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कर्नाटक चुनाव : रैली में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने उड़ाए 500 रूपए के नोट: 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जा चुके हैं जेल

                                                                                                                       तस्वीर साभार: ANI
साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जा चुके कर्नाटक के कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने श्रीरंगपटना में आयोजित ‘प्रजा ध्वनि यात्रा’ के दौरान कलाकारों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए। घटना मांड्या जिले के बेविनाहल्ली के पास की है। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिख रहा है कि भारी भीड़ के बीच एक बस चल रही है जिसके टॉप पर खुद डीके शिवकुमार हैं और वो बगल में ढोल-नगाड़े बजाने वाले कलाकारों को इनाम का रुपया दे रहे हैं।

इस वीडियो के आने के बाद सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि क्या ऐसा करने की इजाजत राजनेताओं को होती है। कुछ ने कहा कि पहले ये नेता इस तरह खुलेआम पैसे उड़ाते हैं और उसके बाद जब ईडी का छापा पड़ता है तो रोना रोने लगते हैं।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election 2023) के तारीखों की घोषणा कर दी है। राज्य के विधानसभा की कुल 224 सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा। मतदान की तारीख 10 मई 2023 घोषित की गई है। वहीं, चुनाव नतीजों की घोषणा 13 मई को की जाएगी। चुनाव का नोटिफिकेशन 13 अप्रैल को जारी किया जाएगा।

कर्नाटक बीजेपी ने भी यह वीडियो शेयर किया है। बीजेपी ने लिखा है, “ये कहते हैं कि इनकी चार पीढ़ियाँ कांग्रेस में रही हैं। अब यह वीडियो देखने के बाद हर कोई असलियत समझ जाएगा।”

वीडियो पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन नेटीजन्स हैरान हैं कि डीके शिवकुमार साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जाने के बावजूद ऐसी हरकत कैसे कर सकते हैं। उस समय दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 लाख 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी।

क्षेत्रीय दलों को आधे से अधिक चंदा ‘अज्ञात’ स्रोत से : जगन-स्टालिन-चंद्रशेखर जैसे CM की पार्टी सबसे आगे, ADR की रिपोर्ट से खुलासा

कई दशकों से जनता से लेकर नेता तक देश में फैले भ्रष्टाचार पर अपनी चिंता जाहिर करते रहते हैं, जलपान आदि पर हज़ारों रूपये स्वाह कर मीटिंगें होती रहती है, और मूर्ख जनता समझती है कि "देखो हमने कितनी अच्छी सरकार चुनी है।" जबकि भ्रष्टाचार का स्रोत कहाँ है जनता नहीं अपने ऐशो आराम की ज़िंदगी जीने वाले नेताओं को मालूम होता है। कोई पार्टी इस कटु सच्चाई से इंकार नहीं कर सकती। जिस दिन सियासती पार्टियां गुप्त दान लेना बंद कर देंगी, खुले दान भी एक निश्चित सीमा तक समझ लो सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त है। अन्यथा सत्ता पाने का मात्र एक लॉलीपॉप। गरीब दास बन चुनाव लड़ते हैं, लेकिन पांच साल बाद वही गरीब दास करोड़पति होता है। कभी सोंचा।  

देश में अब तक कितने घोटाले हुए हैं, कभी सोंचा कितने नेताओं को जेल हुई हुई और कितनी वसूली हुई। लेकिन आम जनमानस द्वारा टैक्स चोरी करने पर कितनी सख्ती की जाती है, नेता हैं, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। 
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने नवंबर 11 को अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा ‘अज्ञात’ स्रोतों से मिला था। इन स्रोतों का करीब 95 फीसदी हिस्सा यानि करीब 445 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिले थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में देशभर के 25 क्षेत्रीय दलों को 803.24 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 445.7 करोड़ रुपए कहाँ से आए, इसका कोई हिसाब नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 426.233 करोड़ रुपए (95.616%) चुनावी बांड से आए, तो वहीं 4.976 करोड़ रुपए स्वैच्छिक दान से आए।

दक्षिण की पार्टियाँ लिस्ट में सबसे आगे

सबसे अहम बात ये है कि के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSR Congress, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK और देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली JDS अज्ञात स्रोतों से चंदा पाने वाले क्षेत्रीय दलों की सूची में सबसे ऊपर हैं।
इसमें से TRS को 89.158 करोड़ रुपए का चंदा ‘अज्ञात’ स्त्रोतों से मिला। इसके अलावा TDP को 81.694 करोड़ रुपए, YSR Congress को 74.75 करोड़ रुपए, नवीन पटनायक की BJD को 50.586 करोड़ रुपए और DMK को 45.50 करोड़ रुपए को चंदा अज्ञात स्त्रोतों से मिला।

