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मोदी विरोधियों का क्राउड फंडिंग वेबसाइट ‘रहस्यमय’ ढंग से गायब: शेहला से लेकर साकेत गोखले तक ने किया इस्तेमाल

                 साकेत गोखले, कन्हैया कुमार और डॉ. कफील खान ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया
तृणमूल कांग्रेस नेता (TMC) साकेत गोखले अपनी जीविका चलाने के लिए जिन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते थे उनमें से एक ourdemocracy.in है और यह अब इस प्लेफॉर्म का कोई अता-पता नहीं है। चूँकि, गोखले पूर्णकालिक नौकरी छोड़कर 10 रुपए खर्च करके आरटीआई डालने का काम करते थे, इसलिए उन्हें धन जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ता था। नवंबर 2019 में गोखले ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का एक लिंक ट्वीट कहा था कि उन्होंने ‘बीजेपी/आरएसएस से लड़ने’ के लिए अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने मोदी से नफरत करने लोगों से इकट्ठा होने और उन्हें पैसे देने का आग्रह किया था, इस लड़ाई के खर्चों का वे वहन कर सकें और इसके लिए उन्हें नौकरी ना करनी पड़े।

दरअसल, व्यक्तिगत जरूरतों के लिए भी क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जाता है। क्राउडफंडिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें किसी काम के लिए पैसा इकट्ठा करने के लिए लोगों के समूह से मदद माँगी जाती है। क्राउडफंडिंग में जो भी लोग अपने पैसे देते हैं उन्हें मालूम होता है कि वह कहाँ और किस उद्देश्य के लिए फंड दे रहे हैं। हालाँकि, अब ना केवल क्राउडफंडिंग कैंपन, बल्कि ये पूरी वेबसाइट ही गायब है।

                                                                   यह वेबसाइट अब अस्तित्व में नहीं है

कैंपन शुरू करने के बमुश्किल 3 महीने बाद यानी फरवरी 2020 तक गोखले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत करने वालों से 20 लाख रुपए से अधिक की राशि इकट्ठा कर ली थी।

                                                               क्राउडफंडिंग पर गोखले

गोखले ने स्वीकार किया था कि उन्होंने इस तरह 22 लाख रुपए से अधिक की राशि एकत्रित की थी। उन्होंने उस समय कहा था कि वह अपने व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए और लोगों को भी शामिल करेंगे। उस समय पता चला कि OurDemocracy crowdfunding platform जुटाई गई राशि का कुल आँकड़ा नहीं दिखा रहा था। ऐसे में जिन लोगों ने योगदान दिया था, उन्हें यह नहीं पता चल पा रहा था कि गोखले कितना धन जुटा चुके हैं।

दिलचस्प बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म अब रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। इसका इस्तेमाल पूर्व सीपीआई नेता और अब कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार, आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना और यहाँ तक ​​कि डॉ. कफील खान द्वारा भी किया गया था, जो 2017 में गोरखपुर ऑक्सीजन मामले का मुख्य आरोपित हैं।

