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जेल में मिल रही जान से मारने की धमकी, पीने को साफ़ पानी तक नहीं: बंगाल पुलिस की कैद में बंद शर्मिष्ठा ने माँगी सुरक्षा

                  शर्मिष्ठा को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था (फोटो साभार: Deccan Herald)
मुस्लिमों की मजहबी भावनाएँ आहत करने के नाम पर गिरफ्तार इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को जेल के भीतर धमकियाँ मिल रही हैं। जेल के भीतर ही लोग उसकी जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह बातें शर्मिष्ठा ने एक याचिका में कहीं हैं। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिष्ठा की तरफ से अलीपुर (कोलकाता) की जिला अदालत में दायर एक याचिका में समस्याएँ बताई गईं थी। शर्मिष्ठा ने इस याचिका में कहा था कि उन्हें जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। शर्मिष्ठा ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है।

शर्मिष्ठा को अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि इस महिला सुधार गृह में ना सही से साफ़-सफाई होती है ना ही यहाँ पीने का साफ़ पानी है। शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि उन्हें बीमारियाँ भी हैं और इस महिला सुधार गृह में उन्हें कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है।

शर्मिष्ठा ने अलीपुर कोर्ट में याचिका दायर खुद को सुरक्षा दिए जाने की माँग की है। अलीपुर कोर्ट में इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस बीच शर्मिष्ठा की जमानत याचिका को सोमवार (3 जून, 2025) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुना। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम तौर पर जमानत देने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वीडियो ने लोगों की भावनाएँ आहत की हैं। हाई कोर्ट ने राहत माँगने पर यह भी कहा कि अगर शर्मिष्ठा को जेल में दो दिन रहना पड़ेगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने इस दौरान बोलने की आजादी को लेकर टिप्पणियाँ की।

वहीं इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने शर्मिष्ठा को राहत देने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि उन्हें यह वीडियो बनाने से पहले सोचना चाहिए था। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी प्रयास किया कि यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में अब छुट्टियों के बाद सुना जाए। इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार (5 जून, 2025) को है।

शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई, 2025) को गिरफ्तार किया था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने इससे पहले अभियान चलाया था।

शर्मिष्ठा पनोली मामले में NHRC ने पश्चिम बंगाल पुलिस से माँगा जवाब, कहा- सुरक्षा का रखो पूरा ध्यान: जेल में मिल रहीं थीं रेप-हत्या की धमकियाँ

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पानोली की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि शर्मिष्ठा को गिरफ्तार होने के बाद से ‘बलात्कार और जान से मारने की कई धमकियाँ’ मिल रही हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

शर्मिष्ठा को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े उनके कुछ कथित विवादित पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया था। NHRC को एक शिकायत मिली है जिसमें आरोप है कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (30 मई 2025) को हरियाणा के गुरुग्राम से शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करते समय सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। अब शर्मिष्ठा 13 जून 2025 तक न्यायिक हिरासत में हैं।

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जैसे ही माँ कामाख्या पर गंदी टिप्पणी करने वाले जेहादी वजाहत खान को असम ने माँगा, वैसे ही बंगाल प
जैसे ही माँ कामाख्या पर गंदी टिप्पणी करने वाले जेहादी वजाहत खान को असम ने माँगा, वैसे ही बंगाल प
 

NHRC ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और DGP से शर्मिष्ठा की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही, हरियाणा सरकार से भी पूछा गया है कि क्या गिरफ्तारी के दौरान सभी नियम-कानूनों का पालन किया गया था। इन जवाबों के आधार पर ही NHRC आगे की कार्रवाई तय करेगा।

पाकिस्तान : चीफ जस्टिस का सिर काटने पर 1 करोड़ रुपए, इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में घुसी ‘भीड़’

             पाकिस्तान के चीफ जस्टिस के सर पर 1 करोड़ का ईनाम (फोटो साभार: X_AjayKauljourno)
पाकिस्तान के चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम रख दिया गया है, जिन्होंने एक अहमदिया व्यक्ति मुबारकी सानी को ‘राइट टू रिलीजन’ के तहत ‘ईशनिंदा’ के आरोपों से बरी कर दिया था। यही नहीं, अब हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ सुप्रीम कोर्ट में घुस आई है और चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के इस्तीफे की माँग कर रही है। उन्हें पीछे ढकेलने के लिए वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा है।

काजी फैज ईसा पिछले साल ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए थे, लेकिन फरवरी 2024 में उनके एक फैसले की वजह से आज उनकी जान पर बन आई है। इस मामले में उन्होंने फरवरी में उसकी सजा पर रोक लगाई थी और फिर 29 मई को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस इरफान सआदत खान और जस्टिस नईम अख़्तर अफगान भी शामिल थे।

ताजा विरोध प्रदर्शन 24 जुलाई को शुरू हुए, जब उन्होंने इस मामले में पंजाब सरकार की याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही कई इस्लामी संगठनों ने भी याचिकाएँ दायर की और सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा की माँग की। इन मामलों में सुनवाई 22 अगस्त 2024 को होगी, लेकिन उससे पहले ही हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ ने इस्लामाबाद के अति सुरक्षित रेड-जोन को पार कर लिया और सुप्रीम कोर्ट के बाह पड़ाव डालकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

