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कारण जिनके चलते राज्य में बीजेपी का राज हुआ अस्त

राजस्थान: 6 कारण जिनके चलते राज्य में बीजेपी का राज अस्त होता दिख रहा है!
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजस्थान की राजनीति पांच साल में कितना बदल गई, ये विधानसभा चुनाव के रुझानों से समझा जा सकता है। राजस्थान में बीजेपी ने 2013 में 200 में 163 सीट जीती थीं। इस बार कांग्रेस ने लगातार बढ़त बना रखी है। यानी बीजेपी को राज्य में भारी नुकसान हो रहा है। राजस्थान में बीते दिनों हुए दो लोकसभा सीट और एक विधानसभा सीट के उप चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इससे हवा का रुख बदलने का संकेत मिल गया था। जानें कि वो कौन से कारण हैं, जो बीजेपी की हार का कारण बनें :--
1. राजपूत फैक्टर
माना जा रहा है कि इस बार राजपूत वसुंधरा सरकार ने नाराज थे। इसका नुकसान चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ा। चुनाव के दौरान राजपूत समाज के कई नेताओं ने बीजेपी के विरोध का ऐलान किया। गैंगस्टर आनंदपाल सिंह रावणा राजपूत समाज से था और उसके गैंग के 70 प्रतिशत लोग राजपूत है। मुठभेड़ में उसकी हत्या के बाद राजपूत समाज की नाराजगी बढ़ गई। राजपूत बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक है। उसके नाराज होने से बीजेपी परसेप्शन की लड़ाई चुनाव से पहले ही हार गई 
2. सचिन पायलट और अशोक गहलोत की जोड़ी
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कांग्रेस में नया जोश भरने का काम किया। उन्होंने युवाओं को अपने साथ जोड़ा, जबकि दूसरी ओर अनुभवी अशोक गहलोत ने राज्य में जातीय समीकरणों को साधा। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं में भरोसा जगाया कि कांग्रेस में सभी के लिए जगह होगी। राजपूतों की बीजेपी से नाराजगी और माली तथा गुर्जर वोट कांग्रेस के पक्ष में आने से राज्य के चुनावी समीकरण बदल गए  
3 वसुंधरा राजे की छवि
वसुंधरा राजे की छवि भी बीजेपी की हार की एक वजह रही। राज्य में उनकी महारानी वाली छवि है। आम धारणा है कि वो अपने खास लोगों की कोटरी में रहना पसंद करती हैं और आम जनता के साथ उनका जुड़ाव उतना नहीं है। आम बीजेपी कार्यकर्ताओं और संगठन के लोगों के साथ भी उनका भावनात्मक जुड़ाव कम है
 यही बात पार्टी के अन्य नेताओं पर भी लागू होती है। केवल अपने मनपसंद यानि चमचों के इर्दगिर्द रहकर, दूसरे कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करना, भी हार का मुख्य कारण है। 

4. बगावत
राजस्थान में बीजेपी पिछले कई चुनावों से बगावत और भीतरघात का सामना कर रही थी। इस बार घनश्याम तिवाड़ी और मानवेंद्र सिंह के रूप में दो बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। घनश्याम तिवारी ने अपनी अलग पार्टी बनाई, जबकि मानवेंद्र में शामिल हो गए। टिकट कटने से नाराज जिला स्तर के कई नेताओं की बगावत ने हालात को बीजेपी के लिए और बिगाड़ दिया। राज्य में पार्टी के नेताओं की बगावत बीजेपी की हार का एक प्रमुख कारण है
 

5. पद्मावत का विरोध
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत का राजपूत समाज ने पूरे देश में विरोध किया हालांकि ये विरोध राजस्थान में सबसे तेज था. राजपूत समाज की वसुंधरा राजे से शिकायत थी कि इस फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन को रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया और बीजेपी पर राजपूतों की उपेक्षा का आरोप लगाया
 

6. अयोग्य प्रत्याशी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने बाजी मारी. कांग्रेस ने स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर कहीं बेहतर टिकट दिए।  जबकि बीजेपी के प्रत्याशियों का जनता के साथ उतना अधिक जुड़ाव नहीं था
 

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राजस्थान के पूर्व मंत्री और मीणा समुदाय के कद्दावर नेता किरोड़ीलाल मीणा ने हाल ही में पत्नी गोलमा देवी और अन्य एक .....

