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240 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश में फिर से योगी सरकार, 5 में से 4 राज्यों में BJP को बहुमत: सर्वे में राम मंदिर और काशी कॉरिडोर से पब्लिक गदगद

‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के ओपिनियन पोल्स में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी तय दिख रही है। सर्वे के अनुसार भाजपा की उत्तर प्रदेश में वापसी 35 साल का रिकॉर्ड टूटेगा। जब सत्तारूढ़ पार्टी की वापसी होगी। जहाँ ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से भाजपा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में 227-254 सीटें मिलने का अनुमान है, ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने पार्टी को 240 सीटें मिलने का अंदेशा जताया है। समाजवादी पार्टी को ‘TN नवभारत’ के ओपिनियन पोल में 143 और मायावती की बसपा को 10 सीटें मिलती दिख रही हैं।

वहीं वोट प्रतिशत के मामले में भी भाजपा का ही बोलबाला दिखाया जा रहा है। चैनल द्वारा किए गए ओपिनियन पोल की मानें तो भाजपा 39.4% वोटों के साथ पहले नंबर पर रहेगी और अखिलेश यादव की सपा 34.6% वोट के साथ दूसरे नंबर पर। बसपा को 12.9% और कांग्रेस  को 6.9% वोट मिलता दिखाया गया है। कांग्रेस को इस ओपिनियन पोल में महज 8 सीट ही दी गई है, जो दिखाता है कि पार्टी की दुर्गति बनी रहेगी। कांग्रेस पार्टी के प्रचार की कमान प्रियंका गाँधी संभाल रही हैं।

वहीं अगर उत्तराखंड की बात करें तो TNN के ओपिनियन पोल में यहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटते दिख रहे हैं। पहाड़ी राज्य में भाजपा को 48 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) भी राज्य में अपना खाता खोलेगी और उसे 7 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। इस तरह भाजपा यहाँ दो तिहाई बहुमत से सत्ता में वापस आती दिख रही है। पार्टी को पिछले एक साल में 3 बार मुख्यमंत्री का बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सबसे चौंकाने वाले नतीजे पंजाब के दिखाए जा रहे हैं, जहाँ AAP की सरकार बनती हुई दिख रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी को यहाँ 56 सीटों पर जीत मिलते हुए दिखाया गया है, जबकि कांग्रेस 44 पर रह जाएगी। ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ को 13 और भाजपा को महज 2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। गोवा में भी AAP 10 सीटें जीतते हुए दिख रही है, जबकि 20 सीटों के साथ भाजपा बहुमत प्राप्त करती हुई दिख रही है।

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योगी आदित्यनाथ बनेंगे दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री, राज्य में लोगों की पहली पसंद: जन की बात ओपिनि
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योगी आदित्यनाथ बनेंगे दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री, राज्य में लोगों की पहली पसंद: जन की बात ओपिनि

इस ओपिनियन पोल की मानें तो मणिपुर में भी भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में वापसी करेगा। वहीं ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से 57.84% लोगों का कहना है कि राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से भाजपा को फायदा होगा, जबकि 36.73% लोग इसके उलट सोच रखते हैं। जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ‘जाटलैंड’ कहा जाता है और जहाँ किसान आंदोलन का असर था, वहाँ भी भाजपा को 37.61% वोट मिलते दिख रहे हैं। 46.32% लोगों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार किसान विरोधी नहीं है।

उत्तर प्रदेश चुनाव : राजनीति के कालनेमि जप रहे लक्ष्मी-दुर्गा का नाम, गले में रामनामी-माथे पर चंदन

                                                                                उत्तर प्रदेश चुनाव आते ही हिन्दू विरोधी सब हुए हिंदू हितैषी!
राजनीति के कालनेमि पिछले कुछ समय में जिस तरीके से अपने-अपने दड़बों से निकलकर हिंदुओं की धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं, जिस तरह से हर मामले में हिंदुओं के देवी-देवताओं को स्मरण कर रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि राजनीतिक तौर पर देश के सबसे प्रभावशाली प्रदेश, उत्तर प्रदेश में चुनाव का मौसम आ गया है।

कल तक हिन्दू और हिन्दुत्व का विरोध करने वाले आज मंदिरों पर माथा टेकने की होड़ लगाए हुए हैं। अयोध्या में राममंदिर बनने के घोर विरोधी भी आज अयोध्या जा रहे हैं, अब उनका मुस्लिम वोट नाराज नहीं होगा। क्योकि  नागरिक संशोधक कानून के विरोध में बने शाहीन बागों में एक बात स्पष्ट रूप से मुखरित होकर सामने आयी थी कि भारत को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए  रणनीति में बदलाव करना होगा, हिन्दुओं के सामने सेकुलरिज्म और उनकी गैर-मोजुदगी में अपने इस्लामिक अजेंडे पर काम करने की पॉलिसी पर काम करना होगा। उस आंदोलन में जो हिन्दुत्व विरोधी नारे लगे, किसी से छुपा नहीं, और उस आंदोलन को हवा एवं समर्थन देने वाले भी ये ही लोग थे, जो आज गले में रामनामी डाले अयोध्या में पिकनिक मनाने जा रहे हैं। 

कल तक जिस अयोध्या को साम्प्रदयिक रंग दिया जा रहा था आज गंगा-जल की तरह पवित्र कैसे हो गयी। अब जनता इन नेताओं से पूछे कि क्या चुनाव में काशी विश्वनाथ और कृष्णजन्मभूमि से मुग़ल आक्रांताओं द्वारा बनाई मस्जिदों को हटाने का संकल्प लेंगे? 

