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राजस्थान : ‘सचिन पायलट के हर मूवमेंट पर थी नजर, फोन भी हुआ टैप’: गहलोत के OSD रहे लोकेश शर्मा का चौंकाने वाला खुलासा

कहावत है 'चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर', कांग्रेस पर सटीक बैठती है। फोन टेप करते हैं खुद, आरोप भाजपा पर लगाते हैं कि बीजेपी विपक्ष के फोन टेप कर/करवा रही है। याद हो, ऐसी अभी कुछ समय पूर्व चर्चा थी। जबकि राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने ही सहयोगी सचिन पायलट का फोन टेप कर रहे थे। ज्ञात हो, यूपीए के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रहे प्रणव मुखर्जी की जासूसी किये जाने की बहुत चर्चा थी, लेकिन जासूसी कैमरा हटाने पर यह कह कर पर्दा डाला गया था कि "चिनगाम" थी। अब कोई यूपीए से पूछे कि 'क्या किसी मिनिस्टर के कमरे में कोई दीवारों पर "चिनगाम" फैंकता हैं?

विधानसभा चुनावों में पराजय के बाद अब राजस्थान में कांग्रेस सरकार की करतूतों की पोल उनके अपने ही खोल रहे हैं। सचिन पायलट की निगरानी किए जाने का चौंकाने वाला खुलासा लोकेश शर्मा ने किया है। शर्मा निवर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विशेष कार्याधिकारी (OSD) रह चुके हैं।

शर्मा के अनुसार पायलट के हर मूवमेंट पर नजर रखी जाती थी। उनका फोन टैप कराया गया था। सचिन पायलट का कहना है कि वे इस मुद्दे को पार्टी विधायक दल की बैठक में उठाएँगे। शर्मा ने इससे पहले चुनावों में कांग्रेस की हार का कसूरवार भी गहलोत को ही बताया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार पायलट की निगरानी और फोन टैप किए जाने के उनके समर्थकों के आरोपों को लेकर शर्मा से सवाल किया गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “ये तो निश्चित रूप से सबके सामने था कि वे कहाँ जा रहे थे, किससे मिल रहे थे, किससे बात कर रहे थे, इस पर नजर रखी गई थी।”

लोकेश शर्मा ने का यह भी कहना है कि उन्होंने कुछ विधायकों के टिकट काटने और सचिन पायलट द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह मुख्यमंत्री गहलोत को दी थी। उन्होंने कहा, “अपने सर्वेक्षणों के आधार पर, मैंने मुख्यमंत्री से कहा था कि उन्हें मौजूदा विधायकों को बदलने की जरूरत है। उन्हें सचिन पायलट द्वारा उठाए गए पेपर लीक मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए। लेकिन उनकी आपसी लड़ाई ने उस चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाया, जिसे हम जीत सकते थे।”

लोकेश शर्मा ने बताया कि अशोक गहलोत ने उनके सुझावों पर कोई एक्शन नहीं लिया। कांग्रेस आलाकमान को गलत रिपोर्ट भेजकर अँधेरे में रखा है। इसी कारण से पार्टी राज्य में हारी। लोकेश बीकानेर या भीलवाड़ा से लड़ना चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार हुई है। पाँच साल सत्ता में रहने के बाद अब 2023 के विधानसभा चुनाव में मात्र 69 सीटें मिली हैं। भाजपा ने 115 सीटों के साथ राज्य में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है।

लोकेश बीकानेर या भीलवाड़ा से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। ऐसे में विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज 69 सीटें मिलने के बाद से उन्होंने मोर्चा खोल रखा है। नतीजों के बाद उन्होंने कहा था, “तीसरी बार लगातार सीएम रहते हुए गहलोत ने पार्टी को फिर हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया। आज तक पार्टी से सिर्फ लिया ही लिया है, लेकिन कभी अपने रहते पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करवा पाए गहलोत।”

आगे उन्होंने लिखा था,”आलाकमान के साथ फरेब, ऊपर सही फीडबैक न पहुँचने देना, किसी को विकल्प तक न बनने देना, अपरिपक्व और अपने फायदे के लिए जुड़े लोगों से घिरे रहकर आत्ममुग्धता में लगातार गलत निर्णय और आपाधापी में फैसले लिए जाते रहना, तमाम फीडबैक और सर्वे को दरकिनार कर अपनी मनमर्जी और अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को उनकी स्पष्ट हार को देखते हुए भी टिकट दिलवाने की जिद, आज के ये नतीजे तय थे।”

मध्य प्रदेश : कमलनाथ-पायलट ने जिस सुरेश राजे का किया था प्रचार, उस विधायक का अश्लील वीडियो वायरल

