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मध्य प्रदेश में बीजेपी ने जारी किया 'दृष्टि पत्र', महिलाओं के लिए अलग से घोषणा पत्र

Live: मध्य प्रदेश में बीजेपी ने जारी किया 'दृष्टि पत्र', महिलाओं के लिए अलग से घोषणा पत्रमध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आज बीजेपी ने दृष्टि पत्र के नाम से घोषणा पत्र जारी कर दिया है. पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में किसान, युवाओं और महिलाओं से संबंधित मुद्दों को सबसे अधिक महत्व देते हुए इनसे संबंधित कई योजनाओं की घोषणा की. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दृष्टि पत्र के नाम से अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया. बता दें छत्तीसगढ़ में जारी किए गए 'संकल्प पत्र' की तर्ज पर ही 'दृष्टि पत्र' जारी किया गया है.
बीजेपी के घोषणा पत्र जारी
बता दें भाजपा इस घोषणा पत्र में अपना पूरा फोकस प्रदेश के युवाओं और किसानों पर रख रही है. इसके साथ ही पार्टी ने महिलाओं के लिए भी कई मेगा प्लान तैयार किए हैं. बता दें महिलाओं के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अलग से घोषणा पत्र जारी किया है. इसके साथ ही किसानों के उपज निर्यात के लिए पोर्ट बनाने का भी बीजेपी किया है. बता दें बीजेपी के घोषणा पत्र जारी करने के दौरान केंद्रीय मंत्री नंरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद्र गहलोतए प्रभात झा, राकेश सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, विनय सहस्त्रबुद्धे, और संबित पात्रा भी मौजूद बीजेपी कार्यालय में मौजूद हैं.
स्मार्टसिटी की तर्ज पर स्मार्टगांव
वहीं अपने घोषणा पत्र में भाजपा ने राहुल की कर्ज माफी का तोड़ भी निकाल लिया है. भाजपा ने किसानों से प्रति एकड़ के हिसाब से बोनस देने की घोषणा की है. इसके साथ ही विकास के मुद्दे भी बीजेपी के घोषणा पत्र का अहम हिस्सा रहे. पार्टी ने प्रदेश के सभी शहरों को सिक्सलेन से जोड़ने का वादा करते हुए स्मार्टसिटी की तर्ज पर स्मार्टगांव बनाने की भी घोषणा की है. इसके अलावा बीजेपी मध्य प्रदेश को लॉजिस्टिक हब बनाने के साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी संस्थाओं को ज्यादा मौके देने का वादा किया है.
बीजेपी की अहम घोषणाएं
अपने घोषणा पत्र में सीएम शिवराज ने हर गरीब को पक्का मकान, हर घर में बिजली और एससी-एसटी वर्ग के लिए बड़ी योजनाओं की घोषणा की. वहीं पार्टी ने विशेष जनजाति के लिए प्रतिमाह 1 हजार भत्ता देने की भी घोषणा की है. व्यापारियों के लिए व्यापारी कल्याण कोष, वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए नया वेतन आयोग और बेरोजगारी दूर करने के लिए एक हाथ, एक काज योजना के तहत हर साल 10 लाख रोजगार देने की घोषणा की. इसके साथ ही पार्टी ने सामान्य वर्ग के उन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी वादा किया है जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. पार्टी ने किसानों पर फोकस करते हुए लघु किसान स्वाबलंबन योजना लाने की घोषणा की और सिंचाई का रकबा 82 हजार हेक्टेयर करने और किसान समृद्धि कोरिडोर की स्थापना करने का भी वादा किया.
महिलाओं के लिए घोषणाएं-
- जननी एक्सप्रेस की संख्या की जाएगी दोगुनी
- 12 वीं में 75 फीसदी से अधिक अंक लाने पर छात्राओं के लिए स्कूटी
- 60 साल से ऊपर की महिलाओं को फ्री बस सेवा
- महिला सशक्तिकरण के लिए स्वसहायता समूहों, तेजस्विनी द्वारा स्वरोजगार को अभियान बनाए जाने की घोषणा

क्या दल बदलू विश्वास और वोट के हक़दार हैं?

मध्य प्रदेश चुनाव 2018: बागियों ने 30 से अधिक सीटों पर बढ़ाई बीजेपी-कांग्रेस की परेशानी

मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को होने वाले चुनाव में प्रदेश की कुल 230 सीटों में से 30 से अधिक सीटों पर सत्तारूढ़ बीजेपी एवं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बागियों के उतरने से इन दोनों दलों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. ये 30 से अधिक बागी अपनी पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी की जीत को हार में बदल सकते हैं. वहीं, दोनो दल अपने-अपने बागियों को मनाने में लग गए हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश संगठन सचिव सुहास भगत एवं अन्य नेता अपनी पार्टी के बागी नेताओं से संपर्क कर उनसे अपना नामांकन पत्र वापस लेने की गुजारिश कर रहे हैं.

