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दिल्ली-NCR में 400 पार पहुँचा AQI, GRAP-2 प्लान लागू: दीपावली पर ‘पटाखे मत फोड़ो’ का ज्ञान देने वाले बताएँगे बिना आतिशबाजी ही क्यों बिगड़ी राजधानी की हवा?

                                                                                                                     साभार: AI-ChatGPT
दिल्ली की हवा फिर से जहर बन चुकी है। अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में आते-आते दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) औसत ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में पहुँच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली के कई इलाकों में AQI सोमवार (20 अक्टूबर 2025) दिवाली की सुबह 400 पार पहुँच गया। यानी दीवाली से पहले ही दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील होती जा रही है।
पंजाब में जबसे आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है केजरीवाल पार्टी ने पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या होने पर पंजाब को आरोपित करना छोड़ दिया, जबकि जब तक वहां कांग्रेस की सरकार थी ये ही केजरीवाल पार्टी दिल्ली में प्रदुषण के पंजाब को कोसती थी।  

ऐसा नहीं हैं कि सरकार और अदालतें स्थिति को लेकर निष्क्रिय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाए ‘ग्रीन फायरक्रैकर्स’ के उपयोग की अनुमति दी थी। इन पटाखों को वैज्ञानिक रूप से इस तरह बनाया गया है कि इनमें 30 प्रतिशत तक कम प्रदूषक तत्व उत्सर्जित हों।

साल 2025 में अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में केवल वही ग्रीन फायरक्रैकर्स जलाए जा सकते हैं जो वैज्ञानिक संस्था CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित हों और जिनकी बिक्री और उपयोग केवल तय समय के भीतर ही किए जाएँ।

बढ़ते प्रदूषण का कारण

 फिर भी सवाल यह है कि जब दिवाली ‘ग्रीन’ बताई जा रही है तो हवा इतनी जहरीली क्यों है? असल में प्रदूषण के कई स्रोत हैं जो एक साथ मिलकर हवा को जहरीली बना देते हैं। सबसे बड़ा कारण मौसम में बदलाव है। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में दिल्ली और NCR में तापमान गिरने लगता है, हवा की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है और नमी बढ़ जाती है। ऐसे में प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ पाते और जमीन के पास ही फँस जाते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस हफ्ते हवा की गति केवल 4 से 6 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जिससे प्रदूषण का फैलाव रुक गया।

पराली जलाने से बढ़ा प्रदूषण?

बढ़ते प्रदूषण का दूसरा कारण हर साल की तरह पराली जलाने की घटनाएँ हैं। पंजाब और हरियाणा में किसान धान की फसल के बाद खेतों को साफ करने के लिए पराली जलाते हैं। सैटेलाइन डेटा के अनुसार, पिछले हफ्ते पंजाब में 1200 से ज्यादा आग के मामले दर्ज किए गए जबकि हरियाणा में 400 से अधिक। हवा का रुख अगर उत्तर-पश्चिम दिशा में होता है तो इन इलाकों का धुआँ सीधे दिल्ली की ओर आता है।

दिल्ली में लागू GRAP-2

इसके अलावा दिल्ली के भीतर भी प्रदूषण के कई स्थायी स्रोत हैं। सड़क की धूल, लगातार चल रहे निर्माण कार्य, बढ़ते डीजल जनरेटर और भारी ट्रैफिक- ये सब मिलकर हवा को और गंदा बना रहे हैं। ग्रेडेड रिस्पॉन्सस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-2 लागू किया गया है, जिसमें निर्माण स्थलों पर सख्ती, पानी का छिड़काव और कचरा जलाने पर रोक जैसी शर्तें शामिल हैं। लेकिन जमीन पर इन उपायों का असर सीमित ही दिखता है क्योंकि निगरानी और पालन कमजोर है।

पटाखों से बढ़ा दिल्ली का AQI?

अब बात आती है ग्रीन पटाखों की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बाजार में पारंपरिक पटाखे भी अवैध रूप से बिक रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 30 प्रतिशत कम प्रदूषण देने वाले पटाखे भी बड़ी मात्रा में जलाए जाएँ तो उनका असर भी बहुत नहीं पड़ता।
नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन क्रैकर्स तभी प्रभावी हैं जब इनका उपयोग सीमित समय और कम मात्रा में हो। लेकिन दिवाली की रात यह सीमा अक्सर क्रॉस कर जाती है, जिससे हवा में मौजूद कण और गैसें और खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती हैं।

क्या दिवाली पर ही प्रदूषण हो सकता है नियंत्रित?

इन सबके बीच सबसे चिंताजनक बात यह है कि हालात हर साल दोहराए जाते हैं। प्रदूषण से निपटने के लिए अस्थायी उपाय जैसे पानी का छिड़काव, ट्रक एंट्री पर रोक और स्कूल करने की बात तो होती हैं लेकिन लंबे समय तक के समाधान पर प्रगति बहुत धीमी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर दिल्ली-NCR को प्रदूषण से राहत चाहिए तो सिर्फ दिवाली पर ही नहीं बल्कि पूरे साल प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण और हरित नीतियों का पालन करना जरूरी है।

दिवाली के बाद नहीं रहेगा प्रदूषण

इस समय दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक से करीब 20 गुना अधिक है। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। दिवाली के बाद अगर मौसम में ठंड और बढ़ी और हवा की गति कम रही तो स्थित और खराब हो सकती है।
यानि केवल दिवाली पर ही प्रदूषण पर लगाम लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि उसके बाद भी है और पूरे साल भी है। तो वे वामपंथी, लिबरल और फेमिनिस्ट, जो भी दिवाली पर प्रदूषण का ठीकरा फोड़ने के लिए सामने आ रही हैं। वे समझ लें कि प्रदूषण को पूरे साल नियंत्रित करने की जरूरत है तो केवल दिवाली पर प्रदूषण रोकने का ज्ञान न दें।

