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राजस्थान : चचा और खाला को बच्चों ने सेक्स करते देखने पर छाती पर बैठ सोनिया बानो ने घोंट दिया गला, दूसरे का एहसान ने फाड़ दिया सर

                                 बच्चों की हत्या में सोनिया बानो और एहसान अली गिरफ्तार (फोटो साभार: जी न्यूज)
राजस्थान के जैसलमेर में 5 अक्टूबर 2024 को दो बच्चों का शव पानी टंकी से बरामद किया गया था। पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए एहसान अली और सोनिया बानो को गिरफ्तार किया है। दोनों मृतक बच्चों के रिश्ते में चाचा और मौसी लगते हैं।

मृत बच्चों की पहचान 7 साल के मोहम्मद हसनेन और 8 साल के मोहम्मद आदिल के तौर पर हुई है। रिपोर्टों के अनुसार इन्होंने एहसान और सोनिया को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद बदनामी के डर से दोनों ने मिलकर बच्चों की हत्या कर दी। मृत बच्चे रिश्ते में चचेरे भाई थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हसनेन की छाती पर सोनिया बैठ गई और गला दबाकर मार डाला। एहसान ने इसी तरीके से आदिल को मारने की कोशिश की। लेकिन उसकी मौत नहीं हुई तो घर में रखे लोहे के एक रॉड से उसके सिर पर वार कर दिया। सिर फटने से उसकी भी मौत हो गई।

हत्या के बाद बच्चों का शव इन्होंने बोरे में भरा और उसके पास के एक खाली मकान के पानी टैंक में डाल दिया। इसके बाद एहसान और सोनिया ने मिलकर मौके पर खून साफ किए व अन्य सबूत मिटाने का प्रयास किया।

जिस दिन दोनों बच्चों की हत्या हुई वे खेलते हुए एहसान के घर चले गए थे। उन्होंने इसी दौरान उसे सोनिया के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। एहसान और सोनिया का घर आसपास में ही है और कई साल से दोनों के बीच अफेयर चल रहा है।

5 अक्टूबर की शाम को जब दोनों बच्चे घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। इसमें एहसान भी शामिल था। वह पुलिस के एक्शन पर भी नजर बनाए हुआ था। कई घंटे बाद पुलिस ने पानी टंकी से दोनों शव बरामद किए। शव की स्थिति से अनहोनी की आशंका गहराई। बच्चों के परिजन भी हत्या का शक जाहिर करते हुए उस अस्पताल में धरने पर बैठ गए थे, जहाँ पोस्टमार्टम हुआ था।

इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जाँच शुरू की तो उसे एहसान पर शक हुआ। उसके घर की तलाशी लेने पर खून के कुछ छींटे मिले। इसके बाद हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई। पुलिस के सामने वह टूट गया और बच्चों की हत्या कबूल कर ली।

‘इजरायली महिलाओं की लाशों से करो बलात्कार, जिस्म ही तो है’: हमास आतंकियों की क्रूरता, हर एक बंधक पर 8 लाख रूपए का वजीफा; वीडियो

  हमास के आतंकियों को मिला था इजरायली औरतों की लाशों से रेप का निर्देश (फोटो साभार: IDF एक्स हैंडल @IDF)
गाजा पट्टी से इजरायल पर हमले करने वाला आतंकी संगठन कितना खतरनाक और वहशी है, इसका खुलासा खुद उसके ही आतंकियों ने कर डाला है। पकड़े गए इन आतंकियों ने कबूल किया कि उन्हें इजरायली बच्चों, औरतों और मर्दों पर ऐसे जुल्म ढाने के निर्देश थे कि इंसानियत की रूह काँप उठे।

‘इज़राइल सिक्योरिटीज अथॉरिटी‘ (आईएसए) ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023 ) को एक वीडियो क्लिप जारी किया। इसमें कथित तौर पर हमास आतंकवादियों को 7 अक्टूबर को दक्षिणी इज़राइल में घातक आतंकवादी हमलों में अपनी सक्रिय भागीदारी कबूल करते हुए दिखाया गया है।

इस वीडियो को लेकर ISA ने कहा है कि उसके कम्युनिकेशन सेल को की दी गई एक वीडियो फ़ाइल 7 अक्टूबर के हमलों में शामिल हमास आतंकवादियों के बयानों के साथ पूछताछ के दौरान की है। वीडियो में हमास के आतंकवादी यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि उन्हें नागरिक बंधकों को इजरायल से गाजा ले जाने के लिए वजीफा का वादा किया गया था।