 

इस्लामिक कट्टरपंथियों की नाराजगी की वजह

जानकारी के मुताबिक, 19 अगस्त 2024 को इस्लामिक कट्टरपंथियों के बड़े समूह ने इस्लामाबाद के आत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले रेड-जोन की सुरक्षा को तोड़ दिया और सुप्रीम कोर्ट के गेट पर धावा बोल दिया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की माँग है कि चीफ जस्टिस तुरंत इस्तीफा दें। दरअसल, फरवरी के फैसले में जस्टिस ईसा ने अहमदिया व्यक्ति मुबारक अहमद सानी को जमानत दे दी थी, जिस पर साल 2019 में ईशनिंदा का आरोप लगा था। उसने अहमदियों से जुड़े पर्चे बाँटे थे। सानी को पंजाब पवित्र कुरान (प्रिंटिंग एंड रिकॉर्डिंग) (संसोधन) एक्ट, 2021 के तहत सजा सुनाई गई थी।
हालाँकि जस्टिस ईसा की अगुवाई में तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि सानी को उस कानून के तहत सजा दी गई है, जो साल 2021 से पहले थी ही नहीं। इसके बाद कोर्ट ने सानी को जमानत देते हुए उसकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया था। इसके तुरंत बाद तहरीक-ए-लब्बैक-पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक संगठनों ने काजी फैज ईसा के खिलाफ नफरती अभियान चलाना शुरू कर दिया। फरवरी 2024 में पेशावर में 3 हजार से अधिक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रोड़ ब्लॉक करके ‘कादियानों को मौत’ के नारे लगाए। इस प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट को बाकायदा बयान जारी कर अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी थी।

चीफ जस्टिस का सर काटने पर 1 करोड़ का ईनाम

पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम घोषित किया है। टीएलपी के दूसरे नंबर के नेता पीर जहीरुल हसन शाह ने ये ईनाम घोषित किया। उसने अपने बयान में कहा, “टीएलपी को छोड़िए, एक मोमिन और प्रोफेट मोहम्मद का गुलाम होने के तौर पर, मैं अपनी हैसियत से घोषणा करता हूँ कि जो फैज ईसा का सिर कलम करेगा, उसे मैं 1 करोड़ रुपए दूँगा।” उसने अहमदियों को मरजई भी कहा।
इस बीच, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शाह की भड़काऊ टिप्पणी का एक वीडियो साझा किया और कहा, “पाकिस्तान राज्य में इस तरह के बयानों के लिए कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काजी साहब ने किसी समूह या समूह के पक्ष में कोई फैसला नहीं दिया। जिस आधार पर यह घृणित कथा प्रचारित की जा रही है, हम इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा करते हैं और इसका पुरजोर खंडन करते हैं, ऐसी मानसिकता पाकिस्तान को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है। इस झूठे नरेटिव के पीछे राजनीतिक मकसद हैं।”
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोगों को 1974 में राज्य द्वारा औपचारिक रूप से गैर-मुस्लिम घोषित किए जाने के बाद से ही गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और उनके खिलाफ नियमित रूप से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ अहमदिया समुदाय को काफिर माना जाता है। ये विडंबना ही है कि जिस अहमदिया समुदाय ने पाकिस्तान के निर्माण में सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभाई थी, आज वही पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम हो गए हैं। वैसे, इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव की वजह से सुप्रीम कोर्ट बैकफुट पर दिख रहा है। ऐसे में इस बात की संभावना कहीं अधिक है कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को बदल दे और आरोपित अहमदिया व्यक्ति को फिर से जेल में डाल दे।

 



कथित ईशनिंदा के विरोध की आड़ में घाटी में अराजकता फैलाने वालों पर हमारी कड़ी नजर, इकट्ठा कर रहे हैं सबूत: जम्मू-कश्मीर डीजीपी

                                                                                                  साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में NIT (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) के छात्रों ने एक हिन्दू छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि छात्र ने सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। प्रदर्शन के दौरान ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे भी लगे थे और इस प्रदर्शन को पाकिस्तानी हैंडलों से भी हवा दी गई थी।

सवाल यह है कि समाचारों में उत्तेजक नारेबाजी करते उपद्रवियों के चेहरे साफ दिख रहे हैं,  जम्मू-कश्मीर पुलिस इनको कब गिरफ्तार करेगी? कब इनको समर्थन देने वालों पर कार्यवाही होगी? आखिर कश्मीर में हिन्दू कब तक प्रताड़ित होता रहेगा? यही हाल नूपुर शर्मा केस में भी हुआ, वीडियो को ट्वीस्ट करके भड़काने वाला जुबेर आज़ाद घूम रहा है और बेकसूर नूपुर गुमनामी की ज़िंदगी जी रही है, क्या इसी का नाम इंसाफ है? इस  मुद्दे पर समस्त हिन्दू संगठनों को राज्य एवं केंद्र सरकारों पर उपद्रवी लोगों पर कार्यवाही कर यह पूछे जब हमास सह-संस्थापक के बेटे ने यह बयान दिया था, उस समय क्यों चुप थे? इसलिए कि वह मुसलमान है? कोई छद्दम सेक्युलरिस्ट नहीं बोलेगा, सबके मुंह में दही जमी हुई है, कसूरवार हिन्दू लड़के को ही ठहराया जायेगा। इस हंगामे के पीछे छिपे षड्यंत्र की अति गंभीरता से जाँच बहुत जरुरी है।   