राजनीतिक कालनेमि के करतूतों पर गौर करने से पहले असली वाले कालनेमि को याद कर लीजिए। रावण के एक मायावी राक्षस का नाम था कालनेमि। प्रसंग है कि राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्च्छित हो जाते हैं। सुषेन वैद्य उपचार के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत बताते हैं। इसे लाने की जिम्मेदारी हनुमान जी को दी जाती है। जब रावण को यह खबर मिलती है तो वह हनुमान जी को झाँसा देने के लिए कालनेमि को भेजता है। कालनेमि साधु के वेश में राम नाम के जाप और अपनी माया से हनुमान जी को रोकने की कोशिश भी करता है।

रावण के कालनेमि से अब राजनीति की ओर लौटते हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी बुधवार (15 सितंबर 2019) को ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस की स्थापना दिवस पर बोल रहे थे। इस दौरान बीजेपी को हिंदू विरोधी पार्टी बताते हुए उस पर देवी ‘लक्ष्मी’ और ‘दुर्गा’ की शक्ति को 10-15 लोगों की गिरवी बनाने का आरोप लगाया। हाल के दिनों में यह दूसरा मौका था जब राहुल की जुबान पर हिंदुओं की अराध्य देवियों का नाम था। इससे पहले जम्मू के त्रिकूटा नगर में कॉन्ग्रेसियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि बीजेपी के कारण दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती माँ की शक्तियाँ घटी हैं। अपने इस संबोधन की शुरुआत भी उन्होंने ‘जय माता दी’ से की थी। इस संबोधन से पहले वे माता वैष्णो देवी का दर्शन भी कर आए थे।

कुल मिलाकर राहुल गाँधी एक बार फिर अपनी उस राजनीति को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं जो 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले देखने को मिली थी। तब वे न केवल मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा कर रहे थे, बल्कि उनके जनेऊधारी होने की बात भी सामने आई थी। बकायदा उनके गोत्र और ब्राह्मण होने का ऐलान हुआ था। उल्लेखनीय यह भी है कि गुजरात की तरह ही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीजेपी के एक ऐसे गढ़ के तौर पर तब्दील होता दिख रहा है जो फिलहाल विपक्ष के लिए अभेद्य नजर आ रहा है।

लिहाजा विपक्षी दलों में खुद को हिंदू हितैषी साबित कर मतदाताओं को झाँसा देने की होड़ सी लगी है। कुछ-कुछ वैसे ही जैसे हनुमान जी को झाँसा देने में कालनेमि लगा था। यहाँ यह याद करना जरूरी है कि राहुल गाँधी जिस नेह​रू के नाम पर राजनीति करते हैं वे अयोध्या से रामलला को बेदखल करवाना चाहते थे। वे जिस कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता हैं उसके पाले-पोसे इतिहासकारों ने राम के अस्तित्व को नकारा। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सुप्रीम कोर्ट में राम के काल्पनिक होने का हवाला तक देकर आई। उसकी सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने इस देश के संसाधनों पर बहुसंख्यक हिंदुओं के अधिकार को खारिज करते हुए अल्पसंख्यकों का हक बताया था। कुछ महीने पहले जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में निधि जुटाने का काम चल रहा था तब भी कॉन्ग्रेस नेता विष वमन से परहेज नहीं कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल तो उठता है कि अचानक से कॉन्ग्रेस को हिंदू और उनकी आस्था इतनी प्रिय क्यों हो गई? क्या उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से इसका कोई रिश्ता है?

ऐसा नहीं है कि चोला केवल राहुल ने बदला है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जो कभी रामजन्मभूमि स्थल पर यूनिवर्सिटी बनाने के पैरोकार थे, वे भी इस मौसम में अयोध्या हो आए हैं। उनके साथी राज्यसभा सांसद संजय सिंह कुछ समय पहले तक रामजन्मभूमि ट्रस्ट पर जमीन घोटाले का आरोप लगा रहे थे और अब गले में रामनामी तथा माथे पर चंदन लेप खुद को रामभक्त साबित करने में लगे हैं। अचानक से सुर तो उस सपा के भी बदले हैं जिसकी सरकार रहते अयोध्या को कार सेवकों के खून से रंग दिया गया था। जिसके नेता मुलायम सिंह यादव अपने इस कारनामे के लिए खुद को ‘मुल्ला मुलायम’ कहे जाने पर फूले नहीं समाते थे। जिस बसपा के कांशीराम अयोध्या में शौचालय बनवाने की बात करते थे, आज उस पार्टी की राजनीति के केंद्र में भी अयोध्या है। राम हैं।

