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राजस्थान : मणिपुर की बजाए हमें अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए : मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा

                                        अशोक गहलोत ने मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा को बर्खास्त किया
मोदी विरोधियों ने जिस षड़यंत्र के चलते मणिपुर मुद्दा उछाला, लेकिन तीर उल्टा विपक्ष की ओर चला गया। कांग्रेस पार्टी मणिपुर की घटना को लेकर भाजपा पर हमलावर है। मणिपुर में 3 महिलाओं को भीड़ द्वारा नग्न कर के जुलूस निकाला गया और उनका गैंगरेप किया गया। घटना के ढाई महीने बाद वीडियो वायरल हुआ। संसद के मॉनसून सत्र का पहले दिन इसकी ही भेंट चढ़ गया। कांग्रेस  पार्टी राजस्थान के विधानसभा में भी इस पर चर्चा करना चाहती थी, लेकिन उनके अपने ही मंत्री ने कुछ ऐसा कहा, जिससे राजस्थान सरकार की कलई खुल गई।

उन्होंने विधानसभा में कहा, “सच्चाई ये है कि महिलाओं की सुरक्षा में हम असफल रहे। राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं के ऊपर अत्याचार बढ़े हैं, मणिपुर की बजाए हमें अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए।” उनके इस बयान पर भाजपा विधायकों ने मेज थपथपाई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने संविधान के अनुच्छेद-162(2) हवाला देते हुए कहा कि ये सरकार सामूहिक जिम्मेदारी से चलती है। फिर उन्होंने समझाया कि संविधान कहता है कि अगर एक मंत्री बोल रहा है तो समझिए पूरी सरकार बोल रही है।

राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि मंत्री महोदय ने सरकार की कलई खोल दी है। उन्होंने कहा, “मैं मंत्री महोदय को तो बधाई दूँगा ..., लेकिन ये शर्मनाक बात है मर्दों के प्रदेश वाले मंत्री जी।” बता दें कि मार्च 2022 में राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में बलात्कार की घटनाओं पर चर्चा के दौरान हँसते हुए कहा था कि राजस्थान ‘मर्दों का प्रदेश’ है।कॉन्ग्रेस के कई मंत्री-विधायक भी इस दौरान हँसे थे और किसी ने उन्हें टोका तक नहीं था।

राजस्थान में बढ़ा महिला अपराध

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा को पद से बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर अपनी ही सरकार को आईना दिखाया था। विधानसभा का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। साथ ही मणिपुर के वायरल वीडियो पर राजनीति कर रही कांग्रेस को झटका लगा था। अब खबर आ रही है कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा को पद से हटा दिया गया है, अब वो राजस्थान सरकार में मंत्री नहीं रहे।

राजस्थान: मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा बर्खास्त किए गए

राज्यपाल कलराज मिश्रा ने मुख्यमंत्री की सिफारिश को मंजूर करते हुए राजेंद्र सिंह गुढ़ा की बर्खास्तगी पर मंजूरी की मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजभवन से सिफारिश की थी कि मंत्री को त्वरित रूप से उनके पद से बर्खास्त किया जाए। याद दिला दें कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा उन 6 बसपा विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने सितंबर 2019 में कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वो झुंझनू के उदयपुरवाटी से दूसरी बार विधायक बने हैं।
पिछले 1 साल में कई मौकों पर राजेंद्र सिंह गुढ़ा का बयान पार्टी लाइन से अलग गया था। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी मिलने के बाद ये कदम उठाया है। इसीलिए, उनके बयान के कुछ देर बाद ही उनकी बर्खास्तगी की फ़ाइल को राजभवन भेज दिया गया। 21 जुलाई, 2023 को उनका बयान आया और उसी दिन रात तक बर्खास्तगी का आदेश भी।
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मणिपुर में 3 महिलाओं को भीड़ द्वारा नग्न कर के जुलूस निकाला गया और उनका गैंगरेप किया गया। घटना के ढाई महीने बाद वीडियो वायरल हुआ। संसद के मॉनसून सत्र का पहले दिन इसकी ही भेंट चढ़ गया। कांग्रेस पार्टी राजस्थान के विधानसभा में भी इस पर चर्चा करना चाहती थी, लेकिन उनके अपने ही मंत्री ने कुछ ऐसा कहा, जिससे राजस्थान सरकार की कलई खुल गई। राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायक मणिपुर काण्ड पर भाजपा विरोधी तख्तियाँ लहरा रहे थे।
राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने विधानसभा में कहा था, “सच्चाई ये है कि महिलाओं की सुरक्षा में हम असफल रहे। राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं के ऊपर अत्याचार बढ़े हैं, मणिपुर की बजाए हमें अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए।” उनके इस बयान पर भाजपा विधायकों ने मेज थपथपाई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने संविधान के अनुच्छेद-162(2) हवाला देते हुए कहा कि ये सरकार सामूहिक जिम्मेदारी से चलती है। फिर उन्होंने समझाया कि संविधान कहता है कि अगर एक मंत्री बोल रहा है तो समझिए पूरी सरकार बोल रही है।

राजस्थान : होली आते ही बाड़मेर में लगी धारा-144 : ना रंग फेंकें ना गुब्बारे, ना गाना बजाएँ

सेकुलरिज्म के नाम पर आखिर कब तक हिन्दुओं पर अत्याचार किया जाता रहेगा? आखिर कब तक छद्दम सेक्युलर मुस्लिम तुष्टिकरण के आगे घुटनों पर बैठे रहेगें? आखिर कब तक हिन्दुओं के संयम की अग्नि-परीक्षा ली जाती रहेगी? कहाँ है 'गंगा-जमुनी तहजीब', 'संविधान की दुहाई' और 'अधिकारों की दुहाई' देने वाला गैंग? क्या इस गैंग के सामाजिक बहिष्कार का समय आ गया है? क्योकि जब तक इन तुष्टिकरण पुजारियों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, इन्हें सेकुलरिज्म का अर्थ समझ नहीं आने वाला। क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है? क्या हर हिन्दू को योगी आदित्यनाथ बनने का समय आ गया है? राजस्थान को कोई वसुंधरा नहीं अब योगी की जरुरत है। 