इसको लेकर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन का कहना है, “हमने सभी पहलुओं पर कानूनी कार्रवाई की है। मामले दर्ज कर लिए गए हैं और जाँच चल रही है। हम इस पर नजर रख रहे हैं और सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। इस विरोध के बहाने कुछ और करने की कोशिश की जा रही है। उन पर भी हमारी नजर है और उनके खिलाफ भी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।”

डीजीपी ने कहा, “हमने तय किया है कि CrPC की धारा 144 के तहत सरसरी तौर पर एक कानून लाएँगे, जिसमें किसी किस्म का कंटेंट, मैसेज, वीडियो, ऑडियो… जिससे कम्युनल सेंसिटिविटी खत्म हो जाएगी या किसी को डराया जाएगा, धमकाया जाएगा… वो चाहे टेररिस्ट-सेपरेटिव्स की से हो या दहशत पंसद की तरफ से हो, ऐसे कंटेंट को पोस्ट करना कानून जुर्म हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पोस्ट करने वाले को जरूर हम कानून के दायरे में लाएँगे और उसको फॉर्वर्ड-शेयर करना भी कानूनन जुर्म हो जाएगा। कोई अगर ये कहे कि साब किसी ने इनोसेंटली मुझे भेज दिया, मैं क्या करूँ तो उसके जवाब में ये रहेगा कि साब अब आपको, आपके बगैर इजाजत के अगर किसी ने इस तरह के ऑब्जेक्शनेबल वीडियो, ऑडियो, मैसेज, टेक्स्ट भेजा तो आप नजदीकी थाने में जाकर कह सकते थे कि मैं नहीं चाहता था कि ये मैसेज मेरे फोन में आए। ये पता नहीं कि किसने और कहाँ से भेजा है।”

डीजीपी स्वैन ने कहा, “आप ये इन्फॉर्मेशन अपनी तरफ से थाने में दे दीजिएगा। इसके बाद आप क्रिमिनल लायब्लिटी के बाहर हो जाएँगे। लेकिन, अगर आप जानते हैं कि ये ये ऑडियो-वीडियो या टेक्स्ट माहौल को खराब करने वाले किसी टेटरिस्ट-सेपरेटिब्स नेटवर्क है या कोई ऐसा है जो दंगा-फसाद कराना चाहता है या पैगंबर साहब की इज्जत को ठेस पहुँचाने वाला काम करता है या कम्युनिली सेंसिटिव चीजों को पोस्ट करता है और आगे आप उसे फॉरवर्ड करते हो तो यह कानून जुर्म बन जाएगा।”

फिर खाली उसी बुनियाद पर कार्रवाई करने के लिए कानून हमें इजाजत देगी। हम उसको कोर्ट में पेश करेंगे और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यकीनन ऐसे लोगों को हम इंडेक्स करके रखेंगे ताकि उनको हर हालत में, हर स्टेज में उनको पता रहे कि उन्होंने ये गलत काम किया है। ऐसे करने से ही लोगों के मन भय पैदा होता है। क्योंकि कुछ चंद लोग इसका फायदा लेते हैं और अपनी रोटी सेंकते हैं।”

दरअसल, कॉलेज में 28 नवंबर 2023 को पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर श्रीनगर के NIT में बवाल और प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद पुलिस ने आरोपित छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। साथ ही आरोपित को इंस्टिट्यूट से सस्पेंड करते हुए आने वाले सेमेस्टर के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

दरअसल, यहाँ पढ़ने वाले एक छात्र (जो हिंदू है) ने इस्लाम के नबी पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध आपत्तिजनक वीडियो अपने व्हाट्सएप स्टेस्ट्स और इंस्टाग्राम पर डाला था। इसके उलट हालाँकि सोशल मीडिया पर कई लोग उस वीडियो का स्क्रीनशॉट लगा कर यह दावा कर रहे हैं कि वो वीडियो हमास के संस्थापक के बेटे का है, खुद आरोपित लड़के ने अपनी ओर से कोई बात नहीं कही है।

सोशल मीडिया में आरोपित लड़के से संबंधित जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया जा रहा है, उसके अनुसार इस वीडियो में हमास संस्थापक का बेटा इस्लाम के बारे में कुछ बता रहा है। कट्टर मुस्लिमों ने इसे पैगंबर मोहम्मद की आपत्ति से जोड़ दिया, ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। ऊपर के सोशल मीडिया पोस्ट में आरोपित लड़के और उसकी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के बारे में भी लिखा गया है। नेटिजन्स इस पर भी बात कर रहे हैं कि स्थानीय कट्टर मुस्लिम भीड़ को इस बात से दिक्कत है कि एक हिंदू लड़के की गर्लफ्रेंड मुस्लिम क्यों?