आवर डेमोक्रेसी, क्राउडन्यूज़िंग और कॉन्ग्रेस कनेक्शन

ऑपइंडिया ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म की थोड़ी गहराई से पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि टाइम्स नाउ और WION जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार बिलाल जैदी ने आनंद मंगनाले (Anand Mangnale) के साथ मिलकर 2017 में स्वतंत्र पत्रकारों के लिए ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘क्राउडन्यूजिंग’ की शुरुआत की थी।
हालाँकि, 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले उन्होंने इस प्लेटफॉर्म का विस्तार करने का फैसला किया और इसे ‘ourdemocracy’ में बदल दिया। इस पर कन्हैया कुमार, आतिशी मार्लेना जैसे नेताओं और साकेत गोखले जैसे बेरोजगार लोगों का स्वागत किया, जिन्होंने आरटीआई भरने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। जब साकेत टीएमसी में शामिल हुए थे तब OurDemocracy प्लेटफॉर्म के को-फाउंडर ने उनकी सराहना की थी।
OurDemocracy प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वालों में गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और जेएनयू की पूर्व छात्रा और प्रदर्शनकारी शेहला रशीद भी शामिल हैं। इन्होंने OurDemocracy के पायलट (pilot) वर्जन क्राउडन्यूजिंग का इस्तेमाल किया था।
अब, क्राउडन्यूज़िंग के साथ-साथ OurDemocracy प्लेटफॉर्म बंद हो चुका है। लगभग एक महीने हो चुके हैं, लेकिन OurDemocracy के सोशल मीडिया हैंडल ने अभी तक इसकी कोई सार्वजनिक सूचना नहीं दी है। OurDemocracy के वैरिफाइड ट्विटर अकाउंट पर आखिरी ट्वीट 24 जून 2021 को डॉ. कफील खान के एक कैंपन में दान करने के लिए किया गया था। वहीं, क्राउडन्यूज़िंग का आखिरी ट्वीट 10 जून 2019 को किया गया था, जिसमें धन के दुरुपयोग के पुराने विवाद को लेकर एक खुद को और शेहला राशिद को क्लीन-चिट दी थी।
जिस प्लेटफॉर्म को बाद में गोखले ने इस्तेमाल किया, उसको लेकर शेहला राशिद पर कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या के नाम पर एकत्रित किए गए धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पीड़ित परिवार की मदद के नाम पर लाखों रुपए जमा किए गए, लेकिन फंड उन तक नहीं पहुँचा ही नहीं था। वहीं, राशिद ने इन आरोपों से इनकार किया था और बाद में कहा था कि पैसे देने में इसलिए देरी हुई, क्योंकि परिवार के पास ज्वॉइंट बैंक अकाउंट और पैन नहीं था। ध्यान दें कि क्राउडन्यूज़िंग के साथ-साथ OurDemocracy के सह-संस्थापक Anand Mangnale ने जनवरी 2020 में जेएनयू में हुई हिंसा के दौरान व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल थे, जहाँ कैंपस हिंसा को लेकर अपना कुतर्क रख रहे थे।
ग्रुप के सदस्यों से आनंद पूछ रहे थे कि जेएनयू के समर्थन में कुछ लोग मेन गेट पर आ रहे हैं, क्या उन्हें भी वहाँ कुछ करना चाहिए? यह मैसेज ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ नामक समूह का था। बरखा दत्त ने अनजाने में ट्विटर पर जो नंबर शेयर किया वह आनंद (Anand Mangnale) का था। उस नंबर को Google पर खोजने से पता चला कि यह वही नंबर था, जिसे कॉन्ग्रेस ने क्राउडफंडिंग अभियान के लिए इस्तेमाल किया था।
                                                    कांग्रेस के कैंपन पर आनंद का नंबर
इस पेज को अब हटा लिया गया है। आनंद ने टीएमसी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ पहले काम किया था। प्रशांत किशोर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए भी रणनीतिकार के रूप में काम चुके हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं कर सका कि आनंद मंगनाले राहुल गाँधी की छवि बदलने के लिए उस टीम का हिस्सा थे या नहीं।
                                                                      आनंद मंगनाले
आनंद ने तब छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने की बात स्वीकार की थी। अंत में, एक पत्रकार बिलाल जैदी आनंद मंगनाले से मिलते हैं और दोनों ने 2017 में ‘क्राउडफंडिंग’ वेबसाइट क्राउडन्यूज़िंग शुरुआत की और 2019 में इसका विस्तार कर इसे ‘ourdemocracy.in’ बनाया।
क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल साकेत गोखले, जिग्नेश मेवानी, कन्हैया कुमार, शेहला राशिद, मनीष सिसोदिया, आतिशी मार्लेना, डॉ. कफील खान द्वारा किया गया। इनमें से कम-से-कम दो लोगों पर यहाँ से जुटाए गए पैसों को लेकर जानकारी साझा नहीं करने का आरोप लगा था। अब ये दोनों प्लेटफॉर्म गूगल पर नहीं हैं। ऑपइंडिया ने क्राउडन्यूजिंग के सह-संस्थापक और OurDemocracy के बिलाल जैदी से भी संपर्क किया है। उनसे जवाब मिलने के बाद हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

