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दिल्ली : अमेजन का डिलीवरी बॉय उस्मान निकला प्रगति मैदान टनल लूटकांड का मास्टरमाइंड, भाई इरफ़ान भी दबोचा गया: 5 लाख रूपए, पिस्टल, बाइक, कारतूस बरामद

दिल्ली पुलिस ने प्रगति मैदान सुरंग सुरंग लूट की गुत्थी सुलझा ली है। इस लूटकांड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से लूट की 4.98 लाख रुपए की रकम बरामद की गई है। 2 बाइक, 1 पिस्तौल और 2 कारतूस भी बरामद हुए हैं। 5 आरोपितों को जहाँ दिल्ली पुलिस की 2 टीमों ने दबोचा, वहीं उत्तरी जिला और नई दिल्ली जिले की संयुक्त टीमों ने 2 अन्य को दबोचने में कामयाबी पाई।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले की CCTV फुटेज की भी जाँच की थी, जिसमें पता चला था कि मोटरसाइकिल सवार 4 लोगों ने कार को रोका और चाँदनी चौक स्थित ओमिया एंटरप्राइजेज के डिलीवरी एजेंट और उसका सहयोगी से लूटपाट की घटना को अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपितों में उस्मान, उसका चचेरा भाई इरफ़ान, अनुज मिश्रा, कुलदीप, सुमित, प्रदीप और बाला शामिल है। दिल्ली पुलिस ने मामले के सामने आते ही अलग-अलग टीमों को काम पर लगाया।

उस्मान अली उर्फ़ कल्लू ने ही इस काण्ड की साजिश रची थी। वो बुराड़ी स्थित कौशिक एन्क्लेव का रहने वाला है। 25 वर्षीय उस्मान ही सूचना देता था कि किस गाड़ी में पैसा है और किसमें नहीं। उस्मान ने 7 साल अमेजन कंपनी में बतौर डिलीवरी बॉय काम किया है। कुरियर का काम करने के कारण उसे मालूम होता था कि इस इलाके में कैश आता-जाता है। कई IPL सट्टा हार चुके उस्मान पर बैंक का भी कर्ज था।

वहीं उसका चचेरा भाई इरफ़ान नाई की दुकान पर काम करता था। इन दोनों ने ही लूटपाट की साजिश रच कर लोनी और बागपत के कुछ लड़कों को अपने साथ जोड़ा। इन लोगों ने चोरी की बाइक की व्यवस्था की और कई दिनों तक रेकी के लिए उसका इस्तेमाल किया। इन्होंने लूटकांड से 1 दिन पहले टनल में रेकी की थी। लूट में इस्तेमाल की गई चोरी की बाइक भी जब्त कर ली गई है।

वीडियो में देखा जा सकता था कि इन्होंने सबसे पहले गाड़ी रुकवा कर उसका शीशा खुलवाया, उसके बाद फिर पिस्टल दिखा कर रुपयों से भरे बैग को लूट लिया और फरार हो गए। 3 दिन की रेकी के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए कई माध्यम से एनालिसिस और प्रयास किया गया। फ़िलहाल सभी आरोपितों से पूछताछ भी कर ली गई है।

3 महीने की प्लानिंग, 15 दिन की छुट्टी, 25 किलो सोना; कर्मचारी ही निकला चोर

                                            शोरूम में चोरी करता शेख नूर रहमान

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चोरी का एक बड़ा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। कालकाजी इलाके में स्थित अंजलि ज्वैलर्स के बाहर 5 हथियारबंद गार्ड मौजूद होने के बावजूद एक चोर पीपीई किट पहनकर शोरूम में घुसा और करोड़ों का सामान लेकर फरार हो गया। पूरी घटना जनवरी 20, 2021 रात 11:00 बजे की है।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस 24 घंटों में सुलझा लिया है। पड़ताल में पता चला कि चोर कोई और नहीं, बल्कि ज्वैलरी शॉप में काम करने वाला शेख नूर रहमान है। उसने 6 घंटे में अकेले इस वारदात को अंजाम दिया और इन 6 घंटों में भी वह सिर्फ़ 4 घंटे शोरूम में था।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ने पहचान छिपाने के लिए पीपीई किट पहनकर चोरी की। वह अच्छे से वाकिफ था कि शोरूम के अंदर और आसपास कहाँ-कहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

