरीना ने हत्या के लिए इन्सुलिन की टेबलेट खरीदी थी, जिसे ट्रेस करना भी मुश्किल हो। इसका उपयोग डायबिटीज में किया जाता है। इसके बाद इन टेबलेट्स का ओवरडोज अपने पति को दे दिया। मृतक का असली नाम अलेक्जेंडर युष्को है, जो मूल रूप से यूक्रेन का था।

जाँच में पता चला है कि हत्या से पहले रैपर का प्रेम सम्बन्ध उनकी 25 वर्षीय ग्लैमरस फैन नाडिया रोमानेंको के साथ चल रहा था। जाँच एजेंसियों के पास इसके सबूत तो हैं कि मरीना ने ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया, लेकिन अदालत में साबित करने लायक साक्ष्य उनके पास नहीं है। मरीना ने अपने पति की लाश के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए चाकू और आड़ी का सहारा लिया। ये बात मरीना ने स्वीकार की है। लेकिन, उसका कहना है कि उसने ऐसा इसीलिए किया ताकि फैंस को ये पता न चले कि रैपर की मौर ड्रग ओवरडोज से हुई है।

बकौल मरीना कोखल, मीडिया में इस बात का फैलना अपमानजनक होता, इसीलिए उसे मजबूरन ऐसा करना पड़ा। हत्या की बात को वो लगातार नकार रही है। लाश के टुकड़ों को उसने फ्रिज व अन्य जगहों पर रखा था। आरोप है कि रैपर की उँगलियों को चूहों को खिला दिया गया। इस जोड़े का एक 4 वर्षीय बेटा भी है। कस्टडी से रिहाई के बाद मरीना मुस्कराती हुई दिखी। कुछ लोगों ने उसे रोते हुए अपने वकील को गले लगाते भी देखा। शरीर के 8 अंगों को वॉशिंग मशीन में डालने का भी आरोप है।

क्या अजीत डोभाल के पास है तालिबान का तोड़? MI6, सीआईए चीफ और रूस के NSA क्यों लगा रहे भारत का चक्कर?

अफगानिस्तान में तालिबान ने अंतरिम सरकार का ऐलान कर दिया है। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सरकार शरिया के हिसाब से चलेगी। तालिबान की वापसी के बाद से ही लगातार जिस तरह की खबरें सामने आ रही है उससे कट्टरपंथ के हावी होने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। ऐसे में अब भारत तालिबान के खिलाफ वैश्विक रणनीति का केंद्र बनता नजर आ रहा है। खासकर, तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के खिलाफ घर में ही विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं।

रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ और ब्रिटिश एजेंसी एमआईए-6 के मुखिया के भारत दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। रूसी एनएसए निकोले पेत्रुशेव दो दिन के भारत दौरे पर हैं। उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ चर्चा की है। इससे पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ बिल बर्न्स की डोभाल के साथ बैठक हुई थी। रिपोर्टों की माने तो बर्न्स और डोभाल के बीच बातचीत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और अफगानिस्तान के हालात पर केंद्रित थी। बर्न्स की यात्रा क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भों में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भारत और अमेरिका के लिए बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है।

सूत्रों के अनुसार बैठक में अफगानिस्‍तान की वर्तमान राजनीतिक, सुरक्षा और मानवीय स्थिति तथा जैश-ए-मोहम्‍मद और तश्‍कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी गुटों की गतिविधियों सहित नशीले पदार्थों से उत्‍पन्‍न खतरे और इस संबंध में क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष वर्तमान और भविष्‍य के खतरों तथा संकट से जूझ रहे अफगानिस्‍तान को सहायता दिए जाने के उपायों पर भी विचार करेंगे। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेनाओं के निकलने और तालिबान द्वारा सत्‍ता पर कब्‍जा होने से उत्‍पन्‍न समस्‍त परिस्थितियों के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा। दोनों ही पक्ष अफगानिस्‍तान में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में भी विचार-विमर्श करेंगे। आतंकवाद के बारे में भी दोनों ही देशों को समान चिंता है। विशेषकर तालिबान द्वारा किये गये वायदों और आश्‍वासनों को सुनिश्चित बनाए जाने के बारे में भी दोनों देश चिंतित हैं।

पिछले महीने की 24 तारीख को प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों देशों द्वारा शिष्‍टमंडलीय विचार-विमर्श का आयोजन किया गया है। दोनों नेताओं ने विचार व्‍यक्‍त किया कि दोनों ही सामरिक भागीदारों को मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए और इस संबंध में दोनों देशों के वरिष्‍ठ अधिकारियों को भी अफगान मुद्दे की जानकारी होनी चाहिए और एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए।

पंजशीर पर फतह के तालिबानी दावे के बाद ही काबुल, मजार-ए-शरीफ और जरांज में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। पाकिस्तान का भी अफगानी नागरिक विरोध कर रहे हैं। माना जाता है कि पंजशीर में भी पाकिस्तानी सेना ने तालिबान की मदद की थी। साथ ही तालिबानी सरकार के गठन में भी उसकी भूमिका बताई जाती है। अंतरिम सरकार के ऐलान से पहले पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया फैज हमीद ने काबुल का दौरा भी किया था।

