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राजस्थान विधानसभा चुनाव: बदला राज, नहीं बदला रिवाज; लेकिन तेलंगाना में बीजेपी ने झंडा बुलंद किया

राजस्थान में विधानसभा चुनावों के नतीजों से साफ हो गया है कि राज्य में बीजेपी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। राज्य में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की हार के के साथ ही राजस्थान में कई वर्षों से हर बार सरकार बदलने का रिवाज कायम रहा है। कांग्रेसी शासन से परेशान मतदाताओं ने राज्य में राज बदलकर पार्टी को सबक सिखाने का भी काम किया है।

राजस्थान में पिछले कई वर्षो से एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस का राज आने का रिवाज बना हुआ है। यानी राजस्थान में जनता एक बार कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका देती है तो दूसरी बार बीजेपी को यह अवसर मिल जाता है। कांग्रेसी शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध, पेपर लीक और तुष्टिकरण की राजनीति से त्रस्त राज्य की जनता ने बीजेपी की सबका साथ-सबका विकास वाली राजनीति पर विश्वास करते हुए रिवाज का कायम रखा है। इसलिए बीजेपी को ज्यादा खुश होने की जरुरत भी नहीं। लेकिन इन विधान सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की झाड़ू कहां उड़ गयी कुछ नहीं पता? सब जगह खूब दिल्ली की तरह मुफ्त की रेवड़ियां भी देने का वायदा किया था, कोई दिल्ली वालों की तरह झांसे में नहीं आया। 

कांग्रेस ने राजस्थान में राज बचाने के लिए अपनी पूरी तात झोंक दी थी। पार्टी के सभी बड़े नेता जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटे रहे। मतदाताओं को फ्री रेवड़ी से लुभाने की कोशिश की गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर चुनावी सभा में कह रहे थे कि फिर से वापस आ रहा हूं। लेकिन पांच साल तक उनके प्रदर्शन को देख लोगों ने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया और राज बदल दिया।

राजस्थान में 25 नवंबर को राज्य की 200 में से 199 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद 3 दिसंबर को हुई मतगणना में सुबह से ही रुझान बीजेपी के पक्ष में दिखने लगे। बीजेपी ने जल्दी ही 115 से ज्यादा सीटों पर अपनी बढ़त बना ली। रुझानों में बहुमत मिलते दिख बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। पार्टी कार्यालय के सामने कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों की ताल पर नाचते दिख रहे हैं।

राजस्थान में राज बदलकर सरकार बनाने जा रही बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साथा है। बीजेपी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर एक लिखा है कि राजस्थान की जनता के गुस्से की आंधी में उड़ी कांग्रेस सरकार।

बीजेपी नेता जयवीर शेरगिल ने कहा कि बीजेपी इस विधानसभा चुनाव में 3-0 से जीत रही है। बीजेपी का विजय रथ मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जरूर आएगा। इस बार नहीं तो तेलंगाना में, भाजपा अगली बार राज्य में अपना झंडा बुलंद करेगी। 

भाजपा का टी राजा सिंह को निष्कासित करना बहुत बड़ी भूल थी। जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा। यदि भाजपा ने राजा को ओवैसी के षड़यंत्र में फंस पार्टी से निकालने की बजाये उसके समर्थन में खड़ी होती, निश्चित रूप अगर सत्ता में नहीं आती तो शक्तिशाली विपक्ष बनकर उभरती। जिसमें ओवैसी सफल हो गया। ओवैसी को उसके गढ़ तक समेटे रखने में राजा की भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता।   

तेलंगाना : केसीआर मुस्लिमों के लिए स्पेशल पार्क बनाएंगे, इस्लामी तुष्टिकरण में जुटे मुख्यमंत्री ; मुस्लिम बेटियों की शादी पर 1 लाख लेकिन गैर-मुस्लिम को नहीं

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) ने सत्ता के लिए तुष्टिकरण की हदें पार कर दी हैं। उन्होंने सत्ता में फिर से लौटने पर मुस्लिम युवाओं के लिए एक अलग आईटी पार्क खोलने की घोषणा की है। उन्होंने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को कहा कि उनकी सरकार मुस्लिमों को पेंशन भी दे रही है और उनके लिए आवासीय स्कूल भी खोले हैं। उन्होंने मुस्लिमों से BRS पार्टी को ही वोट देने की अपील की।

तेलंगाना के महेश्वरम में एक रैली को संबोधित करते हुए सीएम केसीआर ने कहा, “हम मुस्लिम युवाओं के बारे में सोच रहे हैं। हैदराबाद के पास उनके लिए एक विशेष आईटी पार्क बनवाएँगे। यह आईटी पार्क पहाड़ी शरीफ के पास बनेगा।” उन्होंने कहा कि तुक्कुगुड़ा क्षेत्र में 52 नए उद्योग लगाए गए हैं। यहाँ फॉक्सकॉन इंडस्ट्री आ गया है और इससे लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी।

