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अरबपति होते आरक्षणलाभार्थी

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज भारत में गाँधी, आंबेडकर और तुष्टिकरण पुजारियों की कोई कमी नहीं। कदम-कदम पर मिल जाएंगे। कोई अपने कुर्सी की खातिर तो कोई अपनी तिजोरी भरने की खातिर इनका तीनो का भक्त बना हुआ है। लेकिन जब धरातल पर देखते हैं, गाँधी और तुष्टिकरण के ढोंगी भक्तों की तरह आंबेडकर भक्त भी ढोंगी ही दिखते हैं। सभी अपनी कुर्सी के भूखे। प्रमाण हैं, जिन्हें कोई झूठला नहीं सकता। 
भारत का संविधान बनाने पर डॉ भीमराव आंबेडकर ने तत्कालीन सरकार से अपनी अनुसूचित जाति के लिए दस वर्ष का आरक्षण माँगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया था, परन्तु जब उसी आरक्षण का उन्होनें दुरूपयोग होते देखा, तो तुरन्त इसे समाप्त करने की बात कही, और उनकी इस मांग को पूरी करने का किसी में साहस नहीं। विपरीत इसके आरक्षण के नाम पर इतनी पार्टियां बन गयीं हैं, परन्तु समस्याएं वहीँ की वहीं। जो सिद्ध करता है कि आरक्षण के नाम पर बनी पार्टियां अपनी जाति नहीं बल्कि अपना, अपने परिवार और अपने शुभचिंतकों का उत्थान कर रही हैं। आरक्षण की बीमारी केवल भारत में ही है, शायद किसी अन्य देश में नहीं। आखिर कब तक देश आरक्षण की आग में जलता रहेगा? विपरीत इसके नितरोज कोई न कोई जाति आरक्षण की मांग करती रहती है, और नेता किसी न किसी रूप में स्वीकार भी करते रहे हैं, अब इसे कुर्सी की भूख न कहा जाए तो क्या कहा जाए? इस आरक्षण के अन्य सामान्य जातियों को कितना नुकसान हो रहा है, किसी नेता अथवा पार्टी को चिंता नहीं। डॉ आंबेडकर तो अनुच्छेद 370 के विरुद्ध थे, फिर किस आधार पर इसे लागू रखा गया, क्या यही है आंबेडकर प्रेम या दूसरे अर्थों में यही कहा जा सकता है कि "जहाँ दिखी तवा परात, वहीं बिसाई सारी रात", यानि जनता को पागल बनाओ, और अपनी कुर्सी बचाए रखो। 
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल आरक्षण की सीमा 72 प्रतिशत करने के बाद पूरे देश मे आरक्षण पर फिर से बहस शुरू हो गया है, सामान्य वर्ग के लोग सड़कों पर उतरकर इसके विरोध में जहाँ आंदोलन कर इसे घटाने की माँग कर रहें हैं वहीं आरक्षण के लाभार्थी इस कार्य के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल को बधाई दे रहें हैं. सामान्य वर्ग समुदाय के अलग – अलग संगठन एकजुट होकर पूरे देश मे बड़े आंदोलन में लग गयी हैं वहीं दूसरी ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एकबार फिर से आरक्षण की समीक्षा करने की बात कहकर इस बहस को और तेज कर दिया है.
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पूरे देश मे जहाँ समय – समय पर विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग को लेकर माँग बढ़ते चली आ रही है वहीं आरक्षण के विरोध करने वाले अब इसे पूर्णतः समाप्त करने की वकालत कर रहें हैं लेकिन इस सब के बीच यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि संविधान में पिछड़ों को अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए आरक्षण नामक जो व्यवस्था की गयी है उसे उन समुदाय के लोगों को कितना फायदा हुआ है जिनके लिए ये व्यवस्था बनायी गयी है, एक अखबार द्वारा किए गए एक सर्वे से जो रिपोर्ट सामने आया है उससे वर्तमान समय मे आरक्षण की पोल खोलकर रख देता है. असल मे आजादी में 73 वर्ष बीतने के बावजूद आज भी समाज के मुख्यधारा से पिछड़े लोगों की हालात में कोई भी सुधार नहीं देखने को मिला है आरक्षण का लाभ वही लोग आज भी उठा रहे हैं जिनकी स्थिति काफी बेहतर है.
अखबार द्वारा एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण की नीति का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो करीब तीन-तीन पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ ले रहे हैं. पड़ताल में हमें ऐसे कई मामले मिले। हमने यहां ऐसे 10 प्रतिनिधि परिवारों का ही जिक्र किया है. हालांकि सरकार का कहना है कि उसके पास अभी ऐसा कोई जरिया नहीं है कि जिससे पता चल सके कि किसे कितना फायदा मिला.लेकिन विषय विशेषज्ञों का दावा है कि करीब 90 फीसदी ऐसे पिछड़े परिवार हैं जो एक बार भी इसका उचित लाभ नहीं ले पाए हैं.
Image result for रामविलास पासवानअखिल भारतीय सिविल एवं प्रशासनिक सेवा परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष हरदेव ने बताया कि देश में एससी व एसटी कैटेगरी के ऐसे कई ए क्लास ऑफिसर हैं जिनकी कई पीढ़ियां रिजर्वेशन का फायदा ले चुकी
हैं और अभी भी ले रही हैं. शिक्षा में आरक्षण, सरकारी नौकरी में आरक्षण और सांसद व विधायक के लिए रिजर्व सीट का प्रावधान रखा गया है. एससी वर्ग से आईएएस और सांसद बनने वाले करीब 90 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनकी पिछली पीढ़ी ने रिजर्वेशन का लाभ किसी न किसी रूप में लिया होता है. इस कारण उनके ही वर्ग से 95 फीसदी वंचित लोगों को अभी भी एक बार भी आरक्षण का लाभ नहीं मिला है.