रक्षा विश्लेषक नितिन गोखले ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के दौरे को लेकर ट्वीट कर कहा है कि सीआईए प्रमुख और रूस के ताकतवर सुरक्षा प्रमुख का एक ही समय में दौरा करना इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को लेकर काफी कुछ कहता है। इन दोनों के दौरे से पहले एमआई-6 के मुखिया रिचर्ड मूर भारत आए थे। गोखले ने लिखा है कि पिछले सप्ताह हुए इस दौरे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन कोई भी अनुमान लगा सकता है कि बदले हालात में वे भारत से क्या चाहते होंगे।

आशंका जताई जा रही है कि तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर सकता है। यही कारण है कि रूसी एनएसए के भारत दौरे से पहले 24 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बात की थी।

ब्रिक्स वर्चुअल सम्मेलन से पहले भी अफगानिस्तान पर चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगले सप्ताह होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन भी इसी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो सकता है। जिस तरह तालिबान की अंतरिम सरकार में वैश्विक आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह​मंत्री बनाया गया है, उसने पूरी दुनिया की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हक्कानी अमेरिका की हिट लिस्ट में भी शामिल है।

‘किसी भी खेल से पहले सेक्स करने से आती है विस्फोटक शक्ति’: 3 स्विमिंग गोल्ड मेडलिस्ट रूस की शिश्किना

साभार: इंस्टाग्राम
तीन बार की ओलंपिक चैम्पियन रही रूस की अल्ला शिश्किना (32) ने सेक्स को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्विमिंग चैम्पियन शिश्किना ने कहा है कि किसी भी प्रतिस्पर्धा से पहले सेक्स करना आपके प्रदर्शन को काफी बेहतर बना देता है। शिश्किना ने दावा किया है कि बढ़ी हुई उत्तेजना से टेस्टोस्टेरोन महिलाओं की मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।

वैसे शिश्किना ने कोई नयी बात नहीं कही, स्मरण हो, पिछले विश्व चैंपियन ट्रॉफी में खिलाडियों से कहीं अधिक खेल स्थल एवं होटलों में मिले कंडोम समाचार चर्चा में थे। लेकिन उस समय किसी खिलाडी का विशेष रूप से नाम सामने नहीं आने की वजह से बात ज्यादा उछलने की बजाए दब गयी थी। 

अल्ला शिश्किना ओलंपिक खेलों के बाद रूसी मीडिया आउटलेट स्पोर्ट एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया। शिश्किना ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के डॉक्टर से इस बारे में बात की थी कि सेक्स करने पर उनके प्रदर्शन पर क्या असर पड़ सकता है।

एथिलीट ने कहा, “सेक्स को लेकर मैंने डॉक्टरों के शोध पर भरोसा किया और हमारी टीम के डॉक्टर डेनिस से इसको लेकर सलाह भी ली। वैज्ञानिक समुदाय का कहना है कि अगर आपको विस्फोटक शक्ति की आवश्यकता है तो आपको सेक्स अवश्य करना चाहिए।” शिश्किना के मुताबिक, “हर जीव की अपनी खासियतें होती हैं। इसलिए सबसे पहले खुद को सुनने की जरूरत है। इसके बाद अगर आपको लगता है कि सेक्स आपकी मदद करता है तो आगे बढ़ें।” 

ज्ञात हो कि शिश्किना ने टोक्यो ओलंपिक में वीमेंस संक्रोनाइज स्विमिंग में गोल्ड मेडल जीता है।

ऑर्गेज्म के बिना सेक्स प्रतियोगिता में करता है मदद

रूसी खिलाड़ी का कहना है कि किसी भी प्रतियोगिता से पहले ऑर्गाज्म के बिना सेक्स करना उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है, जिन्हें मांसपेशियों में ताकत की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन तथाकथित ‘खेल क्रोध’ और ‘आक्रामकता’ के लिए भी ज़िम्मेदार है। अगर आपको लगता है कि यह रवैया आपको बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है, तो सेक्स से दूर रहने की आवश्यकता है।
मॉस्को में जन्मी ओलंपियन इस मिथक को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों को लगता है कि बड़े स्तन पानी के ऊपर टिके रहने में मदद करते हैं, वे गलत हैं। एथिलीट ने कहा, “बड़े स्तनों के कारण ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।” हालाँकि, बड़े स्तन वाली महिलाओं द्वारा सर्जरी कराने पर असहमति जताते हुए खिलाड़ी ने कहा कि लोगों को ऐसे व्यायाम करने चाहिए, जिनसे मांसपेशियाँ मजबूत हों।

'इंडियन एक्सप्रेस' ने भारत-रूस रिश्ते को लेकर चलाई फेक न्यूज़, पुतिन प्रशासन ने लगाई लताड़

भारत-रूस रिश्ते को लेकर देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में से एक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने झूठ फैलाया है, जिसका रूसी दूतावास ने खंडन किया। रूसी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “भारतीय मीडिया के एक बड़े प्रकाशन संस्थान के सूत्र गुमराह करने वाले सूत्रों से प्रेरित प्रतीत होते हैं।” ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने दावा किया था कि रूस ने भारत को बातचीत से बाहर रखा है, ऐसे में अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान शांति बैठक में भारत को शामिल किया है।

