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तेलंगाना : केसीआर ने 1600 करोड़ में बनवाया ताजमहल से ऊंचा सचिवालय, बिल्डिंग का गुंबद मुस्लिम शैली

परिवारवादी पार्टियां जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे को किस तरह लुटाती हैं इसका ताजा उदाहरण है तेलंगाना में बना नया सचिवालय। यह नया सचिवालय ताजमहल से ऊंचा और देश के नए संसद भवन सेंट्रल विस्टा से क्षेत्रफल में बड़ा है। देश के नए संसद भवन पर जहां 1250 करोड़ रुपये खर्च हुए वहीं तेलंगाना के नए सचिवालय पर 1600 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके भवन निर्माण के लिए पहले 617 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी और बाद में सचिवालय के आसपास सौंदर्यीकरण के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये का बजट बढ़ा दिया गया। भवन का निर्माण 7,79,982 वर्ग फीट में किया गया और इसकी ऊंचाई 265 फीट है। नए सचिवालय की कुल क्षेत्रफल 28 एकड़ है। इतना लंबा सचिवालय किसी राज्य में नहीं है। इसके साथ ही मुस्लिम तुष्टिकरण में केसीआर ने इस भवन के गुंबद को मुस्लिम शैली का बना दिया। इसके बाद इस पर विवाद शुरू हो गया है। एआईएमआईएम नेता और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नया सचिवालय भवन ताजमहल की तरह सुंदर है, वहीं भाजपा नेता बंदी संजय ने कहा कि 1,500 करोड़ रुपये से ताजमहल जैसा सचिवालय बनाया गया। एक बार भाजपा की सरकार बनने के बाद हम उन गुंबदों को गिरा देंगे। हम सचिवालय को इस तरह से बदलेंगे कि यह तेलंगाना और भारतीय संस्कृति को दिखाएगा।

नए सचिवालय का गुंबद मुस्लिम शैली का

तेलंगाना में बने नए सचिवालय का गुंबद मुस्लिम शैली का बनाया गया है। इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय ने बीआरएस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने सचिवालय निर्माण के अनुमानित खर्च को 400 करोड़ से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये पहुंचा दिया है। 1,500 करोड़ रुपये से वह ताजमहल जैसा सचिवालय बना रहे हैं। एक बार भाजपा की सरकार बनने के बाद हम उन गुंबदों को गिरा देंगे। हम सचिवालय को इस तरह से बदलेंगे कि यह तेलंगाना और भारतीय संस्कृति को दिखाएगा।

तेलंगाना सरकार के नए सचिवालय की डिजायन को लेकर राजनीति गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया और कहा- बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर नए सचिवालय भवन के पूरी तरह तैयार होने पर तेलगांना को बधाई। इमारत को तेलंगाना की समावेशी विकास गाथा का प्रतीक बने रहना चाहिए।

ओवैसी ने कहा- सर, इमारत तो खूबसूरत है

ओवैसी ने आगे तंज कसते हुए कहा- एक वक्फ पंजीकृत मस्जिद को निर्माण के दौरान अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया था, जिसे अब फिर से बनाया गया है। जो फिर से एक ध्वस्त मस्जिद के पुनर्निर्माण का पहला उदाहरण है। सरकार ने तेलंगाना के हाई कोर्ट को भी आश्वासन दिया है। सर, इमारत तो खूबसूरत है। ये और बात है कि वजीर-ए-आजम नहीं बना सका।

बीजेपी ने पूछा – कहां गए 1000 करोड़ रुपए?

तेलंगाना राज्य सचिवालय के उद्घाटन पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय ने केसीआर सरकार से योजना को लेकर सवाल पूछे हैं और स्ट्रक्चर को लेकर घेरा है। उन्होंने कहा- योजना के मुताबिक, पहले कहा गया कि निर्माण के लिए 600 करोड़ रुपये अनुमानित है, अब इसे बढ़ाकर 1600 करोड़ रुपये कर दिया। फिर 1000 करोड़ रुपये कहां गए? लोगों के पैसे का इस्तेमाल एक समुदाय के पक्ष में करना बिल्कुल ठीक नहीं है। सीएम ने ‘नल्ला पोचम्मा’ मंदिर को गिराने का आदेश दिया और फिर हमारी मांग पर उन्होंने लगभग 2 गुंटा आवंटित किया, जबकि अन्य धार्मिक स्ट्रक्चर्स के लिए 5 गुंटा आवंटित किया गया।

नए संसद भवन पर कुल खर्च 1,250 करोड़ रुपये

देश के नए संसद भवन को बनाने का खर्च करीब 29 प्रतिशत बढ़कर 1,250 करोड़ रुपए हुआ। पहले इसे 971 करोड़ रुपये में बनाया जाना था। खर्च बढ़ने की वजह एडिशनल वर्क, कंस्ट्रक्शन प्लान में बदलाव और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन है। प्रस्तावित चार मंजिला इमारत 13 एकड़ में बन रही है। सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत नया त्रिकोणीय संसद भवन, प्रधानमंत्री आवास, PMO, उप राष्ट्रपति भवन, एक कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बनाने के साथ ही राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक कॉरिडोर को नए सिरे से संवारा जा रहा है।

नए संसद भवन की जितनी लागत, उसकी 50 फीसदी राशि 3 साल में बचाई

लोकसभा को पिछले तीन साल में करीब 2500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बेहतर वित्तीय प्रबंधन से इसमें से करीब 700 करोड़ रुपए की बचत की गई। लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही बिरला ने फिजूलखर्ची रोककर बचत पर ध्यान दिया। तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया। कागज की संख्या के उपयोग में खासी कमी की गई। इसके साथ ही लोकसभा सचिवालय की खरीदारी में सरकार के जेम पोर्टल को प्रोत्साहित करने जैसे कदमों ने सरकारी धन की बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि लोकसभा के अधिकारिक सूत्र कहते हैं कि भले ही बचत की गई राशि से संसद का नया भवन नहीं बन रहा हो, लेकिन कहीं न कहीं यह राशि सरकार के खजाने में ही रही है।

तेलंगाना में सचिवालय के भवन निर्माण का बजट 617 करोड़ से 1600 करोड़ किया

तेलंगाना में नए सचिवालय के लिए प्रशासन ने भवन निर्माण के लिए 617 करोड़ रुपये स्वीकृत किये। जीएसटी के बाद जो उस समय 6 प्रतिशत था, वह बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया। निर्माण सामग्री का काम बढ़ा है। नतीजतन, निर्माण लागत में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। और बाद में बजट 1000 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया।

तेलंगाना का नया सचिवालयः 635 कमरे, 34 गुंबद, 300 सीसीटीवी कैमरे

तेलंगाना राज्‍य को अब अपना अलग नया सच‍िवालय म‍िल गया है। इसमें 635 कमरे, 34 गुंबद, 300 सीसीटीवी कैमरे हैं। तेलंगाना के नए सचिवालय की भव्यता हैरान कर देगी। मुख्‍यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने नवन‍िर्म‍ित छह मंज‍िला राज्य सचिवालय का 30 अप्रैल 2023 को उद्घाटन क‍िया। नये सचिवालय भवन को भारत रत्‍न डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के नाम से जाना जाएगा। तेलंगाना राज्य के गठन के बाद से केसीआर के नेतृत्व वाली पहली सरकार ने संयुक्त राज्य के सचिवालय में प्रशासन की शुरुआत की थी जिससे कामकाज में कर्मचार‍ियों और व‍िज‍िटर्स को बहुत परेशानी हो रही थी। इसको दूर करने के ल‍िए योजनाबद्ध तरीके से नए भवन का न‍िर्माण किया गया है।