इस वारदात के बारे में बुधवार को करीब 11 बजे अंजलि ज्वैलर्स के मैनेजर अरिजीत चक्रवर्ती ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच की। पड़ताल में पता चला कि चोर छत से दुकान में घुसा और 25 किलो सोना लेकर चंपत हो गया। उसने करीब 20 करोड़ रुपए की चोरी को अंजाम दिया।

चोरी की राशि सुन पुलिस भी हैरान रह गई। डीसीपी साउथ ईस्ट राजेंद्र प्रसाद मीणा ने फौरन जिले की तमाम पुलिस को चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए लगा दिया। सबसे पहले पुलिस ने इलाके की तमाम सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और शोरूम के पास लगे कैमरे को भी देखा।

इसके बाद शोरूम के अंदर जो कैमरा लगा था, उसमें उन्हें चोरी करते हुए एक शख्स नजर आया, जिसने पहचान छिपाने के लिए पीपीई किट पहनी हुई थी। इस फुटेज से और चोर की गतिविधियों से यह पता चला कि यह कारनामा किसी अंदर के आदमी ने ही किया है।

पुलिस ने इसी आधार पर शोरूम में काम करने वाले सभी कर्मचारियों की लिस्ट बनाई, फिर सबका वेरिफिकेशन किया और सब से पूछताछ की गई। इसी पड़ताल में पुलिस को पता चला कि शोरूम में काम करने वाला एक इलेक्ट्रिशियन शेख नूर रहमान 15 दिन की छुट्टी लेकर घर गया हुआ है। पुलिस को इसी बिंदु पर शक हुआ।

जब पुलिस ने इस संबंध में पड़ताल की तो शेख से संपर्क नहीं हुआ। मगर, बाद में अपने खबरियों की मदद से पुलिस शेख रहमान तक पहुँच गई और उसे दिल्ली के करोलबाग से धर दबोचा। सख्ती से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके पास से सारा कैश और ज्वैलरी बरामद कर ली। शेख ने अपना जुर्म कबूलते हुए बताया कि शोरूम में उसे प्रताड़ित किया जाता था। बदला लेने के लिए उसने ये सब किया।

डीसीपी साउथ ईस्ट राजेंद्र प्रसाद मीणा के अनुसार शेख नूर रहमान ने वारदात से पहले रेकी की हुई थी। उसने यूट्यूब देखकर आइडिया इकट्ठे किए और बाद में इस वारदात को अंजाम दे डाला।  पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रिशियन होने के कारण वह हाई टाइप टूल चलाने में माहिर है। चोरी की वारदात को अंजाम देने से पहले शेख नूर रहमान 3 माह से प्लानिंग कर रहा था। उसने 50,000 खर्च करके ऑनलाइन उपकरण खरीदे थे। इन्हें ही उसने चोरी के दौरान इस्तेमाल भी किया।

सभी इंतजाम होने के बाद वह घटना वाले दिन एक बगल वाली बिल्डिंग से शोरूम के थर्ड फ्लोर पर दाखिल हुआ और थर्ड फ्लोर का ताला तोड़कर शोरूम में घुसा। 4 घंटे भीतर रहने के बाद वह सारा सामान लेकर फरार हो गया। पूरी वारदात के लिए ही शेख ने 15 दिन की छुट्टी ली थी ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। जाँच में पता चला है कि रहमान कोलकाता का निवासी है। करीब एक साल से वह शोरूम में काम कर रहा था।

कोरोना काल में जनता को कैसे लूट रहे हैं प्राइवेट अस्पताल? कहीं थर्मल स्क्रीनिंग के बदले 100 रूपये तो कहीं 52 हजार की पीपीई किट

