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झारखंड : कलावा बाँधकर कार्मेल स्कूल में पढ़ने आया 9वीं का छात्र, टीचर ने पीटा; ब्लेड से काटने को किया मजबूर

बोकारो के स्कूल में छात्र को कलावा काटने पर किया मजबूर (प्रतीकात्मक चित्र, साभार: आज तक)
झारखंड के बोकारो में एक कान्वेंट स्कूल में छात्र को कलावा (मौली) बाँधने पर टीचर द्वारा पीटने का मामला सामने आया है। पिटाई के बाद बने दबाव से पीड़ित छात्र ने अपने कलावे को ब्लेड से काट कर फेंक दिया। जबकि सनातन संस्कृति में कलावा काटा नहीं, तोडा जाता है। भाजपा और हिंदू संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए आरोपित टीचर पर कार्रवाई की माँग की है। घटना 18 जुलाई 2023 की है। प्रिंसिपल ने इस मामले में आरोपित टीचर पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बोकारो के थर्मल क्षेत्र में मौजूद कार्मेल स्कूल का है। यहाँ मंगलवार को क्लास 9 में पढ़ने वाला छात्र मौली (कलावा) बाँध कर स्कूल गया था। तभी क्लास के मॉनिटर ने छात्र द्वारा कलावा पहनने की शिकायत स्कूल के एक टीचर अमित लकड़ा से कर दी। शिक्षक अमित ने छात्र पर कलावा उतारने का दबाव बनाया। जब छात्र ने इसे अपनी धार्मिक आस्था बताया तब अमित लकड़ा ने उसकी पिटाई कर दी। बाद में छात्र को इतना मजबूर किया गया कि उसे खुद ही ब्लेड से कलावा काट कर फेंकना पड़ा।

पीड़ित छात्र ने घर पहुँच कर परिजनों को इस घटना की जानकारी दी। यहाँ से यह मामला स्थानीय हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों की जानकारी में आया। अगले दिन बुधवार (19 जुलाई) को हिन्दू संगठनों से जुड़े दर्जनों कार्यकर्ता स्कूल पहुँच गए। उन्होंने प्रिंसिपल सिस्टर जायस कुल्लू से इस घटना को हिन्दू आस्था पर प्रहार बताते हुए कार्रवाई की माँग की। प्रिंसिपल ने जाँच करवाकर आरोपित टीचर के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इस घटना से बोकारो के DC (उपयुक्त) को भी अवगत करवाया है। स्थानीय SDM प्रशांत कुमार ने मामला संज्ञान में होने और जाँच जारी होने की जानकारी दी है।

घटना से स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अन्य अभिभावक भी नाराज बताए जा रहे हैं। पीड़ित द्वारा प्रिंसिपल के अलावा मामले की शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी से भी की गई है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री डॉक्टर प्रदीप वर्मा ने कुछ समय पहले झारखंड के ही एक स्कूल में बिंदी लगाने पर छात्रा तो आत्महत्या के स्तर तक मिली प्रताड़ना से इस घटना से जोड़ा। साथ ही उन्होंने सवाल किया है कि सनातनी प्रतीक चिन्हों से इतनी चिढ़ क्यों है?

अवलोकन करें:-

बिंदी लगाकर सेंट जेवियर्स में पढ़ने गई छात्रा को टीचर ने सरेआम मारे थप्पड़; प्रिंसिपल ने स्कूल

भाजपा नेता डॉ. प्रदीप ने घटना को कुत्सित मानसिकता बताते हुए झारखंड सरकार पर ऐसी सोच वालों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी से सनातन विरोधी तत्वों का हौसला बढ़ रहा है। बहुसंख्यक समाज के हितों को दरकिनार करने का आरोप लगाते डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा, “हेमंत जी कान खोलकर सुन लीजिए। राजधर्म पर भारी पड़ रही आपकी वोट बैंक की राजनीति आपको कहीं का नहीं छोड़ेगी।”