तेलंगाना के नए सचिवालय के कुछ प्रमुख बिंदूः

♦ इसका निर्माण 26 महीने में पूरा किया गया है। आमतौर पर इस तरह के प्रोजेक्ट को पूरा करने में पांच        साल लग जाते हैं।
♦ 300 सीसीटीवी कैमरे और 300 पुलिसकर्मियों से निगरानी।
♦ गुंबदों और खंभों को बनाने के लिए गैल्वेनाइज्ड रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (जीआरसी) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
♦ खंभे खड़ा करने में छह महीने का समय लगा।
♦ रोजाना तीन हजार से ज्यादा मजदूर काम करते थे।
♦ लाल बलुआ पत्थर के कुल 1,000 लॉरी का इस्तेमाल किया गया।
♦ भवन निर्माण के लिए 617 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है।
♦ अब तक 550 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। निर्माण लागत में अनुमान से 20-30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
♦ इस छह मंजिला सचिवालय में 635 कमरे हैं। इसमें विशेष 30 सम्मेलन कक्ष हैं। इसमें 24 लिफ्ट लगाई गई हैं।
♦ भवन का निर्माण कुल 28 एकड़ क्षेत्रफल में से ढाई एकड़ में किया गया है।

केसीआर का नया 50 करोड़ का घर

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव नवंबर 2016 में अपने नए गृह सह कार्यालय में गए जो बेगमपेट में नौ एकड़ के भूखंड में फैला हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पूरे कॉम्प्लेक्स पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस अत्यधिक सुसज्जित और किलेबंद इमारत को देश के सबसे बड़े आधिकारिक कार्यालय-घर परिसरों में से एक माना जाता है। परिसर का निर्माण मुंबई स्थित रियल्टी प्रमुख शापुरजी पालनजी द्वारा किया गया है। शुरुआत में घर की कीमत 35 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन फिनिशिंग बिल कथित तौर पर लगभग 50 करोड़ रुपये है।

बंगले पर केसीआर ने खर्च किए 50 करोड़, कमरे में बुलेट प्रूफ ग्लास

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव 2016 में अपने 50 करोड़ रुपये के सपनों के घर में चले गए। जहां पुजारियों ने बुरी आत्माओं को भगाने के लिए वैदिक मंत्रोच्चारण किया और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बाहर खदेड़ दिया। 100,000 वर्ग फुट का बंगला नौ एकड़ के भूखंड पर बनाया गया और सभी आधुनिक, हाई-टेक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें आधिकारिक कक्षों में बुलेट प्रूफ ग्लास और मुख्यमंत्री और उनके बेटे केटीआर का घर शामिल है। रिपोर्टों का कहना है कि स्नाइपर हमलों को रोकने के लिए बाथरूम की खिड़कियों में भी बुलेट-प्रूफ शीशे लगे हैं।

सचिवालय का ‘भूत’, वास्तु यज्ञ, न्यूमरोलॉजी का चक्कर

सीएम बनने के बाद केसीआर कभी सचिवालय नहीं गये। उन्‍हें किसी ने बताया क‍ि सचिवालय का वास्‍तु ठीक नहीं है। इसके लिए उन्‍होंने 2016 में 50 करोड़ की लागत से घर पर ही एक कार्यालय बनवाया। वे कभी सचिवालय नहीं गए जबकि उनकी सरकार के अध‍िकारी वहीं से काम करते हैं। उन्होंने बेगमपेट में अपने कैंप ऑफिस की मरम्मत कराई और इसे 5 मंजिल ऊंचा और 6 ब्लॉक्स तक बढ़ा दिया। इसके पीछे उन्‍होंने तर्क दिया क‍ि शासक को ऐसी जगह से काम करना चाहिए जो दूसरों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर हो। पिछले 5 साल से केसीआर सचिवालय की बजाय अपने सरकारी आवास से काम कर रहे हैं।

दिल्ली : केजरीवाल ने BRS को भिजवाए 15 करोड़ रूपए, कोड वर्ड ’15 किलो घी’ था: महाठग सुकेश, कहा- ‘मेरे पास 700 पन्नों की चैट है’

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने एक बार फिर से चिट्ठी जारी की है। इस बार उसने आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि सीएम केजरीवाल का दक्षिण भारतीय ग्रुप और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं के साथ साँठगाँठ है।

सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के कहने पर ही बीआरएस दफ्तर में 15 करोड़ रुपए पहुँचाए गए थे। महाठग ने दावा किया है कि उसके पास वह चैट मौजूद है जिसमें केजरीवाल द्वारा रुपए पहुँचाने और बीआरएस नेता द्वारा उसे स्वीकारे जाने की बात कही जा रही है। सुकेश के अनुसार उसके पास मौजूद चैट के स्क्रीनशॉट से साफ है कि बीआरएस नेता ने अरुण पिल्लई (शराब कारोबारी) को 15 करोड़ रुपए देने को कहा और उसने वह बॉक्स काले रंग की रेंज रोवर गाड़ी में रखी जिस पर MLC का स्टिकर लगा हुआ था।

इस चैट से केजरीवाल और दक्षिण भारतीय ग्रुप के बीच के संबंधों पर मुहर लगती है। खत में सुकेश का दावा है कि चैट में 15 करोड़ रुपए को कोड वर्ड में 15 किलो घी कहा गया है। उसका दावा है कि केजरीवाल और बीआरएस के नेता लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में हैं। केजरीवाल और बीआरएस नेताओं के बीच कई बार पैसों का लेनदेन हो चुका है।

इतना ही नहीं सुकेश ने कहा है कि यदि उसकी बातों पर किसी को भरोसा नहीं है तो वो नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट या किसी भी तरह का परीक्षण कराने को तैयार है। उसने कहा, “मैं सिर्फ बातें ही नहीं कर रहा बल्कि हर बात के सबूत पेश करने वाला हूँ। सुकेश का दावा है कि उसके पास अरविंद केजरीवाल के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के कुल 700 पेज सुरक्षित हैं। उसने कथित तौर पर साल 2020 में बीआरएस कार्यालय को 75 करोड़ रुपए देने की भी बात कही है।

हैदराबाद का नाम बदलकर ‘भाग्यनगर’ करने की माँग तेज

                                                    साभार: द टेलीग्राफ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) का नाम बदलकर ‘भाग्यनगर’ (Bhagyanagar) करने की माँग तेज कर दी है। माना जा रहा है कि अगले साल 5 जनवरी से 7 जनवरी के बीच संघ और बीजेपी के बीच होने वाली समन्वय बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ बीजेपी के महासचिव बीएल संतोष समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल रहेंगे।

आरएसएस ने खुद इसकी जानकारी ट्विटर के जरिए दी है। खास बात यह रही है कि संघ ने अपने ट्वीट में हैदराबाद को भाग्यनगर के नाम से जिक्र किया है। संघ के ट्वीट में लिखा गया, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बंधित समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्र में कार्यरत विविध संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों की समन्वय बैठक अगले माह 5 से 7 जनवरी 2022 को भाग्यनगर (हैदराबाद), तेलंगाना में आयोजित हो रही है।”

हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर करने की माँग कोई नई नहीं है। इससे पहले भी समय-समय पर इसकी माँग उठती रही है। साल 2020 में हैदराबाद के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भी हैदराबाद का नाम भाग्यनगर करने की माँग की थी। 29 नवंबर 2020 को हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में भाषण देते हुए उन्होंने कहा था, “कुछ लोग मुझसे पूछ रहे थे कि क्या हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर किया जा सकता है? मैंने कहा क्यों नहीं? मैंने उनसे कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के बाद जब हमने फैजाबाद का नाम अयोध्या किया और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया तो भाग्यनगर के रूप में हैदराबाद का नाम क्यों नहीं बदला जा सकता है?”

इसके साथ ही सीएम योगी ने भाग्यनगर का मतलब भी समझाते कहा था कि इसका अर्थ विकास का प्रतीक होता है। यहीं नहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी हैदराबाद शहर को भाग्यनगर करने की बात कही थी।

तेलंगाना : गोधरा पर सियापा करने वाले भैंसा पर खामोश क्यों? ‘2008 में मस्जिद में हिन्दू को काटा, 2020 में गणेश प्रतिमा पर पेशाब.....'

