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UNESCO ने दीपावली को घोषित किया अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई


भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक और बेहद खुशी का पल है। दुनिया भर में प्रकाश और उल्लास फैलाने वाले त्योहार दिवाली को यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी प्रतिष्ठित अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) की लिस्ट में शामिल कर लिया है। यह न सिर्फ दीपावली के लिए, बल्कि भारत की समग्र सांस्कृति
क पहचान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इस घोषणा के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर कहा कि “भारत और दुनिया भर के लोग बहुत खुश हैं। हमारे लिए, दीपावली हमारी संस्कृति और रीति-रिवाजों से बहुत करीब से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह रोशनी और नेकी का प्रतीक है। दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर लिस्ट में शामिल करने से इस त्योहार की दुनिया भर में लोकप्रियता और बढ़ेगी। प्रभु श्री राम के आदर्श हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहें।”

यह अहम फैसला यूनेस्को के 20वें सत्र में लिया गया, जो वर्तमान में दिल्ली के लालकिला में 8 दिसंबर से 13 दिसंबर तक चल रहा है। इस सत्र के दौरान हुई अहम बैठक में दीपावली को यूनेस्को की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया। यूनेस्को ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर इसका जानकारी साझा की। यूनेस्को ने लिखा कि ‘अमूर्त धरोहर की लिस्ट में नया नाम: दीपावली, भारत। बधाई हो!’

दिवाली को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से भारत की पारंपरिक कला, रीतियों, सामूहिक उत्सव और सामाजिक जुड़ाव को और मजबूती मिलेगी। दीयों की रोशनी, रंगोली, पूजा-अर्चना, परिवारों का मिलन—इन सबमें समाई भारतीयता को अब दुनिया भर में एक खास पहचान मिल गई है। देश में भी इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है। लोग इसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता मान रहे हैं। विदेशों में बसे भारतीयों के लिए भी यह गर्व का बड़ा मौका बन गया है, क्योंकि उनका प्रिय त्योहार अब आधिकारिक रूप से वैश्विक धरोहर बन चुका है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने एक्स पोस्ट में खुशी जताते हुए लिखा कि यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में ‘दीपावली’ का नाम शामिल होने के बारे में जानकर खुशी हुई। यह त्योहार के बहुत ज्यादा सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और लोगों को एक साथ लाने में इसकी भूमिका को पहचान देता है।

दीपावली के जुड़ने के साथ ही, भारत की ओर से इस प्रतिष्ठित अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में कुल 16 तत्व शामिल हो गए हैं। यह संख्या वैश्विक मंच पर भारत की असाधारण सांस्कृतिक और पारंपरिक समृद्धि को दर्शाती है। इससे पहले भारत की 15 सांस्कृतिक परंपराएं, जिनमें कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, योग, कुंभ मेला, और वैदिक मंत्रोच्चारण की परंपरा शामिल हैं, इस वैश्विक सूची में अपनी जगह बना चुकी हैं।

दीवाली मनाने वाले भारतीयों को विदेशी द्वारा brain dead, shithole, retarded और garbage लिखने पर सनातन विरोधी तृणमूल कांग्रेस सांसद, महुआ मोइत्रा ने ‘I agree’ लिखा

   महुआ मोइत्रा का भारत विरोधी पोस्ट पर मैं सहमत हूँ लिखना, फिर विवाद के बाद उसे डिलीट करना (साभार :                                                                                                                                         Timesnow)
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने एक विदेशी व्यक्ति के उस पोस्ट पर ‘मैं सहमत हूँ’ (I Agree) लिखा, जिसमें दिवाली मनाने वाले भारतीयों को ब्रेन डेड (brain dead), गंदगी (shithole) और दिवाली की तुलना ‘मंदबुद्धि’ (retarded) और ‘कचरे’ (garbage) से की गई थी।।

माहुआ मोइत्रा के इस ट्वीट ने सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा दिया, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे भारत विरोधी और हिंदू विरोधी नफरत को बढ़ावा देने वाला बताया। चौतरफा आलोचना के बाद, सांसद ने अंततः अपने इस विवादित पोस्ट को हटा लिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी सोशल मीडिया पर हिंदुओं और दिवाली के ख़िलाफ नस्लीय और धार्मिक असहिष्णुता का एक भयानक चलन दिख रहा है।

दिवाली पर नस्लीय टिप्पणी और महुआ मोइत्रा का ‘सहमत’ होना

23 अक्टूबर 2025 को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक ईसाई चरमपंथी के दिवाली त्योहार के खिलाफ किए गए अपमानजनक पोस्ट का खुलेआम समर्थन किया। उस विदेशी अकाउंट ने हिंदुओं के प्रति नस्लीय नफरत को बढ़ावा देते हुए भारतीयों को ‘दिमाग से मरे हुए भो#$के’ कहा और पश्चिमी देशों को ‘उनकी मंदबुद्धि दिवाली गंदगी’ से ‘पूरी तरह से गंदगी’ में बदलने का आरोप लगाया।

इस पोस्ट पर मोइत्रा ने सीधा और संक्षिप्त जवाब दिया ‘मैं सहमत हूँ’ (I agree)। उनका यह बयान पश्चिमी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दिवाली के ख़िलाफ़ फैल रही नस्लीय नफ़रत और हिंदू विरोधी कट्टरता को समर्थन देता हुआ प्रतीत हुआ, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गईं।

अब पोस्ट डिलीट कर सांसद दे रही सफाई

तृणमूल कांग्रेस सांसद माहुआ मोइत्रा अपने विवादित ‘I agree’ ट्वीट को लेकर सफाई देती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा उस विदेशी के हिंदू-विरोधी पोस्ट का समर्थन करने का नहीं था, बल्कि उन्होंने गलती से ‘मैं सहमत हूँ’ उस ट्वीट पर लिख दिया जो उसके नीचे था।