बागी नेताओं से बातचीत जारी है- बीजेपी
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, ''हमारे वरिष्ठ नेता पार्टी के सभी बागी प्रत्याशियों से बातचीत कर रहे हैं और उनसे बीजेपी के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ चुनावी मैदान से हटने का अनुरोध कर रहे हैं.'' उन्होंने उम्मीद जताई कि पहले के चुनावों की तरह इस बार के चुनाव में भी बागी नेता चुनावी मैदान से हट जाएंगे और अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे. बता दें कि उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 14 नवंबर है.
MP GRF
कांग्रेस भी बागियों को मनाने में जुटी
वहीं, कांग्रेस की ओर से दिग्गज नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी पार्टी के बागी प्रत्याशियों से मिल रहे हैं और उनसे गुजारिश कर रहे हैं कि पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के हित में अपना नामांकन पत्र वापस ले लें. सिंह के अलावा, मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी अपनी पार्टी के बागी प्रत्याशियों को मनाने लगे हैं कि वे चुनावी मैदान से हट जाएं, ताकि बीजेपी को चौथी बार सत्ता में आने से रोका जा सके.
बागी नामांकन वापस लें, चाहें तो मेरे 10 पुतले फूंक दें- दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह बागियों से यह अपील करते हुए भी दिखाई दिए कि यदि वे पार्टी से नाराज हैं तो, वे अपने गुस्से को निकालने के लिए मुझे (दिग्विजय) गाली दे सकते हैं और विरोध जताने के लिए मेरे 10-10 से अधिक पुतले जला लें, लेकिन पार्टी के हित में चुनावी मैदान ने अपना नाम वापस ले लें. वह बागियों से अनुरोध कर रहे थे कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रत्याशी चुने हैं और उन्हें समर्थन देना चाहिए. पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों को वोटों का नुकसान न पहुंचाएं.
मंत्री जयंत मलैया की विधानसभा सीट पर भी मंडरा रहा है खतरा
सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सोच विचार कर एवं विवेकपूर्ण तरीके से पार्टी हित में अपने प्रत्याशी बनाये हैं. बीजेपी से पांच बार सांसद, दो बार विधायक एवं शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे कर्मी वर्ग के नेता डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने एक साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दो सीटों दमोह और पथरिया से नामांकन भरा है. इस नामांकन से कुसमरिया ने प्रदेश के वित्तमंत्री जयंत मलैया के लिए दमोह सीट पर मुश्किल खड़ी कर दी है.
आरएसएस विचारक राघवजी ने भरा सपाक्स पार्टी से पर्चा
ठीक इसी तरह से मध्यप्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री एवं आरएसएस विचारक राघवजी भाई भी विदिशा जिले की शमशाबाद विधानसभा सीट से नई नवेली पार्टी सपाक्स से चुनावी मैदान में उतरे हैं. राघवजी बीजेपी द्वारा उनकी बेटी ज्योति शाह को टिकट न दिये जाने से नाराज हैं. भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप से जबलपुर उत्तर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, कांग्रेस के बागी नेताओं में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के पूर्व प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी हैं. कांग्रेस द्वारा टिकट न दिये जाने से नाराज नितिन बुंदेलखंड क्षेत्र की राजनगर सीट से समाजवादी पार्टी की टिकट पर लड़ रहे हैं.
कांग्रेस के पूर्व विधायक ने भी भरा निर्दलीय पर्चा
ठीक इसी तरह से साहब सिंह गुर्जर भी कांग्रेस द्वारा टिकट न दिये जाने से नाराज हो गए और ग्वालियर ग्रामीण सीट से चुनावी मैदान में खड़े हैं. जबकि, कांग्रेस के पूर्व विधायक जैवियर मेढ़ा भी झाबुआ में कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी विक्रांत भूरिया के सामने चुनावी मैदान में उतर गये हैं. विक्रांत कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे हैं. 
एमपी में भाजपा विधायक नीलम मिश्रा ने पार्टी से दिया इस्तीफा, मंत्री और सांसद पर लगाए आरोप
मध्यप्रदेश में जनता किसके सिर पर ताज सजाएगी इसके लिए कुछ दिनों बाद ही चुनाव होने वाले हैं। जिसमें सभी प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला हो जाएगा। वहीं राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच रीवा जिले की सेमरिया सीट की विधायक नीलम मिश्रा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। वह टिकट कटने से नाराज थीं। उनके पति अभय मिश्रा पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह भी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम सकती हैं।
भाजपा ने जब उन्हें सेमरिया सीट से टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया। रीवा में प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल और सासंद जनार्दन मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नीलम मिश्रा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी है। उनका कहना है कि वह किसी भी दल में शामिल न होकर अपने पति और कांग्रेस प्रत्याशी अभय मिश्रा के लिए प्रचार करेंगी।
नीलम मिश्रा ने राज्य के मंत्री और सांसद पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों की वजह से उनके विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। दोनों नेताओं ने विधायक निधि के कोई और कार्य विधानसभा क्षेत्र में होने नहीं दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के गलत कार्यों का जब पति अभय मिश्रा ने विरोध किया तो उन्हें प्रताड़ित किया गया। इसके बाद भी हमारी पार्टी के प्रति नाराजगी नहीं रही।
विधायक ने कहा कि जहां पार्टी के लोग ही आपका विरोध कर रहे हैं तो वहां रहने का फायदा क्या है। इसी कारण मैंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा में पांच साल मैंने अपमानित होकर बिताए। मेरे पति को भी जब भाजपा में सम्मान नहीं मिला तो उन्होंने वह कांग्रेस में शामिल हो गए। हाल ही में कांग्रेस ने अभय मिश्रा को रीवा से टिकट दिया है। उनका मुकाबला राज्य के उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल से है। 