                                भैंसा दंगे में जलाए गए कई वाहन व घर (फोटो साभार: न्यू इंडियन एक्सप्रेस)
गोधरा दंगे पर नरेंद्र मोदी को कोसने वाले तेलंगाना में हुए दंगे पर क्यों खामोश हैं? यही लोग उत्तर प्रदेश में अखिलेश के कार्यकाल में मुज़फ्फर नगर पर खामोश थे, क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है? यदि इसी का नाम सेकुलरिज्म है, बंद होना चाहिए सेकुलरिज्म का ड्रामा। मीडिया भी खामोश है, क्योकि प्रहार हिन्दुओं पर हुआ है, मुसलमानों पर नहीं। मीडिया को बस बंगाल की चिंता है, ये वही मीडिया है जब 24 परगना पर हिन्दुओं के घर और मंदिरों को आग के हवाले किया जाता था, तब भी मीडिया ने परवाह नहीं की। 
दंगों की वजह से तेलंगाना का भैंसा कई दिनों से ख़बरों में है। इस महीने की शुरुआत में हुई हिंसा में 10 लोग घायल हुए, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल थे। साथ ही कुछ घरों और गाड़ियों को भी फूँक दिया गया था। यहाँ सांप्रदायिक हिंसा नई बात नहीं है। जनवरी 2020 में इसी तरह के दंगे हुए थे। इन दंगों को कवर करने वाले मिस्टर सिद्धू नामक पत्रकार ने इसके पीछे असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का हाथ बताया है
 ‘2008 में मस्जिद में हिन्दू को काटा, 2020 में गणेश प्रतिमा पर पेशाब, 2021 में AIMIM की शह पर दंगा’: भैंसा पर पत्रकार का बड़ा खुलासा

हाल ही में ‘गोवा क्रॉनिकल’ ने सिद्धू से संपर्क कर इस पूरे प्रकरण के बारे में जाना। उन्होंने जनवरी 2020 से लेकर मार्च 2021 तक की घटनाओं को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 में हुआ दंगा रातोंरात हिंसक हो गया था और महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा पर स्थित कोरभा गली सबसे ज्यादा प्रभावित हुई थी। उस समय मुस्लिमों ने ‘इज्तिमा’ का आयोजन किया था। उसमें शामिल हुए करीब 50,000 लोगों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के साथ-साथ CAA और NRC विरोधी नारे लगाए थे।

सिद्धू ने बताया कि 12 जनवरी 2020 को रात 8 बजे एक हिन्दू व्यक्ति ने बाहर मच रहे शोर से तंग आकर मुस्लिम समाज से कहा कि वो तेज़ आवाज़ में कार्यक्रम कर लोगों को परेशान न करें। धीरे-धीरे बहस होने लगी और एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिन्दू लड़के को थप्पड़ जड़ दिया। उसने भी बदले में एक थप्पड़ रसीद कर डाला। फिर आसपास के इलाकों से मुस्लिम वहाँ जुट गए। 1 घंटे के भीतर हिन्दुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके जाने लगे।

सिद्धू ने बताया कि मुस्लिमों ने लगातार पाकिस्तान समर्थक नारे लगाते हुए हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया और यहाँ तक कि भगवान गणेश की प्रतिमा पर पेशाब भी कर डाला। मकर संक्रांति पर हिन्दू महिलाओं द्वारा बनाए गए प्रसाद व भोजन की वस्तुओं में पेशाब कर दिया गया। हिन्दू महिलाओं के साथ बदतमीजी हुई और उनके गहने छीन लिए गए। वे बच्चों को भी मारना चाहते थे। मिस्टर सिद्धू का कहना है कि तेलंगाना के गठन के बाद हुए इस पहले हिन्दू-मुस्लिम दंगे के बारे में KCR सरकार नहीं चाहती थी कि किसी को पता चले।

किसी भी पत्रकार को वहाँ नहीं जाने दिया जा रहा था और मीडिया को कवरेज से मना कर दिया गया था। सिद्धू ने बताया कि उन्होंने वहाँ जाकर कई वीडियो अपलोड किए, जिनसे पता चल रहा था कि हिन्दुओं के पास रहने को घर नहीं थे और उनके साधन जला दिए गए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री KCR के आईटी सेल ने धमकियाँ दी और वीडियोज डिलीट करने को कहा। उन पर FIR दर्ज किए गए।

स्थानीय RSS यूनिट ने हिन्दुओं को उनका घर फिर से बनाने में मदद की। सिद्धू ने इस साल हुए दंगों की बात करते हुए कहा कि अभी भी ‘इज्तिमा’ चल रहा था। जुल्फिकार और भट्टी गलियों में दंगों का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा और इस बार भी मीडिया को कवरेज से मना किया गया। उन्होंने बताया कि AIMIM के काउंसलर जाबिर अहमद के खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

उसे ओवैसी भाइयों का करीबी भी माना जाता है। उन्होंने बताया कि NIA की एक टीम ने भैंसा आकर कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया था और उन्हें भी AIMIM के नेताओं और स्थानीय लोगों ने शरण दी हुई थी। सिद्धू का कहना है कि यहाँ के मस्जिदों में अक्सर असामाजिक तत्वों को पनाह मिलती है। मस्जिद के पास से गुजरने वाले हिन्दू जुलूसों पर पत्थरबाजी होती है। उन्होंने दावा किया कि 2008 में एक हिन्दू को मस्जिद में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े काट डाला गया था, जिससे दंगे भड़के थे। सिद्धू ने बताया:

“हिन्दू उस इलाके में डर के साए में जीते हैं और उनकी जीवनशैली काफी कठिन हो गई है क्योंकि मौत का भय बना रहता है। भैंसा दूसरा कश्मीर बन रहा है। मुस्लिम जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। पत्रकारों पर तलवार से हमले हुए। एक पत्रकार जीवन और मौत से जूझ रहा है लेकिन TRS के डर से कोई आवाज़ नहीं उठाता। मीडिया का एक बड़ा वर्ग राज्य की सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर नाच रहा है।”

उन्होंने बताया कि मुस्लिमों के प्रभाव वाले संवेदनशील क्षेत्र भैंसा में टीआरएस और AIMIM का मुस्लिम गुंडों को समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि यहाँ हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर करने का लक्ष्य लेकर चला जा रहा है और पुलिसकर्मियों पर भी राजनीतिक दबाव है। बकौल सिद्धू, स्थानीय स्तर पर मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और प्रभाव के हिसाब से डेमोग्राफी कुछ ऐसी बनाई गई है कि AIMIM की ही जीत हो।

उन्होंने ‘हिन्दू वाहिनी’ के बारे में बात करते हुए कहा कि हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए और इस्लामी जिहादियों से लड़ने के लिए यही संगठन आगे आता है। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर ‘हिन्दू वाहिनी’ के युवाओं को जहाँ गिरफ्तार किया जाता है, वहीं मुस्लिम आरोपित खुला घूमते हैं। पुलिसकर्मियों ने हिन्दू कार्यकर्ताओं को धमकाया भी है। हिन्दुओं पर झूठे केस चला कर उन्हें फँसाने के आरोप भी लगे हैं।

हाल ही में वहाँ एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण का मामला भी सामने आया था। पीड़ित बच्ची और आरोपित अलग-अलग समुदाय से थे और लड़की की उम्र मात्र 4 वर्ष है। आरोप लगा था कि इसके बाद पुलिस ने पीड़ित परिजनों से बिना कोई हो-हल्ला मचाए अपने गाँव वापस लौट जाने को कहा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने दावा किया था कि पुलिस ने पीड़ित परिजनों पर इस हैवानियत के बारे में किसी को कुछ न बताने का दबाव बनाया। 

