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कोरोना : तेलंगाना हाई कोर्ट प्राइवेट अस्पतालों पर सख्त

High infection rate, low testing, tired doctors — KCR's messy ...
                                                                   प्रतीकात्मक 
तेलंगाना हाई कोर्ट ने 7 जुलाई, 2020 को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा कोविड-19 के मरीजों से निर्धारित राशि से अत्यधिक शुल्क लिए जाने को लेकर दायर याचिका पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
कोविड-19 के बढ़ते मामले और अस्पतालों के रुख को देखते हुए यह जनहित याचिका (PIL) एडवोकेट श्रीकिशन शर्मा ने दायर की थी। जिसके तहत राज्य सरकार से यह आग्रह किया गया था कि वह निजी अस्पतालों में मरीजों से अत्यधिक बिल वसूलने को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही याचिका में कोरोना वायरस से संक्रमित सभी मरीजों के इलाज और उसकी बिलिंग के मामले में पारदर्शिता के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए भी कहा गया।
याचिकाकर्ता ने यह बताया कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते वहाँ के राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में ज्यादा बिल वसूलने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन इस तरह का कोई प्रतिबंध तेलंगाना सरकार ने अभी तक निजी अस्पतालों में नहीं लगाया है।
वहीं डिवीजन बेंच ने थुम्बे अस्पताल द्वारा एक दिन के इलाज के लिए 1 लाख रुपए से अधिक कीमत वसूलने पर उसके खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई के बारे में अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया है।
पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का जवाब देने के लिए राज्य सरकार, चार निजी अस्पताल- मेडिसिन, यशोदा, सनशाइन एंड केयर के संस्थापक नेशनल कॉउन्सिल और स्टेट कॉउन्सिल को नोटिस जारी किया गया। इसके साथ पीआईएल में निजी कॉरपोरेट अस्पतालों पर क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन एक्ट, 2010 और इंडियन मेडिकल काउंसिल प्रोफेशनल कंडक्ट एटिकेट एंड एथिक्स रेगुलेशन, 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है।
निजी कॉरपोरेट अस्पतालों द्वारा किए जा रहे शोषण को प्रमाणित करने के लिए याचिकाकर्ता ने पीआईएल में कोविड-19 मरीजों और अन्य रोगियों के बिल का हवाला भी दिया है। इस डिवीज़न बेंच में चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी शामिल थे। जिन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे को लेकर रिपोर्ट माँगी है।
कोर्ट ने इस मामले को 14 जुलाई तक बढ़ाते हुए केंद्र सरकार और निजी अस्पतालों को भी नोटिस जारी किया। वहीं निजी अस्पतालों द्वारा लिए जा रहे अधिकतम राशि को लेकर सोमवार (6 जुलाई, 2020) को लोगों ने ट्विटर के जरिए तेलगांना गवर्नर डॉ. तमिलिसाई सौन्दरराजन से इस मामले को लेकर शिकायत की थी, जिसको देखते हुए राज्यपाल ने निजी अस्पतालों की प्रबंधन टीमों के साथ एक वर्चुअल समीक्षा भी की।
इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में अस्पतालों के विभिन्न प्रतिनिधियों जैसे कि किम्स (KIMS), यशोदा, बसवा तारकम, विरंचि, रेनबो और सनशाइन, कॉन्टिनेंटल और अन्य अस्पतालों लोग मौजूद थे। कॉन्फ्रेंस में राज्यपाल ने बेड की उपलब्धता, सुविधाओं के बारे में विवरण माँगा और निजी अस्पतालों पर भारी भरकम बिल वसूलने के आरोपों पर प्रबंधन से सवाल किया था।
कुछ दिन पहले ही हैदराबाद का यशोदा हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित मनोज कोठारी को हॉस्पिटल से 4.21 लाख रुपए का बिल थमाया था। जिसका भुगतान नहीं कर पाने पर हॉस्पिटल ने जबरन उसे कैद कर लिया था।
मनोज 20 जून को यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया, “29 जून को मैं ठीक हो गया और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने के लिए बोल दिया गया। लेकिन उसी 29 जून से मैं यहीं हॉस्पिटल में लगभग कैद हूँ। ना तो किसी से मिल पा रहा हूँ न ही किसी से बात करने दिया जा रहा है। अगर मुझे कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?” मनोज को बताया गया कि जब वो बाकी रकम का भुगतान करेंगे तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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मनोज कोठारी (फोटो साभार: The News Minute) तेलंगाना से आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार क्या कोरोना व्यापार का नया नाम बन गया है? को...