राजस्थान में हिंदुओं के त्योहार आते ही प्रशासन प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिया। बाड़मेर जिले के कलेक्टर की ओर से जिले में धारा 144 लगा दी है। प्रशासन के इस निर्णय पर विवाद हो गया है। ऑर्डर में लिखा है कि कोई भी इस तरीके से रंग न खेले कि किसी दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। इसका भाजपा और हिंदू संगठनों ने विरोध किया है।

बाड़मेर के जिलाधिकारी लोकबंधु द्वारा जारी किए गए इस ऑर्डर पर राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ कुठाराघात है। यह आदेश अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर कलंक है।

इस मामले को राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में भी उठाया और कहा कि होली का पर्व रंगों का त्योहार है। उन्होंने कहा, “बाड़मेर कलेक्टर का एक आदेश मेरे हाथ में है। कलेक्टर ने 2 से 12 मार्च तक धारा 144 लागू की है। होली पर धारा 144 लागू करना हमारी धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने सरकार इस ऑर्डर पर जवाब दे।

                              बाड़मेर जिलाधिकारी द्वारा निकाला गया आदेश (साभार: दैनिक भास्कर)

जिला कलेक्टर द्वारा निकाले गए आदेश में गाना बजाने और नारे लगाने पर पाबंदी लगाई है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी धर्म का कोई व्यक्ति कोई ऐसा ऑडियो गाना नहीं चलाएगा और ना ही नारे लगाएगा, जिससे किसी दूसरे धर्म या व्यक्ति की भावना को ठेस पहुँचे।

आदेश में आगे कहा गया है कि होली पर इस तरह रंग ना खेलें कि दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचे। किसी व्यक्ति की इच्छा के विरूद्ध उस पर रंग ना डाले, जिससे कि साम्प्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे।

उधर, कलेक्टर ने कहा कि यह ऑर्डर सभी त्योहारों से पहले निकाले जाते हैं। इसमें लोगों के इकट्ठा होने पर रोक नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर लोग शराब ना पीएँ, धारदार हथियार ना निकालें और लड़ाई-झगड़े आदि ना हों, इसलिए ऑर्डर निकाला गया है। ये ऑर्डर कई सालों से निकल रहे हैं।

पिछले साल भी हिंदुओं के त्योहारों से पहले राजस्थान के कई जिलों में धारा 144 लागू की गई थी। पिछले साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) ने अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू किया था। इस फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई थी।

उस भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन हिंदुस्तानी ने कॉन्ग्रेस शासन की तुलना मुगलराज से की थी। नीरज जैन ने ट्वीट कर लिखा था, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर सहित अन्य शहर में गहलोत साब का नादिरशाही फ़रमान। किसी धार्मिक चिन्ह के झण्डे लगाना, DJ बजाना अपराध है! गौरतलब है कि एक और महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती के जुलूस और शोभा यात्रा पर ये आदेश।“

उस साल 10 अप्रैल को रामनवमी, 14 अप्रैल को महावीर जयंती और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती थी। इन अवसरों पर हिंदू समुदाय धूमधाम से झाँकी एवं जुलूस निकालते हैं और पर्व को मनाते हैं। हालाँकि, राजस्थान सरकार ने फरमान जारी कर आयोजनों के दौरान धार्मिक झंडे पर रोक लगा दी थी। इसके बाद काफी बवाल हुआ था।

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 को पथराव की घटना के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने घरों पर धार्मिक झंडे फहराने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा जुलूसों और शोभा यात्राओं के दौरान डीजे बजाने को लेकर पाबंदियाँ लगाई थी। ये पाबंदियाँ दुर्गा अष्टमी, राम नवमी, महावीर जयंती और हनुमान जयंती आदि हिंदू त्योहारों को चिह्नित करने के लिए की गईं।

राज्य के कई जिलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान सरकार ने अपने आदेश में यहाँ तक कहा था कि इस दौरान लोगों को घर के आगे से गुजरने वाली शोभा यात्रा को देखने के लिए अपने घरों की छतों पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे पहले 28 अक्टूबर 2021 को झुंझनू जिले के जिलाधिकारी उमर दीन खान ने दीपावली त्योहार के चलते धारा 144 लागू करने का आदेश जारी कर दिया था। इस दौरान धार्मिक ऑडियो चलाने से लेकर जयकारा लगाने तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद खूब बवाल हुआ। बवाल के बाद जिलाधिकारी को अपने आदेश में बदलाव करना पड़ा था।

‘द कश्मीर फाइल्स’ से डरी कांग्रेस सरकार: राजस्थान के कोटा में 1 महीने के लिए धारा 144, 5 से अधिक के जमा होने पर पाबंदी

The Kashmir Files प्रदर्शन से जनता के सामने सच्चाई आने से कांग्रेस सहित जितने भी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हैं, सब की नींद, रोटी और पानी तक हराम हो चूका है। देश में साम्प्रदायिकता और गंगा-जमुनी तहजीब खतरे में नज़र आने लगी है, लेकिन जब कश्मीर में मस्जिदों तक के इस्तेमाल कर हिन्दुओं पर अत्याचार किया जा रहा था, तब साम्प्रदायिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब कहाँ थी? जब इस्लामिक आतंकवाद को बचाने के लिए 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' को बदनाम किया जा रहा था, तब सेकुलरिज्म और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा कहाँ था? इतना ही नहीं, जब CAA विरोध प्रदर्शन एवं धरने में fuck Hindutva के नारे लगाए जा रहे थे, तब गंगा-जमुनी तहजीब किस बिल में घुस आराम कर रही थी? आखिर कब तक इन ढोंगी नारों से हिन्दुओं को छला जाता रहेगा? 

