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तेलंगाना : बिजली विभाग की खोली पोल तो महिला पत्रकार पर हो गया पुलिस केस: कांग्रेस याद करवा रही इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी की प्रेस सेंसरशिप

महिला पत्रकार और रेवंड रेड्डी के साथ राहुल गाँधी (फोटो- मिंट, X/रेवती और X_TGSPDCL)
तेलंगाना पुलिस ने बुधवार (19 जून) को एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह पत्रकार राज्य में बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग द्वारा ग्राहकों के कथित उत्पीड़न से संबंधित जनता की शिकायतों को लगातार उजागर कर रहा था। इसको लेकर पुलिस ने पत्रकार पर जानबूझकर झूठ फैलाने और राज्य सरकार एवं उसके बिजली विभाग TGSPDCL को बदनाम करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैदराबाद स्थित पत्रकार रेवती ने इसे अपने पत्रकारीय प्रयासों के लिए ‘सम्मान का पदक’ बताया है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के चयनात्मक प्रयोग को लेकर कांग्रेस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को टैग किया।

पत्रकार रेवती ने लिखा, “एक विचित्र कदम उठाते हुए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि तेलंगाना पावर एंड कंपनी के असली अपराधी घूम रहे हैं, जिन्होंने दिनदहाड़े एक महिला उपभोक्ता को परेशान किया!” कांग्रेस नेताओं से उन्होंने पूछा, “क्या मीडिया की स्वतंत्रता पर आपका यही रुख है? क्या आपकी सरकार सच को उजागर करने वाले पत्रकारों को चुप कराने की कोशिश कर रही है?”

रेवती ने राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सीएम रेवंत रेड्डी से कहा, “अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो न्याय के लिए हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े हों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करें! मैंने प्रताड़ित महिला की निजता की रक्षा के लिए उसका  वीडियो पोस्ट नहीं करने का फैसला किया। अगर यही अधिकारी मीडिया से गुंडागर्दी करते हैं तो लोगों की रक्षा कौन करेगा?”

रेवती की एक्स (ट्विटर) टाइमलाइन के अनुसार, वह बिजली विभाग से जुड़ी जनता की शिकायतों को उजागर करती रही हैं। इससे पहले की एक पोस्ट में रेवती ने एक महिला की चिंताओं को साझा किया था, जिसे अपने क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती के खिलाफ पोस्ट करने पर बिजली विभाग द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया था।

पत्रकार रेवती ने महिला की पहचान को उजागर नहीं करते हुए कहा कि उस महिला ने उन्हें बताया था कि एक लाइनमैन उसके घर आया था और उसे अपनी पोस्ट हटाने के लिए कहा था। आरोप यह भी है कि जब महिला ग्राहक ने बिजली विभाग के अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ट्वीट करने के बजाय उन्हें फोन करना चाहिए था।

महिला ग्राहक के अनुसार, उन्हें बताया गया, “बिजली विभाग पर ऊपर के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है।” पत्रकार रेवती ने कहा कि उन्होंने घटना की जाँच की है और उनके पास उस बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग है। हालाँकि, सुरक्षा कारणों से और महिला की निजता का सम्मान करते हुए वे इस रिकॉर्डिंग को साझा नहीं करना चाहती हैं।

पत्रकार रेवती के अनुसार, जिस महिला ग्राहक ने बिजली कटौती के बारे में ट्वीट किया था, वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, क्योंकि वह किराए के घर में रहती है और बिजली विभाग के कर्मचारी उसका पता जानते हैं। संयोग से हैदराबाद की एक पत्रकार नवीना ने कहा कि जब से उसने बिजली कटौती के बारे में ऑनलाइन शिकायत की है, तब से वह एक चिंतित हो गई हैं।

एक अन्य ट्वीट में रेवती ने तेलंगाना पुलिस की चुनिंदा प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया, क्योंकि उन्होंने अपनी दो शिकायतों पर उनकी प्रतिक्रिया को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक छिपी हुई धमकी जारी करके जवाब दिया। बाद में उसी के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सीएम के भाई के खिलाफ उनकी दूसरी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।

महिला पत्रकार के अनुसार, 12 जून 2024 को सैयद सलीम नामक व्यक्ति पर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई तिरुपति रेड्डी के गुर्गों ने कथित तौर पर हमला किया था।

FIR में उल्लेखित विवरण

रेवती द्वारा साझा की गई FIR की कॉपी के अनुसार, पुलिस को 19 जून 2024 की तड़के एलबी नगर क्षेत्र में कार्यरत एक सहायक अभियंता एम दिलीप (33) से शिकायत मिली। शिकायतकर्ता ने कहा कि 18 जून की शाम करीब 5 बजे उन्हें अपने उच्च अधिकारियों से एक मैसेज मिला था।
उन्होंने आगे कहा कि उच्च अधिकारियों ने कहा कि एक्स हैंडल @revathitweets ने एक मैसेज पोस्ट किया है कि एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे से बिजली बाधित है। हालाँकि, सबस्टेशन की डाटा शीट की जाँच के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पाया कि पिछले 6 महीनों में एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे की बिजली कटौती की समस्या नहीं आई थी।
शिकायतकर्ता ने आगे कहा, “यह केवल एक झूठा आरोप है और जानबूझकर राज्य सरकार एवं उसके संगठन टीजीएसपीडीसीएल को बदनाम किया जा रहा है।” इसलिए, उन्होंने ट्विटर (एक्स) अकाउंट धारक @revathitweets के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इसलिए एफआईआर दर्ज की जाए, एफआईआर कॉपी में जोड़ा गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने सीआर नंबर 662/2024 में धारा 505 आईपीसी और आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) के तहत मामला दर्ज किया और जाँच इंस्पेक्टर एल रामंजनेयुलु को सौंप दी गई। हैदराबाद के कई पत्रकारों-नेताओं और एक्स यूजर्स ने बिजली विभाग से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों को फैलाने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कॉन्ग्रेस की आलोचना की।
उनमें से कई लोगों ने तर्क दिया कि भले ही उसके दावे सच न हों, लेकिन बिजली विभाग द्वारा बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग के कर्मियों द्वारा ग्राहकों को परेशान करने के मुद्दों को उजागर करने पर आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय जवाबी कार्रवाई के साथ उन्हें स्पष्ट किया जा सकता था।
केसीआर मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री और बीआरएस नेता केटीआर ने पूछा कि क्या पुलिस विभाग ही ऊर्जा विभाग चला रहा है या फिर राज्य में पुलिस राज है।
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी के ‘खटाखट खटाखट’ मुफ्त चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “कांग्रेस शासित तेलंगाना में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायत करने पर महिला को परेशान किया गया।”

रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाते ही सोनिया गाँधी बन गईं ‘तेलंगाना की माँ’

चाटुकारिता की भी एक सीमा होती है, लेकिन कांग्रेस हमेशा से सभी मापदंडों को पार करती रही है। कभी India is Indira, Indira is India कहते थे और अब विरोधी स्वरों के बीच कांग्रेस पार्टी ने घोषणा कर दी है कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वह भी परिवार को return gift देने में पीछे नहीं रहे। वो फ़िलहाल राज्य में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री पद का दायित्व मिलने की घोषणा के बाद रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आलाकमान का धन्यवाद दिया। उन्होंने इस दौरान सोनिया गाँधी को ‘हम सब की प्रिय तेलंगाना की माँ’ तक बता दिया। वहीं उन्होंने प्रियंका गाँधी को करिश्माई नेता करार दिया। रेवंत रेड्डी ने इस दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद दिया।

रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना में चुनाव प्रचार के दौरान अपने भाषणों के माध्यम से जनता से संपर्क साधा और KCR की सरकार पर हमलावर रहे। उन्हें 1 दिन की जेल भी हुई थी। चेरलापल्ली सेन्ट्रल जेल से निकलने के बाद उन्होंने ऐलान किया था कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि मुख्यमंत्री KCR के लिए तेलंगाना में कोई राजनीतिक जमीन न बचे। रेवंत रेड्डी ने ABVP से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 2017 में कांग्रेस में आने से पहले लंबे समय तक TDP में रहे।