                     कांग्रेस MLA सुरेश राजे और वीडियो का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार: जी मीडिया)
मध्य प्रदेश के डबरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक सुरेश राजे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। 6 मिनट 37 सेकेंड के इस वीडियो में सुरेश राजे किसी होटल में एक युवक के साथ आपत्तिजनक हालत में दिख रहे हैं। हालाँकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो कब का है। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने 
कांग्रेस से जवाब माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो की शुरुआत में युवक विधायक राजे से कहता है कि ‘आप कभी मौका दीजिए। आप मुझे अपना बना लो। हम आपको खुश कर देंगे’। इसके बाद वीडियो में पोर्न ऑडियो सुनाई देने लगता है। उनका वीडियो वायरल होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे प्रतिक्रिया पूछी, तो उन्होंने कहा कि ये वीडियो एडिटेड है।

यह वीडियो होटल में बनाया जाता दिख रहा है। युवक जब बाथरूम जा रहा होता है, उस दौरान भी वीडियो शूट किया जाता रहा है। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि विधायक को वीडियो बनने की जानकारी है, लेकिन वे इसका विरोध नहीं करते हैं।

2020 में मंत्री इमरती देवी को हराकर चर्चा में आए थे सुरेश राजे

सुरेश राजे 2020 के उपचुनाव में मंत्री इमरती देवी को हराकर विधायक बने थे। इमरती देवी सिंधिया कैंप की मानी जाती थीं। इन्होंने इस्तीफा देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा था। उनके इस्तीफा देने से यहाँ उपचुनाव हुए थे। हालाँकि, उपचुनाव में उन्हें सुरेश राजे ने हरा दिया था। चुनाव से पहले ही राजे कांग्रेस में शामिल हुए थे।

कमलनाथ और सचिन पायलट ने किया था चुनाव प्रचार

जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश राजे पहले भी चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन तीन चुनावी हार के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दिया और कांग्रेस की टिकट पर अपनी किस्मत को आजमाया था। उनके लिए चुनाव प्रचार में कमलनाथ और सचिन पायलट जैसे दिग्गज पहुँचे थे।
उस चुनाव में सुरेश राजे ने इमरती देवी को हरा दिया था। चूँकि इमरती देवी मंत्री थी, ऐसे में उनकी जीत को बड़ा माना गया। हालाँकि, आगामी चुनाव से पहले उनका वीडियो वायरल होना उनके लिए मुसीबत लेकर आ सकता है।

सुरेश राजे ने बताया साजिश

कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ये वीडियो एडिटेड है। उनसे लोगों ने 50 लाख की वसूली करने की कोशिश की थी और कहा था कि पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। अब वो पुलिस को पूरी जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस वीडियो के बारे में उड़ती-उड़ती खबर पहले से मिल रही थी, लेकिन अफवाहों के आधार पर उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। अब वो पुलिस के सामने सबूत रखेंगे और जिन्होंने ऐसा काम किया है, उनके खिलाफ स्टैंड लेंगे।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने इस वीडियो को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, “कांग्रेस के एक विधायक का अश्लील वीडियो वायरल हो रहा है। कांग्रेस नेताओं को जवाब देना होगा कि क्या यही उनकी पार्टी के संस्कार हैं? इनके कई और बड़े नेताओं के इसी प्रकार के कुकर्मों की चर्चा बाजार में जोरों पर है।”

राजस्थान : गद्दार हैं सचिन पायलट : अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री

                                                                                                                 साभार: @SachinPilot
राजस्थान में कांग्रेस के दो गुटों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद का सपना सजाने वाले पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को गद्दार बताया है। उन्होंने कहा कि एक गद्दार कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकता।

गहलोत ने कहा, “एक गद्दार मुख्यमंत्री नहीं हो सकता। हाईकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बना सकता। वे ऐसे आदमी हैं, जिनके पास 10 विधायक नहीं हैं। उन्होंने बगावत की। उन्होंने पार्टी को धोखा दिया। वह गद्दार हैं। गद्दार को कोई विधायक स्वीकार नहीं करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “देश के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक पार्टी अध्यक्ष ने अपनी ही सरकार को गिराने की कोशिश की। इसके लिए बीजेपी की तरफ से पैसा दिया गया था। बीजेपी के दिल्ली दफ्तर से 10 करोड़ रुपए आए थे। इसका मेरे पास सबूत है। इन पैसों में से किसे कितना दिया गया, ये मुझे नहीं पता।” 

