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इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ बिहार : जुमे पर स्कूल बंद रख सकते हैं , नीतीश सरकार ने हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ घटाई; ईद-मुहर्रम की बढ़ाई


बीते साल बिहार के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार यानी जुमे के दिन होने का मामला सामने आया था। ऐसा बगैर किसी आधिकारिक आदेश के हो रहा था। लेकिन अब बिहार की जदूय-राजद सरकार ने स्कूलों में शुक्रवार के साप्ताहिक आदेश को ‘आधिकारिक’ रूप दे दिया है।

बिहार के शिक्षा विभाग ने साल 2024 के लिए स्कूलों का छुट्टी कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें बड़े फेरबदल देखने को मिले हैं। 2023 में सरकारी स्कूलों में रविवार सहित 64 दिन की छुट्टी थी। 2024 में रविवार सहित कुल 60 छुट्टी ही मिलेंगे। एक तरफ हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ कम कर दी गई है तो दूसरी ओर ईद-मुहर्रम की छुट्टी बढ़ा दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार उर्दू प्राथमिक/मध्य/ माध्यमिक/उच्च माध्यमिक या मकतब रविवार को खुले रहेंगे। इन जगहों पर साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होंगे। इतना ही नहीं मुस्लिम बहुल इलाकों में चलने वाले अन्य सरकारी स्कूल भी साप्ताहिक अवकाश अब शुक्रवार को रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवल जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

                                                 लाइव हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर का अंश
          दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर। लाल घेरे में आप स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी से जुड़ी जानकारी पढ़ सकते है

2024 में सरकारी स्कूलों के लिए नीतीश सरकार ने छुट्टी का जो कैलेंडर जारी किया है उससे पता चलता है कि रामनवमी, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और रक्षाबंधन जैसी छुट्टियाँ हटा दी गई हैं। वहीं बकरीद और मुहर्रम पर छुट्टी एक-एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है। यह कैलेंडर बिहार के कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यालयों पर लागू होगा।

 2023 में तीज पर दो दिन और जिउतिया पर एक दिन की छुट्टी थी, जो अब नहीं मिलेगी। दीपावली पर भी मात्र एक दिन की छुट्टी दी गई है। राज्य में इससे पहले अशोक अष्टमी और अंतिम श्रावणी की छुट्टी भी होती थी, लेकिन इस बार इन्हें भी रद्द किया गया है। भाईदूज और मकर संक्रान्ति जैसे त्योहारों की कोई छुट्टी नहीं होगी।

                                                        बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

इसके उलट 2024 में बकरीद की तीन दिन की जबकि मोहर्रम की दो दिन छुट्टी रहेगी। वर्ष 2023 में यह छुट्टियाँ क्रमशः 2 और 1 दिन थीं। इनमें इजाफा किया गया है। साथ ही ईद की भी छुट्टी भी तीन दिनों की होगी। शब ए बारात और चेहल्लुम जैसे मुस्लिम त्यौहारों के साथ नए कैलेंडर में मुस्लिमों के कुल 6 त्योहारों पर कुल 10 दिनों की छुट्टी दी गई है।

                                                             बिहार सरकार का छुट्टी कैलेंडर

कैलेंडर में हिन्दुओं के मात्र 4 त्योहार शामिल किए गए हैं जिनके लिए कुल 9 दिनों की छुट्टी घोषित की गई है। महापुरुषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों को भी बंद किया गया है। नए आदेश में कहा गया है कि इन पर छुट्टी ना होकर भोजनावकाश तक पढ़ाई और फिर उनके बारे में चर्चा होगी। बिहार में गाँधी जयंती की भी छुट्टी नहीं होगी।

नीतीश सरकार के इस फरमान को भारतीय जनता पार्टी ने ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ बिहार‘ बताया है।

बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि नीतीश सरकार तुष्टिकरण के चलते ऐसा कर रही है।

राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी ने इसे हिन्दुओं को जातियों में बाँटने और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति बताया है।

उत्तर प्रदेश : जौनपुर में मुहर्रम जुलूस में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारेबाजों को भरना होगा हर्जाना