माहुआ के मुताबिक, यह एक गलत क्लिक और भ्रम का मामला था, न कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ उनकी राय का संकेत। उन्होंने कहा कि वह यात्रा पर थीं और समय पर ट्वीट की जाँच नहीं कर सकीं। हालाँकि, उनके इस बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस थमी नहीं है। कई लोग इसे ‘बचाव की कोशिश’ बता रहे हैं, जबकि कुछ ने उनकी सफाई को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें ट्वीट करने से पहले और सावधानी बरतनी चाहिए थी।

महुआ बांग्लादेश को भारत से बेहतर मानती- बीजेपी

यह पहला मौक़ा नहीं है जब महुआ मोइत्रा ने हिंदू धर्म या भारत के खिलाफ विवादित टिप्पणी की हो। बीजेपी के पोस्ट के अनुसार, यह वही महुआ मोइत्रा हैं जो मानती हैं कि बांग्लादेश भारत से बेहतर है और जिन्होंने कथित तौर पर लक्जरी हैंडबैग के बदले राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है। बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी सांसद पहले देवी काली का वर्णन ‘मांस और शराब की देवी’ के रूप में कर चुकी हैं।

इसी साल अगस्त में, उन्होंने एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर नमासूद्र और मटुआ जैसे अनुसूचित जाति समुदायों के हिंदुओं का मज़ाक उड़ाया था और उनके धार्मिक प्रतीकों को ‘लकड़ी की माला’ कहकर अपमानित किया था। इसके अलावा, बीजेपी ने टीएमसी शासित पश्चिम बंगाल में दिवाली के दौरान आतिशबाजी करने पर महिलाओं और बच्चों पर कथित अत्याचार और काली मंदिरों पर हमले की घटनाओं का भी उल्लेख किया।

दिल्ली : ISIS आतंकी ने पहले वर्दी पहनकर ली शपथ, फिर Videos सीरिया हैंडलर को भेजा: लैपटॉप-फोन से मिली चैट्स से हुए कई खुलासे, पुलिस ने बताया- दिल्ली के मॉल में धमाके की थी साजिश

दिल्ली के मॉल में ISIS धमाके की साजिश करने वाले आतंकी गिरफ्तार (साभार : aajtak & X_@PBSHABD)

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में एक बड़ा आतंकी हमला होने से पहले ही रोक लिया। पुलिस ने ISIS से जुड़े दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब पहले भी UAPA के तहत जेल जा चुका था और जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया था। उसने ISIS की शपथ ली थी, दिवाली पर मॉल में धमाका करने की योजना बनाई थी और सोशल मीडिया पर चरमपंथी प्रचार करता था।

ISIS के लिए निष्ठा की शपथ और नया नाम

जानकारी के अनुसार, जाँच में सामने आया कि अदनान ने आतंकी संगठन ISIS की शपथ ली थी। यह शपथ ‘Bayah’ कहलाती है। इस प्रक्रिया में आतंकी संगठन का सदस्य अपने ‘खलीफा’ या कमांडर के प्रति वफादारी की कसमें खाता है। अदनान ने ISIS की वर्दी पहनकर यह शपथ ली और उसकी तस्वीर अपने विदेशी हैंडलर को सीरिया भेजी। शपथ के बाद उसे नया कोड नाम ‘अबू मुहरिब’ दिया गया।

सोशल मीडिया से बना कट्टरपंथी

अदनान सोशल मीडिया के जरिए ISIS के संपर्क में आया। वह धीरे-धीरे कट्टरपंथी सोच से प्रभावित हुआ। फिर उसने ऑनलाइन आतंकियों से बात करनी शुरू की और विदेशी हैंडलरों के संपर्क में आ गया। अदनान के फोन और लैपटॉप से कई खतरनाक चैट्स, फोटो और वीडियो मिले हैं, सीरिया-तुर्की बॉर्डर से संचालित ID के संपर्क में थे। इसके अलावा, आतंकियों के पास से एक टाइमर, एक ISIS का झंडा, और लिटरेचर मिला। इन्होंने ‘वॉइस ऑफ मुसलमान’ नामक ग्रुप बनाया हुआ था।

अब दिल्ली पुलिस अदनान से लगातार पूछताछ कर रही है। एजेंसियाँ यह पता लगाने में लगी हैं कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद डिजिटल सबूतों से कई और संदिग्धों की पहचान हो सकती है।

अवलोकन करें:-

दिल्ली में गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू मुहरिब पहले भी हुआ था अरेस्ट, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले

दिल्ली में गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू मुहरिब पहले भी हुआ था अरेस्ट, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले
 

ISIS से जुड़ी बड़ी साजिश का खुलासा

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने 24 अक्टूबर 2025 की सुबह ऑपरेशन में ISIS के दो आतंकियों को पकड़ा था। मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब दिल्ली का रहने वाला और दूसरा आतंकी अबू मोहम्मद मध्य प्रदेश का रहने वाला है। दोनों ही करीब 19 और 20 साल के हैं। इन दोनों ने मिलकर दिवाली के समय दिल्ली के एक बड़े मॉल में धमाका करने की योजना बनाई थी। उनका मकसद त्योहार के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाके में हमला कर दहशत फैलाना था। अदनान को जून 2024 में उत्तर प्रदेश ATS ने UAPA एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। सितंबर 2024 में उसे जमानत मिल गई। जमानत पर आने के बाद उसने फिर से ISIS से कनेक्शन बनाया था।

जिन इस्लामी कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए इमरान मसूद ने कहा था- ‘मोदी को बोटी-बोटी कर देंगे’, उन्होंने इमरान की बेटी को भी नहीं बख्शा

     इमरान मसूद की बेटी का इंस्टाग्राम वीडियो और कट्टरपंथियों के कमेंट्स (फोटो: Instagram/Hiba Masood)
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद तो आपको याद होंगे, वही मसूद जो आज से करीब 10 साल पहले तब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की धमकी देकर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए थे। उनके जहरीले बयान ने तब उन्हें कट्टरपंथियों का ‘ब्लू आइड बॉय’ यानी दुलारा बना दिया था।