हमास के एक आतंकवादी को वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है,”जो कोई बंधक का अपहरण करेगा और उन्हें गाजा लाएगा, उसे 10,000 अमेरिकी डॉलर का वजीफा और एक अपार्टमेंट मिलेगा।”

 उन्हें यह कहते हुए भी सुना जाता है कि उनके आकाओं ने उन्हें खास तौर से बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों का अपहरण करने का निर्देश दिया था। आतंकवादियों में से एक ने कहा, “हमें घरों में लूटपाट करने और जितना संभव हो सके उतने लोगों को बंधक बनाने के लिए अपहरण करने के लिए भी कहा गया था।”

आतंकवादी को वीडियो में आगे कहते हुए सुना जा सकता है, “उसका (पीड़ित का) कुत्ता बाहर आया और मैंने उसे गोली मार दी।” वीडियो में हमास आतंकी आगे कहता है, “उसका शरीर फर्श पर पड़ा था, मैंने उसे भी गोली मार दी।”

उसने बताया कि इस पर कमांडर ने मुझ पर चिल्लाते हुए कहा (कि) मैं एक लाश पर गोलियाँ बर्बाद कर रहा हूँ।” हमास के एक अन्य आतंकवादी ने कहा कि अपने आका की आज्ञा का पालन करने के बाद, उसने दो घरों को जला दिया। उसने कहा, “हम जो करने आए थे उसे पूरा किया और फिर दो घरों को जला दिया।”

हमास के एक आतंकी ने कहा, “हम किबुत्ज में जीप से आए। हमने घरों के कमरों को खोला और बारी-बारी से एक के बाद वहाँ हमले की कार्रवाई को तब-तक अंजाम दिया जब तक की सब खत्म नहीं कर दिया। हमने ग्रेनेड फेंके, गोलियाँ चलाईं। हमारा मकसद एक ही था – सबको खत्म कर देना। हमें साफ निर्देश मिले थी कि घर में कोई भी हो बच्चा, बूढ़ा, जवान, औरत सबको जान से मारना है।”

आतंकी ने आगे बताया, “बटालिन कमांडर ने हमसे कहा था कि उनके सिर कुचलो, काट दो। तुम उनके साथ जो चाहो करो, उनके पैर काट दो। हमास ISIS बन गया है। उनका दिमाग नहीं है। वो इंसान नहीं जानवर बन गए है, क्योंकि कोई इंसान ये नहीं कर सकता है। हमें मारी गई युवा इजरायली महिलाओं की लाशों के साथ सेक्स करने के लिए कहा गया, क्योंकि वो केवल जिस्म भर हैं, इंसान नहीं।”

इस दौरान आईएसए ने अपने बयान में कहा कि 7 अक्टूबर की हत्याओं के मामले में चल रही जाँच के दौरान कई बातें (अपराधों की प्रकृति और तौर-तरीके) बार-बार सामने आई हैं। कथित तौर पर वीडियो क्लिप में आतंकवादियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों को मारने और अपहरण करने के लिए हमास के खुले और साफ निर्देशों को स्वीकार कर इस हमले को अंजाम दिया।

हमास आतंकियों ने इस दौरान दक्षिणी इजरायल में 7 अक्टूबर के नरसंहार के कई खौफनाक और दर्द भरे वाकयों के बारे में भी बताया है। इस बीच, आईएसए ने कहा कि हमास के मिलिट्री विंग के सीनियर कमांडर ने अपने बंदूकधारियों को इज़रायल में लड़ने, मरने या गिरफ्तार होने के लिए भेजते वक्त सुरक्षित रहने के लिए घरों में छुपने के लिए आदेश दिए थे।

इज़रायल सुरक्षा बलों ने नरसंहार में शामिल सभी आतंकवादियों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बयान में कहा गया है, “इज़रायल के सुरक्षा बल 7/10 को नरसंहार में शामिल आतंकवादियों के साथ सभी हिसाब-किताब बराबर करेंगे।”