इस खबर में अप्रत्यक्ष रूप से इशारा किया गया था कि भारत और रूस के रिश्ते बिगड़ रहे हैं और रूस ने भारत के साथ बातचीत बंद कर दी है। खबर में बताया गया था कि अमेरिकी स्टेट सेकेट्री एंटोनी ब्लिंकेन ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को लिखे पत्र में कहा है कि अमेरिका, भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और ईरान को मिल कर इस मामले पर बात करनी चाहिए। अफ़ग़ानिस्तान के लिए ‘यूनिफाइड एप्रोच’ के लिए ऐसा करने को कहा गया।

लेकिन, रूस का कहना है कि भारत के साथ उसके रिश्ते मधुर हैं और बातचीत रुकी ही नहीं है। रूस ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को फटकार लगाते हुए कहा, “भारत-रूस के बीच हमेशा से नजदीकी सम्बन्ध रहे हैं और दोनों भविष्य को देखते हुए वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साथ मिल कर कार्य करते रहे हैं। अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति भी अपवाद नहीं है।” रूस ने भारतीय मीडिया में चल रहे झूठ को बेनकाब किया।

रूसी दूतावास ने लिखा, “द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में कई बार इस साझेदारी पर जोर दिया गया है, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान कॉन्टैक्ट ग्रुप और मॉस्को कन्सल्टेशन्स शामिल हैं। अफ़ग़ानिस्तान समझौते की जटिलता को देखते हुए एक क्षेत्रीय आम-राय की तरफ आगे बढ़ना और अमेरिका समेत सभी साझेदारों के साथ तालमेल बिठाना काफी ज़रूरी है। दोहा में यूएस-तालिबान के बीच हुए समझौते को यूएन सुरक्षा परिषद ने मान्यता दी थी।”

रूस ने कहा कि वो भी इसी समझौते के हिसाब से आगे बढ़ रहा है। रूस ने इस बात पर जोर देते हुए दोहराया कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत का एक बहुत बड़ा किरदार है और इसके लिए समर्पित वार्ताओं में इसकी भागीदारी स्वाभाविक है। रूसी दूतावास ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें ‘रूस द्वारा भारत को वार्ता से बाहर रखने’ का दावा किया गया था। साथ ही हैडिंग के उस हिस्से को लाल रंग से प्रदर्शित किया।

इससे पहले ‘द प्रिंट’ इसी तरह की हरकत कर चुका है। ‘द प्रिंट’ ने दावा किया था कि QUAD राष्ट्रों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) से रूस खफा है, इसीलिए पिछले 20 वर्षों में पहली बार भारत-रूस की वार्षिक समिट नहीं होगी। क्रेमलिन ने इस खबर को गलत बताते हुए इसे ‘फेक न्यूज़’ और सनसनी पैदा करने के लिए लिखी गई खबर करार दिया था। रूस ने कहा था कि भारत क्षेत्रीय एकता के समावेशी रूप को बढ़ावा दे रहा है, वो तारीफ के लायक है।

फ्लाइट में अंडरवियर उतारने के आरोप में महिला को सीट से बांध लैंड होते ही गिरफ्तार

                                      फ्लाइट में बाँधी गई महिला (बाएँ), थाने में पूछताछ (दाएँ)
जमीन से दसियों हजार फ़ीट ऊपर उड़ रही एक फ्लाइट में एक यात्री को पकड़ कर रस्सियों से बाँधना पड़ा। न तो वो यात्री कोई आतंकी था और न ही कोई अपराधी। असल में वो एक महिला थी, जो बार-बार अपना अंडरवियर उतार दे रही थी। रूस की इस फ्लाइट में उक्त महिला की हरकतों के बाद उसे रस्सियों और टेप की मदद से सीट से बाँध दिया गया। बताया जा रहा है कि 39 वर्षीय महिला ने ड्रग्स ली हुई थी।

जैसे ही हवाई जहाज ऊपर उड़ा, महिला अपने सीट से उठ गई और बिना किसी काम के इधर-उधर घूमने लगी। वो केबिन में मँडरा रही थी। फ्लाइट के व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) से उड़ान भरने के 15 मिनट के भीतर ही उसने ये हरकतें शुरू कर दी। उसने अपने कपड़े उतार लिए और फिर उन्हें पहन लिया। खुद की सुरक्षा और महिला की सुविधा के लिए अन्य यात्रीगणों ने फ्लाइट अटेंडेंट्स के साथ मिल कर उसे उसकी सीट से बाँध दिया।

फ्लाइट के भीतर फुटेज भी वायरल हो गया, जिसमें उक्त महिला को सीट से बाँधा हुआ देखा जा सकता है। फ्लाइट जब तक नोवोसिबर्स्क (Novosibirsk) के तोलमचेवो (Tolmachevo) एयरपोर्ट पर नहीं उतर गई, तब तक उसे बाँध कर ही रखा गया। वहाँ लैंड करते ही महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। थाने में पूछताछ के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि फ्लाइट में चढ़ने से पहले उसने सिंथेटिक ड्रग्स ली थी।

एक अन्य वीडियो में उसे अपने हैंडबैग से कुछ चीजें निकाल कर पुलिस को दिखाते हुए देखा जा सकता है। ड्रग्स का उसके शरीर पर कितना प्रभाव हुआ है, इसकी जाँच के लिए उसका मेडिकल टेस्ट भी किया गया। इंटीरियर मंत्रालय ने बताया कि उसके खिलाफ ‘तुच्छ उपद्रव’ का मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आगे मामले की जाँच कर रही है। सोशल मीडिया पर ये महिला खासी वायरल हो रही है। 