पार्टी उपाध्यक्ष घनराम साहू ने छोड़ा कांग्रेस का साथ, BJP का थम सकते है दामन

छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्य में कांग्रेस उपाध्यक्ष घनराम साहू ने नवम्बर 11 को पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

उनका आरोप है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और दुर्ग के सांसद ताम्रध्वज साहू मिलकर उनका नेतृत्व खत्म करने की कोशिश कर रहे थे। बता दें कि वह पांच साल से पार्टी के उपाध्यक्ष पद पर थे। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान उनकी उपेक्षा की जा रही है इसलिए वह पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।
उन्होंने अपना इस्तीफा पीसीसी अध्यक्ष को पोस्ट से भेज दिया है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होंगे। 

बीजेपी विधायक सुरेंद्र गोयल ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। वसुंधरा राजे सरकार मंत्री सुरेंद्र गोयल ने इस्तीफा दे दिया है और उन्हें पार्टी भी छोड़ दी है। 
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Rajasthan Minister and MLA Surendra Goyal resigns from primary membership of BJP
7:04 PM - Nov 12, 2018
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल विभाग में मंत्री सुरेंद्र गोयल ने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र में लिखा, 'मैं सुरेंद्र गोयल विधायक विधानसभा क्षेत्र जैतारण (116) भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र देता हूं। अत: आप मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।' 

मध्य प्रदेश चुनाव 2018 : शाखाओं को लेकर कांग्रेस का वचन बना मुसीबत

MP Chunav 2018: शाखाओं को लेकर कांग्रेस का वचन बना मुसीबत, सक्रिय हुआ संघ
अपने वचन पत्र में शासकीय परिसरों में संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा कांग्रेस के लिए मुसीबत बन गया है। कांग्रेस की लगातार सफाई के बावजूद संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जिस तेजी से इस मुद्दे का प्रचार प्रसार किया जा रहा है, उसे राजनीतिक हलकों में कांग्रेस के लिए नुकसानदेह माना जा रहा हैं। संघ के वे कार्यकर्ता भी अब भाजपा के पक्ष में प्रचार करने के लिए जुट गए हैं, जो भाजपा के कार्यकलापों से नाराज होकर घर बैठे हुए थे। कांग्रेस को भी इसका अहसास हो गया है, इसलिए सोमवार को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सफाई दी कि कांग्रेस ने संघ पर बैन लगाने की बात नहीं कही है।
सूत्रों के मुताबिक इस वचन का सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ में देखा जा सकता है। मालवा-निमाड़ में संघ के कार्यकर्ता भाजपा से नाराज थे और ज्यादातर घर बैठे हुए थे, लेकिन कांग्रेस का वचन पत्र सामने आने के बाद सभी कार्यकर्तासक्रिय हो गए हैं। संघ के कार्यकर्ता अब तक मतदान करने की अपील कर रहे थे, लेकिन अब वे कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने में भी जुटेंगे। संघ के स्वयंसेवकों के सक्रिय होने से भाजपा को भी राहत मिली है।
सरकार में नहीं आएगी कांग्रेस
संघ विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अपील करता है, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने घोषणा की है, उससे यह साबित होता है कि वह सरकार में नहीं आएगी। संघ कार्यकर्ता राष्ट्रवादी शक्तियों को वोट देने की अपील करेंगे।  - अशोक पांडेय, सह प्रांत संघचालक, मध्यभारत प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
राहुल गांधी के पुरखे भी संघ पर प्रतिबंध नहीं लगा सके
उसके बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पूर्वज देश की केंद्रीय सत्ता में काफी बड़े-बड़े पदों पर रहे, बावजूद इसके वह संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध नहीं लगा सके तो मध्य प्रदेश में अपना चुनावी वायदा भला कैसे पूरा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संघ की चिता छोड़ देनी चाहिए, यह चुनावी वायदा है जोकि मुंगेरीलाल के हसीन सपने की तरह है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह चुनाव मुंगेरीलाल के हसीन सपने की तरह है, क्योंकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आने के तमाम प्रयास विफल रहने वाले हैं। कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ठाकुर ने कहा कि जिस तरह से देश के कई राज्यों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है उसके बाद कांग्रेस की दुकानें सिलसिलेवार तरीके से बंद हो चुकी हैं। अनुराग ठाकुर यहीं नहीं रुके उन्होने कहा कि मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को चुनाव होने के बाद कांग्रेस की दुकान पर ताला लगने वाला है।