7 अक्टूबर के हमास के इस भयंकर और संगठित हमले में अनुमान के मुताबिक 2500 हमास आतंकवादी जमीन, आसमान और समुद्र के रास्ते इज़रायल में घुसे थे। यहाँ उन्होंने दक्षिणी इज़रायल में नागरिकों पर आतंक की दिल दहला देने वाली वारदातों को अंजाम दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में 1400 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे। ‘द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल’ के मुताबिक, इनमें से कुछ आतंकवादियों ने कम से कम 222 नागरिकों को बंधक बना लिया और उन्हें गाजा ले आए।

बच्चों के कैजुअल सेक्स और ड्रग्स पर NCPCR सख्त : ‘बंद करो बॉम्बे बेगम्स’

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) से वेब सीरिज ‘बॉम्बे बेगम्स (Bombay Begums)’ की स्ट्रीमिंग बंद करने को कहा। ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। दो ट्विटर हैंडल की तरफ से इस वेब सीरिज में बच्चों के गलत चित्रण को लेकर शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। साथ ही यूजर्स ने सीरिज के हिंदूफोबिक कंटेट को लेकर भी नाराजगी जताई है।

शीर्ष बाल अधिकार संस्था ने गुरुवार (11 मार्च 2021) को वेब सीरिज में बच्चों के अनुचित चित्रण का हवाला देते हुए नेटफ्लिक्स से इसकी स्ट्रीमिंग तुरंत बंद करने को कहा। साथ ही 24 घंटे के भीतर एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। NCPCR ने कहा है कि यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसा नहीं करती है तो वह कानूनी कार्रवाई को विवश होगी।

एनसीपीसीआर ने नोटिस में कहा है कि नाबालिगों के कैजुअल सेक्स को सामान्य बताने के बाद अब वेब सीरिज बच्चों के बीच ड्रग्स के सेवन को सामान्य दिखा रही है। आयोग ने कहा है कि वह बच्चों का इस तरह से चित्रण करने की अनुमति नहीं दे सकती। नोटिस में कहा गया है, “इस प्रकार की सामग्री के साथ सीरीज न केवल बच्चों के युवा दिमाग को दूषित करेगी, बल्कि इसका परिणाम अपराधियों के हाथों बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण भी हो सकता है।”

आयोग को इस संबंध में दो ट्विटर हैंडल से शिकायत मिली थी। @DeepikaBhardwaj नामक हैंडल ने ‘बॉम्बे बेगम्स’ में बच्चों के चित्रण पर कड़ा एतराज जताया है। खासकर, जिस तरीके से बच्चों के बीच ड्रग्स के सेवन को दिखाया गया है।

एक अन्य लोकप्रिय ट्विटर हैंडल @GemsOfBollywood ने भी शिकायत की थी। उसने बताया था कि इस वेब सीरिज में लड़कियों के अपने शरीर के अंगों की तस्वीरें खींचकर सहपाठियों को भेजते दिखाया गया है। यह ट्विटर हैंडल फिल्म उद्योग के हिंदूफोबिक एजेंडे को बेनकाब करने के लिए जाना जाता है।

वेब सीरिज में एक तिलकधारी नेता को भगवद्गीता के हवाले से यह बताते दिखाया गया है कि पुरुष के भावना की तृप्ति ही स्त्री का सर्वोच्च धर्म है।

एनसीपीसीआर को किए गए इन ट्वीट्स सीपीसीआर (बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए आयोग) अधिनियम 2005 की धारा 13(1)(जे) के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई थी। एनसीपीसीआर की नोटिस में कहा गया है, “नेटफ्लिक्स को बच्चों के संबंध में या बच्चों के लिए किसी भी सामग्री को स्ट्रीम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इसलिए, इस मामले को देखने के लिए आपको निर्देशित किया जाता है और तुरंत इस सीरीज की स्ट्रीमिंग रोकने के लिए कहा जाता है।”

‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्क्रिप्ट अलंकृता श्रीवास्तव ने लिखी है और पूजा भट्ट मुख्य भूमिका में है। यह सीरिज मुंबई में विभिन्न क्षेत्रों की 5 महिलाओं के जीवन पर आधारित है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब कोई वेब सीरिज अपने कंटेंट को लेकर विवादों में है। हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरिज ‘तांडव’ हिंदूफोबिक कंटेट को लेकर विवादों में थी। इससे जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले कंटेंट की स्क्रीनिंग पर जोर दिया था।