GHMC चुनाव के बाद BJP के लिए खुला दक्षिण का रास्ता; भाजपा महिलाओं ने मारी बाज़ी

ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) के चुनावों में भाजपा ने जिस तरह से शानदार प्रदर्शन किया है, उससे तेलंगाना में TRS की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा ने इस चुनाव को KCR बनाम मोदी भी नहीं होने दिया और ओवैसी भाइयों की कट्टरवादी राजनीति पर निशाना साधते हुए वोट माँगे। इस चुनाव में अगर सबसे ज्यादा नुकसान किसी पार्टी को हुआ है तो वो TRS है, जिसकी सीटों की संख्या 99 से सीधे 55 पर आकर रुक गई।

5 लोकसभा क्षेत्रों और 24 विधानसभा क्षेत्रों में फैले इस चुनाव के बाद भाजपा की नजर सीधा 2023 में होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव पर है। 120 सदस्यीय विधानसभा में फ़िलहाल TRS के पास 102 और AIMIM के पास 7 सीटें हैं। ये सातों ही सीटें हैदराबाद की ही हैं। ऐसे में भाजपा के पास राज्य में पाने के लिए बहुत कुछ है और हिंदी पट्टी से बाहर निकल कर उत्तर-पूर्व में दबदबा बनाने वाली पार्टी अब बंगाल और दक्षिण में एंट्री ले रही है।

इन चुनाव परिणामों में भाजपा की सबसे बड़ी सफलता ये है कि कोई भी एक दल अपने बलबूते मेयर नहीं बना सकता। भाजपा को अपना मेयर बनाना नहीं है, पार्टी नेता साफ़ कर चुके हैं। ऐसे में अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान जो आरोप लगाया था कि ओवैसी और KCR बंद कमरे में ‘इलू-इलू’ करते हैं और गुप्त समझौता करते हैं, वो अब खुलेआम किया जा सकता है। इससे भाजपा को इन दोनों की मिलीभगत को बेनकाब करने में आसानी होगी।

इस चुनाव में कांग्रेस ने न कुछ खोया और न ही कुछ पाया, पिछली बार भी 2 सीट थीं और अब भी केवल 2 सीट। TRS से भी अधिक दुर्गति अगर हुई है वह है दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियां बांट सत्ता हथियाने वाली आम आदमी पार्टी, जिसने अपने उम्मीदवार आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से उतारे। जिसका उल्लेख चित्रों सहित अपने पिछले लेखों में कर चूका हूँ। उसका कारण है, केवल अपनी नाकामियों को मोदी पर डाल जनता को मुर्ख बनाना, दूसरे कोरोना काल में दिल्लीवासियों को उन्हीं के रहमोकरम पर छोड़ना, रोहिंग्यों को बचा, प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से निकलने को मजबूर करना आदि आदि के कारण आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से मैदान में उतारना पड़ा। कोरोना काल में दिल्ली से बाहर के आये मजदूरों को अपनी और अपने परिवारों की जान को जोखिम में डाल दिल्ली छोड़ने को विवश होना पड़ा था, मुफ्त की रेवड़ियां भी अरविन्द केजरीवाल के इस अपराध को माफ़ नहीं कर पाएंगी। 

सबसे ज्यादा संभावना है कि मेयर TRS का होगा और AIMIM के समर्थन से बनेगा। दोनों दलों के इस गठबंधन को भाजपा 2023 विधानसभा चुनाव में मुद्दे बनाएगी और जनता को बताने की कोशिश करेगी कि ये दोनों दल आपस में मिले हुए हैं। 48 सीटों के साथ भाजपा के पास अब राजधानी हैदराबाद में संगठन का दबदबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। बूथ स्तर पर चुनावी मैनेजमेंट में विश्वास रखने वाली पार्टी के लिए ये अच्छा मौका है।

भाजपा ने इशारा दिया है कि अब आगे उसका निशाना मुख्यमंत्री KCR ही होंगे, जिनकी आरामतलबी को पार्टी जनता के समक्ष रखेगी। उनके बारे में एक कहावत है कि साहब कार से आएँगे और वोट माँगेंगे। उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न कार है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो कई-कई दिनों तक सचिवालय नहीं जाते और जनता के बीच में नहीं आते। ऐसे में ‘निजाम-नवाब कल्चर’ को खत्म करने की बात करने वाली भाजपा ये मुद्दा उठाने से चूकेगी नहीं।

TRS ने मुफ्त स्वच्छ जल देने का वादा किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद का नाम भाग्यनगर रखने का वादा किया। वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी ने वही कट्टरवादी रवैया अपनाते हुए ‘किसी के बाप से न डरने’ वाला बयान दिया था। उनके बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संसाधनों को जिताऊ सीटों पर केंद्रित करने के लिए आधी से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ी, जिससे TRS को फायदा मिला।

हालाँकि, इससे एक नुकसान ये भी हो सकता है कि अब तक कई मुद्दों पर TRS ने संसद में भाजपा का साथ दिया था और राष्ट्रवादी मसलों पर भी KCR अक्सर दूसरी विपक्षी पार्टियों से अलग रुख दिखाती थी। अब इसमें कुछ बदलाव आ सकता है, क्योंकि विपक्ष विहीन राज्य में बिना किसी सिरदर्द के सरकार चला रहे KCR के खिलाफ अब एक मजबूत विपक्ष खड़ा हो रहा है। अब वंशवाद बनाम लोकतांत्रिक पार्टी वाला मुद्दा भी उठेगा।

लेकिन, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की YSRCP के रूप में एक बड़ी पार्टी है, जो संसद में भाजपा का साथ दे सकती है। CAA पर भी आंध्र प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियों ने संसद में भाजपा का साथ दिया था। ऐसे में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव या अहम मसलों और संसद में वोटिंग के मामले में KCR के अन्य विपक्षी दलों का साथ देने के खतरे को भाजपा अब मोल लेने की स्थिति में आ गई है। ओडिशा में नवीन पटनायक भी कुछेक मसलों पर उसका साथ देते हैं।

 भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद में तो रैलियाँ की ही, लेकिन साथ ही जिस तरह से सिकंदराबाद के सांसद जी किशन रेड्डी ने चुनाव प्रचार किया, उससे पार्टी को फायदा मिला। भाजपा जनता को ये समझाने में कामयाब रही कि ओवैसी और KCR साथ हैं। इससे ये भी पता चलता है कि सीएम के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी बढ़ रही है, जो 2023 में उनके 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के साथ चरम पर होगी।

हालाँकि, इसे सिर्फ भाजपा आलाकमान की अंतिम सप्ताह में की गई रैलियों के मद्देनजर ही नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी रणनीति राज्य की यूनिट ने तैयार की थी और प्रदेश भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सड़क पर काफी पहले से उतार रखा था। जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने PV नरसिम्हा राव और NTR के नाम पर बने स्थलों को ध्वस्त करने की बात की तो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो सबसे पहले AIMIM का दफ्तर मिट्टी में मिला दिया जाएगा।

हाल ही में जब हैदराबाद में बाढ़ आई थी, तब पुराने शहर में कुछ AIMIM कार्यकर्ताओं को वित्तीय सहायता देकर इतिश्री कर ली गई। भाजपा ने इस मुद्दे को भी उठाया कि संकट के काल में राज्य की दोनों बड़ी पार्टियाँ नदारद रहीं। TRS का अति-आत्मविश्वास उसे ले डूबा, क्योंकि एग्जिट पोल्स में 75 सीटें देख कर ही KCR-KTR पिता-पुत्र के पोस्टरों का दूध से अभिषेक शुरू हो गया था। ओवैसी को तेजस्वी सूर्या ने ‘नया जिन्ना’ बता दिया, जो मीडिया में बहस का मुद्दा बना।