राहुल गाँधी पर कार्तिकेय चौहान ने ठोका मानहानि का मुकदमा

VIDEO : राहुल की सफाई नहीं आई काम, सीएम के बेटे कार्तिकेय ने ठोका मानहानि का मुकदमामध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय चौहान के खिलाफ बयान देने के मामले में भले ही राहुल गांधी ने अपनी सफाई दे दी हो, लेकिन उनकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। क्योंकि कार्तिकेय चौहान ने अक्टूबर 30 को भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया है।
न्यायाधीश सुरेश सिंह की कोर्ट में कार्तिकेय सिंह चौहान की तरफ से अधिवक्ता शिरीष श्रीवास्तव ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद पेश किया है। इस मामले में 3 नवंबर को सुबह 11 बजे गवाही का वक्त तय किया गया है। मानहानि का परिवाद दायर करने के लिए कार्तिकेय चौहान के वकील ने कोर्ट में सबूत के तौर पर अखबार की कटिंग और टीवी न्यूज चैनलों में चले राहुल गांधी के बयान का हवाला दिया है।
दरअसल राहुल गांधी ने अक्टूबर 29 को झाबुआ की रैली में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह का नाम पनामा पेपर में आने की बात कही थी। विवाद बढ़ने पर शिवराज सिंह चौहान और बेटे कार्तिकेय चौहान ने ट्वीट कर राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई थी और मानहानि का केस दर्ज कराने की चेतावनी दी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने आज(अक्टूबर 30) इंदौर में अपने इस बयान पर सफाई देते हुए कहा कि, "भाजपा के शासन में कई राज्यों में इतना भ्रष्टाचार हुआ है कि मैं कन्फ्यूज हो गया था और गलती से शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय का नाम ले दिया था।"

कथावाचक देवकीनदंन ठाकुर की सियासत में एंट्री, 29 को पार्टी

MP: कथावाचक देवकीनदंन ठाकुर की सियासत में एंट्री, 29 को पार्टी, चिह्न का करेंगे ऐलानहाल में एससी/एसटी एक्‍ट में हुए संशोधन के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज के नेतृत्‍व वाले अखंड भारत मिशन ने सूबे की सभी 230 सीटों पर प्रत्‍याशी उतारने का ऐलान किया है. एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने के लिए 'अखंड भारत मिशन' नाम का एक संगठन बनाया गया है और देवकीनंदन ठाकुर को इस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है.
दैनिक भास्‍कर की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव लड़ने के फैसले के साथ ही देवकीनंदन ठाकुर 29 अक्‍टूबर को नई पार्टी के नाम और उसके चिह्न की घोषणा करेंगे. उल्‍लेखनीय है कि अखंड भारत मिशन एससी/एसटी एक्‍ट में हुए किए गए संशोधन का विरोध करता है. इसकी मांग है कि बिना जांच के तुरंत गिरफ्तारी का जो प्रावधान एक्‍ट में है, उसे हटाया जाए.
देवकीनंदन ठाकुर
इस सिलसिले में एक्‍ट के विरोध के चलते पिछले‍ दिनों 11 सितंबर को आगरा में देवकीनंदन ठाकुर को गिरफ्तार भी किया गया था. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर देवकीनंदन ठाकुर के कई संदेश वायरल हो रहे हैं. जिनमें वह सवर्ण जातियों को एससी/एसटी समुदाय के लोगों के सामाजिक कार्यों का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं. हालांकि इन संदेशों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. इन संदेशों को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति दर्ज की जा रही है.
एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ देवकीनंदन ठाकुर ने आगरा के खंदौली में सवर्ण समाज की एक सभा का आयोजन किया था. प्रशासन ने कथा वाचक को इस आयोजन की अनुमति नहीं दी और उनके खंदौली में प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी.
उसके बाद 11 सितंबर की सुबह देवकीनंदन ठाकुर अपने समर्थकों के साथ आगरा के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले लाई. देवकीनंदन ठाकुर की गिरफ्तारी पर उनके समर्थकों में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. देवकीनंदन ठाकुर ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कहा कि पुलिस ने खंदौली में उनके प्रवेश पर रोक लगाई थी और वे कानून का पालन करते हुए खंदौली नहीं गए, लेकिन आगरा में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, यह सरासर लोकतंत्र की हत्या है.
उसी दिन दोपहर बाद पुलिस ने देवकीनंदन ठाकुर को रिहा कर दिया. पुलिस ने उन्हें धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था और निजी मुचलका भरवाकर उन्हें रिहा कर दिया.
मिल रही जान से मारने की धमकियाँ 
अनुसूचित जाति-जनजाति (संशोधन) विधेयक का विरोध कर रहे भागवत कथावाचक देवकीनन्दन ठाकुर को अनजान नंबरों से फोन पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और सोशल मीडिया पर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. उनके ‘शांति सेवाधाम’ आश्रम के प्रबंधक गजेंद्र सिंह ने वृन्दावन कोतवाली में तहरीर देकर पुलिस से इस मामले की जांच करने और ठाकुर की सुरक्षा का आग्रह किया है. पुलिस ने इस संबंध में गत सितम्बर 13 को मामला दर्ज कर लिया. 
पुलिस अधीक्षक (नगर) श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि देवकीनन्दन ठाकुर के व्यवस्थापक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अनजान फोन कॉल और सोशल मीडिया के जरिए भागवताचार्य को गोली मारने तथा शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर देने जैसी धमकियां दी जा रही हैं. धमकी के कुछ ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड उनके पास हैं. उन्होंने बताया कि कोतवाली प्रभारी स्वयं इस मामले में जांच कर रहे हैं. गजेंद्र सिंह द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो-वीडियो क्लिप तथा फोन रिकॉर्ड के माध्यम से धमकी देने वालों के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है. जल्द ही वे लोग सलाखों के पीछे होंगे.
इससे पूर्व सितम्बर 12 को विदेश यात्रा पर रवाना होने से पूर्व देवकीनन्दन ठाकुर ने कहा, ‘‘मैं अब पीछे नहीं हटूंगा. इसी मुद्दे के लिए ‘अखण्ड भारत मिशन’ का गठन किया गया है. वस्तुतः हम व्यक्ति विशेष अथवा किसी समाज के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन यदि एक वर्ग का भला करने के चक्कर में दूसरों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, समाज को बांटने की कोशिश की जाती है तो उसका विरोध अवश्य किया जाएगा.’’ 