हिंदू और मुस्लिमों को अपनी दो आँखें बताते हुए भारत राष्ट्र समिति (BRS) पार्टी के प्रमुख और तेलंगाना के सीएम KCR ने कहा, “आज हमारी सरकार मुस्लिमों को भी पेंशन दे रही है। हमने आवासीय स्कूल खोले हैं, जिनमें मुस्लिम छात्र भी पढ़ते हैं। हम मुस्लिम युवाओं के बारे में सोच रहे हैं और उनके लिए हैदराबाद में आईटी पार्क बनाएँगे।”

मुस्लिमों पर तेलंगाना सरकार द्वारा किए जा रहे खर्चों के बारे में बताते हुए KCR ने कहा, “BRS की सरकार ने पिछले 10 सालों में अल्पसंख्यकों के विकास पर 12,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस ने अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के विकास पर सिर्फ 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए थे।”

उन्होंने कहा कि जब तक केसीआर जिंदा है, तब तक तेलंगाना धर्मनिरपेक्ष राज्य बना रहेगा। केसीआर ने कहा कि तेलंगाना शांतिपूर्ण राज्य है और यहाँ कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है। तेलंगाना को अलग राज्य बनवाने का श्रेय लेते हुए केसीआर ने कहा कि उनकी सरकार में 24 घंटे मुफ्त बिजली दे रही है और हर घर तक नल का पानी पहुँचाया है।

महेश्वरम से BRS के नेता और तेलंगाना के शिक्षा मंत्री सविता इंद्ररेड्डी चुनाव मैदान में हैं। इनके फेवर में चुनाव प्रचार करने के लिए के चंद्रशेखर राव महेश्वरम पहुँचे थे। बता दें कि राज्य में 30 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। वोटों की गिनती 3 दिसंबर 2023 को होगी।

सितंबर 2023 में केसीआर की सरकार ने तेलंगाना में कपड़े धोने वाले और नाई का काम करने वाले मुस्लिमों को हर माह 250 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। इस तरह की छूट अब तक एससी कम्यूनिटी के लोगों को ही हासिल थी, लेकिन हैदराबाद के सांसद और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के निवेदन पर राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए भी ये छूट जारी की।

वहीं, नवंबर 2023 के शुरुआत में यूनाइटेड मुस्लिम फोरम (UMF) ने सदस्यों ने BRS को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि बीआरएस सरकार ने तेलंगाना में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए ईमानदारी से काम किया और देश के दूसरे राज्यों की तुलना में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे ज्यादा बजट भी आवंटित किया है। उन्होंने कहा था कि ‘शादी मुबारक योजना’ अल्पसंख्यक समुदायों की औरतों की मदद कर रहा है।

दरअसल, शादी मुबारक योजना के माध्यम से केसीआर सरकार प्रत्येक मुस्लिम परिवार को 1,00,116 रुपए की वित्तीय सहायता देती है। साल 2014 में जब यह योजना शुरू की गई थी तो सहायता राशि 51,000 रुपए थी, लेकिन 6 साल में यह राशि लगभग दोगुनी हो गई है। बता दें कि साल 2020 तक 6 सालों में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण से संबंधित योजनओं के लिए सरकारी खजाने से 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च गए।

तेलंगाना : ओवैसी के ’15 मिनट’ वाले भाई अकबरुद्दीन ने भरी सभा में पुलिस को धमकाया : ‘कोई माई का लाल रोक नहीं सकता, मैंने इशारा किया तो…’:

तेलंगाना में 30 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए वोट पड़ने हैं। आदर्श आचार संहिता लागू है। लेकिन इसका पालन करने के लिए कहे जाने पर विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक भरी सभा में पुलिस निरीक्षक को धमकी दी।

चुनाव प्रचार के दौरान पुलिस को धमकी पर क्या चुनाव आयोग क्या संज्ञान लेगा? जब प्रचार में यह हाल है मतदान वाले दिन बोगस वोटिंग होने पर क्या हाल होगा? 

अकबरुद्दीन AIMIM के मुखिया और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाई हैं। 21 नवंबर 2023 की रात अकबरुद्दीन एक सभा को संबोधित कर रहे थे। प्रचार के लिए तय समय सीमा रात के 10 बजने को थे। वहाँ तैनात पुलिस निरीक्षक ने ओवैसी को इशारा कर बताया कि दस बजने वाले हैं और उन्हें अपनी सभा खत्म करनी होगी। इसी बात को लेकर वे पुलिस अधिकारी पर भड़क उठे।