दोनों के बीच तल्खी 23 नवंबर 2022 को पार्टी की बैठक में भी दिखी। दरअसल, राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ राजस्थान में आने वाली है। इसकी तैयारियों को लेकर एक बुलाई गई थी। इस बैठक में सीएम गहलोत और पायलट दूर-दूर बैठे। इस दौरान दोनों नेताओं ने बात भी नहीं की। वहीं, बैठक खत्म होने से पहले ही सचिन पायलट वहाँ से चले गए।

मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए सीएम गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष पद की कुर्सी ठुकरा दी। सीएम गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर सीएम की कुर्सी सचिन पायलट को सौंपने के लिए कहा गया था। हालाँकि, उन्होंने ऐसी बिसात बैठाई कि पायलट की यह कोशिश नाकाम हो गई।

उसके बाद से दोनों गुटों के बीच आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के हालात को देखते हुए पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं को सलाह दी थी कि अन्य नेताओं के खिलाफ या पार्टी के आंतरिक मामलों के बारे में वे सार्वजनिक बयानबाजी करने से बचें। हालाँकि, राजस्थान कॉन्ग्रेस में इस सलाह का असर नहीं दिख रहा है।

सचिन पायलट द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ विद्रोह करने के बाद साल 2020 में उन्होंने पायलट को ‘निकम्मा’ और ‘नकारा’ कहा था। उस दौरान पायलट के साथ 18 अन्य विधायकों का भी साथ मिला था। इसके बाद सीएम गहलोत ने पायलट को उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया था।

दोनों नेताओं के बीच आंतरिक कलह साल 2018 में पहली बार सामने आई थी। उस दौरान राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे और दोनों गुट प्रत्याशियों के चयन में हस्तक्षेप करते हुए अपने लोगों को टिकट दिलवाना चाहते थे। इसके बाद पार्टी की जीत हुई तो मुख्यमंत्री पद को लेकर भी दोनों का मनमुटाव सामने आया।

जब पार्टी ने अशोक गहलोत को प्रदेश का मुख्यमंत्री और सचिन पायलट को उप-मुख्यमंत्री बनाया तो यह कलह थमने के बजाय और उग्र हो गया। दोनों नेता अपने-अपने मंत्रियों के पोर्टफोलियो बँटवारे को लेकर आमने-सामने आ गए। इसके बाद पायलट 18 विधायकों के साथ सीएम गहलोत के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें उप-मुख्यमंत्री का अपना पद गँवाना पड़ा।

दोनों गुट के नेता एक-दूसरे पर गद्दार, रजिस्टर्ड दलाल, चरित्रहीन जैसे आरोप लगा रहे हैं। उधर सचिन पायलट कुर्सी के लिए राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी से लगातार सिफारिश लगा रहे हैं। सचिन पायलट राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी शामिल हुए। राहुल गाँधी के साथ प्रियंका गाँधी भी इस यात्रा में शामिल रहीं।

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए सचिन पायलट ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “भारत जोड़ो यात्रा का आज एक नया दिन परंतु देश जोड़ने का संकल्प व जोश वही। मध्य प्रदेश के बोरगांव से आज आरंभ हुई भारत जोड़ो यात्रा में सम्मिलित हुआ। राहुल गाँधी जी और प्रियंका गाँधी जीके साथ उठता हर कदम एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर इशारा करता है।”

राजस्थान में कौन बनेगा मंत्री? पार्टी नेताओं की फोन टैपिंग गरमाई

अभी पंजाब में विवाद सुलझा भी नहीं कि राजस्थान कांग्रेस में फोन टैपिंग मुद्दे को लेकर मामला गरमा गया है। फोन टैपिंग में विशेषज्ञ रही कांग्रेस अब स्वयं अपने ही जाल में फंस रही है। 
राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर से फोन टैपिंग मामले में घिरती नजर आ रही है। इस बार सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह अपने ही पार्टी के विधायकों के फोन टैप करा रही है। बीजेपी प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने 13 जून 2021 को कहा, ”सीएम गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान में चल रही जासूसी की साजिश इससे पहले भी हो चुकी है। उन्होंने विधानसभा में स्वीकार किया कि वास्तव में फोन टैपिंग हुई थी। राजस्थान बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है… यह कांग्रेस में चल रहे अंतर्कलह व असंतोष को दिखाता है।”

जैसाकि आशंकाएं व्यक्त की जा रही थी कि 2024 लोक सभा चुनाव आते-आते कांग्रेस विभाजन की ओर जा चुकी होगी, जो पंजाब और राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में दिखाई दे रहा है। 

