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‘पिछले 7 सालों में 200 मूर्तियाँ विदेशों से भारत आईं’: ‘मन की बात’ में नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' का उनके विरोधियों द्वारा बहुत मजाक उड़ाया जाता है, स्वाभाविक भी है। आज तक उनके इस कार्यक्रम का अवलोकन करने पर 2014 में मोदी सरकार से पूर्व रही सरकारों के कार्यकाल में भारतीय संस्कृति का उपहास होने के साथ-साथ देवी-देवताओं की मूर्तियां चोरी कर विदेशों में बेचीं गयीं, लेकिन किसी भी सरकार ने इस कुरीति की ओर लेशमात्र भी ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि हिन्दू त्यौहारों का उपहास कर पश्चिमी सभ्यता का गुणगान किया जाता है, जैसे 'अपने पति के मैं क्यों भूखी रहूं', 'होली पर पानी की बर्बादी', 'शिवरात्रि पर शिवलिंग पर दूध चढ़ाना दूध की बर्बादी' और 'दीपावली पर आतिशबाज़ी से प्रदुषण' आदि आदि, विपरीत इसके पश्चिमी valentine day, father's day, mother's day, sister's day, friend's day, आदि को कितनी ख़ुशी-ख़ुशी मनाया जाता है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (27 फरवरी को) अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 86वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित किया। इसमें उन्होंने देश के बहुमूल्य धरोहरों को वापस लाने और मातृभाषा सहित तमाम विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2013 तक करीब 13 बहुमूल्य प्रतिमाएँ भारत आई थीं, लेकिन पिछले सात सालों में भारत ने 200 से अधिक मूर्तियों को विदेशों से भारत लाया है। इसके साथ ही उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीयों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।

मोदी बिहार के गया के कुंडलपुर मंदिर से चोरी हुई एक हजार साल से भी पुरानी भगवान अवलोकितेश्वर पद्मपाणि (भगवान गौतम बुद्ध) की मूर्ति को इटली से वापस लाया गया। उन्होंने कहा, “ऐसे ही कुछ वर्ष पहले तमिलनाडु के वेल्लूर से भगवान आंजनेय्यर (हनुमान जी) की प्रतिमा चोरी हो गई थी। हनुमान जी की ये मूर्ति भी 600-700 साल पुरानी है। इस महीने की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में हमें प्राप्त हुई और हमारे मिशन को मिल चुकी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में देश के कोने-कोने में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियाँ हमेशा बनती रहीं। इसमें श्रद्धा भी थी, सामर्थ्य भी था, कौशल्य भी था और विवधताओं से भरा हुआ भी था। हमारे हर मूर्तियों के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नज़र आता है।” उन्होंने कहा ये भारत की मूर्तिकला के नायाब उदाहरण के साथ-साथ भारतीयों की आस्था से भी जुड़ी हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में बहुत सारी मूर्तियाँ चोरी होकर भारत से बाहर गईं। कभी इस देश में तो कभी उस देश में। उनके लिए यह सिर्फ एक कलाकृति थी। उन लोगों को न उसके इतिहास से लेना-देना था और न श्रद्धा से। लेकिन, जिन देशों में ये मूर्तियाँ चोरी करके ले जाई गईं थीं, अब उन्हें भी लगने लगा कि भारत के साथ रिश्तों में soft power का जो diplomatic channel होता है, उसमें इसका भी बहुत बड़ा महत्व हो सकता है। पीएम मे कहा, “अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, ऐसे कितने ही देशों ने भारत की इस भावना को समझा है और मूर्तियाँ वापस लाने में हमारी मदद की है।”

मोदी ने कहा, “इन मूर्तियों को वापस लाना, भारत माँ के प्रति हमारा दायित्व है। इन मूर्तियों में भारत की आत्मा का, आस्था का अंश है। इनका एक सांस्कृतिक-ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि इसके साथ भारत की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं, भारत की श्रद्धा जुड़ी हुई है और एक प्रकार से people to people relation में भी ये बहुत ताकत पैदा करता है।” पीएम ने कहा कि पिछले साल सितम्बर में जब वे अमेरिका गए तो वहाँ उन्हें काफी पुरानी-पुरानी कई सारी प्रतिमाएँ और सांस्कृतिक महत्व की चीजें मिलीं।