अकबरुद्दीन ओवैसी अपनी विधानसभा चंद्रयानगुट्टा के ललिताबाग इलाके में यह रैली कर रहे थे। इस घटना का वीडियो वायरल है। इसमें ओवैसी को कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्हें रोकने की हिम्मत किसी माई के लाल में नहीं है। वे कह रहे हैं कि यदि उन्होंने इशारा कर दिया तो पुलिस वाले को भागना पड़ेगा।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि अकबरुद्दीन ओवैसी पुलिसवाले को यह कहते हुए मंच से नीचे उतरने को कहते हैं कि अभी 10 बजने में 5 मिनट बाकी हैं। वे कहते हैं, “इंस्पेक्टर साहेब, घड़ी है मेरे पास। चलिए, चलिए, चलिए। गोली, चाकू की बात सुनकर सोचे कि कमजोर हो गए हैं। अभी भी बहुत हिम्मत है, छेड़ो मत। बड़े आकर ठहरे, अभी 5 मिनट है, बोलूँगा। बोलूँगा 5 मिनट।”

आगे वे कहते हैं, “कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ मुझे रोकने के लिए। इशारा कर दिया तो दौड़ना पड़ेगा। दौड़ाएँ? मैं आपसे यही कह रहा हूँ कि ये ऐसे ही आते हैं हमारे इत्तेहाद को कमजोर करने के लिए। होशियार रहो। ये जानते हैं कि अकबरुद्दीन ओवैसी से मुकाबला करने वाला कोई नहीं है, तो ये लोग कैंडिडेट बनकर आ जाते हैं। आ जाओ, देख लेते हैं। तुम जीतते हैं या हम।”

वैसे यह पहली बार नहीं है जब ओवैसी बंधुओं ने इस तरह पुलिस को धमकी दी है। इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान भी पुलिसकर्मियों को धमकाया था। उन्होंने कहा था कि योगी के मठ चले जाने के बाद तुम्हें कौन बचाएगा?

अकबरुद्दीन ओवैसी अपने विवादित बयानों को लेकर कुख्यात रहे हैं। 2012 में ऐसे ही एक बयान में उन्होंने हिंदुओं को 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लेने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, “लोग मुसलमान को डरा रहे हैं। मोदी है, मोदी है, काहे का मोदी। एक बार हैदराबाद आ जाओ बता देंगे। तसलीमा नसरीन आई, कहाँ है किसी को नहीं मालूम। हम 25 करोड़ हैं, तुम 100 करोड़ है न… ठीक है तुम तो हमसे इतने ज्यादा हो… 15 मिनट पुलिस को हटा लो हम बता देंगे कि किसमें कितना दम है। एक हजार क्या? एक लाख क्या एक करोड़ नामर्द मिलकर भी कोशिश कर लें तो भी एक को पैदा नहीं कर सकते। और ये लोग हमसे मुकाबला नहीं कर सकते। जब मुसलमान भारी पड़ा तो यह नामर्दों की फौज आ जाती है।”


कांग्रेस के ‘दक्षिण अफ्रीका वाले EVM का कर्नाटक में इस्तेमाल’ करने के दावे को चुनाव आयोग ने किया खारिज, कहा- नियम पता होने चाहिए, अफवाह फैलाने वाले सूत्र पता करें

कर्नाटक चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस को ईवीएम के ऊपर संदेह जताना महंगा पड़ गया। निर्वाचन आयोग ने कॉन्ग्रेस को पत्र लिखकर बताया कि पार्टी के आरोप गलत हैं कि ईवीएम को चुनाव से पहले दक्षिण अफ्रीका भेजा गया। आयोग ने कहा कि न तो ईवीएम साउथ अफ्रीका भेजी गई है और न ही वहाँ पर ईवीएम का इस्तेमाल होता है। दक्षिण अफ्रीका के निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर राष्ट्रीय और प्रांतीय चुनावों की बुकलेट के जरिए इसका आसानी से पता किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में चुनाव से दो दिन पहले 8 मई को कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की थी कि साउथ अफ्रीका में पूर्व में इस्तेमाल की गई ईवीएम का इस्तेमाल कर्नाटक चुनाव में होने वाला है। पार्टी ने यह आरोप लगाते हुए ईसी से स्पष्टीकरण माँगा था। अब चुनाव आयोग के पोल पैनल ने इस पत्र पर सख्ती से जवाब देते हुए कांग्रेस को प्रक्रिया समझाई है। 

निर्वाचन आयोग ने बताया कि कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल होने वाली सारी ईवीएम नई हैं। ये बात इंडियन नेशनल कांग्रेस भी जानती है। आयोग ने कहा कि जब भी ईवीएम आती है तो उस पूरे प्रक्रिया का वीडियोग्राफी होती है और हर पॉलिटिकल पार्टी के लोगों को वहाँ चश्मदीद बनने के लिए बुलाया जाता है। कांग्रेस बहुत अच्छे से जानती है कि ईवीएम कहाँ से आई हैं।