पर राजनीति के कालनेमि शायद यह भूल गए हैं कि रावण का वह मायावी राक्षस भी तमाम छल-प्रपंच के बावजूद अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था। चोले बदलने वाले तब राम के हनुमान को उनके ध्येय से भटका न सके थे। लोकतंत्र के हनुमान (वोटर) भी इन मौसमी चोलों को अब खूब पहचानते हैं।

राजस्थान : गाजी फकीर के जनाजे में जुटी भारी भीड़ पर चुप्पी; हनुमान जी की पूजा में भीड़ लगने पर अशोक गहलोत ने DM-SP को डाँटा

राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कौन से संविधान का पालन करते हैं, जो धर्म के चश्मे से राष्ट्रधर्म का पालन करना बताता है? जब संविधान सबको बराबर का अधिकार देता है, फिर तुष्टिकरण क्यों? आखिर कब तक तुष्टिकरण का खेल खेला जाता रहेगा? इसी तुष्टिकरण ने निफ़ाक़ के बीज बोये रखे हैं, अब इन बीजों के साथ-साथ तुष्टिकरण करने वाली पार्टियों को भी समाप्त करने का समय आ गया है, ताकि देश की जनता सुख से अपनी जीवनचर्या चला सके। जब तक देश से छद्दम धर्म-निरपेक्षता का अंत नहीं होगा, देश उन्नति की राह पर सुगमता से नहीं चल पायेगा।   
कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन कराने को लेकर राजस्थान की सरकार का दोहरा रवैया सामने आया है। जहाँ एक तरफ धौलपुर के धार्मिक आयोजन में भीड़ जुटी तो सीधा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्थानीय SP को फटकार लगाई, जबकि जैसलमेर में ‘सरहद का सुल्तान’ गाजी फकीर के जनाजे में उमड़ी भीड़ की तरफ से आँख मूँद ली गई। गाजी फकीर के बेटे मोहम्मद सालेह राजस्थान सरकार में वक्फ और अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री हैं।

ये सब तब हो रहा है, जब राजस्थान कोरोना की दूसरी लहर सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों की सूची में शीर्ष 5 में पहुँच गया है। यहाँ सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या 1,63,372 हो गई है। पिछले 24 घंटों में यहाँ 16,613 नए मामले सामने आए हैं और 120 लोगों ने कोविड-19 के कारण अपनी जान गँवा दी। राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा 33,324 सक्रिय मामले हैं। राजस्थान में कोरोना ने अब तक 3926 लोगों की जान ली है।

मामला कुछ यूँ है कि राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर के बीच धार्मिक आयोजनों पर रोक लगी हुई है। ऐसे में धौलपुर में भाजपा विधायक सुखराम खोली ने हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखंड रामायण का पाठ कराया। इसमें 500 से अधिक लोग जुट गए। कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बैठक में यहाँ के DM-SP को सबके सामने फटकार लगा डाली। उन्होंने मुख्य सचिव को भी आदेश दिया कि वो इस मामले का स्पष्टीकरण स्थानीय प्रशासन से तलब करें।

ये हुई एक खबर। अब आते हैं उस दूसरी खबर पर, जहाँ हजारों लोगों की भीड़ तो जुटी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिसका जनाजा था वो जैसलमेर, खासकर पोखरण का एक प्रभावशाली हस्ती था। इलाके में उसका दबदबा था ही, साथ ही भारत-पाकिस्तान के सिंधी मुस्लिम उसे खलीफा भी मानते थे। उसके परिवार के कई लोग बड़े-बड़े पदों पर हैं। एक बेटा अशोक गहलोत की कैबिनेट में मंत्री है।

                     राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के दोहरे रवैये पर ‘दैनिक भास्कर’ की खबर (साभार)
सालेह मोहम्मद के अब्बा का निधन हुआ। इसमें खुद सालेह भी शामिल हुए, जबकि मात्र 4 दिन पहले ही वो कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। वो हजारों लोगों के साथ जनाजे में शामिल हुए लेकिन राज्य सरकार या प्रशासन के कान में जूँ तक न रेंगी। मीडिया के सूत्र कह रहे हैं कि उनकी रिपोर्ट नेगेटिव भी आ गई थी। राजस्थान में अंतिम यात्रा में मात्र 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति है। वहाँ की घटना के लिए मुख्यमंत्री ने कोई रिपोर्ट तलब नहीं की।

गाजी फकीर की जैसलमेर की राजनीति पर ऐसी पकड़ थी कि उनकी सलाह के बिना वहाँ कांग्रेस कोई भी निर्णय नहीं लेती थी। शायद अशोक गहलोत को डर है कि उनके परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने का इशारा भर करने से पश्चिमी राजस्थान के मुस्लिम उनके खिलाफ हो सकते हैं, जो हर चुनाव में अपने खलीफा के फतवे का पालन करते थे। मतलब ये कि राजस्थान में पूजा-पाठ गलत है, जनाजे की भीड़ के लिए कोई बंदिश नहीं है।