मध्य प्रदेश : 'अबकी बार मध्य प्रदेश में आदिवासी सरकार' : जय आदिवासी युवा शक्ति

मध्य प्रदेश चुनाव 2018: कांग्रेस 40 सीटें देकर कर सकती है 'जयस' से गठबंधन!
जयस का चुनावी नारा है 'अबकी बार मध्य प्रदेश में आदिवासी सरकार'
विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले कांग्रेस और बसपा के गठबंधन के सबसे ज्‍यादा कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब कांग्रेस आदिवासी तबके में पैठ रखने वाली जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) से गठबंधन करने की कोशिशें कर रही है लेकिन एक सीट के कारण मामला खटाई में पड़ता दिख रहा है। 
द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक संभावित गठबंधन के लिहाज से जयस ने कांग्रेस से मांग करते हुए कहा है कि वह आदिवासी बाहुल्‍य सीट कुकसी पर अपनी दावेदारी छोड़ दे। कांग्रेस का इस सीट पर पिछले तीन दशकों से कब्‍जा है। इसलिए कांग्रेस इस पर अपनी दावेदारी कतई छोड़ने के मूड में नहीं है। दूसरी तरफ जयस इस सीट के लिए इसलिए अड़ी है क्‍योंकि पार्टी का हेडक्‍वार्टर इसी के अंतर्गत आता है और यहां इसका अच्‍छा-खासा प्रभाव माना जाता है। 
पहले BSP से नहीं बनी बात, अब केवल 1 सीट के कारण कांग्रेस का दूसरे दल से नहीं हो पा रहा गठबंधन
कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के बारे में जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने बताया, ''कांग्रेस हमारे साथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में चुनाव-पूर्व गठबंधन के लिए बातचीत कर रही है'' इसी बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की है कि जयस के साथ गठबंधन के लिए चर्चा चल रही है। 
इस मामले में एक दूसरा पेंच यह फंस रहा है कि कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक जयस ने 230 विधानसभा सीटों में से 40 सीटें मांगी हैं, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि पार्टी इतनी सीटें नहीं दे सकती। कांग्रेस सूत्रों का यह भी कहना है कि जब बसपा लगभग इतनी ही सीटें मांग रही थी तो कांग्रेस ने उसके साथ गठबंधन नहीं किया तो अब इस नए दल जयस को इतनी सीटें देना उपयुक्‍त नहीं लगता। 
जयस
‘अबकी बार मध्य प्रदेश में आदिवासी सरकार’ का नारा देने वाले जयस के राष्‍ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने कहा, ‘‘जयस मुख्य रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, रतलाम, झाबुआ, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास एवं बड़वानी जिलों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी, क्योंकि इन इलाकों में आदिवासी मतदाताओं की संख्या बड़ी तादाद में है’’
उन्होंने कहा, ''हमने कांग्रेस से प्री-पोल गठबंधन करने के लिए 230 विधानसभा सीटों में से 40 सीट मांगी है'' अलावा ने कहा,‘‘हमारा ध्यान खासकर पश्चिम मध्य प्रदेश स्थित मालवा-निमाड़ की 66 विधानसभा सीटों में से 28 सीटों पर रहेगा। इन 28 सीटों में से 22 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं और इन 22 सीटों में से कांग्रेस की झोली में वर्तमान में केवल पांच सीटें ही हैं। 
उन्होंने कहा, ‘‘जयस ने दो अक्टूबर को धार जिले के कुक्षी में ‘किसान पंचायत’ की थी। इसमें एक लाख से ज्यादा आदिवासी युवा शामिल हुए थे. इससे हमने बता दिया है कि मालवा-निमाड़ में हमारी क्या ताकत है’’
मालवा-निमाड़ अंचल
वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ की इन 66 सीटों में से बीजेपी ने 56 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को केवल नौ सीटों से संतोष करना पड़ा था। बीजेपी के बागी नेता के खाते में एक सीट आई थी जिसने अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। 
MP: चुनाव प्रचार के लिए राहुल गांधी ने खोजी भगवान परशुराम की जन्‍मस्‍थली!राहुल गाँधी ने खोजी परशुराम जन्मस्थली 
आजकल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को मन्दिरों और हिन्दुओं के देवी-देवताओं की जन्मस्थलियों के दर्शन कर हिन्दू वोटों को रिझाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, "राहुल गाँधी को एक बार अयोध्या, काशी और मथुरा भी जाने की सलाह देने पर विचार किया जा रहा है। और अयोध्या जाकर केवल इतना कह दें कि वर्षों से ताले में बंद पुरुषोत्तम श्रीराममन्दिर के ताले मेरे पिता राजीव गाँधी ने खुलवाए। यहाँ शिलान्यास भी मेरे पिता ने ही करवाया था, कोई दंगा नहीं हुआ। लेकिन भाजपा और संघ की मिलीभगत ने ठांचा गिराकर माहौल ख़राब कर दिया।"
 परन्तु एक पक्ष इस सलाह के विरुद्ध है, क्योकि भगवान परशुराम और पुरुषोत्तम श्रीराम का चोली-दामन का साथ है; दूसरे जब कोर्ट में राम को काल्पनिक और राम-रावण युद्ध और सीता का अपहरण ही नहीं हुआ बोल चुकी है, कांग्रेस का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है। वैसे तो राहुल का परशुराम जन्मस्थली पर जाने से कांग्रेस की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगने शुरू हो चुके हैं। 
इस बीच, कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पार्टी के स्थानीय नेता कोशिश कर रहे हैं कि राहुल महू के पास जानापाव की पहाड़ियों में स्थित भगवान परशुराम की जन्मस्थली भी जायें। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर अब तक असमंजस बना हुआ है। 
कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए अगले हफ्ते बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले मालवा-निमाड़ अंचल जाएंगे। कुल 230 सीटों वाली प्रदेश विधानसभा में मालवा-निमाड़ अंचल की 66 सीटें हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभागों में फैले इस अंचल को सूबे की 'सत्ता की चाबी' भी कहा जाता है। 28 नवंबर को होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वह इस इलाके में शहरी मतदाताओं के साथ दलितों, आदिवासियों और किसानों को साधने की कोशिश करेंगे। 
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राऊ से विधायक और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो वायरल हो गया है। जनसंपर्क के दौरान ...