कांग्रेस को फटकार लगाते हुए ईसीआई ने कहा कि कांग्रेस इतने समय से राष्ट्रीय पार्टी है और विभिन्न चुनावों में भाग लिया है, उनसे तो कम से कम उम्मीदा की जाती है कि उन्हें ईसीआई के प्रोटोकॉल्स के बारे में पता होगा। आयोग ने बताया कि न केवल प्रतिनिधियों को बुलाकर दिखाया जाता है कि ईवीएम आई कहाँ से, बल्कि उन्हें ईवीएम की यूनिक आई़डी की लिस्ट भी दी जाती है। इतना ही नहीं उसे असेंबल करने से पहले उसे रैंडम चेक किया जाता है। उसे चालू किए जाने के बाद फिर उसे पार्टी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चेक किया जाता है।

अपने पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि उन्होंने जितने एसओपी बताए उन सबको कर्नाटक चुनाव के समय फॉलो किया गया और जहाँ तक उनके पास रिकॉर्ड है इस पूरे प्रोसेस में कांग्रेस के प्रतिनिधि मौजूद थे। ईसीआई ने इतनी पारदर्शिता के बाद भी कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर उन्हें फटकारा और कहा कि सूत्रों के हवाले से ये कहना कि ईवीएम साउथ अफ्रीका में इस्तेमाल हुई, बहुत हैरान करने वाला है।

चुनाव आयोग ने कहा कि विभिन्न सूत्रों का नाम लेकर फैलाई गई खबर का कोई औचित्य नहीं है, जो कांग्रेस को जानकारी के तौर पर दी गई। ऐसे में पार्टी को पता करना चाहिए ये झूठ किसने कैसे फैलाया ताकि पार्टी की साख पर आँच न आए। आयोग ने कहा कि वो उम्मीद करते हैं झूठी खबर फैलाने वाले सूत्र के एक्शन लेकर इस बारे में कमीशन को 15 मई 2023 को 5 बजे से पहले बताया जाएगा।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को ईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने लेटर भेज बताया कि आयोग के निर्देशों के मुताबिक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जिला स्तर पर एफएलसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को एफएलसी ओके ईवीएम और वीवीपीएटी की सूची की फोटोकॉपी दी जाती है। लेटर के अनुसार हैदराबाद से ईसीआईएल द्वारा नव निर्मित ईवीएम और वीवीपैट का उपयोग ही इस चुनाव में किया गया है।

कांग्रेस में किनारे होने पर शशि थरूर- मैं मोदी विरोधी नहीं; राज कोई गहरा है !

गाँधी परिवार समर्थित मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव हारने के बाद पार्टी शशि थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे बुद्धिजीवी हैं, लेकिन मोदी विरोधी या देश विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई बड़ी सरकार के खिलाफ है।

कुछ दिन पहले ही यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एसोसिएट प्रोफेसर सोशियोलॉजिस्ट सैल्वाटोर बेबोनेस ने कहा था कि भारत का बुद्धिजीवी वर्ग मोदी और भाजपा विरोधी के साथ-साथ देश विरोधी भी है। उन्होंने कहा कि भारत को फासीवादी दर्शाने के पीछे भारत का बुद्धिजीवी वर्ग और ग्लोबल मीडिया है।

आजतक से बातचीत में थरूर ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत नहीं करते हैं। उनका विरोध सिर्फ राजनीतिक और एक सरकार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कई योजनाओं को आगे बढ़ाया, जिसकी शुरुआत कांग्रेस ने की थी लेकिन एक बार भी इसका श्रेय पार्टी को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वे भाजपा का विरोध करते रहेंगे।

थरूर ने आगे कहा कि एक बुद्धिजीवी होने के नाते वे भारत के खिलाफ नहीं हैं और ना ही मोदी के विरोधी हैं। थरूर का कहना है कि उनका विरोध तो सिर्फ एक बड़ी सरकार तक सीमित है। थरूर ने कहा कि जनता की आवश्यकताएँ सर्वोपरि हैं।  

शशि थरूर को हिमाचल प्रदेश और गुजरात में जारी विधानसभा चुनावों के लिए प्रचारकों की सूची ममें शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “मैं गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में पार्टी के लिए प्रचार करना चाहता था, मगर मुझे पार्टी ने स्टार प्रचारक की लिस्ट में शामिल नहीं किया।”

उन्होंने कहा, “पार्टी को शायद मेरी सर्विस की वहाँ आवश्यकता नहीं है। वैसे भी यदि मैं बिना स्टार प्रचारक बने किसी चुनावी प्रदेश में जाता हूँ तो चुनाव आयोग द्वारा एक्शन लिया जा सकता है। उम्मीदवार के खर्चे से पैसे काटे जा सकते हैं।”

कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हारने के बाद शशि थरूर को पार्टी में एक तरह से साइड लाइन कर दिया गया है। पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में बनाई गई कांग्रेस की नई कार्यसमिति (CWC) में शशि थरूर को जगह नहीं मिली है।

इस कमेटी में 47 सदस्यों को जगह दी गई है। इसमें सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, मनमोहन सिंह, दिग्विजय सिंह, हरीश रावत, एके अंटनी, अभिषेक मनु सिंघवी, आनंद शर्मा, रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन, अंबिका सोनी आदि के नाम शामिल हैं।

मणिपुर : भाजपा के झंडे पर गाय को लिटाया और काट दिया : अब्दुल राशिद, नजबुल हुसैन और मोहम्मद आरिफ खान गिरफ्तार

                                                                        प्रतीकात्मक 
मणिपुर में लिलोंग पुलिस ने तीन युवकों अब्दुल रशीद, नजबुल हुसैन और मोहम्मद आरिफ खान को गाय की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। गाय को काटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें कुुछ युवाओं को भारतीय जनता पार्टी के झंडे पर गाय को काटते हुए देखा जा सकता है। वीडयो वायरल होने के बाद आरोपितों को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया गया है।

आरोपित जिस उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे, उसे बीजेपी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। गाय की हत्या का जो वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ है वह 29 सेकंड का है। इसमें 10 युवाओं के एक समूह (शायद मुस्लिम) को भाजपा के झंडे पर गोवंश का गला काटते हुए देखा जा सकता है। भीड़ ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और भाजपा मणिपुर इकाई के अध्यक्ष अधिकारीमयुम सारदा देवी को भी गालियाँ दी।

यह भी आरोप है कि समुदायों के बीच कलह और दुश्मनी की भावनाओं को बढ़ावा देने की कोशिश के तहत सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड किया गया। इंफाल पश्चिम जिले के लिलोंग पुलिस के अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि की। उनका मानना था कि इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव बाधित हो सकती थी।

घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस ने लिलोंग पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 10(01)2022 के अंतर्गत आईपीसी की धारा 153ए, 429, 504 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के धारा 11(1) तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने फिलहाल जिन तीन आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उसमें मोहम्मद अब्दुल रशीद (28), नजबुल हुसैन (38) और मोहम्मद आरिफ खान (31) का नाम शामिल है।

बदहाल मोहल्ला क्लिनिक, कीचड़ वाली सड़क और 106 लोगों की ठंड से मौत: केजरीवाल के कहने पर लोगों ने गिनाए काम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी इस समय दिल्ली के बाहर अन्य राज्यों में अपनी सरकार बनाने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में अब अपने साथ उन्होंने दिल्ली वालों को भी जोड़ा है। आज सीएम केजरीवाल ने अपील की है कि अब दिल्ली वाले अन्य राज्य के लोगों से कहें कि वो लोग अपने राज्य में केजरीवाल को मौका दें। इस काम के लिए सीएम ने ‘एक मौका केजरीवाल को’ डिजिटल अभियान की शुरुआत की है।

केजरीवाल ने कहा, “आज से ‘एक मौका केजरीवाल को’ कैंपन शुरू कर रहे हैं। इसमें दिल्ली के लोग दूसरे राज्यों के लोगों को वीडियो बनाकर बताएँ की दिल्ली में क्या अच्छे काम हुए हैं। वीडियो में जनता बताए कि दिल्ली सरकार के क्या काम अच्छे लगे और उससे कितना फायदा हुआ।”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “आप लोग वीडियो के अंत में लोगों से अपील करें की आम आदमी पार्टी को एक मौका दें और उसे सोशल मीडिया में अपलोड करें। जिन 50 लोगों की वीडियो सबसे ज़्यादा वायरल होगी मैं चुनाव के बाद उनके साथ डिनर करूँगा।” इस अभियान की शुरुआत होने के बाद से सोशल मीडिया पर लोग अरविंद केजरीवाल का मजाक उड़ाने में लगे हैं।

कुछ लोग उनके वीडियो के नीचे लिख रहे हैं कि अगर केजरीवाल को चुनावी प्रचारक के रोल से फुर्सत मिले तो दिल्ली वालों के बीच भी चलें जाएँ। वहीं कुछ ने इस ट्वीट को पढ़कर कहा है कि अब लगता है कि केजरीवाल ने बेशर्मी की हर हद पार कर दी है।

मीनू हिंदुस्तानी नाम की सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि स्कूलों की जगह ठेके, हनुमान मंदिर तोड़कर हज हाउस बनवाना, हिंदू की मौत पर चुप्पी, मुस्लिम को 1 करोड़ रुपए देना, मस्जिदों के लोगों की तन्ख्वाह बढ़ाना, मंदिर के पंडितों को कुछ नहीं, नल में गंदा पानी आना विकास है क्या?