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राजस्थान में कांग्रेस ने भाजपा को शिकस्त जरूर दे दी है, लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच हो रहे घमासान पर पार्ट...
मध्य प्रदेश की वे सीटें जहां जीत और हार का अंतर 2000 वोटों से भी रहा कम
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद राज्य में कांग्रेस का 15 सालों का वनवास खत्म हुआ है। 15 सालों के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस सत्ता में वापसी करने जा रही है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 114 पर जीत हासिल की, हालांकि ये बहुमत के लिए जरूरी 116 सीटों की संख्या से 2 कम था लेकिन सपा और बसपा के समर्थन के अलावा कांग्रेस ने अन्य 4 विधायकों के समर्थन का दावा भी किया है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश में चुनौतियां आसान नहीं थीं। शिवराज सिंह चौहान के सामने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न देने के बाद कांग्रेस ने पूरे चुनाव में सत्ता-विरोधी लहर पर अपना ध्यान लगाए रखा। 
इस चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर देते हुए आखिरकार सत्ता में वापसी कर ली लेकिन ये इतना आसान नहीं रहा जितना नतीजे आने के बाद आसान समझा जा रहा है। ऐसी कई सीटें थी जहां पर जीत-हार में मामूली अंतर था और वोटों की गिनती के दौरान कई बार बीजेपी इन सीटों पर कांग्रेस से आगे रही थी। बार-बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच आगे-पीछे की रेस चलती रही। इनमें से कुछ सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई तो अंत में कुछ सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी घोषित हुए और पार्टी का आंकड़ा 114 सीटों तक जा पहुंचा।
 क्रम     विधानसभा सीट          विजेता        पार्टी     दूसरे स्थान पर                पार्टी         वोटों का अंतर     1         ग्वालियर              प्रवीण पाठक     कांग्रेस  नारायण सिंह कुशवाहा       बीजेपी     121 

 2         सुवासरा                    हरदीप सिंह      कांग्रेस  राधेश्याम नंदलाल पाटीदार  बीजेपी       350 
 3         जावरा                       राजेंद्र पांडेय      बीजेपी  केके सिंह कलुखेड़ा             कांग्रेस         511  
4         जबलपुर नॉर्थ         विनय सक्सेना   कांग्रेस  शरद जैन                             बीजेपी        578  
5         बीना                     महेश राय       बीजेपी  शशि कठोरिया                 कांग्रेस       632  
6        कोलारस                 बीरेंद्र रधुवंशी      बीजेपी   महेंद्र रामसिंह                     कांंग्रेस        720  
7        दमोह                     राहुल सिंह           कांग्रेस   जयंत मलैया                      बीजेपी        798  
8        बिओरा                  गोवर्धन डांगी       कांग्रेस   नारायण सिंह पनवार        बीजेपी        826  
9       देव तालाब              गिरीश गौतम      बीजेपी   सीमा जयवीर सिंह सेंगर    बसपा        1080  
10     इंदौर-5                  महेंद्र हरदिया      बीजेपी  सत्यनारायण पटेल            कांग्रेस        1133  
11    चंदला                    राजेश कुमार प्रजापति बीजेपी अनुरागी हरप्रसाद        कांग्रेस         1177  
12    नागौर                     नगेंद्र सिंह          बीजेपी   यादवेंद्र सिंह                      कांग्रेस        1234  
13    नेपानगर                सुमित्रा देवी         कांग्रेस   मंजू राजेंद्र दादू                  बीजेपी        1264  
14  ग्वालियर रुरल        भरत सिंह कुशवाहा  बीजेपी  साहब सिंह गुर्जर             बसपा      1517  
15   गुन्नौर                 शिवदयाल बागरी     कांग्रेस  राजेश कुमार वर्मा            बीजेपी     1984
'नोटा' के चलते यहां बदल गई तस्वीर
ब्यावरा में कांग्रेस प्रत्याशी 826 वोट से जीता, जबकि नोटा में 1481 मत गिरे। दमोह में वित्तमंत्री जयंत मलैया 798 मतों से हारे और नोटा में 1299 वोट निकले। गुन्नाोर में जीत हार का अंतर 1984 मतों का रहा, जबकि नोटा में 3734 वोट चले गए। ग्वालियर दक्षिण का फैसला 121 वोटों से हुआ, लेकिन 1550 मतदाताओं ने नोटा दबा दिया। जबलपुर उत्तर में राज्यमंत्री शरद जैन 578 मतों से हारे और 1209 नोटा को अपना मत दे दिया।
जोबट में 2056 मतों से फैसला हुआ, लेकिन नोटा में सबसे ज्यादा 5139 वोट चले गए। मंधाता में भले ही जीत-हार का फैसला 1236 वोट से हुआ हो पर 1575 मतदाताओं ने नोटा को चुना। नेपानगर में भाजपा प्रत्याशी को जीतने के लिए 732 वोट चाहिए थे पर 2551 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प अपनाया।