वहीं, 12 जून 2021 को पायलट खेमे के एक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने भी गहलोत सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। सोलंकी ने कहा था कि राजस्थान में विधायकों की फोन टैपिंग कराई जा रही है। हालाँकि, उनकी फोन टैपिंग हो रही है या नहीं, इस बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि मेरा फोन टैप हो रहा है या नहीं, लेकिन कुछ विधायकों ने कहा कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं। 2-3 विधायकों ने 11 जून 2021 को मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी। इस संबंध में मेरी सचिन पायलट से कोई बातचीत नहीं हुई।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, ”ये निराधार आरोप हैं। एक विधायक जैसे जिम्मेदार व्यक्ति को सबूतों के आधार पर चीजों की पुष्टि करने के बाद ही सार्वजनिक बयान देना चाहिए।”
इस मामले को लेकर राजस्थान बीजेपी प्रमुख सतीश पूनिया ने कहा था, “एक साल पहले भी ऐसा ही हाल था। आज फिर से कांग्रेस के एक विधायक कह रहे हैं कि उनके फोन टेप हो रहे हैं, जासूसी हो रही है। कांग्रेस बताए कि ये विधायक कौन हैं? कांग्रेस पार्टी सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा कि तर्ज पर अपने ही विधायकों को डरा रही है।”
न्यूज़ 18 हिंदी के अनुसार, “बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि गहलोत सरकार ने पहले केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के कई नेताओं के फोन टेप कराए। अब कांग्रेस विधायकों के फोन टेप से साफ हो गया कि अशोक गहलोत सरकार बचाने के लिए विधायकों की जासूसी करवा रहे हैं और उन पर निगरानी रख रहे हैं।”
फोन टैपिंग को लेकर गहलोत सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब सचिन पायलट दो दिनों से दिल्ली में अपनी माँगों को लेकर डेरा डाले बैठे हैं, लेकिन अभी तक उनकी आलाकमान से मुलाकात नहीं हुई है।
राजस्थान में अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में 9 पद खाली हैं। सचिन पायलट का खेमा अकेले इनमें से 6-7 मंत्रीपद चाहता है। जबकि मीडिया रिपोर्ट की मानें तो राजस्थान में CM गहलोत की कैबिनेट के लिए लगभग 35 नाम चर्चा में हैं। इनमें से वो 10 निर्दलीय विधायक भी हैं, जो अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं। बीएसपी वाले वो 6 MLA भी हैं, जो अब कांग्रेसी  हो चुके हैं। पायलट खेमे से अलग खुद कांग्रेस के लगभग 10 वरिष्ठ विधायक भी इस ताक में लगे हैं।
सचिन पायलट मामले को सुलझाने के लिए अब खुद सोनिया गाँधी अपने स्तर पर चीजों को देख रही हैं। इसके अलावा कयास यह भी है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा से भी सचिन पायलट मुलाकात करेंगे।
सचिन पायलट ने 18 विधायकों के साथ पिछले साल जुलाई में भी बगावत का मन बनाया था, लेकिन उन्होंने कुछ समय बाद गहलोत सरकार में वापसी कर ली थी। हालाँकि, इस बार पायलट अपने तेवरों से उड़ान भरने को तैयार दिख रहे हैं। 10 महीने पहले उनसे किए वादे पूरे करने की माँग को लेकर पायलट सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