मनोज कोठारी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का बीमा है। जिसमें कंपनी ने केवल सिर्फ 1.2 लाख रुपए का ही भुगतान किया। इंश्योरेंस कंपनी के अनुसार तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो सिर्फ उसी का भुगतान करेगी। हॉस्पिटल जहाँ मनोज भर्ती हुए, उसका कहना है कि वो बाकी रकम खुद से जमा करें और घर जाएँ। बाद में इंश्योरेंस कंपनी से सेटलमेंट अमाउंट ले लें।

कोरोना पीड़ित मनोज कोठारी ‘कैद’ : हॉस्पिटल का 4.21 लाख रूपए का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ 1.2 लाख रूपए

कोरोना इंश्योरेंस तेलंगाना हॉस्पिटल
मनोज कोठारी (फोटो साभार: The News Minute)
तेलंगाना से आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
क्या कोरोना व्यापार का नया नाम बन गया है? कोरोना के इस कालखंड में जितनी लूट मची हुई है, जो सरकारी दावों को धता दिखा रहे हैं और सरकार भी हाथ पर हाथ रखे बैठी है। लॉक डाउन में हर चीज महँगी। जून 21 को आप नेता संजय सिंह न्यूज़18 पर लाइव शो में कहते हैं कि हमने 5000-5000 रूपए बांटे, लेकिन प्राप्त सूचना के अनुसार दिल्ली में बंटे 2000-2000 रूपए यानि जिसका जहाँ दांव लगा, किसी ने लूट का कोई मौका नहीं छोड़ा। सरकार ने लॉक डाउन अवधि में किसी को नौकरी से न निकालने को कहा, हाँ, इस दौरान तो नहीं, अनलॉक होते ही, छंटनी शुरू हो गयी, मकान मालिक किराये की मांग करने लगे। प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा की जा रही लूट पर अंकुश लगाने पर जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए खूब शोर मचाया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। देखिए:- 
हैदराबाद का यशोदा हॉस्पिटल। यशोदा हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित मनोज कोठारी का इलाज। मनोज कोठारी को हॉस्पिटल से 4.21 लाख रुपए का बिल। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से मनोज कोठारी का बीमा। लेकिन भुगतान सिर्फ 1.2 लाख रुपए का ही।
इंश्योरेंस कपनी का बहाना- कोविड-19 के इलाज के लिए तेलंगाना सरकार ने जितना प्राइस फिक्स किया है, भुगतान सिर्फ उतने का ही। नतीजा- 47 साल के मनोज कोठारी कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने के बावजूद हॉस्पिटल में 29 जून से जबरन रहने को मजबूर।
मनोज 20 जून को यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया, “29 जून को मैं ठीक हो गया और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने के लिए बोल दिया गया। लेकिन उसी 29 जून से मैं यहीं हॉस्पिटल में लगभग कैद हूँ। ना तो किसी से मिल पा रहा हूँ न ही किसी से बात करने दिया जा रहा है। अगर मुझे कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?” मनोज को बताया गया कि जब वो बाकी रकम का भुगतान करेंगे तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
सरकारी दर 
मनोज कोठारी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का बीमा है। फिर 4.21 लाख रुपए के बिल के पेमेंट में क्या दिक्कत है? यहाँ बिल और पेमेंट में सरकारी दर का पेंच फँस गया है। इंश्योरेंस कंपनी के अनुसार तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो सिर्फ उसी का भुगतान करेगी। हॉस्पिटल जहाँ मनोज भर्ती हुए, उसका कहना है कि वो बाकी रकम खुद से जमा करें और घर जाएँ। बाद में इंश्योरेंस कंपनी से सेटलमेंट अमाउंट ले लें।
यशोदा हॉस्पिटल ने हालाँकि इस मुद्दे पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को संपर्क भी किया। अपने लेटर में हॉस्पिटल ने यह तर्क भी दिया कि कोरोना के उपचार के लिए तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो दर बीमार व्यक्ति के खुद के भुगतान के लिए है, न कि किसी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मेडिकल बीमा लिए हुए व्यक्ति के भुगतान के लिए। हॉस्पिटल के इस पत्र का जवाब अभी तक इंश्योरेंस कंपनी ने नहीं दिया है।