फेक न्यूज़ फ़ैलाने पर ThePrint को रूसी विदेश मंत्रालय से पड़ी लताड़

शेखर गुप्ता का ‘द प्रिंट’ अब ग्लोबल हो गया है। अब सिर्फ स्थानीय मामले ही नहीं, बल्कि वैश्विक और कूटनीतिक मामलों में भी उसने झूठ और प्रपंच फैलाना शुरू कर दिया है। इस कारण रूस के विदेश मंत्रालय ने उसे जम कर लताड़ लगाई है। ‘द प्रिंट’ ने दावा किया था कि QUAD राष्ट्रों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) से रूस खफा है, इसीलिए पिछले 20 वर्षों में पहली बार भारत-रूस की वार्षिक समिट नहीं होगी।

रूस के विदेश मंत्रालय ने इस खबर को गलत बताते हुए इसे ‘फेक न्यूज़’ और सनसनी पैदा करने के लिए लिखी गई खबर करार दिया। रूस के विदेश मंत्रालय ने लिखा कि दिसंबर 23, 2020 को ‘द प्रिंट’ में आए एक लेख में गलत बातें फैलाई गई, क्योंकि इस मीडिया संस्थान के पीछे जो लोग हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि इससे 2 दिन पहले भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदेशव ने भारत-रूस के द्विपक्षीय और वैश्विक रिश्तों की संपूर्ण समीक्षा की थी।

क्रेमलिन ने कहा कि भले ही कोरोना वायरस संक्रमण के कारण भारत-रूस के बीच होने वाली बैठकों और एनुअल समिट के शेड्यूल में देरी हो गई है, लेकिन ये दोनों देशों के बीच के रिश्तों को बेहतर करने में कोई बाधा नहीं बन सका। यही बात राजदूत ने भी कही थी। रूस ने तभी स्पष्ट कहा था कि जिस तरह से कुछ देशों द्वारा एकता भंग किए जाने की कोशिशों के बावजूद भारत क्षेत्रीय एकता के समावेशी रूप को बढ़ावा दे रहा है, वो तारीफ के लायक है।

                                 रूस के विदेश मंत्रालय ने ‘द प्रिंट’ को फटकारा

रूसी विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी साफ़ किया है कि एनुअल समिट में देरी की वजह कोविड-19 वैश्विक महामारी है, कुछ और नहीं। इसके लिए दोनों देशों में सहमति बनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया। रूस ने कहा कि अब जब भारत के साथ उसके रिश्तों को लेकर हर जगह सकारात्मक बातें हो रही हैं, ‘द प्रिंट’ शून्य से सेंसेशन फैलाने की कोशिश कर रहा है।

रूस ने ‘द प्रिंट’ को गलत हेडलाइंस की जगह तथ्यों के आधार पर ख़बरें तैयार करने की नसीहत दी। साथ ही कहा कि वो अटेंशन पाने के लिए इस तरह की हरकतें न करे। इससे पहले भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदशेव (Nikolay Kudashev) ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी और शेखर गुप्ता की प्रोपेगेंडा मशीनरी ‘दी प्रिंट’ को भारत और रूस के संबंधों के बारे में अफवाह फैलाने पर फटकार लगाते हुए इसे वास्तविकता से एकदम हट कर बताया था।

कुदशेव ने लिखा था, “रूस और भारत के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी कोविड-19 के बावजूद अच्छी प्रगति कर रही है। हम महामारी के कारण स्थगित किए गए शिखर सम्मेलन के लिए नई तारीखें तय करने के लिए अपने भारतीय दोस्तों के साथ संपर्क में बने हुए हैं। हमें विश्वास है कि यह जल्दी आयोजित किया जाएगा, जबकि रूसी भारतीय संबंध अपने आगे के विकास को जारी रखेंगे।”

चर्च की वेदी पर लिटा कर ननों से रेप, मार डाले सारे पादरी: बातु खान की हँसती फौज और जिंदा जले लोगों की कहानी

                              रियाज़ान और मंगोलों के युद्ध का एक दृश्य (बाएँ), बातु खान (दाएँ)
पूरी दुनिया के ईसाई क्रिसमस के खुमार में डूबे हैं। लेकिन इससे पहले की कुछ कड़वी यादें भी हैं। जिस ब्रिटिश राज में क्रिसमस दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ, इस्लामी आक्रांताओं के राज में इसी दौरान कभी खून की नदियाँ बही थी। पश्चिमी रूस में एक शहर है रियाज़ान (Ryazan), जो ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है। लेकिन, आज भी ये शहर बातु खान का नाम सुनते ही थर्रा उठता है। मंगोलों का हमला बुरी यादों में बसा है।

रियाज़ान के बारे में बता दें कि ये रूस की राजधानी मॉस्को से 196 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में ओका नदी के किनारे स्थित है। इसके बगल में ही पुराना रियाज़ान स्थित है, जो रूस का पहला शहर था जिसे मंगोलों ने तबाह किया। आज साढ़े 5 लाख की जनससंख्या वाला रियाज़ान सेन्ट्रल रूस के 5 बड़े शहरों में से एक है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र को जर्मनी की बमबारी का भी सामना करना पड़ा था। उससे सैकड़ों वर्ष पहले बातु खान के नेतृत्व में मंगोलों ने रियाज़ान पर हमला किया था।