                                                                                                                     साभार- जौनपुर पुलिस
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में इसी महीने 1 अगस्त को पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी का वीडियो वायरल हुआ था। यह नारेबाजी 29 जुलाई को निकले दशवीं मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुई थी। तब पुलिस ने 33 आरोपितों पर FIR दर्ज करके जेल भेज दिया था। अब इन 33 आरोपितों में से 13 के खिलाफ जिला प्रशासन ने जमीन पर अवैध कब्ज़े की नोटिस जारी की है। शनिवार (12 अगस्त 2023) को जारी इस नोटिस में कब्ज़ा हटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। इसी के साथ सबको मिला कर लगभग 1 करोड़ रुपए का हर्जाना भी लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मीरगंज थानाक्षेत्र के गाँव गोधना और किशुनदासपुर का है। यहाँ बुधवार (9 अगस्त) को राजस्व टीमें आरोपितों की जमीनों की पैमाइश के लिए पहुँचीं। सुरक्षा के लिए टीम के साथ पुलिस बल भी मौजूद था।

पैमाइश के दौरान पाया गया कि मुहर्रम के जुलूस में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले 13 आरोपितों ने ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्ज़ा किया है। जमीन की पैमाइश के बाद शनिवार (12 अगस्त) को मछलीशहर के नायब तहसीलदार संतोष कुमार यादव ने सभी आरोपितों के घर वालों को नोटिस थमा दिया।

इस नोटिस में जमीन कब्ज़ाने के सभी 13 आरोपितों को 15 दिनों के अंदर अतिक्रमण खुद ही हटा लेने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ सबको मिला कर कुल 1 करोड़ रुपए का हर्जाना भी लगाया गया है। हर्जाने की यह राशि न्यूनतम 32 हजार से अधिकतम 19.80 लाख रुपए के बीच में है।

सभी आरोपितों को यह हर्जाना 15 दिनों के अंदर जमा करना होगा। तय समय सीमा में खुद से कब्ज़ा न हटाने और हर्जाने की राशि जमा न करने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

1 अगस्त 2023 को पाकिस्तान समर्थक नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने साहिल अली, ईदू, कैफ, मोहम्मद कैश, मोहम्मद शरीफ, सलीम, दिलशाद, सज्जाक के बेटे संजय, तालिम, नौशाद, मोहम्मद अली, वसीम, अफ़ज़ल, मोहम्मद कैफ, इबरार, आफ़ताब, इरशाद, मुश्ताक, दिलशाद अली, शेर अली, रफीक, इश्तियाक, एजाज, इबनैन, मजीद, सरफराज, कैफ, असलम, महताब, अब्दुल अजीज, मोहम्मद शमीम, इजाज अहमद और मोहम्मद फिरोज को गिरफ्तार किया था। आरोपितों में जौनपुर के साथ प्रयागराज के भी निवासी हैं।

बिहार : मुहर्रम के हो-हल्ला में अशफाक और मो. मुमताज ने किया नाबालिग से गैंगरेप

प्रतीकात्मक चित्र साभार- ekhabarbat.com
बिहार के अररिया जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप किए जाने का मामला सामने आया है। यहाँ मातम मना रहे मोहम्मद अशफाक और मोहम्मद मुमताज नाम के 2 युवकों ने खेत में ले जाकर पीड़िता के साथ तब तक दुष्कर्म किया, जब तक वो बेहोश नहीं हो गई। 

गैंगरेप के कारण बेहोश हो जाने के बाद दोनों आरोपितों ने पीड़ित लड़की को बेहोशी की हालत में वहीं छोड़ दिया था। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। ग्रमीणों ने दोनों आरोपितों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। घटना शुक्रवार (28 जुलाई 2023) रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अररिया जिले के थानाक्षेत्र फारबिसगंज का है। पीड़िता नाबालिग की माँ ने पुलिस में घटना की तहरीर दी है। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात 9 बजे उनकी 17 वर्षीया बेटी मुहर्रम जुलूस में लाठी करतब देखने के लिए घर से बाहर गई थी। मुहर्रम जुलूस के शोर-शराबे के बीच दोनों आरोपितों (मोहम्मद अशफाक और मोहम्मद मुमताज) ने नाबालिग लड़की को जबरदस्ती उठा लिया। खेत में ले जाकर बारी-बारी से रेप किया।