हालाँकि, वोट शेयर के मामले में चौथे स्थान पर रही भाजपा के लिए ये चिंता का विषय ज़रूर है, लेकिन अब उसके पास एक रणनीति है कि किन क्षेत्रों पर ध्यान देना है और कहाँ उन्हें दिक्कत है। एक और बात जो भाजपा के पक्ष में गई, वो ये है कि KCR के मंत्री बेटे KTR को संगठन और सरकार में बड़ी भूमिका देने के खिलाफ पार्टी ने आवाज़ उठाई और बताया कि भाजपा कैसे इन वंशवादी पार्टियों से अलग है।

योगी फैक्टर और मजबूत हो रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में हमने उनका दमदार स्ट्राइक रेट देखा। वहाँ उन्होंने 18 सीटों पर चुनाव प्रचार किया और उनमें से 13 भाजपा जीतने में कामयाब रही। हैदराबाद में भी जहाँ उन्होंने रैली की, उस सीट को भाजपा ने हथिया लिया। उनके बयान पूरे चुनाव में मीडिया की चर्चा का हिस्सा बने रहे। हिंदुत्व के नए फायरब्रांड नेता के रूप में उनकी स्थिति बहुत ही मजबूत हुई है।

कुल मिला कर भाजपा ने जिस दक्षिण में एंट्री का स्वप्न अटल-आडवाणी के काल से देखा था, वो अब साकार हो रहा है। कर्नाटक में पार्टी सत्ता में रही है और अभी भी है। लेकिन केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में उसके लिए हमेशा चीजें मुश्किल रही हैं। हैदराबाद के सहारे अगर पार्टी तेलंगाना में मजबूत स्थिति में आती है तो फिर पड़ोसी आंध्र और उसके बाद केरल में जा सकती है। तमिलनाडु में AIMIM के साथ गठबंधन जारी रहेगा, अतः निकट भविष्य में वहाँ पार्टी के लिए संभावनाएँ कम हैं।

अंत में बात कॉन्ग्रेस की, जो बात करने लायक ही नहीं है। राहुल-सोनिया प्रचार करने नहीं गए। परिणाम आने के बाद आलाकमान को बचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने कॉन्ग्रेस और TDP के पुराने वोटरों को अपने पाले में किया। हैदराबाद में रहने वाले आंध्र प्रदेश के लोगों की पहली पसंद भाजपा बनी और इस मामले में उसने कॉन्ग्रेस को पछाड़ा। भाजपा को असली आत्मविश्वास नवंबर के दुबक्क उपचुनाव में जीत से मिली थी।

यहाँ एक बात का जिक्र करना आवश्यक है कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना से TDP गायब हो गई। ये होना ही था, क्योंकि विभाजन के लिए हुए आंदोलन में जिस कदर हिंसा हुई थी और जो पागलपन देखने को मिला था, उसके बाद दोनों राज्यों के राजनीतिक दलों का एक-दूसरे के राज्य से सफाया सा हो गया। भाजपा के पास पाने के लिए यहाँ सब कुछ है, खोने के लिए कुछ नहीं। भाजपा का कुछ भी इन दोनों राज्यों में दाँव पर नहीं लगा है।

‘एक भी बाल मजदूर मिला तो लोकसभा से इस्तीफा दे दूँगा’: पटाखों पर झूठ फैला रही पत्रकार को कांग्रेस नेता, मणिकम टैगोर,की चुनौती

कांग्रेस सांसद ने रूपा सुब्रमण्या के झूठ की खोली पोल
पत्रकार रूपा सुब्रमण्या ने ऑपइंडिया की ‘मिशन ब्राइट एंड लाउड दीवाली 2021’ का विरोध करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कांग्रेस के एक नेता ही उनसे नाराज़ हो गए और जम कर फटकार लगा दी। रूपा ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई अभियान नहीं देखा, जिसमें इससे ज्यादा प्रदूषण को प्रमोट किया गया हो, या फिर ऐसे इंडस्ट्री का समर्थन किया गया हो, जो ‘बाल मजदूरी’ पर आश्रित है। उन्होंने ऑपइंडिया के लिए ‘पूप इंडिया’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि ये रोज नई गहराई की ओर जा रहा है। इस पर एक कांग्रेस नेता ने उन्हें लताड़ा।

ऑपइंडिया ने अपनी घोषणा में बताया था कि दीवाली 2021 प्रतिबंधों के चंगुल से निकले, इसके लिए परस्पर सहयोग के साथ एक ऐसा अभियान चलाया जाएगा, जिसमें क़ानूनी लड़ाई, एक्टिविज्म और रिसर्च का सहारा लिया जाएगा। इतनी से बात से भड़की रूपा सुब्रमण्या ने ट्विटर पर जहर उगल दिया। इसका जवाब दिया लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप और और पार्टी की वर्किंग कमिटी के परमानेंट इन्वायटी मणिकम टैगोर बी ने।

दूसरी बार सांसद बने मणिकम तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी भी हैं। उन्होंने इस दौरान तमिलनाडु के शिवकाशी की बात करते हुए कहा कि ये पटाखों की इंडस्ट्री 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से वैध इंडस्ट्री है, जिसमें 60,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने अफवाहें न फैलाने की सलाह देते हुए कहा कि क्षेत्र में पटाखों के 1000 फैक्ट्रीज हैं और दिल्ली से मदुरै तक रोज दो फ्लाइट्स चलती हैं।

उन्होंने रूपा से कहा कि वो शिवकाशी आएँ, जो एयरपोर्ट से 70 किलोमीटर है और कैब बुक कर के वहाँ आया जा सकता है। उन्होंने अपना फोन नंबर देते हुए कहा कि रूपा वहाँ की फैक्ट्री में आएँ और वो फैक्ट्रीज के मैनेजर्स से कह देंगे वो उन्हें शिवकाशी की फैक्ट्री में घुमाएँ। उन्होंने चुनौती दी कि अगर पूरी फैक्ट्री या शिवकाशी में एक भी बाल मजदूर मिला तो वो अपनी लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे दे देंगे।

साथ ही उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या रूपा शिवकाशी में एक भी बाल मजदूर न होने की बात पर लेख लिखेंगी? उन्होंने सलाह दी कि रूपा सुब्रमण्या को अगर कुछ पता नहीं है तो उन्हें पटाखा इंडस्ट्री में काम करने वाले हमारे भाइयों-बहनों के आत्म-सम्मान का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम चीन के वैश्विक पटाखा बाजार से सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग अफवाह फैला रहे हैं।

उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट भी शेयर की, जिसमें बताया गया था कि किस तरह से पटाखों पर प्रतिबंध लगने से शिवकाशी इंडस्ट्री के कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। इस रिपोर्ट में बताया था कि 8 लाख लोगों की आजीविका पर पटाखे बैन होने से प्रभाव पड़ा है। साथ ही हजारों करोड़ की इंडस्ट्री पर नुकसान की बात भी कही गई थी। ऊपर से कोरोना के कारण पहले से ही महीनों तक ये फैक्ट्रीज बंद ही पड़ी हुई थीं।

रूपा के इस लेख पर ट्विटर पर लोग हिन्दू विरोधी रवैये पर अपना गुस्सा भी व्यक्त कर रहे हैं:-

साथ ही उन्होंने वो ग्राफ भी शेयर किया, जिससे पता चलता है कि चीन किस कदर वैश्विक पटाखा बाजार पर कब्ज़ा कर के बैठा हुआ है। अमेरिका में जितने भी पटाखे इम्पोर्ट किए जाते हैं, उनमें से 94% अकेले चीन से आते हैं। इसके बाद क्रमशः स्पेन, हॉन्गकॉन्ग, जर्मनी, थाईलैंड, इटली और यूके का स्थान है। इसके जवाब में रूपा सुब्रमण्या ने ये कह कर इतिश्री कर ली कि काश शिवकाशी के लोगों के पास कोई और काम होता क्योंकि पटाखे बनाना अच्छा नहीं है। रूपा सुब्रमण्या के पास कॉन्ग्रेस नेता के तर्कों का कोई जवाब नहीं सूझा।

