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क्षेत्रीय दलों को आधे से अधिक चंदा ‘अज्ञात’ स्रोत से : जगन-स्टालिन-चंद्रशेखर जैसे CM की पार्टी सबसे आगे, ADR की रिपोर्ट से खुलासा

कई दशकों से जनता से लेकर नेता तक देश में फैले भ्रष्टाचार पर अपनी चिंता जाहिर करते रहते हैं, जलपान आदि पर हज़ारों रूपये स्वाह कर मीटिंगें होती रहती है, और मूर्ख जनता समझती है कि "देखो हमने कितनी अच्छी सरकार चुनी है।" जबकि भ्रष्टाचार का स्रोत कहाँ है जनता नहीं अपने ऐशो आराम की ज़िंदगी जीने वाले नेताओं को मालूम होता है। कोई पार्टी इस कटु सच्चाई से इंकार नहीं कर सकती। जिस दिन सियासती पार्टियां गुप्त दान लेना बंद कर देंगी, खुले दान भी एक निश्चित सीमा तक समझ लो सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त है। अन्यथा सत्ता पाने का मात्र एक लॉलीपॉप। गरीब दास बन चुनाव लड़ते हैं, लेकिन पांच साल बाद वही गरीब दास करोड़पति होता है। कभी सोंचा।  

देश में अब तक कितने घोटाले हुए हैं, कभी सोंचा कितने नेताओं को जेल हुई हुई और कितनी वसूली हुई। लेकिन आम जनमानस द्वारा टैक्स चोरी करने पर कितनी सख्ती की जाती है, नेता हैं, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। 
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने नवंबर 11 को अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा ‘अज्ञात’ स्रोतों से मिला था। इन स्रोतों का करीब 95 फीसदी हिस्सा यानि करीब 445 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिले थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में देशभर के 25 क्षेत्रीय दलों को 803.24 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 445.7 करोड़ रुपए कहाँ से आए, इसका कोई हिसाब नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 426.233 करोड़ रुपए (95.616%) चुनावी बांड से आए, तो वहीं 4.976 करोड़ रुपए स्वैच्छिक दान से आए।

दक्षिण की पार्टियाँ लिस्ट में सबसे आगे

सबसे अहम बात ये है कि के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSR Congress, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK और देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली JDS अज्ञात स्रोतों से चंदा पाने वाले क्षेत्रीय दलों की सूची में सबसे ऊपर हैं।
इसमें से TRS को 89.158 करोड़ रुपए का चंदा ‘अज्ञात’ स्त्रोतों से मिला। इसके अलावा TDP को 81.694 करोड़ रुपए, YSR Congress को 74.75 करोड़ रुपए, नवीन पटनायक की BJD को 50.586 करोड़ रुपए और DMK को 45.50 करोड़ रुपए को चंदा अज्ञात स्त्रोतों से मिला।

ज्ञात लोगों ने कुल दान का केवल 22.98% दिया

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इन क्षेत्रीय दलों को 184.623 करोड़ रुपए का चंदा ज्ञात दानकर्ताओं द्वारा दिया गया, जो कि कुल चंदे का 22.98 फीसदी है। बता दें कि ये वो लोग हैं जिनका रिकॉर्ड चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है। इसके अलावा 21.1 फीसदी यानी 172.843 करोड़ रुपए सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशनों की बिक्री, पार्टी लेवी आदि जैसे ज्ञात स्त्रोतों से मिले।
23 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का विश्लेषण करने के बाद 2018-19 के लिए भी इसी तरह के आँकड़े दर्ज किए गए हैं।

डोनर्स की लिस्ट सार्वजनिक करने की माँग

एडीआर के प्रमुख मेजर जनरल अनिल वर्मा (सेवानिवृत्त) ने News18 से बात करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को डोनर्स द्वारा दिए गए चंदे की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। संगठन ने कहा, “चूँकि राजनीतिक दलों की आय के एक बहुत बड़े हिस्से के मूल दाताओं का पता नहीं होता, इसलिए सभी दाताओं की पूरी जानकारी को आरटीआई के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि विदेशी फंडिग पाने वाले किसी भी संगठन को किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है, “सभी दान के भुगतान का तरीका (20,000 रुपये से ऊपर), कूपन की बिक्री से आय, सदस्यता शुल्क आदि को पार्टियों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में बताया जाना चाहिए और इसे आयकर विभाग और चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

डोनर्स नाम उजागर करने को तैयार नहीं

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) समेत कई दलों के नेताओं का कहना है कि ‘अज्ञात’ चंदा ज्यादातर ऐसे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा दिया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से अपना नाम नहीं बताना चाहते हैं।
इन पार्टियों का कहना है कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग को ‘छुपाए नाम’ के बारे में बताते हैं। एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा, “यदि फंड के मैनेजमेंट में कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो चुनाव आयोग या राज्य चुनाव आयोग इसे राजनीतिक दलों के सामने उजागर कर सकता है।” हालाँकि, एडीआर प्रमुख ने पारदर्शिता से बचने के लिए इसे ‘सुविधाजनक कारण’ बताते हुए उनके बयानों को खारिज कर दिया।

बिना पैन विवरण के मिले 25 करोड़ रुपये से अधिक

अक्टूबर में जारी एक अन्य रिपोर्ट में एडीआर ने खुलासा किया था कि 16 से अधिक क्षेत्रीय दलों ने ऐसे 1026 चंदे (लगभग 25 करोड़ रुपये) प्राप्त किये, जिनके पैन कार्ड के विवरण नहीं थे। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि शिवसेना, AIADMK, आम आदमी पार्टी, बीजेडी और वाईएसआर-सी जैसी पार्टियों ने साल 2019-20 में सबसे अधिक चंदा पाने की जानकारी दी थी। इतना ही नहीं, AAP और समाजवादी पार्टी को 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान दान से होने वाली आय में जबरदस्त वृद्धि हुई।

एडीआर क्या है?

