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जिन UGC नियमों को SC ने रोका उनमें शामिल ‘वामपंथी’ इंदिरा जयसिंह की सिफारिशें


सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम UGC इक्विटी नियम 2026 पर स्टे लगा दिया है। हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों को लेकर किए गए नोटिफिकेशन को लेकर बवाल मचा हुआ है। प्रमोशन ऑफ इक्विटी 2026 के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 27 जनवरी 2026 को छात्रों को भरोसा दिलाया कि इस नियम का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन छात्रों का डर खत्म नहीं हुआ और विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

दरअसल ये तर्क दिया जा रहा है कि जनरल कटेगरी के लोग जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं हो सकते इसलिए उनकी शिकायत को सिस्टम से बाहर रखा जा रहा है। UGC इक्विटी नियम 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए एक ‘सुधार’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।

स्वराज्य के अनुसार, 2026 के नियमों के बजाए 2025 का नियम एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में भेदभाव को दूर करने के लिए ज्यादा कारगर है। यह एक संतुलित नजरिया पेश करता है और ज्यादा व्यावहारिक है।

बराबरी पर UGC रेगुलेशन की शुरुआत

2019 में छात्र रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने दो पीआईएल दायर की थी, जिसके आधार पर 2025 के ड्राफ्ट तैयार किए गए थे। इन छात्रों में एक की मौत 2016 में और दूसरे की 2019 में हुई थी। उनके परिवारों ने आरोप लगाया था कि इनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया गया, जिसकी वजह से इनदोनों ने आत्महत्या कर ली थी।

दोनों याचिकाकर्ताओं की वकील सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह थी। उन्होंने एडवोकेट प्रसन्ना और दिशा वाडेकर के साथ मिलकर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भेदभाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की माँग की। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिया था कि शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए गाइडलाइंस तैयार की जाए, उसी के आधार पर यूजीसी के नए नियम बनाए गए।

कहा जाता है कि PIL में पूरी तरह से नए नियम की माँग नहीं की गई थी, बल्कि मौजूदा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में बराबरी को बढ़ावा देना) रेगुलेशन, 2012 को सख्ती से लागू करने की माँग की गई थी। 2012 के नियमों के तहत यूनिवर्सिटी को भेदभाव, खासकर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को समानता दिलाने पर जोर दिया गया था।

PIL में याचिकाकर्ताओं ने एडमिशन, मूल्यांकन, हॉस्टल अलॉटमेंट और कैंपस लाइफ में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। उन्होंने संस्थानों पर 2012 के नियम को लागू करने में पूरी तरह विफल रहने का भी आरोप लगाया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कोई मॉनिटरिंग नहीं की जाती थी। समान अवसर वाली जगह काफी कम थी। NAAC का कोई अता-पता नहीं था।
जनवरी 2025 में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुयान ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को नियमों का पालन न करने के लिए फटकार लगाई। जजों ने UGC को सेल, शिकायतों और एक्शन पर डेटा पेश करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट UGC ने बताया कि वह रेगुलेशन के नियम का ड्राफ्ट बना रही है।

2025 के रेगुलेशन ने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में जाति के आधार पर भेदभाव को दूर करने के लिए एक नियम बनाया।

UGC ने फरवरी 2025 में (हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में प्रमोशन ऑफ इक्विटी) रेगुलेशन जारी किए थे। 2025 के ड्राफ्ट रेगुलेशन का उद्देश्य सुरक्षा, निष्पक्षता और स्वायत्तता के बीच एक संतुलित ढाँचा तैयार करना था। PIL की माँग के मुताबिक, ‘इक्विटी कमेटी’ और 24/7 हेल्पलाइन जैसे उपाय सुझाए गए, ताकि सभी शामिल पार्टियों (विशेषकर SC/ST छात्रों) के लिए सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