दिल्ली : वनस्थली पब्लिक स्कूल, मयूर विहार में ‘जय श्री राम’ बोलने पर छात्रों को 10 चक्कर लगवा कर सस्पेंड किया; कलावा काट डाला, भगवान के पोस्टर फाड़े

दिल्ली के स्कूल (बीच) में टीचर अनूप (बाएँ) और रवि (दाएँ) ने भगवान राम का पोस्टर फाड़ कर छात्रों का कलावा कटा
देश की राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा काटने की खबर सामने आई है। आरोप यह भी है कि स्कूल में न सिर्फ भगवान राम के पोस्टर फाड़े गए बल्कि उनकी जय बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड कर के परीक्षा देने से भी रोक दिया गया। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा। हंगामे के बाद छात्रों का निलंबन वापस ले लिया गया है।

छात्रों का कलावा 16 मई, 2023 को काटा गया और बाद में पोस्टर 19 मई को फाड़े गए। इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शनिवार (20 मई, 2023) को हुआ है।

यह मामला मयूर विहार के फेज 3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल का है। यहाँ के कई हिन्दू बच्चों ने सामूहिक रूप से एकजुट हो कर स्कूल के अध्यापक अनूप रावत पर अपने हाथ में बँधा कलावा काटने का आरोप लगाया है। कटे कलाओं को डस्टबिन में डाल दिया गया। छात्रों का आरोप है कि एक अन्य टीचर रवि ने क्लास में लगा भगवान राम का पोस्टर भी फाड़ दिया और बाद में ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड भी करवा दिया।

सस्पेंड किए गए छात्रों की संख्या 9 बताई जा रही है। छात्रों की इस सामूहिक शिकायत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक छात्र का आरोप है कि ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को पहले बुलवा कर स्कूल के 10 चक्कर कटवाए गए, फिर उन्हें अगले दिन सस्पेंड किया गया। एक छात्र ने खुद को भगवान राम का भक्त बताया। इस घटना से संबंधित कुछ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल चैटिंग छात्रों की आपस में बातचीत बताई जा रही है, जिसमें वो स्कूल में हुए इस घटनाक्रम के बारे में चर्चा कर रहे हैं। छात्रों को स्कूल के चक्कर लगवाने वाली टीचर का नाम रितु बताया जा रहा है।

इस घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों और छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। सभी लोग आरोपित टीचरों पर कार्रवाई और छात्रों का निलंबन वापस लेने की माँग कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस टीम पहुँची। पुलिस ने हिन्दू संगठनों सहित अभिभावकों को समझाने के प्रयास किए। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक भी हुई। वनस्थली स्कूल साल 2002 में स्थापित हुआ है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित जैन और प्रिंसिपल अनुराधा जैन हैं।

3 टीचर मौखिक रूप से सस्पेंड

ऑपइंडिया ने इस मामले में एक पीड़ित छात्र से बात की। छात्र ने बताया कि उनका कलावा 16 मई को खेल टीचर रवि द्वारा काटा गया और 19 मई को एक अन्य खेल टीचर अनूप ने क्लास में घुस कर भगवान राम का पोस्टर फाड़ा। इसके बाद तीसरी खेल टीचर रितु ने ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को प्रताड़ित किया और कॉलेज के चक्कर लगवाए। छात्र ने आगे बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल ने मौखिक तौर पर इन तीनों टीचरों को सस्पेंड कर दिया है जिसका कोई लिखित आदेश नहीं है। छात्र का ये भी दावा है कि निलंबित छात्रों को बहाल कर दिया गया है।
स्कूल के अंदर से वायरल हो रहे एक वीडियो में निगम पार्षद मुनेश ने भी किसी टीचर को स्कूल से निकाले जाने की बात कही है। जब ऑपइंडिया ने इस निलंबन आदि की पुष्टि के लिए स्कूल के नम्बरों पर फोन किया तो किसी ने कॉल नहीं उठाई। स्कूल का आधिकारिक मोबाइल नंबर भी सेवा से बाहर बताया। स्कूल का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