सुर्खियों में रही सीट राजनगर में राजपरिवार के विक्रम सिंह नातीराजा 732 वोट से जीते और 2485 वोट नोटा में चले गए उधर राजपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत के लिए 932 वोट चाहिए थे, लेकिन 3358 मतदाताओं ने उनके बजाय नोटा का बटन दबा दिया। सुवासरा में भी भाजपा प्रत्याशी को जीतने के लिए मात्र 350 वोट चाहिए थे, लेकिन 2976 मतदाताओं ने उन्हें अथवा किसी अन्य प्रत्याशी को चुनने के बजाय नोटा का विकल्प चुन लिया।
दूसरे, दिल्ली से कश्मीर और कश्मीर से कन्याकुमारी तक पार्टी त्रिमूर्ति मोदी-योगी-अमित पर ही निर्भर है। पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर, दूसरी पार्टी से आये दलबदलुओं को सिर पर बैठाया जा रहा हैं। भाजपा किसी भी आंदोलन पर आक्रामक होने की बजाए बचाव में व्यस्त रही। विपक्ष भाजपा की इस मजबूरी को अच्छी तरह से समझ चुकी है, उपचुनावों के बाद विधानसभा चुनावों में भी उनका हथियार काम आ गया, अब 2019 लोकसभा चुनावों में भी यही हत्कन्डे अपनाये जाएंगे।

5 राज्यों में कांग्रेस को लाभ 83%, 

भाजपा को 50% नुकसान

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस को हुए लाभ या हानि को देखें तो पिछली बार के मुकाबले इस बार भाजपा को लगभग 50 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा है जबकि कांग्रेस को 83 प्रतिशत का लाभ हुआ है।
2013 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में चुनाव हुए थे जबकि 2014 में आंध्र प्रदेश का चुनाव हुआ था जिससे तेलंगाना बना था। 2013 और 2014 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को सभी 5 राज्यों में मिली सीटें देखे तो कुल 382 सीटें मिली थी जिसमें सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 165, राजस्थना में 163 और छत्तीसगढ़ में 49 सीटें आईं थी। वहीं उस समय कांग्रेस को इन सभी राज्यों में कुल 165 ही सीटें मिल पायीं थी।
लेकिन इस बार के चुनावों में कांग्रेस ने BJP पर बढ़त ली है और अपनी कुल सीटों के आंकड़े को 303 तक पहुंचा दिया है, वहीं दूसरी ओर BJP की पाचों राज्यों में सीटें 382 से घटकर अब 192 रह गई हैं। यानि BJP को लगभग 50 प्रतिशत नुकसान हुआ है और कांग्रेस को 83 प्रतिशत का फायदा हुआ है।

राज्यकांग्रेसभाजपा
2013 सीट2018 सीट% बदलाव2013 सीट2018 सीट% बदलाव
छत्तीसगढ़396258.974913-73.46
मध्य प्रदेश5811496.55165106-35.75
राजस्थान21102385.7116371-56.44
मिजोरम 345-58.2901100
तेलंगाना (2014)132053.8451-80
कुल 16530383.6382192-49.6