सपा, बसपा, कांग्रेस ,आप और आरजेडी नेताओं पर भी लगे बलात्कार और यौन शोषण के आरोप, बीजेपी की भी लंबी लिस्ट

पिछले कुछ सालों से नेताओं पर रेप और यौन शोषण के आरोपों की बाढ़ सी आ गई है. सितम्बर 20 को पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले की जांच कर रही है एसआईटी ने चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि चिन्मयानंद ने आरोप कबूल कर लिए हैं. लेकिन उनके उपर रेप का केस न करके उससे हल्का केस दर्ज किया गया है. आरोप लगाने वाली लॉ स्टूडेंट ने कहा कि उसके मैजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के बावजूद रेप का केस दर्ज ना होना हैरत की बात है. फिलहाल चिन्मयानंद का नाम उन बीजेपी नेताओं की सूची में दर्ज हो गया जिन पर या तो रेप या फिर यौन शोषण का आरोप लगा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि इन आरोपों में सिर्फ बीजेपी नेताओं के ही नाम हैं दूसरी पार्टी के नेता भी इसमें शामिल हैं. जिस तरह से इस सूची में नाम साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं उससे पार्टियों की छवि पर गंभीर धक्का लगा है. वहीं कई मामलों में देर से हुई कार्रवाई ने भी पार्टी की जमकर फजीहत हुई है.
कांग्रेस नेता ंमहिपाल मदेरणा और भवंरी देवी कांडभंवरी देवी कांड ने हिला दी थी गहलोत सरकार की कुर्सी, अब आरोपियों के बच्चे कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे चुनाव



भंवरी देवी के राजस्थान के मंत्री महिपाल मदेरणा के साथ संबंध थे और वो इसकी एक सीडी बनाकर मंत्री को ब्लैकमेल कर रही थी.  बाद में उसका अपहरण कर हत्या कर दी गई.  बाद में राजस्थान के पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक विधायक के भाई को गिरफ्तार किया. साल 2011 राजस्थान में अशोक गहलोत की कुर्सी हिला देने वाला भंवरी देवी कांड की वजह कांग्रेस की जमकर फजीहत हुई थी. 

आरजेडी विधायक अरुण यादवरेप के आरोपी RJD विधायक अरुण यादव फरार, घर पर इश्तेहार चश्पा किया गया
आरा की रहने वाली नाबालिग का सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि आरजेडी विधायक अरुण यादव ने उसके साथ गलत काम किया है. इसके बाद अरुण यादव फरार हैंं. पुलिस ने उनके घर पर इश्तेहार चस्पा किया है.

