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शंकराचार्यजी महाराज का कहना उचित हिन्दुओं बहरूपी हिन्दुओं से सावधान; इस्लामिक गोलबंदी में नहीं फंसे, देखिए वीडियो ; नाम में हिंदू, पर हमदर्द इस्लामी कट्टरपंथियों का: भारत विरोधी ढोंगी Hindu for Human Rights को सुहा नहीं रही लंदन की दीवाली, मुस्लिम मेयर से कहा- हिंदू संगठनों से तोड़ो रिश्ते

                                       VHP और BAPS को लेकर HfHR ने एक पत्र लिखा है
कुछ ही समय पहले पूज्यनीय शंकराचार्य ने ढोंगी हिन्दुओं से सतर्क रहने की बात कही बहुत जल्दी उनकी बात सच होते भी देखी जा रही है। उनके प्रवचनों से विरोधियों की नींद हराम हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस्लाम जो गोलबंदी कर रहा है हिन्दुओं को उससे भी सतर्क रहना चाहिए। इसी तरह 1555 में फ्रैंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस ने भविष्यवाणियां की थी जो आज तक शत-प्रतिशत सच हो रही है। 2014 में सत्ता परिवर्तन की बात करते कहा कि 2014 में देश को असली आज़ादी ही नहीं अखंड हिन्दू राष्ट्र और विश्व गुरु बनने की राह पर चलेगा। देख लो बात सच हो रही है।(विस्तार से भविष्यवाणियां पढ़ने के लिए Organiser Weekly 1986/87 का अवलोकन किया जा सकता है)। 

दूसरे, मार्च 7, 1966 को गोहत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पुलिस से गोलियां चलवाकर खून की होली खेलते पार्लियामेंट स्ट्रीट को खून से रंग दिया था तब आचार्य कृपालुजी महाराज ने रोते हुए कहा कि "इन्दिरा जिस तरह गोपाष्टमी के दिन हम निहत्ते साधुओं-संतों से खून की होली खेली है तेरी भी... इसी तरह गोपाष्टमी के दिन. ..(31 अक्टूबर को गोपाष्टमी ही थी) और कांग्रेस को ख़त्म करने से मॉडर्न ड्रेस में एक तपस्वी आएगा।" अगर अभी भी हिन्दू हिन्दुत्व का चोला ओढे घूम रहे हैं, जैसाकि शंकराचार्य जी ने भी कहा है, ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरुरत है। देखिए वीडियो:               

हिंदू और भारत विरोधी अमेरिकी संगठन हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इंग्लैंड की राजधानी लंदन में दिवाली मनाने में खलल डालने की कोशिश की है। HfHR के डायरेक्टर राजीव सिन्हा ने लंदन के मेयर सादिक खान को एक पत्र लिखकर विश्व हिंदू परिषद (VHP), BAPS और चिन्मय मिशन जैसी हिंदू संस्थाओं के साथ ‘सभी संबंध खत्म’ करने को कहा है।

भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाने के लिए कुख्यात हिंदू विरोधी संगठन HfHR, इस बात से नाराज था कि इन हिंदू संस्थाओं ने 27 अक्टूबर को लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में दिवाली कार्य्रकम के आयोजन में भाग लिया था।

HfHR द्वारा लिखे इस पत्र को एक्स(पहले ट्विटर) पर सुहाग शुक्ला ने साझा किया। इस पत्र हिन्दूस फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इस बात पर ‘निराशा’ जताई कि VHP और बाकी संस्थाओं ने लंदन के मेयर सादिक खान के कार्यक्रम को आयोजित करने में मदद की थी।

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने लंदन के मेयर से इन हिंदू संगठनों से संबंध तोड़ने और भविष्य में दिवाली समारोह आयोजित करने के लिए नए संगठन तलाशने को कहा है। HfHR ने दावा किया कि यह हिंदू संगठन ”भारत और यूके में हिंदुत्व आंदोलन के लिए एक मुखौटे का काम करते हैं।” 

HfHR का हिन्दू विरोधी इतिहास

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) के नाम से लग सकता है कि यह हिंदू समुदाय के हित के लिए काम करने वाला कोई हिंदू संगठन है। असल में यह भेड़ की खाल में भेड़िया है। यह संगठन अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।
इसने लगातार खुद को मानवाधिकारों के कथित रक्षक के रूप में पेश किया है, जबकि असल में यह अपना लिबरल एजेंडा चलाता है। इस संगठन को टाइड्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से पैसा मिलता है। टाइड्स अमेरिका में हमास के समर्थन वाली रैलियों को भी पैसा देती है। HfHR अक्सर हिन्दुओं के विरोध में ही दिखता है।
टाइड्स फाउंडेशन खुद कई ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो वामपंथी और भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं। विकिपीडिया को लेकर बनाए गए ऑपइंडिया के डोजियर में बताया गया है कि टाइड्स कई भारत विरोधी और हिंदू विरोधी संगठनों को पैसा देता रहा है। यह भारत और हिन्दुओं को बदनाम करते हैं और कट्टरपंथियों को बढ़ावा देते हैं।
HfHR अक्सर अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए हिंदू प्रतीकों का उपयोग करता है। हिंदू विश्वासों को लगातार HfhR नीचा दिखाता रहा है। यह हिन्दू ग्रन्थों की गलत व्याख्या करके प्रश्न उठाने और हिन्दुओं कि छवि खराब में जुटा एक संगठन है।
HfHR का गठन वर्ष 2019 में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ऑर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया (OFMI) द्वारा किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों संगठनों ने अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी (AJA) नामक एक और संगठन बनाया था।
द हिंदू में छपे एक लेख के अनुसार, 22 सितंबर, 2019 को पीएम मोदी की ह्यूस्टन यात्रा के खिलाफ़ प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में AJA सबसे आगे थी। ‘HfHR’ की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने भी 2019 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर भारतीय मुसलमानों में दहशत पैदा करने की कोशिश की थी।

