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‘हिंदू कोई धर्म नहीं, एक गाली… हिंदू का अर्थ चोर-डकैत-लुटेरा-गुलाम’: क्रिश्चियन मोर्चा , देवी-देवताओं पर भी अभद्र टिप्पणी

मंच से हिंदुओं के खिलाफ उगली गई आग (फोटो साभार : Youtube/Prasant Tirkey Vlogs)
छत्तीसगढ़ के जशपुर में जन जागृति सभा के नाम पर हिंदुओं, देवी देवताओं के खिलाफ जमकर आग उगली गई। इस सभा का आयोजन भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा और राष्ट्रीय एकता परिषद की ओर से संयुक्त रूप से किया गया था। इस कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं और हिंदुओं के खिलाफ जमकर आग उगली जा रही है। इस मामले में विहिप समेत तमाम हिंदूवादी संगठनों ने हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई की माँग की, जिसके बाद राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।

जानकारी के मुताबिक, जशपुर के कुनकुरी थाना इलाके में 27 फरवरी 2024 को इस सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा के मंच से हिंदुत्व और ब्राम्हणों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जमकर आग उगली गई। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष करनैल सिंह ने हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र और गलत टिप्पणी करते हुए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की शिकायत दर्ज कराई। याचिका में कहा गया है कि आरोपितों ने अलग-अलग संप्रदाय और धर्म के लोगों के बीच शत्रुता और घृणा पैदा कर राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता को धक्का पहुँचाया है।

मंच से हिंंदुओं और ब्राह्मणों के खिलाफ लोगों को भड़काते हुए कहा गया, “खुद को हिंदू कहना बंद करें। हिंदू कोई धर्म नहीं, हिंदू कहना गाली है। ये फारसी भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ चोर, डकैत, लुटेरा, गुलाम होता है। जिस तरह से 3.5 परसेंट ब्राह्मणों के द्वारा हमें 4000 साल से गुलाम बनाए रखा जा रहा है, वैसे ही आज हमें हिंदू के नाम पर गुलाम बनाए रखने का काम किया जा रहा है।” इसे आप नीचे दिए गए वीडियो में 2.20 मिनट से सुन सकते हैं।

ईवीएम तोड़ने की भी अपील

इस सभा के मंच से लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान लोगों से ईवीएम तोड़ने को भी कहा गया। इस दौरान एक वक्ता ने 2023 में हुए 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं के विवादित बोल के वीडियो इंटरनेट पर शेयर किए जा रहे हैं।
मिस्टर सिन्हा नाम के एक्स यूजर ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने इस मंच से बोले गए जहरीले बयानों को शेयर करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्रवाई की माँग की है।

12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

एसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि शिकायत और कार्यक्रम से जुड़े वीडियो की जाँच के बाद आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। कुनकुरी थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 153 (क), 153 (ख), 295(क), 505(2), 109, 294 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में सुनील खलखो निवासी गोढ़ी थाना बागबहार, श्याम सुंदर मरावी निवासी कुनकुरी, मीरा तिर्की निवासी कांसाबेल, व्लासियुस तिग्गा निवासी अंबिकापुर, संजय सक्सेना निवासी कापू. रायगढ़, रेमिश तिर्की निवासी कांसावेल, दिनेश भगत निवासी नारियल डांड थाना कांसाबेल, हर्ष कुजूर निवासी पिराई थाना बगीचा, रूपनारायण एक्का निवासी जशपुर के साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है।

उदयपुर में भगवान परशुराम की प्रतिमा खंडित कर फेंके जाने से आक्रोश में हिन्दू समाज

