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AAP का भ्रष्टाचार: INDI गठबंधन वाले कांग्रेस ने ही ‘कट्टर ईमानदार’ का सर्टिफिकेट कैंसल कर I.N.D.I. गठबंधन में डाल दी फूट; क्या मुस्लिम बीजेपी को वोट न देकर सरकार बनवाएंगे?

                                  आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी 
क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव 
I.N.D.I. गठबंधन का रायता फैला देगा? इसलिए नहीं कि कांग्रेस उस आम आदमी पार्टी के विरुद्ध मैदान में है, जबकि बाकि पार्टियां अरविन्द केजरीवाल के समर्थन में। संभावनाएं है कि कांग्रेस 10/15 सीटें निकाल सकती है। अगर कांग्रेस 10 सीट भी निकाल लेती है जो I.N.D.I. गठबंधन को बिखरने को मजबूर कर देगा। जिस तरह कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ना गठबंधन को चुभता था उससे कहीं ज्यादा केजरीवाल के साथ खड़ा होने की कीमत चुकानी होगी। 

कांग्रेस द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्र सीलम पुर से अपना चुनावी शंकनाद करना साबित कर रहा है कि कांग्रेस अपने खोए वोटबैंक को वापस हासिल कर खड़ा होने की शुरुआत करना I.N.D.I. गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है क्योकि I.N.D.I. गठबंधन का वोटबैंक मुसलमान ही है।   

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार कहते हैं। वो अपनी पार्टी को ईमानदारी का पर्याय बताते हुए उसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं, लेकिन इंडी गठबंधन में शामिल उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के ही नेता ने उनके ईमानदारी के ‘सर्टिफिकेट’ को कैंसिल कर दिया है। कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को न सिर्फ दोहराया है, बल्कि साफ कहा है कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाईयों के चलते शराब नीति के घोटाले से आने वाला पैसा बंद हो गया है, इसलिए दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।

तेलंगाना कांग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने AAP की ईमानदारी पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा कि आप अब क्यों क्राउडफंडिंग का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने साउथ लॉबी और तेलंगाना की MLC के कविता के साथ मिलकर दिल्ली की शराब नीति में भ्रष्टाचार किया था। उनका दावा है कि जब तक केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर चोट नहीं की, तब तक AAP ने शराब नीति के जरिए पैसे बनाए।

चमाला ने कहा, “दिल्ली CM आतिशी अब चुनावों के लिए 40 लाख रुपये जुटाने के लिए जनता से क्राउडफंडिंग माँग रही हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि जब तक ‘साउथ ग्रुप’ सक्रिय था, तब तक उनकी पार्टी ने शराब घोटाले से कमाई की। अब जब भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है, तो उन्हें जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।”

केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद शराब घोटाले की कमाई बंद हो गई, जिससे आम आदमी पार्टी की असलियत सामने आ गई। तेलंगाना कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति से हासिल किए पैसों के जरिए गोवा चुनाव लड़ा और नतीजा यह है कि वहाँ बीजेपी की सरकार है।

एक तरह से ये केंद्र सरकार की तारीफ ही है कि उसने भ्रष्टाचार पर गहरा चोट किया है और शराब की कमाई को बंद कर दिया। कांग्रेस नेता का ये बयान आम आदमी पार्टी को बुरी तरह से एक्सपोज करता है कि उसका भ्रष्टाचार बंद हो गया तो उसे क्राउडफंडिंग की राह पकड़नी पड़ी।

शराब घोटाले से आतिशी का सीधा कनेक्शन रहा है, क्योंकि घोटाले से जुड़े लोगों की वो रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे और चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। ‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था।

अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई।

AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाले और शीशमहल के मामले को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 14 रिपोर्ट्स विधानसभा में पेश नहीं की गईं। इनमें से दो रिपोर्ट्स लीक हो चुकी हैं, जिनमें केजरीवाल के सरकारी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च और शराब नीति से सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।
जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने दिल्ली सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने विधानसभा सत्र बुलाने में कदम पीछे खींच लिए। इससे आपकी ईमानदारी पर संदेह होता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि CAG रिपोर्ट को समय पर पेश करना सरकार की जिम्मेदारी थी।

क्या ‘सर्टिफिकेट’ अब भी दिखाएगी आम आदमी पार्टी या…?

