Showing posts with label school. Show all posts
Showing posts with label school. Show all posts

ब्रिटेन : छात्रा की नमाज बैन के खिलाफ अपील खारिज; स्कूल के नियम नहीं पसंद तो छोड़ दो जाना : भारत में मचा था बड़ा बवाल

ब्रिटेन में एक स्कूल की मुस्लिम छात्रा ने स्कूल परिसर में नमाज बैन के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की, जिस पर उसे झटका लगा है। हाई कोर्ट ने छात्रा की अपील की खारिज कर दिया और साफ कहा कि अगर स्कूल में पढ़ना है तो स्कूल के नियमों के हिसाब से ही चलना होगा। अगर स्कूल का कोई भी नियम छात्रा या उसके माता-पिता को नहीं पसंद तो वो स्कूल छोड़ने के लिए आजाद हैं।

ये मामला ब्रिटेन के सबसे सख्त स्कूलों में से एक ब्रेंट में स्थिल मिशेला कम्यूनिटी स्कूल से जुड़ा है। इस स्कूल में धार्मिक शिक्षा पर सख्ती से रोक है। इस स्कूल के कंपाउंड में किसी भी तरह के धार्मिक कार्य करने पर रोक है। इस स्कूल में 700 बच्चे पढ़ते हैं, जिसमें आधे से अधिक मुस्लिम हैं। इस स्कूल में नमाज पर बैन लगाने के बावजूद मार्च 2023 में 30 स्कूली बच्चों ने अपना स्वेटर बिछाया और उसपर नमाज पढ़ी। इसके बाद स्कूल ने कड़ा कदम उठाया और सभी को चेतावनी दी। इसी के बाद स्कूली छात्रा ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

इस मामले में हाई कोर्ट की जस्टिस लिंडेन ने 83 पेजों के फैसले में कहा कि इस स्कूल में एडमिशन से पहले सभी बच्चों और उनके माता-पिता को बताया जाता है कि इस स्कूल में धार्मिक क्रिया कलापों की कोई जगह नहीं है। इस स्कूल को गैर आस्था स्कूल के तौर पर बनाया गया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद संस्थापक और मुख्य शिक्षक कैथरीन बीरबलसिंह ने कहा कि यह फैसला “सभी स्कूलों की जीत” है।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्कूल ने कहा, “स्कूलों को एक बच्चे और उसकी माँ को अपना दृष्टिकोण बदलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्होंने फैसला किया है कि उन्हें स्कूल में कुछ पसंद नहीं है। अगर माता-पिता को मिशेला जैसी चीज़ पसंद नहीं है, तो उन्हें अपने बच्चों को हमारे पास भेजने की ज़रूरत नहीं है।”

भारत में हिजाब को लेकर हुआ था जबरदस्त बवाल

फरवरी 2022 में कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी कॉलेज में क्लासरूम में हिजाब पहनने पर बैन लगाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इस नियम को और भी कई संस्थानों ने लागू कर दिया और बाद में उस समय की बसवराज बोम्मई सरकार ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश में शैक्षिक संस्थानों के अंदर हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया गया था। आदेश में कहा गया कि ऐसी ड्रेसिंग को अनुमति नहीं दी जाएगी, जो समानता, अखंडता और सार्वजनिक कानून व्यवस्था को खराब करे। आदेश को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके चलते कुछ दिनों के लिए शैक्षिक संस्थानों को बंद करना पड़ा।
फिर यह मामला हाईकोर्ट पहुँचा और 15 मार्च, 2022 को फैसला आया। हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने राज्य सरकार के इस आदेश को भी सही ठहराया कि स्कूल-कॉलेज में यूनिफॉर्म का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुँचा था और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हालाँकि 2023 में विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत हुई सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद सिद्धारमैया ने स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनने पर लगे बैन को हटा दिया।