       राजस्थान के उदयपुर के एक मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति तोड़ी गई (चित्र साभार- @ArjunMeenaBJP)
जैसे-जैसे चुनाव निकट आ रहा है, राजस्थान में हिन्दू प्रताड़ना बढ़ती जा रही है, जो वोट ध्रुवीकरण करने में सहायक सिद्ध हो रही है। राजस्थान के उदयपुर में भगवान परशुराम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया है। घटना से नाराज लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपितों जल्द गिरफ्तारी की माँग की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। घटना सोमवार (20 फरवरी, 2023) की बताई जा रही है। भाजपा सांसद अर्जुन लाल ने राजस्थान के हालात सीरिया और इराक से भी बदतर बताते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गोगुन्दा थानाक्षेत्र के गाँव रावलिया खुर्द की है। यहाँ के एक मंदिर में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित थी जहाँ ग्रामीण पूजा-पाठ किया करते थे। सोमवार की सुबह जब स्थानीय निवासी मंदिर पहुँचे तो उन्होंने मूर्ति को टूटा पाया। मूर्ति के दोनों हाथों को तोड़ डाला गया था और उसे पैरों से उखाड़ कर नीचे सीढ़ियों पर फेंक दिया गया था। कुछ ही देर में यह बात पूरे इलाके में फ़ैल गई और आस-पास के श्रद्धालु घटनास्थल पर जमा होने लगे। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची।

पुलिस ने नाराज ग्रामीणों को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन नाराज लोगों ने धरना देना शुरू कर दिया। बाद में पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। हालाँकि, अभी तक किसी भी आरोपित को पकड़ा नहीं जा सका है। पुलिस इस घटना पर केस दर्ज कर के जाँच जारी होने की जानकारी दे रही है।

इस घटना की जानकारी भाजपा सांसद अर्जुन लाल मीणा को हुई तो उन्होंने राजस्थान के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने प्रदेश के हालात को इराक और सीरिया से भी बदतर बताया। अर्जुन लाल ने कहा कि अशोक गहलोत द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से राजस्थान में हिन्दुओं का रहना दूभर हो चुका है। मंदिर को तोड़ने वाले आरोपितों को भाजपा सांसद ने समाज के कंटक नाम से सम्बोधित किया।

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‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: नवाब सतपाल तंवर, ‘भी

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‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: नवाब सतपाल तंवर, ‘भी

घटना के 2 दिन बीत जाने पर भी किसी की गिरफ्तारी न होने पर सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा आरोपितों को जल्द पकड़े जाने की माँग जोर पकड़ रही है।

दिल्ली : मनीष सिसोदिया : ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’ को नहीं पता भगवान धन्वंतरि पुरुष हैं या महिला

मोदी-योगी विरोध में चुनावी हिन्दू बन जनता को पागल बनाने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि धन्वन्तरि देवी है या देवता? वाह सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री!
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने ट्विटर से लोगों को धनतेरस की शुभकामनाएँ दी हैं। हालाँकि अरविन्द केजरीवाल द्वारा भारत रत्न के योग्य और संसार के सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री घोषित मनीष सिसोदिया को भी हिन्दू त्योहारों की थोड़ी और जानकारी लेने की जरूरत है। मनीष सिसोदिया ने अपने एक डिलीट किए जा चुके ट्वीट में लिखा, “स्वास्थ्य व समृद्धि की देवी माँ धन्वन्तरि से प्रार्थना करता हूँ कि सभी के जीवन में खुशहाली व सुख-शाँति बनाए रखें और सभी की मनोकामनाएँ पूरी करें। सभी देशवासियों को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ।”
                                            मनीष सिसोदिया द्वारा डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कथित तौर पर दुनिया के ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’ को यह भी नहीं पता कि धन्वन्तरि एक देवता हैं न कि देवी। अपनी अज्ञानता के चलते नेटिज़ेंस ने उन्हें ट्रोल किया तब उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। विक्रांत कुमार नाम के एक ट्विटर यूजर ने मनीष सिसोदिया को चुनावी हिन्दू कहा। उन्होंने लिखा, “भारत रत्न के काबिल, सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री और आधुनिक भगत सिंह ने भगवान धन्वन्तरि को पुरुष से महिला में बदल दिया। ऐसा तब होता है जब आप ‘चुनावी हिन्दू’ हों।”

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मनीष सिसोदिया के ट्वीट पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “सिर्फ चुनावों के समय मंदिर जाने और बाकी समय में हिन्दुओं को गाली देने वालों से ऐसा ही होता है।”