बीएसपी नेता पर आरोप
साल 2017 में एक युवती ने अयोध्या विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी बज्मी सिद्द‍िकी और उनके साथियों पर गैंगरेप का आरोप लगाया है. मामले में बज्मी सिद्द‍िकी समेत 7 लोगों पर गैंगरेप का केस दर्ज कर लिया गया है. जानकारी के अनुसार इनमें से 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
सपा नेता पर भी लगा रेप का आरोप
साल  2015 उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में शौच के लिए गई एक लड़की को अगवा करके उससे कथित रूप से सामूहिक दरिंदगी का मामला सामने आया. तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सौमित्र यादव ने बताया कि कादरचौक थाना क्षेत्र स्थित एक गांव में दलित परिवार की एक किशोरी शनिवार की रात को शौच के लिए खेत में जा रही थी. आरोप है कि रास्ते में समाजवादी पार्टी (सपा) के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष टेकचंद पाल के बेटे ओमेन्द्र ने अपने साथियों नरेन्द्र और सुरेन्द्र की मदद से लड़की को जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया और एक बाग में ले जाकर तीनों ने उससे सामूहिक बलात्कार किया. परिजन के मुताबिक मामला सपा नेता के बेटे से जुड़ा होने की वजह से पुलिस ने पहले दिन तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की, लेकिन ज्यादा जोर देने पर ओमेन्द्र, नरेन्द्र तथा सुरेन्द्र के खिलाफ अपहरण और बलात्कार के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई.  बाद में पुलिस ने इस मामले में आरोपी सुरेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया. 
दिल्ली के पूर्व विधायक विजय जॉलीFormer Delhi BJP Legislator Vijay Jolly Denies Rape Charge
दिल्ली के पूर्व विधायक विजय जॉली पर साल 2017 में एक महिला ने आरोप लगाया. पुलिस के मुताबिक महिला ने आरोप लगाया कि उसको पहले उनको नशा दिया गया और फिर उसके के साथ यह घटना हुई. लेकिन इन आरोपों को विजय जॉली ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यह उनकी छवि को खराब करने की कोशिश है.  विजय जॉली ने कहा कि महिला बीजेपी से जुड़ी रही है और उसने गुरुग्राम के एक रिसॉर्ट में मुलाकात की जहां उसने 5 लाख रुपये की वसूली की कोशिश की और धमकी दी कि अगर उनकी बात नहीं मानी तो वह रेप का मुकदमा दायर करेगी. 
गुजरात में जयेश पटेलdcnmvtnoगुजरात के वडोदरा के वाघोडिया में करीब 100 एकड़ में पारुल यूनिवर्सिटी बनी है। यहां इंजीयरिंग से लेकर मेडिकल कालेज भी हैं. साल 2016 में  इसके मुखिया जयेश पटेल पर उनकी ही युनिवर्सिटी में नर्सिंग का कोर्स कर रही एक छात्रा ने बलात्कार का आरोप लगाया. घटना में महिला वार्डन की मिलीभगत की बात सामने आई थी. आरोप लगते ही जयेश पटेल फरार हो गए. लेकिन उनके बेटे का दावा था कि उनके पिता जयेश पटेल भाजपा में नेता के तौर पर उभर रहे हैं और यहां से विधानसभा के टिकट के दावेदार हैं, इसीलिए उन्हें राजनैतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.
बीजेपी विधायक उमेश अग्रवाल पर आरोपDelhi Court Frames Rape Charges Against BJP Lawmaker
साल 2015 में दिल्ली की अदालत ने हरियाणा से बीजेपी विधायक उमेश अग्रवाल के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया. इस मामले में तीन लोगों पर आरोप है. हालांकि उमेश अग्रवाल सहित तीनों आरोपियों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि यह मामला सिर्फ पैसे के लेन-देन से जुड़ा है. 
उत्तराखंड बीजेपी के नेता हरक सिंह रावत के खिलाफ दिल्‍ली में रेप का केस दर्ज
साल 2016 में उत्तराखंड के बीजेपी नेता हरक सिंह रावत पर दिल्ली पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया. असम की रहने वाली 32 साल की एक महिला ने दिल्ली के सफदरजंग थाने में शिकायत देकर कहा कि वो जंगपुरा इलाके में रहती है, उसके साथ 29 जुलाई को ग्रीन पार्क इलाके में रेप किया गया. रेप के बाद हरक सिंह ने उसे धमकाया. पुलिस ने महिला का बयान कोर्ट में भी दर्ज करवाया. हरक सिंह रावत पर इससे पहले 2014 में एक महिला ने इसी थाने में छेड़खानी का केस दर्ज कराया था.
मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं ने महिला को बनाया हवस शिकार, मामला दर्ज
साल 2018 में मध्य प्रदेश के सीहोर जिलें में 28 वर्षीय महिला का दो स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा कथित रूप से गैंगरेप का मामला सामने आया. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया. अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) जीपी अग्रवाल ने बताया, '28 वर्षीय महिला से बलात्कार के मामले में भाजपा के स्थानीय नेता राजा राम (35) को गिरफ्तार किया गया है.'इसके अलावा, राजा राम के दोस्त मुकेश ठाकुर (32) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. राजा राम मध्यप्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के कार्यकारी समिति का सदस्य है और आष्ठा में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र का संचालक है. 