राजस्थान : गहलोत ने पार्टी को 26 सीटों पर समेटा

59 Congress office bearers resign in Rajasthan, protest removal of ...
राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट ने अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में बहुत कुछ साफ़ करते हुए कहा है कि वो भाजपा में नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा कि वो गहलोत नहीं हैं और न ही अपने लिए कुछ चाहते हैं, उनकी इच्छा है कि राजस्थान में उन वादों को पूरे किए जाएँ, जिन्हें चुनाव के वक़्त किया गया था।
सचिन पायलट ने कहा कि वसुंधरा राज सरकार में अवैध माइनिंग के खिलाफ कांग्रेस ने अभियान चलाया था। इसकी वजह से उन सब का अलॉटमेंट कैंसल हुआ था लेकिन अशोक गहलोत ने सत्ता में आने के बाद इस बारे में कुछ नहीं किया।
सचिन पायलट ने ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि 2017 में हुए एक संशोधन को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, जिसका प्रयोग कर के वसुंधरा राजे ने खुद के लिए जयपुर में एक सरकारी बँगला रख लिया था और वो भी जीवन भर के लिए। सचिन पायलट का दावा है कि गहलोत ने वसुंधरा से वो बँगला खाली कराने की बजाए उलटा इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।
सचिन पायलट ने कौशिक डेका को दिए गए इंटरव्यू में स्पष्ट आरोप लगाया कि अशोक गहलोत अपने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की मदद करने में लगे थे लेकिन सीएम ने उनके और उनके समर्थकों को वो सम्मान और जगह नहीं दी, जिसके वो हकदार थे। बकौल पायलट, अधिकारियों को उनका आदेश न मानने को कहा गया था और न ही उनके पास फ़ाइलें भेजी जाती थीं। कैबिनेट और सीएलपी की बैठक भी महीनों तक नहीं हुई।
सचिन पायलट ने पूछा कि उनके पद पर बने रहने का फायदा ही क्या है, जब वो जनता से किए गए वादे को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रहे थे? बकौल पायलट, उन्होंने कई बार पार्टी फोरम पर इन मुद्दों को उठाया और पार्टी प्रभारी अविनाश पांडे के समक्ष भी अपनी बात रखी। सचिन पायलट ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी बात की लेकिन जब बैठकें ही नहीं होती थीं तो चर्चा और बहस के लिए जगह ही कहाँ थी? पायलट ने ‘इंडिया टुडे’ के कौशिक डेका से कहा:
“इससे मेरे सम्मान को चोट पहुँची है। 2019 लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने मैनिफेस्टो में देशद्रोह का कानून हटाने की वकालत की थी और बाद में इसी कांग्रेस सरकार ने इस कानून का इस्तेमाल अपने ही मंत्री के खिलाफ किया। मैंने अन्याय के खिलाफ ये कदम उठाया। जब सदन चल रहा हो तब ह्विप जारी किया जाता है लेकिन सीएम ने बैठक के लिए ऐसा कर दिया। उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया, पार्टी मुख्यालय में भी नहीं। भाजपा के साथ मेरे मिले होने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैंने कांग्रेस को राजस्थान में जिताने मे इतनी मेहनत की है। मैं अपनी ही पार्टी के विरुद्ध क्यों जाऊँगा?”
राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बावजूद सचिन पायलट ने कहा कि वो अभी भी कांग्रेस में ही हैं और अपने समर्थकों से विचार-विमर्श कर के यह तय करेंगे कि आगे क्या कदम उठाने हैं। सचिन पायलट ने इस बात से भी इनकार कर दिया कि वो भाजपा जॉइन करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल वो अपने लोगों के लिए काम करना जारी रखेंगे। पायलट ने बताया कि उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया से पिछले 6 महीने से मुलाकात नहीं की है।


सचिन पायलट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी को 2018 में अपने नेतृत्व में जीत दिलाने के बावजूद कभी मुख्यमंत्री पद की माँग नहीं रखी थी। साथ ही उन्होंने कहा कि 200 सदस्यीय विधानसभा में जब कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी, तब उन्होंने प्रदेश में पार्टी की कमान संभाली। पायलट ने बताया कि जब वो 5 वर्षों तक पुलिस के अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे थे, संगठन को मजबूत कर रहे थे और जनता के साथ काम कर रहे थे, तब गहलोत के मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था।


सचिन पायलट ने कहा कि अशोक गहलोत ने अनुभवी होने की बात करते हुए सीएम पद ले तो लिया लेकिन 2 बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उन्होंने पार्टी को 2003 और 2013 में 56 और 26 सीटों पर समेट दिया। बकौल पायलट, गहलोत ने 2019 लोकसभा चुनाव में भी अच्छे प्रदर्शन का पार्टी को भरोसा दिलाया था। पायलट ने कहा कि राहुल गाँधी के कहने पर ही उन्होंने इस निर्णय को स्वीकार किया।
पायलट ने आरोप लगाया कि सीएम गहलोत उन्हें अपमानित करने में लगे रहे। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के अध्यक्ष पद से हटते ही गहलोत ने उनके खिलाफ गैंगबाजी शुरू कर दी थी। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि प्रियंका गाँधी ने जरूर उनसे फोन पर बात की है लेकिन वो व्यक्तिगत बातचीत थी और उससे कोई निष्कर्ष नहीं निकला। उन्होंने कहा कि वो स्वतंत्रता से काम करना चाहते हैं, उन्हें पावर नहीं चाहिए।
इससे पहले खबर आई थी कि सचिन पायलट ने अधिकतर कांग्रेस नेताओं का फोन कॉल रिसीव करना ही बंद कर दिया है। राजस्थान में पार्टी के प्रभारी अविनाश पांडेय ने भी स्वीकार किया था कि पायलट को कई कॉल्स और मैसेज किए गए लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं। राज्य में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है और उसकी जाँच चल रही है, जिस सम्बन्ध में दो भाजपा नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था।