परिवार के 2 और सदस्य संक्रमित 
मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई है। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। अफसोस यह कि उन दोनों का इलाज भी इसी यशोदा हॉस्पिटल में ही चल रहा है। मनोज कहते हैं, “मुझे डर है कि पेमेंट वाली बात उनके साथ भी हो सकती है। मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से अपील करता हूँ कि महामारी के इस दौर में इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों में चल रही लूट पर लगाम लगाएँ।”
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। इंश्योरेंस कंपनी ने बताया कि यही दिक्कत अन्य कॉरपोरेट हॉस्पिटलों से भी रिपोर्ट की गई है। इसका कारण कंपनी ने यह बताया कि तेलंगाना सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए सामान्य कॉरपोरेट दरों से 70-80 प्रतिशत की कम दरों पर हॉस्पिटल सुविधाओं को तय कर दिया है। इससे कॉरपोरेट हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच भुगतान को लेकर समस्या आ रही है।
मनोज कोठरी एक नाम हैं। इनकी जगह रमेश, जॉर्ज या संगीता भी हो सकते हैं। ये 5 लाख रुपए का इंश्योरेंस लेते हैं। कमाई में से कुछ बचा कर उसका प्रीमियम भी भरते हैं। यह सोच कर कि कुछ होगा तो हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी बचा लेंगे। लेकिन कागजों में या सरकारी पेंच में या नियम व शर्तें लागू जैसी चीजें धरातल पर इनकी जिंदगी आसान नहीं बल्कि तकलीफदेह बना देती है।
मनोज ने इसके लिए कानूनी रास्ते पर चलने की ठानी। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। खुद पैसे देकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के रास्ते को उन्होंने इनकार कर दिया। एक तरह से सत्याग्रह वाला रास्ता… कॉर्पोरेट से लड़ाई का शायद और कोई रास्ता भी नहीं!
1 दिन के मॉंगे ₹1.15 लाख, बना रखा है बंधक
हैदराबाद से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कोरोना संक्रमित महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि एक निजी अस्पताल ने उन्हें एक दिन के लिए 1.15 लाख रुपए का बिल थमा दिया। इतना भुगतान नहीं करने पर उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।
आरोप लगाने वाली महिला खुद डॉक्टर हैं। वे फीवर हॉस्पिटल में बतौर सर्जन कार्यरत हैं। एक सेल्फी वीडियो में उन्होंने यह आरोप लगाए हैं। यह वीडियो वायरल हो रहा है।
वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि उनका तरीके से उपचार नहीं किया गया और उन्हें डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। वे कहती हैं, “कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद घर पर ही अपना इलाज कर रही थीं और होम क्वारंटाइन में थीं। 1 जुलाई को आधी रात सॉंस की समस्या के बाद वे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुईं।”
वे कहती हैं, “मैं खुद कोरोना वारियर हूँ और ये लोग एक दिन के लिए मुझसे 1.15 लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं। मैं डायबिटिक हूँ फिर भी मुझे यहाँ सही उपचार नहीं मिल रहा है। यह लोग मुझे पर झूठे आरोप भी लगा रहे हैं। मैं मुश्किल में हूँ, मैंने 40 हज़ार रुपए दिए हैं फिर भी इन्होंने मुझे बंद करके रखा है।” उन्होंने इस बाबत पुलिस से भी शिकायत भी दर्ज कराई है।


वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए फीवर हॉस्पिटल के मुखिया डॉक्टर के शंकर ने कहा, “उन्हें पहले ही बताया गया था कि सरकार ने कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाले फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स के लिए अलग से इंतजाम किए हैं। लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दी बिना ही खुद को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा लिया।”
उन्हें घटना की जानकारी तब हुई जब महिला का वीडियो एक स्थानीय समाचार चैनल पर दिखाया जा रहा था। इसके ठीक बाद उन्होंने वहाँ के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर से कहा कि वह जल्द अस्पताल जाकर भुगतान सम्बन्धी विवाद को खुद देखें और महिला को डिस्चार्ज कराएँ। अस्पताल पहुँच कर उन्हें पता चला कि महिला पहले डिस्चार्ज की जा चुकी हैं। फिलहाल आइसोलेशन में है और उनकी स्थिति सामान्य है। शंकर ने यह भी बताया कि वह ड्यूटी के दौरान कोरोना से प्रभावित नहीं हुई थीं।  

निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने का दिया निर्देश

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मोदी सरकार कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर काफी संवेदनशील है। मरीजों के समुचित इलाज के लिए हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशें की जा रही हैं। इसी बीच कई निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के मामले में मनमानी और ज्यादा पैसे मांगे जाने की खबरों के बाद मोदी सरकार हरकत में आ गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए कीमत तय करें। वहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जमीनी स्तर पर कोरोना से रही मृतकों की संख्या केवल शमशान और कब्रिस्तान जाने पर ही ज्ञात होती है। जून 16 को परिचित की मृत्यु होने के कारण निगम बोध घाट जाने पर एक घंटे(12 बजे से 1 बजे तक) में लगभग 14/15 शव देखने पर जब कर्मकांड करने वाले पंडितों से बातचीत करने पर चौकाने वाले आंकड़े सामने आये। संक्षेप में इतना ही कहना है कि "शाम को टीवी पर हुई मौतों की संख्या सुन हंसी आती है, कितने बड़े स्तर पर झूठ बोला जा रहा है। तीन दिन पूर्व गृह मंत्री अमित शाह की केजरीवाल से बातचीत वाले दिन इतने शवों के दाह संस्कार हुआ, बता नहीं सकते। हनुमान मंदिर तक शवों से भरी गाड़ियों की लाइन लगी हुई थी। और एक एम्बुलेंस में 7/8 शव होते हैं, जिसकी आप सब अपनी आँखों से इस समय देख रहे हैं।"
Endless queues & funerals, scared staff — Delhi's Covid crisis ...
Coronavirus latest: worldwide deaths pass 250,000, with US ...दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर आम आदमी पार्टी के जितने भी धुरंदर नेताओं को इतने अपशब्दों से सम्बोधित करते बोले कि "....कोई बताए कि ये...कहाँ के रहने वाले हैं, और... कहते हैं कि दिल्ली में दिल्ली से बाहर वालों का इलाज नहीं होगा। शर्म आती है...ये पाखंडियों को नेता कहने पर शर्म आती है...दिल्ली का नाश करने में लगे हैं....दिल्ली वालों को एक फ्री की हड्डी दिखाओं..." अगर केजरीवाल सरकार गंभीर होती दिल्ली में इतनी बीमारी नहीं बढ़ती। छोटी-सी दिल्ली में Red Zone की कमी नहीं। "बाबू साहब कोरोना से कितनी मौतें हो रही हैं, दूसरे शमशानों और कब्रिस्तानों में जाकर देखिए, तब मालूम होगा कि अख़बारों और टीवी में बताई जाने वाली मौतों में कितना फक्र है। जब सिर्फ एक ही घंटे में इतने दाह संस्कार देखें हैं, शाम तक और कितने होंगे, अंदाज़ा लगा लो।" 
कोरोना बन गया व्यापार 
निगम बोध घाट पर दाह संस्कार करने पर चिता लगाने से पहले ही वहां के सेवादार दो बण्डल पेटी के लिए आवाज़ लगा देते हैं। पहले बण्डल जो 350/400 रूपए में मिलता था, अब मिलता है 700 रूपए का।अस्पतालों पर तो सबकी नज़र है, लेकिन और इस अवैध व्यापार की ओर किसी सरकार का ध्यान नहीं। और यह गोरखधंधा कई वर्षों से चल रहा है।      