मातृ भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जैसे अपनी माँ को नहीं छोड़ा जा सकता, उसी तरह मातृभाषा नहीं छोड़ी जा सकती। माँ और मातृभाषा मिलकर जीवन के आधार को मजबूत और चिरंजीवी बनाते हैं। अमेरिका एक तमिल परिवार का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि बहुत पहले जब वह अमेरिका गए थे तो देखा कि एक तमिल परिवार ने नियम बनाया था कि अगर वे शहर से बाहर नहीं है तो खाना हमेशा साथ खाते थे और अपनी तेलुगू भाषा में ही बात करते थे। यह नियम बच्चों पर भी लागू होता था। यह उनकी मातृभाषा के प्रति उनका प्रेम था।

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तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई 500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति आएगी भारत, बिहार से चोरी हुई भ

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तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई 500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति आएगी भारत, बिहार से चोरी हुई भ

मोदी ने कहा कि पिछले 75 सालों से भारत के लोग अपनी भाषा, खानपान और भाषा को लेकर संकोच में जी रहे हैं। यह विश्व के किसी अन्य देश में नहीं होता। अपनी मातृभाषा को गर्व के साथ बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कई भाषाएँ और बोलियाँ होने के बावजूद वे एक-दूसरे से सिखती रहीं और परिष्कृत होती रहीं। विश्व की सबसे पुरानी भाषा तमिल है और यह एक भारत की भाषा है। इस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

रमजान पर करें सरकारी निर्देशों का पालन: मोदी ने की ‘मन की बात’

रमजान मन की बातप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि कोरोना वायरस आपदा की रोकथाम के लिए हुए लॉकडाउन के बीच उन्हें सामान्य दिनों की अपेक्षा इस बार ‘मन की बात’ के लिए काफ़ी ज्यादा फोन कॉल्स, मैसेज और पत्र आए हैं। उन्होंने कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई को ‘पीपल ड्रिवेन लड़ाई’ नाम दिया, क्योंकि लोग जनसेवा से लेकर अन्य माध्यमों से अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ताली व थाली बजाने और दिया जलाने की भी बात की। प्रधानमंत्री ने इसे ‘महायज्ञ’ करार दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के किसान भी आज खेतों में मेहनत कर रहे हैं और ध्यान रख रहे हैं कि कोई भी भूखा नहीं सोए। उन्होंने इस दौरान सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कोविड वॉरियर्स डॉट जीओवी डॉट इन’ की बात की, जिससे अब तक कई सामाजिक संगठन जुड़ चुके हैं। उन्होंने लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि कोई अपनी पेंशन राशि पीएम केयर्स में दान दे रहा है तो कोई पुरस्कार में मिली राशि दान कर रहा है। कोई खेतों की सब्जियाँ दान कर दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुश्किल परिस्थिति में देशवासियों ने जो ‘संकल्प शक्ति’ दिखाई है, उससे देश को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने व्यापार से लेकर दफ्तरों और अस्पतालों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि देश का हर इनोवेटर इस परिस्थिति से निपटने के लिए कुछ न कुछ नया निर्माण कर रहा है। ‘प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण पैकेज’ के तहत ग़रीबों के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर हो रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहा:
“गरीबों को 3 महीने मुफ्त सिलिंडर और राशन जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इसके लिए सरकार के अलग-अलग विभागों के लोग, बैंकिंग सेक्टर के लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मैं देश के राज्य सरकारों की भी तारीफ़ करना चाहूँगा। स्थानीय प्रशासन इस महामारी से निपटने में जो भूमिका निभा रहा है, वो सराहनीय है। एक अध्यादेश लाया गया है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं में लगे लोगों का उत्पीड़न और हिंसा के मामलों में कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है। जो लोग देश को कोरोना-मुक्त बनाने में जुटे हैं, उनकी रक्षा के लिए ये ज़रूरी था।”