एडीआर की वेबसाइट पर बताया गया है कि ADR की स्थापना साल 1999 में इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद के प्रोफेसरों ने मिलकर की थी। एडीआर ने उसी वर्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक रिकॉर्ड का खुलासा करने की माँग की थी।
इसी के आधार पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामा दाखिल कर अपनी आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था।

तेलंगाना : ‘टीआरएस सरकार रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड दे रही’: अरविंद धर्मपुरी, भाजपा सांसद लोकसभा में

2014 से केन्द्र में भाजपा सत्ता में है, जिस कारण समस्त गुप्तचर एजेंसियां भाजपा सरकार के अधीन होने के बावजूद देश से अवैधरूप से रह रहे पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों की पहचान कर देश से निकालने में असमर्थ हो रही है। विपरीत इसके छद्दम धर्म-निरपेक्ष इन लोगों को भारतीयों को मिलने वाली समस्त सुविधाएं उपलब्ध करवा कर संविधान की ली शपथ को झूठा सिद्ध कर रहे हैं और केंद्र में भाजपा सरकार आंखें मूंदे बैठी है। अपने आप को देशभक्त कहने वाली भाजपा इन घुसपैठियों पर कार्यवाही करने में क्यों संकोच कर रही है? क्यों नहीं इनका समर्थन कर रहे नेताओं पर भी सख्ती से पेश आती? क्या अन्य पार्टियों की तरह भाजपा का भी राष्ट्रप्रेम मात्र एक दिखावा है?  

तेलंगाना की टीआरएस सरकार पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड मुहैया कराने का आरोप बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी ने लगाया है। धर्मपुरी तेलंगाना के निजामाबाद से सांसद हैं। 22 मार्च को उन्होंने लोकसभा में कहा कि तेलंगाना राष्ट्र स​मिति (TRS) की सरकार अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्या प्रवासियों को वोटर कार्ड, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दे रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं घुसपैठियों की वजह से राज्य में दंगे हो रहे हैं। लोकसभा में धर्मपुरी ने कहा कि उनका निर्वाचन क्षेत्र निजामाबाद भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन गया। उनके अनुसार 72 रोहिंग्या घुसपैठियों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया है। इनमें से 32 निजामाबाद के बोधन के एक ही पते पर हासिल किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती पड़ताल में यह बात भी सामने आई थी कि इन अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों के पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड भी बने हुए हैं।

फरवरी 2021 में यह पता चला कि पिछले पाँच वर्षों में तेलंगाना में जो 500 पासपोर्ट जारी किए गए, उनमें से 72 फर्जी दस्तावेजों पर हासिल किए गए। शमशाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर जब तीन लोग आव्रजन अधिकारियों के प्रश्नों का उचित उत्तर नहीं दे पाए, तब इस धोखाधड़ी की तरफ अधिकारियों का ध्यान गया। फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करके 32 लोग विभिन्न देशों की यात्रा करने में भी सफल रहे। इनमें से 15 तो भारत लौट आए, लेकिन 17 अभी भी खाड़ी देशों, मलेशिया और सिंगापुर जैसी जगहों पर हैं। उसी महीने में 40 पासपोर्ट के आवेदन हैदराबाद के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को स्थानांतरित कर दिए गए, क्योंकि वे सभी बोधन कस्बे के 4 पतों पर ही जारी किए गए थे। धर्मपुरी ने पुलिस पर भी रोहिंग्या घुसपैठियों की सहायता का आरोप लगाया है। उन्होनें कहा कि जब पुलिस अधिकारी वेरिफिकेशन के लिए जाते हैं तो अपना काम ईमानदारी से नहीं करते।

हाल ही में जम्मू में 46 रोहिंग्या घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ के दौरान उन्होनें हैदराबाद में प्रभुत्व रखने वाली एआईएमआईएम के कम से कम तीन नेताओं का नाम लिया। घुसपैठियों से यह जानकारी मिलने के पश्चात तीनों नेता जाँच एजेंसियों की राडार पर हैं।

धर्मपुरी के अनुसार इन्हीं नेताओं ने बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करने और फिर जम्मू जाने में रोहिंग्या की मदद की। उन्होंने पुलिस पर TRS और एआईएमआईएम के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। बीजेपी सांसद ने कहा कि रोहिंग्या पूरे तेलंगाना में फैल चुके हैं और दंगों के लिए जिम्मेदार भी वही हैं। भैंसा दंगे के लिए भी उन्होंने इन्हें ही जिम्मेदार बताया।

अवलोकन करें:-

असम चुनाव : ‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: सिबमोनी बोरा, कांग

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असम चुनाव : ‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: सिबमोनी बोरा, कांग

उन्होंने कहा, “हाल ही में भैंसा में हुए दंगों में भी रोहिंग्या घुसपैठियों का ही हाथ है। हिंदुओं की हत्या हो रही है, उनके घर और संपत्तियों को जलाया जा रहा है और जेल भी हिन्दू ही भेजे जा रहे हैं।” धर्मपुरी ने केन्द्रीय एजेंसियों से जाँच और रोहिंग्या घुसपैठियों के मददगारों पर कार्रवाई की माँग की।

GHMC चुनाव के बाद BJP के लिए खुला दक्षिण का रास्ता; भाजपा महिलाओं ने मारी बाज़ी

ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) के चुनावों में भाजपा ने जिस तरह से शानदार प्रदर्शन किया है, उससे तेलंगाना में TRS की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा ने इस चुनाव को KCR बनाम मोदी भी नहीं होने दिया और ओवैसी भाइयों की कट्टरवादी राजनीति पर निशाना साधते हुए वोट माँगे। इस चुनाव में अगर सबसे ज्यादा नुकसान किसी पार्टी को हुआ है तो वो TRS है, जिसकी सीटों की संख्या 99 से सीधे 55 पर आकर रुक गई।

5 लोकसभा क्षेत्रों और 24 विधानसभा क्षेत्रों में फैले इस चुनाव के बाद भाजपा की नजर सीधा 2023 में होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव पर है। 120 सदस्यीय विधानसभा में फ़िलहाल TRS के पास 102 और AIMIM के पास 7 सीटें हैं। ये सातों ही सीटें हैदराबाद की ही हैं। ऐसे में भाजपा के पास राज्य में पाने के लिए बहुत कुछ है और हिंदी पट्टी से बाहर निकल कर उत्तर-पूर्व में दबदबा बनाने वाली पार्टी अब बंगाल और दक्षिण में एंट्री ले रही है।