सिर्फ एससी-एसटी में नहीं है क्रीमीलेयर: ओबीसी के लिए उच्च शिक्षा और नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण का नियम है. लेकिन इसका फायदा उन्हें ही मिलता जो क्रीमीलियर में नहीं आते हैं यानी उनकी या उनके पिता की वार्षिक आय आठ लाख रुपए से कम हो. वहीं एसटी का 7.5 और एससी का 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरी में है. वहीं इस वर्ग के लिए लोकसभा, विधानसभा और नगर पालिका में चुनाव लड़ने के लिए आरक्षित सीट रखी गई है. इनके लिए किसी भी प्रकार का क्रीमीलियर का नियम नहीं है. शहीदों पर आश्रित परिजन के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन ये दोनों ही प्रकार के रिजर्वेशन सिर्फ एक पीढ़ी तक ही दिया जाता है.
पहली बार उन परिवारों के नाम जो कई जनरेशन से ले रहे हैं फायदा
जगजीवन राम परिवार (बिहार)
डाबी परिवार (दिल्ली)
गावित परिवार (महाराष्ट्र)
प्रसाद परिवार (उत्तरप्रदेश)
सिंह परिवार (उत्तरप्रदेश)
बौद्ध परिवार (मध्यप्रदेश)
चौधरी परिवार (पंजाब)
कश्यप परिवार (छत्तीसगढ़)
भेड़िया परिवार (छत्तीसगढ़)
बंसीवाल परिवार (राजस्थान)
इस परिवार के 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति-अफसरशाही में हावी राजस्थान के बामनवास गांव से निकला श्रीनारायण मीणा का परिवार करीब 40 साल से पॉवर में है। वे सरपंच थे। मीणा समाज को प्रदेश में एसटी आरक्षण प्राप्त है। इस कुटुंब से निकले परिवारों मेें 25 से ज्यादा लोग राजनीति और अफसरशाही में हावी रहे हैं. परिवार के नमोनारायण मीणा आईपीएस रहे। बाद में केंद्र में मंत्री रहे। हरीश मीणा डीजीपी रहे। एसटी की रिजर्व सीट पर चुनाव भी लड़ा। ओपी मीणा भी मुख्य सचिव थे।
पहली पीढ़ी