ज्ञात लोगों ने कुल दान का केवल 22.98% दिया

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इन क्षेत्रीय दलों को 184.623 करोड़ रुपए का चंदा ज्ञात दानकर्ताओं द्वारा दिया गया, जो कि कुल चंदे का 22.98 फीसदी है। बता दें कि ये वो लोग हैं जिनका रिकॉर्ड चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है। इसके अलावा 21.1 फीसदी यानी 172.843 करोड़ रुपए सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशनों की बिक्री, पार्टी लेवी आदि जैसे ज्ञात स्त्रोतों से मिले।
23 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का विश्लेषण करने के बाद 2018-19 के लिए भी इसी तरह के आँकड़े दर्ज किए गए हैं।

डोनर्स की लिस्ट सार्वजनिक करने की माँग

एडीआर के प्रमुख मेजर जनरल अनिल वर्मा (सेवानिवृत्त) ने News18 से बात करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को डोनर्स द्वारा दिए गए चंदे की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। संगठन ने कहा, “चूँकि राजनीतिक दलों की आय के एक बहुत बड़े हिस्से के मूल दाताओं का पता नहीं होता, इसलिए सभी दाताओं की पूरी जानकारी को आरटीआई के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि विदेशी फंडिग पाने वाले किसी भी संगठन को किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है, “सभी दान के भुगतान का तरीका (20,000 रुपये से ऊपर), कूपन की बिक्री से आय, सदस्यता शुल्क आदि को पार्टियों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में बताया जाना चाहिए और इसे आयकर विभाग और चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

डोनर्स नाम उजागर करने को तैयार नहीं

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) समेत कई दलों के नेताओं का कहना है कि ‘अज्ञात’ चंदा ज्यादातर ऐसे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा दिया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से अपना नाम नहीं बताना चाहते हैं।
इन पार्टियों का कहना है कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग को ‘छुपाए नाम’ के बारे में बताते हैं। एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा, “यदि फंड के मैनेजमेंट में कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो चुनाव आयोग या राज्य चुनाव आयोग इसे राजनीतिक दलों के सामने उजागर कर सकता है।” हालाँकि, एडीआर प्रमुख ने पारदर्शिता से बचने के लिए इसे ‘सुविधाजनक कारण’ बताते हुए उनके बयानों को खारिज कर दिया।

बिना पैन विवरण के मिले 25 करोड़ रुपये से अधिक

अक्टूबर में जारी एक अन्य रिपोर्ट में एडीआर ने खुलासा किया था कि 16 से अधिक क्षेत्रीय दलों ने ऐसे 1026 चंदे (लगभग 25 करोड़ रुपये) प्राप्त किये, जिनके पैन कार्ड के विवरण नहीं थे। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि शिवसेना, AIADMK, आम आदमी पार्टी, बीजेडी और वाईएसआर-सी जैसी पार्टियों ने साल 2019-20 में सबसे अधिक चंदा पाने की जानकारी दी थी। इतना ही नहीं, AAP और समाजवादी पार्टी को 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान दान से होने वाली आय में जबरदस्त वृद्धि हुई।

एडीआर क्या है?

एडीआर की वेबसाइट पर बताया गया है कि ADR की स्थापना साल 1999 में इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद के प्रोफेसरों ने मिलकर की थी। एडीआर ने उसी वर्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक रिकॉर्ड का खुलासा करने की माँग की थी।
इसी के आधार पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामा दाखिल कर अपनी आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था।

मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग को बताया जिम्मेदार; अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, 2 मई की काउंटिंग भी रोक देंगे

मद्रास हाईकोर्ट ने देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए पूरी तरह से चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। उच्च न्यायालय ने अप्रैल 26, 2021 को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। उसने राजनीतिक रैलियों में आयोजन की अनुमति देने के लिए भी चुनाव आयोग को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी पूरी तरह से चुनाव आयोग से खिन्न दिखे।
इसमें दो राय भी नहीं कि चुनावी रैलियों में मास्क और उचित दूरी आदि नियम सब गायब थे। जनता भी नेताओं के प्रलोभन में फंसती चली गयी। मद्रास हाई कोर्ट को उन सभी पार्टियों पर भी सख्ती दिखानी थी, जो-जो चुनावी मैदान में थीं। जिम्मेदार ये भी हैं। ऐसे में प्रश्न यह भी है कि चुनाव आयोग ने संविधान की सीमा में रहते काम किया, लेकिन अपने सियासती लाभ के लिए पार्टियों ने कोरोना पाबंदियों को क्यों नज़रअंदाज़ किया? तीसरे, जनता क्यों अपनी जान जोखिम में डाल भीड़ में शामिल हुई?