लेकिन अब कट्टरपंथी सहारनपुर से कांग्रेस सांसद मसूद और उसके परिवार से खफा हो गए हैं। यहाँ तक की उनकी बेटी को निशाना बनाने का मौका नहीं चूक रहे हैं। हुआ यूँ कि इमरान मसूद की बेटी हिबा मसूद ने दीपावली पर लोगों को बधाई देते हुए इंस्टाग्राम पर एक रील अपलोड की।

हिबा ने रील शेयर करते हुए लिखा, “मेरी तरफ से आपको दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ। पापा को (वीडियो के लिए) मजबूर नहीं किया गया है।” इस रील में हिबा मसूद के साथ उनके पिता इमरान मसूद भी नजर आए। इस रील में हिबा इमरान से पूछती हैं कि वह कैसी लग रही हैं और इसके बाद वह लोगों को दीपावली की बधाई देती हैं।  

इस वीडियो में सांसद इमरान मसूद भी दीपावली की बधाई देते नजर आते हैं। लेकिन यही बात अब कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रही है। कट्टरपंथी इस बात को नहीं पचा पा रहे हैं कि कैसे इमरान या उनकी बेटी ‘काफिरों’ के त्योहार पर बधाई दे सकते हैं।

इस रील के कमेंट्स में कई लोगों ने जहाँ अच्छी बातें लिखीं तो कुछ कट्टरपंथियों को यहाँ भी जहर उगलने का मौका मिल गया। जिस इमरान को कट्टरपंथियों ने अपना पोस्टर ब्यॉय बनाना चाहा था, उनमें अब जिहादियों को अपना जानी दुश्मन नजर आ रहा है।

सरफराज ओवैसी नामक एक यूजर ने हिबा के वीडियो पर कमेंट करते हुए कहा, “अल्लाह इन सब को हिदायत दे।” यानी सरफराज को लगता है कि इमरान और उनका परिवार भटक गया है तो अल्लाह उनको सही रास्ते पर लाएँ।

                                                              हिबा के पोस्ट पर कमेंट

ऐसी टिप्पणी करने वाला सरफराज अकेला नहीं है, कट्टरपंथियों की एक पूरी फौज हिबा के विरोध में उतर आई है। शाह फहद इकबाल नामक एक यूजर के लिए तो यह पूरा समुदाय के खतरे की बात हो गई हैं। शाह फहद ने लिखा, “अल्लाह उम्मते की हिफाजत फरमाए” यानी जितने भी मुसलमान हैं, उनको कोई नुकसान ना हो।

                                                               हिबा के पोस्ट पर कमेंट

एक यूजर ने तो इमरान मसूद को असदुद्दीन ओवैसी से कम कट्टर समझते हुए उनसे अपनी नाराजगी जाहिर की। समीर बरकत नाम के इस यूजर ने लिखा, “इसलिए मुझे मेरे सदर बैरिस्टर असद ओवैसी पर नाज है।” यानी अगर कट्टरता कम हुई तो आप किसी भी तरह से इन कट्टरपंथियों के ‘हीरो’ नहीं रह सकते हैं।

                                                              हिबा के पोस्ट पर कमेंट

यूसुफ नाम के एक यूजर ने दावा कर दिया कि दीवाली की बधाई देना ही गलत है। उसने लिखा, “दूसरे धर्मों के त्योहारों पर बधाई देने पर इस्लाम में सख्त मनाही है।”

एक यूजर ने लिखा कि मसूद और उसकी परिवार केवल नाम के मुसलमान हैं। मुजफ्फर खान नामक इस यूजर ने लिखा, “तुम लोग सिर्फ नाम के मुसलमान हो, हरकतें सारी शैतानों वाली हैं। सहारनपुर की जनता ने बहुत गलत नेता चुन लिया है।”

                                                               हिबा के पोस्ट पर कमेंट

रजवी नाम के एक यूजर ने लिखा कि इन्ही सब कामों की वजह से मुस्लिम कौम आज बदनाम और बर्बाद है।

हिबा मसूद के पोस्ट पर ऐसे 2-4 कमेंट नहीं है बल्कि ऐसे कमेंट्स की भरमार है। कट्टरपंथियों की कमेंट्स से साफ है कि उनके लिए इमरान मसूद या उनका परिवार का कोई आदमी तभी तक उनका अपना है जब तक वो उनकी बात को आँख बंद कर मान रहा है।

इन कट्टरपंथियों के लिए इस्लाम का मायना बस एक है कि तुम हमारे झंडे के नीचे रहो, हमारे तौर-तरीके अपनाओ, हमारी हर सलाह को बिना सवाल माने स्वीकार करो तभी कोई उनके लिए सच्चा मुसलमान हो सकता है।

जो इस्लाम से हटा, जो शरीयत से जरा सा टस से मस हुआ बस वही इन कट्टरपंथियों की आँखों में खटकने लगता है। इस कट्टर विचारधारा में बस एक जैसी सोच और एक जैसे विचारों की ही जगह है। अगर कोई इनका ‘अपना’ भी इससे टस से मस होता है तो ये उस पर टूट पड़ते हैं जैसे इमरान मसूद के मामले में हुआ था।

दिल्ली-NCR में 400 पार पहुँचा AQI, GRAP-2 प्लान लागू: दीपावली पर ‘पटाखे मत फोड़ो’ का ज्ञान देने वाले बताएँगे बिना आतिशबाजी ही क्यों बिगड़ी राजधानी की हवा?