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जिस हसन के वीडियो पर ‘पैगंबर मोहम्मद का अपमान’, उसने बोला – मार दो मेरे अब्बा को: NIT श्रीनगर में कट

ईशनिंदा की बात सुन कट्टर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। कुछ ही देर में इस वीडियो को ईशनिंदा बताते हुए श्रीनगर NIT के तमाम मुस्लिम छात्र ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ (रसूल अल्लाह हम तेरे लिए हाजिर हैं) का नारा लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे।

NIT श्रीनगर की वेबसाइट हैक! पैगंबर मुहम्मद के ‘अपमान’ को लेकर हिंदू छात्र पर FIR

    NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक (बाएँ), इस्लामी भीड़ का प्रदर्शन (दाएँ/फोटो साभार: ग्रेटर कश्मीर)
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर स्थित ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)’ कॉलेज की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। NIT श्रीनगर की वेबसाइट ‘nitsri.ac.in’ को खोलने पर होमपेज पर लिखा हुआ आ रहा है – “हम तुरंत वापस आएँगे। असुविधा के लिए खेद है लेकिन हम इस समय कुछ मेंटेनेंस की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। अगर आपको ज़रूर है तो आप हमेशा हमसे संपर्क कर सकते हैं, अन्यथा हम तुरंत ऑनलाइन वापस आएँगे। – CSC वेब टीम।”

साफ़ है, NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। दूसरी बात ये भी ध्यान देने लायक है कि वेबसाइट पर अन्य पेज खुल रहे हैं, लेकिन ये समस्या होमपेज पर ही है। NIT श्रीनगर अभी चर्चा में है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम भीड़ प्रदर्शन कर रही है। पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप एक छात्र पर लगाया गया है। उक्त छात्र के खिलाफ पुलिस ने मुस्लिम समाज की भावनाओं को आहत करने के लिए FIR भी दर्ज कर ली है। नीग्रीन पुलिस थाने में ये मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने आम लोगों को भी सावधान किया है कि वो अफवाहों से बचें। प्रदर्शन में शामिल मुस्लिम छात्रों ने आरोपित छात्र को ‘बाहरी’ बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाते हुए कट्टरपंथी भीड़ ने प्रदर्शन किया। इस मामले पर राजनीति भी हो रही है और पूर्व मेयर शेख इमरान ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। NIT की अनुशासनात्मक समिति ने उक्त छात्र को कॉलेज से 1 साल के लिए निकाल दिया है।

                                    जम्मू कश्मीर स्थित NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक

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श्रीनगर : हिंदू छात्र ने किया पैगंबर मोहम्मद का अपमान? नेटिजन्स ने बताया – हमास संस्थापक के बेटे

कॉलेजों की वेबसाइट हैक करने का ये पहला मामला नहीं है। गाजियाबाद के जिस इंजीनियरनिंग कॉलेज ABSE में जय श्री राम के नारे बोलने पर छात्र को मंच से उतारा गया था, वहाँ की वेबसाइट हैक हो गई थी। इसी तरह दिल्ली के जिस स्कूल में छात्रों ने ‘जय श्री राम’ बोलने पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, उसकी वेबसाइट हैक हो गई थी। अब नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है।

दिल्ली : वनस्थली पब्लिक स्कूल, मयूर विहार में ‘जय श्री राम’ बोलने पर छात्रों को 10 चक्कर लगवा कर सस्पेंड किया; कलावा काट डाला, भगवान के पोस्टर फाड़े

दिल्ली के स्कूल (बीच) में टीचर अनूप (बाएँ) और रवि (दाएँ) ने भगवान राम का पोस्टर फाड़ कर छात्रों का कलावा कटा
देश की राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा काटने की खबर सामने आई है। आरोप यह भी है कि स्कूल में न सिर्फ भगवान राम के पोस्टर फाड़े गए बल्कि उनकी जय बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड कर के परीक्षा देने से भी रोक दिया गया। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा। हंगामे के बाद छात्रों का निलंबन वापस ले लिया गया है।

छात्रों का कलावा 16 मई, 2023 को काटा गया और बाद में पोस्टर 19 मई को फाड़े गए। इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शनिवार (20 मई, 2023) को हुआ है।

यह मामला मयूर विहार के फेज 3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल का है। यहाँ के कई हिन्दू बच्चों ने सामूहिक रूप से एकजुट हो कर स्कूल के अध्यापक अनूप रावत पर अपने हाथ में बँधा कलावा काटने का आरोप लगाया है। कटे कलाओं को डस्टबिन में डाल दिया गया। छात्रों का आरोप है कि एक अन्य टीचर रवि ने क्लास में लगा भगवान राम का पोस्टर भी फाड़ दिया और बाद में ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड भी करवा दिया।