इन चुनाव परिणामों में भाजपा की सबसे बड़ी सफलता ये है कि कोई भी एक दल अपने बलबूते मेयर नहीं बना सकता। भाजपा को अपना मेयर बनाना नहीं है, पार्टी नेता साफ़ कर चुके हैं। ऐसे में अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान जो आरोप लगाया था कि ओवैसी और KCR बंद कमरे में ‘इलू-इलू’ करते हैं और गुप्त समझौता करते हैं, वो अब खुलेआम किया जा सकता है। इससे भाजपा को इन दोनों की मिलीभगत को बेनकाब करने में आसानी होगी।

इस चुनाव में कांग्रेस ने न कुछ खोया और न ही कुछ पाया, पिछली बार भी 2 सीट थीं और अब भी केवल 2 सीट। TRS से भी अधिक दुर्गति अगर हुई है वह है दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियां बांट सत्ता हथियाने वाली आम आदमी पार्टी, जिसने अपने उम्मीदवार आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से उतारे। जिसका उल्लेख चित्रों सहित अपने पिछले लेखों में कर चूका हूँ। उसका कारण है, केवल अपनी नाकामियों को मोदी पर डाल जनता को मुर्ख बनाना, दूसरे कोरोना काल में दिल्लीवासियों को उन्हीं के रहमोकरम पर छोड़ना, रोहिंग्यों को बचा, प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से निकलने को मजबूर करना आदि आदि के कारण आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से मैदान में उतारना पड़ा। कोरोना काल में दिल्ली से बाहर के आये मजदूरों को अपनी और अपने परिवारों की जान को जोखिम में डाल दिल्ली छोड़ने को विवश होना पड़ा था, मुफ्त की रेवड़ियां भी अरविन्द केजरीवाल के इस अपराध को माफ़ नहीं कर पाएंगी। 

सबसे ज्यादा संभावना है कि मेयर TRS का होगा और AIMIM के समर्थन से बनेगा। दोनों दलों के इस गठबंधन को भाजपा 2023 विधानसभा चुनाव में मुद्दे बनाएगी और जनता को बताने की कोशिश करेगी कि ये दोनों दल आपस में मिले हुए हैं। 48 सीटों के साथ भाजपा के पास अब राजधानी हैदराबाद में संगठन का दबदबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। बूथ स्तर पर चुनावी मैनेजमेंट में विश्वास रखने वाली पार्टी के लिए ये अच्छा मौका है।

भाजपा ने इशारा दिया है कि अब आगे उसका निशाना मुख्यमंत्री KCR ही होंगे, जिनकी आरामतलबी को पार्टी जनता के समक्ष रखेगी। उनके बारे में एक कहावत है कि साहब कार से आएँगे और वोट माँगेंगे। उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न कार है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो कई-कई दिनों तक सचिवालय नहीं जाते और जनता के बीच में नहीं आते। ऐसे में ‘निजाम-नवाब कल्चर’ को खत्म करने की बात करने वाली भाजपा ये मुद्दा उठाने से चूकेगी नहीं।

TRS ने मुफ्त स्वच्छ जल देने का वादा किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद का नाम भाग्यनगर रखने का वादा किया। वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी ने वही कट्टरवादी रवैया अपनाते हुए ‘किसी के बाप से न डरने’ वाला बयान दिया था। उनके बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संसाधनों को जिताऊ सीटों पर केंद्रित करने के लिए आधी से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ी, जिससे TRS को फायदा मिला।

हालाँकि, इससे एक नुकसान ये भी हो सकता है कि अब तक कई मुद्दों पर TRS ने संसद में भाजपा का साथ दिया था और राष्ट्रवादी मसलों पर भी KCR अक्सर दूसरी विपक्षी पार्टियों से अलग रुख दिखाती थी। अब इसमें कुछ बदलाव आ सकता है, क्योंकि विपक्ष विहीन राज्य में बिना किसी सिरदर्द के सरकार चला रहे KCR के खिलाफ अब एक मजबूत विपक्ष खड़ा हो रहा है। अब वंशवाद बनाम लोकतांत्रिक पार्टी वाला मुद्दा भी उठेगा।

लेकिन, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की YSRCP के रूप में एक बड़ी पार्टी है, जो संसद में भाजपा का साथ दे सकती है। CAA पर भी आंध्र प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियों ने संसद में भाजपा का साथ दिया था। ऐसे में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव या अहम मसलों और संसद में वोटिंग के मामले में KCR के अन्य विपक्षी दलों का साथ देने के खतरे को भाजपा अब मोल लेने की स्थिति में आ गई है। ओडिशा में नवीन पटनायक भी कुछेक मसलों पर उसका साथ देते हैं।

 भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद में तो रैलियाँ की ही, लेकिन साथ ही जिस तरह से सिकंदराबाद के सांसद जी किशन रेड्डी ने चुनाव प्रचार किया, उससे पार्टी को फायदा मिला। भाजपा जनता को ये समझाने में कामयाब रही कि ओवैसी और KCR साथ हैं। इससे ये भी पता चलता है कि सीएम के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी बढ़ रही है, जो 2023 में उनके 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के साथ चरम पर होगी।

हालाँकि, इसे सिर्फ भाजपा आलाकमान की अंतिम सप्ताह में की गई रैलियों के मद्देनजर ही नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी रणनीति राज्य की यूनिट ने तैयार की थी और प्रदेश भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सड़क पर काफी पहले से उतार रखा था। जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने PV नरसिम्हा राव और NTR के नाम पर बने स्थलों को ध्वस्त करने की बात की तो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो सबसे पहले AIMIM का दफ्तर मिट्टी में मिला दिया जाएगा।