दिल्ली : 23 करोड़ रूपए के स्मॉग टावर पर जड़ा ताला; न वेतन, न पीने का पानी, न टॉयलेट की व्यवस्था

                   स्मॉग टॉवर बंद, वेतन न मिलने पर कर्मचारियों ने लगाया ताला (फोटो साभार : इंडिया टुडे)
दिल्ली में स्मॉग टॉवर बंद कर दिया गया है। समय से वेतन न मिलने की वजह से परेशान कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर को ऑफ करके गेट पर ताला जड़ दिया है। इस स्मॉग टॉवर की कीमत 23 करोड़ रुपए है, जो साल 2021 में बड़े जोर शोर से अरविंद केजरीवाल की सरकार ने लगवाए थे। दावा था कि इससे प्रदूषण से निपटने में मदद मिलेगी, लेकिन अब खबर है कि जो लोग इसे चलाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें ही अरविंद केजरीवाल की सरकार समय से वेतन जारी नहीं कर रही है। इससे परेशान होकर कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर फैसिलिटी को ही बंद कर दिया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ तो दिल्ली में धुँध और ठंड से लोग ठिठुर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रदूषण की वजह से लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है। वहीं, प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के नाम पर दिल्ली में कई जगहों पर लगाए स्मॉग टॉवर बंद हो रहे हैं। इनमें से प्रमुख स्मॉग टॉवर दिल्ली के बीचो-बीच कनॉट प्लेस में लगाया गया था, अब वही बंद हो गया है। इसे यहाँ पर तैनात कर्मचारियों ने बंद कर दिया, क्योंकि सरकार उन्हें समय पर वेतन नहीं दे पा रही।

कनॉट प्लेस में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दिसंबर 2023 से ही वेतन नहीं मिला है। आगे भी नौकरी की कोई गारंटी दिल्ली सरकार दे नहीं रही है।

कनॉट प्लेस में लगाए गए इस स्मॉग टॉवर के देखरेख और संचालन का जिम्मा विबग्योर कंसल्टिंग फर्म के पास है, जिसने 13 कर्मचारियों की तैनाती यहाँ पर की है। महिपाल बिष्ट उन्हीं कर्मचारियों में से एक हैं।

वह मीडिया से बातचीत में कहते हैं, “ये टॉवर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) के साथ ही एनबीसीसी और विबग्योर कंपनी चलाती है। अप्रैल 2023 में ही इसके ऑपरेशन बंद हो गए थे। लेकिन सप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई तो नवंबर 2023 से इसे फिर से चलाया गया। हमें डीपीसीसी ने बुलाया और 8 नवंबर 2023 से इसे फिर से चलाया गया। लेकिन हमारा वेतन समय से नहीं दिया जाता। दिसंबर का वेतन अभी आया नहीं है। हमारी कंपनी ने दिल्ली सरकार की ओर से भी काम जारी रखने का कोई निर्देश नहीं दिया है। ऐसे में हमारे पास यही रास्ता है कि हम यहाँ पर ताला लगा दें।”

यहाँ तैनात कर्मचारियों ने स्मॉग टॉवर की बदहाली का रोना भी रोया। उन्होंने कहा कि यहाँ पीने का पानी और टॉयलेट तक नहीं है। ये छोड़िए, यहाँ तो पेचकस तक नहीं है। यहाँ के कर्मचारियों ने तो यहाँ तक कहा कि ये स्मॉग टॉवर पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है। इसमें 5000 फिल्टर लगाए गए हैं, लेकिन उसमें से अधिकतम पुराने हो चुके हैं और उन्हें बदलने की भी जरूरत है।

केजरीवाल और भगवंत मान को लगा ‘सुप्रीम’ तमाचा, पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगाने का सख्त निर्देश

दिल्ली और एनसीआर भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में है। लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। दिल्ली की इस बदहाली के लिए वह सभी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने फ्री की रेवड़ियों के लालच में आम आदमी पार्टी को वोट दिया। इन लालचियों ने इतना भी नहीं सोंचा कि चूहेदान में रोटी क्यों लगाई जाती है? क्या पंजाब में पहली बार पराली जल रही है? दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से कांग्रेस, जनसंघ(वर्तमान बीजेपी), जनता पार्टी आदि पार्टियों ने राज किया, लेकिन जितनी दुर्गति अरविन्द केजरीवाल सरकार बनने पर हो रही है, किसी अन्य पार्टी के राज में नहीं हुई। इसीलिए दिल्ली की दुर्गति के लिए आम आदमी पार्टी से ज्यादा जिम्मेदार वह मतदाता हैं, जिन्होंने फ्री रेवड़ियों के जाल में फंस आम आदमी पार्टी को वोट दिया। अभी भी अगर दिल्लीवासियों ने अपनी आंखे नहीं खोली, फिर कब इनकी आंखें खुलेंगी या कौन खोलेगा, यह तो परमपिता परमेश्वर ही जानता है। क्योकि लालची को समझाना बहुत मुश्किल है। 

दिल्ली की केजरीवाल सरकार के तमाम दावे धरे के धरे रह गए हैं। केजरीवाल ने खोखले और झूठे वादे कर दिल्ली के लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया है। वहीं पंजाब में पराली जलाने के मामले रुक नहीं रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को गंभीरता से लिया है। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली और पंजाब सरकार की दलीलों से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। इस दौरान कोर्ट ने पंजाब की भगवंत मान सरकार को पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पराली पर सिर्फ दोषारोपण हो रहा है। राजनीति छोड़कर प्रदूषण को रोकने पर ध्यान देने की जरूरत है।