आम आदमी पार्टी की ‘कट्टर ईमानदारी’ पर न केवल राजनीतिक विरोधी, बल्कि सहयोगी दल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। कोर्ट की फटकार और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी की छवि को बड़ा झटका दिया है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी दुविधा वाली बात हो गई है कि वो जनता के बीच क्या मुँह लेकर जाए? ‘कट्टर ईमानदारी’ वाला सर्टिफिकेट खारिज होने के बाद क्या वो इसे महज एक राजनीतिक नारा बताकर अपना पलड़ा झाड़ ले? या बेशर्मों की तरह वो अपने सर्टिफिकेट पर डटी रहे। ऐसे में आम आदमी पार्टी को ECI और CAG की रिपोर्ट्स को सामने लाना इसलिए भी जरूरी है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और ‘अगर’ कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो इस मुद्दे पर भी दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

दिल्ली : अरविन्द केजरीवाल के घड़ियालू आँसू कब तक? 266 करोड़ रूपए /km से सड़क बनाने वाली AAP सरकार 251 करोड़ रूपए /km के द्वारका एक्सप्रेसवे पर कर रही राजनीति

द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) और उसकी लागत को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि यह इतना बड़ा घोटाला है, जिसे खुद केंद्रीय एजेंसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG: Comptroller and Auditor General) भी नहीं दबा पाई। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने 18 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर और 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर जैसे आँकड़े गिनाए।

AAP की प्रियंका कक्कड़ ने 16 अगस्त 2023 को समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत को बिना अप्रूवल के ही बढ़ा दिया गया। आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि दिल्ली में कई सड़कें, कई फ्लाईओवर तय लागत से कम कीमत पर बना डाले।

द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत पर आम आदमी पार्टी जो राजनीति कर रही है, दिल्ली में उसके खुद के आँकड़े कितने कम हैं – यह एक सवाल है। इस सवाल का जवाब दिल्ली में AAP सरकार द्वारा बनाई गई सड़क/ब्रिज/फ्लाइओवर में छिपा है।

प्रियंका कक्कड़ ने शायद सिग्नेचर ब्रिज (signature bridge) का नाम नहीं सुना होगा। 2004 में इस प्रोजेक्ट के बारे में घोषणा की गई, बजट था – 887 करोड़ रुपए। 2007 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार की कैबिनेट ने इसका बजट किया – 1131 करोड़ रुपए। 2015 में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी। प्रियंका कक्कड़ को इसी सिग्नेचर ब्रिज के 2015 के बजट को याद करना चाहिए – 1594 करोड़ रुपए।

675 मीटर लंबी है सिग्नेचर ब्रिज। ब्रिज को कनेक्ट करने वाली सड़क सहित इस पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई है लगभग 6 किलोमीटर। 1594 करोड़ रुपए को 6 से भाग देने पर प्रति किलोमीटर लागत बैठती है – 266 करोड़ रुपए। जिस आम आदमी पार्टी की सरकार ने 266 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से साल 2018 में सड़क बनाई, उसकी राष्ट्रीय प्रवक्ता साल 2023 में 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से बने द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं, यह हास्यास्पद है।

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत, राजनीति, सड़क मंत्रालय का जवाब