राजस्थान : सचिन पायलट डिप्टी CM और PCC प्रेसिडेंट पद से बर्खास्त

अशोक गहलोत-सचिन पायलेट
कुछ माह पहले ही मध्य प्रदेश में सत्ता गँवा चुकी कांग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी राजनीतिक संकट मँडराता दिख रहा है। इसी को लेकर आज (जुलाई 14, 2020) को जयपुर के फेयरमोंट होटल में चल रही कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में उपस्थित 102 विधायकों ने माँग की है कि सचिन पायलट को पार्टी से हटा दिया जाना चाहिए।
इस बैठक में ही सचिन पायलट को डिप्टी CM और PCC अध्यक्ष पद से, रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह को मंत्री पद से बर्खास्त करने का फैसला ले लिया गया है। गोविंद सिंह डोटासरा नए PCC चीफ होंगे। इस बात की जानकारी कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने दी है।
कुर्सी का मोह कितना जबरदस्त होता है, यह राजस्थान में देखने को मिला। सचिन पायलट की अशोक गहलोत से किसी बात को लेकर वाद-विवाद था और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन गहलोत और उनके समर्थकों ने पार्टी के भविष्य को ही दांव पर लगा दिया और आलाकमान मूक दर्शक बना देखता रहा। अब स्थिति ऐसी है कि अगर भाजपा सचिन का समर्थन न भी ले कोई फर्क नहीं, क्योकि सदन में अब सबसे ज्यादा सीटें भाजपा की हैं। 


कांग्रेस ने उन सभी विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया, जो आज जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उपस्थित नहीं थे। सचिन पायलट भी इस बैठक में मौजूद नहीं थे। बैठक में अशोक गहलोत का समर्थन जयपुर में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में कांग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन किया।
राजस्थान राज्य में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत छेड़ दी है। सचिन पायलट ने पार्टी पर उनकी भूमिका की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की योजना बना रही है, जबकि राजस्थान के डिप्टी सीएम खुद अपने समर्थन में 30 विधायकों का दावा करने के लिए और अधिक विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वह विपक्षी दल के समक्ष अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।
राजस्थान कांग्रेस के विधायक भंवरलाल शर्मा का दावा है कि सचिन पायलट के समर्थन में इस समय 22 विधायक और इन समर्थक विधायकों की सचिन पायलट को सीएम बनाने की माँग है। जबकि, कांग्रेस के ही कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट को 15-17 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
सीएलपी की बैठक शुरू होने से पहले, सचिन पायलट खेमे के विधायकों ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस में रहना अशोक गहलोत का गुलाम होने के समान है। इन विधायकों ने भी सचिन पायलेट के साथ सीएलपी की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया है।
कांग्रेस में चल रहा डर का माहौल 
अपने तीसरे कार्यकाल में अशोक गहलोत असुरक्षित महसूस कर रहे थे क्योंकि सचिन पायलट ने राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश मुखिया के रूप में खासी मेहनत की थी। उन्होंने चुनाव के दौरान भी अपने लोगों के नाम टिकट के दावेदारों के रूप में आगे बढ़ाया था।
गहलोत पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं क्योंकि 2008 में सीपी जोशी के 1 वोट से चुनाव हारने के कारण उन्हें सीएम पद की कुर्सी नहीं मिल पाई थी और गहलोत की किस्मत चमक गई थी।
मध्य प्रदेश में सिंधिया की बगावत के बाद भी राजस्थान में विधायकों को होटल में डाला गया था। अशोक गहलोत ने अंत में सरकारी मशीनरी का उपयोग कर के अपने विरोधियों को चोट पहुँचाने की कोशिश की लेकिन उनका दाँव उलटा पड़ता हुआ भी दिखा। पार्टी के पुराने वफादार अब भी अशोक गहलोत के साथ ही हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रियंका के हस्तक्षेप पर पायलट से पार्टी ने फिर से बातचीत शुरू की है।
उधर राजस्थान में सियासी संकट के बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 102 विधायकों के समर्थन के दावे को ‘गलत’ बताया है। उन्होंने यह बातें समाचार चैनल आज तक से बातचीत में कही।