हाल ही में जब हैदराबाद में बाढ़ आई थी, तब पुराने शहर में कुछ AIMIM कार्यकर्ताओं को वित्तीय सहायता देकर इतिश्री कर ली गई। भाजपा ने इस मुद्दे को भी उठाया कि संकट के काल में राज्य की दोनों बड़ी पार्टियाँ नदारद रहीं। TRS का अति-आत्मविश्वास उसे ले डूबा, क्योंकि एग्जिट पोल्स में 75 सीटें देख कर ही KCR-KTR पिता-पुत्र के पोस्टरों का दूध से अभिषेक शुरू हो गया था। ओवैसी को तेजस्वी सूर्या ने ‘नया जिन्ना’ बता दिया, जो मीडिया में बहस का मुद्दा बना।

हालाँकि, वोट शेयर के मामले में चौथे स्थान पर रही भाजपा के लिए ये चिंता का विषय ज़रूर है, लेकिन अब उसके पास एक रणनीति है कि किन क्षेत्रों पर ध्यान देना है और कहाँ उन्हें दिक्कत है। एक और बात जो भाजपा के पक्ष में गई, वो ये है कि KCR के मंत्री बेटे KTR को संगठन और सरकार में बड़ी भूमिका देने के खिलाफ पार्टी ने आवाज़ उठाई और बताया कि भाजपा कैसे इन वंशवादी पार्टियों से अलग है।

योगी फैक्टर और मजबूत हो रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में हमने उनका दमदार स्ट्राइक रेट देखा। वहाँ उन्होंने 18 सीटों पर चुनाव प्रचार किया और उनमें से 13 भाजपा जीतने में कामयाब रही। हैदराबाद में भी जहाँ उन्होंने रैली की, उस सीट को भाजपा ने हथिया लिया। उनके बयान पूरे चुनाव में मीडिया की चर्चा का हिस्सा बने रहे। हिंदुत्व के नए फायरब्रांड नेता के रूप में उनकी स्थिति बहुत ही मजबूत हुई है।

कुल मिला कर भाजपा ने जिस दक्षिण में एंट्री का स्वप्न अटल-आडवाणी के काल से देखा था, वो अब साकार हो रहा है। कर्नाटक में पार्टी सत्ता में रही है और अभी भी है। लेकिन केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में उसके लिए हमेशा चीजें मुश्किल रही हैं। हैदराबाद के सहारे अगर पार्टी तेलंगाना में मजबूत स्थिति में आती है तो फिर पड़ोसी आंध्र और उसके बाद केरल में जा सकती है। तमिलनाडु में AIMIM के साथ गठबंधन जारी रहेगा, अतः निकट भविष्य में वहाँ पार्टी के लिए संभावनाएँ कम हैं।

अंत में बात कॉन्ग्रेस की, जो बात करने लायक ही नहीं है। राहुल-सोनिया प्रचार करने नहीं गए। परिणाम आने के बाद आलाकमान को बचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने कॉन्ग्रेस और TDP के पुराने वोटरों को अपने पाले में किया। हैदराबाद में रहने वाले आंध्र प्रदेश के लोगों की पहली पसंद भाजपा बनी और इस मामले में उसने कॉन्ग्रेस को पछाड़ा। भाजपा को असली आत्मविश्वास नवंबर के दुबक्क उपचुनाव में जीत से मिली थी।

यहाँ एक बात का जिक्र करना आवश्यक है कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना से TDP गायब हो गई। ये होना ही था, क्योंकि विभाजन के लिए हुए आंदोलन में जिस कदर हिंसा हुई थी और जो पागलपन देखने को मिला था, उसके बाद दोनों राज्यों के राजनीतिक दलों का एक-दूसरे के राज्य से सफाया सा हो गया। भाजपा के पास पाने के लिए यहाँ सब कुछ है, खोने के लिए कुछ नहीं। भाजपा का कुछ भी इन दोनों राज्यों में दाँव पर नहीं लगा है।

हैदराबाद नगर निगम चुनाव : TRS को तगड़ा नुकसान, 12 गुना बढ़ी बीजेपी की सीटें, कांग्रेस 2 पर सिमटी

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) की 150 सीटों पर नतीजों का ऐलान हो चुका है। सामने आए परिणामों में टीआरएस ने 56 सीटें हासिल की है, लेकिन पिछली बार के मुकाबले उसे तगड़ा नुकसान हुआ है। सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन भाजपा का रहा। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बीजेपी ने तीसरे नंबर पर धकेल दिया है। इन स्थानीय चुनावों के माध्यम से दक्षिण भारत में भाजपा ने दूसरे राज्य में अपना प्रभुत्व दिखाने से आंध्र प्रदेश का रास्ता सुगम करने के साथ-साथ दक्षिण और पश्चिम भारत में होने वाले चुनावों पर भी इसका असर पड़ता दिख रहा है। 

दूसरे, पंजाब में होने वाले चुनावों में भी भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम दिखाई देने का मुख्य कारण है, दलालों को बचाने के चक्कर में किसानों के नाम पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है, जो इन तीनों में हो रही तू-तू मै-मै से उभर कर आ गयी है।  

भाजपा ने इन चुनावों में 49 सीटें हासिल की है। AIMIM को 43 सीटें मिली है। यानि इस पार्टी को केवल मुस्लिम क्षेत्रों तक ही समेट दिया। कांग्रेस की बात करें तो बिहार चुनाव की तरह हैदराबाद में भी उनका प्रदर्शन निराशजनक है। पार्टी को केवल 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इसके चलते प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है।

साल 2016 में हुए चुनावों की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन इस बार जबरदस्त रहा है। पिछले चुनावों में भाजपा को मात्र 4 सीटें मिली थी। वहीं टीआरएस जिसे 4 साल पहले 99 सीट मिली थीं, अब 56 सीट पर आ गई है। 2016 में AIMIM को 44 सीट मिली थी।

हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में भाजपा की ऐसी बढ़त से ट्विटर पर अचानक ‘भाग्यनगर में भगवाधारी’ ट्रेंड करने लगा है। भगवाधारी भाजपा की जीत के लिए इस्तेमाल हो रहा है, जबकि ‘भाग्यनगर’ शब्द का इस्तेमाल हैदराबाद की जगह किया जा रहा है।

ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने ये दावा किया था कि भाग्यनगर शहर का नाम इस मंदिर के कारण पड़ा। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद में एक चुनावी रैली में कहा था, “अगर हम इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर सकते हैं तो हम हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर क्यों नहीं कर सकते हैं।”