एक और बीजेपी विधायक पर रेप का आरोप, पीड़िता बोली- इंसाफ नहीं मिला तो दे दूंगी जान
साल 2018 में  बदायूं से विधायक कुशाग्र सागर पर 22 साल की महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया है. महिला के मुताबिक़, 2012-2014 के समय जब वो नाबालिग़ थी, तब विधायक ने शादी का झांसा देकर दो साल तक उसका यौन शोषण किया.  पीड़िता भी मां के साथ विधायक के घर आती-जाती थी. ख़ास बात ये है कि पीड़िता ने ये आरोप तब लगाए हैं जब अगले महीने 17 तारीख़ को विधायक की शादी होनी है. विधायक के क़रीबी सूत्रों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. पुलिस ने महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है.
महाराष्ट्र में बीजेपी नेता की हरकतबीजेपी नेता चलती बस में महिला को 'किस' करते कैमरे में हुआ कैद, रेप के आरोप में गिरफ्तार
साल 2017 में चलती बस में महिला के साथ 'किस' करने की तस्वीरें वायरल होने के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी नेता को गिरफ्तार किया गया है. वह सार्वजनिक बस में एक महिला के साथ किस करते हुए कैमरे में कैद हुए थे. बीजेपी नेता रवींद्र बावंथाडे पर रेप का आरोप है. किसी अन्य यात्री द्वारा वीडियो बनाए जाने और फिर उसके सामने आने के बाद पीड़ित महिला ने कहा कि उसके साथ जबरदस्ती की गई.
गुजरात बीजेपी के उपाध्यक्ष पर लगा रेप का आरोप, निर्दोष होने का दावा कर दिया इस्तीफा
एक युवती ने गुजरात बीजेपी उपाध्यक्ष जयंती भानुशाली पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले नवंबर से अब तक उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया. महिला का दावा है कि भानुशाली ने उससे वादा किया था कि वह प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनिंग कॉलेज में उसका दाखिला कराएंगे. पूर्व विधायक जयंती भानुशाली ने बलात्कार का आरोप लगने के बाद गुजरात भाजपा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफे में इस आरोप से इनकार करते हुए दावा किया है कि उनकी छवि को खराब करने की साजिश हो रही है. लेकिन बाद में जयंति भानुशाली की चलती ट्रेन में हत्या कर दी गई और इस मामले में बीजेपी के ही नेता और पूर्व विधायक छबील पटेल के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था.
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साल 2013 में महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्ता और पूर्व विधायक मधु चव्हाण के खिलाफ रेप और धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ.बीजेपी की ही पूर्व मुंबई उपाध्यक्ष और वतर्मान में शिवसेना से जुड़ी महिला नेता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.
पूर्व केंद्रीय पर निहालचंद पर आरोपImage result for NIHAL CHAND RAPE NDTV
2011 में महिला ने यौन शोषण का मामला दर्ज कराया था. महिला का आरोप था कि उसे ड्रग देकर उसके साथ रेप भी किया गया. एफआईआर में पीड़ित ने मंत्री निहाल चंद मेघवाल का नाम भी दर्ज कराया था. 2012 में पुलिस इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दे चुकी थी. लेकिन साल 2014 में पीड़ित की समीक्षा याचिका के आधार पर अदालत ने नोटिस जारी किए. वह गंगानगर से चौथी बार सांसद चुने गए थे. उनके ऊपर लगे आरोप के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था.
विधायक कुलदीप सिंह सेंगरउन्नाव मामला: नाबालिग से रेप के मामले में POCSO एक्ट के तहत कुलदीप सेंगर पर आरोप तय
उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर महिला ने रेप का आरोप लगाया. काफी हंगामे के बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया और बीजेपी ने पार्टी से निकाल दिया. इसके बाद पीड़िता का एक्सीडेंट हो गया जिसमें उसके वकील और वह बुरी तरह घायल हो गई. इस घटना में उसके परिवार की एक महिला की मौत भी हो गई. पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से समझौते न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही थी. फिलहाल अब मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है जांच सीबीआई कर रही है.
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राजनीति में उथल-पुथल मचाते सेक्स-स्कैंडल
केजरीवाल के मंत्री संदीप कुमार के सेक्स कांड के बाद गलियारों में राजनेताओं के सेक्स स्कैंडल्स की चर्चा तेज हो गई ह...