राजस्थान : सचिन पायलट के बगावती तेवर : 'हीरों' से विहीन होती जा रही कांग्रेस

Image may contain: 3 peopleडॉ राकेश कुमार आर्य, संपादक : उगता भारत
कांग्रेस के लिए कुछ समय पहले जो मध्यप्रदेश में हुआ था वही अब राजस्थान में होने वाला है । मध्यप्रदेश में जिस प्रकार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का 'हाथ' झटक कर बीजेपी का दामन थामा था , अब उसी राह पर राजस्थान में सचिन पायलट भी चल पड़े हैं । सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही कांग्रेस के युवा चेहरे रहे हैं । दोनों की ही देश के मतदाताओं में एक ऐसी छवि है जो कांग्रेस का बेड़ा पार करा सकती थी , परंतु कांग्रेस के राहुल गांधी ने अपनी कुर्सी के खिसक जाने के भय से इन दोनों युवाओं का 'उचित सम्मान' नहीं किया। उसी का परिणाम है कि दोनों अपने आपको उसी समय से उपेक्षित अनुभव कर रहे थे , जिस समय से इन दोनों प्रदेशों में कांग्रेस की सरकार बनी थी । यह दोनों ही नेता कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे परंतु कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व ने 'निजी भय' के कारण इन दोनों को सत्ता न देकर बुड्ढे हाथों में सत्ता की कमान सौंप दी ।
तभी से दोनों के भीतर विद्रोह का भाव विकसित हो रहा था । जिसे समय के अनुसार भाजपा ने हवा देनी आरम्भ की। उसी का परिणाम है कि आज ज्योतिरादित्य सिंधिया तो पार्टी का हाथ छोड़कर चले ही गए हैं अब सचिन पायलट भी उसी राह पर चल पड़े हैं ।
हम सब यह भली प्रकार जानते हैं कि कांग्रेस में जिस समय इन दोनों युवा नेताओं के अर्थात माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट एक अच्छे चेहरे के रूप में कार्य कर रहे थे , उस समय उनकी उपेक्षा भी कांग्रेस आलाकमान ने इसी प्रकार की थी। क्योंकि कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व को इन दोनों के पिताओं से भी वैसा ही खतरा था जैसा वर्तमान में कांग्रेस के आलाकमान को इन दोनों से है ।
कॉन्ग्रेस के बारे में यह सच है कि यह प्रारंभ से ही चाटुकारों की पार्टी रही है । एक ही व्यक्ति के लिए सत्ता का जुगाड़ बनाए रखना और एक ही परिवार की परिक्रमा करते रहना इस पार्टी का संस्कार बन गया है। इसी कुसंस्कार के कारण यह पार्टी वर्तमान दुर्दशा को प्राप्त हुई है। इसी चाटुकारिता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अभी कांग्रेस के दिग्विजयसिंह ने कहा है कि जिन लोगों का पार्टी में मन नहीं लग रहा है वह पार्टी से जा सकते हैं। कहने का अभिप्राय है कि इस नेता ने अभी भी यह नहीं कहा कि राजस्थान की जनता ने सचिन पायलट को अपना मुख्यमंत्री मानकर कांग्रेस को सपोर्ट किया था , इसलिए उस कुर्सी पर पहला अधिकार सचिन पायलट का है। अतः कांग्रेस आलाकमान को चाहिए कि जन भावना का सम्मान करते हुए राजस्थान की कुर्सी सचिन पायलट को सौंपे । कांग्रेस अपनी मूर्खताओं के कारण मध्य प्रदेश को गंवा चुकी है और अब राजस्थान को गंवाने की कगार पर है। आखिर कांग्रेस कहां जाकर रुकेगी ?
वैसे सच यह है कि जब किसी संस्था , परिवार , समाज ,राष्ट्र या किसी राजवंश के पतन के क्षण आते हैं तो बुद्धि इसी प्रकार की हो जाया करती है जैसी इस समय कांग्रेस के आलाकमान और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की हो चुकी है। तनिक याद करें इस परिवार ने युग - युगों तक अपने आप को सत्ता में बनाए रखने के लिए कितने बड़े - बड़े प्रबंध किए ? जेएनयू जैसी संस्था को अपने लिए कार्यकर्ता पैदा करने की कारखाना बनाया , अनेकों स्थानों पर अपने ही परिवार के लोगों के नाम पर संस्थाओं के नाम रखें, शैक्षणिक संस्थाओं में नेहरू गांधी को पढ़ा - पढ़ा कर ऐसा जुगाड़ बनाया कि यहां से सभी विद्यार्थी कांग्रेस मानसिकता के बनकर निकलें , करोड़ों अरबों के घोटाले किए - केवल इसलिए कि चुनाव में जीतने में कोई व्यवधान न आए , जातिवाद , संप्रदायवाद, आरक्षण आदि के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास किया , केवल इसलिए कि सत्ता का जुगाड़ बना रहे , लेकिन परिणाम क्या निकला ? केवल पतन । इसका अभिप्राय है कि पैसा , जुगाड़ , प्रभाव - ये सब सत्ता में टिके रहने के आधार नहीं हैं , बल्कि व्यक्तिगत चरित्र और व्यक्ति का कृतित्व ही उसे सत्ता में बनाए रखने में सहायक होता है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट में चाहे कितनी भी कमी हों , पर वे राहुल गांधी से बेहतर नेता हैं । भीड़ उनके साथ जुड़ सकती है । उनके पास चेहरा , चाल , चरित्र आदि सभी कहीं राहुल गांधी से बेहतर है । ऐसे चेहरों को खोकर कांग्रेस अपने लिए बहुत बड़ी खाई खोद रही है। सबसे बड़ी मूर्खता कांग्रेस की यह है कि इस खाई को वह राहुल गांधी के कंधों पर बैठकर कूदने की कोशिश कर रही है । जबकि राहुल गांधी इस खाई को कूदने में सर्वथा अक्षम सिद्ध हो चुके हैं । वह अपने आप तो इस खाई में गिर ही जाएंगे पार्टी को भी ले कर डूबेंगे। समय रहते कांग्रेस को सावधान होना होगा । यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी प्रधानमंत्री को बेलगाम खुला नहीं छोड़ना चाहिए । उस पर विपक्ष की मजबूत लगाम लगाए रखने के लिए विपक्ष का मजबूत होना भी आवश्यक है , लेकिन यह तभी संभव है जब राहुल गांधी जैसा अक्षम और कमजोर नेता ना होकर विपक्ष के पास भी कोई मजबूत 'मोदी' हो ,क्योंकि 'मोदी होगा तो मुमकिन होगा।' कहावत भी है कि लोहा ही तो लोहे को काटता है। जितना कद्दावर मजबूत नेता आपके सामने खड़ा हो , उसके लिए उतना ही मजबूत और कद्दावर नेता आपके पास होना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को यह पता होना चाहिए कि 'हीरे' खोए नहीं जाते हैं , बल्कि 'हीरे' तो तराशे जाते हैं। पर 'पार्टी विद डिफरेंस' का नारा देकर आदर्शों की राजनीति करने वाली भाजपा को भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि दूसरों के 'हीरों' को चुराओगे तो मार्केट में 'चोर' कहलाओगे।