2021 में उन्होंने पार्टी ने जब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी तब संगठन में कई लोग उन्हें जानते तक नहीं थे। दिसंबर 2018 में जब उन्होंने केसीआर के कोसी दौरे के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था तो उन्हें हाउस अरेस्ट में डाल दिया गया था। मार्च 2020 में KCR के बेटे KTR के नए-नए बने फार्महाउस के ऊपर से ड्रोन उड़ने के लिए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया। दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2023 तक 7 बार तेलंगाना पुलिस ने उन्हें हिरासत में रखा।

जुलाई 2021 में तेलंगाना में जमीनों के ई-ऑक्शन में 1000 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपों के बाद उन्होंने प्रदर्शन का ऐलान किया, तो उन्हें जुबली हिल्स स्थित उनके आवास में ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उसी साल दिसंबर में भूपलपल्ली में धान खरीद के मुद्दे पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया। मार्च 2022 में उन्हें ओस्मानिया यूनिवर्सिटी में जाने से रोक दिया गया। उस दौरान कई परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के बाद राज्य में आंदोलन तेज़ था।

वित्तीय आयोग द्वारा ग्राम पंचायत को फंड न देने के बाद सरपंचों ने आंदोलन किया था, उसमें भी उन्हें रेवंत रेड्डी का साथ मिला और उस दौरान उन्हें फिर हाउस अरेस्ट किया गया। न सिर्फ BRS, बल्कि अपनी पार्टी के लोग भी उनके पीछे लगे थे। आलाकमान से शिकायत की गई कि वो एकतंत्रीय व्यवस्था चलाते हैं और अपने समर्थकों को आगे बढ़ाते हैं। कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ भी दी। कर्नाटक में जीत से भी तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को फायदा मिला।

वहीं भाजपा ने जुलाई 2023 में अचानक से फायरब्रांड नेता बंदी संजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर उनकी जगह केंद्रीय मंत्री G किशन रेड्डी को भेज दिया। इससे भाजपा का चुनावी अभियान कमजोर पड़ा। रेवंत रेड्डी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता पार्टी के नेता रहे जयपाल रेड्डी की भतीजी से शादी की है। छात्र नेता के रूप में ही उन्होंने महबूबनगर में गाँवों में पाँव जमाने शुरू कर दिए थे। TDP ने उन्हें कोदंगल में अपना आधार मजबूत करने का अवसर दिया। अब वो तेलंगाना के मुख्यमंत्री बन रहे हैं।

तेलंगाना : तन पर वर्दी, हाथ में गुलदस्ता और झुके कंधे: DGP भागे-भागे गए कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को बधाई देने, EC ने किया सस्पेंड

रेवंत रेड्डी के साथ तेलंगाना डीजीपी अंजनी कुमार (चित्र साभार: HT)
चुनाव आयोग ने तेलंगाना के डीजीपी अंजनी कुमार को निलंबित कर दिया है। डीजीपी अंजनी को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। वह सुबह तेलंगाना कांग्रेस  अध्यक्ष और प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँचे थे।

3 दिसंबर 2023 तेलंगाना समेत चार राज्यों के चुनावों की मतगणना के दौरान ही जब रुझानों में कांग्रेस, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति को पीछे छोड़ती दिखी तो डीजीपी अंजनी कुमार अन्य कुछ अधिकारियों के साथ रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँच गए और बाकायदा उन्हें गुलदस्ता देते हुए फोटो भी खिंचवाई।

थोड़ी देर में डीजीपी की रेवंत रेड्डी के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग उनकी आलोचना करने लगे। लोगों ने कहा कि एक सेवारत अधिकारी कैसे चुनाव के अंतिम नतीजों को जाने बिना एक दल के मुखिया से मिलने पहुँच गया।

जानकारी के अनुसार, रेवंत रेड्डी के साथ ही राज्य के नोडल पुलिस अफसर संजय जैन और चुनावी खर्चों का देखरेख करने वाले अधिकारी महेश भागवत भी रेवंत रेड्डी के पास मिलने पहुँचे थे।

119 सीटों पर हुए तेलंगाना चुनावों में कांग्रेस 64 सीटों पर आगे है जिनमें से कुछ सीटों पर वह जीत भी चुकी है। इसके प्रदेश अध्यक्ष व तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी, कोडंगल सीट से जीते हैं और एक अन्य सीट कामारेड्डी से हार गए हैं। इस कामारेड्डी सीट पर उन्हें भाजपा के केवी रेड्डी ने हराया है। इसी कमारेड्डी सीट पर अब तक सत्तारूढ़ बीआरएस के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी हार गए हैं।

वहीं, अंजनी कुमार 1990 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह दिसम्बर 2022 में तेलंगाना के डीजीपी बने थे। इससे पहले हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर रहे थे। उनका नक्सल विरोधी अभियान में काफी अनुभव रहा है, वह इनसे लड़ने के लिए बनाई गई यूनिट ‘ग्रेहाउंड्स’ के मुखिया थे।

तेलंगाना :क्यों मुस्लिमों ने थामा ‘हाथ’? क्या कट्टरपंथी चलाएंगे सरकार? जागो हिन्दुओं जागो, कहीं बहुत देर जाए !


5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक से ही कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई है और वो है – तेलंगाना। तेलंगाना के गठन के बाद से ही वहाँ BRS सत्ता में थी। BRS (भारत राष्ट्र समिति) का नाम पहले TRS (तेलंगाना राष्ट्र समिति) हुआ करता था, लेकिन मुख्यमंत्री KCR (कलवाकुन्तला चंद्रशेखर राव) की राष्ट्रीय राजनीति की महत्वकांक्षाओं के कारण इसका नाम दिसंबर 2022 में BRS कर दिया गया था। हालाँकि, अब अपने ही राज्य में उनकी ऐसी दुर्गति हो गई है कि दिल्ली तो एकदम दूर है।

तेलंगाना के विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस 64 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। बहुमत के लिए 60 सीटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में उसका सरकार बनाना तय है। वहीं पिछले 10 वर्षों से वहाँ सत्ता में रही BRS 39 सीटों पर सिमट गई है। भाजपा की बात करें तो पहले वहाँ उसका एक ही विधायक था लेकिन अब 8 हैं। वहीं हैदराबाद की 8 में से 7 सीटें AIMIM ने अपने पास रखी, जो पहले से ही उसके पास थी। हैदराबाद की एकमात्र सीट भाजपा जीतती रही है जो है गोशामहल – वहाँ से टी राजा सिंह ने बतौर MLA हैट्रिक लगाई है।

अगर भाजपा ने राजा सिंह के बयान पर पार्टी से निकालने की बजाए उनके साथ खड़ी होती, स्थिति कुछ और होती। पूरे तेलंगाना में राजा सिंह ही मोदी-योगी बन चुनाव संग्राम में भाजपा को अग्रिम पंक्ति में लेकर आने की क्षमता रखते हैं। सम्भावना थी कि कांग्रेस भी बहुमत लाने में असमर्थ रहती। तेलंगाना में राजा ही ओवैसी, KCR और मुस्लिम कट्टरपंथियों से लड़ने की हिम्मत रखते हैं, बशर्ते पार्टी उनका साथ न छोड़े। जो गलती भाजपा ने नूपुर शर्मा केस में की वही राजा सिंह के साथ। भाजपा को TimesNow एंकर सुशांत सिन्हा की तरह फैब्रिकेटेड वीडियो और असली वीडियो को मीडिया के सम्मुख रख कट्टरपंथियों को जवाब देना था। मीडिया भी जनता के सामने सच्चाई लाने में पूर्णरूप से फेल रहा। कट्टरपंथी कितनों का 'सर तन से जुदा'करते। टीवी चर्चा में अगर कोई पक्ष द्वारा उस चैनल का नाम लेने पर तुरंत यह कहकर रोक दिया जाता था कि क्यों हम दूसरे की पब्लिसिटी करें? यहाँ मीडिया भी अपनी TRP बढ़ाने के चक्कर में सच्चाई से दूर भाग रहा था। अगर भाजपा और मीडिया ने तुष्टिकरण के मकड़जाल में फंसने की बजाए सुशांत की तरह सच्चाई सामने लेकर आए होते, शांतिप्रिय मुसलमान भी कट्टरपंथियों के विरोध में सड़क पर आ गया होता। आज भी कट्टरपंथियों को छोड़ हर मुसलमान को सच्चाई मालूम ही नहीं, वह तो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना हुआ पड़ा है।   