सचिन जाटव ने सड़क की बदहाल तस्वीरों को शेयर करके कहा, “दिल्ली के शानदार काम की बहुत सारी तस्वीर ओर जीता जागता सबूत है मेरे पास जिस को केजरीवाल का विकास देखना हो दिल्ली के किराड़ी क्षेत्र में आ कर देखे ।”

अभी हाल में गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ने दावा किया है कि इस माह ठंड की वजह से दिल्ली में कम से कम 106 लोगों की मौत हो गई। इनमें अधिकांश लोग बेघर थे।


अब इस खबर को दिल्ली के लोग अरविंद केजरीवाल के अनुरोध वाली वीडियो पर पेस्ट कर रहे हैं। सवाल किया जा रहा है कि आखिर उन लोगों के लिए क्यों कुछ नहीं हुआ। 

इसके अलावा दिल्ली में बदहाल हालात में पड़े मोहल्ला क्लिनिक की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है।

अवलोकन करें:-

दिल्ली : केजरीवाल कब अपराधियों को पार्टी से निकाल जेलों में भेजोगे? ‘यह मकान बिकाऊ है : मार डाले ग
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पंजाब चुनाव : ‘राघव चड्ढा चोर है’: AAP के पंजाब सह-प्रभारी, जमकर हंगामा, चले लात-घूँसे

पिछले दरवाजे से भागते राघव चड्ढा (साभार: ट्विटर)
पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों (Punjab assembly polls) में आम आदमी पार्टी (AAP) भले ही जीत के दावे कर रही हो, लेकिन वास्तविकता यही है कि वहाँ पार्टी में ही फूट पड़ी हुई है। शुक्रवार (7 जनवरी 2022) को जालंधर में आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान आप नेता टिकट बँटवारे को लेकर आपस में भिड़ गए और खूब लात-घूँसे चले।

प्रेस क्लब में राघव चड्ढा (Raghav chaddha) की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद दिनेश ढल को पार्टी में शामिल करवाया जाना था, लेकिन टिकट बँटवारे को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान पंजाब के सह-प्रभारी के खिलाफ ‘राघव चड्ढा चोर है’ के नारे लगाए गए। बात यहीं तक रहती तो गनीमत होती, लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि लोगों के बीच जमकर मारपीट भी हो गई। टिकट बंटवारे को लेकर करीब 45-50 मिनट हुए बवाल के बाद राघव चड्ढा को पिछले दरवाजे से बाहर भागना पड़ा।

आम आदमी पार्टी में इस अंदरूनी बवाल से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया (social media) पर खूब शेयर किए जा रहे हैं। वायरल हो रहे वीडियो में पार्टी के नेताओं को जालंधर प्रेस क्लब में एक-दूसरे को धक्का देते और मारपीट करते देखा जा सकता है।

इस घटना से जुड़ा एक वीडियो बीजेपी (BJP) नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज (Lakshmikant bhardwaj) ने ट्विटर पर शेयर किया, जिसमें आप के कार्यकर्ता और नेता ‘राघव चड्ढा चोर हैं’ के नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बवाल टिकट के दावेदार जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से डॉ शिव दयाल माली और जालंधर मध्य क्षेत्र के डॉ संजीव शर्मा के समर्थकों और राघव चड्ढा व दिनेश ढल के समर्थकों के बीच शुरू हुआ। टिकट के लिए दावेदारी करने वाले आप नेताओं के समर्थकों का आरोप है कि राघव चड्ढा अपने साथ बाउंसर लेकर आए थे। जब वो टिकट के लिए नारेबाजी कर रहे थे तो उन बाउंसर्स ने उनके साथ मारपीट की।

7 जनवरी 2021 की शाम को जब 4:30 बजे प्रेस क्लब में घुस रहे थे, तो उसी दौरान आप के समर्थकों ने ‘राघव चड्ढा चोर है’ के नारे लगाते हुए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन कर रहे आप के समर्थकों ने भ्रष्ट लोगों को पार्टी में शामिल करने के लिए सीक्रेट समझौते करने का आरोप राघव चड्ढा पर लगाया।

विरोध के बाद राघव चड्ढा पहले तो अपनी कार से लौट गए और फिर कुछ देर में अपने साथ कुछ बॉडी बिल्डर्स को लेकर लौटे। इन बॉडी बिल्डर्स ने प्रदर्शन कर रहे आप कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की करके प्रेस क्लब के अंदर राघव चड्ढा को पहुँचाया।

अंदर जाने के तुरंत बाद चड्ढा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और दो बार के पार्षद दिनेश ढल को पार्टी में शामिल कराया और पिछले दरवाजे से निकलकर अपनी गाड़ी में बैठ गए। हालाँकि, प्रदर्शनकारी आप समर्थकों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया, लेकिन ड्राइवर गाड़ी भगाकर निकाल ले गया।