राजस्थान के डिप्टी CM सचिन पायलट से ज्यादा कमाती हैं पत्नी सारा

'कहते हैं हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है।' कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट के साथ भी कुछ ऐसा ही है। राजस्‍थान में कांग्रेस की जीत के जादूगर और अब राजस्थान के डिप्टी सीएम बने युवा नेता सचिन पायलट की पर्सनल लाइफ भी काफी रोचक है। सचिन ने कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह की बेटी सारा अब्‍दुल्‍लाह से शादी की है। खूबसूरती के मामले में कई एक्ट्रेस को टक्कर देने वालीं सारा काफी ग्लैमरस हैं।
पति से ज्यादा है सारा की आमदनी
विधानसभा चुनाव से पहले पायलट की ओर से दिए गए एफिडेविट में उन्होंने अपनी संपत्ति 5 करोड़ घोषित की थी। एफिडेविट के अनुसार सचिन की आमदनी पत्नी सारा से काफी कम है। उनकी इनकम 10 लाख रुपए बताई गई है। जबकि, सारा पायलट की आमदनी सोशल वर्क से ही सालाना 19 लाख रुपए से ज्यादा की है।
योगा इंस्ट्रक्टर हैं सारा
सचिन के इस मुश्किल सफर में उनकी पत्नी सारा पायलट की भूमिका भी बहुत अहम हैं। सारा पायलट ने परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठा रखा हैं और यही कारण है कि सचिन पार्टी के कामकाज पर पूरा फोकस कर पाए हैं। बता दें कि, सारा सोशल वर्कर के साथ एक ट्रेंड योगा इंस्ट्रक्टर भी हैं।
एक वक्त था जब सारा और सचिन की लव स्टोरी खूब चर्चा में रही थी। कई कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद सचिन और सारा ने 15 जनवरी 2004 में एक सादे समारोह में शादी की थी।
चुनाव जीतने के बाद खुश हुए थे सारा के पिता
एक इंटरव्यू में सारा ने बताया था कि, हमारी शादी आसान नहीं थी। शादी से पहले सचिन ने कभी राजनीति में करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन, पिता राजेश पायलट की मौत के बाद उन्हें राजनीति में आना पड़ा। शादी के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने राजनीति ज्वाइन कर ली और इलेक्शन भी लड़ा। उस इलेक्शन में उन्हें जीत हासिल हुई और मेरे पिता ने भी उन्हें दामाद के रूप में स्वीकार कर लिया। सारा का साथ पाकर सचिन राजनीति में तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए। सारा पायलट और सच‍िन पायलट के दो बेटे हैं जिनका नाम आरान और वीहान है।
सचिन बने सबसे कम उम्र में सांसद
राजस्‍थान में कांग्रेस की राजनीति के युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं सचिन पायलट का जन्म 7 सितंबर 1977 को यूपी के सहारनपुर में हुआ है। उनके पिता राजेश पायलट भी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं।