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कर्नाटक : येदियुरप्पा के खिलाफ जिसकी शिकायत पर POCSO का केस, वह ‘पीड़िता’ 53 लोगों पर दर्ज करवा चुकी है ऐसे ही मामले: पुलिस अधिकारी, नेता से लेकर बिजनेसमैन तक शामिल

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के खिलाफ शुक्रवार (15 मार्च 2024) को POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम और आईपीसी की धारा 354 (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया। यहाँ एक महिला ने बेंगलुरु के सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन से संपर्क कर दावा किया था कि उसकी 17 साल की उम्र की बेटी का बीएस येदियुरप्पा ने यौन उत्पीड़न किया, जब वो दोनों धोखाधड़ी के एक मामले में मदद के लिए उनके पास पहुँची थी।

हालाँकि, टीवी9 कन्नड़ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि शिकायतकर्ता (नाबालिग लड़की की माँ) इस तरह के मामले 53 मशहूर लोगों के खिलाफ दर्ज करा चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की की माँ साल 2015 से अब तक जाने-माने राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों और अपने बिजनेस पार्टनर के खिलाफ इस तरह की शिकायतें दर्ज करा चुकी है, जिसमें 2015 में उसने बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन में अपने पति के एक रिश्तेदार के खिलाफ भी यही (अपनी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न का) मामला दर्ज कराया था।

इस मामले में अब येदियुरप्पा के ऑफिस की तरह से एक लिस्ट जारी की गई है, जिसमें शिकायतकर्ता ने ऐसे मामले दर्ज कराए हैं, जो किसी खास पैटर्न की तरफ इशारा करता है।

कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मामला

15 मार्च 2024 को एक 17 साल की नाबालिक लड़की की माँ ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। इस एफआईआर में बताया गया है कि ये घटना कथित तौर पर 2 फरवरी को हुई, जब वो अपनी बेटी के साथ एक मामले में मदद के लिए उनके पास पहुँची थी।
महिला ने दावा किया कि येदियुरप्पा उनकी बेटी को एक कमरे में ले गए और उसके साथ ‘गलत काम’ को अंजाम दिया। इसके बाद उन्होंने दोनों से माफी माँगी और अनुरोध किया कि दोनों इस मामले में सार्वजनिक तौर पर कुछ भी न बोलें। इस मामले में उनके खिलाफ सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।
इस मामले में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ जाँच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा है।

येदियुरप्पा ने आरोपों से किया इनकार

इस मामले में येदियुरप्पा ने आरोपों से इनकार किया है और आरोपों को बकवास बताया है। उन्होंने कहा कि ये मामला पुलिस कमिश्नर के सामने रखा गया है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले एक महिला मेरे घर आई और उसने किसी मामले में मदद माँगी। मैंने इस मामले में पुलिस कमिश्नर को फोन करके उस महिला की मदद के लिए कहा। मैंने उससे कहा कि इस मामले को मैंने कमिश्नर को बता दिया है कि वो मामले को देख लेंगे। बाद में वो महिला मेरे खिलाफ बोलने लगी और अब मेरे खिलाफ उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। देखते हैं कि आगे क्या होता है। मुझे इस बारे में बिल्कुल भी नहीं पता कि इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद है।”
इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है और जाँच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। जब कॉन्ग्रेस नेता से किसी संभावित राजनीतिक साजिश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दावों पर भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इसे संवेदनशील मामला बताया और कहा, “कल रात करीब 10 बजे एक महिला ने बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जब तक हमें सच्चाई का पता नहीं चलता, हम कुछ भी बता नहीं सकते। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई राजनीतिक एंगल है। अगर पीड़ित महिला को सुरक्षा की जरूरत है तो दी जाएगी।”

ओडिशा : फेथ आउटरीच : नाबालिक के यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप में 68 वर्षीय जॉन पैट्रिक ब्रिटिश मिशनरी गिरफ्तार