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राजस्थान के कोटा जिले के सिनेमाघरों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अधिकारियों ने 22 मार्च से 21 अप्रैल तक जिले भर में CRPC की धारा 144 लगाने का सोमवार (21 मार्च, 2022) को आदेश दिया है। कोटा के जिलाधिकारी ने एक आदेश में कहा कि द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार 22 मार्च से 21 अप्रैल तक धारा 144 लागू है। जिसके तहत कहीं भी 5 लोगों से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते हैं।

राजस्थान सरकार के अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि यह कदम कई त्योहारों से पहले सावधानी बरतने के लिए उठाया गया है। साथ ही नए आदेश के मुताबिक यह भी कहा गया है कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने के लिए भीड़ नहीं जुटनी चाहिए।

जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी (कार्यवाहक) राजुकमार सिंह की ओर से जारी आदेश में भीड़ के जमा होने, विरोध-प्रदर्शन करने, जुलूस और मार्च निकालने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हालाँकि, इस दौरान चेती चंद, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बैसाखी, जुमा-तुल-विदा के त्योहार भी पड़ेंगे। आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि यह आदेश सरकारी कामों जैसे कोविड टीकाकरण और पुलिस कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पाबंदी को लेकर फिल्म डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले में दखल देने की माँग की है।

वहीं इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक रामलाल शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार का मानसिक दिवालियापन निकल चुका है। जिस तरह के सरकारी आदेश आ रहे हैं उनकी पालना होगी या अवहेलना? ऐसे आदेश राजस्थान सरकार की मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। धारा 144 लगा कर क्या साबित कर रहा प्रशासन? क्या केवल कोटा में ही मनाए जाएँगे त्योहार?”

रामलाल ने राजस्थान सरकार से माँग करते हुए कहा, “अगर कॉन्ग्रेस की अशोक गहलोत सरकार कश्मीर फाइल को प्रतिबंधित करना चाहती है तो अपनी मंशा साफ करे और अगर ऐसा नहीं है तो सरकार इस आदेश को वापस ले।”

यही नहीं बीजेपी से कोटा उत्तर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजाल ने भी धारा 144 लागू करने के राजस्थान सरकार के आदेश पर निशाना साधा और कहा, “मंगलवार को कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल ‘चंडी मार्च’ निकाला जाएगा। इसलिए धारा 144 लगाई गई थी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिर्फ एक बहाना है।”

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The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

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The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ को मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड में टैक्स फ्री कर दिया गया है। फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर है और इसे डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी हैं।

देशभर में अलवर के जिस गैंगरेप पर हो रहा है बवाल, गहलोत सरकार बोली कि उस निर्भया से रेप हुआ ही नहीं…!!

हाथरस पर मदारियों की तरह तमाशा करने वाले राजस्थान पर क्यों खामोश हैं? क्या राजस्थान की बेटियों का कोई सम्मान नहीं? 
देशभर में बवाल मचने और कांग्रेस की कार्यशैली के कठघरे में आने के बाद ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने अलवर की निर्भया की अधूरी आवाज सुनी है। अधूरी इसलिए कि उन्नाव की रेप पीड़िता पर यूपी में सियासत करने वाली प्रियंका ने अलवर की निर्भया के पास जाने का नैतिक साहस भी नहीं किया। प्रियंका वाड्रा ने कथित रूप से बस फोन पर ही निर्भया के पिता के बातचीत की। उत्तर प्रदेश में जरा सी बात पर ट्वीट कर देने वाली प्रियंका ने राजस्थान की निर्भया पर कोई ट्वीट भी नहीं किया।

प्रियंका ने अलवर की निर्भया के पास जाने की जरूरत नहीं समझी

यूपी कांग्रेस के सहप्रभारी और राजस्थान के जहाजपुर से विधायक धीरज गुर्जर ने ट्विट करके दावा किया है कि प्रियंका गांधी की अलवर गैंगरेप पीडि़ता के पिता से मोबाइल फोन पर बातचीत हुई है। धीरज गुर्जर ने लिखा- अलवर में जो घटना घटी है, वो नाकाबिले बर्दाश्त है। पीड़िता के पिता को प्रियंका गांधी ने किसी भी सहायता के लिए सीधा सम्पर्क करने के लिए कहा है।

राहुल गांधी का दोगलापन देखिए, राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल में दलित बेटियों से रेप मामले में साध लेते हैं चुप्पी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी महिलाओं खासकर दलित महिलाओं को इंसाफ दिलाने में भी भेदभाव करते हैं। गैर-कांग्रेसी राज्यों में किसी दलित की बेटी के साथ उत्पीड़न और अन्याय होने से राहुल गांधी का दलित प्रेम जाग उठता है। दलित की बेटी भी देश की बेटी दिखाई देने लगती है। दिल्ली में एक 9 साल की दलित मासूम बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में राहुल गांधी ने ट्वीट किया और इसे हाथरस की घटना से जोड़ दिया। लेकिन उन्हें राजस्थान दिखाई नहीं दिया, जहां देश में सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं होती हैं।