ईसाई हैं रितु मैडम

राम के नाम पर स्कूल के 5 छात्रों को प्रताड़ित करने और उनके कलावे काटने वाले टीचरों रितु, रवि और अनूप में से रितु को पीड़ित छात्र ने ईसाई बताया। छात्र का दावा है कि क्लास में लगा पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में किसी ने बनाया था। बताया यह भी गया कि बाकी अन्य पोस्टरों और चित्रों को छोड़ दिया गया और राम के चित्र की अनुमति न होने की बात कह कर टीचर अनूप द्वारा उसे फाड़ कर डस्टबिन में डाल दिया गया।
पीड़ित छात्र के मुताबिक कलावे क्लास 10 में पढ़ने वाले बच्चों के कलावा काटे गए और भगवान राम का पोस्टर कक्षा 9 में फाड़ा गया था। हमें आरोपित टीचरों को पहले भी कुछ छात्रों से ऐसी हरकतें करने का आदी बताया गया। साथ ही छात्र ने दावा किया कि रितु, रवि और अनूप मिल कर उन्हें टीका लगाने से भी मना किया करते थे।

‘बजरंग दल’ वालों ने दी है शिकायत

स्कूल के 3 खेल टीचरों द्वारा खुद से किए गए व्यवहार से दुखी छात्र ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में ‘बजरंग दल’ ने पुलिस में शिकायत दी है। हालाँकि, शिकायत की जाँच में क्या निकला ये छात्र को मालूम नहीं था। छात्र का आरोप है कि स्कूल के स्टाफ पुलिस, मीडिया और हिन्दू संगठनों को देख कर अपनी बातचीत का रंग-ढंग बदल लेते हैं जबकि छात्रों से वो किसी और ही रूप में पेश आते हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ने बयान दिया है कि उन्हें घटना के बारे में जानकारी नहीं थी।
उनके बयान को भी छात्र ने संदेहास्पद बताया और कहा कि बिना उनकी जानकारी के बच्चों को सस्पेंड कैसे कर दिया गया था। ऑपइंडिया ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए DCP ईस्ट को कॉल किया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। पुलिस का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा बाँधे कलावे

पीड़ित छात्र के मुताबिक हंगामा होने के बाद मामले को दबाने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा कलावे बाँधे हैं और फिर ऐसा न होने का भरोसा दिया था। छात्र का ये भी कहना है कि माहौल गर्म देख कर स्कूल मैनेजमेंट ने फ़िलहाल के लिए स्कूल में ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी है।

दिल्ली : रात के अंधेरे में रामनवमी पर लगे भगवा झंडों को नोंचा, जेहादी ने पैरों से कुचला… वीडियो वायरल

आखिर छद्दम धर्म-निरपेक्ष और गंगा-जमुनी तहजीब से गुमराह करने वाले हिन्दू भावनाओं से कब तक खिलवाड़ करते या करवाते रहेंगे? हिन्दू संयम की अग्नि-परीक्षा मत लो। जिस दिन हिन्दू संयम की सीमा टूटी कोई इनका आका बाहर नहीं आएगा। मोदी सरकार को ऐसे दंगाइयों से हर तरह की सरकारी सुविधा जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि छीन लेनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर जेल में केवल एक समय का नाश्ता और खाना देने का कानून बनाना चाहिए। जब तक इस तरह के सख्त कानून नहीं बनेंगे, दंगाई बाज नहीं आएंगे। हर हिन्दू और शांतिप्रिय लोगों को सरकार से ऐसे सख्त कानून बनाने के लिए मजबूर करना होगा, उससे पहले हिन्दू-मुसलमान का झगड़ा ख़त्म नहीं होगा। 
दिल्ली में रामनवमी के मौके पर लगाए गए भगवा झंडों को पैरों से कुचलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब 28 सेकेंड के इस वीडियो में दिख रहे शख्स की पहचान अजीम के तौर पर हुई है। पुलिस ने अजीम पर FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अजीम पर IPC की धारा 153 A और 295 A के तहत एक्शन लिया है। यह मामला दिल्ली के शास्त्री पार्क थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गली नंबर 8 में रहने वाले सागर ने अजीम के खिलाफ हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। उसने अजीम की करतूत का वीडियो भी पुलिस को सौंपा था।