    

नामदार को सभी मुद्दों पर प्रमाण मांगने की पड़ चुकी है आदत: नरेन्द्र मोदी

Narendra modiराजस्थान विधानसभा के लिए होने वाले प्रचार के अन्तिम क्षणों में मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दल अपनी खूबियों के साथ विरोधियों के खामियों का जिक्र कर रहे हैं। सीकर में एक रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की घेरेबंदी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान देश का क्या हाल हुआ ये सबके सामने है। 
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब भारतीय फौज के जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया तो पूरे देश में जोश था। लोगों को यकीन होने लगा था कि हम पाकिस्तान के बारे में महत्वपूर्ण फैसले कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस के खेमे में माहौल ऐसा था जैसे की वो कोई शोक सभा कर रहे हों। लोगों से सवाल करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब आप को इसकी खबर मिली तो क्या आपको शक हुआ। कांग्रेस के दफ्तर में बैठकर नामदार कह रहे थे कि मोदी झूठ बोल रहे हैं।



PM Narendra Modi in Sikar, Rajasthan: Congress has come up with a "fatwa" that I should not begin rallies with "Bharat Mata Ki Jai". How can they deny this? They must be ashamed of even saying such a thing. This shows their disrespect for our motherland.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नामदार की पार्टी एक फतवे के साथ लोगों के बीच जा रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस के लोगों को हिदायत मिली है कि उन्हें भारत माता की जय नहीं कहना है। आखिर वो कैसे इससे इंकार कर सकते हैं। कांग्रेस के लोगों को शर्मिंदा होना चाहिए कि वो भारत माता की जय नहीं कहते हैं। इससे साफ है कि नामदार और उनकी पार्टी को भारत मां का सम्मान नहीं है। राजस्थान की सभी 200 सीटों के लिए सात दिसंबर को मतदान होगा।
मां-बेटे ने किया करोड़ों का घपला-पीएम मोदी
नेशनल हेराल्ड मामले पर सोनिया और राहुल को कठघरे में खड़ा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों मां-बेटा जमानत पर जेल से बाहर आए हैं. उन्होंने कहा, 'अब मैं देखता हूं कि इन मां-बेटे को कौन बचाता है.' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले अपनी चार पीढ़ियों का जवाब दे, इसके बाद बीजेपी सरकार से 4 साल का जवाब मांगे.

पीएम मोदी के संबोधन की खास बातें
- राजस्थान की जनता ने भाजपा को विजयी बनाने का फैसला कर लिया है.
- हम सभी साथी एक-एक घर पहुंचेंगे, एक-एक मतदाता से मिलेंगे और सबसे ज्यादा मतदान कराकर राजस्थान में भाजपा का विजय डंका एक बार फिर बजवाएंगे.
- कांग्रेस पार्टी राजस्थान में चुनाव तो हार चुकी है, अब वो लोग इस फिराक में लगे हैं कि इस हार का ठीकरा नामदार के सिर पर ना फूटे. 
- मैं सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ हूं मैंने गरीबी देखी है.
- इंदिरा पीएम थी, राजीव पीएम थे लेकिन सोनिया रिमोट कंट्रोल से पीएम थी
- आपने जो काम नहीं किया उसका हिसाब मोदी से मांग रहे हो.