विश्व की सहायता को भारत आया आगे 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया भर में कई देशों को दवाओं की ज़रूरत है और भारत अगर उनकी मदद नहीं करता तो भी कोई हमें दोषी नहीं ठहरता, लेकिन तब भी देश ने दूसरे देशों की मदद करने का फ़ैसला लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरूप ही फ़ैसला लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने आज विश्व के हर ज़रूरतमंद तक दवाएँ पहुँचाने का बीड़ा उठाया है और सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत का धन्यवाद कर रहे हैं।
मोदी ने कहा कि हम अपनी ही समृद्ध परंपरा को भूल जाते हैं और जब दूसरा देश कोई रिसर्च कर के हमें हमारी ही परंपरा सिखाता है तो हम हाथोंहाथ लेते हैं। ये सैकड़ों वर्ष की गुलामी का कालखंड का प्रभाव है कि हमें अपनी ही शक्ति पर विश्वास नहीं होता। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मविश्वास की कमी करार दिया। उन्होंने आशा जताई कि जिस तरह दुनिया ने योग को स्वीकार किया है, उसी तरह वो आयुर्वेद को स्वीकार करेगी। उन्होंने युवाओं को अपने पारम्परिक सिद्धांतों को हीन न समझने को कहा।
मोदी ने कहा कि समाज में एक और जागरूकता ये आई है कि लोग ये समझ रहे हैं कि सार्वजनिक जगहों पर थूकने से क्या नुकसान हो सकता है। यहाँ-वहाँ थूक देना लोगों की ग़लत आदतों का हिस्सा बना हुआ था। पीएम ने कहा कि अब समय आ गया है जब इस बुरी आदत को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया जाए। उन्होंने समझाया कि भले ही देर हो गई लेकिन अब यहाँ-वहाँ थूकने की आदत छोड़ देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मास्क भी अब लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जो मास्क लगाते हैं, वो सभी बीमार हैं। उन्होंने कहा कि एक ज़माना था जब कोई फल ख़रीदता था तो लोगों को लगता था कि उसके घर में कोई बीमार है और ये धारणा बन गई थी कि बीमारी में ही फल खाते हैं। पीएम मोदी ने भगवान बसवेश्वर की जयंती पर उनके अनुयायियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें उनसे काफ़ी कुछ सीखने को मिला है।
रमजान में करें सरकारी आदेश का पालन 
उन्होंने मुसलमानों से कहा कि वो रमजान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का जरिया बनाएँ। उन्होंने ये दुआ करने को कहा कि ईद आते ही दुनिया कोरोना-मुक्त हो जाए, ताकि हर्ष-उल्लास के साथ त्यौहार मनाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि रमजान के दौरान प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने उन कम्युनिटी लीडर्स को भी धन्यवाद दिया, जो लोगों को जागरूक करने में लगे हुए हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 101 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर ‘मुस्लिमों के ...
मोदी ने लोगों को अति आत्म-विश्वास में न फँसने की सलाह दी और ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ का सन्देश दिया। उन्होंने लोगों से ग़लती न पालने को भी कहा। पीएम मोदी ने कहा कि ये विचार न पालन कि हमारे गली या दफ्तर तक कोरोना नहीं पहुँचा है तो आगे भी कभी नहीं पहुँच सकता है।

कश्मीर में बम-बंदूक की शक्ति पर भारी पड़ती है विकास की शक्ति : मन की बात में मोदी