बता दें कि विराट कोहली ने भी 18 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कहा था, “मेरी तरफ से आपको और आपके परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। भगवान आपको इस दिवाली शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करें। कृपया याद रखें कि पटाखे न फोड़ें, पर्यावरण की रक्षा करें और इस शुभ अवसर पर एक साधारण दीए और मिठाई के साथ अपने प्रियजनों के साथ घर पर मस्ती करें। भगवान आप सबका भला करे। अपना ख्याल रखिएगा।”

हैदराबाद : गणेश विसर्जन को प्रतिबंधित करने वाली तेलंगाना पुलिस ने SC के आदेश को धता बता मुहर्रम के जुलूस को अनुमति

तेलंगाना पुलिस मुहर्रम
                                                                                                                      साभार यूट्यूब 
पिछले हफ्ते हैदराबाद में कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों लोग मुहर्रम के जुलूस में शामिल हुए। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में न सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं, बल्कि लोगों ने चेहरे पर मास्क जैसे जरूरी बातों की भी अनदेखी की। बड़ी संख्या में लोग पुराने हैदराबाद में एकत्रित हुए और ‘बीबी का आलम’ जुलूस निकाला। इस दौरान ज्यादातर लोग बिना मास्क के देखे गए।
कोरोना महामारी को देखते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दिन हैदराबाद के पुराने शहर में जुलूस निकालने के लिए इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद यहाँ पर लोगों ने भारी संख्या में जुलूस निकाला।
हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए, सैकड़ों की संख्या वाला यह जुलूस डाबेरपुरा से शुरू हुआ और मुस्लिम बहुल क्षेत्र चारमीनार, गुलजार हुज, पुरानी हवेली और दारुलशिफा से गुजरते हुए चर्मघाट पर खत्म हुआ।
अपने आदेश में, तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस के लिए न केवल अनुमति देने से इनकार किया था, बल्कि आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस आयुक्त को किसी भी उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। 
सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।” 
हालाँकि, ऐसा लगता है कि तेलंगाना पुलिस ने मुस्लिम समूहों को एक जुलूस आयोजित करने में सहायता किया है, क्योंकि खुद शहर के पुलिस आयुक्त ने ‘आलम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी। भले ही पुलिस आयुक्त ने समुदाय से पुलिस के साथ सहयोग करने और मार्ग पर इकट्ठा न होने की अपील की थी, लेकिन शहर की पुलिस ने रविवार को जुलूस को सुरक्षा दी।
राज्य में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति देने का निर्णय टीआरएस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में गणेश चतुर्थी जुलूसों को प्रतिबंधित करने के एक हालिया आदेश के परिपेक्ष्य में आता है।
तेलंगाना सरकार ने अपने आदेश में कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए राज्य भर में गणेश उत्सव और मुहर्रम के जुलूसों को सार्वजनिक रूप से मनाने से मना कर दिया था। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में गणेश उत्सव के लिए कोई पंडाल, सामूहिक सभा, जुलूस, लाउडस्पीकर या फिर डिस्को जॉकी की अनुमति नहीं दी जाए।
इसी तरह से मुहर्रम के दौरान ‘आलम’ का जुलूस निकालने से मना किया गया था।
इससे पहले टीआरएस सरकार ने हैदराबाद में हिंदुओं को गणेश जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, हालाँकि, पिछले सप्ताह मुसलमानों को शहर में मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी। हैदराबाद पुलिस ने हैदराबाद के पुराने शहर में मुसलमानों को ‘अलाम’ का जुलूस निकालने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद मुस्लिम समूहों को जुलूस निकालने की अनुमति देने और गणेश चतुर्थी के दौरान हिंदुओं को जुलूस से मना करने के फैसले ने अब राज्य में एक बहस छेड़ दी है। केसीआर की अगुवाई वाली राज्य सरकार की अब अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की घिनौनी हरकत के लिए आलोचना हो रही है।

कोरोना पीड़ित मनोज कोठारी ‘कैद’ : हॉस्पिटल का 4.21 लाख रूपए का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ 1.2 लाख रूपए

कोरोना इंश्योरेंस तेलंगाना हॉस्पिटल
मनोज कोठारी (फोटो साभार: The News Minute)
तेलंगाना से आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
क्या कोरोना व्यापार का नया नाम बन गया है? कोरोना के इस कालखंड में जितनी लूट मची हुई है, जो सरकारी दावों को धता दिखा रहे हैं और सरकार भी हाथ पर हाथ रखे बैठी है। लॉक डाउन में हर चीज महँगी। जून 21 को आप नेता संजय सिंह न्यूज़18 पर लाइव शो में कहते हैं कि हमने 5000-5000 रूपए बांटे, लेकिन प्राप्त सूचना के अनुसार दिल्ली में बंटे 2000-2000 रूपए यानि जिसका जहाँ दांव लगा, किसी ने लूट का कोई मौका नहीं छोड़ा। सरकार ने लॉक डाउन अवधि में किसी को नौकरी से न निकालने को कहा, हाँ, इस दौरान तो नहीं, अनलॉक होते ही, छंटनी शुरू हो गयी, मकान मालिक किराये की मांग करने लगे। प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा की जा रही लूट पर अंकुश लगाने पर जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए खूब शोर मचाया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। देखिए:- 
हैदराबाद का यशोदा हॉस्पिटल। यशोदा हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित मनोज कोठारी का इलाज। मनोज कोठारी को हॉस्पिटल से 4.21 लाख रुपए का बिल। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से मनोज कोठारी का बीमा। लेकिन भुगतान सिर्फ 1.2 लाख रुपए का ही।
इंश्योरेंस कपनी का बहाना- कोविड-19 के इलाज के लिए तेलंगाना सरकार ने जितना प्राइस फिक्स किया है, भुगतान सिर्फ उतने का ही। नतीजा- 47 साल के मनोज कोठारी कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने के बावजूद हॉस्पिटल में 29 जून से जबरन रहने को मजबूर।
मनोज 20 जून को यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया, “29 जून को मैं ठीक हो गया और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने के लिए बोल दिया गया। लेकिन उसी 29 जून से मैं यहीं हॉस्पिटल में लगभग कैद हूँ। ना तो किसी से मिल पा रहा हूँ न ही किसी से बात करने दिया जा रहा है। अगर मुझे कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?” मनोज को बताया गया कि जब वो बाकी रकम का भुगतान करेंगे तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
सरकारी दर 
मनोज कोठारी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का बीमा है। फिर 4.21 लाख रुपए के बिल के पेमेंट में क्या दिक्कत है? यहाँ बिल और पेमेंट में सरकारी दर का पेंच फँस गया है। इंश्योरेंस कंपनी के अनुसार तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो सिर्फ उसी का भुगतान करेगी। हॉस्पिटल जहाँ मनोज भर्ती हुए, उसका कहना है कि वो बाकी रकम खुद से जमा करें और घर जाएँ। बाद में इंश्योरेंस कंपनी से सेटलमेंट अमाउंट ले लें।
यशोदा हॉस्पिटल ने हालाँकि इस मुद्दे पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को संपर्क भी किया। अपने लेटर में हॉस्पिटल ने यह तर्क भी दिया कि कोरोना के उपचार के लिए तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो दर बीमार व्यक्ति के खुद के भुगतान के लिए है, न कि किसी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मेडिकल बीमा लिए हुए व्यक्ति के भुगतान के लिए। हॉस्पिटल के इस पत्र का जवाब अभी तक इंश्योरेंस कंपनी ने नहीं दिया है।
परिवार के 2 और सदस्य संक्रमित 
मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई है। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। अफसोस यह कि उन दोनों का इलाज भी इसी यशोदा हॉस्पिटल में ही चल रहा है। मनोज कहते हैं, “मुझे डर है कि पेमेंट वाली बात उनके साथ भी हो सकती है। मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से अपील करता हूँ कि महामारी के इस दौर में इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों में चल रही लूट पर लगाम लगाएँ।”
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। इंश्योरेंस कंपनी ने बताया कि यही दिक्कत अन्य कॉरपोरेट हॉस्पिटलों से भी रिपोर्ट की गई है। इसका कारण कंपनी ने यह बताया कि तेलंगाना सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए सामान्य कॉरपोरेट दरों से 70-80 प्रतिशत की कम दरों पर हॉस्पिटल सुविधाओं को तय कर दिया है। इससे कॉरपोरेट हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच भुगतान को लेकर समस्या आ रही है।
मनोज कोठरी एक नाम हैं। इनकी जगह रमेश, जॉर्ज या संगीता भी हो सकते हैं। ये 5 लाख रुपए का इंश्योरेंस लेते हैं। कमाई में से कुछ बचा कर उसका प्रीमियम भी भरते हैं। यह सोच कर कि कुछ होगा तो हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी बचा लेंगे। लेकिन कागजों में या सरकारी पेंच में या नियम व शर्तें लागू जैसी चीजें धरातल पर इनकी जिंदगी आसान नहीं बल्कि तकलीफदेह बना देती है।
मनोज ने इसके लिए कानूनी रास्ते पर चलने की ठानी। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। खुद पैसे देकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के रास्ते को उन्होंने इनकार कर दिया। एक तरह से सत्याग्रह वाला रास्ता… कॉर्पोरेट से लड़ाई का शायद और कोई रास्ता भी नहीं!
1 दिन के मॉंगे ₹1.15 लाख, बना रखा है बंधक
हैदराबाद से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कोरोना संक्रमित महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि एक निजी अस्पताल ने उन्हें एक दिन के लिए 1.15 लाख रुपए का बिल थमा दिया। इतना भुगतान नहीं करने पर उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।
आरोप लगाने वाली महिला खुद डॉक्टर हैं। वे फीवर हॉस्पिटल में बतौर सर्जन कार्यरत हैं। एक सेल्फी वीडियो में उन्होंने यह आरोप लगाए हैं। यह वीडियो वायरल हो रहा है।
वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि उनका तरीके से उपचार नहीं किया गया और उन्हें डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। वे कहती हैं, “कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद घर पर ही अपना इलाज कर रही थीं और होम क्वारंटाइन में थीं। 1 जुलाई को आधी रात सॉंस की समस्या के बाद वे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुईं।”
वे कहती हैं, “मैं खुद कोरोना वारियर हूँ और ये लोग एक दिन के लिए मुझसे 1.15 लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं। मैं डायबिटिक हूँ फिर भी मुझे यहाँ सही उपचार नहीं मिल रहा है। यह लोग मुझे पर झूठे आरोप भी लगा रहे हैं। मैं मुश्किल में हूँ, मैंने 40 हज़ार रुपए दिए हैं फिर भी इन्होंने मुझे बंद करके रखा है।” उन्होंने इस बाबत पुलिस से भी शिकायत भी दर्ज कराई है।


वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए फीवर हॉस्पिटल के मुखिया डॉक्टर के शंकर ने कहा, “उन्हें पहले ही बताया गया था कि सरकार ने कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाले फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स के लिए अलग से इंतजाम किए हैं। लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दी बिना ही खुद को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा लिया।”
उन्हें घटना की जानकारी तब हुई जब महिला का वीडियो एक स्थानीय समाचार चैनल पर दिखाया जा रहा था। इसके ठीक बाद उन्होंने वहाँ के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर से कहा कि वह जल्द अस्पताल जाकर भुगतान सम्बन्धी विवाद को खुद देखें और महिला को डिस्चार्ज कराएँ। अस्पताल पहुँच कर उन्हें पता चला कि महिला पहले डिस्चार्ज की जा चुकी हैं। फिलहाल आइसोलेशन में है और उनकी स्थिति सामान्य है। शंकर ने यह भी बताया कि वह ड्यूटी के दौरान कोरोना से प्रभावित नहीं हुई थीं।  

तेलंगाना: बाहरी बता मुस्लिम को 6 कब्रिस्तानों ने दफनाने से किया इनकार, हिंदुओं ने श्मशान घाट में दी जगह

तेलंगाना, मुस्लिम, कब्रिस्तान
खाजा मियॉं को बाहरी बता कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया (साभार: India Today)
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में 55 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद कथित तौर पर 6 कब्रिस्तानों ने उसके शव को दफनाने से इनकार कर दिया। दरअसल, दावा किया गया कि मृतक एक बाहरी व्यक्ति था और उसके कोरोनो वायरस मरीज होने की भी आशंका थी।
इसी बीच क्षेत्र के दो हिंदू संदीप और शेखर शोकाकुल परिवार की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने श्मशान घाट में मृतक को दफनाने के लिए जगह उपलब्ध कराई।
मृतक मोहम्मद खाजा मियाँ (55) रंगारेड्डी जिले के गंडमगुडा इलाके में करीब दस साल पहले रहने के लिए आए थे। हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। परिवारवालों ने बताया कि शव लेकर वे लोग नजदीकी कब्रिस्तान पहुँचे। लेकिन यहाँ से उन लोगों को यह कहकर भगा दिया गया कि इससे कोरोना वायरस फैल सकता है।
उसके बाद पीड़ित परिवार शव को लेकर एक के बाद दूसरे, तीसरे और इस तरह से अलग-अलग इलाकों के छह कब्रिस्तान में गए। लेकिन सभी जगह शव को दफनाने से इनकार कर दिया गया। आखिर में इलाके के दो युवक संदीप और शेखर मदद के लिए सामने आए और शव को दफनाने के लिए श्मशान घाट में जमीन उपलब्ध कराई।
परिवारवालों ने बताया कि वे लोग स्थाई तौर पर यहाँ के रहने वाले नहीं हैं, इसलिए उनके समर्थन में कोई नहीं आया। खाजा के बेटे बाशा ने कहा कि हम लोग परेशान हो गए। उम्मीद खो दी कि शायद अब अपने पिता कि लाश दफन नहीं कर पाएँगे, लेकिन उसी समय संदीप और शेखर नाम के दो हिंदुओं ने हमारी मदद की।
वहीं तारीक मुस्लिम शब्बन ने इस मामले को लेकर तेलंगाना स्टेट वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम से जाकर मुलाकात की है। साथ ही एक ज्ञापन देकर उन मुतवल्लियों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है, जिन्होंने खाजा के शव को कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार कर दिया था।
इस मामले को लेकर तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड ने कब्रिस्तानों की प्रबंध समितियों और देखभाल करने वालों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है। मामले पर तेलंगाना वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने कहा कि उन्होंने उन कब्रिस्तानों में टीमें भेजी हैं, जिन्होंने मृतक को दफनाने से इनकार किया था। सलीम ने मुस्लिम मृतक को हिंदू श्मशान घाट में दफनाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रबंध समितियाँ दफनाने से इनकार नहीं कर सकती हैं। भले ही वह कोई कोरोन वायरस से मृत व्यक्ति हो या फिर गैर स्थानीय या एक यात्री ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हैं और वे किसी भी मुस्लिम को दफनाने से इनकार नहीं कर सकते।
इससे पहले एक ऐसा ही मामला मल्लापुर के एक कब्रिस्तान में सामने आया था, जहाँ पर कब्रिस्तान की देखभाल करने वाले कर्मचारी ने मृतक मुस्लिम व्यक्ति के बाहरी होने का दावा करते हुए दफनाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मृतक सलीमुद्दीन सिद्दीकी के परिजनों ने कॉन्ग्रेस पार्टी के स्थानीय मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की थी, जिसके बाद दूसरे कब्रिस्तान में मुस्लिम व्यक्ति को दफनाने की व्यवस्था की गई थी।