सस्पेंड किए गए छात्रों की संख्या 9 बताई जा रही है। छात्रों की इस सामूहिक शिकायत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक छात्र का आरोप है कि ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को पहले बुलवा कर स्कूल के 10 चक्कर कटवाए गए, फिर उन्हें अगले दिन सस्पेंड किया गया। एक छात्र ने खुद को भगवान राम का भक्त बताया। इस घटना से संबंधित कुछ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल चैटिंग छात्रों की आपस में बातचीत बताई जा रही है, जिसमें वो स्कूल में हुए इस घटनाक्रम के बारे में चर्चा कर रहे हैं। छात्रों को स्कूल के चक्कर लगवाने वाली टीचर का नाम रितु बताया जा रहा है।

इस घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों और छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। सभी लोग आरोपित टीचरों पर कार्रवाई और छात्रों का निलंबन वापस लेने की माँग कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस टीम पहुँची। पुलिस ने हिन्दू संगठनों सहित अभिभावकों को समझाने के प्रयास किए। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक भी हुई। वनस्थली स्कूल साल 2002 में स्थापित हुआ है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित जैन और प्रिंसिपल अनुराधा जैन हैं।

3 टीचर मौखिक रूप से सस्पेंड

ऑपइंडिया ने इस मामले में एक पीड़ित छात्र से बात की। छात्र ने बताया कि उनका कलावा 16 मई को खेल टीचर रवि द्वारा काटा गया और 19 मई को एक अन्य खेल टीचर अनूप ने क्लास में घुस कर भगवान राम का पोस्टर फाड़ा। इसके बाद तीसरी खेल टीचर रितु ने ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को प्रताड़ित किया और कॉलेज के चक्कर लगवाए। छात्र ने आगे बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल ने मौखिक तौर पर इन तीनों टीचरों को सस्पेंड कर दिया है जिसका कोई लिखित आदेश नहीं है। छात्र का ये भी दावा है कि निलंबित छात्रों को बहाल कर दिया गया है।
स्कूल के अंदर से वायरल हो रहे एक वीडियो में निगम पार्षद मुनेश ने भी किसी टीचर को स्कूल से निकाले जाने की बात कही है। जब ऑपइंडिया ने इस निलंबन आदि की पुष्टि के लिए स्कूल के नम्बरों पर फोन किया तो किसी ने कॉल नहीं उठाई। स्कूल का आधिकारिक मोबाइल नंबर भी सेवा से बाहर बताया। स्कूल का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

ईसाई हैं रितु मैडम

राम के नाम पर स्कूल के 5 छात्रों को प्रताड़ित करने और उनके कलावे काटने वाले टीचरों रितु, रवि और अनूप में से रितु को पीड़ित छात्र ने ईसाई बताया। छात्र का दावा है कि क्लास में लगा पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में किसी ने बनाया था। बताया यह भी गया कि बाकी अन्य पोस्टरों और चित्रों को छोड़ दिया गया और राम के चित्र की अनुमति न होने की बात कह कर टीचर अनूप द्वारा उसे फाड़ कर डस्टबिन में डाल दिया गया।
पीड़ित छात्र के मुताबिक कलावे क्लास 10 में पढ़ने वाले बच्चों के कलावा काटे गए और भगवान राम का पोस्टर कक्षा 9 में फाड़ा गया था। हमें आरोपित टीचरों को पहले भी कुछ छात्रों से ऐसी हरकतें करने का आदी बताया गया। साथ ही छात्र ने दावा किया कि रितु, रवि और अनूप मिल कर उन्हें टीका लगाने से भी मना किया करते थे।

‘बजरंग दल’ वालों ने दी है शिकायत

स्कूल के 3 खेल टीचरों द्वारा खुद से किए गए व्यवहार से दुखी छात्र ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में ‘बजरंग दल’ ने पुलिस में शिकायत दी है। हालाँकि, शिकायत की जाँच में क्या निकला ये छात्र को मालूम नहीं था। छात्र का आरोप है कि स्कूल के स्टाफ पुलिस, मीडिया और हिन्दू संगठनों को देख कर अपनी बातचीत का रंग-ढंग बदल लेते हैं जबकि छात्रों से वो किसी और ही रूप में पेश आते हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ने बयान दिया है कि उन्हें घटना के बारे में जानकारी नहीं थी।
उनके बयान को भी छात्र ने संदेहास्पद बताया और कहा कि बिना उनकी जानकारी के बच्चों को सस्पेंड कैसे कर दिया गया था। ऑपइंडिया ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए DCP ईस्ट को कॉल किया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। पुलिस का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा बाँधे कलावे

पीड़ित छात्र के मुताबिक हंगामा होने के बाद मामले को दबाने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा कलावे बाँधे हैं और फिर ऐसा न होने का भरोसा दिया था। छात्र का ये भी कहना है कि माहौल गर्म देख कर स्कूल मैनेजमेंट ने फ़िलहाल के लिए स्कूल में ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी है।