दिल्ली और पंजाब सरकार पराली पर सिर्फ राजनीति कर रही है- कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट को भी पता चल गया है कि दिल्ली और पंजाब सरकार प्रदूषण और पराली पर सिर्फ राजनीति कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में साल दर साल ये नहीं हो सकता। सब कुछ पेपर पर ही चल रहा है। खुद मैंने देखा है कि पंजाब में सड़क के दोनों तरफ पराली जलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्यों को प्रदूषण को कम करने के लिए एक साथ आने की जरूरत है। जनता को स्वस्थ हवा में सांस लेने का हक है और स्वस्थ हवा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। जस्टिस कौल ने कहा कि प्रदूषण पर राजनीतिक लड़ाई नहीं हो सकती। राजनीतिक ब्लेम गेम को रोकें। ये लोगों के स्वास्थ्य की हत्या के समान है।

अगर मैं बुलडोजर चलाऊंगा तो 15 दिनों तक नहीं रुकूंगा- कोर्ट

पंजाब सरकार के वकील ने दलील दी थी कि हम पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कदम उठा रहे हैं। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने भी ऐसा ही जवाब दिया कि वह प्रदूषण कम करने पर काम कर रही है। इस दलील से नाराज होकर जस्टिस कौल ने कहा कि अगर मैं बुलडोजर चलाऊंगा तो 15 दिनों तक नहीं रुकूंगा। जस्टिस कौल ने कहा कि हम नहीं जानते हैं कि आप कैसे रोक लगाएंगे। लेकिन इस पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। पराली जलाने की घटना बंद होनी चाहिए। यहां हर कोई एक्सपर्ट हैं, लेकिन समाधान किसी के पास नहीं है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए बनाए गए नियमों को सख्ती से लागू करना और उसका पालन होते हुए दिखना चाहिए।

“सुप्रीम कोर्ट का निर्देश केजरीवाल के चेहरे पर थप्पण की तरह है”

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल पर हमला शुरू हो चुका है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को एक तमाचा करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया ‘X’ लिखा कि यह अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर एक थप्पण की तरह है। उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद है कि केजरीवाल अब पंजाब और दिल्ली में अपनी सरकार को छोड़कर बाकी सभी को दोष देना बंद कर देंगे। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति की अक्षमता के कारण दिल्ली-एनसीआर में लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, जिससे दिल्ली को गैस चैंबर में बदल दिया है।

पंजाब में थम नहीं रहे पराली जलाने के मामले, 24 घंटे में 2060 मामले 

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। दिल्ली में सोमवार की शाम 4 बजे औसत AQI 423 (गंभीर) दर्ज किया गया। प्रदूषण के गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने फिर से ऑड-ईवन स्कीम को लागू करने की घोषणा की, जो 13 से 20 नवंबर तक लागू किया जाएगा। लेकिन पंजाब में पराली जलाने के मामले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पराली पर रोक लगाने के पंजाब सरकार के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पंजाब में पिछले 24 घंटे में पराली जलाने के 2060 मामले सामने आए हैं। वहीं पिछले 9 दिनों में पंजाब पराली जलाने के 15000 से अधिक मामले आ चुके हैं। इस साल पंजाब में पराली जलाने का आंकड़ा 19463 के पार पहुंच गया है।

अरविंद केजरीवाल का बायो-केमिकल डीकंपोजर कहाँ गया? पराली से कोयला बनाने वाली तकनीक कहाँ है? 2020 को बताया था प्रदूषण का आखिरी साल

                                                                                                   साभार: फेसबुक/AAP/The Hindu
आज जब पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ बदस्तूर जारी हैं और दिल्ली प्रदूषण के खतरनाक स्तर से जूझ रहा है, AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के तमाम दावे और वादे भी धरे के धरे दिख रहे हैं। इसे समझने के लिए हमें चलना होगा 3 साल पहले, लेकिन फ़िलहाल जानते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति क्या है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ इस साल 17,000 के पार हो गई हैं और रविवार (5 नवंबर, 2023) को ऐसी 3230 घटनाएँ हुई हैं।

ये एक दिन में इस बार सबसे ज़्यादा संख्या है। साफ़ अर्थ है कि ये घटनाएँ जारी रहेंगी और इस पर लगाम नहीं लगने वाला। सोचिए, 4 नवंबर को पराली जलाने की 1360 गतिविधियाँ सामने आई थीं और अगले ही दिन संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ गई। वहीं 2022 की बात करें तो उस साल इसी दिन, यानी 5 नवंबर को ही पंजाब में पराली जलाने की 2817 घटनाएँ सामने आई थीं। ताज़ा घटनाओं की बात करें तो संगरूर, जो कि मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला भी है, वो 551 के साथ टॉप पर रहा।

अब चलते हैं 2 साल पहले, सितंबर 2021 में। तब AAP ने यूट्यूब पर एक वीडियो डाला था, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहते दिख रहे हैं कि जब किसान अक्टूबर महीने में धान की फसल काटता है तो उसके बाद उसके तने नीचे रह जाते हैं, जिन्हें पराली कहते हैं। उन्होंने कहा था कि दोष सरकारों का है, किसानों का नहीं है, जो किसान अपने खेतों को जलाएगा उस पर जुर्माना लगाए की बजाए सरकारों को समाधान देना चाहिए।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल इस वीडियो में कहते हैं कि पिछले साल दिल्ली सरकार ने समाधान निकाला, पूसा इंस्टिट्यूट ने एक बायो डीकंपोजर बनाया, उसे हमने दिल्ली में टेस्ट किया और 39 गाँवों में 1935 एकड़ में इसका छिड़काव किया गया और सामने आया कि इससे धान के डंठल गल जाते हैं, उन्हें काटना नहीं पड़ता है, जलाना नहीं पड़ता। केजरीवाल ने शानदार नतीजे का दावा करते हुए कहा था कि खुद केंद्र सरकार की एजेंसी ने इसकी तारीफ़ की है और 90% ने कहा कि 15-20 दिनों में उनकी पराली जल गई और अगले फसल के लिए खेत तैयार हो गई।