Mann Ki Baat
आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज(जुलाई 28) आकाशवाणी पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने चंद्रयान-2 मिशन, कश्मीर, जल संरक्षण जैसे कई विषयों पर चर्चा की। पीएम मोदी के दोबारा सत्‍ता संभालने के बाद मन की बात कार्यक्रम की यह दूसरी कड़ी है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों के साथ अपने विचार साझा करते हैं।  प्रधानमंत्री  के रूप में यह उनका 55वां रेडियो कार्यक्रम रहा।
  • देश के युवा साथियों को में एक क्विज प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं जिसमें भारत के स्पेस मिशन और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषय होंगे। हर राज्य से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले विद्यार्थियों को भारत सरकार अपने खर्च पर श्रीहरिकोटा लेजाएगी और सितंबर में उन्हें उस पल का साथी बनने का अवसर मिलेगा जब चंद्रयान चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा। इन विजयी विद्यार्थियों के लिए यह उनके  जीवन की ऐतिहासिक घटना होगी- पीएम मोदी
  • रंग और रेखाओं में कोई आवाज भले न होती हो, लेकिन इनसे बनी तस्वीरों से जो इन्द्रधनुष बनते हैं, उनका संदेश हजारों शब्दों से भी कहीं ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध होता है और स्वच्छता अभियान की खूबसूरती में भी ये बात हम अनुभव करते हैं: पीएम मोदी
  • कश्मीर में बैक टू विलेज योजना चली जिसमें स्थानीय लोग खुलकर भागीदारी कर रहे हैं। ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है और अधिकारी लोग एक रात गांव में बिता रहे हैं। विकास की शक्ति बंदूक की शक्ति पर भारी पड रही है। लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने को कितने बेताब हैं, कितने उत्साही हैं यह इस कार्यक्रम से पता चलता है, इस कार्यक्रम में, पहली बार बड़े-बड़े अधिकारी सीधे गांवो तक पहुँचे: पीएम मोदी
  • मेरे प्यारे देशवासियों, मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंतरिक्ष में  भारत की उपलब्धि पर आपको बहुत गर्व महसूस होगा। शुरुआती व्यवधान के बावजूद हमारे वैज्ञानिकों द्वारा किया गया सफल प्रक्षेपण अभूतपूर्व है:  पीएम मोदी
  • देशभर से कई लोगों ने मुझे  ‘मन की बात’ में चंद्रयान 2  के बारे में चर्चा करने का आग्रह किया है। चंद्रयान को जिस तरह वैत्रानिकों ने लॉन्च किया इसे हम सबकों गर्व करना चाहिए। व्यवधान आने के बाद भी वैज्ञानिकों का मनोबल रूका नहीं। यह मिशन कई युवाओं को प्रोत्साहित करेगा- पीएम मोदी
  • प्रधानमंत्री ने अपनी मनकीबात में कुछ ऐसे बच्चों की उपलब्धियों पर बात की जिन्होंने कैंसर जैसी घातक बीमारी को पराजित किया है एवं अपने कारनामे से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।
  • पानी के विषय ने इन दिनों हिंदुस्तान के दिल को झकझोर दिया है। जल संरक्षण पर इन दिनों तमाम कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। जल संरक्षण पर देशभर से सकारात्मक दिल को छू लेने वाली खबरें आ रही हैं- पीएम मोदी
  • मेघालय देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने जल संसाधन नीति बनाई है। हरियाणा सरकार को बधाई देता हूं कि उसने पंरपरागत खेती की जगह किसानों को कम पानी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया और इससे किसान का भी कोई नुकसान नहीं होता है। त्योहारों और मेलों में इस समय जल संरक्षण का संदेश दिया जाता है- पीएम मोदी

'बड़ी संख्या में लोगों ने के माध्यम से अनेक प्रकार की पुस्तकों की जानकारी साझा की हैं. मुझे अच्छा लगा कि लोग science, technology, innovation, इतिहास, संस्कृति, business, जीवन चरित्र, ऐसे कई विषयों पर लिखी गयी किताबों पर चर्चा कर रहे हैं.'


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प्रधानमंत्री ने लोगों की किताबों की ओर दिलचस्पी को देखते हुए कहा कि हमें NarendraModi App पर एक permanent book’s corner ही बना देना चाहिए ताकि जब भी लोग नई किताब पढ़ें, वहाँ लिखें व चर्चा करें और उन्होंने इस book’s corner के लिए नाम का सुझाव भी देने को कहा.
  • बड़ी संख्या में लोगों ने Narendra Modi App के माध्यम से अनेक प्रकार की पुस्तकों की जानकारी साझा की हैं. मुझे अच्छा लगा कि लोग साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, इतिहास, संस्कृति, बिजनेस, जीवन चरित्र, ऐसे कई विषयों पर लिखी गयी किताबों पर चर्चा कर रहे हैं.