पंजाब के लोगों को केजरीवाल ने दिया था मुफ्तखोरी का लालच

भले ही पंजाब में आम आदमी पार्टी टिकट के बँटवारे को लेकर अंदरूनी विद्रोह का सामना कर रही हो, लेकिन अरविंद केजरीवाल कोरोना नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए जमकर चुनावी रैलियाँ कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी की सरकार आने पर पंजाब में 300 यूनिट मुफ्त बिजली, बकाया बिजली बिलों को रद्द करने और चौबीसों घंटे बिजली देने का वादा किया है। हाल ही में भगवंत मान को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर सहमति जताई गई थी।

केरल चुनाव : कम्युनिस्ट सुलेमान द्वारा 19 साल की पाकिस्तानी बीवी की जानकारी छिपाने पर केरल के मुख्यमंत्री चुप क्यों?

पाकिस्तानी बीवी और केटी सुलेमान
(Image: V Muraleedharan/VMBJP
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कोंडोट्टी में हुई चुनाव नामांकन की धोखाधड़ी के संबंध में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चुप्पी पर विदेश मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने उनकी आलोचना की। कई रिपोर्ट्स के अनुसार सीपीआईएम समर्थित केटी सुलेमान हाजी ने केरल विधानसभा चुनाव के अपने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी नहीं दी। सुलेमान की दूसरी बीवी एक पाकिस्तानी है।

मातृभूमि में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को चुनाव आयोग ने केटी सुलेमान हाजी का नामांकन आगामी जाँच तक रोक दिया क्योंकि वह अपनी दूसरी बीवी की जानकारी देने में असफल रहे।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने सुलेमान के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी दो शादियाँ हो चुकी हैं और उसकी दूसरी बीवी विदेश में है। इन आरोपों के साथ दुबई में हुए सुलेमान के निकाह के कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी दूसरी बीवी हीरा मोहम्मद सफदर है जो रावलपिंडी, पाकिस्तान की निवासी हैं।

 

अपने ट्वीट में मुरलीधरन ने कहा, “केटी सुलेमान हाजी, कोंडोट्टी के सीपीआईएम समर्थित प्रत्याशी, जिन्होंने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी छुपाई जो कि एक 19 वर्षीय पाकिस्तानी महिला है। स्वयं को लिबरल कहने वाले पिनाराई विजयन अब खुद चुप हैं, क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है?”

वे आगे कहते हैं कि केरल की जनता इस प्रश्न का उत्तर चाहती है जबकि एक प्रत्याशी ने विदेशी नागरिक की पहचान छुपाई है।

केरल में 6 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोजित होने वाले हैं। चुनाव परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।


छत्तीसगढ़ में महागठबंधन की कवायद को झटका

mayawati
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोक सभा एवं विधानसभा के लिए हुए उप-चुनावों में हुए गठबंधन पर समस्त भाजपा विरोधी गठबंधन पर छाती और पीठ थप-थापते नज़र आ रहे थे, अब लगता है, धीरे-धीरे गठबंधन के गुब्बारे की हवा निकलनी शुरू हो चुकी है। वैसे भी गठबंधन तो एक बहाना है, जनता को पागल बनाना है, क्योंकि कुर्सी सभी को चाहिए, बिना कुर्सी के कोई रह नहीं सकता, रोटियों के लाले पड़ जाएँगे, क्योंकि आज राजनीती से बढ़िया कोई व्यापार नहीं। वो दिन लद गए, जब राजनीति वास्तव में जनसेवा होती थी, परन्तु आज तो व्यवसायिक हो गयी है, और मूर्ख एवं बेरोजगार ही नेताओं की एक आवाज़ पर एक दिन के वेतन मिलने पर दौड़े जाते हैं, और जहाँ वेतन नहीं मिलता, प्रदर्शनों में पदाधिकारियों के सिवा पार्टी कार्यकर्ता तक गायब होते है।   
क्या किसी आम नागरिक को
ये सब सुविधाएँ मिल सकती हैं?
प्रमाण देख लो: जेएनयू में जिन देश विरोधी नारे लगाने वालों को कहीं नौकरी कर, आत्मनिर्भर होना चाहिए था, लेकिन यूनिवर्सिटी में पड़े हैं; दूसरे, गुजरात में पाटीदार आंदोलनकारियों को लो, क्या जरुरत है, नौकरी की, जब जनविरोधी पूंजीपति उनकी तिजोरी भर रहे हैं, किस बात की चिन्ता। 
खैर, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिये तारीख का ऐलान अभी नहीं हुआ है।लेकिन सियासी समीकरणों को अभी से साधा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के सीएम डॉ रमन सिंह जहां एक और पारी के लिए राज्य की यात्रा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि इस दफा चावल बाबा के नाम से मशहूर डॉ रमन सिंह को राज्या की जनता मौका नहीं देगी। इन सबके बीच बीएसपी मुखिया मायावती ने बड़ा बयान दिया है।
बीएसपी मुखिया मायावती का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की अगुवाई वाली जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बीएसपी 35 सीटों पर किस्मत आजमाएगी जबकि अजीत योगी की पार्टी 55 सीटों पर चुनावी घमासान में हिस्सा लेगी। इसके साथ ही मायावती ने कहा कि अगर बीएसपी- जनता कांग्रेस गठबंधन में लोग भरोसा करेंगे तो अजीत जोगी गठबंधन की तरफ से राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। 