 धीरज गुर्जर कह रहे नाकाबिले बर्दाश्त, पुलिस कह रही रेप नहीं

अलवर की निर्भया के मामले में हैरतअंगेज तथ्य यह है कि जबकि यूपी कांग्रेस के सह प्रभारी धीरज गुर्जर घटना को नाकाबिले बर्दाश्त बता रहे हैं, तभी गहलोत सरकार के आला अधिकारी यह साबित करने की कोशिशों में लगे हैं कि अलवर में गैंगरेप जैसी कोई वारदात हुई ही नहीं। तिजारा फाटक पुलिया पर लहुलूहान मिली नाबालिग से गैंगरेप मामले में अलवर पुलिस ने चौंकाने वाला दावा किया है। पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने अब रेप होने से ही इनकार किया है।
अधूरी जांच में दावा, दिव्यांग के प्राइवेट पार्ट में इंजरी से बहा खून
एसपी ने कहा, मेडिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बालिका के प्राइवेट पार्ट्स में इंजरी है। इसी से काफी ज्यादा खून बहा। रेप होने जैसे फैक्ट्स सामने नहीं आए हैं। ऐसा मेडिकल एक्सपर्ट, फोरेंसिक एक्सपर्ट, टेक्निकल फैक्ट्स के आधार पर बताया गया है। राज्य सरकार ने गैंगरेप कांड पर पर्दा डालने के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच और अनुसंधान के लिए अलग से टीम अलवर भेजी है। ताकि इस उच्च स्तरीय टीम की रिपोर्ट पर कहा जा सके कि अलवर में गैंगरेप हुआ ही नहीं है। यह कोशिश इसलिए, क्योंकि अलवर की निर्भया मामले से गहलोत सरकार की देशभर में किरकिरी हुई है।
उन 15 मिनट में बालिका के साथ क्या हुआ, जांच जारी
पुलिस अधीक्षक ने दावा किया कि 11 जनवरी की शाम करीब 7: 31 बजे बालिका पुलिया पर चढ़ती नजर आ रही है। उसके साथ कोई संदिग्ध नजर नहीं आ रहा है, लेकिन 10 मिनट बाद बालिका लहूलुहान मिली। अब हमारी जांच इन्हीं 10 से 15 मिनट पर केंद्रित है। आखिर उन 10 मिनट में बालिका के साथ क्या हुआ है, इसकी जांच जारी है। उस समय पुल पर से निकले वाहनों की जांच कर रहे हैं।
नाबालिग के प्राइवेट पार्ट में इतनी घातक चोट कैसे लगी ?
पुलिस एसपी के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल भी यही है कि यदि रेप नहीं हुआ तो मूक-बधिर नाबालिग के प्राइवेट पार्ट में इतनी घातक चोट कैसे लगी ? वह कैसे इतनी लहूलुहान हुई कि सड़क पर दो फीट तक खून फैला ? यदि यह मान लें कि पुलिया पर हादसा हुआ तो दिव्यांग के शरीर पर सिवाए प्राइवेट पार्ट के कहीं और चोट क्यों नहीं आई ? फिर जब अंतिम 15 मिनट की कहानी अनसुलझी है तो उन्होंने कैसे मान लिया कि इस अवधि में रेप तो नहीं हुआ ? इसकी जांच जारी है कि पुलिया पर बालिका के साथ क्या हुआ ? लेकिन सरकार पर हो रही थू-थू रोकने के लिए तत्काल अधूरी जांच में ही रेप न होने की घोषणा कर दी गई।
कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा जिस समय उन्नाव बलात्कार पीड़िता की मां को विधानसभा चुनाव की टिकट बांट कर सियासत कर रही थीं, कमोबेश उसी समय उन्हीं की पार्टी की राजस्थान सरकार में एक नाबालिग अपनी मूक आवाज से चीख-चीख कर पुकार रही थी कि मैं भी लड़की हूं, मुझे भी लड़ने का मौका दो….लेकिन प्रियंका को न तो उस मासूम की आवाज सुनने की फुर्सत है, जिसके साथ दरिंदों ने ‘निर्भया’ जैसा खौफनाक सुलूक किया। न ही प्रियंका के पास राजस्थान में लगातार बढ़ रही बलात्कार की वारदातों के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जवाब-तलब करने का वक्त है और न हिम्मत है।
गहलोत राज में बलात्कारी बेखौफ, एक साल में 1072 रेप केस बढ़े
प्रियंका गांधी को यह अच्छी तरह मालूम है कि राजस्थान में बलात्कारी कानून-व्यवस्था से बेखौफ हैं। इसीलिए राजस्थान रेप के मामलों में देशभर में नंबर-वन है। कांग्रेस शासित राजस्थान को नंबर वन का शर्मनाक तमगा मिलने के बाद भी यहां रेप कम नहीं हो रहे हैं। प्रियंका गांधी की जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान में 2020 में गहलोत सरकार के दौरान 5310 लड़कियों की अस्मत लुटी थी। कांग्रेस हाईकमान से लेकर राजस्थान सरकार तक किसी ने भी रेप रोकने की दिशा में कदम उठाना तो दूर, बढ़ते बलात्कार के मामलों पर चिंता तक नहीं जताई।
राजस्थान रेप के मामले में नंबर-वन है और प्रियंका की बोलती बंद है
उत्तर प्रदेश में जरूर प्रियंका गांधी को रेप पीड़िताएं नजर आती हैं। इस पर उन्नाव में रेप से लेकर अब तक सियासत जारी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अपनी पहली लिस्ट में उन्नाव सीट से उन्नाव बलात्कार पीड़िता की मां को टिकट देकर प्रियंका क्या साबित करना चाहती हैं कि कांग्रेस रेप-विक्टिम के साथ है….राजस्थान में ऐसा लगता है कि कांग्रेस ऐसे गुनरगारों के ही साथ है। अव्वल तो सरकार प्रदेश में बलात्कार रोक ही नहीं पा रही। दूसरे, बलात्कारियों को सजा दिलाने में, चालान पेश करने में पुलिस की लापरवाही साफ नजर आती है। पॉक्सो एक्ट में एक साल में फैसला देने की बाध्यता के बावजूद राजस्थान में पॉक्सो के सात हजार मामले न्याय की बाट जोह रहे हैं। कुछ जिलों में तो पुलिस की लचर जांच के चलते ऐसे मामले 5-6 साल से पैंडिंग चल रहे हैं।
अलवर की मूक-बधिर नाबालिग बच्ची से निर्भया जैसा ही कांड
कांग्रेस की महासचिव को ध्यान से सुनना चाहिए कि राजस्थान में एक साल में ही बलात्कार के 1027 मामले पिछले साल की तुलना में बढ़ गए हैं। वर्ष 2021 में राजस्थान में 6337 केस दर्ज हुए हैं। सरकार की तरह पुलिस अधिकारी भी बेशर्मी से कहते हैं कि राजस्थान में केस इसलिए बढ़े क्योंकि यहां पर मामला दर्ज होता है। जबकि हकीकत यही है कि निर्भया मामले के बाद से केस दर्ज करने की गंभीरता पर राज्य ने दिखाई है, सिर्फ राजस्थान ने नहीं। निर्भया केस की बात चल निकली है तो बता दें कि खाकी वर्दी का कोई भय न रह जाने के कारण अलवर में मूक-बधिर नाबालिग बच्ची से निर्भया जैसा ही कांड हो गया।
रेपिस्ट फ्लाईओवर पर पटक गए, सड़क खून से लाल हो गई
दरिंदों ने एक बेजुबान नाबालिग के साथ गैंगरेप कर अलवर में फ्लाईओवर पर फेंक दिया। हैवानों ने नाबालिग मूक बधिर के साथ गैंगरेप किया। वहशी यहीं रुके। उन्होंने बच्ची को किसी नुकीली चीज से मारा और जख्मी कर दिया। मूक बधिर होने की वजह से मासूम चिल्ला भी नहीं सकी। आरोपी उसे गाड़ी में लेकर घूमते रहे, लेकिन खून बंद नहीं होने पर एक फ्लाईओवर पर छोड़कर भाग गए। पीड़िता तिजारा पुलिया पर करीब एक घंटे पड़ी रही। 2 फीट सड़क खून से लाल हो गई। खून से लथपथ नाबालिग को कुछ राहगीरों ने देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली। रात करीब 9 बजे जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉ के.के. मीणा ने नाबालिग को अर्द्धमूर्छित हालत में देखा था।
मानसिक रूप से कमजोर रेप पीड़िता डर से बोल भी नहीं पा रही
डॉ केके मीणा ने बताया कि नाबालिग को शुरुआत में देखकर लगा कि वह मानसिक रूप से कमजोर हो सकती है। लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। थोड़ी बहुत मुंह से आवाज करती, लेकिन बोल नहीं पा रही थी। तब लगा कि यह मूक बधिर है। फिर रात करीब 11 बजे नाबालिग के मां व मामा अस्पताल आ गए। तब पता लगा नाबालिग की उम्र करीब 16 साल है। मूक बधिर है। शाम करीब 4 बजे घर से निकल गई थी। उसके बाद पता नहीं चला कि किसी के साथ आई या उसका अपहरण करके लाया गया। डॉ केके मीणा ने बताया कि नाबालिग का बहुत अधिक खून बह चुका था। असल में उसके प्राइवेट पार्ट में काफी बड़ा कट लगा हुआ था। किसी नुकीली चीज से ये जख्म किया गया। इसी कारण उसका काफी खून बह गया है।
पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में काफी बड़ा कट लगा, अलवर से जयपुर रेफर
राजस्थान में एक बार फिर दिल्ली के निर्भया कांड की तरह एक 15 साल की मंदबुद्धि लड़की के साथ रेप और दरिंदगी हुई है। अज्ञात बदमाशों ने पीड़िता के साथ हैवानियत के बाद उसे अलवर शहर की तिजारा पुलिया पर पटक दिया। वहां बेहोशी की हालत में मिली लड़की की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। उसे तत्काल सरकारी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। रेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स पर बेरहमी से चोट पहुंचाई गई थीं। गहरे जख्मों के चलते ब्लडिंग नहीं रुकती देख चिकित्सकों ने उसे अलवर से जयपुर रेफर करना पड़ा।
यह बड़ा मामला, विरोध में जनता, दरिंदों को फांसी
असल में यह निर्भया जैसा ही बड़ा मामला है। जिसके विरोध में जनता उतरने लगी है। अलवर शहर में शाम को पैदल मार्च निकाल कर विरोध जताया गया। आमजन का कहना है कि दरिंदों को फांसी पर लटकाना चाहिए। इस घटना का पूरे प्रदेश में विरोध होने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्विट कर कहा है कि प्रदेश में बेटियां आए दिन दरिंदों की हवस का शिकार हो रही हैं। लेकिन सरकार शून्य हो गई है। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश में नम्बर वन बन चुके राजस्थान को शोषण मुक्त बनाने के लिए कांग्रेस के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।