इसके अलावा कई अन्य नेटीजेंस ने मनीष सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में जानकारी दी। आख़िरकार सिसोदिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

दरअसल सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में सच में सीखने की जरूरत है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं जो धन्वन्तरि भगवान की जयंती का भी दिन है। धन्वन्तरि को आयुर्वेद का भी देवता कहा जाता है। हिन्दू ग्रंथों के मुताबिक, समुद्र देवता और असुरों के बीच हो रहे समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश ले कर भगवान धन्वन्तरि ही प्रकट हुए थे। साल 2016 से केंद्र सरकार ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के तौर पर स्वीकार किया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपनी पार्टी के अमूमन उन्ही नेताओं का महिमामंडन करते है जिन पर या तो घोटालों के आरोप हों या उन्हें गिरफ्तार किया गया हो। शराब घोटाले में फँसने के बाद ऐसा ही उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ भी किया था और उनके लिए ‘भारत रत्न’ की माँग कर डाली थी।

केजरीवाल ने ऐसा ही अपने मंत्री सत्येंद्र जैन के ठिकानों पर ED की छापेमारी के दौरान किया था। तब उन्होंने जैन को ‘पद्म विभूषण’ देने की माँग की थी।

हिंदू घृणा की नई हाइट पर लीना: पहले ‘काली’ को सिगरेट पीते दिखाया, अब शिव-पार्वती को

                          लीना ने अब 'शिव-पार्वती' का मजाक उड़ाया (फोटो साभार: @LeenaManimekali)
हिंदू घृणा में सनी फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) ने एक नया ट्वीट किया है। इसमें भगवान शिव और देवी पार्वती का मजाक बनाया है। जो फोटो ट्वीट की गई है उसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है। लीना वही फिल्ममेकर हैं जिनकी डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ विवादों में है।

लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था। वहीं, इसके प्रदर्शन के लिए कनाडा की आगा खान म्यूजियम ने माफी माँगी थी।

लीना एक तरफ सोशल मीडिया में हिंदुओं और उनके अराध्यों को लेकर लगातार जहर उगल रही हैं, दूसरी तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खुद को असुरक्षित बताकर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को भी आगे बढ़ा रही है। द गार्डियन को उन्होंने बताया कि भारत नफरत की मशीन बन चुका है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु के मदुरै में पैदा हुईं लीना मणिमेकलई का पालन-पोषण एक हिंदू के रूप में हुआ। लेकिन अब वह एक नास्तिक है। उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ‘काली’ हिंदू धर्म के प्रति अपमानजनक है। साथ ही अपनी सांस्कृतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सेंसरशिप पर एतराज जताया है।

इस रिपोर्ट में लीना के हवाले से कहा गया है, “मैं जिस राज्य से आती हूँ, वहाँ काली को एक बुतपरस्त देवी माना जाता है। वह बकरी के खून में पका हुआ मांस खाती हैं। शराब पीती हैं। बीड़ी (सिगरेट) पीती हैं और जंगली नृत्य करती हैं। यही वह काली है जिसे मैंने फिल्म के लिए अपनाया है।”

लीना का दावा है कि ‘काली’ का पोस्टर ऑनलाइन शेयर करने के बाद उन्हें, उनके परिवार और सहयोगियों को 200,000 से अधिक अकाउंट्स से ऑनलाइन धमकी मिली। उन्होंने इसके लिए दक्षिणपंथी हिंदू समूहों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “मुझे अपनी संस्कृति, परंपराओं और ग्रंथों को कट्टरपंथी तत्वों से वापस लेने का पूरा अधिकार है। इन ट्रोल्स का धर्म या आस्था से कोई लेना-देना नहीं है।” साथ ही कहा है कि भारत सबसे बड़े लोकतंत्र से नफरत की सबसे बड़ी मशीन बन गई है। लिहाजा मैं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूँ।