जगजीवन राम उपप्रधानमंत्री रहे रिजर्व सीट से लड़ते थे. 30 से ज्यादा वर्षों तक मंत्री रहे।
टीना डाबी जो आरक्षण के सहायता से आईएस बनी उनके माता – पिता सहित दादा भी आरक्षण के सहारे से आईएस थे। माणिकराव होडल्या गावित 8 बार नंदूरबार से सांसद रहे। यूपीए-2 में मंत्री भी रहे।वरिष्ठ कांग्रेस नेता माता प्रसाद केंद्रीय मंत्री रहे और राज्यपाल रहे। देवी सिंह अशोक आईपीएस अफसर रहे। इनके बेटे भी आईपीएस अफसर हैं। 1952 में हरदास अहिरवार ने सेवढा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हार गए थे।
स्व. मास्टर गुरबंता सिंह जालंधर की करतारपुर (रिजर्व) सीट से कांग्रेसी विधायक रहे। स्व. बलीराम कश्यप, (एसटी) बस्तर की रिजर्व सीट से चार बार सांसद रहे। स्व. झुमुकलाल भेड़िया डौंडीलोहारा से छह बार विधायक रहे, मंत्री भी बने। सोहनलाल बंसीवाल एक बार दूदू और दूसरी बार दौसा की रिजर्व सीट से विधायक बने। दूसरी पीढ़ी इनकी पुत्री मीरा कुमार 5 बार सांसद रहीं। आईएफएस और लोकसभा स्पीकर भी रहीं।
नंदकिशोर के बेटे जसवंत ने यूपीएससी (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज) परीक्षा पास की थी। बेटी निर्मला नाशिक की इगतपुरी (एसटी) सीट से 2 बार विधायक रही हैं । बड़े बेटे केशव इनकम टैक्स कमिश्नर, मझले बेटे डॉ सर्व प्रकाश भास्कर सीएमओ हैं।
पुत्र बीपी अशोक आईपीएस हैं। बहू मंजू अशोक सरकारी अधिकारी हैं। पुत्र महेंद्र बौद्ध तीन बार सेवढा (रिजर्व) से विधायक रहे। गृह मंत्री भी रहे। एक बेटे संतोख सिंह मौजूदा सांसद हैं। दूसरे बेटे स्व. जगजीत सिंह मंत्री रहे थे। जगजीवन राम के बेटे सुरेश की बेटी मेधावी कीर्ति झज्जर (रिजर्व) से विधायक रहीं। जसवंत की बेटी टीना आईएस बनीं। पहली बार एससी कैंडीडेट ने टॉप किया। निर्मला की बेटी नयना ने 2017 में नाशिक (रिजर्व) जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ा था। डॉ सर्व प्रकाश के बेटे प्रियदर्शी रंजन एमसीएच, छोटे बेटे डॉ रवि चेस्ट स्पेशलिस्ट हैं। बीपी अशोक की बेटी डाॅ. अवलोकिता और दामाद डॉ. योगेश भी आईएएस हैं।
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यूपी का सीएम बनने के बाद से फुल एक्शन मोड में चल रहे योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश में कानून के राज का ढिंढोरा पीटते ...


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भारत से छद्दमवाद की कब अर्थी निकलेगी? ये छद्दम नेता कब तक देश को गुमराह करते रहेंगे? क्या इन छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेत...



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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार संविधान निर्माता और भारत के पहले कानून मंत्री बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर अनुच्‍छेद 370 ...
बौद्ध की बेटी कुहू 2015 में दतिया (रिजर्व) से जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। संतोख के बेटे बिक्रम चुनाव लड़े, हारे। जगजीत के बेटे सुरिंदर अभी एमएलए हैं। दिनेश और केदार के बच्चे अध्ययनरत, प्रवेश व छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया है। इनके दो बेटों ने पढ़ाई के समय प्रवेश और छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया।
2018 में सिकराय सीट से जियालाल के बेटे विक्रम रिजर्व सीट से चुनाव हार गए