इन नियमों में संस्थानों को अपनी स्थितियों के अनुसार, नियमों को लागू करने का अधिकार दिया गया। इक्विटी कमेटी का नेतृत्व संस्था के प्रमुख द्वारा किए जाने का प्रावधान है, ताकि संस्था की जवाबदेही को सुनिश्चित किया जा सके।

कमेटी में कम से कम एक सदस्य SC ​​या ST समुदाय से होना जरूरी था। ड्राफ्ट रेगुलेशन ने सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए फैकल्टी, छात्र-छात्राओं और संस्थान के प्रशासनिक स्टाफ की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है।

2026 के रेगुलेशन में इंदिरा जयसिंह की सिफारिशों को शामिल किया गया

हालाँकि याचिकाकर्ता 2025 के ड्राफ्ट रेगुलेशन से खुश नहीं थे। सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने ड्राफ्ट में दस मुख्य बदलावों का प्रस्ताव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने रेगुलेशन को फाइनल करने के लिए 8 हफ्ते की डेडलाइन तय की। इसको देखते हुए नए रेगुलेशन 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किया गया।

इस रेगुलेशन में 2025 के रेगुलेशन में किए गए ‘संतुलन’ का अभाव था, और इसमें जयसिंह की कई सिफारिशें शामिल थीं।

2026 के रेगुलेशन ने पीड़ितों की कैटेगरी को SC, ST और OBC तक सीमित करके जनरल कटेगरी को जाति-आधारित हिंसा का शिकार मानने से मना कर दिया। जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए जाति-आधारित भेदभाव की शिकायत करने का कोई प्रावधान नहीं है। 2026 के रेगुलेशन न सिर्फ यह मानते हैं कि जाति के आधार पर भेदभाव सिर्फ SC, ST और OBC के लोगों के साथ होता है। इसमें जनरल कटेगरी के लोगों की सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि नया नियम मानता है कि इनके साथ कोई भेदभाव नहीं होता।

नया फ्रेमवर्क जनरल कटेगरी के स्टूडेंट्स के खिलाफ है, जिनके पास नियमों का गलत इस्तेमाल होने पर संस्थान का सहारा नहीं होगा। यही वजह है कि 2026 के रेगुलेशन का जनरल कटेगरी के छात्र विरोध कर रहे हैं, जिन पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

केरल : स्कूलों में जुम्बा डांस के विरोध में उतरे इस्लामी संगठन, बताया दीन के खिलाफ: बैकफुट पर वामपंथी सरकार

                              जुम्बा डांस क्लास की प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार : Grok)
केरल में शिक्षा विभाग के जुम्बा डांस शुरू करने पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। इस्लामी कट्टरपंथी इसे ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बता रहे हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि लड़के-लड़कियों का एक साथ नाचना, घुलना-मिलना और कम कपड़े पहनना बिल्कुल गलत है।

वहीं वामपंथी सरकार ने दावा किया है कि यह फैसला छात्रों में तनाव कम करने और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान का हिस्सा है।

इस्लामी कट्टरपंथी जुंबा को लेकर आक्रोश में

रिपोर्ट के अनुसार, विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन के महासचिव टीके अशरफ ने साफ कहा, “मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता, और मेरा बेटा इसमें शामिल नहीं होगा।” अशरफ ने जोर देकर कहा कि बच्चों को स्कूल में ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ मिलनी चाहिए, न कि ‘लड़के-लड़कियाँ कम कपड़ों में एक साथ नाचें’ वाली संस्कृति। अशरफ ने कहा कि मैं एक शिक्षक हूँ इसलिए इसे लागू नहीं करने दूँगा।
अपनी एक फेसबुक पोस्ट में टीके अशरफ कहते हैं कि नशे जैसी गंभीर समस्याओं का हल सिर्फ डांस नहीं हो सकता। अशरफ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई वैज्ञानिक रिसर्च यह साबित कर सकता है कि जुंबा नशे के इस्तेमाल को कम करता है। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि यह पहल डीजे पार्टियों और पश्चिमी नाइटलाइफ को बढ़ावा देगी।