सोशल मीडिया वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि रात के अँधेरे में कुर्ता-पायजामा पहना एक व्यक्ति पहले गली में टाँगे गए भगवा झंडों को नोंचता है और फिर पैरों से उसे कुचलने लगता है। 28 सेकेंड के इस वीडियो के अंत में आरोपित अपने घर में चला जाता है। पुलिस जाँच में यह हरकत करने वाला आरोपित अजीम निकला, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस साल रामनवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कट्टरपंथियों द्वारा हिंसा की गई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र प्रभावित हुए हैं। दिल्ली के जहाँगीरपुरी में पिछले साल रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद प्रशासन इस बार की शोभायात्रा की अनुमति देने में आनाकानी कर रहा था। हालाँकि बाद में हिन्दू संगठनों ने भव्य शोभायात्रा निकाली थी।

आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर : 7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

इसी विषय पर आज(4 अप्रैल,2023) Zee News पर एंकर दीपक चौरासिया ने अपने शो Taal Dhok Ke में जब ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता कलीमुद्दीन से प्रश्न पूछने पर कहा कि यात्रा में आतंकवादियों के शामिल होने के कारण ऐसा होता है। जिसका दीपक ने घोर विरोध भी किया, लेकिन मस्जिद में पत्थर और पेट्रोल बम कहां से आते हैं, उसका जवाब नहीं दे पाए। 

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।
इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।
पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।
ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।
जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।
पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

उदयपुर में भगवान परशुराम की प्रतिमा खंडित कर फेंके जाने से आक्रोश में हिन्दू समाज

       राजस्थान के उदयपुर के एक मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति तोड़ी गई (चित्र साभार- @ArjunMeenaBJP)
जैसे-जैसे चुनाव निकट आ रहा है, राजस्थान में हिन्दू प्रताड़ना बढ़ती जा रही है, जो वोट ध्रुवीकरण करने में सहायक सिद्ध हो रही है। राजस्थान के उदयपुर में भगवान परशुराम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया है। घटना से नाराज लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपितों जल्द गिरफ्तारी की माँग की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। घटना सोमवार (20 फरवरी, 2023) की बताई जा रही है। भाजपा सांसद अर्जुन लाल ने राजस्थान के हालात सीरिया और इराक से भी बदतर बताते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गोगुन्दा थानाक्षेत्र के गाँव रावलिया खुर्द की है। यहाँ के एक मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित थी जहाँ ग्रामीण पूजा-पाठ किया करते थे। सोमवार की सुबह जब स्थानीय निवासी मंदिर पहुँचे तो उन्होंने मूर्ति को टूटा पाया। मूर्ति के दोनों हाथों को तोड़ डाला गया था और उसे पैरों से उखाड़ कर नीचे सीढ़ियों पर फेंक दिया गया था। कुछ ही देर में यह बात पूरे इलाके में फ़ैल गई और आस-पास के श्रद्धालु घटनास्थल पर जमा होने लगे। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची।

पुलिस ने नाराज ग्रामीणों को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन नाराज लोगों ने धरना देना शुरू कर दिया। बाद में पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। हालाँकि, अभी तक किसी भी आरोपित को पकड़ा नहीं जा सका है। पुलिस इस घटना पर केस दर्ज कर के जाँच जारी होने की जानकारी दे रही है।

इस घटना की जानकारी भाजपा सांसद अर्जुन लाल मीणा को हुई तो उन्होंने राजस्थान के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने प्रदेश के हालात को इराक और सीरिया से भी बदतर बताया। अर्जुन लाल ने कहा कि अशोक गहलोत द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से राजस्थान में हिन्दुओं का रहना दूभर हो चुका है। मंदिर को तोड़ने वाले आरोपितों को भाजपा सांसद ने समाज के कंटक नाम से सम्बोधित किया।

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‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: नवाब सतपाल तंवर, ‘भी

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‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: नवाब सतपाल तंवर, ‘भी

घटना के 2 दिन बीत जाने पर भी किसी की गिरफ्तारी न होने पर सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा आरोपितों को जल्द पकड़े जाने की माँग जोर पकड़ रही है।

‘बलिदान स्वीकार, धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं’: लोकेश मुनि; "क्या मुस्लिम देश मदनी की बात से सहमत हैं?"