कुर्सी के भूखे हिन्दू नेता मुस्लिम वोटों की खातिर अपने सनातन धर्म को बदनाम करने में लगे थे, जबकि मुस्लिम कांग्रेस द्वारा तीन तलाक बिल का विरोध करने के कारण कर्नाटक से लेकर तेलंगाना तक भाजपा को हराने कांग्रेस के पीछे आ गए। अभी भी समय है, जब तक हिन्दू सनातन विरोधियों के विरुद्ध एकजुट होकर उनका परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं करेंगे, ये विष फैलाते रहेंगे।  

तेलंगाना में BRS और AIMIM एक समझौते के तहत चुनाव लड़ती रही है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के साथ के कारण BRS को मुस्लिम वोटों का भी फायदा मिलता रहा है। हैदराबाद के मुस्लिम वोटर तो AIMIM के साथ रहते ही हैं। लेकिन, इस चुनाव में ऐसा प्रतीत होता है कि मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस को प्राथमिकता दी, BRS-AIMIM की जगह। इस चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत 39.40 रहा तो वहीं BRS को 37.35% वोट मिले।

KCR ने किया था ‘मुस्लिम IT पार्क’ का वादा

दोनों पक्षों ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने की पूरी कोशिश की। KCR ने तो यहाँ तक वादा किया था कि मुस्लिमों के लिए अलग से IT पार्क बनवाया जाएगा। उन्होंने हैदराबाद के पास पहाड़ीशरीफ में मुस्लिमों के लिए ये आईटी पार्क बनवाने की बात कही थी, अगर बीआरएस सत्ता में लौटती है तो। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पर मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक समझने और उनके विकास के लिए कोई काम न करने का आरोप लगाया। यहाँ तक कि उन्होंने शिक्षा एवं रोजगार में मुस्लिमों के आरक्षण को 12% तक करने की घोषणा कर डाली।
उन्होंने मुस्लिमों के लिए ‘शादीखाना’ तैयार करने की घोषणा की। सिर्फ मुस्लिमों के लिए 296 आवासीय विद्यालय खोले। यानी, उन्होंने राज्य की 13% जनसंख्या पर 12,000 करोड़ रुपए अलग से खर्च करना पड़ा। अब ये भी साफ़ हो गया है कि I.N.D.I. गठबंधन में भी BRS को कोई एंट्री नहीं मिलेगी। लोकसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति और कमजोर होगी, क्योंकि मुस्लिम वोटों के लिए मारामारी और तेज़ होगी। हालाँकि, मुस्लिम वोटरों के रुख से साफ़ है कि वो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को मजबूत करना चाहती है ताकि वो भाजपा के खिलाफ लड़ाई में आ सके।
वो मुस्लिम लड़कियों के लिए ‘शादी मुबारक’ नामक योजना लेकर आए, जिसके तहत उन्हें शादी के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। उन्होंने पुराने हैदराबाद के विकास को तुर्की की राजधानी इस्ताम्बुल की तर्ज पर करने की बात कही थी। चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के राज्य अध्यक्ष हामिद मोहम्मद खान ने कहा था कि हमारे पास इसका कोई कारण नहीं है कि हम BRS को समर्थन देना जारी रखें। उन्होंने पार्टी पर संसद में मुस्लिम विरोधी बिल्स के समर्थन का आरोप लगाया।
तीन तलाक के खिलाफ आए बिल के दौरान KCR की पार्टी वोटिंग से अनुपस्थित रही थी। वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के पूर्व राज्य अध्यक्ष हाफिज पीर सब्बीर अहमद ने भी BRS पर मुस्लिमों को 12% आरक्षण के मुद्दे पर मुस्लिमों से वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। तेलंगाना में मुस्लिमों की 13% जनसंख्या है। राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ भी तेलंगाना में मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाकों से गुजरी। इस बार ओवैसी की पार्टी ने 9 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, वहीं बाकी सभी सीटों पर BRS का समर्थन किया था।

कांग्रेस ने मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए बनाई विशेष रणनीति

इसके बावजूद मुस्लिम वोटरों ने KCR को अपनी पहली पसंद नहीं बनाया, जबकि ओवैसी 9 में से 7 सीटें जीतने में कामयाब रहे। जहाँ एक तरफ KCR मुस्लिम तुष्टिकरण में डूबे हुए थे, वहीं कांग्रेस ने भी मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए कम प्रयास नहीं किए। कर्नाटक के आवासन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मीर अहमद खान को तेलंगाना में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए लगाया था। उन्होंने 28 दिन तेलंगाना में रह कर मुस्लिम समुदाय के नेताओं, चिंतकों और पार्टी के मुस्लिम नेताओं के साथ एक के बाद एक बैठकें की।
उन्होंने कई रैलियाँ भी मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाकों में की। 49 सीटों पर उन्होंने मुस्लिमों को कांग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकृत करने के लिए खूब प्रयास किए। उन्होंने कांग्रेस महासचिव KC वेणुगोपाल के साथ मिल कर रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया और वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी लगातार संपर्क में थे। BRS और AIMIM के कई नेताओं को भी इस रणनीति के तहत कांग्रेस में लाया गया। कर्नाटक के कई अन्य मुस्लिम नेताओं को भी तेलंगाना में लगाया गया था।
यही सब कारण रहे कि ग्रेटर हैदराबाद को छोड़ दें तो तेलंगाना के लगभग हर जिले में मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिले। हैदराबाद के गोशामहल जहाँ से फायरब्रांड हिन्दू नेता राजा सिंह जीतते रहे हैं, वहाँ से ओवैसी ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। वहीं जुबली हील्स क्षेत्र में BRS प्रत्याशी के रहते हुए कांग्रेस उम्मीदवार अज़हरुद्दीन के सामने अपना प्रत्याक्षी तारा। नतीजा ये हुआ कि यहाँ से कांग्रेस को हार मिली। हालाँकि, कांग्रेस ने इसे इस तरह से प्रचारित किया था कि मुस्लिम वोटों को जानबूझकर विभाजित किया जा रहा है।
इसीलिए, ये कहा जा सकता है कि असदुद्दीन ओवैसी ने अपने हैदराबाद का गढ़ तो जैसे-तैसे बचा लिया लेकिन बाकी के तेलंगाना में वो अपने मित्र KCR को मुस्लिम वोट ट्रांसफर नहीं करा सके। तभी ज़मीर अहमद खान ने भी कहा कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं के अलावा 49 सीटों के लिए ‘मुस्लिम थिंक टैंक’ के साथ मिल कर चुनावी रणनीति बनाने की प्रक्रिया सफल रही। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के नेताओं के साथ बैठकों को भी जीत का श्रेय दिया।
‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी भी मानते हैं कि मुस्लिम वोट कांग्रेस को मजबूत करने के लिए उसकी तरफ गया है। उन्होंने विधानसभा चुनावों में तेलंगाना के लिए सटीक आकलन किया था। ‘जन की बात’ के आकलन का कहना था कि वहाँ कांग्रेस को 48-64 सीटें मिल सकती हैं, वहीं BRS 40-55 सीटों के बीच रहेगी, और भाजपा की सीटों की 13 रहेगी। उनका आकलन सटीक रहा और BRS को उनके आकलन से सिर्फ 1 सीट कम मिली।