समस्त केरल जामियातुल उलमा के नेता नस्सर फैजी कूड़ाथई ने जुम्बा को ‘अनुचित’ और ‘छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन’ बताया। उन्होंने कहा, “जुम्बा कम से कम कपड़ों में एक साथ नाचने का तरीका है।”
समस्त केरल सुन्नी युवाजना संगम (SYS) के राज्य सचिव अब्दुस्समद पूकोटूर ने इसे सीधे तौर पर ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बताया।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की छात्र शाखा मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) ने भी विरोध किया। MSF के राज्य अध्यक्ष पीके नवास ने सवाल किया कि क्या सरकार ने इसे लागू करने से पहले कोई अध्ययन किया था।

सरकार का पलटवार

केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु ने जुम्बा का बचाव किया। बिंदु ने कहा, “हम 21वीं सदी में हैं, यह 2025 है। हम 19वीं सदी या आदिम मध्ययुगीन काल में नहीं रह रहे हैं। सभी को समय के अनुसार सोचना चाहिए।” सामान्य शिक्षा विभाग ने भी जुम्बा का समर्थन किया है।

बयानबाजी और टकराव

जुम्बा विवाद पर इस्लामी कट्टरपंथी और CPM के बीच शब्दों का युद्ध छिड़ गया है। KNM नेता हुसैन मादावूर ने मंत्री आर बिंदु के बयान की आलोचना की। हुसैन ने कहा कि जुम्बा को स्कूलों में बिना किसी वैज्ञानिक आधार के थोपा जा रहा है।
हुसैन ने SFI सहित वामपंथी संगठनों को चेतावनी दी कि अगर वे अपना रुख नहीं बदलते, तो जनता उन्हें बदल देगी। हुसैन ने कहा, “प्रयास आदिम युग में लौटने का है, जब हम बिना कपड़ों के रहते थे।” हुसैन ने ‘कम कपड़े पहनकर अश्लील तरीके से नाचने’ को गलत बताया।
मंत्री बिंदु ने कहा था, “जुम्बा बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। स्कूलों में जुम्बा कराने में क्या गलत है?”

NEET पेपर लीक में अब पत्रकार जमालुद्दीन गिरफ्तार: स्कूल प्रिंसिपल एहसान उल हक से था लगातार संपर्क; विपक्ष की बढ़ती परेशानी

NEET पेपर लीक मामले में महामहिम के भाषण पर चर्चा होने से पहले विपक्ष द्वारा संसद में हंगामा करना एक बहुत गहरा षड़यंत्र है। विपक्ष की कोशिश है कि सरकार का इधर-उधर ध्यान भटकाकर दोषियों तक सरकार के हाथ न पहुँचने पाएं। जब तक राजनीतिक संरक्षण नहीं होगा पेपर लीक नहीं हो सकता। मोदी सरकार अच्छी तरह जानती है, इसीलिए सदन शुरू होने से पहले ही इस उलझन के सूत्रधारों तक कानून कदम बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख ने विपक्ष की नींद हराम कर दी। अब उनके पास हंगामा करने के अलावा कोई और काम नहीं। सदन का नियम है कि पहले महामहिम के भाषण पर चर्चा और उसके बाद ान गतिविधियां। लेकिन विपक्ष अपनी हेकड़ी दिखा अपने अनुसार सदन चलाना जा रहा है, जो लोक/राज्य सभा नियम के विरुद्ध है।   

NEET पेपर लीक मामले में CBI की कार्रवाई जारी है। सीबीआई ने शुक्रवार (28 जून) की शाम को शुक्रवार (28 जून) को झारखंड के हजारीबाग से ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और पत्रकार जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया है। इसके पहले चार और आरोपित पकड़े गए हैं। सभी आरोपितों को CBI प्लेन से दिल्ली लाने की तैयारी में है।