दिल्ली में एक और दुर्लभ रोग की दस्तक : बच्चों में मिल रहे खतरनाक ‘कावासाकी’ के लक्षण

दिल्ली कोरोना वायरस
                                                                                                                       प्रतीकात्मक 
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमित बच्चों में कावासाकी (Kawasaki) नाम की बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। इन लक्षणों में शरीर पर चकत्ते पड़ना और सूजन शामिल है। कावासकी एक किस्म का सिंड्रोम है, जिसके होने की वजह अब तक नहीं पता चली है। इसमें तेज बुखार आता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है।
यह रोग वास्कुलिटिस का एक रूप है, जिसमें शरीर की रक्त वाहिकाओ में सूजन आ जाती है। जिसके चलते बुखार आमतौर पर पाँच दिनों से अधिक समय तक रहता है और सामान्य दवाओं से इस बीमारी पर कोई असर नहीं होता है।
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के कई अस्पतालों ने बताया है कि कोविड-19 लक्षणों वाले बच्चों में कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी से जुड़े लक्षण सामने आए हैं। देश में बच्चों के लिए बने अस्पतालों में एक दिल्ली स्थित कलावती सरन ने बुखार, चकत्ते, श्वसन और जठरांत्र संबंधी लक्षणों के साथ बच्चों के पाँच-छह मामलों की सूचना दी है। यह वे लक्षण हैं जो कावासाकी रोग में पाए जाते हैं। यह सभी बच्चे कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से एक बच्चे की मौत भी हो गई है।
कलावती सरन अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ वीरेंद्र कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “ये सबसे आम लक्षण हैं जो दुनिया भर में प्रचलित हैं। अन्य वायरस भी इस सिंड्रोम को की वजह बन सकते हैं लेकिन हम महामारी के बीच में हैं। यह संभावना है कि बीमारी कोविड -19 से संबंधित हो।”
डॉ वीरेंद्र कुमार ने आगे कहा, “हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि वे कावासाकी से संक्रमित थे, लेकिन उनमें कावासाकी जैसे लक्षण थे। बच्चों को अनएक्सप्लेन्ड टैचीकार्डिया था और उनमें से कुछ सदमे की स्थिति में थे।”
इस बारे में बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की पीडिएट्रिक्स क्रिटिकल केयर की डॉक्टर रचना शर्मा ने बताया कि ज्यादातर मामले में कोविड का असर बच्चों में नहीं होता है। अगर किसी में इंफेक्शन होता भी है, तो उसमें लक्षण नहीं आते हैं। लेकिन अब देश में कई ऐसे मामले देखे जा रहे हैं, जो कावासाकी बीमारी की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
रचना शर्मा ने आगे बताया, “यह मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम भी बहुत सारे पाचन मुद्दों का कारण बनता है, जैसे कि कुछ ऐसे बच्चे होते हैं जिन्हें पेट में दर्द, उल्टी और लूज़ मोशन होते हैं। यदि आप लक्षणों को जल्दी नहीं पहचानते हैं, तो उनके घातक परिणाम हो सकते हैं। कुछ बच्चों की किडनी फेल भी हो सकती है।”
बीएलके अस्पताल ने ऐसे दो मामले देखे गए हैं, जबकि सर गंगा राम अस्पताल ने ऐसे छह मामले सामने आए हैं। डॉ शर्मा ने यह भी कहा कि “कोविड मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम” में आम तौर पर 50-60% मामलों में दिल प्रभावित होता है और बच्चा सदमे में चला जाता है।
कावासाकी के लक्षणों की बात करें तो इसमें बच्चे को तेज बुखार चढ़ता है। आँखें लाल हो जाती हैं और गर्दन के पास गठान होने लगती है। इतना ही नहीं, होठ और जीभ भी काफी लाल हो जाती है। शरीर में जगह-जगह रेशेज होने लगते हैं। शरीर पर पड़ने वाले चकत्तों में सूजन भी आने लगती है।
यह बीमारी शरीर की रक्तवहिनियों से जुड़ी होती है। इसमें रक्तवाहिनी की दीवारों में सूजन होती है और यह सूजन हृदय तक रक्त पहुँचाने वाली धमनियों को कमजोर कर देती है। वहीं इसकी गंभीर होने पर मरीज में हार्ट फेल्यर या हार्ट अटैक होने के चांस बढ़ जाते हैं। कहा जा रहा है कि कावासाकी पहले हुए किसी वायरस के इंफेक्शन के रिएक्शन से होती है।