रेप के आरोपी चिन्मयानंद यानी कृष्णपाल सिंह का पूरा कच्चा चिट्ठाबीजेपी नेता चिन्मयानंद (Chinmayanand) को लॉ की छात्रा से बलात्कार के आरोप में शुक्रवार को कोर्ट ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया था. उनके ऊपर लॉ कॉलेज की छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.  इसी मसले में यूपी की विशेष जांच दल (SIT) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चिन्मयानंद ने सारे आरोप कबूल कर लिए हैं. वायरल हुए वीडियो में खुद चिन्मयानंद हैं, यह उन्होंने स्वीकार किया. जिसपर बिना देरी के शुक्रवार को सुबह गिरफ्तार किया गया. वीडियो और ऑडियो की बारीकी से जांच की गई. SIT चीफ के मुताबिक चिन्मयानंद ने उनसे कहा कि मैं गलती पर शर्मिंदा हूं .

अरबपति होते आरक्षणलाभार्थी

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज भारत में गाँधी, आंबेडकर और तुष्टिकरण पुजारियों की कोई कमी नहीं। कदम-कदम पर मिल जाएंगे। कोई अपने कुर्सी की खातिर तो कोई अपनी तिजोरी भरने की खातिर इनका तीनो का भक्त बना हुआ है। लेकिन जब धरातल पर देखते हैं, गाँधी और तुष्टिकरण के ढोंगी भक्तों की तरह आंबेडकर भक्त भी ढोंगी ही दिखते हैं। सभी अपनी कुर्सी के भूखे। प्रमाण हैं, जिन्हें कोई झूठला नहीं सकता। 
भारत का संविधान बनाने पर डॉ भीमराव आंबेडकर ने तत्कालीन सरकार से अपनी अनुसूचित जाति के लिए दस वर्ष का आरक्षण माँगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया था, परन्तु जब उसी आरक्षण का उन्होनें दुरूपयोग होते देखा, तो तुरन्त इसे समाप्त करने की बात कही, और उनकी इस मांग को पूरी करने का किसी में साहस नहीं। विपरीत इसके आरक्षण के नाम पर इतनी पार्टियां बन गयीं हैं, परन्तु समस्याएं वहीँ की वहीं। जो सिद्ध करता है कि आरक्षण के नाम पर बनी पार्टियां अपनी जाति नहीं बल्कि अपना, अपने परिवार और अपने शुभचिंतकों का उत्थान कर रही हैं। आरक्षण की बीमारी केवल भारत में ही है, शायद किसी अन्य देश में नहीं। आखिर कब तक देश आरक्षण की आग में जलता रहेगा? विपरीत इसके नितरोज कोई न कोई जाति आरक्षण की मांग करती रहती है, और नेता किसी न किसी रूप में स्वीकार भी करते रहे हैं, अब इसे कुर्सी की भूख न कहा जाए तो क्या कहा जाए? इस आरक्षण के अन्य सामान्य जातियों को कितना नुकसान हो रहा है, किसी नेता अथवा पार्टी को चिंता नहीं। डॉ आंबेडकर तो अनुच्छेद 370 के विरुद्ध थे, फिर किस आधार पर इसे लागू रखा गया, क्या यही है आंबेडकर प्रेम या दूसरे अर्थों में यही कहा जा सकता है कि "जहाँ दिखी तवा परात, वहीं बिसाई सारी रात", यानि जनता को पागल बनाओ, और अपनी कुर्सी बचाए रखो। 
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल आरक्षण की सीमा 72 प्रतिशत करने के बाद पूरे देश मे आरक्षण पर फिर से बहस शुरू हो गया है, सामान्य वर्ग के लोग सड़कों पर उतरकर इसके विरोध में जहाँ आंदोलन कर इसे घटाने की माँग कर रहें हैं वहीं आरक्षण के लाभार्थी इस कार्य के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल को बधाई दे रहें हैं. सामान्य वर्ग समुदाय के अलग – अलग संगठन एकजुट होकर पूरे देश मे बड़े आंदोलन में लग गयी हैं वहीं दूसरी ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एकबार फिर से आरक्षण की समीक्षा करने की बात कहकर इस बहस को और तेज कर दिया है.
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पूरे देश मे जहाँ समय – समय पर विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग को लेकर माँग बढ़ते चली आ रही है वहीं आरक्षण के विरोध करने वाले अब इसे पूर्णतः समाप्त करने की वकालत कर रहें हैं लेकिन इस सब के बीच यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि संविधान में पिछड़ों को अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए आरक्षण नामक जो व्यवस्था की गयी है उसे उन समुदाय के लोगों को कितना फायदा हुआ है जिनके लिए ये व्यवस्था बनायी गयी है, एक अखबार द्वारा किए गए एक सर्वे से जो रिपोर्ट सामने आया है उससे वर्तमान समय मे आरक्षण की पोल खोलकर रख देता है. असल मे आजादी में 73 वर्ष बीतने के बावजूद आज भी समाज के मुख्यधारा से पिछड़े लोगों की हालात में कोई भी सुधार नहीं देखने को मिला है आरक्षण का लाभ वही लोग आज भी उठा रहे हैं जिनकी स्थिति काफी बेहतर है.
अखबार द्वारा एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण की नीति का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो करीब तीन-तीन पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ ले रहे हैं. पड़ताल में हमें ऐसे कई मामले मिले। हमने यहां ऐसे 10 प्रतिनिधि परिवारों का ही जिक्र किया है. हालांकि सरकार का कहना है कि उसके पास अभी ऐसा कोई जरिया नहीं है कि जिससे पता चल सके कि किसे कितना फायदा मिला.लेकिन विषय विशेषज्ञों का दावा है कि करीब 90 फीसदी ऐसे पिछड़े परिवार हैं जो एक बार भी इसका उचित लाभ नहीं ले पाए हैं.
Image result for रामविलास पासवानअखिल भारतीय सिविल एवं प्रशासनिक सेवा परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष हरदेव ने बताया कि देश में एससी व एसटी कैटेगरी के ऐसे कई ए क्लास ऑफिसर हैं जिनकी कई पीढ़ियां रिजर्वेशन का फायदा ले चुकी
हैं और अभी भी ले रही हैं. शिक्षा में आरक्षण, सरकारी नौकरी में आरक्षण और सांसद व विधायक के लिए रिजर्व सीट का प्रावधान रखा गया है. एससी वर्ग से आईएएस और सांसद बनने वाले करीब 90 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनकी पिछली पीढ़ी ने रिजर्वेशन का लाभ किसी न किसी रूप में लिया होता है. इस कारण उनके ही वर्ग से 95 फीसदी वंचित लोगों को अभी भी एक बार भी आरक्षण का लाभ नहीं मिला है.