'ये मोदी सरकार का छलावा है' : सवर्ण आरक्षण पर मायावती

BSP Chief Mayawati
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सवर्ण आरक्षण पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा, उनकी पार्टी आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल का समर्थन करेगी। साथ ही उन्होंने कहा, ये मोदी सरकार का छलावा है। सरकार ने पहले ये फैसला क्यों नहीं लिया। मायावती ने कहा, बीएसपी चीफ ने एएनआई से कहा, लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया ये फैसला हमें सही नीयत से लिया गया फैसला नहीं लगता है। चुनावी स्टंट लगता है। राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर बीजेपी अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले नहीं बल्कि और पहले ले लेती।
केंद्रीय कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने को जनवरी 7 को मंजूरी दे दी।  सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट ने ईसाइयों व मुस्लिमों सहित 'अनारक्षित श्रेणी' के लोगों को नौकरियों व शिक्षा में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया। इसका फायदा 8 लाख रुपए वार्षिक आय सीमा और करीब 5 एकड़ भूमि की जोत वाले गरीब सवर्णो को मिलेगा।View image on Twitter

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BSP chief Mayawati to ANI: Lok Sabha chunaav se pehle liya gaya ye faisla humein sahi niyat se liya gaya faisla nahi lagta hai, chunavi stunt lagta hai, rajnitik chalaava lagta hai, acha hota agar BJP apna karyakaal khatam hone se thik pehle nahi balki aur pehle le leti.
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कदम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मौजूदा 50% आरक्षण में दिक्कत नहीं पैदा करेगा। सूत्रों के अनुसार, 'इस कोटा में किसी भी आरक्षण के प्रावधान के तहत नहीं आने वाले वर्गो जैसे ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर, जाट, गुज्जर, मुस्लिम और ईसाई शामिल होंगे।'
कांग्रेस ने आरक्षण की मंजूरी देने के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया और जानना चाहा कि नौकरियां कहां हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि इस फैसले के पीछे का इरादा जनता का वास्तव में कल्याण करने के बदले राजनीति ज्यादा है।
नेता समाज समझता है की जनता पागल और मुर्ख है। लेकिन सवर्ण इतना मुर्ख नहीं, जितना समझा जा रहा है। मतदान में NOTA का प्रयोग पहले से अधिक होगा, क्योकि केवल10% आरक्षण देकर जिस आग को बुझाने का प्रयास किया गया है, वह और अधिक भड़केगी। देखिए आयकर की क्या सीमा है, और 8 लाख वार्षिक आय वालों को आरक्षण? है ना कितना हास्यप्रद? अभी सम्पन्न हुए राज्यों में मिली हार से सरकार इतनी विचलित हो गयी है की उचित अथवा अनुचित का चिंतन करने का भी समय नहीं। 
लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का बड़ा दांव, गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने का प्रस्ताव
लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से ऊपर और अधिक होगा। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक कल संसद में ला सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 50% से बढ़कर 60% हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता। अभी तक 22.5% अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%), ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% है।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आरक्षण नाग इतना भयंकर और खतरनाक है, जिसने…
मोदी सरकार का यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। समझा जाता है कि सरकार आरक्षण का मरहम लगा गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है। भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

भारत से आरक्षण की आग कब बुझेगी?