रियाज़ान के बारे में बता दें कि ये रूस की राजधानी मॉस्को से 196 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में ओका नदी के किनारे स्थित है। इसके बगल में ही पुराना रियाज़ान स्थित है, जो रूस का पहला शहर था जिसे मंगोलों ने तबाह किया। आज साढ़े 5 लाख की जनससंख्या वाला रियाज़ान सेन्ट्रल रूस के 5 बड़े शहरों में से एक है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र को जर्मनी की बमबारी का भी सामना करना पड़ा था। उससे सैकड़ों वर्ष पहले बातु खान के नेतृत्व में मंगोलों ने रियाज़ान पर हमला किया था।

बात उस समय की है, जब पूरी दुनिया में मंगोल सबसे शक्तिशाली लड़ाका हुआ करते थे और चंगेज खान का नाम सुनते ही सब काँप उठते थे। जिस शहर में वो घुसता, वहाँ के लोगों के पास दो ही विकल्प होता था- या तो उसकी सेना में शामिल हों, या फिर मारे जाएँ। हाँ, महिलाओं के पास कोई विकल्प नहीं होता था। चंगेज खान ने खुद अपने जीवनकाल में दसियों हजार महिलाओं का बलात्कार किया था। मुग़ल तैमूर और चंगेज खान के ही वंशज थे।

अपने सबसे बड़े बेटे जोची की मौत के बाद चंगेज खान ने ‘Golden Horde (उत्तर-पूर्वी मंगोल साम्राज्य)’ का हिस्सा अपने पोते और जोची के बेटे बातु खान को दे दिया। सन 1227 में चंगेज खान की मौत हो गई और वोल्गा नदी के पश्चिमी इलाके पर बातु खान का राज हुआ, जबकि वोल्गा से लेकर दुनिया के सबसे बड़े झीलों में से एक बलख़श तक उसके भाई ओरडा ने शासन किया। इसके बाद मंगोलों ने यूरोप की ओर कदम बढ़ाए।

बातु खान के आक्रमण के डेढ़ दशक पहले के रूस के इतिहास लेखकों से पता चलता है कि इस अचानक आक्रमण के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं था कि ये कौन लोग हैं, कहाँ से आ धमके हैं और किस मजहब का पालन करते हैं। तब के रूसी इतिहासकार लिखते हैं कि भगवान या बहुत विद्वान लोगों को ही पता है कि ये अनजान लोग कौन हैं। वहाँ के जनजातियों ने कई राजाओं से मदद माँगी। रूस के कई इलाकों के शासकों ने कालका नदी के किनारे मंगोलों से युद्ध लड़ा, लेकिन वो हार गए।

ये सब चंगेज खान के जिंदा रहते हुआ था। अब बारी उसे पोते बातु खान की थी। वो 40,000 की सेना के साथ निकला और सबसे पहले बुल्गारिया को अपने अधीन किया। इसके बाद उसने व्लादिमीर के यूरी-II को संदेशा भेजा कि वो मंगोलों की अधीनता स्वीकार करे। तत्पश्चात उसने रियाज़ान में कदम रखा। इसके बाद जो तबाही मचाई गई, उसकी यादें लोकगीतों और लोककथाओं के रूप में रूस में आज भी सुनाई जाती हैं।

सन 1237 में वो पतझड़ का मौसम था, जब कड़ी ठण्ड में भी मंगोल आक्रांताओं की लड़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता था और वो एक के बाद एक साम्राज्यों को जीतते जा रहे थे। वोरोझेन नदी के किनारे रियाज़ान की रक्षक सेना के साथ मंगोलों का युद्ध हुआ और उन्हें हरा कर वो आगे बढ़ निकले। वहाँ के लोग जीवट थे, उन्होंने मंगोलों के पहले हमले को नाकाम कर दिया। इसके बाद मंगोलों ने उन्नत किस्म के विशाल गुलेलों का प्रयोग किया।

इससे रियाज़ान की रक्षात्मक संरचनाएँ ध्वस्त हो गईं। वो 21 दिसंबर 1237 का दिन था जब शहर में बातु खान के नेतृत्व में मंगोल घुसे। पूरे शहर में आग लगा दिया गया। सब कुछ धू-धू कर जल उठा। प्रिंस यूरी और उसके परिवार पर हमला कर दिया गया। उस समय वहाँ की जनसंख्या क्या थी, इसका अंदाज़ा तो नहीं है, लेकिन इतना ज़रूर कहा जाता है कि पूरे शहर में एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा था। सारे के सारे मार डाले गए।

मंगोलों के छोटे घोड़ों (Poneys) के लिए बर्फ की परत सख्त होती थी और वो उस पर सरपट भागते थे। उन घोड़ों को बर्फ को खोद कर घास निकालने का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे उन्हें भोजन मिलता था। मंगोल सिल्क के कपड़े पहना करते थे और ऐसे कई Poneys रखा करते थे। अंग्रेजों के तीरों से उनके छोटे तीरों का रेंज कुछ अधिक होता था। वो एक इलाका जीतने के बाद तबाही की खबर आगे तक पहुँचने देते थे, तब आगे बढ़ते थे।