कीमतें तय करने और प्रचारित करने का निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि इस मुद्दे पर कई स्थानीय निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ परामर्श करें। इसके बाद जब एक बार कीमत तय हो जाए, तब इसे प्रचारित भी करें ताकि मरीजों और सेवा प्रदाताओं को अच्छी तरह से पता चल जाए।
राज्यों के अस्पतालों में पहले से कीमतें तय
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कई राज्यों ने पहले से ही कोरोना की जांच और इलाज को लेकर अपने राज्यों के अस्पतालों में कीमत तय कर दी है। बयान में आगे कहा गया कि PMJAY पैकेज और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के पैकेज की दरें पहले से ही राज्यों के पास उपलब्ध हैं।
निजी अस्पतालों के साथ मिलकर काम करने पर जोर
वहीं, कुछ राज्यों में क्रिटिकल बिस्तरों की कमी की खबरें भी सामने आई हैं, इसलिए केंद्र ने राज्यों से प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन वाले बेड्स आदि की कमी को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने को कहा है।
स्वस्थ होने की दर 51.08 प्रतिशत तक पहुंची
वहीं मोदी सरकार की सजगता और तत्परता के साथ ही कोरोना मरीजों की जांच और इलाज के लिए सुविधाएं मुहैया करायी जा रही है। समय पर रोग का पता लग जाने और समुचित चिकित्सकीय उपचार से काफी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने की दर में लगातार वृद्धि हो रही हैं। सोमवार को यह दर 51.08 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों में कोरोना से संक्रमित 7419 व्यक्ति स्वस्थ हुए हैं। इन्हें मिला कर अब तक कोरोना से संक्रमित कुल 1,69,797 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में 1,53,106 व्यक्ति सक्रिय चिकित्सीय देखरेख में हैं।
‘कोरोना के मामले तेजी से नहीं, बल्कि सपाट तरीके से बढ़े’
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार (15 जून) को कहा कि सरकार कोरोना महामारी से निपटने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रही है। उन्होंने कोरोना वायरस की वृद्धि दर दिखाते एक ग्राफ के साथ ट्वीट में कहा, ”लॉकडाउन जल्दी लगा दिया गया जिससे कोरोना वायरस के मामले तेजी से नहीं, बल्कि सपाट तरीके से बढ़े। ग्राफ में दिखाया गया कि 20 मार्च को कोरोना मामलों की वृद्धि दर 30 प्रतिशत से अधिक थी जो मई के पहले सप्ताह से करीब पांच प्रतिशत बनी हुई है। अमेरिका, ब्राजील और रूस के बाद कोरोना महामारी के सबसे ज्यादा मामले भारत में है।”

वाजिब दरों पर इलाज की सुविधा मुहैया कराने का प्रयास
मोदी सरकार ने सोमवार(जून 15) को राज्यों और केंद्रशासित प्रदशों से ऐसे बुनियादी ढांचे और वाजिब दरों पर जरूरी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने को कहा है। इस बीच आईसीएमआर ने निषिद्ध क्षेत्रों में कोरोना वायरस के उपचार के लिए त्वरित एंटीजन टेस्ट किटों के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। इससे लेबोरेटरी में जांच के बिना तेजी से उपचार संभव हो सकेगा।

कोरोना काल में जनता को कैसे लूट रहे हैं प्राइवेट अस्पताल? कहीं थर्मल स्क्रीनिंग के बदले 100 रूपये तो कहीं 52 हजार की पीपीई किट

कोरोना काल में अस्पतालों की लूट. सांकेतिक तस्वीर (गूगल)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कोरोना के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर उजागर करने का प्रयास किया, जिसे आलोचनाओं के घने बादलों ने ढक दिया। स्वामी विवेकानंद कहना है की "कभी उपदेशक पर मत जाओ, उसके उपदेशों पर जाओ।" किसी ने प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर मंथन करने का प्रयास नहीं किया। लेकिन है हकीकत। जिस का केन्द्र सरकार को संज्ञान लेकर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। 