बिहार : यूनिफॉर्म के लिए ले लेती हैं सरकारी पैसा लेकिन स्कूल आती हैं हिजाब-बुर्का पहन : मना करने पर प्रधानाध्यापक को हत्या की धमकी, स्कूल में करेंगे तालाबंदी

                                स्कूल में यूनिफॉर्म की जगह बुर्का-हिजाब? (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बिहार के शेखपुरा जिले के एक स्कूल में प्रधानाध्यापक को छात्राओं को हिजाब की जगह स्कूल ड्रेस में आने को कहना भारी पड़ गया। उनकी इस बात से नाराज मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिजाब न पहनने देने पर स्कूल में ही ताला लटकाने की धमकी दी। प्रधानाध्यापक को भी हत्या की धमकी दे डाली।

सरकार को छात्राओं की इस धमकी को गंभीरता लेना चाहिए। धमकी देने वाली छात्राओं को पुलिस हिरासत में लेकर, उन्हें उकसाने वाले कौन-कौन हैं? केवल बच्चा समझ कर हलके में लेकर नहीं छोड़ना चाहिए। इसके पीछे छुपे षड़यंत्र को बेनकाब करना होगा। दूसरे, BPL सुविधा लेने वालों के घर के बाहर BPLस्टीकर लगाने के साथ-साथ बैंक खाते की जाँच कर उनकी आर्थिक स्थिति की भी जाँच जरुरी है।  

प्रधानाध्यापक सत्येंद्र चौधरी ने इस विद्यालय की कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर आने से मना किया था। उनकी इस बात पर खासा बवाल खड़ा हो गया। गुस्साए मुस्लिम समुदाय के लोग 29 नवंबर 2023 को विद्यालय में घुस आए। उन्होंने प्रधानाध्यापक चौधरी को जान से मारने की धमकी देने के साथ ही स्कूल बंद करने की चेतावनी दी।

इस पूरे मामले को लेकर प्रधानाध्यापक चौधरी का कहना है कि जब-जब छात्राओं को विद्यालय में बुर्का और हिजाब की जगह स्कूल ड्रेस पहनकर आने के लिए कहा जाता है, तब-तब मुस्लिम अभिभावक आकर धमकी देते हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानाध्यापक सत्येंद्र कुमार चौधरी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी को अलग-अलग पत्र लिखकर सुरक्षा की माँग की है।

शेखपुरा जिले के शेखोपुरसराय पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चरुआवां से संबंधित इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि यह बेहद गंभीर मामला है और विद्यालय में नियमों के मुताबिक ड्रेस पहनकर आना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि इस घटना के बारे में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को जाँच करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले पर ऑपइंडिया ने शनिवार (2 दिसंबर,2023) को जिला शिक्षा पदाधिकारी ओम प्रकाश सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि इस मामले की जाँच को लेकर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रमेश प्रसाद को विद्यालय में दोनों पक्षों के साथ बैठक के लिए भेजा गया है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानाध्यापक सत्येंद्र कुमार का पत्र मिला है, उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन से भी बात करेंगे।

इसे लेकर शिक्षक संघ ने भी प्रधानाध्यापक के जानमाल की सुरक्षा और सरकारी विद्यालयों में सरकारी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की माँग की है। जिस स्कूल में ये घटना हुई है, वो जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है।

इस स्कूल में मुस्लिम छात्र-छात्राओं की अच्छी खासी तादाद है। सरकारी योजना के तहत सभी को स्कूली ड्रेस के लिए पैसे मिलते हैं। छपी रिपोर्ट और प्रधानाध्यापक सत्येंद्र कुमार चौधरी के आरोप के अनुसार मुस्लिम छात्राएँ स्कूल ड्रेस की जगह हिजाब और बुर्का पहन स्कूल पहुँचती हैं।