राजस्थान : नशे में धुत टीचर ने छात्राओं के सामने उतारे कपड़े

                                नशे में धुत टीचर ने छात्राओं के सामने उतारे कपड़े (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
राजस्थान में उदयपुर जिले के कोटड़ा क्षेत्र के एक शराबी टीचर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नशे में धुत टीचर ने ना केवल स्कूल में छात्र-छात्राओं के सामने अपने कपड़े उतारे, बल्कि तीन घंटे तक उत्पात मचाते हुए स्टाफ और ग्रामीणों के साथ मारपीट भी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोटड़ा के खजूरिया स्कूल का पीटीआई (शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक) देवीलाल मीणा दोपहर करीब 12 बजे शराब के नशे में स्कूल पहुँचा। इस दौरान जब प्रिंसिपल आलोक शर्मा और दूसरे शिक्षकों ने उसे रोकने की कोशिश की और समझाया कि आप नशे की हालत में इसलिए घर चले जाएँ। इस पर उसने प्रिंसिपल को नाखूनों से जख्मी कर दिया और साथी शिक्षकों बाबूलाल खेर और भगवतीलाल को दाँतों से काट लिया।

नशे में धुत पीटीआई लगातार सभी को जान से मारने की घमकियाँ दे रहा था। इतना ही नहीं इसके बाद देवीलाल ने एक-एक करके अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया। इस दौरान 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएँ मौजूद थे। टीचर को इस हालत में देखकर कई लड़कियाँ वहाँ से भागने लगी। पीटीआई ने शराब पीकर तीन घंटे तक उत्पात मचाया। वहाँ मौजूद लोगों से गली-गलौच की।

