रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ और ब्रिटिश एजेंसी एमआईए-6 के मुखिया के भारत दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। रूसी एनएसए निकोले पेत्रुशेव दो दिन के भारत दौरे पर हैं। उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ चर्चा की है। इससे पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ बिल बर्न्स की डोभाल के साथ बैठक हुई थी। रिपोर्टों की माने तो बर्न्स और डोभाल के बीच बातचीत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और अफगानिस्तान के हालात पर केंद्रित थी। बर्न्स की यात्रा क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भों में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भारत और अमेरिका के लिए बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में अफगानिस्तान की वर्तमान राजनीतिक, सुरक्षा और मानवीय स्थिति तथा जैश-ए-मोहम्मद और तश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी गुटों की गतिविधियों सहित नशीले पदार्थों से उत्पन्न खतरे और इस संबंध में क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष वर्तमान और भविष्य के खतरों तथा संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान को सहायता दिए जाने के उपायों पर भी विचार करेंगे। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं के निकलने और तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा होने से उत्पन्न समस्त परिस्थितियों के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा। दोनों ही पक्ष अफगानिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में भी विचार-विमर्श करेंगे। आतंकवाद के बारे में भी दोनों ही देशों को समान चिंता है। विशेषकर तालिबान द्वारा किये गये वायदों और आश्वासनों को सुनिश्चित बनाए जाने के बारे में भी दोनों देश चिंतित हैं।
पिछले महीने की 24 तारीख को प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों देशों द्वारा शिष्टमंडलीय विचार-विमर्श का आयोजन किया गया है। दोनों नेताओं ने विचार व्यक्त किया कि दोनों ही सामरिक भागीदारों को मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए और इस संबंध में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी अफगान मुद्दे की जानकारी होनी चाहिए और एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए।
#RussiaIndia consultations on security issues have started in #NewDelhi. #Russia's Security Council Secretary Nikolai Patrushev is meeting with #India's National Security Advisor Ajit Doval. pic.twitter.com/mg7WeH0eBr
— Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) September 8, 2021
CIA Chief in India+Russian NSA+Chief of British MI6 something going on.....
— anupsadhu (@aasadhu) September 8, 2021
पंजशीर पर फतह के तालिबानी दावे के बाद ही काबुल, मजार-ए-शरीफ और जरांज में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। पाकिस्तान का भी अफगानी नागरिक विरोध कर रहे हैं। माना जाता है कि पंजशीर में भी पाकिस्तानी सेना ने तालिबान की मदद की थी। साथ ही तालिबानी सरकार के गठन में भी उसकी भूमिका बताई जाती है। अंतरिम सरकार के ऐलान से पहले पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया फैज हमीद ने काबुल का दौरा भी किया था।
What does it say about New Delhi’s role in the region that both the CIA Chief and Russia’s powerful security czar are in India at the same time. Discuss
— Nitin A. Gokhale (@nitingokhale) September 8, 2021
रक्षा विश्लेषक नितिन गोखले ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के दौरे को लेकर ट्वीट कर कहा है कि सीआईए प्रमुख और रूस के ताकतवर सुरक्षा प्रमुख का एक ही समय में दौरा करना इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को लेकर काफी कुछ कहता है। इन दोनों के दौरे से पहले एमआई-6 के मुखिया रिचर्ड मूर भारत आए थे। गोखले ने लिखा है कि पिछले सप्ताह हुए इस दौरे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन कोई भी अनुमान लगा सकता है कि बदले हालात में वे भारत से क्या चाहते होंगे।
आशंका जताई जा रही है कि तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर सकता है। यही कारण है कि रूसी एनएसए के भारत दौरे से पहले 24 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बात की थी।
ब्रिक्स वर्चुअल सम्मेलन से पहले भी अफगानिस्तान पर चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगले सप्ताह होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन भी इसी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो सकता है। जिस तरह तालिबान की अंतरिम सरकार में वैश्विक आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी को गृहमंत्री बनाया गया है, उसने पूरी दुनिया की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हक्कानी अमेरिका की हिट लिस्ट में भी शामिल है।

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