इससे दुश्मन कमजोर होता था। 1237 के क्रिसमस से पहले मंगोलों की सेना रियाज़ान के सबसे बड़े चर्च में घुसी। वहाँ का मुख्य बिशप भाग खड़ा हुआ। प्रिंस यूरी की माँ और पत्नी सहित पूरे परिवार को मार डाला गया। वहाँ जितने भी पादरी थे, उन सभी को आग में झोंक दिया गया। रूस के तब के इतिहासकार कहते हैं कि न जाने उन्होंने कौन सा पाप किया था कि शहर में एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा।

होली चर्च में ननों के साथ एक-एक कर बलात्कार किया गया। जब आग से जलते हुए लोग चिल्ला रहे थे, तब मंगोल ताली बजा-बजा कर हँस रहे थे। जहाँ चर्च में सारी धार्मिक प्रक्रियाएँ होती हैं, उसी वेदी पर ननों को लिटा कर उनके साथ बलात्कार किया गया। मंगोलों को अब रूस को अधीन करने में कोई रुचि नहीं थी क्योंकि वो जानते थे कि अब वो किसी की भी हत्या कर सकते हैं, कुछ भी लूट सकते हैं।

780 years ago #otd the Old #Ryazan started its heroic defense from the horde of Batu khan. The siege lasted for 5 days & nights. Then the town was looted & burned down…thus the Mongol-Tatar invasion began… #history #heroes #oldryazan pic.twitter.com/XPfnVVN4nz

— Ryazan City (@Ryazan1095) December 16, 2017

1915 और 1979 में रियाज़ान के पुराने शहर की खुदाई हुई, जिसमें 97 कटे हुए सिर मिले। इसके अलावा कई बड़े कब्रिस्तान मिले, जिनमें से 143 लाशें निकाली गईं। ये सभी तभी मारे गए थे, जब वहाँ मंगोलों का हमला हुआ था। रूसी इतिहासकार लिखते हैं कि रोने और शोक मनाने तक के लिए कोई नहीं बचा था। मंगोल यहीं नहीं रुके, बल्कि वो और आगे बढे और रूस व ब्लादिमीर के कई क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा जमाया।

प्रिंस फेडोर ने बातु खान को खरीदने की भी कोशिश की थी। वो कई गिफ्ट लेकर उसके पास पहुँचा था, लेकिन बातु खान की जिद थी कि उसे एक ही गिफ्ट चाहिए और वो है प्रिंस यूरी की पत्नी। बातु खान मजाक नहीं कर रहा था, उसने मौके पर ही प्रिंस फेडोर को मार डाला। इसके बाद हंगरी, रोमानिया और पोलैंड पर उसने हमला किया। लेकिन, 1237 की क्रिसमस और बातु खान रूस की कड़वी याद बन गया।

‘Boycott Islam’ लिख कर फँस गईं तस्लीमा नसरीन, कांग्रेस के साकेत गोखले ने दर्ज कराई शिकायत

बांग्‍लादेश की जानी-मानी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन के खिलाफ शिकायत दर्ज किया गया है। यह शिकायत कांग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने दर्ज करवाई है। साकेत ने तस्लीमा के खिलाफ भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की कोशिश करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

तस्लीमा नसरीन ने 29 अक्टूबर 2020 को अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें ’बॉयकॉट इस्लाम’ लिखा था। विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी के समक्ष दायर शिकायत में कहा गया है कि नई दिल्ली में वीजा पर रहने वाली तस्लीमा नसरीन (स्वीडन की नागरिक) ने वीजा मानदंडों का व्यापक उल्लंघन करते हुए अपने ट्वीट के माध्यम से भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया है। 

गोखले ने गृह मंत्रालय के वीजा विंग और एफआरआरओ को लिखे अपने पत्र में कहा कि नसरीन का ट्वीट ‘हमारे देश में सांप्रदायिक विद्वेष और नफरत फैलाने का एक कुत्सित और जानबूझकर किया गया प्रयास’ है। शिकायत में आगे कहा गया है, “यह नोट किया जा सकता है कि किसी भी तरह के वीजा पर रहने वाले विदेशियों को देश में उनके निवास के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है।” गोखले ने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया।

तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में ट्व‍िटर पर लिखा था, “इस्लाम धर्म में सुधार की जरूरत है, नहीं तो आधुनिक सभ्‍यता में इस धर्म के लिए कोई जगह नहीं है।” इसके पहले तस्लीमा ने ट्व‍िटर पर ही लिखा था, “बॉयकॉट इस्‍लाम।”

तस्लीमा नसरीन के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडि‍या में खासा बवाल हुआ। जहाँ इस्‍लामि‍क कट्टरपंथियों ने उनकी आलोचना की तो बाकी लोग खुलकर उनके समर्थन में आए। दरअसल, तस्लीमा लगातार खुलकर इस्‍लाम की बुराइयों और इस धर्म की खामियों के बारे में बात करती हैं।

हाल ही में फ्रांस में पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून को लेकर चल रहे विवाद पर भी वे खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं। वे लगातार ट्वीट करती हैं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को आइना दिखाती रहती हैं। तस्लीमा पाकिस्‍तान मूल के तारेक फतेह की तरह ही इस्‍लाम की बुराइयों की आलोचना करती हैं और भारत की पैरवी करती रही हैं।