                                                                                                                     साभार: AI-ChatGPT
दिल्ली की हवा फिर से जहर बन चुकी है। अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में आते-आते दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) औसत ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में पहुँच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली के कई इलाकों में AQI सोमवार (20 अक्टूबर 2025) दिवाली की सुबह 400 पार पहुँच गया। यानी दीवाली से पहले ही दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील होती जा रही है।
पंजाब में जबसे आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है केजरीवाल पार्टी ने पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या होने पर पंजाब को आरोपित करना छोड़ दिया, जबकि जब तक वहां कांग्रेस की सरकार थी ये ही केजरीवाल पार्टी दिल्ली में प्रदुषण के पंजाब को कोसती थी।  

ऐसा नहीं हैं कि सरकार और अदालतें स्थिति को लेकर निष्क्रिय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाए ‘ग्रीन फायरक्रैकर्स’ के उपयोग की अनुमति दी थी। इन पटाखों को वैज्ञानिक रूप से इस तरह बनाया गया है कि इनमें 30 प्रतिशत तक कम प्रदूषक तत्व उत्सर्जित हों।

साल 2025 में अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में केवल वही ग्रीन फायरक्रैकर्स जलाए जा सकते हैं जो वैज्ञानिक संस्था CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित हों और जिनकी बिक्री और उपयोग केवल तय समय के भीतर ही किए जाएँ।

बढ़ते प्रदूषण का कारण

 फिर भी सवाल यह है कि जब दिवाली ‘ग्रीन’ बताई जा रही है तो हवा इतनी जहरीली क्यों है? असल में प्रदूषण के कई स्रोत हैं जो एक साथ मिलकर हवा को जहरीली बना देते हैं। सबसे बड़ा कारण मौसम में बदलाव है। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में दिल्ली और NCR में तापमान गिरने लगता है, हवा की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है और नमी बढ़ जाती है। ऐसे में प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ पाते और जमीन के पास ही फँस जाते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस हफ्ते हवा की गति केवल 4 से 6 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जिससे प्रदूषण का फैलाव रुक गया।

पराली जलाने से बढ़ा प्रदूषण?

बढ़ते प्रदूषण का दूसरा कारण हर साल की तरह पराली जलाने की घटनाएँ हैं। पंजाब और हरियाणा में किसान धान की फसल के बाद खेतों को साफ करने के लिए पराली जलाते हैं। सैटेलाइन डेटा के अनुसार, पिछले हफ्ते पंजाब में 1200 से ज्यादा आग के मामले दर्ज किए गए जबकि हरियाणा में 400 से अधिक। हवा का रुख अगर उत्तर-पश्चिम दिशा में होता है तो इन इलाकों का धुआँ सीधे दिल्ली की ओर आता है।

दिल्ली में लागू GRAP-2

इसके अलावा दिल्ली के भीतर भी प्रदूषण के कई स्थायी स्रोत हैं। सड़क की धूल, लगातार चल रहे निर्माण कार्य, बढ़ते डीजल जनरेटर और भारी ट्रैफिक- ये सब मिलकर हवा को और गंदा बना रहे हैं। ग्रेडेड रिस्पॉन्सस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-2 लागू किया गया है, जिसमें निर्माण स्थलों पर सख्ती, पानी का छिड़काव और कचरा जलाने पर रोक जैसी शर्तें शामिल हैं। लेकिन जमीन पर इन उपायों का असर सीमित ही दिखता है क्योंकि निगरानी और पालन कमजोर है।

पटाखों से बढ़ा दिल्ली का AQI?

अब बात आती है ग्रीन पटाखों की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बाजार में पारंपरिक पटाखे भी अवैध रूप से बिक रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 30 प्रतिशत कम प्रदूषण देने वाले पटाखे भी बड़ी मात्रा में जलाए जाएँ तो उनका असर भी बहुत नहीं पड़ता।
नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन क्रैकर्स तभी प्रभावी हैं जब इनका उपयोग सीमित समय और कम मात्रा में हो। लेकिन दिवाली की रात यह सीमा अक्सर क्रॉस कर जाती है, जिससे हवा में मौजूद कण और गैसें और खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती हैं।

क्या दिवाली पर ही प्रदूषण हो सकता है नियंत्रित?

इन सबके बीच सबसे चिंताजनक बात यह है कि हालात हर साल दोहराए जाते हैं। प्रदूषण से निपटने के लिए अस्थायी उपाय जैसे पानी का छिड़काव, ट्रक एंट्री पर रोक और स्कूल करने की बात तो होती हैं लेकिन लंबे समय तक के समाधान पर प्रगति बहुत धीमी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर दिल्ली-NCR को प्रदूषण से राहत चाहिए तो सिर्फ दिवाली पर ही नहीं बल्कि पूरे साल प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण और हरित नीतियों का पालन करना जरूरी है।

दिवाली के बाद नहीं रहेगा प्रदूषण

इस समय दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक से करीब 20 गुना अधिक है। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। दिवाली के बाद अगर मौसम में ठंड और बढ़ी और हवा की गति कम रही तो स्थित और खराब हो सकती है।
यानि केवल दिवाली पर ही प्रदूषण पर लगाम लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि उसके बाद भी है और पूरे साल भी है। तो वे वामपंथी, लिबरल और फेमिनिस्ट, जो भी दिवाली पर प्रदूषण का ठीकरा फोड़ने के लिए सामने आ रही हैं। वे समझ लें कि प्रदूषण को पूरे साल नियंत्रित करने की जरूरत है तो केवल दिवाली पर प्रदूषण रोकने का ज्ञान न दें।

ब्रिटेन के लीसेस्टर में न आतिशबाजी होगी, न होंगे कोई स्टेज शो: ‘पब्लिक सेफ्टी’ के नाम पर लगा दीवाली पर बैन, हिंदू बोले- अब हमारे पर्व भी खतरे में

                                 ब्रिटेन के लीसेस्टर में दिवाली उत्सव पर बैन (साभार-chatgpt)
भारत के बाहर दुनिया के सबसे बड़े दिवाली उत्सव में एक ब्रिटेन के लीसेस्टर में होने वाले उत्सव पर रोक लगा दिया गया है। दिवाली पर यहाँ आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों इस साल नहीं हो रहा है। सिटी काउंसिल की इस घोषणा को हिन्दू समुदाय ने पक्षपातपूर्ण करार दिया है।

हर साल यहाँ बड़े पैमाने पर पारंपरिक उत्सव आयोजित होते थे। आतिशबाजी और स्टेज शो जैसे कार्यक्रम होते थे। इस साल बेलग्रेव रोड पर यातायात बंद रहेगा। हालाँकि लैंपपोस्ट पर सजावट किए जाएँगे। इसके पीछे पब्लिक सेफ्टी का हवाला दिया गया है।