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कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के टिकट की दावेदारी में कुछ सीटें ऐसी हैं जहां एक विधानसभा क्षेत्र में सगे व नजदीकी रि...

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मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर हो रही उठापटक ने भारतीय जनता पार्टी नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। पार्ट...

66 में से 56 सीटें बीजेपी के पास
वर्ष 2013 के पिछले विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ की 66 सीटों में से बीजेपी ने 56 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को केवल नौ सीटों से संतोष करना पड़ा था। एक सीट बीजेपी के बागी नेता के खाते में आई थी जिसने अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। 
इसी पृष्‍ठभूमि में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और मध्यप्रदेश मामलों के सह प्रभारी संजय कपूर ने कहा, "हम मालवा-निमाड़ में भाजपा के वर्चस्व को राहुल की अगुआई में सीधी चुनौती देंगे, जहां मतदाता इस बार बदलाव चाहते हैं" उन्होंने आरोप लगाया कि मालवा-निमाड़ अंचल में दलितों, आदिवासियों और किसानों समेत समाज के तमाम तबके पिछले 15 साल से सत्तारूढ़ बीजेपी की नीतियों के कारण बदहाल हैं। 
धार्मिक नगरी से शुरू होगा दौरा
कपूर ने प्रस्तावित कार्यक्रम के हवाले से बताया कि राहुल का मालवा-निमाड़ दौरा 29 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होगा। वह इस धार्मिक नगरी में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। कांग्रेस सचिव ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष 29 अक्टूबर को ही आदिवासी बहुल धार जिले में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह इंदौर पहुंचकर करीब तीन किलोमीटर के रास्ते पर रोड शो करेंगे। 
राहुल जाएंगे आंबेडकर की जन्‍मस्‍थली
कपूर ने बताया कि अगले दिन यानी 30 अक्टूबर को राहुल संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की महू स्थित जन्मस्थली पहुंचेंगे। "दलितों के मसीहा" के स्मारक में शीश नवाने के बाद वह इंदौर के इस नजदीकी कस्बे में चुनावी सभा को भी संबोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि राहुल 30 अक्टूबर को ही खरगोन और झाबुआ जिलों में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। दोनों जिलों में आदिवासियों की बड़ी आबादी रहती है। 

कांग्रेस स्टार प्रचारक साध्वी प्रियंका भारती भाजपा में शामिल

भोपाल : साध्वी प्रियंका भारती भाजपा में शामिल हुईं, पिछली बार थी कांग्रेस की स्टार प्रचारककभी कांग्रेस की स्टार प्रचारक रहीं साध्वी प्रियंका भारती ने अक्टूबर 24 को भाजपा की सदस्यता ले ली। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने साध्वी प्रियंका भारती को पार्टी की सदस्यता दिलाई। साध्वी प्रियंका मूलतः विदिशा से हैं और वे पिछले चुनावों में कांग्रेस की स्टार प्रचारक थी।
भाजपा के कार्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने साध्वी प्रियंका भारती को पार्टी की सदस्यता दिलाई। पिछले चुनावों में साध्वी ने कांग्रेस के लिए वोट मांगे, लेकिन इन चुनावों में साध्वी प्रियंका भारती भाजपा के लिए वोट की मांग करेंगी।
भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए साध्वी प्रियंका भारती ने कहा कि हिन्दुत्व के कारण उन्होंने भाजपा का दामन थामा है। साध्वी का विदिशा और आसपास के क्षेत्र में काफी प्रभाव है और उनके बड़ी संख्या में अनुयायी भी हैं। ऐसे में ये कदम भाजपा के लिए फायदेमंद साबित नजर आ रहा है।