29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। स्थानीय समयानुसार यह घटना लगभग 11:15 बजे हुई थी यानी फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद।

इस सन्दर्भ में व्लाडीमीर पुतिन का अब तक का सबसे संक्षिप्त भाषण भारत में कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण पुजारियों, छद्दम धर्म-निरपेक्षता का झंडा उठाने वालों और गंगा-जमुनी तहजीब का राग-अलाप कर जनता को गुमराह करने वालों को ध्यान से पढ़ना चाहिए कि किस तरह विश्व मुस्लिम कट्टरवाद के विरुद्ध एकजुट होना शुरू हो रहा है -

व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति रूसी संसद को सम्बोधन में रूस के अल्पसंख्यक के साथ तनाव पर कहा -

रूस में रूसियों की तरह रहें। कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय जो कहीं से हो, यदि उसे रूस में रहना है, यहाँ काम करना है, आहार लेना है तो रूसी भाषा में बोलना होगा, रूस के कानूनों का सम्मान करना होगा। यदि वे शरीयत नियमों को वरीयता देना पसंद करते हैं एवं मुस्लिम जीवन शैली में जीना चाहते हैं तो उन्हें हमारा सुझाव है कि वे उन स्थानों पर जायें जहाँ यह राजकीय कानून है। 

यही बात कुछ वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कही थी, जिसका किसी में विरोध करने का साहस नहीं हुआ। आज उसी बात को व्लादिमीर पुतिन ने भी स्पष्ट शब्दों में कह दिया, जबकि भारत में नागरिकता संशोधक कानून पर अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों को बचाने जनता को गुमराह कर जगह-जगह शाहीन बाग़, धरने और प्रदर्शनों में हिन्दू और हिन्दुत्व को कलंकित करने का भरपूर प्रयास किया। 

रूस को अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की आवश्यकता नहीं है। अल्पसंख्यकों को रूस की आवश्यकता है, हम किसी तरह के विशेषाधिकार उन्हें नहीं देते, और न ही हम अपने कानूनों में ऐसे बदलाव लायेंगें जो उनकी अपेक्षावों पर खरे हों, चाहे वो ऊंची से ऊंची आवाज में इसे 'भेदभाव' कहें। रूसी संस्कृति की अवमानना हमें किसी भी रूप में स्वीकार नही है। हमें यदि एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहना है तो हमें अमेरिका, इंग्लैंड, होलैंड और फ्रांस में हुये आतंकी हमलों से सीख लेने की आवश्यकता है। मुसलमान उन देशों का अधिग्रहण कर रहे हैं लेकिन वे रूस के साथ ऐसा नहीं कर पाएंगे। 

रूसी रिवाजें एवं परंपरायें का मुकाबला असंस्कारी और आदिम मुस्लिम शरीयत नियमों के साथ नहीं किया जा सकता। 

जब भी यह सम्माननीय वैधानिक निकाय नये नियमों के सृजन का विचार करे तो उसे रूस के राष्ट्रीय हितों को प्रथम वरीयता में रखना है, यह ध्यान में रखते हुए कि मुस्लिम अल्पसंख्यक रूसी नही है। 

रूसी संसद के राजनेताओं ने पुतिन का खड़े होकर 5 मिनटों तक अभिवादन किया। 

रूस : 16 साल के युवक ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले को पुलिस ने किया ढेर

                                                   प्रतीकात्मक 
आज विश्व में जिस तरह इस्लाम का विरोध हो रहा है, उससे भारत में तुष्टिकरण पुजारियों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों को अपनी आंखें खोलने की जरुरत है। विश्व इस्लाम नहीं बल्कि कट्टरपंथी के विरुद्ध एकजुट हो रहा है। चीन तो काफी समय से इस्लाम के ही विरुद्ध है, लेकिन किसी में चीन के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं। कुछ वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट कह दिया कि "जिसे रहना है देश के कानून के अनुसार रहना होगा, वरना देश छोड़कर जा सकता है।" फिर ब्रिटेन में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पुलिस के घुसने में हो रही अड़चनों को देख वहां भी सख्ती कर दी गयी है। और अब फ्रांस। भारत की तरह वहां कोई पार्टी सरकार के निर्णय के विरुद्ध नहीं बोल रही क्योंकि कोई पार्टी राष्ट्रहित के खिलाफ नहीं बोलती। नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हुए धरनों और प्रदर्शनों में किस तरह हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी हुई, किसी छद्दम सेक्युलरिस्ट में बोलने का साहस नहीं हुआ, करो हिन्दू और हिन्दुत्व को कलंकित। ये है भारत के छद्दम सेक्युलरिस्ट्स का सेकुलरिज्मवाद।  

लेकिन भारत में कुर्सी की खातिर विपक्ष दुश्मन से हाथ मिलाने को तैयार रहता हैं। रूस में जिस तरह पुलिस पर हमला करने वाले को 72 हूरों के पास भेजा है, काश भारत में हुआ होता, सारे तुष्टिकरण पुजारी, छद्दम धर्म-निरपेक्ष, सेक्युलरिस्ट, #intolerance, #not in my name, #mob lynching, #award vapsi और गंगा-जमुनी तहजीब राग अलापते अराजकता फ़ैलाने सडकों पर उतरकर उन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हंगामा कर रहे होते। परन्तु वहां कोई नहीं बोला।          