भगवान राम के रास्ते पर चलने से ही मिटेगी घृणा ; ‘माँ सीता एक दृढ़ और प्रतिबद्ध स्त्री, किसी प्रलोभन के आगे नहीं झुकीं’: एरिक एडम्स, न्यूयॉर्क के मेयर

                         न्यूयॉर्क शहर के मेयर ने माँ सीता को मजबूत महिला बताया (फोटो क्रेडिट-chalkbeat)
अमेरिका में इस बार दिवाली का उत्सव काफी धूम-धाम से मनाया गया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडन ने व्हाइट हाउस में अब तक के सबसे बड़े दिवाली समारोह की मेजबानी की। वहीं न्यूयॉर्क शहर में भी लोगों ने दिवाली मनाई। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने दिवाली के मौके पर लोगों से भगवान राम, सीता के दिखाए मार्ग पर चलने और और ‘प्रकाश की किरण’ बनने के लिए कहा। उन्होंने माँ सीता की सराहना करते हुए कहा की वह एक मजबूत महिला थीं, किसी भी प्रलोभन के आगे नहीं झुकी। वह दृढ़ और प्रतिबद्ध थी।

दिवाली की सीख को अपनाने की सलाह देते हुए उन्होंने 25 अक्टूबर, 2022 को कहा, “अँधेरा बहुत है। हम केवल उन जगहों को खोजने की इच्छा में उलझे हुए हैं जिनसे हम असहमत हैं ।”

एडम्स ने भारतीय-अमेरिकी, दक्षिण एशियाई और अन्य समुदायों के प्रमुख सदस्यों की एक बड़ी सभा को दीवाली की शुभकामनाएँ दीं। उनके आधिकारिक आवास पर दिवाली समारोह का आयोजन किया था। उन्होंने कहा, “आओ राम की तरह जीवन जीएँ, सीता की तरह जीवन जीएँ। आइए दिवाली की सीख को अपनाएँ। यह छुट्टी जिस चीज़ का प्रतिनिधित्व करती है, उसको जीते हैं, तब हमें पता चलेगा कि हमने अपनी जिम्मेदारी और दायित्व को पूरा किया है।”

उन्होंने कहा, “दीपावली हम सबके लिए साथ बैठने, संवाद करने और सिखों के खिलाफ घृणित अपराधों को ख़त्म करने का पर्व है। अंधेरा बहुत है और हमें प्रकाश की किरण बनने की जरूरत है, जो देश को दिखाए कि हमें अंधेरे को दूर करने की जरूरत है।”

इस कार्यक्रम  में भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल और न्यूयॉर्क असेंबली की सदस्य जेनिफर राजकुमार भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा, “अगर हम केवल एक दिन के लिए अंधेरे को दूर करने का जश्न मनाते हैं, तो हम दिवाली के सिद्धांतों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। हमें हर दिन उस परिमाण और उस ऊँचाई पर रहना चाहिए।” वहीं एडम्स ने कहा, “मेरे सिख भाइयों और बहनों लोगों के धर्म और आस्था की परवाह किए बिना अपने गुरुद्वारों में हजारों लोगों को खाना खिलाते हैं, जिसमें कोविड ​​​​-19 महामारी भी शामिल है।”

इससे एक सप्ताह पहले न्यूयॉर्क शहर के पब्लिक स्कूलों में रोशनी के त्योहार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। न्यूयॉर्क में प्रांत कार्यालय के लिए निर्वाचित होने वाली भारतीय मूल की जेनिफर राजकुमार ने राज्य की राजधानी में कानून पेश किया जो स्कूल कैलेंडर में दिवाली के लिए जगह बनाता है। राजकुमार ने कहा, ”हिंदू-अमेरिकियों के रूप में, यह हमारे लिए यह देखने का समय है कि हम कौन हैं। हमारी संस्कृति ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर को प्रेरित किया, जिन्होंने कहा था कि भारत के महात्मा गाँधी सामाजिक परिवर्तन के लिए उनके आंदोलन के ‘गाइडिंग लाइट’ थे।

महिलाओं का सम्मान करने के महत्व पर जोर देते हुए, एडम्स ने कहा, “जब भी हम दिवाली के बारे में सोचते हैं, हमें राम का ख्याल आता है और हम बुराई के खिलाफ लड़ाई के बारे में सोचते हैं। लेकिन जब आप उस महत्वपूर्ण कहानी को देखते हैं, तो सीता को मत भूलना, उस कथा से सीता को बाहर मत करना। सीता एक मजबूत महिला थीं, जो किसी भी प्रलोभन के आगे नहीं झुकी, वह दृढ़ और प्रतिबद्ध थी।”