जब परिजनों ने अपनी बच्ची की तलाश की तो वह थोड़ी दूर एक खेत में नग्न हालात में मिली, उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने लड़की की माँ की तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

होश आने पर नाबालिग पीड़िता ने पुलिस को दिए गए अपने बयान में खुद के साथ गैंगरेप होने की जानकारी दी। लड़की ने इसका आरोप अपने ही पड़ोस में रहने वाले मोहम्मद मुमताज और मोहम्मद अशफाक पर लगाया।

पीड़ित लड़की ने बताया कि मुहर्रम के शोर में दोनों आरोपित उसे उठा कर खेत में ले गए। वहीं पर अशफाक और मुमताज ने उसके साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया। कुछ देर में लड़की बेहोश हो गई तो दोनों आरोपित उसे खेत में ही छोड़ कर भाग गए।

पीड़िता बेहोशी की ही हालत में काफी देर तक खेत में पड़ी रही। मामले की जानकारी होने से ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने दोनों आरोपितों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मुहर्रम पर काँवड़ियों के DJ पर बवाल

मुहर्रम के मातम पर या ताजिये के जुलूस में कितना शोर होता है, इसका उदाहरण है किसी नाबालिग लड़की को सरेआम उठा कर ले जाना और गैंगरेप करना। कट्टरपंथी मुस्लिमों की इस भीड़ और इनके सदाबहार वामपंथी कॉमरेडों को यह शोर सुनाई नहीं देती! हाँ काँवड़िए अगर डीजे बजा रहे हों तो इसी भीड़ को दिक्कत हो जाती है, पथराव कर आतंक फैला दिया जाता है।

हैदराबाद : गणेश विसर्जन को प्रतिबंधित करने वाली तेलंगाना पुलिस ने SC के आदेश को धता बता मुहर्रम के जुलूस को अनुमति

तेलंगाना पुलिस मुहर्रम
                                                                                                                      साभार यूट्यूब 
पिछले हफ्ते हैदराबाद में कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों लोग मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में न सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं, बल्कि लोगों ने चेहरे पर मास्क जैसे जरूरी बातों की भी अनदेखी की। बड़ी संख्या में लोग पुराने हैदराबाद में एकत्रित हुए और ‘बीबी का आलम’ जुलूस निकाला। इस दौरान ज्यादातर लोग बिना मास्क के देखे गए।
कोरोना महामारी को देखते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दिन हैदराबाद के पुराने शहर में जुलूस निकालने के लिए इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद यहाँ पर लोगों ने भारी संख्या में जुलूस निकाला।
हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए, सैकड़ों की संख्या वाला यह जुलूस डाबेरपुरा से शुरू हुआ और मुस्लिम बहुल क्षेत्र चारमीनार, गुलजार हुज, पुरानी हवेली और दारुलशिफा से गुजरते हुए चर्मघाट पर खत्म हुआ।
अपने आदेश में, तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस के लिए न केवल अनुमति देने से इनकार किया था, बल्कि आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस आयुक्त को किसी भी उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। 
सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।” 
हालाँकि, ऐसा लगता है कि तेलंगाना पुलिस ने मुस्लिम समूहों को एक जुलूस आयोजित करने में सहायता किया है, क्योंकि खुद शहर के पुलिस आयुक्त ने ‘आलम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी। भले ही पुलिस आयुक्त ने समुदाय से पुलिस के साथ सहयोग करने और मार्ग पर इकट्ठा न होने की अपील की थी, लेकिन शहर की पुलिस ने रविवार को जुलूस को सुरक्षा दी।
राज्य में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति देने का निर्णय टीआरएस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में गणेश चतुर्थी जुलूसों को प्रतिबंधित करने के एक हालिया आदेश के परिपेक्ष्य में आता है।
तेलंगाना सरकार ने अपने आदेश में कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए राज्य भर में गणेश उत्सव और मुहर्रम के जुलूसों को सार्वजनिक रूप से मनाने से मना कर दिया था। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में गणेश उत्सव के लिए कोई पंडाल, सामूहिक सभा, जुलूस, लाउडस्पीकर या फिर डिस्को जॉकी की अनुमति नहीं दी जाए।
इसी तरह से मुहर्रम के दौरान ‘आलम’ का जुलूस निकालने से मना किया गया था।
इससे पहले टीआरएस सरकार ने हैदराबाद में हिंदुओं को गणेश जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, हालाँकि, पिछले सप्ताह मुसलमानों को शहर में मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी। हैदराबाद पुलिस ने हैदराबाद के पुराने शहर में मुसलमानों को ‘अलाम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद मुस्लिम समूहों को जुलूस निकालने की अनुमति देने और गणेश चतुर्थी के दौरान हिंदुओं को जुलूस से मना करने के फैसले ने अब राज्य में एक बहस छेड़ दी है। केसीआर की अगुवाई वाली राज्य सरकार की अब अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की घिनौनी हरकत के लिए आलोचना हो रही है।