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 अगस्त 2023 को ही आँकड़ों सहित विस्तृत जवाब दे दिया था। मंत्रालय ने बताया था कि भारतमाला परियोजना के तहत 18.2 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत का आँकड़ा पूरी परियोजना के लिए था न कि सिर्फ द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए।
मंत्रालय ने यहाँ तक बताया था कि 18.2 से बढ़ कर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर का जो आँकड़ा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दिया, वो तथ्यात्मक तौर पर सही नहीं है।
मंत्रालय ने हालाँकि स्वीकार किया है कि CAG के सुझाव पर ग्रेड आधारित निर्माण अगर किया जाता तो द्वारका एक्सप्रेसवे बनाने की औसत लागत 1200 करोड़ रुपए तक कम हो सकती थी। लेकिन इसमें एक बाधा थी। निर्माण की गति में कमी होती। इसके लिए मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-48 का उदाहरण भी दिया।
द्वारका एक्सप्रेसवे दिल्ली के द्वारका और हरियाणा के गुरुग्राम के बीच देश का पहला 8-लेन एलिवेटेड शहरी एक्सप्रेसवे होगा। 29 किलोमीटर लंबे द्वारका एक्सप्रेसवे का 18.9 किलोमीटर हिस्सा गुरुग्राम में और 10.1 किलोमीटर दिल्ली में पड़ता है। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई में से 23 किलोमीटर एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) है जबकि लगभग 4 किलोमीटर सुरंग है।

क्या है भारतमाला परियोजना

मोटा-मोटी इसे आप देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों का वृहद स्तर पर निर्माण समझ सकते हैं। 74942 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी थी। उस समय 34800 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए 535000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।
भारतमाला परियोजना और इसके लिए शुरुआत में जो बजट कैबिनेट समिति ने आवंटित की थी, उसके साथ द्वारका एक्सप्रेसवे को जोड़ कर देखने से समस्या होगी। अभी हो रही राजनीति भी इसी कारण से है। जमीन पर सड़क बनाने के औसत बजट को पूरी तरीके से एलिवेटेड और सुरंगों वाली प्रोजेक्ट (द्वारका एक्सप्रेसवे) के साथ कॉम्पेयर करना आम और संतरे की तुलना के बराबर है। तुलना अगर करनी ही है तो दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज और उसमें लगे बजट के साथ कीजिए (2018 और 2023 के बीच 5 साल में लागत के बढ़ते आँकड़ों को अगर दरकिनार कर भी दिया जाए तो)।

दिल्ली के LG का आदेश : केजरीवाल सरकार की एक्साइज पॉलिसी की होगी CBI जाँच

दिल्ली (Delhi) के उप राज्यपाल वी के सक्सेना (VK Saxena) ने एक्साइज ड्यूटी-2021-22 के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर शिकंजा कसते हुए सीबीआई जाँच की सिफारिश कर दी है। आरोप है कि अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) ने एक्साइज ड्यूटी के नियमों का उल्लंघन करते हुए शराब लाइसेंसधारियों को गलत तरीके से लाभ पहुँचाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया था कि की GNCTD अधिनियम 1991, व्यापार नियमों के लेनदेन (TOBR)-1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम-2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम-2010 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन किया गया है। इसके अलावा एक्साइज पॉलिसी में नियमों को ताक पर रखकर शराब बेचने वालों को टेंडर बाँटे गए। 22 जुलाई 2022 को अधिकारियों ने कहा कि इसी रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जाँच की सिफारिश कर दी है।

नई आबकारी नीति 2021-22 को पिछले साल 17 नवंबर से लागू किया गया था, जिसके तहत दिल्ली को 32 जोन में बाँटा गया था। इसके तहत शहर भर में 849 दुकानों के लिए निजी बोलीदाताओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए थे। शहर के गैर-पुष्टि क्षेत्रों में स्थित होने के कारण कई शराब की दुकानें नहीं खुल सकीं। उन्होंने बताया कि नगर निगमों ने ऐसे कई ठेकों को सील कर दिया है।

मुश्किल में पड़ सकते हैं मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आबकारी विभाग की भी जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट में उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें इस बात का खुलासा किया गया है कि नई आबकारी नीति के जरिए कोरोना का बहाना बनाकर लाइसेंसिंग फीस को माफ कर दिया गया था। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने शराब कारोबारियों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए 144.36 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचाया है।