मप्र भाजपा में बढ़ रही असंतुष्टों की संख्या

मप्र भाजपा में बढ़ रही असंतुष्टों की संख्या, टिकट के लिए आम सहमति बनाना होगा मुश्किलमध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर हो रही उठापटक ने भारतीय जनता पार्टी नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के सर्वे, खुफिया रिपोर्ट और संघ के आकलन ने मौजूदा विधायकों की जो स्थिति बताई है, उसके मुताबिक पार्टी को 70-75 टिकट बदलना पड़ सकता है।
करीब 17 मंत्रियों की हालत भी खस्ता बताई जा रही है। कुछ महीनों पहले नगरीय निकाय चुनाव में टिकट नहीं पाने वाले नेताओं ने जिस तरह बागी होकर चुनाव लड़ा और नुकसान पहुंचाया, उससे पार्टी के नेता हैरत में हैं।
इस परिस्थिति को देख पार्टी ऐसे बागी नेताओं को रोकने का फार्मूला तैयार कर रही है ताकि ऐन चुनाव के वक्त बागी बनकर ये नेता पार्टी के लिए मुसीबत न खड़ी करें। पार्टी के भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में भी रोजाना टिकट पाने और कटवाने को लेकर नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन हो रहे हैं। पार्टी के ही नेता मान रहे हैं कि इससे आम सहमति बनाने में मुश्किल होगा।
रोजाना हो रहा विरोध प्रदर्शन
नवंबर में होने वाले चुनावी दंगल की तारीख नजदीक आते ही भाजपा मुख्यालय में नारेबाजी और हंगामों का दौर शुरू हो गया है। कई विधानसभा क्षेत्रों के नेता भारी भीड़ लाकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं तो कई विधायकों की टिकट कटवाने के लिए कार्यकर्ताओं की भीड़ नारेबाजी और हंगामा कर रही है।
अक्टूबर 23 को जब पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल चुनाव प्रबंधन को लेकर दीनदयाल परिसर में दिग्गज नेताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे, तभी टिकट की दावेदारी और टिकट कटवाने के लिए बाहर नारेबाजी हो रही थी। वरिष्ठ नेता विजेंद्र सिंह सिसोदिया के बेटे ने हजारों समर्थकों के साथ भाजपा दफ्तर पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। विधायक हेमंत खंडेलवाल और हजारीलाल दांगी का विरोध करने आए लोगों ने पार्टी कार्यालय में नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
आम सहमति बनाना मुश्किल हो रहा
भाजपा कार्यालय में टिकट को लेकर धरने प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। पहले भी इस तरह का विरोध होता रहा है। पर खास बात ये है कि इस बार चुनाव में हर सीट से टिकट के दावेदारों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि पार्टी को एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बना पाना मुश्किल हो रहा है।
विधायक को दे रहे विकल्प 
पार्टी को ये भय भी सता रहा है कि जिन विधायकों के टिकट काटे तो वे बागी न बन जाएं वरना चुनाव में नुकसान पहुंचा सकते हैं। पार्टी पदाधिकारियों की मानें तो इससे निपटने के लिए बी प्लान तैयार किया है। इसमें पार्टी टिकट से वंचित विधायक को ही विकल्प दिया है कि वह बेहतर और जीतने वाला प्रत्याशी बताए। उसके सुझाव पर परिवार में कोई बेहतर प्रत्याशी हुआ तो पार्टी उस पर भी विचार करेगी। ऐसी स्थिति न होने पर ही पार्टी किसी नए चेहरे को टिकट देगी। इस कवायद के पीछे पार्टी का मकसद ये है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी हर हाल में बागियों का सामना नहीं करना चाहती है।
टिकट मांगना सभी का अधिकार
किसी भी कार्यकर्ता को पार्टी के समक्ष अपनी बात रखने की मनाही नहीं है। टिकट मांगना भी सभी कार्यकताओं का अधिकार है। अभी तक ऐसा कोई वाक्या नहीं हुआ है जिससे पार्टी की मर्यादा भंग हुई हो। भाजपा में प्रत्याशी चयन का काम आसानी से पूरा हो जाएगा। अभी न तो देरी हुई है और न ही पार्टी जल्दी में है। उचित समय पर प्रत्याशी घोषित होंगे और तब सभी काम में लग जाएंगे। 

मध्य प्रदेश : अाप मेरा ध्यान रखना, पार्टी जाए तेल लेने : कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी

जनसंपर्क के दौरान विधायक पटवारी बुजुर्ग से मिले थे।राऊ से विधायक और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो वायरल हो गया है। जनसंपर्क के दौरान पटवारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि अाप मेरा ध्यान रखना। आपको मेरी इज्जत रखनी है, पार्टी जाए तेल लेने। पटवारी का वीडियो सामने आने के बाद राजनीति गरमा गई है।
आगामी चुनाव को लेकर जीतू पटवारी अपने क्षेत्र में सघन जनसंपर्क कर रहे हैं। मंगलवार सुबह भी पटवारी ने क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक के दौरान लोगों से मिलकर चुनाव में उन्हें वोट देने का अनुरोध किया। इस दौरान पटवारी कई घरों में पहुंचे और बुजुर्गों के पैर छूकर, गले मिलकर उनसे आशीर्वाद लिया। 
पटवारी ने एक बुजुर्ग से गले मिलते हुए कहा कि आप चुनाव में हमें वोट दें। बुजुर्ग ने विपक्षी पार्टी का हाेने की बात कही तो उन्होंने कहा कि अाप मेरा ध्यान रखना, आपको मेरी इज्जत रखनी है पार्टी जाए तेल लेने।दैनिक भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
मामले पर सफाई देते हुए पटवारी ने कहा, "राजनीतिक क्षेत्र में इस प्रकार की बातें होती रहती हैं। जब हम जनसंपर्क में निकलते हैं तो विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात होती है। विधायक होने के नाते राऊ विधानसभा क्षेत्र का हर नागरिक मेरे परिवार का सदस्य है। इसलिए पार्टी को अलग रखकर लोगों से मिलता हूं।''
 पटवारी के मुताबिक, "जनसंपर्क के दौरान एक बुजुर्ग ने कहा कि मैं विपक्षी पार्टी का कार्यकर्ता हूं। आप व्यक्ति अच्छे हैं, इसलिए हम आपके साथ हैं। इस पर मैंने भावनात्मक रूप से जुड़ते हुए यह बात विपक्षी पार्टी (भाजपा) के लिए कही थी। मेरे लिए मेरी पार्टी (कांग्रेस) और मेरा परिवार (मेरा क्षेत्र) पहली प्राथमिकता है।'' 2013 के विधानसभा चुनाव में पटवारी ने राऊ सीट पर भाजपा के जीतू जिराती को हराया था।