जाँच के दौरान सीबीआई ने एहसान उल हक और इम्तियाज आलम के साथ-साथ हजारीबाग के दो पत्रकारों- मोहम्मद जमालुद्दीन और मोहम्मद सलाउद्दीन को भी ट्रैक किया था। इसमें एक पत्रकार जमालुद्दीन को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। जमालुद्दीन झारखंड के एक हिंदी दैनिक अखबार से जुड़ा है। पेपर लीक मामले पर एहसान की जमालुद्दीन और सलाउद्दीन से लगातार बातचीत होती रहती थी।

सीबीआइ को जानकारी मिली कि नीट परीक्षा के तत्काल बाद एहसान उल हक विदेश घूमने गया था और करीब एक सप्ताह तक इंडोनेशिया के बाली में था। परीक्षा के पहले और बाद के उसके फोन डिटेल में बिहार से भी कनेक्शन मिला है। पेपर लीक कराने वाले गिरोह ने हजारीबाग में कई कोचिंग संचालकों से मोटी रकम लेकर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए थे। इनमें एक प्रोफेसर की भूमिका भी संदिग्ध है।

CBI और पुलिस के मुताबिक, 3 मई को NEET के प्रश्न पत्र कूरियर एजेंसी ब्लू डार्ट के हजारीबाग नूतन नगर सेंटर से बैंक ले जाने की बजाय पहले ओएसिस स्कूल लाए गए। इसके बाद यहाँ से बैंक भेजे गए थे। माना जाता है कि ओएसिस स्कूल में ही पेपर का पैकेट खोला गया था। ये सभी सरगना संजीव मुखिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। मुखिया का गैंग पेपर के बॉक्स का सील तोड़ने में माहिर है।

ओएसिस स्कूल भी NEET परीक्षा का एक सेंटर था। इस सेंटर का प्रश्न पत्र और बुकलेट पटना में अधजला बरामद हुआ था। इस मामले का यह सबसे बड़ा सबूत है। इससे पहले 27 जून को सीबीआई ने पटना से मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार किया था। उससे पहले दो अन्य आरोपित चिंटू और मुकेश को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।

NEET के अलावा, UGC-NET की परीक्षा भी इस ओएसिस स्कूल में आयोजित हुई थी। इसी स्कूल से ही यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्र भी लीक होने का शक है। सीबीआई की टीम ने स्कूल के वाइस प्रिंसिपल सह सेंटर सुपरिंटेंडेंट इम्तियाज आलम का एक मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है। इसके अलावा, जाँच एजेंसी ने अन्य कई सामानों को जब्त किया है।

पटना में 28 जून को CBI की टीम आरोपित चिंटू और मुकेश को लेकर उनके दोस्त रॉकी के घर पहुँची। बताया जा रहा है कि पटना के कंकड़बाग में रॉकी के घर से कई सबूत हाथ लगे हैं। चिंटू की देवघर में गिरफ्तारी के बाद रॉकी फरार हो गया था। CBI ने चिंटू, मुकेश, आशुतोष और मनीष के मोबाइल की जाँच की। ये सभी आरोपित 6 महीने से आपस में संपर्क में थे।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है। इस पेपर पर दी गई जानकारी से पता चला था कि ये प्रश्न पत्र हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के परीक्षा केंद्र से लीक हुआ था।

मनीष प्रकाश ने इस स्कूल में 20 से 25 NEET परीक्षार्थियों को रुकवाकर उन्हें प्रश्न पत्र दिया था और उन्हें आंसर शीट रटवाया था। कहा जा रहा है कि मनीष प्रकाश ने संजीव मुखिया के कहने पर परीक्षार्थियों के लिए इसका इंतजाम किया था। मनीष नालंदा का रहने वाला है। उसका परिवार पटना के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के संदलपुर इलाके में रहता है। चिंटू संजीव मुखिया का रिश्तेदार है।

वहीं, बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। संजीव मुखिया यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपित रवि अत्री भी संजीव मुखिया से जुड़ा है। इसके अलावा, कई परीक्षाओं के पेपर लीक से भी मुखिया जुड़ा हो सकता है।