सिर्फ एससी-एसटी में नहीं है क्रीमीलेयर: ओबीसी के लिए उच्च शिक्षा और नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण का नियम है. लेकिन इसका फायदा उन्हें ही मिलता जो क्रीमीलियर में नहीं आते हैं यानी उनकी या उनके पिता की वार्षिक आय आठ लाख रुपए से कम हो. वहीं एसटी का 7.5 और एससी का 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरी में है. वहीं इस वर्ग के लिए लोकसभा, विधानसभा और नगर पालिका में चुनाव लड़ने के लिए आरक्षित सीट रखी गई है. इनके लिए किसी भी प्रकार का क्रीमीलियर का नियम नहीं है. शहीदों पर आश्रित परिजन के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन ये दोनों ही प्रकार के रिजर्वेशन सिर्फ एक पीढ़ी तक ही दिया जाता है.
पहली बार उन परिवारों के नाम जो कई जनरेशन से ले रहे हैं फायदा
जगजीवन राम परिवार (बिहार)
डाबी परिवार (दिल्ली)
गावित परिवार (महाराष्ट्र)
प्रसाद परिवार (उत्तरप्रदेश)
सिंह परिवार (उत्तरप्रदेश)
बौद्ध परिवार (मध्यप्रदेश)
चौधरी परिवार (पंजाब)
कश्यप परिवार (छत्तीसगढ़)
भेड़िया परिवार (छत्तीसगढ़)
बंसीवाल परिवार (राजस्थान)
इस परिवार के 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति-अफसरशाही में हावी राजस्थान के बामनवास गांव से निकला श्रीनारायण मीणा का परिवार करीब 40 साल से पॉवर में है। वे सरपंच थे। मीणा समाज को प्रदेश में एसटी आरक्षण प्राप्त है। इस कुटुंब से निकले परिवारों मेें 25 से ज्यादा लोग राजनीति और अफसरशाही में हावी रहे हैं. परिवार के नमोनारायण मीणा आईपीएस रहे। बाद में केंद्र में मंत्री रहे। हरीश मीणा डीजीपी रहे। एसटी की रिजर्व सीट पर चुनाव भी लड़ा। ओपी मीणा भी मुख्य सचिव थे।
पहली पीढ़ी

जगजीवन राम उपप्रधानमंत्री रहे रिजर्व सीट से लड़ते थे. 30 से ज्यादा वर्षों तक मंत्री रहे।
टीना डाबी जो आरक्षण के सहायता से आईएस बनी उनके माता – पिता सहित दादा भी आरक्षण के सहारे से आईएस थे। माणिकराव होडल्या गावित 8 बार नंदूरबार से सांसद रहे। यूपीए-2 में मंत्री भी रहे।वरिष्ठ कांग्रेस नेता माता प्रसाद केंद्रीय मंत्री रहे और राज्यपाल रहे। देवी सिंह अशोक आईपीएस अफसर रहे। इनके बेटे भी आईपीएस अफसर हैं। 1952 में हरदास अहिरवार ने सेवढा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हार गए थे।
स्व. मास्टर गुरबंता सिंह जालंधर की करतारपुर (रिजर्व) सीट से कांग्रेसी विधायक रहे। स्व. बलीराम कश्यप, (एसटी) बस्तर की रिजर्व सीट से चार बार सांसद रहे। स्व. झुमुकलाल भेड़िया डौंडीलोहारा से छह बार विधायक रहे, मंत्री भी बने। सोहनलाल बंसीवाल एक बार दूदू और दूसरी बार दौसा की रिजर्व सीट से विधायक बने। दूसरी पीढ़ी इनकी पुत्री मीरा कुमार 5 बार सांसद रहीं। आईएफएस और लोकसभा स्पीकर भी रहीं।
नंदकिशोर के बेटे जसवंत ने यूपीएससी (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज) परीक्षा पास की थी। बेटी निर्मला नाशिक की इगतपुरी (एसटी) सीट से 2 बार विधायक रही हैं । बड़े बेटे केशव इनकम टैक्स कमिश्नर, मझले बेटे डॉ सर्व प्रकाश भास्कर सीएमओ हैं।
पुत्र बीपी अशोक आईपीएस हैं। बहू मंजू अशोक सरकारी अधिकारी हैं। पुत्र महेंद्र बौद्ध तीन बार सेवढा (रिजर्व) से विधायक रहे। गृह मंत्री भी रहे। एक बेटे संतोख सिंह मौजूदा सांसद हैं। दूसरे बेटे स्व. जगजीत सिंह मंत्री रहे थे। जगजीवन राम के बेटे सुरेश की बेटी मेधावी कीर्ति झज्जर (रिजर्व) से विधायक रहीं। जसवंत की बेटी टीना आईएस बनीं। पहली बार एससी कैंडीडेट ने टॉप किया। निर्मला की बेटी नयना ने 2017 में नाशिक (रिजर्व) जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ा था। डॉ सर्व प्रकाश के बेटे प्रियदर्शी रंजन एमसीएच, छोटे बेटे डॉ रवि चेस्ट स्पेशलिस्ट हैं। बीपी अशोक की बेटी डाॅ. अवलोकिता और दामाद डॉ. योगेश भी आईएएस हैं।
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बौद्ध की बेटी कुहू 2015 में दतिया (रिजर्व) से जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। संतोख के बेटे बिक्रम चुनाव लड़े, हारे। जगजीत के बेटे सुरिंदर अभी एमएलए हैं। दिनेश और केदार के बच्चे अध्ययनरत, प्रवेश व छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया है। इनके दो बेटों ने पढ़ाई के समय प्रवेश और छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया।
2018 में सिकराय सीट से जियालाल के बेटे विक्रम रिजर्व सीट से चुनाव हार गए