इस अज्ञानी मौलाना अरशद मदनी ने जिस जहर को उगला है, उसके असर का अंजाम नहीं सोंचा। इतने जमावड़े में उनके चहिते मौलाना को उसी के मंच से चुनौती देना बहुत हिम्मत का काम नहीं, बल्कि इन जहरीले मौलानाओ को होश में आने का संकेत दे दिया गया है। यानि महंत धीरेन्द्र शास्त्री की बात कि 'हद में रहोगे, ठीक है..." अब यह प्रश्न खड़ा हो रहा है, "क्या मुस्लिम देश मदनी की बात से सहमत हैं? या मौलाना की जहरीली बात का समर्थन करते है?" समस्त मुस्लिम देशों को मौलाना से पूछना होगा कि किस आधार पर ॐ को अल्लाह बताया है?   

लोकेश मुनि ने कहा है वे बलिदान स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन अपने सामने अपनी धर्म और संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। जैन मुनि ने बताया है कि यही कारण है कि उन्होंने मौलाना अरशद महमूद मदनी के बयान का विरोध किया था। उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी।

जैन मुनि ने इस घटना का एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुझे अपनी शहादत मंजूर थी। मैं अपनी आँखों के सामने अपने धर्म, संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। इसलिए विरोध किया, शास्त्रार्थ की चुनौती दी।”

जैन मुनि ने रविवार (12 फरवरी 2023) को मदनी को जमीयत के मंच से ही चुनौती दी थी। जब वे मदनी का विरोध कर रहे थे, तब सामने मुस्लिम भीड़ मौजूद थी और मंच पर विभिन्न धर्मों के गुरु मौजूद थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन का रविवार को आखिरी दिन था। लोकेश मुनि के विरोध के बाद जैन और हिंदू धर्मगुरुओं ने जमीयत का मंच छोड़ दिया था।

इस्लामी संगठन जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को एक बताया था। इसको लेकर जैनाचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना को लताड़ लगाते हुए मंच छोड़ दिया था।

मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने लगाई थी लताड़

मौलाना मदनी के बेतुके बयानों पर फटकार लगाते हुए जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा था, “मदनी ने जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ओम, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइए या मुझे सहारनुपर बुलाइए।”
उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं हैं। हम केवल आपस मे मिल-जुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ओम, मनु, अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

मनु, आदम तथा ओम और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के कार्यक्रम में कहा था, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ओम को पूजते थे। ओम कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”
मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ओम यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”
इस जीती जागती सच्चाई पर ध्यान आज तक किसी का क्यों नही जा पाया। इससे अधिक सनातन होने का प्रमाण क्या चाहिए? यह अत्यन्त ही दुर्लभ जानकारी है। जिसको लुप्त करने का प्रयास करने वाले सेक्युलर लोगों पर इतिहास की इस सच्चाई का बडा तमाचा है।  इस छोटे से विडियो का किसी के पास उत्तर नहीं मिल सकता। विडिओ बनाने वाले शोध करता को नमन करते हैं और निवेदन करते हैं ऐसी और छुपी हुई सच्चाईयों को ढूंढें और सनातन विरोधी तत्वों की जुबान पर ताला लगाएं।
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मौलाना अरशद मदनी जब ॐ और अल्लाह एक, फिर अज़ान और नमाज में ॐ क्यों नहीं?
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मौलाना अरशद मदनी जब ॐ और अल्लाह एक, फिर अज़ान और नमाज में ॐ क्यों नहीं?
यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

मौलाना अरशद मदनी जब ॐ और अल्लाह एक, फिर अज़ान और नमाज में ॐ क्यों नहीं?