पाकिस्तान : इमरान खान की तुलना पैगम्बर से करने पर भीड़ ने मंच से खींचकर मौलाना का किया कत्ल, लगाए नारा-ए-तकबीर के नारे

इमरान समर्थकों की रैली में मौलाना की पीट कर हत्या (चित्र साभार- @Ruftaj)
पाकिस्तान के खैबर प्रान्त में एक राजनैतिक रैली के दौरान एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है। 40 वर्षीय मृतक मौलाना बताया जा नाम निगार आलम है। निगार पर आरोप है कि उसने इमरान खान की तुलना पैगम्बर से की थी। इस मॉब लिंचिंग के दौरान मौके पर पुलिस मौजूद थी लेकिन वो भीड़ से मौलाना को बचाने में नाकामयाब रही। क़त्ल के बाद मौलाना की लाश पर नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे भी लगे। घटना शनिवार (6 मई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के समय रात में पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की एक रैली हो रही थी। इस रैली में PTI कार्यकर्ता अपने मुखिया इमरान खान का समर्थन कर रहे थे। इसी दौरान मौलाना निगार आलम ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की शान में कसीदे गढ़ने शुरू कर दिए। निगार से कहा कि वो इमरान खान की ईमानदारी के इतने कायल हैं कि उनका सम्मान एक पैगम्बर की तरह करते हैं। अपने बयान के बाद निगार सभा में आए अन्य लोगों से बात करने में व्यस्त हो गए।

मर्दन इलाके में हो रही इस बीच उसी रैली में शामिल कुछ लोग मौलाना निगार की बयानबाजी से भड़क गए। उन्होंने अपने साथ कई अन्य लोगों को भी भड़का दिया। इसी के बाद एक भीड़ निगार खान को पीटने के लिए आगे बढ़ी। मौके पर मौजूद पुलिस वालों ने जब हमलावरों को रोकना चाहा तो भीड़ और ज्यादा भड़क गई। अल्लाहु अकबर और नार-ए-तकबीर का नारा लगाते हमलावरों ने मौलाना निगार को बेरहमी से पीटा। मौत के बाद भी उनकी अर्धनग्न लाश पर लोग लाठियाँ बरसाते रहे। मौलाना की लाश को भी घसीटा गया। इस हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक पर हमले के लिए देवबंदी विचारधारा के मौलवियों ने लोगों को उकसाया। शुरुआत में उन्होंने मौलाना पर ईशनिंदा के तहत FIR दर्ज करने की माँग की थी। बताया यह भी जा रहा है कि मृतक ने उसी दिन PTI ज्वाइन की थी और पहले ही दिन उसकी हत्या कर दी गई।


अलकायदा भी पड़ा नूपुर शर्मा के पीछे, ‘ईशनिंदा की सज़ा’ देने के लिए भारत के मुस्लिमों को उकसाया: ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े

                                                                                                                                   प्रतीकात्मक
खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा भी अब नूपुर शर्मा के पीछे पड़ गया है। उसने भारत के मुस्लिमों को उकसाते हुए कहा है कि वो नूपुर शर्मा को ईशनिंदा की सज़ा दें। पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी करने के आरोप लगने के बाद से ही नूपुर शर्मा पर जिहादी ख़तरा बढ़ गया है। अब अलकायदा के इस परिदृश्य में सामने आने के बाद ख़ुफ़िया एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। अलकायदा ने अपने मुखपत्र के जरिए नूपुर शर्मा को ‘सज़ा’ दिलाने का ऐलान किया है।

जिस तरह नूपुर शर्मा के पीछे अब अल कायदा के भी मैदान में कूदने पर सबसे पहले भाजपा के मुस्लिम (अल्पसंख्यक) प्रकोष्ठ और संघ को अपने राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को कट्टरपंथियों के विरुद्ध सड़क पर लाकर जनता को यह समझाना होगा कि "नूपुर ने जो कहा वह हमारी इस्लामिक किताबों में भी लिखा है फिर अपमान किस बात का?" अगर नहीं आते उस स्थिति में भाजपा और संघ को अपने इन प्रकोष्ठों को तुरंत बंद कर देना चाहिए, ताकि जनता इन भ्रमित प्रकोष्ठों से गुमराह न होने पाए। भारत में सोशल मीडिया के अलावा केवल News Nation ऐसा चैनल है जिसने TRP की परवाह न करते हुए "इस्लाम क्या कहता है" शो शुरू किया हुआ है, जिसमें इस्लाम छोड़ चुके मुस्लिम किस तरह मौलवियों और मौलानाओं को बेनकाब कर रहे हैं। मौलानाओं को पसीने पोंछते देखा गया है; कुरान की आयतें ठीक से न पढ़े जाने पर डांटते हुए देखा जाता है। दूसरे, जनता को उन कपटियों से सावधान रहना चाहिए जो टीवी पर 'सर तन से जुदा' को किसी इस्लाम या धर्म के विरुद्ध तो बोलते हैं लेकिन सड़क पर आकर उनके सामाजिक बहिष्कार एवं कानून के हवाले करने की आवाज़ बुलंद नहीं कर सकते। इन लोगों की असलियत को पहचानना होगा। जो परदे के पीछे बैठ देश में अशांति और अराजकता फैलाकर अपनी किसी निजी स्वार्थ को पूरा कर रहे हैं। 