राहुल गांधी के करीबी साकेत गोखले और कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा चुनाव तारीखों को लेकर फैलायी थी झूठी खबर

जैसाकि राजनीतिक गलियारों में शंका व्यक्त की जा रही थी कि 2024 चुनाव से पूर्व कांग्रेस विभाजित हो सकती है, लगता है वह शंका हकीकत में बदलने जा रही है, और इसकी जिम्मेदारी केवल गाँधी परिवार, विशेषकर राहुल गाँधी पर होगी। वैसे प्रियंका वाड्रा भी कम भागीदार नहीं। 

कांग्रेस विभाजन की सुगबुगाहट बटला हाउस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने पर सोनिया गाँधी के आंसू बहाने के समाचार के चर्चित होते ही शुरुआत हो गयी थी। तब सवाल था कि बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन? और अब वह समय आ गया है। दरअसल राहुल के सिपाह सलाहकार राहुल से विभाजनकारी बयां दिलवाकर कांग्रेस बुद्धिजीवी वर्ग को धरातल में धकेल कर पार्टी को भी पतन की ओर लेकर निकल पड़े हैं।  
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। 26 फरवरी, 2021 को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव की तारीखों की घोषणा की। लेकिन कांग्रेस नेताओं और उसके समर्थकों ने चुनाव की तारीखों को लेकर 
लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और वकील साकेत गोखले ने चुनाव की तारीखों के ऐलान को लेकर टाइम्स ऑप इंडिया की एक खबर का हवाला देते हुए उन्होंने ट्वीट कर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिया था।

साकेत गोखले और कांग्रेस के अन्य नेताओं द्वारा किए गए ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। लोगों ने कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम को देश की जनता को गुमराह करने के लिए आड़े-हाथों लिया है। लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के एक अनुमान को कांग्रेस और उसके समर्थकों ने साजिश के तहत तोड़-मरोड़कर पेश किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम में 22 फरवरी को एक रैली में कहा था कि पिछली बार (2016 में) असम विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चार मार्च को हुई थी, इस बार भी मार्च के पहले हफ्ते में तारीखों का ऐलान किए जाने का अनुमान है। हालांकि यह चुनाव आयोग का काम है। लेकिन कांग्रेस के नेता और उसके समर्थक प्रधानमंत्री मोदी के अनुमान को तोड़-मरोड़कर पेश किया औऱ प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की।
आखिर राहुल के करीबी क्यों भ्रामक खबरे फैलाकर कांग्रेस का सर्वनाश करने पर तुले हैं? कांग्रेस बुद्धिजीवी वर्ग को इस बात पर खुले मन से पार्टी में चर्चा करनी चाहिए। क्योकि यह कोई अपवाद नहीं, अत्यंत गंभीर मुद्दा है। संसद में प्रधानमंत्री के पास जाकर गले मिलना, फिर अपने स्थान पर आकर आंख मिचकना आदि बचकानी हरकत करने की बजाए अपने स्थान पर खड़े होकर केवल इतना अनुरोध कर देते कि "मोदी जी राष्ट्र हित में कांग्रेस आपके साथ है, बस आप बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकारी लूट पर ठोस कदम उठाइये।", इतना कहने भर से जनता में कांग्रेस के लिए सम्मान बढ़ जाता।  

यह पहला मौका नहीं है, जब साकेत गोखले ने प्रोपेगेंडा के लिए चुनाव आयोग जैसी एक संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया हो। इससे पहले राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में अडंगा लगाने और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की थी। अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन पर रोक लगाने के लिए साकेत गोखले ने पीआईएल याचिका दायर की थी। साकेत ने कोरोना संकट काल में जारी अनलॉक 2.0 के दिशानिर्देशों के तहत भूमिपूजन पर रोक लगाने की मांग की थी।

यह जानकर हैरानी होगी कि साकेत गोखले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी हैं। साकेत सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ फेक न्यूज फैलाते रहते हैं। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार साकेत बीजेपी के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में अभियान चलाकर 22 लाख रुपये जुटाए थे।