- मैं कांग्रेस के नामदार को चुनौती देता हूं कि वे बिना पर्चा हाथ में लिए क्रम से कांग्रेस के अध्यक्षों का नाम बता दें.
Amit Shah targets Congressक्या चॉपर घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को पकड़ना गलत है?: अमित शाह 
अगस्तावेस्टलैंड चॉपर घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चिएन मिशेल का प्रत्यर्पण होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर निशाना साधा। अमित शाह ने पूछा कि बिचौलिए को न्याय की जद में लाना क्या गलत है? क्या विपक्ष उसे बचाना चाहता है। उसके पास कोई मुद्दा नहीं है। इसके अलावा शाह ने कहा कि भाजपा राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।
जयपुर में भाजपा अध्यक्ष ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि हम पूर्ण बहुमत के साथ राजस्थान में सरकार बनाएंगे और वसुंधरा राजे एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगी।' उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता ने कांग्रेस की वंशवादी एवं जाति की राजनीति को खारिज कर दिया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इन राज्यों में ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2019 में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।
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'भारत माता की जय' नारे पर राहुल गांधी के बयान पर शाह ने कहा, 'कांग्रेस चाहे जो करे। भाजपा जनसंघ के समय से भारत माता की जय बोलती आई है और उसे वह जारी रखेगी। जो लोग भारत माता की जय की जगह सोनिया गांधी की जय बोलते हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।' शाह ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या दोगुनी हुई है। कर संग्रह बढ़ा है।
राजस्थान में विधानसभा की 199 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। यहां रामपुर निर्वाचन क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का निधन हो जाने से चुनाव टल गया है। राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। इस राज्य में चुनाव-प्रचार आज शाम पांच बजे थम जाएगा। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार वहां इतिहास खुद को दोहराएगा और उसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा। वहीं, भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। भाजपा का मानना है कि इस बार राजस्थान में पिछले 25 सालों का इतिहास टूटेगा।

राजस्थान चुनाव 2018: मॉब लिंचिंग पर कांग्रेस ने साधी चुप्पी, ध्रुवीकरण का सता रहा डर

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने में अब महज तीन दिन बचे हैं. 7 दिसंबर को होने जा रही वोटिंग से पहले जहां एक ओर राजनीतिक पार्टियों ने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी लड़ाई जोरों पर है. मगर अपने चुनावी अभियान में राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर शोर मचाने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस मॉब लिंचिग पर चुप्पी साधे हुए है. अपने घोषणापत्र से रैलियों, सोशल मीडिया और पोस्टर्स तक में कांग्रेस ने सार्वजनिक सुरक्षा और बढ़ती अपराध दर को मुद्दा बनाया है, लेकिन हिंदू वोट छिटकने के डर से भीड़ की हिंसा पर मौन साध लिया है.
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी राजस्थान खासकर अलवर में विरोधी दल का कोई भी नेता अपने भाषणों में मॉब लिंचिंग का जिक्र तक नहीं कर रहा है. अलवर जिले की बहरोड़ सीट से नौ उम्मीदवारों में से 8 यादव हैं. 2.2 लाख वोटरों वाली बहरोड़ सीट पर यादव समुदाय का 70 फीसदी वोट बैंक है. बता दें कि पूर्व राजस्थान के अलवर जिले में गौकशी के आरोप में हिंसक भीड़ ने पहलू खान की हत्या कर दी थी. 2017 जुलाई में रामगढ़ चुनाव क्षेत्र से 80 किमी दूर रकबर खान को भी मॉब लिंचिंग का शिकार बनाया गया. उसके बाद नवंबर 2017 में उमर खान की हत्या कथित “गौ रक्षकों” ने हत्या कर दी थी.
ऑडियो क्लिप बनी मुद्दा
निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के बागी नेता बलजीत सिंह यादव ने नवंबर 29 को एक रैली के दौरान इस मुद्दे को उठाया. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप का जिक्र करते हुए बलजीत ने दावा किया कि एक मुस्लिम नेता ने कांग्रेस उम्मीदवार आरसी यादव को मॉब लिंचिग की घटना को उठाने के लिए अपना समर्थन दिया. हालांकि, कांग्रेस ने आरोप को खारिज कर दिया. Rajasthan Election 2018: ट्विटर पर फिल्मी डायलॉग्स से लोग कर रहे राजनीतिक दलों पर वार!

कांग्रेस कर रही राजनीति
बलजीत के करीबी एक सूत्र ने कहा, “मासूम यादव समुदाय के लोगों को हिंसा के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और कांग्रेस इस पर राजनीतिक करना चाहती है. हमारा इस बारे में कहना है कि निर्दोष लोगों को पहलू खान मामले में जेल में नहीं भेजा जाना था.” बहरोड़ नगर पालिका उपाध्यक्ष राकेश शर्मा की एक शादी में मर्डर के मामले को भी विपक्ष ने उठाया है.