आवाजाही बंद, लेकिन ‘गोल्डन माइल’ की होगी सजावट

लीसेस्टर सिटी काउंसिल के मुताबिक, हर साल की तरह इस साल भी बेलग्रेव रोड पर मशहूर ‘गोल्डन माइल’ लाइटों से जगमगाएगा और 20 अक्टूबर 2025 को सड़कों पर ट्रैफिक भी बंद रहेगा। लेकिन इस बार आतिशबाजी नहीं होगी, ना ही मंच पर कोई कार्यक्रम होगा। पिछले सालों की तरह दीवाली का मेला भी नहीं लगेगा।

यह कदम शहर के सुरक्षा सलाहकार समूह (SAG) के निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें काउंसिल, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। SAG ने कहा कि पिछले साल दीपावली पर करीब 50 हजार लोग इकट्ठा हुए थे, जो कि सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

भारतीय मूल की लीसेस्टर सांसद शिवानी राजा ने इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दीपावली का जश्न खतरे में है। शिवानी राजा ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “हमारी दीवाली का जश्न अब भी खतरे में, हमारे जश्न पर संकट मंडरा रहा है।”

पिछली दीवाली में परोसा गया नॉन वेज- शराब

यह पहली बार नहीं है जब ब्रिटेन में दीवाली के जश्न पर विवाद खड़ा हुआ है। पिछले साल 2024 में भी पीएम कीर स्टार्मर की सरकार के दौरान 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर दीवाली रिसेप्शन कार्यक्रम में मीट और शराब परोसी गई थी।

उस वक्त भी हिंदू, सिख और जैन समाज के लोगों ने इसका विरोध किया था और इसे धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया था। लीसेस्टर सांसद शिवानी राजा ने तब भी स्टार्मर को पत्र लिखकर कहा था कि खाने का मेन्यू धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं था। उन्होंने आगे से गाइडेंस देने की पेशकश भी की थी।

लीसेस्टर में हिंदू-विरोधी माहौल खड़ा करने की हुई कोशिश

ब्रिटेन के लीसेस्टर में 18 प्रतिशत हिंदू समाज के लोग रहते हैं। यही कारण है कि लीसेस्टर की दीवाली दुनियाभर में मशहूर है। इसके अलावा बाकी हिंदू त्योहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं। हालाँकि, शहर में कई बार हिंदू-विरोधी माहौल खड़ा करने की कोशिश की गई है।

गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा में भगवा झंडे लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। जब मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB) ने इसे ‘हिंदू कट्टरवाद’ बताकर कार्रवाई की माँग की थी।

वहीं साल 2022 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बाद हिंसा के जख्म अब तक नहीं भरे हैं। सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाई गई थीं। इन अफवाहों के बाद हिंदू घरों और मंदिरों पर हमले हुए, भगवा झंडो का अपमान किया गया और सरेआम लोगों पर चाकू से वार किए गए थे।

कुछ समय बाद नवंबर 2022 में आई घटना की जाँच रिपोर्ट में साफ हो गया था कि हिंसा ‘हिंदुत्व कट्टरवाद’ से नहीं, बल्कि इस्लामी दुष्प्रचार से भड़की थी।

शंकराचार्यजी महाराज का कहना उचित हिन्दुओं बहरूपी हिन्दुओं से सावधान; इस्लामिक गोलबंदी में नहीं फंसे, देखिए वीडियो ; नाम में हिंदू, पर हमदर्द इस्लामी कट्टरपंथियों का: भारत विरोधी ढोंगी Hindu for Human Rights को सुहा नहीं रही लंदन की दीवाली, मुस्लिम मेयर से कहा- हिंदू संगठनों से तोड़ो रिश्ते

                                       VHP और BAPS को लेकर HfHR ने एक पत्र लिखा है
कुछ ही समय पहले पूज्यनीय शंकराचार्य ने ढोंगी हिन्दुओं से सतर्क रहने की बात कही बहुत जल्दी उनकी बात सच होते भी देखी जा रही है। उनके प्रवचनों से विरोधियों की नींद हराम हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस्लाम जो गोलबंदी कर रहा है हिन्दुओं को उससे भी सतर्क रहना चाहिए। इसी तरह 1555 में फ्रैंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस ने भविष्यवाणियां की थी जो आज तक शत-प्रतिशत सच हो रही है। 2014 में सत्ता परिवर्तन की बात करते कहा कि 2014 में देश को असली आज़ादी ही नहीं अखंड हिन्दू राष्ट्र और विश्व गुरु बनने की राह पर चलेगा। देख लो बात सच हो रही है।(विस्तार से भविष्यवाणियां पढ़ने के लिए Organiser Weekly 1986/87 का अवलोकन किया जा सकता है)। 

दूसरे, मार्च 7, 1966 को गोहत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पुलिस से गोलियां चलवाकर खून की होली खेलते पार्लियामेंट स्ट्रीट को खून से रंग दिया था तब आचार्य कृपालुजी महाराज ने रोते हुए कहा कि "इन्दिरा जिस तरह गोपाष्टमी के दिन हम निहत्ते साधुओं-संतों से खून की होली खेली है तेरी भी... इसी तरह गोपाष्टमी के दिन. ..(31 अक्टूबर को गोपाष्टमी ही थी) और कांग्रेस को ख़त्म करने से मॉडर्न ड्रेस में एक तपस्वी आएगा।" अगर अभी भी हिन्दू हिन्दुत्व का चोला ओढे घूम रहे हैं, जैसाकि शंकराचार्य जी ने भी कहा है, ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरुरत है। देखिए वीडियो:               

हिंदू और भारत विरोधी अमेरिकी संगठन हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इंग्लैंड की राजधानी लंदन में दिवाली मनाने में खलल डालने की कोशिश की है। HfHR के डायरेक्टर राजीव सिन्हा ने लंदन के मेयर सादिक खान को एक पत्र लिखकर विश्व हिंदू परिषद (VHP), BAPS और चिन्मय मिशन जैसी हिंदू संस्थाओं के साथ ‘सभी संबंध खत्म’ करने को कहा है।

भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाने के लिए कुख्यात हिंदू विरोधी संगठन HfHR, इस बात से नाराज था कि इन हिंदू संस्थाओं ने 27 अक्टूबर को लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में दिवाली कार्य्रकम के आयोजन में भाग लिया था।

HfHR द्वारा लिखे इस पत्र को एक्स(पहले ट्विटर) पर सुहाग शुक्ला ने साझा किया। इस पत्र हिन्दूस फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इस बात पर ‘निराशा’ जताई कि VHP और बाकी संस्थाओं ने लंदन के मेयर सादिक खान के कार्यक्रम को आयोजित करने में मदद की थी।

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने लंदन के मेयर से इन हिंदू संगठनों से संबंध तोड़ने और भविष्य में दिवाली समारोह आयोजित करने के लिए नए संगठन तलाशने को कहा है। HfHR ने दावा किया कि यह हिंदू संगठन ”भारत और यूके में हिंदुत्व आंदोलन के लिए एक मुखौटे का काम करते हैं।” 

HfHR का हिन्दू विरोधी इतिहास

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) के नाम से लग सकता है कि यह हिंदू समुदाय के हित के लिए काम करने वाला कोई हिंदू संगठन है। असल में यह भेड़ की खाल में भेड़िया है। यह संगठन अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।
इसने लगातार खुद को मानवाधिकारों के कथित रक्षक के रूप में पेश किया है, जबकि असल में यह अपना लिबरल एजेंडा चलाता है। इस संगठन को टाइड्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से पैसा मिलता है। टाइड्स अमेरिका में हमास के समर्थन वाली रैलियों को भी पैसा देती है। HfHR अक्सर हिन्दुओं के विरोध में ही दिखता है।
टाइड्स फाउंडेशन खुद कई ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो वामपंथी और भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं। विकिपीडिया को लेकर बनाए गए ऑपइंडिया के डोजियर में बताया गया है कि टाइड्स कई भारत विरोधी और हिंदू विरोधी संगठनों को पैसा देता रहा है। यह भारत और हिन्दुओं को बदनाम करते हैं और कट्टरपंथियों को बढ़ावा देते हैं।
HfHR अक्सर अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए हिंदू प्रतीकों का उपयोग करता है। हिंदू विश्वासों को लगातार HfhR नीचा दिखाता रहा है। यह हिन्दू ग्रन्थों की गलत व्याख्या करके प्रश्न उठाने और हिन्दुओं कि छवि खराब में जुटा एक संगठन है।
HfHR का गठन वर्ष 2019 में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ऑर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया (OFMI) द्वारा किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों संगठनों ने अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी (AJA) नामक एक और संगठन बनाया था।
द हिंदू में छपे एक लेख के अनुसार, 22 सितंबर, 2019 को पीएम मोदी की ह्यूस्टन यात्रा के खिलाफ़ प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में AJA सबसे आगे थी। ‘HfHR’ की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने भी 2019 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर भारतीय मुसलमानों में दहशत पैदा करने की कोशिश की थी।

पंजाब : AAP दीवाली को करती है बदनाम ; पराली जलाने की घटनाएँ 10000 के पार, पिछले साल के मुकाबले 25% अधिक

                                             साभार: Tribune India
मौजूदा मौसम में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10,000 के पार हो गई हैं। उधर नवाँशहर पहुँचे राज्य के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल कह रहे हैं कि राज्य की AAP सरकार ने किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर 1.33 लाख उपकरण मुहैया कराए हैं। जबकि वास्तविकता ये है कि अकेले शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को राज्य में पराली जलाने की 2000+ घटनाएँ सामने आई हैं। ये अब तक एक दिन में रिकॉर्ड है।

अगर समान अवधि की ही बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 26.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। शुक्रवार को 2067 जगह पराली जलाया जाना एक नया रिकॉर्ड है। पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या अब 10,214 के पार चली गई है। जबकि पिछले वर्ष 15 सितंबर से लेकर 28 अक्टूबर तक इसी अवधि में ऐसी 7503 घटनाएँ सामने आई थीं। शुक्रवार को सबसे ज्यादा मामले संगरूर में सामने आए।

जिले में पराली जलाने की एक दिन में 296 मामले सामने आए। इसके बाद पटियाला का स्थान आता है, जहाँ 274 जगह पराली जलाई गई। तीसरे नंबर पर तरनतारण जिले में 258 जगह से पराली जलाने की घटनाएँ सामने आईं। इसी तरह कपूरथला (137), फ़िरोजपुर (131), बठिंडा (124) और जालंधर (116) भी पीछे नहीं रहा। पठानकोट अकेले ऐसा जिला है, जहाँ से पराली जलाने की कोई भी घटना सामने नहीं आई।

अब तक के कुल आँकड़ों की बात करें तो इस साल सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएँ तरनतारण (1996) में सामने आई हैं। इसी तरह अमृतसर में पराली जलाने की 1245, पटियाला में 1059 और संगरूर में 760 मामले सामने आए हैं। खास बात ये भी है कि संगरूर में 760 में से 550 मामले पिछले 3 दिनों में ही सामने आए हैं। अकेले पंजाब के 10 जिले राज्य में पराली जलाने की 83% घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

इनमें से 5 जिले मालवा में आते हैं, जबकि 2 दोआब और 3 माँझा में स्थित हैं। हरियाणा में पराली जलाने के मामले में सुधार हुआ है। जहाँ पिछले साल इस तरह की 2252 घटनाएँ सामने आई थीं, इस साल आँकड़ा 24% की गिरावट के साथ 1701 पर है।2021 में दिल्ली में पराली जलाने के एक भी मामले नहीं थे, जबकि इस साल यहाँ भी ऐसी 5 घटनाएँ हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी 14% की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मामले घटे हैं।

भाजपा इसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हैं, जो पिछले साल तक पंजाब-हरियाणा को दोष देते फिरते थे और इस साल चुप्पी साध कर दीवाली के पटाखे प्रतिबंधित करने में लगे रहे। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम रही है और यमुना साफ़ करने के नाम पर उसमें ज़हरीला सिलिकॉन डिफॉमर डाल रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि प्रदूषण का कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि है, लेकिन हिन्दू विरोधी AAP दीवाली को बदनाम करती है।