लीना के ताजा ट्वीट को लेकर भी नेटिजन्स ने नाराजगी जताई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि ये रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि जानबूझकर उकसावे का मामला है। उन्होंने कहा कि हिंदुओ को गाली देना- धर्मनिरपेक्षता? हिंदू आस्था का अपमान- उदारवाद है? बीजेपी नेता ने कहा कि लीना का हौसला केवल इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि उन्हें पता है कि लेफ्ट पार्टियाँ, कॉन्ग्रेस, टीएमसी उनको सपोर्ट करेंगी।

TV शो में फिर उगली गई हिंदू देवताओं के लिए घृणा

मदुरई में हुई हिंदूफोबिक रैली का टीवी शो में बचाव
आए दिन लगभग हर रोज सोशल मीडिया, टीवी और विभिन्न मंच पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसा ही एक मामला फिर देखने को मिला है। जहाँ तमिलनाडु के विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) पार्टी के प्रवक्ता विक्रमन ने भगवान कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने बीते दिनों उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा मदुरई में की गई रैली में हिंदू विरोधी नारों का बचाव करते हुए अपनी टिप्पणी की। इस रैली में पूछा गया था कि आखिर कृष्णा और अय्प्पा भगवान कैसे हो सकते हैं।

हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने से हिन्दू विरोधी क्या साबित करना चाहते हैं? दूसरे, हिन्दू देवी-देवतों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले क्या अपने मृतक शरीर को अग्नि को समर्पित नहीं  करने पर अपनी इच्छा जाहिर करेंगे, क्योकि अग्नि भी भगवान है? तीसरे, अपने अंतिम समय राम नाम सत्य है नहीं बोले जाने पर भी कुछ कहकर जाएंगे या फिर अपने अंतिम समय इन्ही भगवानों की शरण में जाएंगे?

टाइम्स नॉउ पर डिबेट के दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण पर गोपियों ने अनैतिक संबंध रखने का आरोप लगाया। विक्रमन ने कहा, “कृष्णा का युवा करियर वृंदावन की महिलाओं के साथ अवैध (अनैतिक) प्रेमसंबंधों से भरा हुआ था। इसे रासलीला कहा गया।” इस दौरान उन्होंने ‘पुराण’ का हवाला दिया।

हिंदू कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने इस पर दुख और आपत्ति जताते हुए कहा कि वो इस तरह से किसी के भगवान का अपमान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पुराण एक प्रतीकात्मक वर्णन है। उसे वैसे ही नहीं लिया जा सकता, जैसे कि इसमें कहा गया कि रावण के दस सिर थे। इसका मतलब यह नहीं हुआ कि उसके वाकई में दस सिर थे। इसका अर्थ यह होता है कि उसके पास दस सिर के बरारबर बुद्धिमत्ता थी। इससे यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि वह काफी विद्वान था। 

इसी तरह जब कोई कहता है कि अयप्पा, शिव और विष्णु के पुत्र हैं तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि शिव ने विष्णु से शादी की थी। यह उन दोनों की चमत्कारिक आध्यात्मिक शक्ति से उत्पन्न हुए थे। इसी तरह कृष्ण का गोपियों के साथ आध्यात्मिक संबंध था न कि अनैतिक। हिंदू देवी-देवताओं के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना हिंदूफोबिया के अलावा और कुछ भी नहीं है। इस तरह के लोग हिंदू सभ्यता और मान्यता को नीचा दिखाना चाहते हैं। इसलिए इस तरह की अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं।

पिछले दिनों गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट फैकेल्टी एक प्रदर्शनी में कुछ छात्रों द्वारा लगाई गई हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें आपत्तिजनक थीं। प्रदर्शनी में हिंदू देवी-देवताओं और भारत के कुछ राष्ट्रीय चिन्हों के चित्रों को रेप केसों से जोड़ा गया था। इतना ही नहीं, हिंदू देवी और देवताओं के चित्र बनाने के लिए उन अखबारों का प्रयोग किया गया था, जिन पर रेप की खबरें छपी हुई थी।