ध्रुवीकरण करेगा मुद्दा
कांग्रेस के प्रभारी सुधांशु जोशी ने कहा, “हमारे लिए पहलू खान के मुद्दे को उठाना फायदेमंद नहीं है. वास्तव में, यह मुद्दा इस चुनाव को ध्रुवीकरण करेगा, जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. पूरी घटना को कुछ और के रूप में चित्रित किया गया था और बहरोड़ को बदनाम किया गया था. हम इस चुनावी इलाके के प्रचार में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जोर देते हैं.”

हजार से भी कम वोट
कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी कहा कि मुसलमानों को बहरोड़ में 1,000 से भी कम वोट हैं. उनके पास वैसे भी कोई विकल्प नहीं है. वे हमारे लिए ही वोट देंगे. एक वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, हमें यादव समुदाय को यहां नाराज करने की जरूरत नहीं है.

क्राइम रेट बढ़ा
आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बहरोड़ में हिंसक अपराध तेजी से बढ़ रहा है. 2015 और 2018 के बीच, यहां क्रमश: 21, 19, 23 और 25 मर्डर केस दर्ज हुए. वहीं, अपहरण के मामले 2016 में 27 से दोगुना होकर 2018 में 53 हो गए.

प्रॉपर्टी के दाम हैं क्राइम की जड़
एक वरिष्ठ पुलिस अफसर के अनुसार, प्रॉपर्टी के रेट तेजी बढ़ने के साथ पिछले कुछ सालों में यहां हिंसक अपराध बढ़ गया है.” दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है और इससे अचानक प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा भी हो गया है. अधिकारी ने कहा कि कई अपराध अब प्रॉपर्टी से जुड़े हुए हैं. राजस्थान पुलिस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2013 में अलवर में साल हत्या, अपहरण और बलात्कार के ज्यादातर मामले दर्ज किए गए. अकेले 2016 में इस जिले में 111 हत्याएं, बलात्कार के 239 केस और 336 अपहरण के मामले दर्ज किए थे.

रैलियों में नहीं आती भीड़
रामगढ़ चुनावी क्षेत्र में एक कांग्रेस नेता ने अपने एक चुनावी भाषण को लेकर बताया, “एक रैली को संबोधित करते हुए मैंने मॉब लिंचिंग का जिक्र किया और कहा कि लोगों को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए. अगले ही दिन कार्यकर्ताओं ने मुझे बताया कि लोगों ने रैलियों में आने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के बारे में भूल जाओ, हम हिंसा के बारे में बात तक नहीं कर सकते हैं. हमने फैसला किया कि हम केवल अपराध पर ध्यान केंद्रित करेंगे और लिंचिंग का जिक्र तक नहीं करेंगे.” मजे की बात यह है कि कल जो भाजपा विरोधी #mob lynching, #not in my name, #metoo और  #intolerence आदि से देश का सौहार्द ख़राब कर रहे थे, आज वही लोग इन मुद्दों पर बात करने से कतरा रहे हैं, जो प्रमाणित करता है कि इनका मकसद तुष्टिकरण की सियासत खेल कर जनता को सरकार के विरुद्ध कर अपनी तिजोरियाँ भरना था, जिन्हे जनता समझ चुकी है।    

बीजेपी का पलटवार
इस मामले को लेकर पूर्व अलवर बीजेपी अध्यक्ष धर्मवीर शर्मा ने कहा, ”कांग्रेस का प्रचार निराधार है. बीजेपी सरकार ने पूरे क्षेत्र में अपराध पर लगाम लगा रखी है. कांग्रेस केवल झूठ फैला रही है. उनके पास चुनाव में बात करने के लिए कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे ऐसी बातें कर रहे हैं.”