तेलंगाना: कुएँ से निकले बिहार और बंगाल के मजदूरों के शव

तेलंगाना
तेलंगाना में नौ मजदूरों के शव मिले (साभार: kanv न्यूज़)
तेलंगाना के वारंगल जिले से चौंकाने वाली घटना सामने आई हैं। यहाँ एक कुएँ से कल (21मई 2020) से लेकर अब तक कुल 9 प्रवासी मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं।
खबरों के अनुसार शव वारंगल जिले के गीसुकोंडा मंडल के गोर्रेकुंटा गॉंव में कोल्डस्टोरेज के पीछे बने कुएँ में मिले हैं। सभी मृतक प्रवासी मजदूर थे। बंगाल और बिहार के रहने वाले थे और कोल्डस्टोरेज में काम करते थे।
यह घटना उस वक्त उजागर हुई जब जूट मिल के मालिक एस. भास्कर गुरुवार को गोदाम पहुँचे। उन्होंने देखा कि एक परिवार के सभी सदस्य लापता हैं। उनके मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ थे। लिहाजा उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया। इसके बाद शाम के वक्त खोजबीन के दौरान इन लोगों की लाश कुएँ से मिली।
मकान मालिक ने बताया कि लॉकडाउन होने के बाद वे सभी उनके गोदाम के एक कमरे कमरे में रहते थे। आमदनी बंद होने के बाद वे परेशान हो गए थे और अपने-अपने गाँव जाना चाहते थे।
पुलिस ने बताया कि कुएँ से पहले पंप के जरिए पानी निकाला गया, उसके बाद शव बाहर निकाले जा सके। ये सारे शव दो परिवार के थे। छह मृतक एक ही परिवार से हैं। इनमें एक बच्चा और एक महिला भी थी।
बहरहाल गीसुगोंडा पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम हॉस्पिटल भेजा गया है। साथ ही संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर जाँच में जुट गई है। साथ ही स्थानीय लोगों से भी पड़ताल की जा रही है।

मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा : एक ही थाली में 6-7 लोग खाना ही नहीं, सेक्स करना भी सिखाते थे

तबलीगी जमात, कोरोना वायरसतबलीगी जमात का नजामुद्दीन स्थित मरकज यूॅं ही देश में कोरोना वायरस संक्रमण का केंद्र बनकर नहीं उभरा है। वहॉं न केवल सरकार निर्देशों का उल्लंघन कर आयोजन हुए, बल्कि मरकज की दिनचर्या भी कुछ ऐसी थी जिससे संक्रमण फैलना ही था। यहॉं तक कि एक ही थाली में बैठकर 6-7 लोग खाना खाते थे।
यह खुलासा तेलंगाना के एक व्यक्ति ने किया है। वह मरकज में बीते साल नवंबर में 21 दिनों तक ठहरा था। उक्त व्यक्ति ने ‘स्वराज्य’ के स्वाति गोयल शर्मा से बातचीत की। इस दौरान उसने कई चौंकाने वाले दावे किए। यहाँ हम इस व्यक्ति का बदला हुआ नाम ‘जॉनी’ इस्तेमाल करेंगे।
जॉनी शुरू में ईसाई था। धर्मांतरण कर इस्लाम अपना लिया। उसने अपनी प्रेमिका के परिवार को ख़ुश करने के लिए ऐसा किया। एक डॉक्टर ने उसका लिंग-विच्छेद (खतना) किया। उसकी सलाह पर ही जॉनी ने तबलीगी जमात में शामिल होने का फ़ैसला किया। नवंबर में मरकज़ में जाने से पहले वह कई दिनों तक तेलंगाना की विभिन्न मस्जिदों में प्रवास कर चुका था।

उसने बताया कि तबलीगी जमात पूरी दिनचर्या तय करता है। खाने-पीने से लेकर मल-मूत्र त्याग करने तक सब कुछ। यहाँ तक कि सेक्स कैसे करना है, ये भी जमात ही सिखाता था। जॉनी को भी उस ‘ऑर्थोडॉक्स’ संस्था से जुड़ाव हो गया था और वो सब कुछ करता था, जैसे कहा जाए।
हालाँकि, जॉनी को जमातियों के रहन-सहन का तरीका पसंद नहीं आया। उसने कहा कि मरकज़ आज कोरोना वायरस का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है, ये आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं है। उसने वहाँ के तौर-तरीकों का जिक्र करते हुए बताया कि ये निश्चित है कि अगर वहाँ एक व्यक्ति को कोई ऐसा संक्रमण हुआ तो फिर बाकियों को भी हो ही जाएगा। जॉनी ने बताया:
“वहाँ 4 लोग एक साथ बैठ जाते हैं और एक ही प्लेट में भोजन करते हैं। रोटी, चावल और करी वगैरह भी एक ही प्लेट में खाते थे। यहाँ तक कि हम चम्मच का भी प्रयोग नहीं किया करते थे और साथ ही खाते थे। कभी-कभी 6-7 लोग भी ऐसा ही करते थे। अंदर बाथरूम बहुत कम हैं और सभी को शेयर करना पड़ता है। हालाँकि, एक समय पर मरकज़ में निश्चित लोग ही रहते हैं। लोग वहाँ आते-जाते रहते हैं। कभी-कभी तो वहाँ हज़ार से भी अधिक लोग एक साथ रह रहे होते हैं। इतनी भीड़ होती है कि आप दिन में कभी भी बाथरूम जाएँ, अंदर कोई न कोई होता है और आपको 5-7 मिनट इन्तजार करना ही करना पड़ेगा।”
जॉनी ने बताया कि मरकज़ के बाथरूम को रोज साफ़ किया जाता था लेकिन टॉयलेट्स से हमेशा दुर्गन्ध आती ही रहती थी। इतनी संख्या में लोग उसका प्रयोग करते थे कि ऐसा हेमशा होता था। दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर डॉक्टर नूतन मांडेजा ने भी कहा था कि मरकज़ में जिस तरह लोग रहते थे, उसी का पारिणाम है कि आज इतनी संख्या में वहाँ से कोरोना मरीज निकले हैं। उन्होंने कहा था कि वाशरूम और बर्तन साझा करने से ऐसा हुआ।
मरकज़ में स्विमिंग पूल की तरह एक पानी का पूल है, जिसे ‘वुडू’ कहते हैं। ये एक प्रक्रिया है, जिसके तहत मुसलमान नमाज़ पढ़ने से पहले अपने हाथ-पाँव और मुँह को धोते हैं। इसके लिए वहाँ के मुसलमान उसी पानी का प्रयोग करते थे, जिससे वायरस का फैलाव हुआ होगा। जॉनी ने अपने परिवार को नहीं बताया था कि वो दिल्ली में है। वो अभी भी कहता है कि जमात जीवन जीने के सही तौर-तरीके सिखाता है। यहाँ तक कि वहाँ अंदर मोबाइल फोन तक निकालना मना है। बाहर भी सेल्फी वगैरह क्लिक करने पर बाकी मुसलमान ताना देते हैं और पूछते हैं कि तुम किस किस्म के मुसलमान हो?
जनवरी में जॉनी को भी सर्दी-बुखार और कफ हो गया था। उसने कोई दवा नहीं ली। वो बताता है कि 20-25 दिन में वो अपने-आप ठीक हो गया। बकौल जॉनी, जमात ने सिखाया है कि डॉक्टरों के पास नहीं जाना चाहिए और अल्लाह में यकीन करना चाहिए। जॉनी कहता है कि वो इन चीजों को पूरी तरह फॉलो नहीं करता, क्योंकि अगर उसकी तबीयत ज्यादा ख़राब हुई तो उसे अस्पताल जाना ही पड़ेगा।(साभार)
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