उन्होंने चुनाव आयोग से कहा, “आपका संस्थान अकेले कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। आपके अधिकारियों पर शायद हत्या के आरोप में मामला दर्ज करना चाहिए।” उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान फेस मास्क पहनने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे दिशा-निर्देशों का पालन कराने में चुनाव आयोग संपूर्ण रूप से विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने ECI के वकील से पूछा, “जब रैलियाँ हो रही थीं तब क्या आप किसी और ग्रह पर थे?” मद्रास उच्च-न्यायालय ने ये भी चेतावनी दी है कि 2 मई को होने वाले मतगणना के दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की योजना का खाका आयोग नहीं पेश कर पाया तो वह इस पर रोक लगा देगा।

चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने कहा, “लोगों के स्वास्थ्य को उच्चतम दर्जे की प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ये बात विक्षुब्ध कर देने वाली है कि संवैधानिक संस्थाओं को भी इस सम्बन्ध में बातें याद दिलानी पड़ रही है। अगर कोई नागरिक ज़िंदा बचेगा तभी तो वो एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। परिस्थिति ज़िंदा बचने और सुरक्षा के लिए संघर्षों पर पहुँच गई है। अन्य कोई भी चीज इसके बाद ही आती है।”

इस पीठ में जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति भी शामिल थे। उन्होंने भारत और तमिलनाडु के मुख्य चुनाव आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिवों के साथ विचार-विमर्श करें और मतगणना के दिन कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने के लिए खाका तैयार करें। शुक्रवार को इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। उस दिन कोर्ट देखेगा कि क्या योजना बनाई गई है और क्या कदम उठाए गए हैं।

तमिलनाडु में अप्रैल 25 को दूसरी लहर के दौरान पहली बार पूर्ण लॉकडाउन लगा। केवल ज़रूरी सेवाओं को ही छूट दी गई थी। 1,05,180 सक्रिय कोरोना मामलों के साथ तमिलनाडु भारतीय राज्यों में 8वें स्थान पर है। राज्य में 13,557 लोग अब तक कोरोना के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं। तमिलनाडु में चुनाव संपन्न हो चुका है और सत्ताधारी AIADMK और विपक्षी DMK के बीच मुख्य मुकाबला है।

बंगाल: मतदान से पहले TMC नेता के घर से मिला EVM और VVPAT

                               तृणमूल नेता गौतम घोष के घर से EVM बरामद (फोटो साभार: Times Now)
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता के घर से EVM बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई। राज्य में अप्रैल 6, 2021 को तीसरे चरण का चुनाव भी चल रहा है। ऐसे में इससे 1 रात पहले इस तरह की घटना से TMC घेरे में आ गई है। तुलसीबेरिया के तृणमूल नेता गौतम घोष को ग्रामीणों ने 1 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और 4 वोटर-वेरिफायेबल पेपर ऑडिड ट्रेल (VVPAT) के साथ पकड़ा।

ये घटना उलूबेरिया नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र की है, जहाँ तीसरे चरण में ही वोट डाले जा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार चिरन बेरा ने आरोप लगाया कि ये चीजें TMC नेता के घर से मिली हैं, जिससे पता चलता है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी चुनाव में धाँधली कर रही है। उन्होंने बताया कि EVM और VVPAT को चुनावी ड्यूटी के लिए कार से लाया गया था। साथ ही तृणमूल नेता के घर के बाहर ‘सेक्टर 17’ की चुनावी ड्यूटी की कार भी पड़ी मिली।

वहाँ के सेक्टर अधिकारी को भी ग्रामीणों ने दबोच लिया। सेक्टर ऑफिसर ने अपने बचाव में कहा कि चुनावी ड्यूटी के लिए मशीनों को लाते समय काफी रात हो गई थी। केंद्रीय सशस्त्र बल सो गए थे और उन्होंने बूथ खोला ही नहीं। लिहाजा उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के घर पर रात बिताना उचित समझा। सूचना मिलते ही पुलिस भी वहाँ पहुँची, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