अलकायदा के इस मुखपत्र का नाम ‘नवा-ए-घवा-ए-हिन्द’ है, जिसमें नूपुर शर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी कर के ईशनिंदा की है। इस पत्रिका के ताज़ा अंक में आतंकी संगठन ने भारतीय मुस्लिमों से कहा है कि वो नूपुर शर्मा से बदला लें। साथ ही मुस्लिमों को उकसाते हुए उन्हें हथियार इकट्ठा करने और इसे चलाना सीखने के लिए भी कहा गया है। अलकायदा ने इसे ‘बचाव वाला जिहाद’ नाम दिया है।

इसके साथ ही भारतीय मुस्लिमों से कहा गया है कि उनके सबसे नजदीक में कश्मीर में जिहाद हो रहा है, जिसमें उन्हें हिस्सा लेना चाहिए। अमेरिका में जिस तरह से इस्लामी कट्टरपंथियों ने लेखक सलमान रुश्दी को निशाना बनाया, उसके बाद से अब नूपुर शर्मा की सुरक्षा को लेकर ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। इससे पहले जून में अलकायदा ने नूपुर शर्मा से बदला लेने के लिए आत्मघाती हमलों का ऐलान किया था।

उस समय अलकायदा ने भड़काते हुए लिखा था कि अगर मुस्लिमों ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का बदला नहीं लिया तो उनका बुरा हाल होगा। ‘अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS)’ का मुखिया असीम उमर उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने भी नूपुर शर्मा पर खतरे को देखते हुए उन पर दर्ज सारे FIR को दिल्ली ट्रांसफर करने का फैसला सुनाया। पड़ोस में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अलकायदा ने अपना गढ़ बना रखा है, जिस कारण भारत के लिए वो एक खतरा बना हुआ है।

कट्टरपंथियों के आगबबूला होने पर राणा अयूब ने डिलीट किया सलमान रुशदी की ‘सलामती’ वाला ट्वीट

सलमान रुश्दी के ठीक होने की दुआ माँगने वाला ट्वीट डिलीट किया
आखिरकार, अभिव्यक्ति की आज़ादी (#freedom of expression) की लड़ाई लड़ने वाली को कट्टरपंथियों के आगे झुककर सलमान रुश्दी के समर्थन में ट्वीट को क्यों डिलीट करना पड़ा? क्यों कट्टरवाद के आगे झुक सच्चाई को क्यों छिपाया जा रहा है? आखिर कितने समय तक सच्चाई को छिपाया जाता रहेगा? क्या मुस्लिम समाज पर इस्लाम से ज्यादा डर कट्टरपंथियों का है? मौलवियों और इस्लामिक विद्वानों का समाज में क्या महत्व है?   
करोड़ों के घोटाले की आरोपित और वाशिंगटन पोस्ट की स्तंभकार राणा अयूब ने 12 अगस्त को लेखक सलमान रुश्दी की सलामती की दुआ माँगते हुए जो ट्वीट किया था, उसे उन्होंने डिलीट कर दिया है। हादी मतार (Hadi Matar) पर रुश्दी की हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। 

ऐसा माना जा रहा है कि रुश्दी पर यह हमला कथित रूप से ईशनिंदा के कारण हुआ, क्योंकि उनकी किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (The Satanic Verse) को कट्टरपंथी लोग, पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) के जीवन पर किया गया एक व्यंग्य मानते हैं। रुश्दी पर हमले के बाद राणा अयूब ने ट्वीट किया कि वह उनके ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रही हैं।

                               राणा अयूब ने सलमान रुश्दी को लेकर किया ट्वीट

हालाँकि, ट्विटर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा उनकी निंदा किए जाने के बाद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। कई इस्लामवादी ट्विटर पर अयूब के इस पोस्ट को देखकर आगबबूला हो गए। उन्होंने राणा की क्लास लगाते हुए कहा, “वे किसी ऐसे शख्स को फ़ॉलो नहीं कर सकते हैं, जिसने पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने वाले का समर्थन किया हो और उसकी सलामती की दुआ माँगी हो।” इसके बाद उन्होंने अयूब को अनफॉलो कर दिया।

इस्लामवादी कह रहा है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को फ़ॉलो नहीं कर सकता, जो पैगंबर की निंदा करने वाले का भला चाहता हो

कई अन्य इस्लामवादियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उनके मुताबिक, अयूब वही बोल रही हैं, जो पश्चिम के लोग सुनना चाहते हैं। अयूब अब पश्चिमी अभिजात वर्ग के उदारवादियों की पहली पसंद बन चुकी हैं, क्योंकि वह पीएम मोदी और उनके नीतियों का शुरू से विरोध करती आ रही हैं। वह अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों का दिल जीतने के लिए मुद्दों को भुनाने में जुटी रहती हैं।