लम्बी दुरी के स्कूल बना रहे बच्चों को बीमार

अपने स्कूल के दिन हर किसी के लिए यादगार होते ही है. हर कोइ स्कूल में बिताए समय को कभी नहीं भूल सकता. स्कूल की अच्छी और बुरी यादें आज भी आपके जहन में जिंदा होंगी. जिनका ख्याल आते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. इन खट्टी-मिठ्ठी यादों में वो सुबह जल्दी उठना, स्कूल के लिए तैयार होना और कहीं लेट न हो जाए इस डर से जल्दबाजी में स्कूल के लिए भागना भी शामिल है. आज भी मानों, परंपरा के तौर पर बच्चों को स्कूल भेजने का यह सिलसिला जारी है. लेकिन यहां आपको अब सावधान हो जाने की ज़रूरत है. दरअसल, स्कूलों की दूरी और सुबह जल्द लगने वाली कक्षाओं के चलते बच्चे अनिंद्रा के शिकार हो रहे हैं.
मजबूरन जल्द सोकर उठना पड़ता है
दरअसल, स्कूलों की टाइमिंग के कारण बच्चों को जल्द से जल्द सोकर उठना पड़ता है. इससे उनकी नींद पर गहरा असर पड़ रहा है. ऐसे बच्चों का औसत नींद का स्तर सामान्य नींद के स्तर से अधिक हो गया है. जिस वजह से बच्चे करीब एक घंटे तक की कम नींद ले पा रहे है.
नींद पूरी न होने से बीमारियों का खतरा 
नींद पूरी नहीं होने से बच्चों में तनाव, अनिंद्रा, एकाग्रता की कमी और मोटापा का खतरा मंडरा रहा है. जबकि दिन के शिफ्ट वाले स्कूलों में बच्चों की निंद्रा ठीक हो रही है, यानी वे अपनी नींद पूरी ले पा रहे हैं और स्वस्थ भी है.
विषेशज्ञों की रिपोर्टस

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विवि के लाइफ साइंस विभाग के रिसर्च गाइड डॉ. आरके प्रधान एवं स्कॉलर निहारिका सिन्हा के मुताबिक अध्ययन में अनिंद्रा के कारण सुबह शिफ्ट वाले स्कूलों के बच्चों में अनिंद्रा व अन्य जोखिम के संकेत मिले हैं. इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जनरल रिसर्चगेट पर इम्पैक्ट ऑफ कम्युनिकेटिंग डिस्टेंस एंड स्कूल टाइमिंग ऑन स्लीप ऑफ स्कूल स्टूडेंट्स शीर्षक के साथ प्रकाशित किया गया है.
3 से 10 किमी दूरी तक स्कूल
इस अध्ययन के लिए करीब 14 साल के स्कूली बच्चों को चुना गया. इनमें सुबह शिफ्ट में यानी सुबह 7:30 बजे लगने वाले स्कूलों और सुबह 11 बजे लगने वाले रायपुर के स्कूलों से 84-84 बच्चों पर अध्ययन किया गया. इन बच्चों के वजन, ऊंचाई आदि को मापा गया. साथ ही, इनके बेड टाइम और वेक अप टाइम को मापा गया. जो बच्चे सुबह के स्कूल में जाते हैं, उनमें अनिंद्रा की अधिक शिकायत मिली. इससे उनमें भारी तनाव, अत्यधिक निंद्रा, बच्चों में मोटापा भी देखा गया.
स्कूलों की दूरी के मापदंड शहर में फेल
शहर के आउटर में लगने वाले ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत तय किए गए स्कूलों की दूरी के मापदंड को फेल कर दिया गया है. यहां रसूखदार विद्यालयों में पढ़ाने के लिए बच्चों के पेरेंटस बच्चों को 10 से 15 किलोमीटर की दूर भेज रहे हैं. जबकि प्राइमरी स्तर पर अधिकतम दूरी 3 किमी, अपर प्राइमरी स्तर पर 5 किमी और हाई स्तर पर 7 किमी से अधिक दूरी के विद्यालय नहीं होने चाहिए.