दिल्ली : AAP सरकार के पटाखा प्रतिबंध की लोगों ने उड़ा दी धज्जियाँ

                       केजरीवाल सरकार के बैन के बावजूद लोगों ने धड़ाधड़ शेयर की पटाखा फोड़ने की तस्‍वीरें
देश भर में दिवाली का जश्न जारी है और हिंदुओं के इस प्रमुख त्‍योहार में पटाखा फोड़ने की परंपरा रही है। हालाँकि, गत कई वर्षों से पटाखों पर बैन है ओर इस संबंध में कई याचि‍काएं कोर्ट में यह कहकर खारिज की जाती रहीं हैं क‍ि इससे प्रदूषण में बढ़ोतरी होगी। जबकि दिवाली से पहले ही प्रदुषण लगभग 300 तक पहुँच चूका था। प्रदुषण हो या कोरोना केजरीवाल कुछ करने की बजाए भाजपा या उपराज्यपाल पर ही दोषारोपण करते रहे हैं। केजरीवाल भाषण के अलावा कुछ काम करने में पूर्णरूप से असमर्थ होने के कारण ही अपने पास एक भी मंत्रालय नहीं रखा, क्यों? वैसे हमारा मीडिया भी कुछ कम नहीं। दिवाली पर आतिशबाज़ी से बड़े प्रदुषण पर चीख-पुकार करने वाला मीडिया बकरा ईद पर कहाँ था? जब बकरे अथवा भैसे के गंद को न उठाए जाने के कारण घरों में बैठना मुश्किल हो रहा था। लेक‍िन, आम जनमानस ने सरकार और कोर्ट का फैसला पूरी तरह मान ल‍िया, ऐसा होता तो बिल्‍कुल भी नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया यूजर्स अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली  सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की अवहेलना करते हुए दिल्ली में पटाखे जलाने के वीडियो और तस्वीरें अपलोड कर रहे हैं।

जिस तरह देर रात तक दिल्ली में आतिशबाज़ी हुई है, ऐसा नहीं कि इसमें भाजपाई ही थे, हर तरफ होती आतिशबाज़ी से साफ़ दिख रहा है, इसमें सभी शामिल थे। जबकि सोशल मीडिया पर केजरीवाल समर्थक सारा दोष भाजपा पर डाल अपना बचाव करते हुए बच्चों को आगे करने पर आपत्ति भी कर रहे हैं। लेकिन बच्चों और महिलाओं को आगे कर सियासत करने का रास्ता दिखाने वाली भी आम आदमी पार्टी है। CAA विरोध हो या किसान आंदोलन, दुनियां ने देखा। CAA धरने में तो कड़कती ठंठ में दूध पीते बच्चों तक को लेकर ड्रामा किया गया था। 

ट्विटर पर यूजर्स ने हैशटैग #DhuaHuaKejriwal का इस्तेमाल किया और तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। शेयर किए गए विजुअल दिल्ली के लग रहे हैं, लेक‍िन ऑपइंडिया समय की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका। एक यूजर श्रवण बिश्नोई ने लिखा, “कथित तौर पर दिल्ली आज धमाल मचा रही थी…हर हर महादेव।”

एक अन्य यूजर गौरव ने लिखा, “औरंगजेब के बेटे को अपना साहस दिखाने के लिए दिल्ली का धन्यवाद ।” इसके साथ ही गौरव ने आकाश में आतिशबाजी का एक वीडियो साझा किया।

ट्विटर यूजर मयंक सिंह ने लिखा, ”#CrackerBan my foot अरविंद केजरीवाल, एक दिन दिवाली सेलेब्रेशन के बदले पराली और दिल्ली वाहन प्रदूषण पर अपना ज्ञान दें।” मयंक ने #DhuaHuaKejriwal हैशटैग के साथ पटाखे फोड़ते हुए एक वीडियो ट्वीट किया।

एक यूजर अनुश्री ने पटाखा फोड़ते हुए वीडियो शेयर क‍िया और लिखा, “हैप्‍पी दिवाली। अरविंद केजरीवाल और दोस्तों को समर्पित!”

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी ट्विटर पर केजरीवाल पर तंज कसते हुए लिखा, “अरविंद केजरीवाल कह रहे थे कि फुलझड़ियाँ जलाने पर हिंदुओं के बच्चों को 6 महीने के लिए जेल भेज दिया जाएगा, बच्चों ने धज्जियाँ उड़ा दी केजरीवाल की।”

दिल्ली सरकार ने खराब वायु गुणवत्ता का हवाला देते हुए राज्य में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने 19 अक्टूबर को कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों का निर्माण, भंडारण और बिक्री एक दंडनीय अपराध है। उन्होंने आगे कहा कि इन गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 5,000 रुपये का जुर्माना और छह महीने की जेल की सजा हो सकती है। यहां तक कि दिवाली पर पटाखे खरीदने और फोड़ने पर 200 रुपये का जुर्माना और छह महीने की जेल हो सकती है।

जहां तक पटाखों से वायु प्रदूषित होने की थ्‍योरी है, दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के लिए केवल एक दिन पटाखा फोड़े जाने को जिम्‍मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पड़ोसी राज्यों, विशेषकर पंजाब में पराली जलाने की वजह से यह समस्‍या विकराल रूप लेती है। अक्टूबर के मध्य में होने वाली कटाई के बाद पराली जलाने से वायू प्रदूषक कण राष्ट्रीय राजधानी की ओर आ जाते हैं जिससे दिवाली के आसपास वायु की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रदूषित हो जाती है।

दिवाली पर ज्ञान दे रही ‘भारत की ग्रेटा थनबर्ग’ लिसिप्रिया कंगुजम का लुटेरों ने लूट लिया मोबाइल फोन