गाँव के मुस्लिमों ने इसे अपने मजहब और दीन से जुड़ा मामला बताते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों पर इसे जरूरत से अधिक तूल देने का आरोप जड़ा है। गाँव के पूर्व मुखिया और ग्रामीण मोहम्मद असलम ने विवाद बढ़ने के हालात में स्कूल में ताला लगाने की चेतावनी दी है।

मोहम्मद असलम का कहना है कि उनके बच्चे क्या पहनेंगे, यह तय करने वाला प्रधानाध्यापक कौन होता है? उसके अनुसार इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी से मुलाकात कर सारी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। उसने बताया कि वो जिला शिक्षा पदाधिकारी से यह भी कह चुका है कि हिजाब और बुर्का मुस्लिमों का निजी मामला है, इससे छेड़छाड़ न की जाए और न ही विवाद को गैरजरूरी तूल दिया जाए।

महाराष्ट्र : मिलिया स्कूल की शिक्षिकाओं के साथ मास्टर आमेर काजी का अश्लील वीडियो वायरल: बीवी ने ही बताया चरित्रहीन, आरोप – स्कूल प्रबंधन करता है सपोर्ट

बीड में मिलिया स्कूल के मास्टर आमेर काजी (बाएँ) के महिला टीचरों संग अश्लील वीडियो वायरल (साभार- ABP न्यूज़)
महाराष्ट्र के बीड जिले में मिलिया सेकेंड्री स्कूल में पढ़ाने वाले एक टीचर का MMS कांड सामने आया है। आरोपित का नाम आमेर काजी है जो अलग-अलग MMS में 3 महिलाओं के साथ दिख रहा है। ये महिलाएँ स्कूल में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाएँ हैं। इन MMS को पोर्न साइट पर अपलोड भी कर दिया गया था। स्कूल की प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने आमेर क़ाज़ी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद आमेर काजी फरार है। वहीं स्कूल प्रशासन ने 3 महिला टीचरों को सस्पेंड भी कर दिया है। आमेर क़ाज़ी की बीवी भी सामने आई है और अपने शौहर पर चरित्रहीन होने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बीड जिले के थानाक्षेत्र सिटी कोतवाली का है। यहाँ अंजुमन इशत ए तालीम नाम की संस्था के अंतर्गत मिलिया स्कूल संचालित होता है। स्कूल में 23 महिला और लगभग 46 पुरुष टीचर नौकरी करते हैं। इसी स्कूल में आमेर काजी साल 2012 से टीचर के तौर पर नौकरी करता है। 16 साल पहले निकाह करने वाले बाल-बच्चेदार आमेर काजी की बीवी का आरोप है कि साल 2012 से ही उन्हें अपने शौहर की हरकतों पर शक था। शुरू में आमेर काजी ने अपनी बीवी को गुमराह किया लेकिन बाद में उसने अपनी करतूतों का कबूलनामा कर लिया।

आमिर काजी की बीवी का आरोप है कि एक दिन उसके शौहर ने खुल कर अपने कई लड़कियों से अवैध संबंध कबूल कर लिया। साथ ही अपनी बीवी को सब कुछ जान कर भी एडजस्ट करने की नसीहत दी। आमेर की बीवी अपने शौहर की करतूतों की शिकायत स्कूल प्रबंधन की महिला अधिकारी सबीहा से 1 साल से कर रही थीं। हालाँकि सबीहा आमेर की बीवी से ही सबूत माँगने लगती थीं। इस बीच आमेर के लैपटॉप से उसकी बीवी ने कई महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में अपने शौहर के फोटो-वीडियो अपनी पेन ड्राइव में सेव कर लिए।

इन तस्वीरों और वीडियो में आमेर स्कूल की 3 टीचरों के साथ आपत्तिजनक हालत में दिख रहे थे। आमेर की बीवी का आरोप है कि सबीहा को तमाम सबूत देने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। यहाँ तक कि उन्होंने आमेर की बीवी को दूसरी बीवियों के साथ एडजस्ट करने की भी सलाह दे डाली। जब आमेर की बीवी आर्थिक तंगी में सबीहा से पैसे दिलाने की माँग करतीं थीं तब इसे घरेलू मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया जाता था। आमेर की बीवी ने स्कूल पर भी गलत काम चलाने और गलत हरकतों का सपोर्ट करने का आरोप लगाया है।

आमेर की बीवी को इस बात की भी आशंका है कि स्कूल ही नहीं बल्कि उनके शौहर घर में भी लड़कियों को लाते थे। जब वो अपने शौहर की हरकतों का विरोध करती थीं तब उन्हें धमकियाँ दी जाती थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सामने आए वीडियो आपसी सहमति से बनाए लग रहे हैं। आमेर द्वारा स्कूल में 3 महिला टीचरों के साथ न सिर्फ अश्लील हरकतें की गईं बल्कि शारीरिक संबंध भी बनाए गए। थोड़े समय बाद ये सभी वीडियो पोर्न साइट पर अपलोड कर दिए गए। यहाँ से वीडियो वायरल हो गए जो स्कूल की प्रिंसिपल की जानकारी में भी आए।

प्रिंसिपल ने बीड शहर थाने में आमेर काजी के खिलाफ केस दर्ज कराया। यह केस IPC की धारा 292 (2), 294, 500 के साथ IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि आमेर काजी अपने अश्लील वीडियो को पोर्न साइटों पर बेच देता था। केस दर्ज होने के बाद आमेर काजी फरार हो गया है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि आमेर काजी के अन्य कितनी महिलाओं से संबंध हैं। स्कूल प्रशासन ने भी वीडियो में दिख रहीं तीनों महिला टीचरों को सस्पेंड कर दिया है।


इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ बिहार : जुमे पर स्कूल बंद रख सकते हैं , नीतीश सरकार ने हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ घटाई; ईद-मुहर्रम की बढ़ाई


बीते साल बिहार के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार यानी जुमे के दिन होने का मामला सामने आया था। ऐसा बगैर किसी आधिकारिक आदेश के हो रहा था। लेकिन अब बिहार की जदूय-राजद सरकार ने स्कूलों में शुक्रवार के साप्ताहिक आदेश को ‘आधिकारिक’ रूप दे दिया है।

बिहार के शिक्षा विभाग ने साल 2024 के लिए स्कूलों का छुट्टी कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें बड़े फेरबदल देखने को मिले हैं। 2023 में सरकारी स्कूलों में रविवार सहित 64 दिन की छुट्टी थी। 2024 में रविवार सहित कुल 60 छुट्टी ही मिलेंगे। एक तरफ हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ कम कर दी गई है तो दूसरी ओर ईद-मुहर्रम की छुट्टी बढ़ा दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार उर्दू प्राथमिक/मध्य/ माध्यमिक/उच्च माध्यमिक या मकतब रविवार को खुले रहेंगे। इन जगहों पर साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होंगे। इतना ही नहीं मुस्लिम बहुल इलाकों में चलने वाले अन्य सरकारी स्कूल भी साप्ताहिक अवकाश अब शुक्रवार को रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवल जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

                                                 लाइव हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर का अंश
          दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर। लाल घेरे में आप स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी से जुड़ी जानकारी पढ़ सकते है

2024 में सरकारी स्कूलों के लिए नीतीश सरकार ने छुट्टी का जो कैलेंडर जारी किया है उससे पता चलता है कि रामनवमी, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और रक्षाबंधन जैसी छुट्टियाँ हटा दी गई हैं। वहीं बकरीद और मुहर्रम पर छुट्टी एक-एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है। यह कैलेंडर बिहार के कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यालयों पर लागू होगा।

 2023 में तीज पर दो दिन और जिउतिया पर एक दिन की छुट्टी थी, जो अब नहीं मिलेगी। दीपावली पर भी मात्र एक दिन की छुट्टी दी गई है। राज्य में इससे पहले अशोक अष्टमी और अंतिम श्रावणी की छुट्टी भी होती थी, लेकिन इस बार इन्हें भी रद्द किया गया है। भाईदूज और मकर संक्रान्ति जैसे त्योहारों की कोई छुट्टी नहीं होगी।

                                                        बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

इसके उलट 2024 में बकरीद की तीन दिन की जबकि मोहर्रम की दो दिन छुट्टी रहेगी। वर्ष 2023 में यह छुट्टियाँ क्रमशः 2 और 1 दिन थीं। इनमें इजाफा किया गया है। साथ ही ईद की भी छुट्टी भी तीन दिनों की होगी। शब ए बारात और चेहल्लुम जैसे मुस्लिम त्यौहारों के साथ नए कैलेंडर में मुस्लिमों के कुल 6 त्योहारों पर कुल 10 दिनों की छुट्टी दी गई है।

                                                             बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

कैलेंडर में हिन्दुओं के मात्र 4 त्योहार शामिल किए गए हैं जिनके लिए कुल 9 दिनों की छुट्टी घोषित की गई है। महापुरुषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों को भी बंद किया गया है। नए आदेश में कहा गया है कि इन पर छुट्टी ना होकर भोजनावकाश तक पढ़ाई और फिर उनके बारे में चर्चा होगी। बिहार में गाँधी जयंती की भी छुट्टी नहीं होगी।

नीतीश सरकार के इस फरमान को भारतीय जनता पार्टी ने ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ बिहार‘ बताया है।

बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि नीतीश सरकार तुष्टिकरण के चलते ऐसा कर रही है।

राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी ने इसे हिन्दुओं को जातियों में बाँटने और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति बताया है।

उत्तर प्रदेश : शिक्षा जगत में नई क्रांति : A फॉर अर्जुन, B फॉर बलराम…, अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का भी ज्ञान

                                     लखनऊ का अमीनाबाद इंटर कॉलेज (फोटो साभार: ANI)
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक स्कूल ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए बच्चों के पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है। उस स्कूल में बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय की जगह A फॉर अर्जुन और B से बलराम पढ़ाया जा रहा है। स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि इस पद्धति से बच्चों को पौराणिक और ऐतिहासिक ज्ञान मिलेगा।

सोशल मीडिया पर इस किताब की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इसके साथ ही यूजर स्कूल और प्रधानाचार्य के इस पहल की तारीफ कर रहे हैं। वायरल हो रही किताब में A से लेकर Z तक के शब्दों के मतलब भारतीय पौराणिक इतिहास के संदर्भ में बताया जा रहा है।

लखनऊ के जिस स्कूल ने यह पहल की है, उसका नाम अमीनाबाद इंटर कॉलेज है। लगभग 125 साल पुराना यह स्कूल अमीनाबाद में स्थित है। किताब में  ABCD का अर्थ चित्र के साथ वर्णन किया गया है। बच्चों को पढ़ाया जा रहा है- A फॉर अर्जुन इज अ ग्रेट वॉरियर। ऐसे ही B फॉर का मतलब बलराम इज ब्रदर ऑफ कृष्णा बताया जा रहा है।

स्कूल के प्रधानचार्य साहेब लाल मिश्रा का कहना है कि बच्चों को आजकल भारतीय संस्कृति के बारे में कम जानकारी है। उनके ज्ञान को बढ़ाने के लिए यह पहल की गई है। इससे छात्रों को भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी मिलेगी।

स्कूल नगर निगम द्वारा संचालित है और 1897 में स्थापित इस स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि यह किताब PDF फॉरमेट भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी वर्णमाला की तरह ही हिंदी वर्णमाला के लिए भी ऐसे प्रारूप तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हिंदी में अधिक अक्षर हैं, इसलिए इसकी प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा है।

कर्नाटक :हिजाब के बाद अब स्कूलों में नमाज की जिद

                                                   कर्नाटक के स्कूलों में नमाज (फोटो साभार: TOI/CNN)
जब सडकों पर नमाज़ पढ़ने की जिद हो रही थी, तभी तत्कालीन और वर्तमान सरकार और नेताओं को वोट बैंक राजनीति को छोड़ कट्टरपंथियों के षड़यंत्र को समझने की जरुरत थी। आखिर छद्दम सेकुलरिज्म के नाम पर कब तक जनता को पागल बनाया जाता रहेगा? क्योकि भारत में सेकुलरिज्म one way traffic के समान है, जो केवल हिन्दुओं पर लागु किया जाता है, अन्यों पर नहीं, क्यों? अगर भारत में जयचंदों की कमी नहीं है तो मीर ज़ाफरों की भी नहीं। 
जब CAA के विरोध में जगह-जगह बने शाहीन बागों में हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाज़ी हो रही थी, तब जयचंदी उनके सुर में सुर मिलाते नज़र आये, सेकुलरिज्म और संविधान का पाठ पढ़ाने वाली पार्टियों और नेताओं ने भी हिन्दुत्व विरोधी नारों को नज़रअंदाज़ करते रहे, क्यों?  

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के आह्वान के बाद कर्नाटक के उडुपी में सामने आए हिजाब विवाद के बाद राज्य के कई इलाकों में इस तरह की कट्टरपंथी सोच वाली घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। राज्य के कई इलाकों के स्कूलों में मुस्लिम छात्र-छात्राओं द्वारा नमाज पढ़ने की घटनाएँ सामने आई हैं।

कर्नाटक बगलकोट जिले के एक स्कूल में 6 विद्यार्थी स्कूल में ही नमाज पढ़ने लगे, इसको लेकर बवाल हो गया है। स्कूल में नमाज पढ़ने देने पर स्थानीय लोग भड़क गए। हालाँकि, कहा जा रहा है कि स्कूल द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के बावजूद स्कूल में नमाज पढ़ते देखे गए। सीएनएन न्यूज18 के वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कुछ छात्राएँ स्कूल के बरामदे में ही नमाज पढ़ रही हैं।

वहीं, मंगलुरु के कडबा तालुका के अनकथाडका स्थित गवर्नमेंट हायर प्राइमरी स्कूल में नमाज पढ़ने की घटना सामने आई है। इस स्कूल के क्लासरूम में ही छात्र नमाज पढ़ने लगे। मुस्लिम विद्यार्थियों द्वारा नमाज पढ़ने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

यह वीडियो 4 फरवरी की बताई जा रही है। इस वीडियो में नमाज पढ़ते दिखने वाले बच्चे कक्षा पाँच और छह में पढ़ते हैं। मामला तब लोगों की नजर में आया जब इसका वीडियो क्लिप वायरल हुआ है। वीडियो देखने के बाद स्थानीय लोगों ने इस घटना का विरोध करना शुरू कर दिया। मामला तूल पकड़ता देख राज्य के शिक्षा विभाग ने शुक्रवार (11 फरवरी) को स्कूल का दौरा किया।

फरवरी 11 को पढ़े गए नमाज के संबंध में स्कूल के शिक्षकों को जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे ही इस संबंध में उन्हें जानकारी मिली स्कूल प्रशासन ने सभी छात्रों को क्लासरूम के भीतर धार्मिक गतिविधियों ना करने की चेतावनी जारी कर दी।

इतना ही नहीं, इनमें से स्कूल के कुछ मुस्लिमों विद्यार्थियों के परिजनों ने स्कूल प्रशासन से जुमे की नमाज के लिए अनुमति देने की माँग की। उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज (शुक्रवार की नमाज) के लिए उनके बच्चों को स्थानीय मस्जिदों में जाने की अनुमति दी जाए।

अवलोकन करें:-

कर्नाटक बुर्का विवाद : ‘एक नया मुस्लिम राष्ट्र ‘उर्दिस्तान’ बनाओ’: खालिस्तानी आतंकी संगठन, पन्

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
कर्नाटक बुर्का विवाद : ‘एक नया मुस्लिम राष्ट्र ‘उर्दिस्तान’ बनाओ’: खालिस्तानी आतंकी संगठन, पन्

कर्नाटक में बढ़ता कट्टरपंथ

ये पहली बार नहीं है कि स्कूलों में नमाज पढ़ने की घटना सामने आई है। राज्य कोलार के एक सरकारी स्कूल के करीब 20 मुस्लिम छात्र स्कूल क्लास में नमाज (Namaz) अता करते देखे गए थे। बताया गया था कि इन छात्रों को शुक्रवार (21 जनवरी 2022) की नमाज के लिए स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने इजाजत दी थी। स्कूल की कक्षा में नमाज पढ़ने की भनक लगने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था।
मुलबगल सोमेस्वरा पलाया बाले चंगप्पा सरकारी कन्नड़ मॉडल हायर प्राइमरी स्कूल (Mulbagal Someswara Palaya Bale Changappa Government Kannada Model Higher Primary School) की इस घटना के बाद प्रधानाध्यापिका उमा देवी को सस्पेंड कर दिया गया था।

राजस्थान : नशे में धुत टीचर ने छात्राओं के सामने उतारे कपड़े

                                नशे में धुत टीचर ने छात्राओं के सामने उतारे कपड़े (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
राजस्थान में उदयपुर जिले के कोटड़ा क्षेत्र के एक शराबी टीचर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नशे में धुत टीचर ने ना केवल स्कूल में छात्र-छात्राओं के सामने अपने कपड़े उतारे, बल्कि तीन घंटे तक उत्पात मचाते हुए स्टाफ और ग्रामीणों के साथ मारपीट भी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोटड़ा के खजूरिया स्कूल का पीटीआई (शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक) देवीलाल मीणा दोपहर करीब 12 बजे शराब के नशे में स्कूल पहुँचा। इस दौरान जब प्रिंसिपल आलोक शर्मा और दूसरे शिक्षकों ने उसे रोकने की कोशिश की और समझाया कि आप नशे की हालत में इसलिए घर चले जाएँ। इस पर उसने प्रिंसिपल को नाखूनों से जख्मी कर दिया और साथी शिक्षकों बाबूलाल खेर और भगवतीलाल को दाँतों से काट लिया।

नशे में धुत पीटीआई लगातार सभी को जान से मारने की घमकियाँ दे रहा था। इतना ही नहीं इसके बाद देवीलाल ने एक-एक करके अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया। इस दौरान 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएँ मौजूद थे। टीचर को इस हालत में देखकर कई लड़कियाँ वहाँ से भागने लगी। पीटीआई ने शराब पीकर तीन घंटे तक उत्पात मचाया। वहाँ मौजूद लोगों से गली-गलौच की।

शोर सुनकर जब ग्रामीण स्कूल में पहुँचे तो पीटीआई उनके साथ भी मारपीट करने लगा। हालाँकि, स्थिति काबू में नहीं आने पर इस बारे में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पीटीआई को हिरासत में ले लिया और उसे अपने साथ थाने ले गई।

जानकारी के मुताबिक, पीटीआई टीचर इससे पहले भी कई बार स्कूल मे शराब पीकर हंगामा कर चुका है। पुलिस हर बार उसे पकड़कर ले जाती है और बिना कोई कार्रवाई करे उसे छोड़ देती है। इस मामले में कार्रवाई के लिए प्रिंसिपल आलोक शर्मा ने सीबीईओ, डीईईओ और जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा है। यह मामला अब राजस्थान बाल आयोग तक भी पहुँच गया है।