हैदराबाद का नाम "भाग्य नगर" करने के आव्हान से भाजपा को सबसे अधिक लाभ हुआ है, क्योकि मुग़ल काल से पहले इसका वास्तविक नाम हैदराबाद ही था। लेकिन कांग्रेस और इसके समर्थक दलों ने तुष्टिकरण नीति पर चलते कभी हैदराबाद का वास्तविक नाम करने के बारे में बोलना तो दूर की बात है, सोंचा तक नहीं। भाजपा विरोधी किसी भी पार्टी ने वास्तविक इतिहास को प्रकाश में लाने के लिए मंथन तक नहीं किया, ये सब बस हिन्दू-मुस्लिम में आज तक व्यस्त हैं। जिस दिन भाजपा तेलंगाना विधान सभा में सत्ता में आ गयी, निश्चित रूप से हैदराबाद अपने वास्तविक नाम से जाना जाएगा।  

इस ऐतिहासिक जीत के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने भी तेलंगाना के लोगों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा, “तेलंगाना के लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की राजनीति करने वाली भाजपा पर विश्वास दिखाने के लिए आभार।” आगे उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष संजय बंदी को शुभकामनाएँ दी और सभी कार्यकर्ताओं को उनके कठोर परिश्रम के लिए सराहा।

वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा हैदराबाद चुनाव का रुझान जो भी हो, लेकिन राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद हुआ है। हैदराबाद चुनाव का रुझान प्रयागराज की तरह भाग्यनगर का आ रहा है। हैदराबाद में भ्रष्टाचार और वंशवाद के खिलाफ और राष्ट्रवाद के समर्थन में लोगों ने वोट किया है। फाइनल रिजल्ट जो भी आए, राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद रहेगा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में भाजपा के पक्ष में रुझान देश की जीत और राष्ट्रवाद की जीत है, यह लोगों की जीत है।

उधर ट्विटर पर सोशल मीडिया यूजर्स की खुशी थमने का नाम नहीं ले रही। लोग कह रहे हैं कि चूँकि इस बार चुनाव की कमान योगी और शाह के हाथ में थी इसलिए ये परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने खुलेआम कहा था कि हैदराबाद का नाम भाग्यनगर किया जाएगा। यूजर्स का कहना है कि अब हैदराबाद में भाजपा की बढ़त बताती है कि वह भारत को एक अच्छी सरकार देने के लिए तैयार हैं।

तेलंगाना निगम चुनाव : योगी की ओवैसी के गढ़ में सिंह गर्जना ; कर दिया हैदराबाद भगवामय

             ओवैसी के गढ़ में रोड़ शो करते योगी आदित्यनाथ (सभी चित्र साभार एएनआई )
बिहार विधानसभा में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी की निगाह अब तेलंगाना तथा पश्चिम बंगाल पर भी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मोर्चे पर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 28 को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) में मलकजगिरी इलाके में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में सभा के साथ एक रोड शो किया। 

तेलंगाना में पहली बार गगनचुम्बी 'जय श्रीराम' और 'आया आया शेर आया' और 'तेलंगाना में कमल खिलेगा' आदि नारों को सुन बहुत आश्चर्य हुआ। योगी के रोड-शो को देख यह भी आभास हो रहा है कि "क्या कर्नाटक के बाद तेलंगाना दक्षिण भारत का दूसरा राज्य होगा जहाँ भारतीय जनता पार्टी अपना खाता खोल जनता को विकल्प देगी?" क्योंकि अभी तक तेलंगाना में TRS का वर्जस्व होने का कारण जनता के सम्मुख अभी कोई विकल्प नहीं है। TDP और कांग्रेस लगभग शून्य हो चुकी हैं और AIMIM का प्रभुत्व केवल पुराने हैदराबाद तक ही सीमित है, विशेषकर मुस्लिम बहुल क्षेत्र में। अब जनता का रुझान भाजपा की ओर है। इसलिए भाजपा को योगी के समान्तर यहाँ भी काम करने वाला नेता खड़ा करना होगा।

    

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के तेलंगाना के रोड शो में नवंबर 28, 2020 को भारी भीड़ उमड़ी। योगी आदित्यनाथ हैदराबाद में एक दिसंबर को होने वाले निकाय चुनाव (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपिल कॉर्पोरेशन) भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो तथा जनसभा करने के लिए हैदराबाद में हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शाम को हैदराबाद के मलकजगिरी क्षेत्र में एक रोड शो किया। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगे और साथ ही सुपरहिट फिल्म बाहुबली का गाना ‘जियो रे बाहुबली’ भी रोड शो में बजता दिखा। योगी के रोड शो में- ‘आया आया शेर आया…. राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

रोड शो के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए हैदराबाद और तेलंगाना के लोगों को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की पूरी आजादी दी।”

                                       भगवामय होता हैदराबाद 
योगी ने कहा, “बिहार में, AIMIM के एक नव-निर्वाचित विधायक ने शपथ ग्रहण के दौरान ‘हिंदुस्तान’ शब्द का उच्चारण करने से इनकार कर दिया। वे हिंदुस्तान में रहेंगे, लेकिन जब हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने की बात आती है, तो वे संकोच करते हैं। यह AIMIM का असली चेहरा दिखाता है।”

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के लिए मतदान एक दिसंबर को होगा। सीएम योगी ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के 150 वार्डों के लिए होने वाले चुनावों में प्रचार किया। सीएम योगी आदित्यनाथ के हैदराबाद में चुनाव प्रचार को एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी को सीधी चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।

ओवैसी ने यहाँ पर चुनाव में 51 प्रत्याशी उतारे हैं। हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भी असदुद्दीन ओवैसी ने पुराने हैदराबाद के इलाके की सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें से पाँच टिकट हिंदुओं को दिए गए हैं। ओवैसी के 10 फीसदी प्रत्याशी हिंदू समुदाय के हैं। ओवैसी की पार्टी के हिंदू समुदाय के प्रत्याशी उन सीटों पर हैं, जहाँ पर हिंदू-मुस्लिम आबादी करीब-करीब बराबर यानी 50-50 फीसदी है और यहाँ विधानसभा सीट पर भी ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विधायकों का कब्जा है।