‘पिछले 7 सालों में 200 मूर्तियाँ विदेशों से भारत आईं’: ‘मन की बात’ में नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' का उनके विरोधियों द्वारा बहुत मजाक उड़ाया जाता है, स्वाभाविक भी है। आज तक उनके इस कार्यक्रम का अवलोकन करने पर 2014 में मोदी सरकार से पूर्व रही सरकारों के कार्यकाल में भारतीय संस्कृति का उपहास होने के साथ-साथ देवी-देवताओं की मूर्तियां चोरी कर विदेशों में बेचीं गयीं, लेकिन किसी भी सरकार ने इस कुरीति की ओर लेशमात्र भी ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि हिन्दू त्यौहारों का उपहास कर पश्चिमी सभ्यता का गुणगान किया जाता है, जैसे 'अपने पति के मैं क्यों भूखी रहूं', 'होली पर पानी की बर्बादी', 'शिवरात्रि पर शिवलिंग पर दूध चढ़ाना दूध की बर्बादी' और 'दीपावली पर आतिशबाज़ी से प्रदुषण' आदि आदि, विपरीत इसके पश्चिमी valentine day, father's day, mother's day, sister's day, friend's day, आदि को कितनी ख़ुशी-ख़ुशी मनाया जाता है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (27 फरवरी को) अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 86वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित किया। इसमें उन्होंने देश के बहुमूल्य धरोहरों को वापस लाने और मातृभाषा सहित तमाम विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2013 तक करीब 13 बहुमूल्य प्रतिमाएँ भारत आई थीं, लेकिन पिछले सात सालों में भारत ने 200 से अधिक मूर्तियों को विदेशों से भारत लाया है। इसके साथ ही उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीयों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।

मोदी बिहार के गया के कुंडलपुर मंदिर से चोरी हुई एक हजार साल से भी पुरानी भगवान अवलोकितेश्वर पद्मपाणि (भगवान गौतम बुद्ध) की मूर्ति को इटली से वापस लाया गया। उन्होंने कहा, “ऐसे ही कुछ वर्ष पहले तमिलनाडु के वेल्लूर से भगवान आंजनेय्यर (हनुमान जी) की प्रतिमा चोरी हो गई थी। हनुमान जी की ये मूर्ति भी 600-700 साल पुरानी है। इस महीने की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में हमें प्राप्त हुई और हमारे मिशन को मिल चुकी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में देश के कोने-कोने में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियाँ हमेशा बनती रहीं। इसमें श्रद्धा भी थी, सामर्थ्य भी था, कौशल्य भी था और विवधताओं से भरा हुआ भी था। हमारे हर मूर्तियों के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नज़र आता है।” उन्होंने कहा ये भारत की मूर्तिकला के नायाब उदाहरण के साथ-साथ भारतीयों की आस्था से भी जुड़ी हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में बहुत सारी मूर्तियाँ चोरी होकर भारत से बाहर गईं। कभी इस देश में तो कभी उस देश में। उनके लिए यह सिर्फ एक कलाकृति थी। उन लोगों को न उसके इतिहास से लेना-देना था और न श्रद्धा से। लेकिन, जिन देशों में ये मूर्तियाँ चोरी करके ले जाई गईं थीं, अब उन्हें भी लगने लगा कि भारत के साथ रिश्तों में soft power का जो diplomatic channel होता है, उसमें इसका भी बहुत बड़ा महत्व हो सकता है। पीएम मे कहा, “अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, ऐसे कितने ही देशों ने भारत की इस भावना को समझा है और मूर्तियाँ वापस लाने में हमारी मदद की है।”

मोदी ने कहा, “इन मूर्तियों को वापस लाना, भारत माँ के प्रति हमारा दायित्व है। इन मूर्तियों में भारत की आत्मा का, आस्था का अंश है। इनका एक सांस्कृतिक-ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि इसके साथ भारत की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं, भारत की श्रद्धा जुड़ी हुई है और एक प्रकार से people to people relation में भी ये बहुत ताकत पैदा करता है।” पीएम ने कहा कि पिछले साल सितम्बर में जब वे अमेरिका गए तो वहाँ उन्हें काफी पुरानी-पुरानी कई सारी प्रतिमाएँ और सांस्कृतिक महत्व की चीजें मिलीं।