कोरोना काल में अस्पतालों की लूट. सांकेतिक तस्वीर (गूगल)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कोरोना के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर उजागर करने का प्रयास किया, जिसे आलोचनाओं के घने बादलों ने ढक दिया। स्वामी विवेकानंद कहना है की "कभी उपदेशक पर मत जाओ, उसके उपदेशों पर जाओ।" किसी ने प्राइवेट अस्पतालों की लूट पर मंथन करने का प्रयास नहीं किया। लेकिन है हकीकत। जिस का केन्द्र सरकार को संज्ञान लेकर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। 
आपने कभी गिद्ध देखा है? एक बड़ा सा पक्षी जो अक्सर मरे हुए जानवरों की लाश को नोच-नोचकर खाता हुआ नजर आ जाता है। गिद्ध का खाना ही यही है, सड़ी-गली हुई लाश जिससे वो अपना पेट भरता है। चलो ये तो गिद्ध की नियती है क्योंकि प्रकृति ने उसे यही खाना दिया है ताकि उसका भी पेट भर सके और मरे जानवरों की गंध और बैक्टीरिया से आसपास कोई प्रभावित ना हो।लेकिन एक गिद्ध इंसानी शक्ल में भी होता है जो बस इस इंतजार में बैठा होता है कि आदमी बीमार पड़े और वो उसके जीवनभर की गाढ़ी कमाई को एक मिनट में चट्ट कर जाए। इंसानी शक्ल में दिखने वाले ये गिद्ध दरअसल प्राइवेट अस्पताल के मैनेजमेंट में पाए जाते हैं जिनके लिए मरीज सिर्फ और सिर्फ वो जरिए है जिसे वो नोच-नोचकर खा लेना चाहते हैं।
पूरी दुनिया इन दिनों कोरोना महामारी से जूझ रही है. डॉक्टरी पेशे से जुड़े लोगों को कोरोना वॉरियर्स कहा जा रहा है जो अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचा रहे हैं। कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इस दौरान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। उनके प्रति हमारे दिल में अपार श्रद्धा है। उनका कर्ज शायद हम और आप जीवन भर चुका भी नहीं सकेंगे लेकिन इसी दौर में सफेद कोर्ट पहने कुछ ऐसे भी गिद्ध हैं जो लोगों की गाढ़ी कमाई को चूस लेना चाहते हैं।

कई प्राइवेट अस्पताल कोरोना के इलाज के नाम पर लोगों से लाखों रूपये मांग रहे हैं। सोशल मीडिया ऐसी खबरों से भरा हुआ है जहां प्राइवेट अस्पताल की मनमानी देखने को मिल रही है। दिल्ली का सरोज अस्पताल कह रहा है कि अगर आपको इलाज करवाना है तो पहले चार लाख रूपये काउंटर पर जमा करो। कम से कम बिल 3 लाख का तो होगा ही।
दिल्ली में एक और तीरथ राम शाह चेरिटेबल अस्पताल हैं जहां टाइफाइड की वजह से चार दिन अस्पताल में रहने वाले मरीज के हाथ में एक लाख रूपये का बिल थमा दिया जाता है। बिल की डीटेल कहती है कि उसमें से 52 हजार रूपये सिर्फ कोविड पीपीई किट और मास्क का है। अब जरा सोचिए कि जो डॉक्टर किट और मॉस्क पहनकर इलाज कर रहे हैं उनके एक दिन की किट पर कितना खर्च होता होगा? चलो मान लेते हैं वार्ड में कम से कम 5 लोग हैं और हर मरीज से 50 हजार रूपये मास्क और किट के नाम पर लिए जाते हैं तो कितना पैसा होता है?
देश में पता नहीं कितने सरोज और तीरथ राम अस्पताल हैं, जहाँ की मरीज की डिस्चार्ज डिटेल देखने पर सरकार को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा जा रही खुली लूट सामने आएगी। सबसे पहले जहाँ हर आने वाले मरीज का कोरोना टेस्ट किया जाता है और कोरोना की रिपोर्ट आने तक लगभग एक लाख रूपए के लपेटे में मरीज आ जाता है। जबकि उसकी वास्तविक बीमारी का इलाज कोरोना की रिपोर्ट आने के बाद ही होता है। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में इंजेक्शन आदि में इस्तेमाल होने वाली रुई के लिए पूरे बण्डल के पैसे लिए जाते हैं। जबकि डिस्चार्ज करते समय बचा हुआ बण्डल तक रख लिया जाता है, क्या यह लूट नहीं? 
अब दूसरी कहानी झारखंड के शहर रांची की जहां ऑर्किड हॉस्पिटल में कोरोना के नाम पर अस्पताल प्रशासन ने लूट मचा रखी है। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने की फीस तो अलग है, पहले आपको अस्पताल में घुसने के लिए फीस देनी होगी। ये फीस है थर्मल स्क्रीनिंग का जिसे लेजर से दिमाग पर मारकर शरीर का तापमान जांचा जाता है। अब आप ही बताएं, ऐसे अस्पतालों को गिद्ध ना कहें तो क्या कहें जो कोरोना काल में भी गरीबों का खून चूस रही है।