बौखलाई AAP

CBI जाँच की सिफारिश होते ही दिल्ली में आम आदमी पार्टी तिलमिला गई है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। भारद्वाज ने कहा, “सीएम केजरीवाल की देश भर में बढ़ती प्रतिष्ठा पंचायत चुनाव में भी केंद्र के लिए खतरा बन गई है। हम कह रहे हैं कि पंजाब की जीत के बाद बीजेपी की केंद्र सरकार हमसे डरी हुई है। आने वाले दिनों में पूछताछ शुरू की जाएँगी।”

AAP नेता ने आरोप लगाया, “अब 2016 की स्थिति आने वाली है। हमें रोकने के लिए सीबीआई, आयकर, ईडी द्वारा पूछताछ शुरू की जाएगी। हमारे काम में बाधा डालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को टार्गेट किया जा रहा है।”

क्षेत्रीय दलों को आधे से अधिक चंदा ‘अज्ञात’ स्रोत से : जगन-स्टालिन-चंद्रशेखर जैसे CM की पार्टी सबसे आगे, ADR की रिपोर्ट से खुलासा

कई दशकों से जनता से लेकर नेता तक देश में फैले भ्रष्टाचार पर अपनी चिंता जाहिर करते रहते हैं, जलपान आदि पर हज़ारों रूपये स्वाह कर मीटिंगें होती रहती है, और मूर्ख जनता समझती है कि "देखो हमने कितनी अच्छी सरकार चुनी है।" जबकि भ्रष्टाचार का स्रोत कहाँ है जनता नहीं अपने ऐशो आराम की ज़िंदगी जीने वाले नेताओं को मालूम होता है। कोई पार्टी इस कटु सच्चाई से इंकार नहीं कर सकती। जिस दिन सियासती पार्टियां गुप्त दान लेना बंद कर देंगी, खुले दान भी एक निश्चित सीमा तक समझ लो सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त है। अन्यथा सत्ता पाने का मात्र एक लॉलीपॉप। गरीब दास बन चुनाव लड़ते हैं, लेकिन पांच साल बाद वही गरीब दास करोड़पति होता है। कभी सोंचा।  

देश में अब तक कितने घोटाले हुए हैं, कभी सोंचा कितने नेताओं को जेल हुई हुई और कितनी वसूली हुई। लेकिन आम जनमानस द्वारा टैक्स चोरी करने पर कितनी सख्ती की जाती है, नेता हैं, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। 
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने नवंबर 11 को अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा ‘अज्ञात’ स्रोतों से मिला था। इन स्रोतों का करीब 95 फीसदी हिस्सा यानि करीब 445 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिले थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में देशभर के 25 क्षेत्रीय दलों को 803.24 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 445.7 करोड़ रुपए कहाँ से आए, इसका कोई हिसाब नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 426.233 करोड़ रुपए (95.616%) चुनावी बांड से आए, तो वहीं 4.976 करोड़ रुपए स्वैच्छिक दान से आए।

दक्षिण की पार्टियाँ लिस्ट में सबसे आगे

सबसे अहम बात ये है कि के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSR Congress, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK और देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली JDS अज्ञात स्रोतों से चंदा पाने वाले क्षेत्रीय दलों की सूची में सबसे ऊपर हैं।
इसमें से TRS को 89.158 करोड़ रुपए का चंदा ‘अज्ञात’ स्त्रोतों से मिला। इसके अलावा TDP को 81.694 करोड़ रुपए, YSR Congress को 74.75 करोड़ रुपए, नवीन पटनायक की BJD को 50.586 करोड़ रुपए और DMK को 45.50 करोड़ रुपए को चंदा अज्ञात स्त्रोतों से मिला।