शोर सुनकर जब ग्रामीण स्कूल में पहुँचे तो पीटीआई उनके साथ भी मारपीट करने लगा। हालाँकि, स्थिति काबू में नहीं आने पर इस बारे में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पीटीआई को हिरासत में ले लिया और उसे अपने साथ थाने ले गई।

जानकारी के मुताबिक, पीटीआई टीचर इससे पहले भी कई बार स्कूल मे शराब पीकर हंगामा कर चुका है। पुलिस हर बार उसे पकड़कर ले जाती है और बिना कोई कार्रवाई करे उसे छोड़ देती है। इस मामले में कार्रवाई के लिए प्रिंसिपल आलोक शर्मा ने सीबीईओ, डीईईओ और जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा है। यह मामला अब राजस्थान बाल आयोग तक भी पहुँच गया है।

राजस्थान : अलवर में 16 साल की दलित लड़की के साथ 3 बार किया गैंगरेप, लेकिन राहुल,प्रियंका, केजरीवाल, अखिलेश, मायावती और रावन सब खामोश

                                             प्रतीकात्मक 
भाजपा शासित राज्यों में किसी भी बलात्कार में जाति और मजहब देख सियासत का स्वांग करने वाले कांग्रेस शासित राज्य में दलितों पर होते अत्याचारों और उनकी महिलाओं के होने वाले बलात्कारों पर क्यों खामोश रहते हैं? क्या कांग्रेस शासित राज्य में दलितों का कोई आत्मसम्मान नहीं? आखिर ये सियासतखोर अपनी गन्दी और ओछी सियासत कब छोड़ेंगे?
राजस्थान के अलवर में नाबालिग लड़की से गैंगरेप किए जाने की खबर आई है। आरोप है कि तालीम ओर आमीन खान ने 3 बार छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया। ये घटना बड़ोदा मेव क्षेत्र के रौणपुर का बास गाँव की है। 16 वर्षीय दलित नाबालिग लड़की 10वीं कक्षा की छात्र है। तालीम और आमीन खान ने न सिर्फ उसके साथ गैंगरेप किया, बल्कि इस पूरी वारदात का अश्लील वीडियो भी शूट कर लिया।

ये दोनों बार-बार धमकी देते थे कि अगर किशोरी ने उनकी बात नहीं मानी तो वो इस आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। बड़ोदा मेव थाने में पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई FIR के अनुसार, इसी वीडियो के सहारे ब्लैकमेल कर के उनकी बेटी के साथ 3 बार गैंगरेप किया गया। पीड़िता अलवर के एक हॉस्टल में रह कर पढ़ाई करती है। आरोपित उसके गाँव के पड़ोसी ही हैं और पहले से ही दोस्ती के लिए दबाव बना रहे थे।

‘नवभारत टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2 फरवरी, 2021 को दोनों ने छात्रा का पीछा किया। घर से सरकारी स्कूल जाते समय रास्ते में घेर कर उस पर दोस्ती के लिए दबाव बनाया गया। जब वो इनकार करती रही तो पेय पदार्थ में नशा मिला कर उसे जबरन पिला दिया। इसके बाद बेहोशी की हालत में दोनों आरोपित पीड़िता को पास के एक खेत में लेकर गए। वहाँ उसका अश्लील वीडियो क्लिप शूट किया गया।

होश में आने पर धमकाया गया कि वो किसी से कुछ नहीं बताए। युवकों ने कहा कि अगर वीडियो वायरल हुआ तो तेरे ही घर वाले तुझे जान से मार डालेंगे। इसके बाद इसी वीडियो के सहारे उसका गैंगरेप करते रहे। साथ ही ब्लैकमेल कर के रुपए भी ऐंठ लिए। ‘ई-मित्र’ के जरिए उन्होंने बालिका से साढ़े 7 हजार रुपए निकलवा कर रख लिए। ब्लैकमेलिंग के डर से पीड़िता ने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया।

हालाँकि, घर की ही एक महिला को इसकी भनक लगी तो राज़ खुला। इसके बाद शनिवार (7 अगस्त, 2021) को पिता ने थाने में FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने दो युवकों के साथ-साथ उनके दो अन्य साथियों इदु व विजेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज कर के उनकी तलाश में दबिश देना शुरू कर दिया है। थानाधिकारी चंद्रशेखर ने मीडिया को बताया कि अनुसंधान शुरू है। विपक्ष ने इस मामले में लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को घेरा है।

राजस्थान में कौन बनेगा मंत्री? पार्टी नेताओं की फोन टैपिंग गरमाई

अभी पंजाब में विवाद सुलझा भी नहीं कि राजस्थान कांग्रेस में फोन टैपिंग मुद्दे को लेकर मामला गरमा गया है। फोन टैपिंग में विशेषज्ञ रही कांग्रेस अब स्वयं अपने ही जाल में फंस रही है। 
राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर से फोन टैपिंग मामले में घिरती नजर आ रही है। इस बार सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह अपने ही पार्टी के विधायकों के फोन टैप करा रही है। बीजेपी प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने 13 जून 2021 को कहा, ”सीएम गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान में चल रही जासूसी की साजिश इससे पहले भी हो चुकी है। उन्होंने विधानसभा में स्वीकार किया कि वास्तव में फोन टैपिंग हुई थी। राजस्थान बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है… यह कांग्रेस में चल रहे अंतर्कलह व असंतोष को दिखाता है।”

जैसाकि आशंकाएं व्यक्त की जा रही थी कि 2024 लोक सभा चुनाव आते-आते कांग्रेस विभाजन की ओर जा चुकी होगी, जो पंजाब और राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में दिखाई दे रहा है। 