‘जो मोदी के खिलाफ मजबूत होगा, उसके खिलाफ गोलबंद होगा मुस्लिम वोट’: प्रदीप भंडारी

प्रदीप भंडारी से ऑपइंडिया ने तेलंगाना में मुस्लिम वोटरों के रुख को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोटों के मुख्य मकसद है कि उसे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकना है, उसकी हमेशा से पहली प्राथमिकता कांग्रेस पार्टी होती है। उन्होंने कहा कि जब भी मुस्लिम मतदाता देखते हैं कि कांग्रेस मजबूत हो सकती है तो वो उस तरफ शिफ्ट होते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पार्टी ने ये माहौल बनाने की कोशिश की कि 2024 में नरेंद्र मोदी को हराया जा सकता है।
प्रदीप भंडारी मानते हैं कि इसी कारण मुस्लिम वोटरों को लगा कि ‘उनकी कांग्रेस’ बहुत अच्छे तरीके से चुनाव लड़ रही है, तो ऐसी स्थिति में अधिकतर मुस्लिम वोटर BRS से कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हुए। उन्होंने राजस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि कन्हैया लाल तेली के ‘सर तन से जुदा’ की इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी तो उन्हें मिले मुआवजे में देरी हुई, जबकि जयपुर में एक आपसी संघर्ष में मुस्लिम युवक की मौत हुई तो कलक्टर ने रातोंरात 50 लाख रुपए दे दिए। इसीलिए, मुस्लिमों को पता है कि उनकी पहली प्राथमिकता कांग्रेस है और वो इसीलिए ‘घर-वापसी’ करना चाहता है।
राजस्थान में जब ये सब हुआ तब वहाँ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। उन्होंने आँकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि जहाँ मुस्लिम वोटर ज़्यादा हैं, यानी 30% के आसपास हैं वहाँ राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा जीती है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस को लगता था कि जिस सीट पर मुस्लिम ज़्यादा हैं वहाँ वो केवल उनकी ही बातें कर के चुनाव जीत जाएगी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। अब तुष्टिकरण के खिलाफ लोग एकजुट हो रहे हैं।
प्रदीप भंडारी ने इस दौरान तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात की थी। ‘जन की बात’ के संस्थापक ने कहा कि जानबूझकर कांग्रेस पार्टी ने इस बयान की निंदा नहीं की, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की 35 सीटें जहाँ मुस्लिम वोट प्रभावी है वहाँ भाजपा की जीत हुई। छत्तीसगढ़ की 12 ऐसी सीटों में से भी अधिकतर भाजपा के खाते में गईं।
प्रदीप भंडारी ने कहा कि मुस्लिम वोट सिर्फ कांग्रेस के पीछे ही गोलबंद नहीं होगा, बल्कि अगर वो पश्चिम बंगाल में देखता है कि ममता बनर्जी की TMC मजबूत है तो वो उसके पीछे गोलबंद होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस मजबूत है तो उसके पीछे ये वोट गोलबंद हुआ। प्रदीप भंडारी इसमें एक और चीज ध्यान देने लायक बताते हैं – हिंदी हार्टलैंड के जो नतीजे आए हैं उसके बाद मुस्लिम वोटरों में एक हताशा आ गई है कि वो पूरी कोशिश कर के भी नरेंद्र मोदी को नहीं रोक पा रहे।
प्रदीप भंडारी आगे कहते हैं, “मुस्लिम वोटर हर उस पार्टी के खिलाफ गोलबंद होगा जो उसके हिसाब से 2024 में नरेंद्र मोदी को हरा सकती हो। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी या फिर दक्षिण भारत में कांग्रेस पार्टी, लेकिन वो तमिलनाडु में DMK के पीछे गोलबंद होगा। बंगाल और बिहार में वो कांग्रेस के पीछे नहीं जाएगा।” यानी, उनका साफ़ मानना है कि कांग्रेस मुस्लिमों की पहली पसंद होगी, लेकिन जहाँ क्षेत्रीय ताकतें भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रही हों वहाँ उनके साथ ये वोटर जाएँगे।

तेलंगाना : केसीआर मुस्लिमों के लिए स्पेशल पार्क बनाएंगे, इस्लामी तुष्टिकरण में जुटे मुख्यमंत्री ; मुस्लिम बेटियों की शादी पर 1 लाख लेकिन गैर-मुस्लिम को नहीं

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) ने सत्ता के लिए तुष्टिकरण की हदें पार कर दी हैं। उन्होंने सत्ता में फिर से लौटने पर मुस्लिम युवाओं के लिए एक अलग आईटी पार्क खोलने की घोषणा की है। उन्होंने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को कहा कि उनकी सरकार मुस्लिमों को पेंशन भी दे रही है और उनके लिए आवासीय स्कूल भी खोले हैं। उन्होंने मुस्लिमों से BRS पार्टी को ही वोट देने की अपील की।

तेलंगाना के महेश्वरम में एक रैली को संबोधित करते हुए सीएम केसीआर ने कहा, “हम मुस्लिम युवाओं के बारे में सोच रहे हैं। हैदराबाद के पास उनके लिए एक विशेष आईटी पार्क बनवाएँगे। यह आईटी पार्क पहाड़ी शरीफ के पास बनेगा।” उन्होंने कहा कि तुक्कुगुड़ा क्षेत्र में 52 नए उद्योग लगाए गए हैं। यहाँ फॉक्सकॉन इंडस्ट्री आ गया है और इससे लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी।

हिंदू और मुस्लिमों को अपनी दो आँखें बताते हुए भारत राष्ट्र समिति (BRS) पार्टी के प्रमुख और तेलंगाना के सीएम KCR ने कहा, “आज हमारी सरकार मुस्लिमों को भी पेंशन दे रही है। हमने आवासीय स्कूल खोले हैं, जिनमें मुस्लिम छात्र भी पढ़ते हैं। हम मुस्लिम युवाओं के बारे में सोच रहे हैं और उनके लिए हैदराबाद में आईटी पार्क बनाएँगे।”

मुस्लिमों पर तेलंगाना सरकार द्वारा किए जा रहे खर्चों के बारे में बताते हुए KCR ने कहा, “BRS की सरकार ने पिछले 10 सालों में अल्पसंख्यकों के विकास पर 12,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस ने अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के विकास पर सिर्फ 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए थे।”

उन्होंने कहा कि जब तक केसीआर जिंदा है, तब तक तेलंगाना धर्मनिरपेक्ष राज्य बना रहेगा। केसीआर ने कहा कि तेलंगाना शांतिपूर्ण राज्य है और यहाँ कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है। तेलंगाना को अलग राज्य बनवाने का श्रेय लेते हुए केसीआर ने कहा कि उनकी सरकार में 24 घंटे मुफ्त बिजली दे रही है और हर घर तक नल का पानी पहुँचाया है।

महेश्वरम से BRS के नेता और तेलंगाना के शिक्षा मंत्री सविता इंद्ररेड्डी चुनाव मैदान में हैं। इनके फेवर में चुनाव प्रचार करने के लिए के चंद्रशेखर राव महेश्वरम पहुँचे थे। बता दें कि राज्य में 30 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। वोटों की गिनती 3 दिसंबर 2023 को होगी।

सितंबर 2023 में केसीआर की सरकार ने तेलंगाना में कपड़े धोने वाले और नाई का काम करने वाले मुस्लिमों को हर माह 250 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। इस तरह की छूट अब तक एससी कम्यूनिटी के लोगों को ही हासिल थी, लेकिन हैदराबाद के सांसद और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के निवेदन पर राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए भी ये छूट जारी की।

वहीं, नवंबर 2023 के शुरुआत में यूनाइटेड मुस्लिम फोरम (UMF) ने सदस्यों ने BRS को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि बीआरएस सरकार ने तेलंगाना में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए ईमानदारी से काम किया और देश के दूसरे राज्यों की तुलना में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे ज्यादा बजट भी आवंटित किया है। उन्होंने कहा था कि ‘शादी मुबारक योजना’ अल्पसंख्यक समुदायों की औरतों की मदद कर रहा है।

दरअसल, शादी मुबारक योजना के माध्यम से केसीआर सरकार प्रत्येक मुस्लिम परिवार को 1,00,116 रुपए की वित्तीय सहायता देती है। साल 2014 में जब यह योजना शुरू की गई थी तो सहायता राशि 51,000 रुपए थी, लेकिन 6 साल में यह राशि लगभग दोगुनी हो गई है। बता दें कि साल 2020 तक 6 सालों में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण से संबंधित योजनओं के लिए सरकारी खजाने से 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च गए।