ज्ञात लोगों ने कुल दान का केवल 22.98% दिया

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इन क्षेत्रीय दलों को 184.623 करोड़ रुपए का चंदा ज्ञात दानकर्ताओं द्वारा दिया गया, जो कि कुल चंदे का 22.98 फीसदी है। बता दें कि ये वो लोग हैं जिनका रिकॉर्ड चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है। इसके अलावा 21.1 फीसदी यानी 172.843 करोड़ रुपए सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशनों की बिक्री, पार्टी लेवी आदि जैसे ज्ञात स्त्रोतों से मिले।
23 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का विश्लेषण करने के बाद 2018-19 के लिए भी इसी तरह के आँकड़े दर्ज किए गए हैं।

डोनर्स की लिस्ट सार्वजनिक करने की माँग

एडीआर के प्रमुख मेजर जनरल अनिल वर्मा (सेवानिवृत्त) ने News18 से बात करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को डोनर्स द्वारा दिए गए चंदे की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। संगठन ने कहा, “चूँकि राजनीतिक दलों की आय के एक बहुत बड़े हिस्से के मूल दाताओं का पता नहीं होता, इसलिए सभी दाताओं की पूरी जानकारी को आरटीआई के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि विदेशी फंडिग पाने वाले किसी भी संगठन को किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है, “सभी दान के भुगतान का तरीका (20,000 रुपये से ऊपर), कूपन की बिक्री से आय, सदस्यता शुल्क आदि को पार्टियों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में बताया जाना चाहिए और इसे आयकर विभाग और चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

डोनर्स नाम उजागर करने को तैयार नहीं

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) समेत कई दलों के नेताओं का कहना है कि ‘अज्ञात’ चंदा ज्यादातर ऐसे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा दिया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से अपना नाम नहीं बताना चाहते हैं।
इन पार्टियों का कहना है कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग को ‘छुपाए नाम’ के बारे में बताते हैं। एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा, “यदि फंड के मैनेजमेंट में कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो चुनाव आयोग या राज्य चुनाव आयोग इसे राजनीतिक दलों के सामने उजागर कर सकता है।” हालाँकि, एडीआर प्रमुख ने पारदर्शिता से बचने के लिए इसे ‘सुविधाजनक कारण’ बताते हुए उनके बयानों को खारिज कर दिया।

बिना पैन विवरण के मिले 25 करोड़ रुपये से अधिक

अक्टूबर में जारी एक अन्य रिपोर्ट में एडीआर ने खुलासा किया था कि 16 से अधिक क्षेत्रीय दलों ने ऐसे 1026 चंदे (लगभग 25 करोड़ रुपये) प्राप्त किये, जिनके पैन कार्ड के विवरण नहीं थे। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि शिवसेना, AIADMK, आम आदमी पार्टी, बीजेडी और वाईएसआर-सी जैसी पार्टियों ने साल 2019-20 में सबसे अधिक चंदा पाने की जानकारी दी थी। इतना ही नहीं, AAP और समाजवादी पार्टी को 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान दान से होने वाली आय में जबरदस्त वृद्धि हुई।

एडीआर क्या है?

एडीआर की वेबसाइट पर बताया गया है कि ADR की स्थापना साल 1999 में इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद के प्रोफेसरों ने मिलकर की थी। एडीआर ने उसी वर्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक रिकॉर्ड का खुलासा करने की माँग की थी।
इसी के आधार पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामा दाखिल कर अपनी आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था।

‘कांग्रेस के ऐतिहासिक घोटाले’ के होते कांग्रेस सोनिया के जन्मदिन को मना रही ‘भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’

विश्व भर में आज यानी 9 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाया जा रहा है। यह भी महज एक संयोग है कि कांग्रेस आज खालिस्तानी आतंकियों की कमर तोड़ देने वाली इंदिरा गाँधी की बहु यानी सोनिया गाँधी का जन्मदिवस मना रही है और वो भी सोनिया गाँधी की लाख मनाही के बावजूद।