वहीं, 12 जून 2021 को पायलट खेमे के एक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने भी गहलोत सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। सोलंकी ने कहा था कि राजस्थान में विधायकों की फोन टैपिंग कराई जा रही है। हालाँकि, उनकी फोन टैपिंग हो रही है या नहीं, इस बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि मेरा फोन टैप हो रहा है या नहीं, लेकिन कुछ विधायकों ने कहा कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं। 2-3 विधायकों ने 11 जून 2021 को मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी। इस संबंध में मेरी सचिन पायलट से कोई बातचीत नहीं हुई।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, ”ये निराधार आरोप हैं। एक विधायक जैसे जिम्मेदार व्यक्ति को सबूतों के आधार पर चीजों की पुष्टि करने के बाद ही सार्वजनिक बयान देना चाहिए।”
इस मामले को लेकर राजस्थान बीजेपी प्रमुख सतीश पूनिया ने कहा था, “एक साल पहले भी ऐसा ही हाल था। आज फिर से कांग्रेस के एक विधायक कह रहे हैं कि उनके फोन टेप हो रहे हैं, जासूसी हो रही है। कांग्रेस बताए कि ये विधायक कौन हैं? कांग्रेस पार्टी सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा कि तर्ज पर अपने ही विधायकों को डरा रही है।”
न्यूज़ 18 हिंदी के अनुसार, “बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि गहलोत सरकार ने पहले केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के कई नेताओं के फोन टेप कराए। अब कांग्रेस विधायकों के फोन टेप से साफ हो गया कि अशोक गहलोत सरकार बचाने के लिए विधायकों की जासूसी करवा रहे हैं और उन पर निगरानी रख रहे हैं।”
फोन टैपिंग को लेकर गहलोत सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब सचिन पायलट दो दिनों से दिल्ली में अपनी माँगों को लेकर डेरा डाले बैठे हैं, लेकिन अभी तक उनकी आलाकमान से मुलाकात नहीं हुई है।
राजस्थान में अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में 9 पद खाली हैं। सचिन पायलट का खेमा अकेले इनमें से 6-7 मंत्रीपद चाहता है। जबकि मीडिया रिपोर्ट की मानें तो राजस्थान में CM गहलोत की कैबिनेट के लिए लगभग 35 नाम चर्चा में हैं। इनमें से वो 10 निर्दलीय विधायक भी हैं, जो अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं। बीएसपी वाले वो 6 MLA भी हैं, जो अब कांग्रेसी  हो चुके हैं। पायलट खेमे से अलग खुद कांग्रेस के लगभग 10 वरिष्ठ विधायक भी इस ताक में लगे हैं।
सचिन पायलट मामले को सुलझाने के लिए अब खुद सोनिया गाँधी अपने स्तर पर चीजों को देख रही हैं। इसके अलावा कयास यह भी है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा से भी सचिन पायलट मुलाकात करेंगे।
सचिन पायलट ने 18 विधायकों के साथ पिछले साल जुलाई में भी बगावत का मन बनाया था, लेकिन उन्होंने कुछ समय बाद गहलोत सरकार में वापसी कर ली थी। हालाँकि, इस बार पायलट अपने तेवरों से उड़ान भरने को तैयार दिख रहे हैं। 10 महीने पहले उनसे किए वादे पूरे करने की माँग को लेकर पायलट सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

पाक विस्थापित हिन्दुओं का कोविड टीकाकरण न कराए जाने पर हाई कोर्ट ने लगाई राजस्थान सरकार को फटकार

राजस्थान हाई कोर्ट ने पाक विस्थापित हिन्दू प्रवासियों का कोरोना वैक्सीनेशन न कराए जाने के लिए राज्य की अशोक गहलोत सरकार को फटकार लगाई है। इस मामले में सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार (3 जून) को राज्य सरकार की ‘निष्क्रियता’पर नाराजगी जताई।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों, जिनके पास निर्धारित पहचान पत्र नहीं हैं, उन्हें कोविड-19 टीकाकरण के लिए पात्र क्यों नहीं मान रही है।

जस्टिस विजय विश्नोई और जस्टिस रामेश्वर व्यास ने पाया कि उसके 28 मई के आदेश के बावजूद पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है।

पाक विस्थापित हिन्दू टीकाकरण योग्य क्यों नहीं: गहलोत सरकार से हाई कोर्ट 

कोर्ट ने राजस्थान सरकार से यह बताने को कहा कि वह केंद्र के नियमों द्वारा पाकिस्तान से आए हिन्दू प्रवासियों को टीकाकरण के लिए पात्र बनाने के बावजूद उन्हें कोविड टीकाकरण के लिए पात्र क्यों नहीं मान रही हैं।

साथ ही हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि गहलोत सरकार द्वारा पाकिस्तान से आए हिन्दू प्रवासियों सहित निर्धारित पहचान पत्र नहीं रखने वाले लोगों के टीकाकरण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी भी कोर्ट को नहीं दी गई है।

हाई कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा 28 मई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि किसी वैध पहचान दस्तावेज न होने पर टीकाकरण के लिए लोगों की पहचान के लिए केंद्र की एसओपी पाकिस्तानी प्रवासियों को टीकाकरण के लिए पात्र बनाती है।

पीठ ने कहा, ”यह समझ पाना मुश्किल है कि राजस्थान सरकार केंद्र से और स्पष्टीकरण क्यों माँग रही है और एसओपी में पाकिस्तानी प्रवासियों को शामिल करने का आग्रह क्यों कर रही है।”

हिन्दू प्रवासी पात्र नहीं, मुस्लिमों के लिए विशेष टीकाकरण कार्यक्रम

एक ओर जहाँ गहलोत सरकार पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों को केंद्र के नियमों और हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कोविड टीकाकरण के लिए पात्र नहीं मान रही है तो वहीं मुस्लिमों के टीकाकरण के लिए अलग से कैंप लगाकर विशेष टीकाकरण कार्यक्रम चला रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान में मुस्लिमों में कोरोना टीकाकरण को बढ़ाने और लोगों में फैली तरह-तरह की भ्रांतियों को दूर करने के लिए अब विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।