चलो देर आए दुरुस्त आए, अप्रयत्क्ष रूप में इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मान गए कि ॐ और अल्लाह एक हैं। अब हिन्दू संगठन यह भी प्रश्न कर रहे है कि जब ॐ और अल्लाह एक है फिर अज़ान और नमाज़ में ॐ का जाप कब? अल्पज्ञानी मदनी को शायद यह नहीं मालूम कि ॐ शब्द में समस्त देवी-देवताओं का समावेश है। कई बार अपने लेखों में 'नमाज', 'अल्लाह' और 786 का हिन्दू धर्म से सम्बन्ध के बारे में लिख चूका हूँ। लेकिन अब मदनी ने तो ॐ और अल्लाह की परिभाषा बता दी। मदनी ने जो जहर उगला है,लोकेश मुनि की तर्ज पर समस्त हिन्दुओं, हिन्दू संगठनों को गंभीरता से लेकर जवाब देना होगा। जमीयत और मदनी के विरुद्ध बिगुल बजाकर स्पष्ट कहा जाए कि "अगर तुम्हारे कहने में सच्चाई है, फिर नमाज और अज़ान की ॐ का उच्चारण करवाओ या जहर फ़ैलाने पर माफ़ी मांगो। महन्त धीरेन्द्र शास्त्री ठीक कहते हैं कि 'हद में रहोगे, ठीक है।'  
मदनी सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे इस वीडियो को देख, अपनी अवाम को सच्चाई बताओ :
इस जीती जागती सच्चाई पर ध्यान आज तक किसी का क्यों नही जा पाया। इससे अधिक सनातन होने का प्रमाण क्या चाहिए? यह अत्यन्त ही दुर्लभ जानकारी है। जिसको लुप्त करने का प्रयास करने वाले सेक्युलर लोगों पर इतिहास की इस सच्चाई का बडा तमाचा है।  इस छोटे से विडियो का किसी के पास उत्तर नहीं मिल सकता। विडिओ बनाने वाले शोध करता को नमन करते हैं और निवेदन करते हैं ऐसी और छुपी हुई सच्चाईयों को ढूंढें और सनातन विरोधी तत्वों की जुबान पर ताला लगाएं।

इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पहले भारत को मुस्लिमों की मातृभूमि बताने के बाद अब मौलाना मदनी ने मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को एक बता दिया है। इसको लेकर जैन आचार्य मुनि लोकेश ने मदनी को लताड़ लेते हुए मंच छोड़ दिया था। हालाँकि अब आचार्य चिदानंद ने मदनी के बयान का समर्थन किया है। वहीं चक्रपाणि महाराज ने मदनी को सनातनी बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद ने कहा है, “मदनी के बयान में सहमति और असहमति की बात नहीं है। मैंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए। उन्होंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए हैं। जिसको सुनना होगा वो सुनेगा। मुझे नहीं मालूम लोकेश मुनि जी के मन में क्या था और उन्होंने क्या समझा है। किस रूप में इसे लिया है।” 

आचार्य चिदानंद ने यह भी कहा है, “मैंने मदनी की बात को इस रूप से लिया है कि मैं सब का सम्मान करता हूँ। मेरे लिए सब समान है और मैं सब का सम्मान करता हूँ। यही हमारे देश का संविधान भी है। हालाँकि यदि कोई इस्लाम धर्म को मानता है और उसकी विशेषता बताता है, तो उसको बताना ही चाहिए। यह स्वाभाविक है। वह उसकी विशेषता बताएँगे ही।”

उन्होंने आगे कहा है कि हिंदू धर्म मानने वाला भी हिंदू धर्म की विशेषता बताएगा। लेकिन अपने अपने धर्म की विशेषता को बताते हुए अपने मूल से, अपने मूल्यों से और अपनी जड़ों से अपनी संस्कृति तथा संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए। यही आज का संदेश है।