बकौल अरविंद केजरीवाल, इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी बढ़ गई। जब केजरीवाल बोल रहे होते हैं, इस वीडियो में चलाया गया कि कैसे ये कथित बायो डीकंपोजर काम कर रहा है। केजरीवाल ने तभी प्रदूषण की मुक्ति की बात करते हुए कहा था कि जब दिली में ये हो सकता है तो अन्य राज्यों में भी हो सकता है। ये अलग बात है कि पंजाब में भी उन्हीं की सरकार है लेकिन तब भी पराली जलाने के आँकड़े खतरनाक तरीके से बढ़ते ही चले जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, यही सब ड्रामा आज से 3 साल पहले, यानी नवंबर 2020 में भी हुआ था। तब भी अरविंद केजरीवाल ने पराली जलाने का सस्ता और आसान समाधान देने की बात करते हुए कहा था कि अभी तक की सरकारें पराली जलाने को लेकर सिर्फ बहाना मार रही थीं। तब उन्होंने प्रदूषण के लिए पंजाब में पराली जलाने को जिम्मेदार बताया था, लेकिन अब उनकी पार्टी के लोग यूपी-हरियाणा को इसका जिम्मेदार बताते हुए कह रहे कि पंजाब की घटनाओं का यहाँ कोई असर ही नहीं हो रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि ये आखिरी साल है जब दिल्ली प्रदूषण को झेल रहा है। इसके बाद 2021 बीत गया, 2022 बीत गया और अब 2023 भी बीत रहा है, लेकिन प्रदूषण घटने की बजाए बढ़ता ही चला जा रहा है, AQI 999 के स्तर पर पहुँच गया है और इससे ज़्यादा तो मापा भी नहीं जा सकता। केजरीवाल का वो ‘आखिरी साल‘ आखिर खत्म नहीं हुआ अभी तक? या फिर वो स्वर्ग के कोई देवता हैं, जिनके लिए दिन और रात पृथ्वी पर दिन-रात की अवधि के हजारों गुना अधिक होते हैं?

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 3 साल पहले दावा किया था कि सिर्फ 20 लाख रुपए में पूरी दिल्ली की पराली को गलाया जा सकता है। इसमें तो वो बजट का भी बहाना नहीं दे सकते हैं। उस समय भी गोपाल राय ही पर्यावरण मंत्री थे, जो अब हैं। डीकंपोजर के छिड़काव के समय बड़े-बड़े दावों में वो भी शामिल थे। कहाँ है आज वो डीकंपोजर? दिल्ली की पूरी पराली 20 लाख रुपए में खाद क्यों नहीं बन रही? ये फॉर्मूला उनकी पार्टी पंजाब में क्यों नहीं अपना रही?

अरविंद केजरीवाल ने अलग-अलग कार्यक्रमों में इस ‘बायोकेमिकल सलूशन’ की बात करते हुए बताया था कि ये बहुत सस्ता है और दिल्ली की तरह पंजाब में भी ये किया जा सकता है, वो लोग क्यों नहीं कर रहे? आज अरविंद केजरीवाल खुद से पूछें कि वो पंजाब में उनकी ही सरकार ये क्यों नहीं कर रही? एक रैली में उन्होंने इसी तरह दावा किया था कि पंजाब में कई फैक्ट्रियाँ लगाई जा सकती हैं जो पराली से कोयला बनाएँगे और इससे किसानों को 1000 रुपए प्रति एकड़ पैसे मिलेंगे सो अलग।

उन्होंने यहाँ तक दावा किया था कि पराली काट कर ले जाने के लिए भी कंपनियाँ आएँगी, इसमें किसानों का पैसा या मेहनत नहीं लगेगी। इसी तरह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पंजाब की तत्कालीन सरकार पर हमला बोला था। तब वहाँ कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे और कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। तब केजरीवाल ने एक टाइमलाइन माँगते हुए कहा था कि दिल्ली की जनता सरकारों से स्पेसिफिक टाइमलाइन चाहती है कि आप कब पराली जलाना शुरू करेंगे और किसानों को मशीनें उपलब्ध कराएँगे।

इसी तरह एक और रैली में उन्होंने हरियाणा सरकार पर हमला बोला था। मीडिया से बात करते हुए भी उन्होंने पराली से कोयला बनाने की बात कही थी और कहा था कि कई फैक्ट्रियाँ किसानों की पराली खरीदने के लिए तैयार हैं। केजरीवाल का वो बायोकेमिकल सलूशन कहाँ है? कम बजट वाला आसान समाधान कहाँ है? है तो सिर्फ प्रदूषण और पराली से उठता धुआँ। कल वो टाइमलाइन माँगते थे, आज उनके पास इस समस्या के लिए टाइम ही नहीं है।


चुनाव से पहले केजरीवाल पंजाब को कोसने, पराली से सोना, कोयला, बिजली बनाने का आइडिया देने वाले अब क्यों केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बता रहे हैं?