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर फ्रांस से उठा विवाद अब पूरे विश्व तक फैलता दिखाई दे रहा है। अब रूस से एक खौफनाक घटना सामने आई है। यहाँ 16 साल के लड़के ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिस वाले पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना के बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपित पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय मीडिया के अनुसार 16 साल के युवक ने 3 बार पुलिसकर्मी पर चाकू से वार किए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हमलावर का नाम विटले अंतीपोव था।

रूसी समाचार एजेंसी Interfax के मुताबिक नाबालिग हमलावर चाकू और पेट्रोल बम से लैस था। पुलिसवालों को मारने की नियत से उसने पीछे से उन पर तीन बार ‘अल्लाह-हू-अकबर’ बोलते हुए उन पर वार किया। इस दौरान लड़के ने पुलिसवालों को ‘काफिर’ भी कहा था। घटना रूस के तातारस्तान (Tatarstan) के कुकमोर (Kukmor) क्षेत्र का है।

रूस के इस इलाके में सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या रहती है। फ्रांस के खिलाफ यहाँ भी लोगों ने काफी उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं घटना पर संज्ञान लेते हुए रूस की जाँच एजेंसी ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार दिया है। साथ ही मामले में जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।

जाँचकर्ताओं ने कहा कि 16 साल के युवक ने जिला पुलिस भवन में आग लगाने की कोशिश की थी। वहीं गिरफ्तार होने के दौरान उसने पुलिस अधिकारी को चाकू मार दिया। हमला करते वक़्त युवक ने- “मैं आप सभी को मारने जा रहा हूँ” चिल्लाया था। घायल पुलिसवाले को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

फ्रांस में कुछ दिनों पहले एक शिक्षक का गला काट दिया गया था। शिक्षक की ‘गलती’ सिर्फ इतनी कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून क्लास के बच्चों को दिखाया था।

घटना से गुस्साए लोगों ने इसका जमकर विरोध किया, धीरे-धीरे पूरे विश्व में इसकी चर्चा होने लगती है। लोगों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों इस्लामी कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकने का कठोर संदेश देते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों का यह संदेश इस्लामी कट्टरपंथी लोगों को चुभ जाता है जगह-जगह विरोध होने लगते हैं। फिर यह हिंसा का रूप धर लेती है। कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए लोगों का गला काटा जाता है तो कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाती भीड़ जमा होती है। और फिर कोई पैदल चल रहे राहगीरों पर कार चढ़ा देता है। इस विरोध में कई बेगुनाह लोग अब शिकार हो रहे है।

जर्मनी में प्रदर्शनकारियों ने राहगीरों को रौंदा 

आज की घटना से पहले 29 अक्टूबर, 2020 यानी कल जर्मनी के केंपेन शहर में कार से पैदल चल रहे लोगों को कुचला जाता है, उसके ठीक पहले बर्लिन में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ जमा होती है जो ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्ला रही होती है और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का विरोध कर रही होती है। केंपेन में कार से पैदल यात्रियों के रौंदे जाने की घटना में एक की मौत हो गई है जबकि 3 बुरी तरह घायल हैं। स्थानीय पुलिस अभी जाँच कर रही है कि क्या यह भी किसी आतंकी का कारनामा है या सिर्फ एक दुर्घटना।

नीस में इस्लामिक नारा लगाते हत्या की 

 फ्रांस के नीस शहर में आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में 3 लोगों की जान गई और कई घायल हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

जेद्दाह में सुरक्षाकर्मी पर हमला 

 एक और कट्टरपंथी प्रयास सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में हुआ था। जहाँ सऊदी अरब के फ्रांसीसी दूतावास में तैनात सुरक्षाकर्मी पर धारदार हथियार से हमला किया गया। जानकारी के अनुसार घटना घटित होने के कुछ ही समय बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। यह घटना भी फ्रांस के नीस शहर स्थित एक चर्च में तीन लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ घंटों बाद हुई थी।

फ्रांस में आतंकी हमले को लेकर सोशल मीडिया पर लोग मुस्लिम कट्टरपंथियों के प्रति नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। आप भी देखिए…

आखिर महातिर मोहम्मद से अवॉर्ड वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है?

कांग्रेस ने मलयेशिया के जिस पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को जवाहर लाल नेहरू सम्मान दिया, वो खुलेआम कत्लेआम का समर्थन करता है। जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का विरोध करता है। फ्रांस में नीस हमले के बाद महातिर मोहम्मद ने बेहद भड़काऊ बयान देते हुए जमकर जहर उगला है। महातिर ने एक के बाद एक कुल 14 ट्वीट करते हुए लिखा है कि फ्रांस ने मुसलमानों पर जो अत्याचार किए, इसके लिए मुस्लिमों को पूरा अधिकार है कि वो लाखों-लाख फ्रांसीसियों को मौत के घाट उतारें। उन्होंने लिखा है कि मुस्लिमों को आक्रोशित होने का अधिकार है। ऐसे में यूजर्स सोशल मीडिया पर मांग कर रहे हैं कि आखिर महातिर मोहम्मद से अवॉर्ड वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है।