ऐसे ही कैंप चित्तौड़गढ़ में 1 जून से छिपा मोहल्ले, यथासमय कच्ची बस्ती और रेलवे स्टेशन के पास स्थित कॉलोनी में आयोजित किए जा रहे हैं। चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत के साथ मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई और कोरोना टीकाकरण के कम कवरेज पर विचार-विमर्श किया।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने वैक्सीन के महत्व पर प्रकाश डाला और मुस्लिम समुदाय के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए आगे आने का आह्वान किया। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि मुस्लिमों में कोरोना वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने और इस समुदाय के लोगों में फैली तरह-तरह की भ्राँतियों को दूर करने के लिए अब विशेष कैंप लगाए जाएँगे।

राजस्थान : डस्टबिन में ही नहीं फेंकी गई, 12 फ़ीट गहरे गड्ढे में भी गाड़ दी गई कोरोना वैक्सीन

टीवी पर चर्चा हो या दीवारों पर चिपके पोस्टर "हमारे बच्चों की वैक्सीन बाहर क्यों भेज दी", लेकिन इस बात पर शोर मचाने वाले राजस्थान में बर्बाद हो रही वैक्सीन पर खामोश क्यों? क्यों चुप हैं राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा? जनता की लाशों पर गन्दी सियासत खेलने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को क्यों नहीं बर्खास्त किया? 12 फीट गहरे गड्डे में वैक्सीन गाड़ने का क्या मतलब हैं? किस षड्यंत्र के तहत इतना घिनौना काम किया जा रहा है? यह कोई सोंची-समझी साज़िश है, जिसका भांडा फोड़ना वैक्सीन लगाने से कहीं अधिक जरुरी है।  
राजस्थान सरकार ने मीडिया संस्थान ‘दैनिक भास्कर’ द्वारा राज्य में कोरोना वैक्सीन की बर्बादी सम्बंधित ग्राउंड रिपोर्ट को नकार दिया था और साथ ही केंद्र सरकार के आँकड़ों को भी गड़बड़ बताया था। अब ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल की पुष्टि के लिए कुछ तस्वीरें जारी की हैं और उनके आधार पर दावा किया है कि राजस्थान में वैक्सीन की हजारों डोज न सिर्फ डस्टबिन में डाले गए, बल्कि जमीन में भी गाड़ दिए गए।

अख़बार ने अपने एक पत्रकार की तस्वीर भी जारी की है, जिसने 12 फ़ीट गहरे गड्ढे में उतर कर देखा तो पाया कि वहाँ वैक्सीन के कई वायल बर्बाद कर दिए गए थे। इनमें से अधिकतर वायल ऐसे थे, जो 80% तक भरे हुए थे। बता दें कि वैक्सीन की एक वायल से 10 डोज बनती है। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री लगातार इस बात को नकार रहे हैं कि राजस्थान में कोरोना वैक्सीन कचरे में फेंकी गई है। उन्होंने बर्बादी के प्रतिशत को महज 2 बताया।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में पाया कि 80% तक भरी हुई वैक्सीन की वायलें जमीन में गाड़ दी जा रही हैं। बुधवार को ऐसे 10 स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल के बाद अख़बार ने कहा कि वो सच दिखा रहा है और अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री को सम्बोधित करते हुए अख़बार ने उन्हें वैक्सीन की बर्बादी रोकने की नसीहत दी और कहा कि उन्हें जो भी सबूत चाहिए, वो दिए जाएँगे पर टीके बर्बाद न हों।

                                      राजस्थान में गड्ढे में गाड़ दी गई वैक्सीन (साभार: दैनिक भास्कर)
राजस्थान के अस्पताल परिसरों में वैक्सीन की सैकड़ों डोज कचरे के ढेर में पड़ी हुई है। खुद डॉक्टरों का ही कहना है कि वो वैक्सीन की पुरानी वायलों को जमीन में गाड़ दे रहे हैं। अब तक इसके जाँच के आदेश भी नहीं दिए गए हैं। अख़बार ने बर्बाद की गई 500 में से 20 वायलों के बैच नंबर भी शेयर किए। अखबार ने कहा, “भास्कर सरकार से अपील करता है कि इन वायल की जाँच कराएँ और जो भी सच सामने आए, उसे सार्वजनिक करें। हमारा मकसद सिस्टम की उस लापरवाही को सामने लाना है, जिसकी वजह से हमारी कीमती वैक्सीन बर्बाद हो रही हैं।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के अनुसार, प्रदेश में 2% वैक्सीन ही बर्बाद हुई है, जबकि देश का औसत 6% है। उन्होंने बूँदी जिले का आँकड़ा शेयर करते हुए कहा कि वहाँ महज 5.35% वैक्सीन ही बर्बाद हुए हैं, जबकि मीडिया की पड़ताल में ये आँकड़ा साढ़े 4 गुना से भी अधिक 25% है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र भी लिखा, जिसमें बताया कि ये वायलें डिस्पोजल के लिए भेजी गई थीं।

हालाँकि, ये अजीब है कि वैक्सीन की भरी हुई वायलों को डिस्पोजल के लिए भेज दिया जाए। राजस्थान के उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कॉन्ग्रेस की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो ‘दोषी भी मैं, जाँचकर्ता भी मैं, निर्णयकर्ता भी मैं’ वाले सिद्धांत पर चल रही है, जबकि उसे कोरोना प्रबंधन पर ध्यान देते हुए वैक्सीन की बर्बादी की जाँच किसी थर्ड पार्टी से करानी चाहिए। ‘दैनिक भास्कर’ ने अपने दफ्तर का पता देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से कहा है कि वो वायलों को जाँच के लिए मँगवा लें।

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राजस्थान में 11.50 लाख डोज बर्बाद ; 8 जिलों में डस्टिबन में मिले कोरोना के टीके

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राजस्थान में 11.50 लाख डोज बर्बाद ; 8 जिलों में डस्टिबन में मिले कोरोना के टीके

वहीं ‘पत्रिका’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 फीसदी) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत सरकार पर भी वैक्सीन विदेश में बाँट देने का आरोप लगाते हैं। राजस्थान के चूरू जिले में तो सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई है। इस मामले में 24.60 फीसदी के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है।