Reservation for upper caste
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आरक्षण नाग इतना भयंकर और खतरनाक है, जिसने 56 इंच सीने को भी डस लिया। विश्व में भारत ही शायद एकमात्र देश है, सम्भव है मेरा ज्ञान अपरिपक्व हो, जहाँ आरक्षण और जातियों को आधार बनाकर चुनाव लड़े जाते हैं। समझ नहीं आता भारत से आरक्षण की आग कब बुझेगी?
नेता समाज समझता है की जनता पागल और मुर्ख है। लेकिन सवर्ण इतना मुर्ख नहीं, जितना समझा जा रहा है। मतदान में NOTA का प्रयोग पहले से अधिक होगा, क्योकि केवल10% आरक्षण देकर जिस आग को बुझाने का प्रयास किया गया है, वह और अधिक भड़केगी। देखिए आयकर की क्या सीमा है, और 8 लाख वार्षिक आय वालों को आरक्षण? है ना कितना हास्यप्रद? अभी सम्पन्न हुए राज्यों में मिली हार से सरकार इतनी विचलित हो गयी है की उचित अथवा अनुचित का चिंतन करने का भी समय नहीं। 
लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का बड़ा दांव, गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने का प्रस्ताव
लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से ऊपर और अधिक होगा। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक कल संसद में ला सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 50% से बढ़कर 60% हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता। अभी तक 22.5% अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%), ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% है।
मोदी सरकार का यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। समझा जाता है कि सरकार आरक्षण का मरहम लगा गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है। भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
जानें आखिर सवर्णों में किसे-किसे ये आरक्षण मिल सकता है:
  • जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है
  • जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है
  • जिसका 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है
  • कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को
  • राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा 
  • आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा
  • इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा
  • आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है
लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट में फैसला किया है कि आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस आरक्षण की खास बात यह है कि यह  50 फीसदी आरक्षण की सीमा के ऊपर होगा और इसके लिए मंगलवार को संविधान संशोधन लाया जाएगा। ध्यान देने वाली बात यह कि मंगलवार को ही शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है। इस मामले पर तमाम राजनीतिक दलों  की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। 
See last two tweets re reservation 4forwards? Qs—did u nt think of this for 4 yrs 8 mths? so obviously thought of as election gimmick 3mths b4 model code! (3) u know u cannot exceed 50% maxima so it is done only to posture tht u tried unctal thing (4) do u hv majority 4ctal am?
कैबिनेट के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस की तरफ से पहली प्रतिक्रिया वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की आई है। सिंघवी ने कहा, 'सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला किया है। आपने इसके लिए 4 साल 8 महीने का इंजार किया? तो यह निश्चित रूप से एक चुनावी छलावा है वो भी ऐसे समय में जब आचार संहिता लगने में केवल 3 महीने बचे हैं। आप जानते हैं कि आप सीमा को अधिकतम 50 फीसदी ही बढ़ा सकते हैं।'
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा,  'केंद्र सरकार का यह कदम सराहनीय है। इसकी मांग काफी लंबे समय से चल रही थी। यह सवर्णों के  लिए एक ऐतिहासिक कदम है।' 
Reservation for General Categoryभाजपा सांसद और दलित नेता उदित राज ने कहा कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे। हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो साफ़ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है।'
शिवसेना ने भी इस पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह इस बिल का समर्थन करेगी। शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने कहा, 'हम इस बिल का पूरा समर्थन करते हैं। यह बाल ठाकरे का विचार था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी आरक्षण मिले।' पाटीदारों को आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले हार्दिक पटेल ने कहा,  'मोदी सरकार ने चुनाव से पहले एक लॉलीपॉप दिया है।'
एआईएएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'दलितों के साथ ऐतिहासिक अन्याय को सही करना आरक्षण का मतलब है। गरीबी उन्मूलन के लिए कोई भी विभिन्न योजनाएं चला सकता है लेकिन आरक्षण न्याय के लिए है। संविधान आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है।'
आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि भारत सरकार को पहले जातिगण जनगणना के आंकड़े सामने लाने चाहिए जिससे पता चल सकेगा कि कौन सी जातियां क्या काम करती हैं।
सीपीआई के डी राजा ने सुप्रीम कोर्ट ने पहले से आरक्षण पर एक कैप लगाई है,  राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भाजपा को जो रिपोर्ट्स मिल रही थी उसके आधार पर भाजपा ने यह फैसला लिया है। लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की भरपाई करने के लिए यह कदम उठाया गया है।View image on Twitter

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Harish Rawat,Congress on 10% reservation approved by Cabinet for economically weaker upper castes: 'Bohot der kar di meherbaan aate aate', that also when elections are around the corner. No matter what they do, what 'jumlas' they give, nothing is going to save this Govt
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, 'बहुत देर कर मेहरबॉं आते-आते। वो भी तब, जब चुनाव नजदीक है। सरकार कुछ भी कर ले, कोई भी फैसला इनको नहीं बचा सकता।
एनसीपी ने सशर्त समर्थन देने का ऐलान किया है, एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, 'हम बिल का समर्थन करेंगे लेकिन शर्त ये है कि सरकार में संशोधन लाए।' जिनको पहले से आरक्षण मिला हुआ है उनको दिया जा रहा है।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'इसकी आवश्यकता पहले से थी, गरीब और सवर्णों को आरक्षण मिल रहा है  मेरी नजर में यह सरकार का क्रांतिकारी कदम है।'