उक्त सेक्टर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके पास से मिली EVM को भी जब्त कर लिया गया है। इन EVM का प्रयोग मतदान में नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज 31 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो सुबह 7 बजे ही शुरू हुआ। साउथ 24 परगना जिले की 16, हावड़ा की 7 और हुगली की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने स्थानीय अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं।

वहीं चुनाव आयोग ने भी इस मामले में बयान जारी किया है। इलेक्शन कमीशन ने कहा कि सेक्टर अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही बताया कि मतदान की प्रक्रिया में उस EVM का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ECI ने आश्वासन दिया कि इसमें शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। 

ज्ञात हो इससे पूर्व असम में भी भाजपा नेता की कार से EVM बरामद हो चुकी हैं, जो अब सोंचने पर मजबूर भी करता है कि चुनाव कहीं आंख मिचोली का खेल तो नहीं। 

 उलूबेरिया नार्थ विधानसभा क्षेत्र में हुई घटना पर लोगों की प्रक्रियाएं :-

सोनिया-राहुल का नाममात्र योगदान, सिब्बल ने दिए सबसे ज्यादा

राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका वाड्रा के इशारे पर नाचने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को शायद नहीं मालूम की पार्टी पर कुंडली जमाए बैठे परिवार का ही पार्टी में योगदान नाममात्र का है, वह तो इनके धन पर ही इनको पागल बनाकर राज कर रहा है। 
भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission) ने 2019-20 में कॉन्ग्रेस को मिले चंदे से जुड़ी एक रिपोर्ट पिछले दिनों जारी की थी। इससे पता चलता है कि अस्तित्व के संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस की वित्तीय हालत भी पतली है। पार्टी 2019-2020 में महज 139.01 करोड़ रुपए का ही चंदा जुटाने में सफल रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार गिरावट आई है। इससे पहले पार्टी को कुल 146 करोड़ रुपए का चंदा प्राप्त हुआ था।

संबंधित कानूनों के प्रावधानों के तहत राजनीतिक दलों को हर साल लोगों, कंपनियों, इलेक्टोरल ट्रस्ट और संगठनों से मिले 20,000 रुपए से अधिक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है।

ईसीआई साइट पर उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को 30 दिसंबर, 2020 को जानकारी दी कि 2019-20 में पार्टी को 139 करोड़ रुपए का योगदान मिला है।

Congress’s contribution report for 2019-20 uploaded on the official ECI site
यह राशि 2018-19 में एकत्र की गई राशि की तुलना में कम है।

Congress’s contribution report for 2018-19 uploaded on the official ECI site
इस रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि पार्टी की स्थापना के बाद से ही इसका कमान सँभालने वाली गाँधी परिवार का योगदान इसमें नाममात्र ही है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी फंड में 50,000 रुपए दिए हैं जबकि उनके बेटे और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 54,000 रुपए का ही योगदान दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं, जिन्होंने अगस्त 2020 में सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर बड़े संगठनात्मक बदलावों की माँग की थी, ने पार्टी आलाकमान के बराबर या उनसे ज्यादा योगदान पार्टी फंड में दिया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और G-23 के सदस्य कपिल सिब्बल ने 2019-2020 के बीच पार्टी कोष में सबसे अधिक तीन करोड़ रुपए का योगदान दिया। कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में कपिल सिब्बल के अलावा, पार्टी फंड में योगदानकर्ता के रूप में जी -23 के अन्य पाँच सदस्य भी शामिल हैं। ‘जी23’ के अन्य सदस्यों में से आनंद शर्मा, शशि थरूर और गुलाम नबी आज़ाद ने 54-54 हजार रुपए, मिलिंद देवड़ा ने एक लाख रुपए और राज बब्बर ने एक लाख आठ हजार रुपए दिए हैं।

इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, स्वर्गीय मोतीलाल वोरा, स्वर्गीय अहमद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री परनीत कौर और अधीर रंजन चौधरी ने भी राहुल गाँधी जितना ही, यानी कि 54,000 का योगदान पार्टी फंड में दिया था।

मजेदार बात यह है कि पिछले साल मार्च में कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी वित्त वर्ष 2019-20 में पार्टी को 54 हजार रुपए दिए थे।

जिन कॉरपोरेट्स ने कॉन्ग्रेस पार्टी के फंड में योगदान दिया उनमें प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust) का 31 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा योगदान है। उसके बाद बिजनेस हाउस आईटीसी (Business House ITC) ने 13 करोड़ रुपए और आईटीसी इन्फोटेक ने 4 करोड़ रुपए का दान किया है।

केजरीवाल के कई विधायकों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले!