दिल्ली में प्रदूषण से लोगों का जीना दूभर हो गया है। प्रदूषण हमारी जिंदगी पर कितना असर डाल रहा है, इस पर कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि प्रदूषण का बढ़ता लेवल हर दिल्ली वाले की जिंदगी 10 साल कम कर रहा है। लेकिन सात से अधिक वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसका कोई समाधान नहीं निकाल पाए हैं। जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं थी तब वह साल दर साल दिल्ली में प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहरा कर पल्ला झाड़ लेते थे। 

पंजाब में AAP की सरकार बनने के पहले दिल्ली प्रदूषण के लिए पंजाब की पराली जिम्मेदार थी, तब केजरीवाल को पराली से सोना, कोयला, बिजली, गत्ता फैक्टरी सब बनाने आता था। जब पंजाब में उनकी सरकार नहीं थी तब उन्होंने पराली के निपटान के कई समाधान पेश किए थे। लेकिन अब जब सरकार उन्हीं की है तो उन समाधान पर काम क्यों नहीं हो रहा है। जिस तरह राहुल गाँधी आलू से सोने बनाने के सब्जबाग दिखाकर जनता को पागल बनाते थे, उसी तर्ज केजरीवाल भी पराली से सोने बनाने के सब्जबाग दिखा रहे थे, राहुल के जाल में तो जनता आयी नहीं, लेकिन केजरीवाल के जाल में फंस दिल्ली की हवा को जहरीली बनवा दिया। आखिर कब तक जनता केजरीवाल के सब्जबाग का शिकार होकर अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करती रहेगी? 

दिल्ली के प्रदूषण के लिए केजरीवाल ने पंजाब को बताया जिम्मेदार

चार साल पहले यानी 2018 में दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के स्तर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को जिम्मेदार बताया। सैटेलाइट की तस्वीर दिखाते हुए केजरीवाल ने कहा कि इसमें साफ दिखाई दे रहा है कि सबसे ज्यादा पराली पंजाब में जलाई गई। हरियाणा के अम्बाला व उससे लगते कुछ इलाकों में पराली जलाई गई। केजरीवाल ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए पूरी तरह पराली को जिम्मेदार बताया है। केजरीवाल ने कहा कि 25 अक्टूबर से पहले दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से नीचे था। अचानक से न तो दिल्ली में वाहन बढ़े, न उद्योग धंधे लग गए और न ही एकदम कंस्ट्रक्शन शुरू हो गई, फिर कैसे प्रदूषण का स्तर 400 के पास पहुंच गया। इसके लिए उन्होंने पराली को जिम्मेदार बताया है। उनका कहना था कि यह समस्या हर साल 25 अक्टूबर से 20 नवंबर तक आती है। जिससे दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। 

कल तक दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहराने वाले केजरीवाल के सुर अब बदल गए हैं। अब वह फिर वही बात दोहरा रहे हैं कि केंद्र सरकार को इसका समाधान निकालना चाहिए। इसी तरह पंजाब चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि पंजाब में पानी की किल्लत है और उनकी सरकार आई तो 24 घंटे पानी उपलब्ध कराएंगे। लेकिन जब सरकार बने कई महीने बीत गए तो पानी मुद्दा फिर उठा तो उन्होंने कह दिया कि केंद्र सरकार को इसका समाधान निकलना चाहिए। इससे यह साफ हो जाता है कि केजरीवाल को काम करना नहीं आता, केवल वादे करना आता है।

प्रदूषण पर केजरीवाल ने 2 नवंबर को ट्वीट किया है। उसमें लिखा है- प्रदूषण से राजनीति मत करो। प्रदूषण केवल दिल्ली और पंजाब में नहीं है, पूरे उत्तर भारत में है। किसान को गालियां मत दो। उस पर FIR मत करो। पंजाब और दिल्ली के लोग अपने स्तर पर सभी कदम उठा रहे हैं। केंद्र को आगे आकर सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर समाधान निकालना होगा।

पंजाब में पराली जलाने के मामलों में रिकार्ड वृद्धि

पंजाब में पराली जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। हवा की गुणवत्ता एकदम खराब स्तर पर है। पिछले कुछ दिनों में पंजाब में पराली जलाए जाने के मामलों में कई गुना वृद्धि हुई है। पहले जो केजरीवाल कहते थे कि पंजाब का धुंआ दिल्ली में आ रहा है। पंजाब में आप की सरकार बनने के बाद केजरीवाल ने एक बार भी पराली जलाने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। तमाम दावों के बीच पंजाब में पराली जलाने की मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। एक ही दिन में खेत में पराली जलाए जाने के मामले में दो गुना बढ़ोतरी हुई है। 2 नवंबर 2022 को 3624 मामले रिकॉर्ड किए गए, जो अब तक के इस सीजन का सबसे अधिक आंकड़ा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मुताबिक 1 नवंबर को यह संख्या 1,842 था। साथ ही, पिछले दो सालों 2020 और 2021 के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। साल 2020 में जहां इसी दिन दो नवंबर को पराली जलाने के 3590 मामले सामने आए थे जबकि 2021 में 3001 मामले थे। वहीं इस सीजन में अब तक के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 21480 हो गई है, जो साल 2021 के पराली जलाने के 17921 मामलों की तुलना में करीब 35 फीसदी ज्यादा है।

पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण

2018 में केजरीवाल ने कहा था कि पंजाब में जलाई जा रही पराली ही दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का इकलौता कारण है। सेटेलाइट की तस्वीरें दिखाते हुए उन्होंने दावा किया कि हरियाणा के कुछ हिस्से में भी पराली जलाई जा रही है, लेकिन ऐसी घटनाएं पंजाब में ज्यादा हो रही हैं। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने से जो धुआं उठता है, अगर वो दिल्ली में नहीं जा रहा तो कहां जा रहा है।