मगर सोनिया गाँधी और उनके पुत्र राहुल गाँधी की इच्छा के विपरीत कांग्रेस में अक्सर बहुत से काम होते आए हैं। मसलन, हर बड़े-छोटे चुनाव में हार के बाद दोनों, माँ-बेटे कांग्रेस अध्यक्ष पदों से इस्तीफा पेश करते हैं और पार्टी कार्यकर्ता उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें जबरदस्ती कुर्सी वापस सौंप देते हैं। यह कांग्रेस की परम्परा है।

सोनिया गाँधी की पार्टी अक्सर यह साबित करने का प्रयास करती आई है कि वह भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से पेश आती रही है और इसमें वह ‘जीरो टोलेरेंस’ की नीति का ही पालन करती है। हालाँकि, कांग्रेस का यह दावा अपने आप में ही इस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ होने की पहली गवाही दी है। आज कांग्रेस एक बार फिर खुदको भ्रष्टाचार के खिलाफ बताती नजर आई।

सोनिया गाँधी के जन्मदिन और भ्रष्टाचार विरोधी दिवस जैसे ‘विरोधाभासी अवसर’ पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कांग्रेस को उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ होने का इतिहास याद दिलाने की जिम्मेदारी ली है।


ट्विटर यूजर निरुपम ने एक ऐसी लिस्ट ट्वीट की है, जिसमें कांग्रेस/यूपीए पर लगे तमाम तरह के भ्रष्टाचारों का विवरण दिया गया है।

इसमें अल्फाबेट्स के हिसाब से आदर्श घोटाला, कोल स्कैम, कॉमनवेल्थ स्कैम, बोफ़ोर्स घोटाला, एंट्रिक्स-देवास सौदा, रोजगार गारंटी स्कीम, चारा घोटाला, गाजियाबाद प्रोविडेंट फंड स्कैम, हर्षद मेहता स्टॉक मार्किट स्कैम, आईपीएल स्कैम, जूनियर टीचर्स भर्ती स्कैम, केतन पारेख स्कैम, एलआईसी हाउसिंग स्कैम, खनन स्कैम, एनबीएफसी स्कैम, ओरियंटल बैंक स्कैम, पंजाब एससीएईआरटी स्कैम तक का जिक्र है।

मल्लिकार्जुन नाम के एक ट्विटर यूजर का कहना है कि जर्मन नाज़ी सेना को अपने आप को ठीक उसी तरह से शान्ति का नोबल पुरस्कार दे देना चाहिए, जिस तरह से कांग्रेस खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ होने का अवार्ड देती है।

कांग्रेस पार्टी ने पिछले सत्तर वर्षों में अपने शासन के दौरान ऐसे कई ऐतिहासिक घोटालों को होने दिया, जिससे सरकारी खजाने को कई लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास के कुछ सबसे बड़े भ्रष्टाचार और घोटालों को अंजाम दिया और इस दौरान पार्टी का नेतृत्व खुद सोनिया गाँधी करती रही। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग आज के दिन को एक हास्यास्पद संयोग बता रहे हैं।

पार्टी ने अपने सहयोगियों के साथ जीप घोटाला, 2 जी घोटाला, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला, स्कॉर्पीन पनडुब्बी घोटाला, महाराष्ट्र सिंचाई, कोयला घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले सहित कई घोटालों को अंजाम दिया।

इससे पहले मंगलवार को, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने देश के किसानों के प्रति अपनी स्व-घोषित अद्वितीय श्रद्धा का प्रदर्शन करते हुए ‘महान बलिदान’ करने का फैसला किया था।

अंतरिम पार्टी अध्यक्ष ने घोषणा की थी कि वह 9 दिसंबर को अपने जन्मदिन को हाल ही में पास किए गए फ़ार्म बिल के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर नहीं मनाएगी। यह दीगर बात है कि सोनिया गाँधी फिलहाल गोवा में छुट्टियाँ मना रही हैं।