2014 में प्रधानमंत्री बनने पर नरेन्द्र मोदी ने राजनीति को अपराध मुक्त करने का वायदा किया था, जिस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। चुनाव आयोग केवल एक सरकारी मोहरा ही सिद्ध हो रहा है, क्योकि जब कोई अपराधी अथवा अपराधी प्रवित्ति वाले को सरकारी/अर्ध-सरकारी या कोई प्रतिष्ठित संस्थान तक नौकरी नहीं देता, फिर किस आधार पर चुनाव आयोग ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत देता है? किसी अपराधी प्रवित्ति वाले से किस आधार पर संविधान और कानून का सम्मान करेगा? अपराध में वृद्धि और शायद इसी कारण भ्रष्टाचार देश में व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। भ्रष्टाचार का मतलब कानून और संविधान होने का मजाक। 

दूसरे जो अपराध इन जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जाते हैं, अगर यही अपराध किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा करने पर क्या वह किसी सरकारी ऑफिस में काम कर सकता है? यदि नहीं फिर नेता क्यों? आखिर कब तक कानून और संविधान को ये नेता खिलौना बनाते रहेंगे। 
दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार सिर्फ अराजकता से ही नहीं, बल्कि आपराधियों से भी भरी हुई है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के 57 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से आधे से अधिक विधायकों के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, रेप जैसे संगीन अपराधों के तहत केस दर्ज हैं और ये जेल भी जा चुके हैं।

जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. डी सी प्रजापति ने दिल्ली पुलिस से सूचना के अधिकार के तहत आम आदमी पार्टी के विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी मांगी। उन्हें दिल्ली पुलिस की तरफ से जो जानकारी दी गई है, उससे साफ पता चलता है कि आम आदमी पार्टी सिर्फ अपराधियों की पार्टी बनकर रह गई है। 2005 से आरटीआई एक्टिवस्ट के तौर पर काम कर रहे है डॉ. प्रजापति के मुताबिक ऐसा नहीं है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद इन विधायकों पर आपराधिक केस दर्ज हुए हैं। बल्कि सच्चाई ये है कि आधे विधायकों पर 2014 के पहले से ही केस दर्ज हैं, यानि ईमानदारी का ढोल पीटने वाले केजरीवाल ने जानबूझ कर अपराधियों को टिकट देकर दिल्ली वालों को धोखा दिया है।

आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक केजरीवाल की सरकार में मंत्री रह चुके सोमनाथ भारतीय के खिलाफ सुरक्षाकर्मी से मारपीट का केस दर्ज है। ओखला से आप विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ महिला से यौन उत्पीड़न का केस दर्ज है। मेहरोली से विधायक नरेश यादव के खिलाफ कुरान फाड़ने का केस है तो देओली से विधायक प्रकाश जरवाल के खिलाफ महिला से छेड़छाड़ का मामला दर्ज है। संगम विहार से विधायक दिनेश मोहनिया के खिलाफ भी महिला से छोड़छाड़ और धमकी देने का केस दर्ज है। विकासपुरी से एमएलए महिंद्रा यादव के खिलाफ दंगे भड़काने का मामला दर्ज है, तो त्रिनगर से विधायक जितेंद्र तोमर के खिलाफ फर्जी डिग्री का केस पुलिस में दर्ज है। कोंडली से विधायक मनोज कुमार के खिलाफ महिला से छेड़खानी के केस दर्ज है तो मटिया महल से रहे आप एमएलए असीम अहमद खान के खिलाफ रिश्वतखोरी का केस दर्ज है।

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली से सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी कई थानों में केस दर्ज हैं। केजरीवाल, सिसोदिया, गोपाल राय के खिलाफ संसद मार्ग थाने में आईपीसी की धारा 186, 353, 147, 148, 149, 188 के तहत 2012 से केस दर्ज है। केजरीवाल के खिलाफ इसी थान में 2013 में धारा 117, 149 के तक मामला दर्ज हुआ था, जो आज तक लंबित है। केजरीवाल, सिसौदिया, सोमनाथ भारती और राखी बिरला के खिलाफ इसी थाने में 20 जनवरी, 2014 में धारा 349, 147, 149, 186,188 के तहत केस दर्ज हुआ था।