योगी के रोड शो से पहले ओवैसी ने कहा था कि अगर बीजेपी सर्जिकल स्ट्राइक करेगी तो एक दिसंबर को वोटर्स डेमोक्रेटिक स्ट्राइक करेंगे। ओवैसी ने किसानों के मुद्दे पर भी केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के ऊपर ठंड में पानी डाला गया, यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है।

हैदराबाद नगर निगम चुनाव : भाजपा सरकार पर दायर होनी चाहिए 132 करोड़ चार्जशीट : के.टी. रामाराव, कार्यकारी अध्यक्ष, तेलंगाना राष्ट्र समिति

केटी रामाराव (साभार: newindianexpress)
तेलंगाना में स्थानीय चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (TSR) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने कहा है कि भाजपा सरकार पर 132 करोड़ चार्जशीट दायर होनी चाहिए। केंद्रीय पर्यावरण और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक चार्जशीट रिलीज़ कर चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार पर कुल 132 आरोप लगाए गए थे। इसके बाद केटी रामाराव की तरफ से यह प्रतिक्रिया आई है। 

रामाराव ने कहा, “भाजपा ने साल 2014 के आम चुनावों के पहले आम जनता से वादा किया था कि हर भारतीय को 15 लाख रुपए मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा पर 132 करोड़ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए। इसके अलावा भाजपा पर 12 करोड़ चार्जशीट इस देश के युवाओं द्वारा दायर की जानी चाहिए, क्योंकि यह सरकार अपने वादे के मुताबिक़ 2 करोड़ नौकरियाँ नहीं दे पाई।” 

खैराताबाद और जुबली हिल संसदीय क्षेत्रों में कई रोड शो के दौरान उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए केटीआर ने और भी कई बातें कही। उन्होंने कहा, “आप (भाजपा) हम पर चार्जशीट क्यों दायर करेंगे? क्या आप अन्नपूर्णा केंद्र बनवाने के लिए चार्जशीट दायर कर रहे हैं या सीसीटीवी कैमरे और एलईडी लाइट्स लगवाने के लिए? किस वजह से हम पर चार्जशीट दायर की जा रही है, पावर से जुड़ी दिक्कतें ठीक करवाने के लिए, पानी से जुड़ी समस्याएँ हल कराने के लिए या हैदराबाद में निवेश लेकर आने के लिए?” 


म्युनिसिपल चुनावों में स्थानीय मुद्दे कम, राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, एक तरफ ओवैसी भाजपा को बिरयानी खाने के लिए बोल रहे हैं, तो वहीं सत्तारूढ़ टीआरएस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की राह पर चलते मुस्लिम तुष्टिकरण को अपनाते इमामों के वेतन में वृद्धि के अतिरिक्त मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों पर भी सरकारी धन खर्च कर मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए सदन में घोषणाएं की जा रही है। ऐसे में हिन्दुओं में रोष बढ़ रहा है कि हिन्दू मंदिरों की तरफ सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। विपरीत इसके मंदिरों में आए चढ़ावे को उनके विकास की बजाए मुस्लिमों को लुभाने में खर्च कर रही है। सरकार मस्जिदों और दरगाहों पर आने वाले चढ़ावे का इनसे हिसाब मांगेगी? क्या ये दोनों हाथों से सरकार को लुटते रहेंगे? 

इसके बाद रामाराव ने भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा टीआरएस नेता कोरोना महामारी और हाल ही में आई बाढ़ के वक्त अपने लोगों के साथ खड़े थे, जबकि भाजपा और कॉन्ग्रेस पता नहीं कहाँ व्यस्त थे। बारिश के बाद आई बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्र के लगभग 6.5 लाख परिवारों को सरकार की तरफ से 10 हज़ार रुपए का आर्थिक सहयोग किया गया था। रामाराव ने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर यह सहायता कार्यक्रम रुकवा दिया। 

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हैदराबाद नगर निगम चुनाव : बीफ बिरयानी पर BJP का पलटवार : ओवैसी को सूअर वाली स्वादिष्ट बिरयानी खिला

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हैदराबाद में नगर निगम चुनावों के मद्देनजर राजनीति तेज हो 

रामाराव ने कहा, “4 दिसंबर के बाद हम इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि जिन परिवारों को आर्थिक सहयोग नहीं मिला है उन तक मदद पहुँचे।” भाजपा ने बाढ़ प्रभावित आबादी की मदद के लिए 25 हज़ार रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान किया था। इसकी आलोचना करते हुए रामाराव ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता है कि भाजपा को ऐसा करने से रोक कौन रहा है? वह आज ही इसे क्यों नहीं शुरू कर देते हैं।” अंत में पिछले ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) चुनावों का उल्लेख करते हुए रामाराव ने कहा, “इस बार हम आपके (जनता) सहयोग से सीटों का शतक लगाना चाहते हैं। हमारे नेताओं को चुनने पर ही प्रदेश का विकास संभव होगा।”  