ब्रिटिश मिशनरी ने नाबालिक के साथ किया यौन शोषण
जॉन पैट्रिक ब्रिज (साभार : प्रगतिवादी)
ओडिशा के झारसुगुडा ज़िले में इंग्लैंड का 68 वर्षीय मिशनरी शेल्टर होम और आवासीय विद्यालय चलाता है। उस व्यक्ति पर एक बच्चे के यौन शोषण का आरोप लगा था। जिसके संबंध में पुलिस ने बुधवार (19 अगस्त 2020) को उसे गिरफ्तार कर लिया। जिस बच्चे के साथ यह घटना हुई है वह शेल्टर होम का ही रहने वाला है।
फेथ आउटरीच ओडिशा संस्थापक जॉन पैट्रिक ब्रिज ने जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जिसे अदालत ने बुधवार(अगस्त 19) को ठुकरा दिया और आरोपित जॉन पैट्रिक को जेल भेज दिया गया है। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण संबंधी अधिनियम (POSCO Act) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।  
स्थानीय समाचार समूहों संवाद और प्रगतिवादी ने इस मुद्दे पर विस्तार से ख़बर प्रकाशित की है। इस घटना की शिकायत एक ऐसे युवक ने की थी जो फेथ आउटरीच संस्था संचालित एक शेल्टर होम में रहता था। वह साल 2015 तक इस शेल्टर होम में रहता था और तब वह नाबालिक था। जॉन पैट्रिक ने इस संस्था का गठन लगभग 25 साल पहले किया था। प्रगतिवादी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जॉन पर पहले भी इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं। 
जॉन पैट्रिक और उसकी पत्नी
साभार – फेथ आउटरीच उड़ीसा
इसके पहले उस पर एक न्यूज़ीलैंड के नागरिक ने इस तरह के ही आरोप लगाए थे। और तो और यह आरोप न्यूज़ीलैंड दूतावास से लगाए गए थे। जॉन इंग्लैंड में पैदा हुआ था और साल 1977 में भारत आया। इस दौरान उसने अपनी तमिल पत्नी के साथ मिल कर सामाजिक समूह फेथ आउटरीच, उड़ीसा शुरू किया। शुरुआत में केवल 4 बच्चे ही इस अनाथालय में रहते थे लेकिन अब यह एक बड़ा संगठन बन चुका है। फिलहाल इसमें लगभग 800 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं। इसके अलावा कुल 4 डे केयर सेंटर भी चलते हैं जिसमें लगभग 250 बच्चे रहते हैं। इसमें से अधिकांश बच्चे गरीब और वंचित घर परिवारों से आते हैं।
जॉन के शेल्टर होम में हर उम्र के बच्चे रहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चे भी मौजूद हैं। उसने अपनी पत्नी के साथ मिल कर काफी संख्या में बच्चों को ईसाई धर्म कबूल कराया है। उसके शेल्टर होम और डे केयर सेंटर में रहने वाले ज़्यादातर बच्चे गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों से आते हैं। उसे साल 1992 में भारत की नागरिकता मिली थी। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। 

सबरीमाला में प्रवेश करने वाली रेहाना फातिमा के ‘अर्धनग्न’ वीडियो से नाराज़ BSNL ने नौकरी से किया बर्खास्त

रेहाना फातिमा का nude फुल वीडियो ...
सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमेटेड (BSNL) ने नोटिस जारी कर विवादित कार्यकर्ता और बर्खास्त कर्मचारी रेहाना फातिमा को सरकारी आवास खाली करने को कहा है।
यह कार्रवाई ऐसे समय की गई है जब हाल में पुलिस ने उनके द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो के सिलसिले POSCO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया और उनके घर पर छापेमारी की गई थी।
सरकारी दूरसंचार कंपनी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उसकी छवि को धक्का लगा है। बता दें कि रेहाना फातिमा ने 19 जून को यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था। रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंँ सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

Who is Rehana Fatima | Profile Of Rehana Fatima | Sabrimala Temple ...
जिसके बाद उनके खिलाफ केरल पुलिस एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत केस दर्ज कर 25 जून को पनमपिल्ली नगर स्थित उनके सरकारी आवास की तलाशी ली गई थी।
27 जून को जारी बीएसएनएल के नोटिस में कहा गया है, ‘‘उपरोक्त घटना से बीएसएनएल की छवि खराब हुई है। इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि नोटिस मिलने के 30 दिन के भीतर सरकारी आवास को खाली कर दें नहीं तो आवास से निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।’’
नोटिस में आगे कहा गया है कि बीएसएनएल कर्मचारी के तौर पर उनकी सेवाएँ समाप्त कर दी गई है। इसलिए वह कंपनी के आवास में रहने के लिए अयोग्य हैं। उल्लेखनीय है कि बीएसएनएल ने सोशल मीडिया पर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर अशांति पैदा करने के आरोप में इस साल मई में फातिमा को बर्खास्त कर दिया था। 
https://zellarkhabor.in/nation/rehana-fatima-post-a-topless-video/



एक्टिविस्ट फातिमा ने पिछले हफ्ते केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उन्होंने POSCO एक्ट के तहत गिरफ्तारी को लेकर अग्रिम जमानत की माँग की थी।
केरल के पथनमथिट्टा जिले की रहने वाली रेहाना फातिमा ने दो साल पहले सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। हालाँकि, उनके इस कदम की काफी आलोचना हुई थी। उन्हें अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए अयप्पा श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए 18 दिन जेल में भी बिताने पड़े थे। रेहाना ने यूट्यूब पर एक कुकिंग वीडियो भी डाली थी। वीडियो में रेहाना बीफ की रेसेपी बताती नजर आई थीं। मगर, वीडियो की शुरुआत के 20 सेकेंड में उन्हें बीफ की जगह गौ माता बोलते सुना गया था।