दिल्ली के नौटंकीबाज मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री सिसौदिया के खिलाफ तुगलकाबाद थाने में भी 2012 में कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

इतना ही नहीं कोंडली से आम आदमी पार्टी के एमएलए मनोज कुमार के खिलाफ 2013 में 323, 341, 506, 34, 354 आदि संगीन धाराओं के तहत 2013 में ही दिल्ली के गाजीपुर, न्यू अशोक नगर आदि थानों में केस दर्ज था। इतने आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद 2014 में उसे केजरीवाल ने टिकट दिया।

आप के चर्चित विधायक मनोज कुमार के खिलाफ 2014 के पहले 1997 और 2012 में कल्याणपुरी थाने में कई धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो चुका है।

आप विधायक जगदीप सिंह और राजेश ऋषि के खिलाफ भी 2013 और 2014 में दिल्ली के जनकपुरी थाने में 3 डीपीडीपी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था, जिसमें इन्हें दोषी भी पाया गया था।

आप विधायक और केजरीवाल के करीबी सोम दत्त के खिलाफ सिविल लाइन्स थाने में आईपीसी की धारा 223,341,325 के तहत 11 जनवरी, 2015 को केस दर्ज हुआ था, लेकिन सोम दत्त के खिलाफ 1997 में भी इसी थाने में कई धाराओं में मामला दर्ज हो चुका था। यानि विधायक का टिकट मिलने से पहले ही वो आपराधिक वारदातों में लिप्त थे।

आम आदमी पार्टी के विधायक जगदीश प्रधान के खिलाफ आरटीआई के तहत चौंकाने वाली जानकारी मिली है। केजरीवाल का यह विधायक तीन दशकों से आपराधिक वारदातों में लिप्त है। इसके खिलाफ दिल्ली के तुगलक रोड, भजनपुरा, गोकुल पुरी आदि थानों में सन 1987, 198, 1997 में ही आपराधिक केस दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद केजरीवाल ने इस अपराधी को टिकट दिया और विधायक बनाया।

केजरीवाल के खासमखास और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती के खिलाफ 2014 और 2015 में दिल्ली के हौजखास थाने में कई केस दर्ज हुए और उन्हें इसके लिए जेल भी जाना पड़ा।
दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मारपीट के मामले में दोषी ठहराया है। दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार पांडेय ने 2016 में दर्ज किए गए इस मामले के 4 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया है। आप विधायक पर एम्स के सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट का आरोप था।
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आम आदमी पार्टी विधायक को रायबरेली जाते हुए गिरफ्तार किया था। इस दौरान सोमनाथ भारती ने तैश में आकर पुलिसकर्मियों से बहस शुरू कर दी थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने आप विधायक पर काली स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद सोमनाथ भारती ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्यमंत्री आदित्यानाथ को सरेआम धमकी देना शुरू कर दिया। 
स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की एक वीडियो में आप विधायक कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

आपराधिक वारदातों में आम आदमी पार्टी की महिला विधायक भी पीछे नहीं है। आप विधायक प्रमिला टोकस के खिलाफ दिसंबर, 2015 में आर के पुरम थाने में 353, 332, 186, 541, 506 आदि संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल के एक और करीबी विधायक और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ भी पंजाबी बाग थाने में 2013 में कई मामले दर्ज हुए थे। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक बाद में विधायक बनने के बाद भी उन पर जुलाई, 2015 में इसी थाने में धारा 147,148, 149, 353, 186 के तहत केज दर्ज किया गया।

दिल्ली की त्रीनगर सीट से आप विधायक जीतेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ भी 2013 और 2014 में सुभाष प्लेस थाने में कई मामले में आपराधिक केस दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद उन्हें केजरीवाल ने चुनाव में उतारा।

देवली सीट से आप विधायक प्रकाश जरवार के खिलाफ भी अंबेडकर नगर थाने में 2013 में धारा 147,148, 149, 353, 186 के तहत केस दर्ज था। फिर भी ईमानदारी का दंभ भरने वाले केजरीवाल ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा।

आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. डी सी प्रजापति के अनुसार केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के 57 विधायक ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक केस दर्ज हैं। जाहिर है कि ये रिपोर्ट केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी का असलियत सामने वाली है।