Bahujan Samaj Party(BSP) has decided to contest upcoming assembly polls in alliance with Janta Congress Chhattisgarh. BSP will fight on 35 seats&Janta Congress Chhattisgarh will contest on 55 seats.If we win, Ajit Jogi will be the CM: BSP Chief Mayawati on elections pic.twitter.com/pnW0APhAUL


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BJP has been in power in Chhattisgarh for past 15 years. Satta ka durupyog, paise ka durupyog, prashasnik tantra ka durupoyog karke woh phir se satta mein aana chahti hai. Ab humara gathbandhan ho gaya hai, Mayawati ji aur humlog mil kar unko(BJP) avashya rok lenge: Ajit Jogi pic.twitter.com/gGPIShNbCi
UPA chairperson Sonia Gandhi, BSP chief Mayawati, West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee, Congress president Rahul Gandhi, Andhra Pradesh Chief Minister Chandrababu Naidu with the new Chief Minister of Karnataka Kumaraswamy during his swearing-in ceremony in Bengaluru. (Arijit Sen/Hindustan Times via Getty Images)
गठबंधन होता तार-तार 
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अजीत जोगी ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से बीजेपी सत्ता में है। सत्ता का दुरुपयोग, प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके वो फिर से सत्ता में आना चाहती है। अब मायावती जी के साथ उनका गठबंधन हो गया है और वो बीजेपी को निश्चित तौर रोक लेंगे।
बीएसपी मुखिया मायावती ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आम लोग बीजेपी सरकार की नीतियों से परेशान हैं। पिछले 15 साल से ऐसी सरकार का शासन है जो सिर्फ वादों में विश्वास करती रही है। डॉ रमन सिंह एक तरफ राज्य में विकास की बात करते हैं। लेकिन बस्तर का इलाका उनके दावों की पोल खोलता है। राज्य में आम जन के मन में बदलाव की भावना है, लोग एक बेहतर विकल्प चाहते हैं। आम लोगों की उम्मीदों उनका गठबंधन पूरी तरह से खरा उतरेगा। 

मध्य प्रदेश: कांग्रेस-BSP गठबंधन को झटका

मध्य प्रदेश: कांग्रेस-BSP गठबंधन को झटका, मायावती ने जारी की उम्मीदवारों की पहली सूची
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सितम्बर 20 को मध्य प्रदेश की 22 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. बसपा सुप्रीमो ने भिंड, सबलगढ़, सिरमौर, अंबाह, सेवड़ा, करैरा, चंदला समेत 22 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम की पहली सूची जारी कर दी है.बीएसपी की इस सूची के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बीएसपी के साथ गठबंधन को लेकर दिए गए तमाम बयानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
प्रत्याशियों की सूची
लाल सिंह केवट - सबलगढ (जिला मुरैना) 
सत्य प्रकाश - अंबाह (जिला मुरैना) 
लाखन सिंह यादव - सेवड़ा (जिला दतिया) 
संजीव सिंह कुशवाहा - भिंड 
प्रगति लाल यादव - करैरा (जिला शिवपुरी)
बालकृष्ण महोबिया - अशोकनगर 
पुष्पेंद्र अहिरवार - चंदला (जिला छतरपुर) 
रामबाई परिहार - पथरिया (जिला दमोह) 
बेलन सिंह धुर्वे - जबेरा (जिला दमोह) 
उषा चौधरी विधायक - रैगांव (जिला सतना) 
छंगेलाल कोल - अमरपाटन (जिला सतना) 
रामलखन सिंह पटेल - रामपुर बाघेलान (जिला सतना) 
राम गरीब कोल - सिरमौर (जिला रीवा) 
पंकज सिंह पटेल - सिमरिया (जिला रीवा) 
सीमा सिंह - देवतालाब (जिला रीवा) 
शीला त्यागी - मनगवां (जिला रीवा) 
अशोक पैगाम- चितरंगी (जिला सिंगरौली) 
अवध प्रताप सिंह - धोहनी (जिला सीधी) 
मोहदल सिंह पाव - जैतपुर (जिला शहडोल) 
शिव प्रसाद कोल - बांधवगढ़ (जिला उमरिया) 
गोविंद पटेल - बोहरीबंद (जिला कटनी) 
बबीता गोटिया - सिहोरा (जिला जबलपुर)