पूसा द्वारा इजाद किया गया समाधान बहुत ही सस्ताः केजरीवाल

केजरीवाल ने 2020 में कहा था कि पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पराली को निस्तारित करने का समाधान निकाला है। पूसा द्वारा इजाद किया गया समाधान बहुत ही सस्ता और सरल है। पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कुछ कैप्सूल बनाए हैं। इस कैप्सूल के जरिए घोल बनाया जाता है। इस घोल को अगर खेतों में खड़े पराली के डंठल पर छिड़क दिया जाए तो वह डंठल गल जाता है और वह गल करके खाद में बदल जाता है। डंठल से बनी खाद से उस जमीन की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके बाद किसान को अपने खेत में खाद कम देना पड़ता है। इस तकनीक के प्रयोग के बाद किसान को फसल उगाने में लागत कम लगेगी। किसान की फसल की पैदावार अधिक होगी और किसान को खेतों में खड़ी फसल जलानी नहीं पड़ेगी।

दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर करेगी छिड़काव

अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हमें पूरी उम्मीद है कि यह प्रयोग सफल होगा और अगर यह प्रयोग सफल होता है तो आसपास के राज्यों के किसानों को भी पराली का एक समाधान देगा। यह इतना सस्ता है कि दिल्ली के अंदर 700 हेक्टेयर जमीन पर घोल बनाना, छिड़काव करना, इसका ट्रांसपोर्टेशन आदि मिला कर इस पर केवल 20 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो हम किसानों के खेत में घोल का छिड़काव हर साल करेंगे।

केजरीवाल ने विज्ञापन दिया 23 करोड़ का और काम किया 68 लाख का

दिल्ली और आस-पास के राज्यों में पराली से होने वाली समस्या से निजात दिलाने के लिए साल 2020 में पूसा इंस्टीट्यूट ने बायो डी-कंपोजर ईजाद किया था। एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक केजरीवाल की दिल्ली की सरकार ने दिल्ली के किसानों के खेतों में इसके छिड़काव पर दो सालों में 68 लाख रुपए खर्च किए वहीं इस दौरान विज्ञापन पर कुल 23 करोड़ रुपए खर्च हुए। दिल्ली में इस योजना से अब तक 955 किसानों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया।

माल 3 लाख का विज्ञापन 7 करोड़ का

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता राम सिंह बिधूड़ी ने इसको लेकर सवाल किया था। उन्होंने पूछा था कि पराली से खाद बनाने हेतु दिल्ली सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में बायो डी-कंपोजर सॉल्यूशन खरीदने के लिए कितनी धनराशि खर्च की गई। इस सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने कहा, “दिल्ली सरकार द्वारा बायो डी-कंपोजर सॉल्यूशन खरीदने में 3 लाख 4 हजार 55 रुपए खर्च हुए हैं।’’ जवाब के मुताबिक, गुड़ और बेसन की खरीदारी पर 1 लाख 4 हजार 55 रुपए और बायो डी-कंपोजर कैप्सूल की खरीद पर 2 लाख रुपए खर्च हुए। इस तरह कुल 3 लाख 4 हजार 55 रुपए खर्च हुए। सरकार ने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान इससे दिल्ली के 645 किसानों को लाभ हुआ है। दिल्ली विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में दिल्ली सरकार ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में बायो डी-कंपोजर खरदीने के अलावा उसका छिड़काव करने के लिए किराए पर लिए गए ट्रैक्टर पर 24 लाख 62 हजार रुपए और टेंट पर 18 लाख रुपए खर्च हुए हैं। इस तरह से वित्त वर्ष 2021-22 में दिल्ली सरकार ने बायो डी-कंपोजर के छिड़काव पर लगभग 46 लाख रुपए खर्च किए है। बिधूड़ी ने इस योजना के विज्ञापन पर खर्च को लेकर अगला सवाल किया है। जिसका जवाब देते हुए कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने 7 करोड़ 47 लाख, 26 हजार 88 रुपए इसके विज्ञापन पर खर्च किया है।

दिल्ली सरकार ने पराली का समाधान निकाल लिया हैः केजरीवाल

वर्ष 2021 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पराली जलाने के बजाये बायो डिकम्पोजर के इस्तेमाल पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अक्टूबर-नवम्बर आने वाला है। 10 अक्टूबर के आस पास से दिल्ली की हवा फिर से खराब होने लगेगी। इसका बड़ा कारण है आस-पास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाला धुआं। अभी तक सभी राज्य सरकारें एक-दूसरे पर छींटाकशी करती रही हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने समाधान निकाल लिया है। पिछले साल दिल्ली सरकार ने एक समाधान निकाला। पूसा इंस्टीट्यूट ने एक बायो डिकम्पोज़र घोल बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान धान की फसल अक्टूबर के महीने में काटता है, जो डंठल ज़मीन पर रह जाता है उसे पराली कहते हैं। किसान को गेहूं की फसल की बुआई करनी होती है इसलिए किसान पराली जला देता है। अभी तक हमने किसानों को जिम्मेदार ठहराया। सरकारों ने क्या किया… सरकारों ने समाधान नहीं दिया। सरकारें दोषी हैं। पूसा का बायो डी कम्पोज़र, जो बहुत सस्ता है, उसका हमने दिल्ली के 39 गांवों में 1935 एकड़ जमीन पर छिड़काव किया। जिससे डंठल गल जाता है और ज़मीन बुआई के लिए तैयार हो जाती है।