उद्धव और आदित्य ठाकरे : चुनावी हलफनामे में झूठ बोलने का आरोप, चुनाव आयोग ने दिए CBDT को शिकायत की जाँच के आदेश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी और मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले के लिए नई मुसीबत खड़ी हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से ठाकरे और सुप्रिया सुले के खिलाफ प्राप्त उन शिकायतों की जाँच करने को कहा है, जिनमें उन पर लोकसभा / विधानसभा चुनावों के लिए अपने हलफनामे में गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगाया गया।

उद्धव और आदित्य ठाकरे ने चुनाव शपथ पत्र में प्रस्तुत की गलत जानकारियां 

टाइम्स नाउ के मुताबिक इसकी शिकायत एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई हैं। बताया जा रहा है कि ठाकरे पिता-पुत्र द्वारा दायर हलफनामों में कुछ गंभीर विसंगतियाँ सामने आई हैं। कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के डेटा में विरोधाभास का हवाला दिया। एक जो बड़ी विसंगति सामने आई है, वह है आदित्य के चुनावी हलफनामे में बैंक खाते का गायब होना, जिसका उल्लेख उद्धव के हलफनामे में किया गया था।

उद्धव के हलफनामे में पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे का बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ज्वाइंट अकाउंट की जानकारी दी गई है। इसमें 9,52,568 लाख रुपए जमा होने की बात कही गई है। हालाँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान सौंपे गए आदित्य के शपथ पत्र में इस अकाउंट का उल्लेख नहीं था। कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों ठाकरे के पास HUF (Hindu Undivided Family) कैटेगरी के तहत शेयर रखने की तारीखें भी अलग-अलग थी।

रिपोर्टों के अनुसार, CBDT जाँच के अग्रिम चरण में है और यह अगले 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंप सकता है।

फिलहाल सीबीडीटी की रिपोर्ट इंतजार है, अगर सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो सीबीडीटी द्वारा आर पी एक्ट की धारा 125 ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत अधिकतम छह महीने की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। यह सजा उन उम्मीदवारों को दी जाती है, जो या तो चुनावी हलफनामे में पूरी जानकारी नहीं देते हैं या फिर झूठी जानकारी देते हैं।

केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती में हों चुनाव-- पंजाब आप

‘आप’ नेताओं ने स्टेट इलैक्शन कमिश्नर के कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर जिला समिति तथा पंचायती चुनाव टालने या सिर्फ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद ही करवाने की अपील की। ‘आप’ नेताओं ने बठिंडा जिले में उनकी पार्टी के प्रत्याशी की हत्या संबंधी सूचना भी चुनाव कार्यालय को दी है। 
राज्य चुनाव कमिश्नर कार्यालय पहुंचे ‘आप’ नेता हरपाल सिंह चीमा, डा. बलबीर सिंह और अन्य विधायकों ने पार्टी की तरफ से मांग पत्र सौंपा। पत्रकारों से बातचीत में नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल में गुप्त समझौता हो गया है। उसके तहत जिला परिषद व ब्लॉक समिति चुनावों को ‘जीतने’ के लिए काम किया जा रहा है। ‘आप’ नेता हिंदा की हत्या का जिक्र करते हुए चीमा ने कहा कि यह राजनीतिक साजिश के तहत किया गया कत्ल है क्योंकि  वह बहुत ही सशक्त प्रत्याशी थे। इसलिए कांग्रेस और अकालियों ने साजिश के तहत रास्ते से हटाया है। हालांकि चीमा इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि यह सियासी विरोधियों का काम है तो हिंदा और हमलावर इकट्ठे बैठकर शराब कैसे पी रहे थे। 
तत्काल गिरफ्तार हों आरोपी

‘आप’ पंजाब के उपाध्यक्ष डा. बलबीर सिंह ने कहा कि पुलिस की जांच में पता लगाया जाना चाहिए और यदि कहीं कोई राजनीतिक साजिश सामने आती है तो पुलिस आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करे। उधर डा. सिंह ने दिल्ली में हाईकमान के साथ बैठक बारे बताया कि उन्हें अरविंद केजरीवाल व अन्य नेताओं ने कहा कि  जितनी जल्द हो सके सुखपाल सिंह खैहरा, डा. धर्मवीर गांधी और एच.एस. खालसा के मनमुटाव को दूर कर पार्टी की मुख्यधारा में लाया जाए ताकि लोकसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जा सके।