इजाजत ना मिली तब भी निकालेंगे ताजिया : मौलाना कल्बे जवाद नकवी

मौलाना कल्बे जवादशिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने अगस्त 20, 2020 को धार्मिक आयोजनों के लिए पहले से ही सख्त कोविड प्रोटोकॉल के बाद सभी मुहर्रम आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस कमिश्नर पर निशाना साधा है। लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने मोहर्रम के बीच ताजियों को घर से ले जाने देने की इजाजत ना देने पर पुलिस से नाराजगी जाहिर की है और इसके साथ ही, लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे को ज्ञापन सौंपकर ताजिया ले जाने की इजाजत माँगी है।
मौलाना कि इस धमकी के बाद वहीं, देर रात प्रशासन ने इमामबड़ा गुफरानमाब में मजलिस के लिए सशर्त अनुमति दे दी है। कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि इमामबड़ा गुफरानमाब में मजलिस की अनुमति दे दी गई है, लेकिन यहाँ ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शर्त के मुताबिक, अकीदतमंदों को मास्क लगाना होगा व सैनिटाइजर या साबुन से हाथ भी साफ करने होंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मौलवी कल्बे जवाद, जो पुराने शहर में इमामबाड़ा गुफरानमाब के प्रबंधक मुतवल्ली हैं, ने विशेष रूप से मुहर्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों को असंवैधानिक और अवैध बताया था। जवाद ने प्रशासन को यह भी चेतावनी दी थी कि वह कोविड -19 प्रोटोकॉल के बावजूद भी इमामबाड़ा में मजलिस (मजहबी उपदेश) आयोजित करेगा और अगर वे इस ‘असंवैधानिक आदेश’ के उलंघन का अपराधी मानते हुए उसे गिरफ्तार करते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं देती है तो वो अपनी गिरफ्तारी देंगे।
मौलवी ने पुलिस आयुक्त के लिए एक लिखित बयान पेश किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह आदेश केवल भ्रामक ही नहीं है बल्कि ऐसा भी है, जो समुदाय में तनाव पैदा कर रहा है। कल्बे जवाद ने कहा कि पुलिस का यह आदेश डब्ल्यूएचओ, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोविड -19 के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों के भी खिलाफ है।
कल्बे जवाद ने कहा, “यदि प्रशासन अपने असंवैधानिक आदेश का पालन करता है, तो मुझे गिरफ्तार करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन मैं अपने समुदाय से अनुरोध करूँगा कि मेरी गिरफ्तारी का विरोध न करें और कोविड -19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।”
लखनऊ शिया और सुन्नी मरकजी चाँद कमेटी ने ऐलान किया है कि 20 अगस्त को मोहर्रम का चाँद दिख गया है, इसलिए बृहस्पतिवार यानी, 21 अगस्त को मोहर्रम की पहली तारीख होगी।