उत्तर प्रदेश : ‘आज तक’ ने हाथरस मामले में किया HC के आदेश का उलंघन

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ के समाचार चैनल ‘आज तक’ को नोटिस भेजा है। ये नोटिस इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन को लेकर भेजा गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की जाँच को लेकर गोपनीयता बरतने की बात कही गई थी। इस मामले में अब समाचार चैनल ‘आज तक’ के खिलाफ कार्रवाई होगी। ये नोटिस बृहस्पतिवार (नवंबर 5, 2020) को भेजा गया। ज्ञात हो कि यूपी के हाथरस में एक अनुसूचित जाति की युवती की मौत को विपक्षी दलों ने राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA को निर्देश दिए हैं कि वो ‘आज तक’ चैनल के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थक साकेत गोखले द्वारा दायर की गई शिकायत के बाद ये आदेश दिया गया। गोखले ने उत्तर प्रदेश सरकार के एडिशनल मुख्य सचिव को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि ‘आज तक’ ने हाथरस मामले में चल रही सीबीआई जाँच को लेकर खबर चलाई, जबकि इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गोपनीयता बरतने के स्पष्ट आदेश दिए थे।

                                                  केंद्रीय मंत्रालय ने NBSA को लिखा पत्र (फोटो साभार: LiveLaw)
समाचार चैनल ‘आज तक’ ने सीबीआई द्वारा मृतका के परिवार से पूछे गए प्रश्नों को लेकर खबर चलाई थी, जिसे साकेत गोखले ने इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उलंघन का मामला बताया। गोखले ने इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA से कहा है कि वो 15 दिनों के भीतर इस मामले में एक्शन ले। ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ इससे पहले भी कई नियमों के उल्लंघन के मामलों में एजेंसियों की जाँच का सामना कर रहा है।

इससे पहले, न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने इंडिया टुडे समूह के हिंदी भाषा समाचार चैनल ‘आज तक’, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की असंवेदनशील और सनसनीखेज रिपोर्टिंग के लिए माफी माँगने का आदेश दिया था। ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने ‘आज तक’ को 27 अक्टूबर को रात 8 बजे अपने चैनल पर ‘लाइव’ माफी माँगने का आदेश दिया था। हिंदी समाचार चैनल ने 28 अक्टूबर को रात 9 बजे के बाद अपनी माफी को प्रसारित किया।

‘Boycott Islam’ लिख कर फँस गईं तस्लीमा नसरीन, कांग्रेस के साकेत गोखले ने दर्ज कराई शिकायत

बांग्‍लादेश की जानी-मानी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन के खिलाफ शिकायत दर्ज किया गया है। यह शिकायत कांग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने दर्ज करवाई है। साकेत ने तस्लीमा के खिलाफ भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की कोशिश करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

तस्लीमा नसरीन ने 29 अक्टूबर 2020 को अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें ’बॉयकॉट इस्लाम’ लिखा था। विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी के समक्ष दायर शिकायत में कहा गया है कि नई दिल्ली में वीजा पर रहने वाली तस्लीमा नसरीन (स्वीडन की नागरिक) ने वीजा मानदंडों का व्यापक उल्लंघन करते हुए अपने ट्वीट के माध्यम से भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया है। 

गोखले ने गृह मंत्रालय के वीजा विंग और एफआरआरओ को लिखे अपने पत्र में कहा कि नसरीन का ट्वीट ‘हमारे देश में सांप्रदायिक विद्वेष और नफरत फैलाने का एक कुत्सित और जानबूझकर किया गया प्रयास’ है। शिकायत में आगे कहा गया है, “यह नोट किया जा सकता है कि किसी भी तरह के वीजा पर रहने वाले विदेशियों को देश में उनके निवास के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है।” गोखले ने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया।

तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में ट्व‍िटर पर लिखा था, “इस्लाम धर्म में सुधार की जरूरत है, नहीं तो आधुनिक सभ्‍यता में इस धर्म के लिए कोई जगह नहीं है।” इसके पहले तस्लीमा ने ट्व‍िटर पर ही लिखा था, “बॉयकॉट इस्‍लाम।”