मातृ भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जैसे अपनी माँ को नहीं छोड़ा जा सकता, उसी तरह मातृभाषा नहीं छोड़ी जा सकती। माँ और मातृभाषा मिलकर जीवन के आधार को मजबूत और चिरंजीवी बनाते हैं। अमेरिका एक तमिल परिवार का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि बहुत पहले जब वह अमेरिका गए थे तो देखा कि एक तमिल परिवार ने नियम बनाया था कि अगर वे शहर से बाहर नहीं है तो खाना हमेशा साथ खाते थे और अपनी तेलुगू भाषा में ही बात करते थे। यह नियम बच्चों पर भी लागू होता था। यह उनकी मातृभाषा के प्रति उनका प्रेम था।

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तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई 500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति आएगी भारत, बिहार से चोरी हुई भ

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तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई 500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति आएगी भारत, बिहार से चोरी हुई भ

मोदी ने कहा कि पिछले 75 सालों से भारत के लोग अपनी भाषा, खानपान और भाषा को लेकर संकोच में जी रहे हैं। यह विश्व के किसी अन्य देश में नहीं होता। अपनी मातृभाषा को गर्व के साथ बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कई भाषाएँ और बोलियाँ होने के बावजूद वे एक-दूसरे से सिखती रहीं और परिष्कृत होती रहीं। विश्व की सबसे पुरानी भाषा तमिल है और यह एक भारत की भाषा है। इस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

इंडोनेशिया : दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में मिली 1300 साल पुरानी गणेश भगवान की मूर्ति, सिर और हाथ ग़ायब

इंडोनेशिया, भगवान गणेश की मूर्ति
इंडोनेशिया में खुदाई के दौरान मिली भगवान गणेश की मूर्ति (साभार: swarajyamag.com)
इंडोनेशिया में भगवान गणेश की करीब 1300 साल पुरानी मूर्ति मिली है। मध्य जावा के वोनोसोबो ज़िले के डेंग (Dieng) वेटन गाँव में खुदाई के दौरान यह मूर्ति मिली। सेंट्रल जावा इंस्टीट्यूट फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ कल्चरल हेरिटेज (BPCB) ने 12 जनवरी को खुदाई कर यह मूर्ति निकाली।
इंडोनेशिया सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। यहॉं की करीब 90 फीसदी आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। बावजूद उसके करेंसी पर गणपति विराजमान हैं। दरअसल, भगवान गणेश को इंडोनेशिया में शिक्षा, कला और विज्ञान का देवता माना जाता है।
खुदाई में मिली भगवान गणेश की मूर्ति एंडीसाइट धातु से बनी हुई है। मूर्ति की ऊँचाई 140 सेमी और चौड़ाई 120 सेमी है। लेकिन, मूर्ति के सिर और हाथ का हिस्सा ग़ायब है। डेंग मंदिर इकाई संस्थान के प्रमुख, एरी बुदिर्तो (Eri Budiarto) ने बताया,
ख़बर के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति एक किसान ने खोजी थी। दिसंबर 2019 में जब वह अपने धान के खेत की जुताई कर रहा था तो 50 सेमी की गहराई में उसे मूर्ति का पता चला। डेंग पठार कलिंगा साम्राज्य से हिन्दू मंदिरों का स्थान रहा है, जो जावा के सबसे पुराने हिन्दू-बौद्ध राज्यों में से एक है। इस मूर्ति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुआ होगा।
इसके बाद इस द्वीपीय राष्ट्र में इस्लाम ने प्रवेश किया और आज जावा की 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। लेकिन, इस्लाम के बावजूद अभी भी यहाँ हिन्दू-बौद्ध का प्रभाव है। खुदाई के दौरान मिली भगवान गणेश की मूर्ति के मिलने के बाद से साइट से और भी महत्वपूर्ण वस्तुओं के मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।(साभार)