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राजस्थान में एससी/एसटी वोटबैंक ने उड़ाई भाजपा-कांग्रेस की नींद
राजस्थान विधान सभा चुनाव में इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दोबरा सत्ता में वापसी करने आसान नहीं होने वाला है, जबकि अंदरूनी कलह से जूझ रही कांग्रेस लगातार प्रदेश में पार्टी की संभावनाओं को बेहतर करने में जुटी है। प्रदेश के मतदाताओं पर दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों की पैनी नजर है। प्रदेश में राजपूत, जाट, एसएसी, एसटी वोटबैंक को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी के रणनीतिकार अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पिछले बार के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा 2013 में प्रदेश की 59 आरक्षित सीटों में से 50 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी, ऐसे में एसएसी और एसटी सीटों पर एक बार फिर से विजय पताका फहराना भाजपा के लिए शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है। हालांकि जिस तरह से पिछले कुछ सालों में दलितों के खिलाफ शोषण और मॉब लिंचिंग के मामले सामने आए थे, उसके बीच भाजपा के लिए यह आसान चुनौती नहीं होने वाली है।
कांग्रेस ने जीती थी 34 सीटें 

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने प्रदेश की कुल 200 विधानसभा सीटों में से उन 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जोकि एससी और एसटी के लिए आरक्षित थीं। प्रदेश में अगर एससी और एसटी वोटबैंक पर नजर डालें तो 17.8 फीसदी एससी वोटर हैं, जबकि 13.5 फीसदी वोटर एसटी हैं। जोकि कुल मिलाकर तकरीबन 31.3 फीसदी हैं, लिहाजा पिछले दो विधानसभा चुनाव में एससी एसटी मतदाताओं ने सरकार गठन में अहम भूमिका निभाई है।
भाजपा की रणनीति 

एससी वोटर मुख्य रूप से राजस्थान के सात डिवीजन में बंटे हैं, जबकि एसटी वोटर मुख्य रूप से उदयपुर डिवीजन में हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपना चुनावी अभियान उदयपुर से ही शुरू किया था, अगस्त माह में उन्होंने यहां के चारभुजा मंदिर से अपने अभियान की शुरुआत की थी। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान में अपनी पहली जनसभा सागवारा में सितंबर माह में की थी। एक तरफ जहां भाजपा ने अपनी पार्टी ने आदिवासी नेता किरोड़ी लाल मीणा को शामिल किया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने आदिवासी नेता रघुवीर सिंह मीणा को पार्टी में अहम जिम्मेदारी सौंपी है, उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है, जिससे कि ये दोनों नेता आदिवासी मतदाताओं को अपनी ओर खींच सके।
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सवर्णों के भारत बंद बुलाने के बाद से भाजपा सरकार पर दवाब की रणनीति काम कर रही है। एसएसी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट ...



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THE purpose of implementing the reservations in Independent India was to…

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों पर सात दिसंबर को मतदान होंगे. इसको लेकर मुख्यमंत्री वसु.....

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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक तेज होती जा रही है। इस बीच राज्य विधानसभा का अब तक का इतिहास देखें त.....

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राजस्थान में चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. यहां की परंपरा है कि हर पांच साल में सरकार बदलती रही है. भैरोसिंह शेखावत को ....

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कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची नवम्बर 17 को जारी कर दी। पार्टी ने भारती.....

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कुछ समय पहले राजस्‍थान से ताल्‍लुक रखने वाले वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता डॉ सीपी जोशी को बिहार के राज्‍य प्रभारी पद से ...

भाजपा के खिलाफ रोष 
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राजस्थान में भाजपा सरकार को लेकर प्रदेश के तकरीबन हर तबके में नाराजगी है, ऐसे में इस बार के चुनाव में वसुंधरा राजे की राह आसान नहीं होने वाली है। राजनीतिक विशेषज्ञ एमएल यादव ने कहा कि 2 अप्रैल से ही भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा काफी बढ़ता जा रहा है। ये लोग शांति बनाए हुए हैं और आगामी चुनाव में मतदान केंद्र पर ये लोग अपना गुस्सा जाहिर कर सकते हैं। वहीं आदिवासियों की बात करें तो उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है कि जिस तरह से मनरेगा को कमजोर किया गया है वह उनके लिए काफी नुकसानदायक साबित हुआ है। मनरेगा के कमजोर होने की वजह से आदिवासियों को पलायन करना पड़ा है, उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है।