वहीं मदनी के बयान को लेकर अब इस पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज ने भी पलटवार किया है। चक्रपाणि महाराज ने कहा है कि मौलाना मदनी ने कहा है वह मनु को मानते हैं तो मनु तो सनातन धर्मी थे। उन्हें भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर बचाया था। इसलिए मौलाना मदनी भी सनातनी हिंदू हुए। अब उन्हें राष्ट्रभक्ति दिखाने, वंदे मातरम बोलने और भारत माता की जय बोलने की आवश्यकता है। क्योंकि हिंदू सनातन धर्मी राष्ट्रभक्त होते हैं।

मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था। न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ॐ को पूजते थे। ॐ कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”
मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ॐ यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”
यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

मौलाना मदनी को जैनाचार्य लोकेश मुनि ने लगाई लताड़

जैन आचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना मदनी को फटकार लगाते हुए कहा है, “मदनी जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ॐ, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइये या मुझे सहारनुपर बुलाइये।”
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जमीयत के मंच से मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने दिया मुंह तोड़ जवाब ; जमीयत के मंच पर बवाल
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जमीयत के मंच से मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने दिया मुंह तोड़ जवाब ; जमीयत के मंच पर बवाल
उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं है। आप केवल आपस मे मिलजुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ॐ, मनु अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

उत्तर प्रदेश : ‘अधर्मी स्वामी प्रसाद मौर्य का प्रवेश वर्जित’: हनुमान मंदिर में लगा पोस्टर

               लखनऊ के हनुमान मंदिर में स्वामी प्रसाद मौर्य को अधर्मी बता कर लगे पोस्टर (चित्र साभार: न्यूज़ 18)
रामचरितमानस पर समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद उनका विरोध बढ़ता जा रहा है। अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर में उनका पोस्टर लगा कर उन्हें मंदिर में न घुसने के लिए कहा गया है। इसी पोस्टर में मौर्य को अधर्मी भी कहा गया है। माना जा रहा है कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी स्वामी प्रसाद मौर्य से काफी नाराज हैं और जल्द ही कोई फैसला ले सकते हैं। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में कई धाराओं में FIR भी दर्ज हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामचरितमानस को बकवास कहने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ उत्तर प्रदेश और देश के कई हिस्सों में विरोध दर्ज करवाया जा रहा है। ऐसे में लखनऊ के प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर के गेट पर स्वामी प्रसाद का एक बड़ा सा पोस्टर लगा दिया गया है। इस पोस्टर में स्वामी प्रसाद के फोटो पर लाल रंग का क्रास मार्क बनाया गया है। इस पोस्टर में लिखा गया है, “हिन्दुओं की आस्था के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित तुलसीदास कृत रामचरितमानस का अपमान करने वाले अधर्मी स्वामी प्रसाद मौर्य का मंदिर में प्रवेश वर्जित है।”

पोस्टर में इसे मंदिर प्रशासन की आज्ञा बताया गया है। लेटे हनुमान मंदिर लखनऊ के चौक में पंचवटी घाट के पास लक्ष्मण टीला के बगल मौजूद है। मंदिर प्रशासन के सदस्य ने एक बयान में कहा है कि हम अपने मंदिर परिसर में ऐसे अधर्मी मानसिकता वाले को नहीं आने देंगे। मंदिर में मौजूद एक अन्य सदस्य ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को धर्म का कोई ज्ञान नहीं है। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि भविष्य में जो भी व्यक्ति सनातन के विरोध में बात करेगा उसको मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

वहीं एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से काफी नाराज हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य विधायकों के साथ इस बारे में मीटिंग की है और जल्द ही कोई निर्णय ले सकते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के ही बलरामपुर जिले में स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला जला कर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सदस्यों ने कोतवाली नगर में शिकायत दी है।

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‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी

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‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी

वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य पर लखनऊ के ही हजरतगंज कोतवाली में FIR दर्ज हो गई है। यह FIR शिवेंद्र मिश्रा नाम के व्यक्ति की तहरीर पर मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को दर्ज हुई है। मौर्य पर IPC की धारा 153 A, 295A,298, 504 और 505(2) लगाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।