दिल्ली के सारे किसानों के खेतों में बायो डिकम्पोजर का मुफ्त छिड़काव करवाया

केजरीवाल ने कहा कि जैसे हमने दिल्ली के सारे किसानों के खेतों में बायो डिकम्पोजर का मुफ्त छिड़काव करवाया है वैसे ही बाकी राज्य सरकारों को भी निर्देश दिया जाए। आस-पड़ोस के राज्यों के किसान भी खुश हो सकते हैं अगर वहां की सरकारें बायो डिकंपोजर घोल का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की एजेंसी वेबकॉस से ऑडिट कराया। वेबकॉस की रिपोर्ट आई है। उन्होंने 4 जिलों के 15 गांव में जाकर 79 किसानों से बात की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि डिकंपोजर का इस्तेमाल करने से दिल्ली के किसान बड़े खुश हैं। 90 प्रतिशत किसानों ने कहा कि 15 से 20 दिनों के अंदर उनकी पराली गल गई और उनकी जमीन गेहूं की फसल बोने के लिए तैयार हो गई। किसानों ने बताया कि गेहूं बोने से पहले 6 से 7 बार खेतों की जुताई करनी पड़ती थी। बायो डिकंपोजर को इस्तेमाल करने से एक से दो बार जुताई करने से ही काम चल गया। इसके इस्तेमाल से खेतों में जो ऑर्गेनिक कार्बन थी, उसकी मात्रा पहले से 40% तक ज्यादा बढ़ गई। नाइट्रोजन की मात्रा 24 परसेंट तक बढ़ गई। उपजाऊ बैक्टीरिया 7 गुना बढ़ गया। कार्बन जो फसल को फायदा पहुंचाती है 3 गुना बढ़ गई। मिट्टी की गुणवत्ता में इतना सुधार हुआ कि गेहूं का अंकुरण 17 से 20% तक बढ़ गया। गेहूं की फसल के उत्पादन में 8% की वृद्धि हुई है।

केजरीवाल ने दिल्ली की हवा को बना दिया जहरीली ; पंजाब के मात्र 3 जिलों में 1 सप्ताह में पराली जलाने की 3700 घटनाएँ, NASA ने जारी की तस्वीरें

                                             नासा द्वारा जारी दिल्ली प्रदूषण का मैप (फोटो साभार: NASA/PTI)
दिल्ली इस समय गैस चैंबर बनी हुई है। जब से मुफ्तखोरों की वजह से दिल्ली अरविंद केजरीवाल के हाथ लगी है, इसकी नाकामी की वजह से दिल्ली और पंजाब की हवा जहर बन चुकी है। मुफ्तखोरों आँखें खोल लो। तुम्हारी मुफ्तखोरी की वजह से राष्ट्रीय राजधानी की हवा सभी मापदंडों में जहरीली है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। साथ ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। दिल्ली के कई इलाकों में 02 नवंबर, 2022 को एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 800 के पार पहुंच गया। 

पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण दिल्ली में धुंध और कोहरा बढ़ने लगा है और यहाँ की हवा जहरीली होती जा रही है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ (NASA) ने उपग्रह से ली गई तस्वीरों को साझा किया है, जिनमें पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पराली जलाए जाने के कारण उन इलाकों में लाल रंग के निशान बने हैं।

इन तस्वीरों में पूर्वी पाकिस्तान से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सिंधु-गंगा के मैदान के विशाल क्षेत्रों में धुंध की एक परत दिखाई दे रही है। धुंध की यह परत पराली जलाए जाने के कारण बनी है।इसके कारण दिल्ली की हवा जहरीली बन गई है और वायु की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के एक विश्लेषण के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में 1 नवम्बर से 15 नवम्बर के बीच पराली  जलाए जाने की घटनाएँ चरम पर होती हैं। इस दौरान राजधानी दिल्ली की हवा में सांस लेना मुश्किल होता है। पिछले हफ्ते वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि इस साल पंजाब में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएँ ‘गंभीर चिंता का विषय’ हैं।

पंजाब के तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर में 15 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच रिपोर्ट की गई लगभग 3,700 घटनाओं में से 60 प्रतिशत पराली जलाने की घटनाएँ हुईं। लुधियाना स्थित पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर ने बताया कि तरनतारन में पराली जलाने की 1,034 घटनाएँ दर्ज की गईं। अमृतसर में पराली जलाने की 895, गुरदासपुर में 324, पटियाला में 246, कपूरथला में 214, फिरोजपुर में 187, जालंधर में 169 और लुधियाना एवं अन्य जिलों में 131 घटनाएँ हुईं।

स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि हवा की धीमी गति और रात में कम तापमान के कारण प्रदूषकों का संचय हो रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण 4 नवंबर से नमी की मात्रा बढ़ने तथा हवा की गति और कम होने के कारण अगले दो-तीन दिनों के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में बनी रहेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वायु की खराब गुणवत्ता के कारण दिल्ली में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है। इसके कारण लोगों के श्वसन तंत्र, फेफड़ों, आँख और मस्तिष्क आदि में संक्रमण होने का खतरा रहता है। शिकागो विश्वविद्यालय (ई.पी.आई.सी.) के ऊर्जा नीति संस्थान द्वारा जून में जारी वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (AQLI) के अनुसार, प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों का जीवन अवधि 10 साल तक घट जाती है।

गोपाल राय क्या प्रदुषण भाजपा कार्यालय में निर्माण कार्य 
से हो रहा है? दूसरों को आरोपित करने की बजाए 
धरातल पर काम करो। 
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय औचक निरीक्षण करने डीडीयू मार्ग पर स्थित बीजेपी के निर्माणाधीन दफ्तर पहुंच गए। निरीक्षण करने के बाद वापस लौटे पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सीएक्यूएम (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) को कार्रवाई के आदेश दिए। पर्यावरण मंत्री के आदेश के बाद सीएक्यूएम ने बीजेपी दफ्तर पर चल रहे निर्माण कार्य को बंद करा दिया। साथ ही पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। गोपाल राय ने निर्माण में नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

