रूस : 16 साल के युवक ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले को पुलिस ने किया ढेर

                                                   प्रतीकात्मक 
आज विश्व में जिस तरह इस्लाम का विरोध हो रहा है, उससे भारत में तुष्टिकरण पुजारियों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों को अपनी आंखें खोलने की जरुरत है। विश्व इस्लाम नहीं बल्कि कट्टरपंथी के विरुद्ध एकजुट हो रहा है। चीन तो काफी समय से इस्लाम के ही विरुद्ध है, लेकिन किसी में चीन के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं। कुछ वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट कह दिया कि "जिसे रहना है देश के कानून के अनुसार रहना होगा, वरना देश छोड़कर जा सकता है।" फिर ब्रिटेन में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पुलिस के घुसने में हो रही अड़चनों को देख वहां भी सख्ती कर दी गयी है। और अब फ्रांस। भारत की तरह वहां कोई पार्टी सरकार के निर्णय के विरुद्ध नहीं बोल रही क्योंकि कोई पार्टी राष्ट्रहित के खिलाफ नहीं बोलती। नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हुए धरनों और प्रदर्शनों में किस तरह हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी हुई, किसी छद्दम सेक्युलरिस्ट में बोलने का साहस नहीं हुआ, करो हिन्दू और हिन्दुत्व को कलंकित। ये है भारत के छद्दम सेक्युलरिस्ट्स का सेकुलरिज्मवाद।  

लेकिन भारत में कुर्सी की खातिर विपक्ष दुश्मन से हाथ मिलाने को तैयार रहता हैं। रूस में जिस तरह पुलिस पर हमला करने वाले को 72 हूरों के पास भेजा है, काश भारत में हुआ होता, सारे तुष्टिकरण पुजारी, छद्दम धर्म-निरपेक्ष, सेक्युलरिस्ट, #intolerance, #not in my name, #mob lynching, #award vapsi और गंगा-जमुनी तहजीब राग अलापते अराजकता फ़ैलाने सडकों पर उतरकर उन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हंगामा कर रहे होते। परन्तु वहां कोई नहीं बोला।          

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर फ्रांस से उठा विवाद अब पूरे विश्व तक फैलता दिखाई दे रहा है। अब रूस से एक खौफनाक घटना सामने आई है। यहाँ 16 साल के लड़के ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए पुलिस वाले पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना के बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपित पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय मीडिया के अनुसार 16 साल के युवक ने 3 बार पुलिसकर्मी पर चाकू से वार किए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हमलावर का नाम विटले अंतीपोव था।

रूसी समाचार एजेंसी Interfax के मुताबिक नाबालिग हमलावर चाकू और पेट्रोल बम से लैस था। पुलिसवालों को मारने की नियत से उसने पीछे से उन पर तीन बार ‘अल्लाह-हू-अकबर’ बोलते हुए उन पर वार किया। इस दौरान लड़के ने पुलिसवालों को ‘काफिर’ भी कहा था। घटना रूस के तातारस्तान (Tatarstan) के कुकमोर (Kukmor) क्षेत्र का है।

रूस के इस इलाके में सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या रहती है। फ्रांस के खिलाफ यहाँ भी लोगों ने काफी उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं घटना पर संज्ञान लेते हुए रूस की जाँच एजेंसी ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार दिया है। साथ ही मामले में जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।

जाँचकर्ताओं ने कहा कि 16 साल के युवक ने जिला पुलिस भवन में आग लगाने की कोशिश की थी। वहीं गिरफ्तार होने के दौरान उसने पुलिस अधिकारी को चाकू मार दिया। हमला करते वक़्त युवक ने- “मैं आप सभी को मारने जा रहा हूँ” चिल्लाया था। घायल पुलिसवाले को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

फ्रांस में कुछ दिनों पहले एक शिक्षक का गला काट दिया गया था। शिक्षक की ‘गलती’ सिर्फ इतनी कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून क्लास के बच्चों को दिखाया था।

घटना से गुस्साए लोगों ने इसका जमकर विरोध किया, धीरे-धीरे पूरे विश्व में इसकी चर्चा होने लगती है। लोगों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों इस्लामी कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकने का कठोर संदेश देते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों का यह संदेश इस्लामी कट्टरपंथी लोगों को चुभ जाता है जगह-जगह विरोध होने लगते हैं। फिर यह हिंसा का रूप धर लेती है। कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए लोगों का गला काटा जाता है तो कहीं ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाती भीड़ जमा होती है। और फिर कोई पैदल चल रहे राहगीरों पर कार चढ़ा देता है। इस विरोध में कई बेगुनाह लोग अब शिकार हो रहे है।

जर्मनी में प्रदर्शनकारियों ने राहगीरों को रौंदा 

आज की घटना से पहले 29 अक्टूबर, 2020 यानी कल जर्मनी के केंपेन शहर में कार से पैदल चल रहे लोगों को कुचला जाता है, उसके ठीक पहले बर्लिन में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ जमा होती है जो ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्ला रही होती है और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का विरोध कर रही होती है। केंपेन में कार से पैदल यात्रियों के रौंदे जाने की घटना में एक की मौत हो गई है जबकि 3 बुरी तरह घायल हैं। स्थानीय पुलिस अभी जाँच कर रही है कि क्या यह भी किसी आतंकी का कारनामा है या सिर्फ एक दुर्घटना।

नीस में इस्लामिक नारा लगाते हत्या की 

 फ्रांस के नीस शहर में आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में 3 लोगों की जान गई और कई घायल हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

जेद्दाह में सुरक्षाकर्मी पर हमला 

 एक और कट्टरपंथी प्रयास सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में हुआ था। जहाँ सऊदी अरब के फ्रांसीसी दूतावास में तैनात सुरक्षाकर्मी पर धारदार हथियार से हमला किया गया। जानकारी के अनुसार घटना घटित होने के कुछ ही समय बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। यह घटना भी फ्रांस के नीस शहर स्थित एक चर्च में तीन लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ घंटों बाद हुई थी।

फ्रांस में आतंकी हमले को लेकर सोशल मीडिया पर लोग मुस्लिम कट्टरपंथियों के प्रति नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। आप भी देखिए…

आखिर महातिर मोहम्मद से अवॉर्ड वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है?

कांग्रेस ने मलयेशिया के जिस पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को जवाहर लाल नेहरू सम्मान दिया, वो खुलेआम कत्लेआम का समर्थन करता है। जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का विरोध करता है। फ्रांस में नीस हमले के बाद महातिर मोहम्मद ने बेहद भड़काऊ बयान देते हुए जमकर जहर उगला है। महातिर ने एक के बाद एक कुल 14 ट्वीट करते हुए लिखा है कि फ्रांस ने मुसलमानों पर जो अत्याचार किए, इसके लिए मुस्लिमों को पूरा अधिकार है कि वो लाखों-लाख फ्रांसीसियों को मौत के घाट उतारें। उन्होंने लिखा है कि मुस्लिमों को आक्रोशित होने का अधिकार है। ऐसे में यूजर्स सोशल मीडिया पर मांग कर रहे हैं कि आखिर महातिर मोहम्मद से अवॉर्ड वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है।


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