लम्बी दुरी के स्कूल बना रहे बच्चों को बीमार

अपने स्कूल के दिन हर किसी के लिए यादगार होते ही है. हर कोइ स्कूल में बिताए समय को कभी नहीं भूल सकता. स्कूल की अच्छी और बुरी यादें आज भी आपके जहन में जिंदा होंगी. जिनका ख्याल आते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. इन खट्टी-मिठ्ठी यादों में वो सुबह जल्दी उठना, स्कूल के लिए तैयार होना और कहीं लेट न हो जाए इस डर से जल्दबाजी में स्कूल के लिए भागना भी शामिल है. आज भी मानों, परंपरा के तौर पर बच्चों को स्कूल भेजने का यह सिलसिला जारी है. लेकिन यहां आपको अब सावधान हो जाने की ज़रूरत है. दरअसल, स्कूलों की दूरी और सुबह जल्द लगने वाली कक्षाओं के चलते बच्चे अनिंद्रा के शिकार हो रहे हैं.
मजबूरन जल्द सोकर उठना पड़ता है
दरअसल, स्कूलों की टाइमिंग के कारण बच्चों को जल्द से जल्द सोकर उठना पड़ता है. इससे उनकी नींद पर गहरा असर पड़ रहा है. ऐसे बच्चों का औसत नींद का स्तर सामान्य नींद के स्तर से अधिक हो गया है. जिस वजह से बच्चे करीब एक घंटे तक की कम नींद ले पा रहे है.
नींद पूरी न होने से बीमारियों का खतरा 
नींद पूरी नहीं होने से बच्चों में तनाव, अनिंद्रा, एकाग्रता की कमी और मोटापा का खतरा मंडरा रहा है. जबकि दिन के शिफ्ट वाले स्कूलों में बच्चों की निंद्रा ठीक हो रही है, यानी वे अपनी नींद पूरी ले पा रहे हैं और स्वस्थ भी है.
विषेशज्ञों की रिपोर्टस

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विवि के लाइफ साइंस विभाग के रिसर्च गाइड डॉ. आरके प्रधान एवं स्कॉलर निहारिका सिन्हा के मुताबिक अध्ययन में अनिंद्रा के कारण सुबह शिफ्ट वाले स्कूलों के बच्चों में अनिंद्रा व अन्य जोखिम के संकेत मिले हैं. इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जनरल रिसर्चगेट पर इम्पैक्ट ऑफ कम्युनिकेटिंग डिस्टेंस एंड स्कूल टाइमिंग ऑन स्लीप ऑफ स्कूल स्टूडेंट्स शीर्षक के साथ प्रकाशित किया गया है.
3 से 10 किमी दूरी तक स्कूल
इस अध्ययन के लिए करीब 14 साल के स्कूली बच्चों को चुना गया. इनमें सुबह शिफ्ट में यानी सुबह 7:30 बजे लगने वाले स्कूलों और सुबह 11 बजे लगने वाले रायपुर के स्कूलों से 84-84 बच्चों पर अध्ययन किया गया. इन बच्चों के वजन, ऊंचाई आदि को मापा गया. साथ ही, इनके बेड टाइम और वेक अप टाइम को मापा गया. जो बच्चे सुबह के स्कूल में जाते हैं, उनमें अनिंद्रा की अधिक शिकायत मिली. इससे उनमें भारी तनाव, अत्यधिक निंद्रा, बच्चों में मोटापा भी देखा गया.
स्कूलों की दूरी के मापदंड शहर में फेल
शहर के आउटर में लगने वाले ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत तय किए गए स्कूलों की दूरी के मापदंड को फेल कर दिया गया है. यहां रसूखदार विद्यालयों में पढ़ाने के लिए बच्चों के पेरेंटस बच्चों को 10 से 15 किलोमीटर की दूर भेज रहे हैं. जबकि प्राइमरी स्तर पर अधिकतम दूरी 3 किमी, अपर प्राइमरी स्तर पर 5 किमी और हाई स्तर पर 7 किमी से अधिक दूरी के विद्यालय नहीं होने चाहिए.