तेलंगाना : भारत का ज्यादा महंगा प्रदेश

तेलंगाना में देश में सबसे अधिक मुद्रास्फीति की दर बनी हुई है। 31 जनवरी को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में कहा गया है कि तेलंगाना में अप्रैल और दिसंबर 2022 के बीच इसी अवधि के राष्ट्रीय औसत 6.8 प्रतिशत के मुकाबले 8.7 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रामीण तेलंगाना में मुद्रास्फीति 9.2 प्रतिशत थी जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.3 प्रतिशत थी। तेलंगाना के शहरी से लेकर गांवों के लोग महंगाई से त्रस्त हैं लेकिन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) को जनता की परवाह ही नहीं है। विकास के पैमाने पर तेलंगाना अन्य राज्यों से पिछड़ती जा रही है। राज्य की जनता केसीआर की कार्यशैली और तुष्टिकरण की नीति और कामकाज से परेशान है। यही वजह है कि केसीआर की लोकप्रियता अब काफी निचले स्तर पर आ गई है।

जनता महंगाई से परेशान, केसीआर को उनकी परवाह नहीं

एक तरफ तेलंगाना की जनता महंगाई से परेशान है वहीं केसीआर प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने की अपनी चाहत को पूरा करने पर पूरा जोर लगा रहे हैं। राज्य की परेशानी से ध्यान हटाने के लिए वह विपक्षी नेताओं को एकजुट करने का नाटक करते हैं। केसीआर के मन में भी पीएम उम्मीदवार बनने की आकांक्षा इस कदर हिलोरे मारी कि उन्होंने अपनी पार्टी का नाम तक बदल दिया। तेलंगाना राष्ट्र समिति(टीआरएस) अब भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) हो गई है। वह बीआरएस को राष्ट्रीय पार्टी बनाकर चाहते हैं, हालांकि इसे अभी राष्ट्रीय पार्टी बनने में लंबा रास्ता तय करना है। लोगों की नाराजगी इस बात से भी बढ़ रही है कि केसीआर पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो कि देश के मूड के हिसाब से उनके खिलाफ जा सकती है। उनकी सरकार में उनका बेटा केटी रामाराव, बेटी कविता सहित कई रिश्तेदार भरे-पड़े हैं।

महंगाई के लिए बीआरएस सरकार जिम्मेदारः बंदी संजय

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने उच्च मुद्रास्फीति के लिए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार को दोषी ठहराया। बंदी संजय ने कहा कि महंगाई बढ़ने में ईंधन का बड़ा हाथ है। उन्होंने कहा, “बीआरएस सरकार पेट्रोल/डीजल की कीमतों पर वैट कम नहीं करेगी, भले ही केंद्र और अधिकांश राज्यों ने इसे कम कर दिया हो। केसीआर ने आम आदमी पर बोझ डालना जारी रखा।” भाजपा नेता ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण का बहिष्कार करने के लिए भी बीआरएस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस और मुख्यमंत्री केसीआर का एकमात्र फोकस उनका अपना परिवार है। उन्होंने कहा कि उनके मन में संविधान, परंपराओं और सामान्य शिष्टाचार के लिए कोई सम्मान नहीं है।

पीएम मोदी ने दिया विकास की सौगात, केसीआर को तेलंगाना के विकास की परवाह नहीं

हैरानी की बात यह है कि पिछले साल एक तरफ तो प्रधानमंत्री तेलंगाना राज्य को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देने गए थे लेकिन तब भी केसीआर को राजनीति ही सूझ रही थी। इन परियोजनाओं से जहां राज्य की तरक्की सुनिश्चित होगी वहीं युवाओं के अनेक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि केसीआर को तेलंगाना की जनता की परवाह नहीं है। यही वजह है कि जनता भी अब केसीआर से मुंह मोड़ने लगी है। हाल के चुनाव परिणाम में बीजेपी को मिल रही सफलता इसी ओर संकेत करते हैं। तेलंगाना को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी राज्य में थे, लेकिन प्रोटोकाल का उल्लंघन करते हुए वे खुद अगवानी के लिए नहीं आए। इतना ही नहीं केसीआर नीति आयोग जैसी संस्था की बैठक में भी भाग लेने से कतराते हैं। इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है। यही वजह है कि वहां की जनता अब उन्हें सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है।

अंधविश्वासी हैं केसीआर

मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राज्याश्रय दिया हुआ है। यहां अंधविश्वास के नाम पर क्या हो रहा है ये पूरे देश के लोगों को जानना चाहिए। किसे कहां जाना है’ किस दफ्तर में जाना है’ किसे मंत्री बनाना है’ ये सब अंधविश्वास तय करता है। यहां के विकास के लिए और इसे पिछड़ेपन से निकालने के लिए हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा। यहां सुशासन और तेज विकास की अकांक्षा प्रबल है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद लोकतंत्र का सहसे बड़ा दुश्मन है। आज आपने देखा होगा कि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और परिवारवाद गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। भाजपा सरकार इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है।’”

केसीआरः सचिवालय का ‘भूत’, वास्तु यज्ञ, न्यूमरोलॉजी का चक्कर

सीएम बनने के बाद केसीआर कभी सचिवालय नहीं गये। उन्‍हें किसी ने बताया क‍ि सचिवालय का वास्‍तु ठीक नहीं है। इसके लिए उन्‍होंने 2016 में 50 करोड़ की लागत से घर पर ही एक कार्यालय बनवाया। वे कभी सचिवालय नहीं गए जबकि उनकी सरकार के अध‍िकारी वहीं से काम करते हैं। उन्होंने बेगमपेट में अपने कैंप ऑफिस की मरम्मत कराई और इसे 5 मंजिल ऊंचा और 6 ब्लॉक्स तक बढ़ा दिया। इसके पीछे उन्‍होंने तर्क दिया क‍ि शासक को ऐसी जगह से काम करना चाहिए जो दूसरों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर हो। पिछले 5 साल से केसीआर सचिवालय की बजाय अपने सरकारी आवास से काम कर रहे हैं।

कोई भी काम ब‍िना मुहूर्त देखे नहीं करते केसीआर

केसीआर 6 नंबर को अपने लिए बहुत लकी मानते हैं। वे जब भी कुछ नया या बड़ा करते हैं तो उसमें 6 अंक जरूर होता है। उनके काफिले की गाड़‍ियों के नंबर में 6 जरूर होता है। कोई भी काम ब‍िना मुहूर्त देखे नहीं करते। मुहूर्त में भी इसका ध्‍यान रखा जाता है क‍ि उसके जोड़ के अंक 6 जरूर हो। वे जब पहली बार सीएम बने तो उन्होंने दोपहर 12:57 मिनट पर शपथ ली, जिसके अंकों का जोड़ 6 होता है। एक बार वह महबूब नगर जिला गए तो वहां 51 बकरों की बलि चढ़ाई गई। लोगों का दावा है कि 51 बकरों की बलि इसीलिए चढ़ाई गई क्योंकि इसका जोड़ भी 6 होता है। चंद्रशेखर राव जो कमेटियां बनाते हैं, उनके सदस्यों की संख्या भी इस तरह रखते हैं जिसके अंकों का जोड़ 6 हो। शायद यही वजह है कि उन्होंने किसानों के लिए जो को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई उसमें 15 सदस्य रखे। उनकी पार्टी की जिला समिति में 24 सदस्य हैं, राज्य स्तरीय समिति में 42 सदस्य हैं और इन सबका जोड़ 6 है।

न्यूमरोलॉजी के चक्कर में केसीआर ने विधानसभा भंग कर दिया

मुख्यमंत्री केसीआर ने सितंबर 2018 में विधानसभा भंग कर दी थी। 6 अंक को शुभ मानने वाले केसीआर ने इस अहम फैसले के लिए 6 सितंबर के दिन को चुना। बैठक भी ज्योतिष के आधार पर बुलाई थी। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की। केसीआर हैदराबाद की मशहूर हुसैन सागर झील कभी नहीं जाते, क्योंकि कहा जाता है कि हुसैन सागर झील जाने के बाद ही एनटी रामाराव से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी छिन गई थी।

केसीआर की ओछी राजनीति

ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री को फिर से चुनाव जीतना मुश्किल लग रहा है। हाल ही में राज्य में उपचुनाव में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी ने यहां अपना परचम लहरा दिया है। हार के डर से केसीआर बौखला गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर केसीआर की पार्टी के नेताओं ने मोदी गो बैक के नारे लगाए। जगह-जगह मोदी विरोधी पोस्टर भी लगाए। इससे राज्य की जनता में भी मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति गुस्सा है। लोगों का साफ मानना है कि विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर केसीआर गलत कर रहे हैं।

सिकंदराबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी कहा था कि यह तेलंगाना के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात है कि प्रधानमंत्री राज्य को लाभान्वित करने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे हैं और राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी से तेलंगाना नहीं आने के लिए कहने वाले पोस्टर लगाने की निंदा की। भाजपा नेता रामचंदर राव ने कहा, “क्या नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं? या तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं है? केसीआर एक बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति दक्षिणी राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या कर रहे हैं। रामचंदर राव ने कहा,” एमके स्टालिन और वाईएस जगन मोहन रेड्डी दोनों भाजपा के राजनीतिक विरोधी हैं। अगर वे प्रधानमंत्री का स्वागत कर सकते हैं तो केसीआर क्यों नहीं?”

केसीआर की सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव खुद को मुस्लिम तुष्टिकरण का चैंपियन साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी के विस्तार को पंख लग सके। केसीआर की सरकार में मुस्लिमों को खुश करने के लिए जहां उन्हें पूरी छूट दी जा रही है और उनके निर्देशों को लागू किया जा रहा है, वहीं हिन्दुओं और महिलाओं को दमन का शिकार होना पड़ा रहा है। तेलंगाना में अक्टूबर 2022 में आयोजित Group-1 की परीक्षा के दौरान हिन्दू महिलाओं से भेदभाव करते देखा जा सकता है। परीक्षा केंद्र पर बुर्का और हिज़ाब की खुली छूट थी। सुरक्षाकर्मी बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं की तलाशी भी नहीं ले रही थी। उन्हें सीधे परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी जा रही थी। वहीं हिन्दू महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं की चूड़ियां,पायल और कुंडल तक उतरवाया गया।

हिंदी की जगह उर्दू को दिया दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए राज्य में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने का एलान किया। यानी सरकारी कामकाज में तेलुगू के बाद उर्दू में भी कामकाज होगा। मुख्यमंत्री केसीआर का लंबे समय से मुस्लिमों के प्रति रुझान रहा है। लिहाजा, माना जा रहा है कि उन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि हिन्दी को दूसरी आधिकारिक भाषा होने का गौरव प्राप्त होगा मगर मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं किया।

तेलंगाना : केसीआर को बुलेटप्रूफ गाड़ी लौटा, बाइक से चल रहे राजा सिंह, कहा – कुछ हुआ तो तेलंगाना सरकार जिम्मेदार

हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा के निलंबित विधायक टी राजा सिंह ने राज्य सरकार पर अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा दी गई बुलेटप्रूफ गाडी को भी वापस कर दिया है और बाइक से चलना शुरू कर दिए हैं। राजा सिंह के अनुसार उन्हें जानबूझ कर बिगड़ी और खराब गाड़ी दी गई है जो उनके लिए सुरक्षा से ज्यादा असुरक्षा की वजह बन रही है। गाड़ी को सीधे मुख्यमंत्री को वापस देने के दौरान राजा सिंह को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था और बाद में छोड़ दिया। यह घटना 10 फरवरी, 2023 की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए गोशमहल विधानसभा से लगातार दूसरी बार से विधायक राजा सिंह ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले काफी समय से उनको आतंकियों और देशविरोधी ताकतों से खतरा है। इसी खतरे को देखते हुए उनको राज्य सरकार ने बुलेटप्रूफ कार उपलब्ध करवाई थी। राजा सिंह का आरोप है कि लगभग 3 साल पहले मिली ये बुलेटप्रूफ कार कम से कम 6 बार खराब हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कभी बीच रास्ते में ये रुक गई तो कभी इसका इंजन गर्म हो गया।

राजा सिंह ने आगे बताया कि उन्हें इस बात का भी शक होने लगा था कि सरकार ने उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी सुरक्षा के लिए दी थी या किसी साजिश के चलते। उनका दावा है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से कई बार गाड़ी को बदलने की माँग की, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया था। घटना के दिन का जिक्र करते हुए गोशमहल विधायक ने बताया कि अंतिम बार तो गाड़ी स्पीड में थी और उसका पहिया ही निकल कर बाहर हो गया जिस से उनका एक्सीडेंट होते-होते बचा। इस बार राजा सिंह ने अधिकारियों से नाराजगी जताई तो उन्हें किसी ने वही गाडी दिए रहने का सीधे मुख्यमंत्री के सी आर  का दबाव बताया।

बकौल राजा सिंह उन्होंने तय किया कि अगर खराब गाड़ी सीधे मुख्यमंत्री तेलंगाना के आदेश पर मिली है तो वो उन्ही को उसे लौटाएँगे भी। 10 फरवरी को राजा सिंह वही खराब गाडी ले कर मुख्यमंत्री के आवास पर पहुँच गए। यहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने राजा सिंह को रोका और इसी बात पर वहाँ बहस होने लगी। राजा सिंह वह बुलेटप्रूफ गाडी वहीं छोड़ दिए। इस दौरान पुलिस ने राजा सिंह को हिरासत में लिया और उन्हें मुख्यमंत्री आवास से ले कर विधानसभा में छोड़ कर चली गई।

राजा सिंह ने अपने फोटो और वीडियो भेज कर हमें आगे बताया कि अब वो बुलेट बाइक से चल रहे हैं। इस दौरान उनका कहना था कि अगर भविष्य में उनकी सुरक्षा के साथ कोई समस्या आती है तो उसका जिम्मेदार तेलंगाना की वर्तमान सरकार को माना जाए।

तेलंगाना : होर्डिंग पर भारत का गलत नक्शा; अपने ही जाल में कैसे फंस गए केसीआर, पीएम नरेंद्र मोदी के स्वागत में क्यों नहीं आते केसीआर?

अविभाजित आंध्र प्रदेश को आईटी क्षेत्र में विकसित करने में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की उपलब्धियों को कभी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन राज्य के जिस भाग को विकसित किया वही हिस्सा विभाजन होने पर तेलंगाना में चला गया और उस पर ऐश करने वाले केसीआर संवैधानिक पद पर बैठ अपने आपको किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं आंकने के कारण हर सरकारी प्रोटोकॉल का उलंघन कर रहे, जो उनके लिए लिए काँटों की सेज़ बन रही है। 
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की हर चाल उल्टी पड़ती जा रही है। राज्य की जनता केसीआर के कामकाज से परेशान है। विकास के पैमाने पर तेलंगाना अन्य राज्यों से पिछड़ती जा रही है। केसीआर की लोकप्रियता अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। ऐसे में खुद को बचाने के लिए वे रोज कोई ना कोई चाल चलते रहते हैं। लेकिन हर बार नाकामी हाथ लग रही है। राज्य की परेशानी से ध्यान हटाने के लिए विपक्षी नेताओं को एकजुट करने का नाटक करते हैं, लेकिन विकास की जगह रेवड़ी कल्चर को आगे बढ़ाने वाले केसीआर को कांग्रेस, एनसीपी, टीएमसी, जेडीयू, एसपी और आप हर जगह पीएम उम्मीदवार मौजूद होने से कोई कामयाबी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में खुद को बचाने के लिए वे सीधा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधने की नाकाम कोशिश करते हैं। 

मोदी इन दिनों दक्षिणी राज्यों के दौरे पर हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु के बाद प्रधानमंत्री आज आंध्रपदेश पहुंचे। इसके बाद तेलंगाना में जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने तेलंगाना सीएम केसीआर पर जमकर हमला किया। पीएम मोदी ने कहा कि तेलंगाना सरकार ने जनता पर अत्याचार किया। 

पीएम मोदी ने कहा, "तेलंगाना सरकार ने जनता पर अत्याचार किया है। अंधेरा छटने की शुरूआत हो गई है। मैंने देखा कि कैसे बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने पूरी तेलंगाना राज्य सरकार को एक विधानसभा सीट पर लाकर खड़ा कर दिया। बड़े आकाओं को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। ये दिखाता है कि जनता का साथ आशीर्वाद साथ है और आपकी मेहनत रंग ला रही है।" 

पीएम मोदी ने आगे कहा, "बीते कुछ समय से जो भी उपचुनाव हुए हैं सभी का एक ही संदेश है तेलंगाना में सूर्योदय दूर नहीं है। यहां हरतरफ कमल खिलेगा। भाजपा का तेलंगाना के साथ गहरा नाता रहा। यहां की जनता भाजपा को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का मन बना चुकी है। ये शहर तो सूचना और टेक्नोलॉजी का किला है।" 

मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, "इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राज्याश्रय दिया हुआ है। यहां अंधविश्वास के नाम पर क्या हो रहा है ये पूरे देश के लोगों को जानना चाहिए। किसे कहां जाना है? किस दफ्तर में जाना है? किसे मंत्री बनाना है? ये सब अंधविश्वास तय करता है। यहां के विकास के लिए और इसे पिछड़ेपन से निकालने के लिए हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा। यहां सुशासन और तेज विकास की अकांक्षा प्रबल है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद लोकतंत्र का सहसे बड़ा दुश्मन है। आज आपने देखा होगा कि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और परिवारवाद गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। भाजपा सरकार इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है?"

पीएम मोदी ने तेलंगाना के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा, "कुछ लोग निराशा के कारण हताशा के कारण भय के कारण अँधविश्वास के कारण सुबह शाम मोदी को गालियां दे रहे होते हैं। मेरी आपसे प्रार्थना है कि ऐसी बातों से आप परेशान मत होना। उनके पास गालियों के सिवा देने के लिए बचा क्या है। मैं तो बीते 22 सालों से अलग-अलग तरह की गालियां खा चुका हूं।" इस दौरान मैदान में मोदी-मोदी के नारे गूंजने लगे।"

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने के बाद भी प्रधानमंत्री कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को हजारों करोड़ रुपये की सौगात देने के लिए इन राज्यों में थे। लेकिन केसीआर यह आरोप लगाने में बिजी थे कि प्रधानमंत्री चीफ जस्टिस के शपथ ग्रहण समारोह में क्यों नहीं गए? जबकि केसीआर ने लगातार पांचवीं बार प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए तेलंगाना पहुंचे पीएम मोदी की अगवानी नहीं की। प्रधानमंत्री के दो दिवसीय दक्षिण भारत के दौरे के दौरान भाजपा विरोधी माने जाने वाले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने प्रोटोकॉल का पालन किया और पीएम मोदी की अगवानी की। वहीं दक्षिण भारत में तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर अकेले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने एक-दो नहीं पांच बार पीएम मोदी का अनादर करते हुए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

केसीआर को तेलंगाना के विकास की परवाह नहीं

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री तेलंगाना राज्य को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देने गए थे लेकिन तब भी केसीआर को राजनीति ही सूझ रही थी। इन परियोजनाओं से जहां राज्य की तरक्की सुनिश्चित होगी वहीं युवाओं के अनेक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि केसीआर को तेलंगाना की जनता की परवाह नहीं है। यही वजह है कि जनता भी अब केसीआर से मुंह मोड़ने लगी है। हाल के चुनाव परिणाम में बीजेपी को मिल रही सफलता इसी ओर संकेत करते हैं। तेलंगाना को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी राज्य में थे, लेकिन प्रोटोकाल का उल्लंघन करते हुए वे खुद अगवानी के लिए नहीं आए। जो केसीआर प्रधानमंत्री पर चीफ जस्टिस के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद नहीं होने का आरोप लगा रहे थे वे खुद अगवानी के समय गैरहाजिर थे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ केसीआर इसके पहले भी प्रोटोकाल का पालन करने में विफल रहे हैं। इतना ही नहीं केसीआर नीति आयोग जैसी संस्था की बैठक में भी भाग लेने से कतराते हैं। इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है। यही वजह है कि वहां की जनता अब उन्हें सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है।

मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही

मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राज्याश्रय दिया हुआ है। यहां अंधविश्वास के नाम पर क्या हो रहा है ये पूरे देश के लोगों को जानना चाहिए। किसे कहां जाना है’ किस दफ्तर में जाना है’ किसे मंत्री बनाना है’ ये सब अंधविश्वास तय करता है। यहां के विकास के लिए और इसे पिछड़ेपन से निकालने के लिए हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा। यहां सुशासन और तेज विकास की अकांक्षा प्रबल है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद लोकतंत्र का सहसे बड़ा दुश्मन है। आज आपने देखा होगा कि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और परिवारवाद गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। भाजपा सरकार इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है'”

सचिवालय का ‘भूत’, वास्तु यज्ञ, न्यूमरोलॉजी का चक्कर 

सीएम बनने के बाद केसीआर कभी सचिवालय नहीं गये। उन्‍हें किसी ने बताया क‍ि सचिवालय का वास्‍तु ठीक नहीं है। इसके लिए उन्‍होंने 2016 में 50 करोड़ की लागत से घर पर ही एक कार्यालय बनवाया। वे कभी सचिवालय नहीं गए जबकि उनकी सरकार के अध‍िकारी वहीं से काम करते हैं। उन्होंने बेगमपेट में अपने कैंप ऑफिस की मरम्मत कराई और इसे 5 मंजिल ऊंचा और 6 ब्लॉक्स तक बढ़ा दिया। इसके पीछे उन्‍होंने तर्क दिया क‍ि शासक को ऐसी जगह से काम करना चाहिए जो दूसरों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर हो। पिछले 5 साल से केसीआर सचिवालय की बजाय अपने सरकारी आवास से काम कर रहे हैं।

न्यूमरोलॉजी के चक्कर में केसीआर ने विधानसभा भंग कर दिया

केसीआर 6 नंबर को अपने लिए बहुत लकी मानते हैं। वे जब भी कुछ नया या बड़ा करते हैं तो उसमें 6 अंक जरूर होता है। उनके काफिले की गाड़‍ियों के नंबर में 6 जरूर होता है। कोई भी काम ब‍िना मुहूर्त देखे नहीं करते। मुहूर्त में भी इसका ध्‍यान रखा जाता है क‍ि उसके जोड़ के अंक 6 जरूर हो। वे जब पहली बार सीएम बने तो उन्होंने दोपहर 12:57 मिनट पर शपथ ली, जिसके अंकों का जोड़ 6 होता है। एक बार वह महबूब नगर जिला गए तो वहां 51 बकरों की बलि चढ़ाई गई। लोगों का दावा है कि 51 बकरों की बलि इसीलिए चढ़ाई गई क्योंकि इसका जोड़ भी 6 होता है। चंद्रशेखर राव जो कमेटियां बनाते हैं, उनके सदस्यों की संख्या भी इस तरह रखते हैं जिसके अंकों का जोड़ 6 हो। शायद यही वजह है कि उन्होंने किसानों के लिए जो को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई उसमें 15 सदस्य रखे। उनकी पार्टी की जिला समिति में 24 सदस्य हैं, राज्य स्तरीय समिति में 42 सदस्य हैं और इन सबका जोड़ 6 है। मुख्यमंत्री केसीआर ने सितंबर 2018 में विधानसभा भंग कर दी थी। 6 अंक को शुभ मानने वाले केसीआर ने इस अहम फैसले के लिए 6 सितंबर के दिन को चुना। बैठक भी ज्योतिष के आधार पर बुलाई थी। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की। केसीआर हैदराबाद की मशहूर हुसैन सागर झील कभी नहीं जाते, क्योंकि कहा जाता है कि हुसैन सागर झील जाने के बाद ही एनटी रामाराव से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी छिन गई थी।

अंधविश्वासी और विकास विरोधी राजनेता की बनती जा रही केसीआर की छवि

केसीआर की छवि अंधविश्वासी और विकास विरोधी राजनेता की बनती जा रही है। जबकि प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के कारण आज देश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री बिना आराम किए दिन-रात देश के विकास के काम में लगे हुए हैं। पिछले दो दिन में ही चार राज्यों में हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद प्रधानमंत्री अब जी20 सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया के लिए रवाना होंगे।

केसीआर की ओछी राजनीति से जनता में गुस्सा

ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री को फिर से चुनाव जीतना मुश्किल लग रहा है। हाल ही में राज्य में उपचुनाव में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी ने यहां अपना परचम लहरा दिया है। हार के डर से केसीआर बौखला गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर केसीआर की पार्टी के नेताओं ने मोदी गो बैक के नारे लगाए। जगह-जगह मोदी विरोधी पोस्टर भी लगाए। इससे राज्य की जनता में भी मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति गुस्सा है। लोगों का साफ मानना है कि विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर केसीआर गलत कर रहे हैं।

स्टालिन और जगनमोहन रेड्डी ने किया पीएम मोदी का स्वागत, केसीआर ने अपने मंत्री को भेजा

चार दक्षिणी राज्यों की अपनी दो दिवसीय यात्रा के हिस्से के रूप में जब प्रधानमंत्री हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर पहुंचे तो पीएम मोदी की अगवानी करने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) नहीं पहुंचे। उनकी जगह तेलंगाना सरकार में मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव ने प्रधानमंत्री की अगवानी की। हर बार जब पीएम मोदी तेलंगाना पहुंचे और मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया तो तलसानी ही प्रधानमंत्री की आगवानी करने पहुंचे। वहीं एक दिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल आरएन रवि के साथ डिंडीगुल में पीएम मोदी की अगवानी की। यही नहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने विजाग में पीएम मोदी का स्वागत किया।

दक्षिणी राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या कर रहे केसीआर

सिकंदराबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी कहा, “केसीआर इसमें राजनीति क्यों लाए? यह तेलंगाना के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात है कि प्रधानमंत्री राज्य को लाभान्वित करने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे हैं और राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं।” भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी से तेलंगाना नहीं आने के लिए कहने वाले पोस्टर लगाने की निंदा की। भाजपा नेता रामचंदर राव ने कहा, “क्या नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं? या तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं है? केसीआर एक बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति दक्षिणी राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या कर रहे हैं। रामचंदर राव ने कहा,” एमके स्टालिन और वाईएस जगन मोहन रेड्डी दोनों भाजपा के राजनीतिक विरोधी हैं. अगर वे प्रधानमंत्री का स्वागत कर सकते हैं तो केसीआर क्यों नहीं?”

रामागुंडम यूरिया प्लांट से तेलंगाना के लोगों के लिए रोजगार अवसर पैदा होंगेः पीएम मोदी

मोदी ने तेलंगाना में कहा, “तेलंगाना की जनता ने जिस पार्टी पर सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया, उसी पार्टी ने उन्हें धोखा दिया। यहां के लोग सुशासन और तेजी से विकास चाहते हैं। वे ऐसी बीजेपी सरकार चाहते हैं जो हर परिवार के लिए काम करें न कि सिर्फ एक परिवार के लिए।” पीएम मोदी ने पेद्दापल्ली जिले में रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (RFCL) का यूरिया प्लांट और रोड और सत्तुपल्ली के बीच नई रेलवे लाइन राष्ट्र को राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया, ”आज 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण तेलंगाना के लिए हुआ है। ये परियोजनाएं यहां खेती और उद्योग दोनों को बल देने वाली हैं, जो कि लोगों के लिए रोजगार पैदा करेगी।”

संयंत्र के CEO ने खोली केसीआर की झूठ की पोल

इस बीच केसीआर ने इस मामले में झूठ फैलाने की भी नाकाम कोशिश की। तेलंगाना की सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने आरोप लगाया है कि उद्धाटन कार्यक्रम के लिए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री को इसमें शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजा गया। हालांकि, अब उस संयंत्र के सर्वोच्च अधिकारी ने ही इस राजनीति की पोल खोल दी है। आरोप को खारिज करते हुए संयंत्र के CEO ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को निमंत्रण दिया था।

जमीन खिसकता देख मोदी विरोध पर उतरे केसीआर

केसीआर कुछ दिनों पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे हैं। राज्यसभा में जब भी विधेयकों को पास कराने की जरूरत पड़ती तो टीआरएस साथ देती रही। लेकिन इन दिनों केसीआर ने मोदी और भाजपा विरोध का झंडा उठा लिया है। इसका कारण यह है कि तेलंगाना में टीआरएस को भाजपा से जबरदस्त चुनौती मिल रही है। अब वहां टीआरएस का मुकाबला कांग्रेस के बजाय भाजपा से है। ऐसे में वे मोदी विरोधियों में सबसे आगे दिखना चाहते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन जैसे मोदी विरोधी मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बात कर रहे हैं और मोदी सरकार के खिलाफ एक फ्रंट को एकजुट करने में जुटे हैं। वे कई मौकों पर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोल चुके हैं। केसीआर ही नहीं उनकी बेटी और एमएलसी कविता और बेटे केटी रामाराव भी मोदी सरकार पर तीखे बयान छोड़ते रहे हैं। पीएम उम्मीदवार बनने की अपनी महत्वाकांक्षा पाले केसीआर इन दिनों भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध का झंडा थाम रखा है। वे देश में मोदी विरोधियों का सबसे बड़ा चेहरा बनना चाहते हैं। उनकी राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षा हिलोरे मार रही हैं। वह लगातार मोदी विरोधी गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिल रहे हैं और गैर भाजपा-गैर कांग्रेस एक मोर्चा का हवाई किला बना रहे हैं।

केसीआर की सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा

कांग्रेस, टीआरएस, टीएमसी, आरजेडी जैसी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों में मुस्लिम तुष्टिकरण की होड़ मची है। मुस्लिमों का वोट हासिल करने के लिए ये पार्टियां किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव खुद को मुस्लिम तुष्टिकरण का चैंपियन साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी के विस्तार को पंख लग सके। केसीआर की सरकार में मुस्लिमों को खुश करने के लिए जहां उन्हें पूरी छूट दी जा रही है और उनके निर्देशों को लागू किया जा रहा है, वहीं राजा सिंह जैसे हिन्दुओं और महिलाओं को दमन का शिकार होना पड़ा रहा है। हिन्दू विरोधी चंद्रशेखर राव हिन्दुओं को अपमानित करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। तेलंगाना में अक्टूबर 2022 में आयोजित Group-1 की परीक्षा के दौरान हिन्दू महिलाओं से भेदभाव करते देखा जा सकता है। परीक्षा केंद्र पर बुर्का और हिज़ाब की खुली छूट थी। सुरक्षाकर्मी बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं की तलाशी भी नहीं ले रही थी। उन्हें सीधे परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी जा रही थी। वहीं हिन्दू महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं की चूड़ियां,पायल और कुंडल उतरवाया गया।

KCR का देशप्रेम, होर्डिंग पर भारत का गलत नक्शा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) का नाम बदलकर अब भारतीय राष्ट्र समिति (BRS) कर दिया है जिससे क्षेत्रीय पार्टी की जगह अपने को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में पेश कर सकें। केसीआर ने यह कदम इसलिए उठाया कि वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनाव में विपक्ष के प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार के रूप में खुद को पेश कर सकें। लेकिन वो कहते हैं न कि नीयत में खोट हो तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो ही जाती है। अब भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) पार्टी के लांच के लिए उन्होंने जो पोस्टर जारी किया उसमें भारत का नक्शा ही गलत हो गया। पोस्टर में आधा कश्मीर गायब था। तुष्टिकरण के मामले में केसीआर को महारत हासिल है, हो सकता है यह भी किसी एजेंडे का हिस्सा हो।