बीजेपी नेता और प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल किया कि पिछले साल केजरीवाल पंजाब सरकार को दोषी बता रहे थे और कहा था कि पंजाब में पराली जलाई जा रही है, इस कारण दिल्‍ली में प्रदूषण बढ़ा है, लेकिन इस साल क्‍या हुआ? गौरव भाटिया ने कहा कि इस साल पंजाब में पराली जलाने के मामले में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। राज्‍य सरकार क्‍या कर रही है। प्रदूषण में 48 प्रतिशत भागेदारी पराली जलाने की हो जाती है। बीते सालों में यह नियंत्रण ‘आप’ के पास नहीं था, लेकिन इस साल क्‍या… ये निठल्‍लेपन का कहर है। 

ये हमारे देश के नागरिकों के भविष्य का सवाल है। एक लाख बीस हजार मशीन पंजाब सरकार के पास मौजूद थीं। केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को लिखा लेकिन केजरीवाल ने इसका प्रयोग ही नहीं होने दिया। इनकी सरकार शराब के ठेके देने में व्यस्त है। प्रदूषण से लड़ने के लिए पंजाब को सबसे ज्यादा सहायता दी गई। कुछ सहायता हरियाणा को भी मिली। हरियाणा की खट्टर सरकार ने काम करके दिखाया। हरियाणा में पिछले साल 2873 मामले थे, इस साल 33 प्रतिशत कम 1933 थे। पंजाब में पराली जलाने के मामले 7000 से बढ़कर 10000 हो गए। केंद्र के सुझाव को नहीं माना गया।

पंजाब के मुख्यमंत्री, प्रचार मंत्री हैं, गुजरात और दिल्ली आएंगे, लेकिन जो आप का काम है वो नहीं करेंगे। 1350 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने सहायता पंजाब को दी है प्रदूषण से लड़ने के लिए लेकिन सुना ही नहीं गया। गौरव भाटिया ने कहा कि यदि किसी की जान से खेलते हैं तो उसे क्रिमिनल नेगलेजेंस कहते हैं। केजरीवाल से ज्यादा भ्रष्ट नेता देश में कोई नहीं है।

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से हालात गंभीर हो गए हैं। दिल्ली के कई इलाकों में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार रहा। नरेला इलाके में स्थित और खतरनाक हो गई है। यहां एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 571 दर्ज किया गया है। दिल्ली को फिलहाल वायु प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम है, क्योंकि एनसीआर में धान की कटाई का काम जोरों पर है। ऐसे में पराली जलान के मामले भी तेजी से सामने आएंगे, जिससे वायु प्रदूषण और बढ़ सकता है। दिल्ली में निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए 586 टीमों का गठन किया गया है। इतना ही नहीं 521 वाटर स्प्रिगलिंग मशीनें, 233 एंटी स्मॉग गन, 150 मोबाईल एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

पंजाब : AAP दीवाली को करती है बदनाम ; पराली जलाने की घटनाएँ 10000 के पार, पिछले साल के मुकाबले 25% अधिक

                                             साभार: Tribune India
मौजूदा मौसम में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10,000 के पार हो गई हैं। उधर नवाँशहर पहुँचे राज्य के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल कह रहे हैं कि राज्य की AAP सरकार ने किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर 1.33 लाख उपकरण मुहैया कराए हैं। जबकि वास्तविकता ये है कि अकेले शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को राज्य में पराली जलाने की 2000+ घटनाएँ सामने आई हैं। ये अब तक एक दिन में रिकॉर्ड है।

अगर समान अवधि की ही बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 26.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। शुक्रवार को 2067 जगह पराली जलाया जाना एक नया रिकॉर्ड है। पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या अब 10,214 के पार चली गई है। जबकि पिछले वर्ष 15 सितंबर से लेकर 28 अक्टूबर तक इसी अवधि में ऐसी 7503 घटनाएँ सामने आई थीं। शुक्रवार को सबसे ज्यादा मामले संगरूर में सामने आए।

जिले में पराली जलाने की एक दिन में 296 मामले सामने आए। इसके बाद पटियाला का स्थान आता है, जहाँ 274 जगह पराली जलाई गई। तीसरे नंबर पर तरनतारण जिले में 258 जगह से पराली जलाने की घटनाएँ सामने आईं। इसी तरह कपूरथला (137), फ़िरोजपुर (131), बठिंडा (124) और जालंधर (116) भी पीछे नहीं रहा। पठानकोट अकेले ऐसा जिला है, जहाँ से पराली जलाने की कोई भी घटना सामने नहीं आई।

अब तक के कुल आँकड़ों की बात करें तो इस साल सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएँ तरनतारण (1996) में सामने आई हैं। इसी तरह अमृतसर में पराली जलाने की 1245, पटियाला में 1059 और संगरूर में 760 मामले सामने आए हैं। खास बात ये भी है कि संगरूर में 760 में से 550 मामले पिछले 3 दिनों में ही सामने आए हैं। अकेले पंजाब के 10 जिले राज्य में पराली जलाने की 83% घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

इनमें से 5 जिले मालवा में आते हैं, जबकि 2 दोआब और 3 माँझा में स्थित हैं। हरियाणा में पराली जलाने के मामले में सुधार हुआ है। जहाँ पिछले साल इस तरह की 2252 घटनाएँ सामने आई थीं, इस साल आँकड़ा 24% की गिरावट के साथ 1701 पर है।2021 में दिल्ली में पराली जलाने के एक भी मामले नहीं थे, जबकि इस साल यहाँ भी ऐसी 5 घटनाएँ हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी 14% की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मामले घटे हैं।

भाजपा इसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हैं, जो पिछले साल तक पंजाब-हरियाणा को दोष देते फिरते थे और इस साल चुप्पी साध कर दीवाली के पटाखे प्रतिबंधित करने में लगे रहे। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम रही है और यमुना साफ़ करने के नाम पर उसमें ज़हरीला सिलिकॉन डिफॉमर डाल रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि प्रदूषण का कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि है, लेकिन हिन्दू विरोधी AAP दीवाली को बदनाम करती है।