केंद्र ने रद्द की तेलंगाना के विधायक रमेश चेन्नामनेनी की भारतीय नागरिकता

इस विधायक ने गलत तरीके से ले रखी थी भारतीय नागरिकता, केंद्र ने की रद्द
रमेश चेन्नामनेनी तेलंगाना की वेमुलावाड़ा सीट से विधायक
केंद्र ने तेलंगाना के विधायक रमेश चेन्नामनेनी की नागरिकता रद्द कर दी है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने इस बात की जानकारी दी है.  केंद्र ने कहा कि विधायक एक जर्मन नागरिक हैं और उन्होंने धोखे से भारतीय नागरिकता प्राप्त की है.  केंद्र ने कहा कि राज्य की सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के सदस्य चेन्नामनेनी ने अपने विदेश दौरे के बारे में तथ्य छुपाए हैं. 
गृह मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है "उनके गलतबयानी / तथ्य को छुपाने की वजह से भारत सरकार शुरू में अपना निर्णय लेने में गुमराह हुई. अगर उन्होंने आवेदन करने से पहले इस तथ्य का खुलासा किया होता कि वे एक साल से भारत में नहीं रह रहे थे तो मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारी ने उन्हें नागरिकता की अनुमति नहीं देते." 
सक्षम प्राधिकारी ने माना है कि यह सार्वजनिक रूप से अच्छा नहीं है कि चेन्नामनेनी भारत के नागरिक बने रहें और इसलिए फैसला किया गया है कि उनकी नागरिकता समाप्त कर दी जाए.
आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए चेन्नामनेनी ने कहा, ''तेलंगाना हाई कोर्ट ने पहले एक सकारात्मक निर्णय दिया था लेकिन गृह मंत्रालय ने इस पर विचार नहीं किया और फिर से नागरिकता रद्द कर दी. इसलिए, हम नागरिकता की सुरक्षा के लिए फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे." उन्होंने दावा किया कि मंत्रालय से अनुकूल निर्णय न हो पाने की स्थिति में उन्हें इस मामले पर कोर्ट ने फिर से विचार करने का विकल्प दिया है. 
रमेश चेन्नामनेनी वेमुलावाड़ा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो राज्य की राजधानी हैदराबाद से लगभग 150 किलोमीटर दूर है.  2009 में चेन्नामनेनी एन. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से पहली बार विधायक चुने गए थे. बाद में वे के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस में शामिल हो गए और 2010 में उपचुनाव में फिर से चुने गए. इसके बाद 2014  और 2018 के विधानसभा में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी. 
(इनपुट-एजेंसी)


तेलंगाना: फिर वन कर्मियों की सरेआम की गई पिटाई

तेलंगाना में सरकारी कर्मियों पर हमले के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं अभी हाल ही में वनरक्षक महिला की ऑन ड्यूटी सरेआम निर्दयता से पिटाई की गई थी। वहीं इस घटना के बाद फिर एक घटना सामने आई है, बताया जा रहा है कि जुलाई 1की रात भी दो वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला किया गया, इन कर्मचारियों ने भद्राद्री कोथागुडेम जिले के एक गांव में कुछ लोगों को ट्रैक्टर से जुताई करने से रोक दिया था इसके बाद लोगों ने कर्मचारियों की बुरी तरीके से पिटाई की, मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। 
बताया जा रहा है कि यहां वन क्षेत्र में वन सुरक्षा कर्मी गश्ती कर रहे थे, ग्रामीणों द्वारा वन भूमि के अतिक्रमण की रिपोर्ट मिलने के बाद, वन सुरक्षा कर्मी ट्रैक्टरों के साथ वन भूमि की जुताई रोकने के लिए गए थे तो वहां उनकी पिटाई की गई।

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Telangana: Two forest officials were attacked last night when they stopped some people from ploughing forest land with a tractor, in Mandalapalli of Bhadradri Kothagudem district. The two officers have lodged a complaint with police.
इससे पहले कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले के सिरपुर कागजनगर ब्लॉक में  तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के कार्यकर्ताओं ने वृक्षारोपण अभियान के दौरान पुलिस टीम और वन रक्षकों पर कथित रूप से लाठी-डंडो से हमला किया था। हमले के दौरान वनरक्षक महिला को काफी चोटें आईं थीं उन्होंने आरोप लगाया है कि इस हमले का नेतृत्व स्थानीय टीआरएस विधायक कोनेरू कोनप्पा के भाई ने किया था। 
आरोपी कृष्णा खुद जिला परिषद का चेयरपर्सन है। पुलिस ने टीआरएस नेता कृष्णा सहित 16 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 332, 307, 147, 148, 149, 427 और 507 के तहत मामला दर्ज किया है।यह घटना उस दौरान हुई जब वन अधिकारियों की एक टीम ने जमीन पर पौधे लगाने के कोशिश की, जिस पर टीआरएस नेता ने कथित तौर पर अतिक्रमण किया हुआ था। घायल अनीता को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।


Telangana: Forest Officer C Anitha has been discharged from KIMS Hospital in Hyderabad, where she was receiving treatment after being attacked allegedly by TRS workers in Sirpur Kagaznagar block of Komaram Bheem Asifabad dist, during a tree plantation drive on 29 June. (file pic)
रणदीप हुड्डा ने भी इस मामले पर पीएम से की थी गुहार
इस मामले पर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले में पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई थी। रणदीप हुड्डा ने लिखा, 'राज्य के किसी यूनिफॉर्म ऑफिसर पर अटैक करना उस राज्य पर खुद एक हमला है। एक लेडी फॉरेस्ट ऑफिसर पर कागजनगर(तेलंगाना) में बुरी तरह से हमला कर दिया गया। स्थानीय विधायक कोनेरू कृष्ण के भाई और पुलिस की मौजूदगी में गुंडों द्वारा सरसाला गांव में लेडी फॉरेस्ट ऑफिसर पर ये हमला हुआ। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर कागजनगर में पिछले 3 महीनों से अवैध खेती को रोक रही थी। महिला पर हमला तब हुआ जब वो अपने कर्तव्यों का पालन कर रही थी और सरकारी ट्रैक्टर को बचाने की कोशिश कर रही थी। तभी उसपर लाठियां से हमला हुआ।'

इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिला वन अधिकारी से मारपीट मामले में तेलंगाना के डीजीपी को पत्र लिखा था और इस संबंध में की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मांगी थी। इस घटना के बाद टीआरएस नेता समेत 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