लिसिप्रिया कंगुजम
हिन्दू त्योहारों को बदनाम करने में उम्र अथवा धर्म कोई अर्थ नहीं रखता, क्योकि उनका मूल उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं में भ्रम पैदा कर हिन्दू पद्दति को कलंकित करना है। यही उनकी जीविका है। लेकिन इन सनातन विरोधियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि समय चक्र शनै शनै नहीं बहुत तेजी से बदल रहा है। अब वो समय नहीं है,जब मन किया सनातन पर कीजड़ फेंक दो। 
11 वर्षीय तथाकथित पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में दिवाली को प्रदूषण से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लाइव आ रही थीं, लेकिन इसी बीच लुटेरे उनका मोबाइल फोन ही छीन कर भाग निकले। उन्होंने ट्विटर पर नोएडा पुलिस को टैग करते हुए इसे अर्जेन्ट बताया है। उन्होंने बताया कि 23 अक्टूबर, 2022 की रात 8:30 बजे बाइक सवार दो चोरों ने उनका मोबाइल फोन झपट लिया।

लिसिप्रिया कंगुजम ने अपने ट्विटर हैंडल ने जानकारी दी है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 16B स्थित बेल्लाना स्ट्रीट मार्किट के सामने ‘निराला एस्पायर’ के पास से वो फेसबुक लाइव कर रही थीं, तभी ये घटना हुई। उन्होंने नोएडा पुलिस से मदद माँगी है। हालाँकि, रिप्लाई में लोगों ने चोरों को सही ठहराते हुए कहा है कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं रखना चाहिए। एक व्यक्ति ने लिखा कि फोन चोरी होने के बावजूद आप ट्वीट कर रही हैं, इसका अर्थ है कि आपका हैंडल कोई और चलाता है।

एक व्यक्ति ने तो दिवाली के प्रदूषण पर ज्ञान दे रही लिसिप्रिया कंगुजम को समझाया कि मोबाइल फोन बनाने में कैडमियम, लीड, लिथियम, मर्करी और ब्रोमिनैट जैसे हैवी मेटल्स का इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में पर्यावरण एक्टिविस्ट को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालाँकि, DCP सेन्ट्रल नोएडा ने बताया कि आवश्यक कार्यवाही के लिए बिसरख के थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता से बातचीत कर घटना की जानकारी ली है और जल्द मामले का पर्दाफाश होगा।

लाइव वीडियो के दौरान लिसिप्रिय कंगुजम को दिवाली पर लाइटिंग से सजाए गए घरों को दिखाते हुए ये कहते देखा जा सकता है कि ये सब अच्छी बात है, लेकिन पटाखे उड़ाना गंदी बात है और वो इसे लेकर उदास हैं। उन्होंने कहा कि ये हमारे पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि ये हवा को प्रदूषित करता है और नॉइज़ पॉल्यूशन से जानवर भी परेशान होते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर हवा को प्रदूषित करोगे तो साँस कैसे लोगे?

दिल्ली : मनीष सिसोदिया : ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’ को नहीं पता भगवान धन्वंतरि पुरुष हैं या महिला

मोदी-योगी विरोध में चुनावी हिन्दू बन जनता को पागल बनाने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि धन्वन्तरि देवी है या देवता? वाह सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री!
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने ट्विटर से लोगों को धनतेरस की शुभकामनाएँ दी हैं। हालाँकि अरविन्द केजरीवाल द्वारा भारत रत्न के योग्य और संसार के सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री घोषित मनीष सिसोदिया को भी हिन्दू त्योहारों की थोड़ी और जानकारी लेने की जरूरत है। मनीष सिसोदिया ने अपने एक डिलीट किए जा चुके ट्वीट में लिखा, “स्वास्थ्य व समृद्धि की देवी माँ धन्वन्तरि से प्रार्थना करता हूँ कि सभी के जीवन में खुशहाली व सुख-शाँति बनाए रखें और सभी की मनोकामनाएँ पूरी करें। सभी देशवासियों को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ।”
                                            मनीष सिसोदिया द्वारा डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कथित तौर पर दुनिया के ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री’ को यह भी नहीं पता कि धन्वन्तरि एक देवता हैं न कि देवी। अपनी अज्ञानता के चलते नेटिज़ेंस ने उन्हें ट्रोल किया तब उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। विक्रांत कुमार नाम के एक ट्विटर यूजर ने मनीष सिसोदिया को चुनावी हिन्दू कहा। उन्होंने लिखा, “भारत रत्न के काबिल, सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री और आधुनिक भगत सिंह ने भगवान धन्वन्तरि को पुरुष से महिला में बदल दिया। ऐसा तब होता है जब आप ‘चुनावी हिन्दू’ हों।”

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मनीष सिसोदिया के ट्वीट पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “सिर्फ चुनावों के समय मंदिर जाने और बाकी समय में हिन्दुओं को गाली देने वालों से ऐसा ही होता है।”

इसके अलावा कई अन्य नेटीजेंस ने मनीष सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में जानकारी दी। आख़िरकार सिसोदिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

दरअसल सिसोदिया को हिन्दू त्योहारों के बारे में सच में सीखने की जरूरत है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं जो धन्वन्तरि भगवान की जयंती का भी दिन है। धन्वन्तरि को आयुर्वेद का भी देवता कहा जाता है। हिन्दू ग्रंथों के मुताबिक, समुद्र देवता और असुरों के बीच हो रहे समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश ले कर भगवान धन्वन्तरि ही प्रकट हुए थे। साल 2016 से केंद्र सरकार ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के तौर पर स्वीकार किया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपनी पार्टी के अमूमन उन्ही नेताओं का महिमामंडन करते है जिन पर या तो घोटालों के आरोप हों या उन्हें गिरफ्तार किया गया हो। शराब घोटाले में फँसने के बाद ऐसा ही उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ भी किया था और उनके लिए ‘भारत रत्न’ की माँग कर डाली थी।

केजरीवाल ने ऐसा ही अपने मंत्री सत्येंद्र जैन के ठिकानों पर ED की छापेमारी के दौरान किया था। तब उन्होंने जैन को ‘पद्म विभूषण’ देने की माँग की थी।