आपने कभी गिद्ध देखा है? एक बड़ा सा पक्षी जो अक्सर मरे हुए जानवरों की लाश को नोच-नोचकर खाता हुआ नजर आ जाता है। गिद्ध का खाना ही यही है, सड़ी-गली हुई लाश जिससे वो अपना पेट भरता है। चलो ये तो गिद्ध की नियती है क्योंकि प्रकृति ने उसे यही खाना दिया है ताकि उसका भी पेट भर सके और मरे जानवरों की गंध और बैक्टीरिया से आसपास कोई प्रभावित ना हो।लेकिन एक गिद्ध इंसानी शक्ल में भी होता है जो बस इस इंतजार में बैठा होता है कि आदमी बीमार पड़े और वो उसके जीवनभर की गाढ़ी कमाई को एक मिनट में चट्ट कर जाए। इंसानी शक्ल में दिखने वाले ये गिद्ध दरअसल प्राइवेट अस्पताल के मैनेजमेंट में पाए जाते हैं जिनके लिए मरीज सिर्फ और सिर्फ वो जरिए है जिसे वो नोच-नोचकर खा लेना चाहते हैं
पूरी दुनिया इन दिनों कोरोना महामारी से जूझ रही है. डॉक्टरी पेशे से जुड़े लोगों को कोरोना वॉरियर्स कहा जा रहा है जो अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचा रहे हैं। कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इस दौरान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। उनके प्रति हमारे दिल में अपार श्रद्धा है। उनका कर्ज शायद हम और आप जीवन भर चुका भी नहीं सकेंगे लेकिन इसी दौर में सफेद कोर्ट पहने कुछ ऐसे भी गिद्ध हैं जो लोगों की गाढ़ी कमाई को चूस लेना चाहते हैं

कई प्राइवेट अस्पताल कोरोना के इलाज के नाम पर लोगों से लाखों रूपये मांग रहे हैं। सोशल मीडिया ऐसी खबरों से भरा हुआ है जहां प्राइवेट अस्पताल की मनमानी देखने को मिल रही है। दिल्ली का सरोज अस्पताल कह रहा है कि अगर आपको इलाज करवाना है तो पहले चार लाख रूपये काउंटर पर जमा करो। कम से कम बिल 3 लाख का तो होगा ही
दिल्ली में एक और तीरथ राम शाह चेरिटेबल अस्पताल हैं जहां टाइफाइड की वजह से चार दिन अस्पताल में रहने वाले मरीज के हाथ में एक लाख रूपये का बिल थमा दिया जाता है। बिल की डीटेल कहती है कि उसमें से 52 हजार रूपये सिर्फ कोविड पीपीई किट और मास्क का है। अब जरा सोचिए कि जो डॉक्टर किट और मॉस्क पहनकर इलाज कर रहे हैं उनके एक दिन की किट पर कितना खर्च होता होगा? चलो मान लेते हैं वार्ड में कम से कम 5 लोग हैं और हर मरीज से 50 हजार रूपये मास्क और किट के नाम पर लिए जाते हैं तो कितना पैसा होता है?
देश में पता नहीं कितने सरोज और तीरथ राम अस्पताल हैं, जहाँ की मरीज की डिस्चार्ज डिटेल देखने पर सरकार को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा जा रही खुली लूट सामने आएगी। सबसे पहले जहाँ हर आने वाले मरीज का कोरोना टेस्ट किया जाता है और कोरोना की रिपोर्ट आने तक लगभग एक लाख रूपए के लपेटे में मरीज आ जाता है। जबकि उसकी वास्तविक बीमारी का इलाज कोरोना की रिपोर्ट आने के बाद ही होता है। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में इंजेक्शन आदि में इस्तेमाल होने वाली रुई के लिए पूरे बण्डल के पैसे लिए जाते हैं। जबकि डिस्चार्ज करते समय बचा हुआ बण्डल तक रख लिया जाता है, क्या यह लूट नहीं? 
अब दूसरी कहानी झारखंड के शहर रांची की जहां ऑर्किड हॉस्पिटल में कोरोना के नाम पर अस्पताल प्रशासन ने लूट मचा रखी है। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने की फीस तो अलग है, पहले आपको अस्पताल में घुसने के लिए फीस देनी होगी। ये फीस है थर्मल स्क्रीनिंग का जिसे लेजर से दिमाग पर मारकर शरीर का तापमान जांचा जाता है। अब आप ही बताएं, ऐसे अस्पतालों को गिद्ध ना कहें तो क्या कहें जो कोरोना काल में भी गरीबों का खून चूस रही है