तेलंगाना : विधायक के भाई ने 'महिला अधिकारी' के सिर पर गन्ने से किया हमला

विधायक के भाई ने 'महिला अधिकारी' के सिर पर गन्ने से किया हमला, देखें VIDEO
TRS कार्यकर्ताओं ने पुलिस टीम पर किया हमला
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश में होने वाले चुनाव प्रचार में हर पार्टी भ्रष्टाचार और अपराध पर अंकुश लगाने की बात कर जनता को कितना भ्रमित करते हैं, वह आज कल नेताओं द्वारा ही सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाते नज़र आ रहे हैं। अधिकारियों पर हमला करते दिख रहे हैं। अधिकारी काम करे तो मुसीबत नहीं करे तो मुसीबत।
NOTA वोट में होती वृद्धि 
जनता द्वारा सरकारी काम में रुकावट डालना, मार-पिटाई समझ में आता है, परन्तु नेता किस आधार पर सरकारी कामकाज में रुकावट डाल रहे हैं, जो शायद सिद्ध करता है, देश में फैले व्याप्त भ्रष्टाचार और अपराध में नेताओं का ही हाथ होता है। और इस मनोविकार से शायद ही कोई पार्टी बची हो। ये तो केवल चुनावों में ही एक-दूसरे को आरोपित कर जनता को भ्रमित करते हैं, जिससे निर्दोष तो लॉलीपॉप समझ झांसे में आ जाते हैं, विपरीत इसके भ्रष्टाचारी और अपराधी बेअसर ही दिखते हैं। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि जनसेवा के नाम पर सफेदपोश गुंडों का सियासत पर कब्ज़ा हो रहा है। और जब ऐसे लोगों का बोलबाला रहेगा, देश से भ्रष्टाचार और अपराध किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं हो सकते। शायद यही कारण है आज NOTA के वोटों में वृद्धि हो रही है।
पुलिस पर हमला करते हुए लोगों का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग पुलिस टीम और वन रक्षकों पर हमला कर रहे हैं। एक शख्स ने तो फॉरेस्ट रेंज अधिकारी सी अनीता के सिर पर गन्ने से कई वार किए। कथित तौर पर हमला करने वाले लोग तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (TRS) के बताए जा रहे हैं। मामला तेलंगाना के आसिफाबाद जिले के सिरपुर कगाजनगर का है और यह घटना शनिवार को वृक्षारोपण अभियान के दौरान हुई। अधिकारी ने हमलावर शख्स की पहचान कर ली है. हमलावर का नाम कोनेरू कृष्णा है। वह स्थानीय निकाय का चेयरमैन है और इलाके के टीआरएस विधायक का भाई है। 
क्या ऐसे नेताओं के चलते महिला सशक्तिकरण संभव हो सकता है?
फॉरेस्ट गार्ड की टीम राज्य सरकार के आदेश के बाद इलाके में वृक्षारोपण के लिए गई थी। यह वृक्षारोपण अभियान कालेश्वरम इरीगेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा है जो सीएम के चंद्रशेखर राव का दूसरा सबसे बड़ा सपना है। 

Embedded video

Telangana: A police team & forest guards were allegedly by Telangana Rashtra Samithi workers in Sirpur Kagaznagar block of Komaram Bheem Asifabad district, during a tree plantation drive. (29-06)
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उत्तराखंड में कांग्रेस पार्षद द्वारा युवकों की पिटाई, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी देवगौड़ा द्वारा जेडीयू कार्यक....

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सत्ता का नशा नेताओं पर किस कदर हावी होता है, इसका नमूना मध्य प्रदेश के इंदौर में देखने ....

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हैदराबाद पुलिस ने राजा सिंह पर कथित रूप से खुद को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया. हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम हैदराबाद में...

महिला अधिकारी ने बताया कि वह लोगों को बता रही थीं कि वह सरकार के निर्देशों का पालन कर रही हैं लेकिन भीड़ में किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। पुलिस ने कहा कि वह हमलावरों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार करेगी। 
Randeep Hooda seeks PM Narendra Modi help For Lady forest officer beaten Accident in Telanganaरणदीप हुड्डा ने लगाई पीएम मोदी से मदद की गुहार
जून 30 को एक वीडियो सामने आया था जिसमें तेलंगाना राष्ट्र समिति के कार्यकर्ताओं ने एक महिला वन अधिकारी की जमकर पिटाई की थी। जान बचाने के लिए वन अधिकारी ट्रैक्टर पर चढ़ गई लेकिन फिर भी लोगों ने नहीं छोड़ा। लगातार अधिकारी पर लाठी-डंडों से वार किए गए। महिला बुरी तरह घायल हो गई और मौके पर ही बेहोश हो गई। अब बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने सोशल मीडिया पर इस मामले में पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई है। रणदीप हुड्डा ने हाल ही में घटना का वीडियो शेयर किया है। जिसमें ऑफिसर पर कुछ लोग हमला करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए रणदीप ने पूरा मामला बताया और सरकार को इस तरह ध्यान देने को कहा। 
रणदीप हुड्डा ने लिखा, 'राज्य के किसी यूनिफॉर्म ऑफिसर पर अटैक करना उस राज्य पर खुद एक हमला है। एक लेडी फॉरेस्ट ऑफिसर पर कागजनगर(तेलांगना) में बुरी तरह से हमला कर दिया गया। स्थानीय विधायक कोनेरू कृष्ण के भाई और पुलिस की मौजूदगी में गुंडों द्वारा सरसाला गांव में लेडी फॉरेस्ट ऑफिसर पर ये हमला हुआ। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर कागजनगर में पिछले 3 महीनों से अवैध खेती को रोक रही थी। महिला पर हमला तब हुआ जब वो अपने कर्तव्यों का पालन कर रही थी और सरकारी ट्रैक्टर को बचाने की कोशिश कर रही थी। तभी उस पर लाठियां से हमला हुआ।'


रणदीप आगे लिखते हैं, 'ऐसी ही एक घटना टिपेश्वर अभयारण्य में हुई थी। लोकल माफिया और राजनीतिक समर्थन के चलते। कागजनगर डीएफओ द्वारा पत्र प्रस्तुत किया गया है। सिरपुर-कागजनगर उन आखिरी बचे हुए कॉरिडोर में से है जहां ज्यादा संख्या में टाइगर रहते है। ताडोबा रिजर्व फॉरेस्ट से कवाल टीआर तक में करीब 100 से भी ज्यादा संख्या में टाइगर रहते हैं। कवाल में लगातार टाइगर कम होते जा रहे हैं जिसकी वजह खराब कोरिडोर हैं। डियर नरेंद्र मोदी सर, प्रकाश जावड़ेकर, बाबुल सुप्रियो, हरदीप सिंह पुरी, अमित शाह फॉरेस्ट डिपार्टमेंट स्टाफ देश की इस अमूल्य संपत्ति को बचाने की कोशिश कर रहा है। जो कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार आपराधिक गतिविधियों के कारण खत्म हो रही है। प्लीज मदद करें....।'