78 मौजूदा विधायकों को टिकट न दें--RSS की BJP को बड़ी सलाह

मध्य प्रदेश में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भाजपा को एक ऐसी सलाह दे दी है, जिसने पार्टी की परेशानी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस ने भाजपा के 78 मौजूदा विधायकों को चुनाव में न उतारने का सुझाव दिया है। 
आरएसएस ने यह भी सुझाव दिया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुधनी की जगह भोपाल की गोविंदपुरा सीट से चुनाव लड़ाया जाए। बता दें कि गोविंदपुरा को भाजपा का गढ़ माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर यहां से रिकॉर्ड आठ बार चुनाव जीते हैं। 
हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, संघ परिवार ने सत्तारूढ़ दल से उसके 78 उम्मीदवारों को उनके खराब प्रदर्शन के कारण बदलने का आग्रह किया है। 
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की राज्य चुनाव प्रबंधन समिति की एक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई थी, जिसमें पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी इस बात पर सहमत हुए थे कि केवल संभावित विजेताओं का ही चयन किया जाएगा। इसके अलावा किसी अन्य कारक (फैक्टर) पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। 
पार्टी हाई कमान ने यह भी कहा कि किसी भी उम्मीदवार को तब तक ‘दागी’ नहीं कहा जा सकता है, जब तक वो अदालत द्वारा दोषी न सिद्ध हो जाए। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, राज्य प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और सुहास भगत ने टिकट वितरण के लिए मानदंडों और जिन नामों को हटाया जा सकता है, उसपर चर्चा की। 
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में राकेश सिंह ने कहा, ‘पार्टी सिर्फ जीत के मानदंडों के आधार पर ही उम्मीदवारों को टिकट देगी। यहां कोई भ्रष्ट उम्मीदवार नहीं है, जब तक कि किसी के खिलाफ अदालत का फैसला नहीं आ जाता है।’
चुनाव में ‘दिग्गी राजा’ के दरकिनार होने से भाजपा की बढ़ी मुश्किलें
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के चुनावी दंगल में क्या पार्टी से दरकिनार कर दिए गए हैं? हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें दिग्विजय पार्टी कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं, ‘काम नहीं करोगे तो ख्वाब पूरा नहीं होगा। नहीं बनेगी सरकार। दुश्मन को भी टिकट मिले तो काम करो, उसे ही जिताओ। मेरे बोलने से तो कांग्रेस के वोट कम होते हैं।’ 
सूबे में वोटिंग के लिए छह हफ्ते भी नहीं बचे हैं। लिहाजा ऐन चुनाव के वक्त दिग्विजय ने ऐसा क्यों कहा…? क्या वह सचमुच दरकिनार किए जा रहे हैं या इस बार एक ‘रणनीति’ के तहत ऐसा किया जा रहा है…? यह रणनीति है तो किसकी है, राहुल गांधी की या फिर खुद दिग्विजय की…? ये सवाल आम चर्चाओं में हैं। वही भाजपा कांग्रेस में दिग्विजय को दरकिनार किए जाने से चिंतित नजर आ रही है। भाजपा लोगों से कह रही है कि कांग्रेस के पास एक चेहरा ही नहीं है. जनता उसे वोट दे तो किसको देखकर…?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हों या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दोनों ने ही राहुल गांधी के साथ अगर किसी को टारगेट पर रखा है तो वे राघोगढ़ के राजा ही हैं। भाजपा नेताओं के भाषण ‘मिस्टर बंटाधार’ (बीजेपी ने 2003 में दिग्विजय को नाम दिया था) के जिक्र के बिना खत्म नहीं होते। लोगों को दस साल के उनके राज में सड़क, बिजली, पानी के हाल की याद दिलाई जाती है।  
मुख्यमंत्री चौहान कहते हैं, दिग्विजय पोस्टरों से गायब हैं, न ही उनकी आम सभाएं हो रही हैं। किसी ने नहीं सोचा होगा कि कांग्रेस अपने एक वरिष्ठ नेता के साथ ऐसा व्यवहार करेगी। कम से कम उनकी प्रतिष्ठा का तो ख्याल रखना चाहिए। भाजपा दिग्विजय को हर हाल में भड़काने की कोशिशें की जा रही हैं। ताकि वे कुछ बोलें, करें। लेकिन दिग्विजय ‘बैकरूम बॉय’ बने हुए हैं। यही भाजपा की बेचैनी की वजह है।