तस्लीमा नसरीन के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडि‍या में खासा बवाल हुआ। जहाँ इस्‍लामि‍क कट्टरपंथियों ने उनकी आलोचना की तो बाकी लोग खुलकर उनके समर्थन में आए। दरअसल, तस्लीमा लगातार खुलकर इस्‍लाम की बुराइयों और इस धर्म की खामियों के बारे में बात करती हैं।

हाल ही में फ्रांस में पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून को लेकर चल रहे विवाद पर भी वे खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं। वे लगातार ट्वीट करती हैं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को आइना दिखाती रहती हैं। तस्लीमा पाकिस्‍तान मूल के तारेक फतेह की तरह ही इस्‍लाम की बुराइयों की आलोचना करती हैं और भारत की पैरवी करती रही हैं।

29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। स्थानीय समयानुसार यह घटना लगभग 11:15 बजे हुई थी यानी फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद।

इस सन्दर्भ में व्लाडीमीर पुतिन का अब तक का सबसे संक्षिप्त भाषण भारत में कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण पुजारियों, छद्दम धर्म-निरपेक्षता का झंडा उठाने वालों और गंगा-जमुनी तहजीब का राग-अलाप कर जनता को गुमराह करने वालों को ध्यान से पढ़ना चाहिए कि किस तरह विश्व मुस्लिम कट्टरवाद के विरुद्ध एकजुट होना शुरू हो रहा है -

व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति रूसी संसद को सम्बोधन में रूस के अल्पसंख्यक के साथ तनाव पर कहा -

रूस में रूसियों की तरह रहें। कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय जो कहीं से हो, यदि उसे रूस में रहना है, यहाँ काम करना है, आहार लेना है तो रूसी भाषा में बोलना होगा, रूस के कानूनों का सम्मान करना होगा। यदि वे शरीयत नियमों को वरीयता देना पसंद करते हैं एवं मुस्लिम जीवन शैली में जीना चाहते हैं तो उन्हें हमारा सुझाव है कि वे उन स्थानों पर जायें जहाँ यह राजकीय कानून है। 

यही बात कुछ वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कही थी, जिसका किसी में विरोध करने का साहस नहीं हुआ। आज उसी बात को व्लादिमीर पुतिन ने भी स्पष्ट शब्दों में कह दिया, जबकि भारत में नागरिकता संशोधक कानून पर अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों को बचाने जनता को गुमराह कर जगह-जगह शाहीन बाग़, धरने और प्रदर्शनों में हिन्दू और हिन्दुत्व को कलंकित करने का भरपूर प्रयास किया। 

रूस को अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की आवश्यकता नहीं है। अल्पसंख्यकों को रूस की आवश्यकता है, हम किसी तरह के विशेषाधिकार उन्हें नहीं देते, और न ही हम अपने कानूनों में ऐसे बदलाव लायेंगें जो उनकी अपेक्षावों पर खरे हों, चाहे वो ऊंची से ऊंची आवाज में इसे 'भेदभाव' कहें। रूसी संस्कृति की अवमानना हमें किसी भी रूप में स्वीकार नही है। हमें यदि एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहना है तो हमें अमेरिका, इंग्लैंड, होलैंड और फ्रांस में हुये आतंकी हमलों से सीख लेने की आवश्यकता है। मुसलमान उन देशों का अधिग्रहण कर रहे हैं लेकिन वे रूस के साथ ऐसा नहीं कर पाएंगे। 

रूसी रिवाजें एवं परंपरायें का मुकाबला असंस्कारी और आदिम मुस्लिम शरीयत नियमों के साथ नहीं किया जा सकता। 

जब भी यह सम्माननीय वैधानिक निकाय नये नियमों के सृजन का विचार करे तो उसे रूस के राष्ट्रीय हितों को प्रथम वरीयता में रखना है, यह ध्यान में रखते हुए कि मुस्लिम अल्पसंख्यक रूसी नही है। 

रूसी संसद के राजनेताओं ने पुतिन का खड़े होकर 5 मिनटों तक अभिवादन किया।