         सलमान रुश्दी की सलामती की दुआ माँगने पर मुस्लिम ट्विटर यूजर्स राणा अयूब से बेहद खफा नजर आ रहे हैं

एक मुस्लिम ट्विटर यूजर ने कहा कि वह इंस्टाग्राम पर राणा अयूब की तस्वीरें और उनके द्वारा मुस्लिम मुद्दों पर आवाज उठाने के बाद उनके फैन हो गए थे। हालाँकि, अब उन्होंने ऐसा महसूस किया कि वह सिर्फ अपने करियर को आगे ले जाने के लिए ये सब कर रही थीं।

                            राणा ने पहले ऊपर दिए गए ट्वीट को लाइक किया, फिर बाद में अनलाइक किया

राणा ने एक अन्य लेखक सुकेतु मेहता के एक ट्वीट को भी ‘लाइक’ किया था, जिसमें रुश्दी को ‘बॉम्बे का शेर’ (Lion of Bombay) कहा गया था, लेकिन मुस्लिम ट्विटर यूजर के निशाने पर आने के बाद राणा ने इसे ‘अनलाइक’ कर दिया था। यानी अब वह इस बात से सहमत नहीं थी।

मुस्लिम ट्विटर यूजर्स ने कथित रूप से ‘ईशनिंदा’ करने वाले लेखक सलमान रुश्दी की सलामती की दुआ माँगने वाले ट्वीट को डिलीट करने के बाद उनकी सराहना की और खुशी जताई कि अब वह सही रास्ते पर आ गई हैं।

यही नहीं कई मुस्लिम ट्विटर यूजर्स ने राणा को ‘खुद को सही’ करने पर उनकी जमकर तारीफ की।

राणा ने केवल अपना ‘नो वर्ड्स’ वाला ट्वीट रखा हुआ है, जो इस्लामवादी द्वारा सलमान रुश्दी को छुरा घोंपने से संदर्भित है।

समुदाय विशेष और इस्लामवादी भाइयों को खुश करने के लिए उन्होंने रुश्दी पर हमले की निंदा करने के लिए गैर-इस्लामवादियों का मजाक उड़ाते हुए एक और ट्वीट किया।

पहले भी राणा कर चुकी हैं कई ट्वीट डिलीट

यह पहली बार नहीं है, जब राणा ने उम्माह के साथ खड़े होने के लिए अपने ट्वीट डिलीट किए हों। जुलाई 2020 में जब तुर्की द्वारा हागिया सोफिया म्यूजियम, जो कभी एक चर्च था उसे मस्जिद में बदलने की कई देशों ने आलोचना की थी, उस वक्त राणा ने ट्वीट कर तुर्की के इस कदम को सराहा था।
राणा का ट्वीट राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में था, जिसमें शीर्ष अदालत ने राम लला के पक्ष में फैसला सुनाया था और मस्जिद के लिए अलग जमीन का आदेश दिया था। यही नहीं नीरज चोपड़ा ने जब टोक्यो 2020 एथलेटिक्स में भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था। उस वक्त नीरज चोपड़ा की सराहना करते हुए राणा ने उनकी एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसे उन्होंने कुछ देर बाद ही हटा दिया था।
नेटिज़न्स ने पहले ही नीरज चोपड़ा की तारीफ करते हुए उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले लिया था। दरअसल, चोपड़ा ने अपने ट्वीट में भारत सरकार और पीएम मोदी को धन्यवाद दिया था, जो राणा को पसंद नहीं आया। हालाँकि, उन्होंने कुछ घंटों बाद फिर उनकी फोटो को शेयर किया था।
हो सकता है, तब वह काफी उत्साहित थीं, जब खेल भावना के मद्देनजर नीरज ने कथित तौर पर कहा था कि पाकिस्तानी एथलीट नदीम अरशद का पोडियम पर होना एशिया के लिए अच्छा और गर्व का क्षण है।
नीरज ने उस समय केंद्र सरकार को धन्यवाद देने के साथ-साथ एक साथी एथलीट की भी सराहना की थी। यह उनके बड़प्पन को दिखाता है। वहीं, राणा का नीरज चोपड़ा को लेकर किया गया ट्वीट हटाना उनकी निम्न मानसिकता को दर्शाता है। उनका सलमान रुश्दी की सलामती को लेकर पहले ट्वीट करना फिर डिलीट कर देना सिर्फ यह दिखाता है कि उन्होंने इस्लामवादियों की नजरों में ऊपर उठने के लिए ये सब किया है।

‘कुत्ता सलमान रुश्दी’ को ‘उड़ती कुरान’ ने जला डाला : पाकिस्तानी फिल्म International Gorillay की कहानी, इस्लाम के दुश्मन का अंजाम

                     'कुत्ता सलमान रुश्दी' को पाकिस्तान बहुत पहले मार चुका... फिल्मी कहानी में
इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध कुछ बोलने-लिखने वालों के खिलाफ फतवे और ‘सर तन से जुदा’ के नारों का सिलसिला अभी का नहीं बल्कि वर्षों पुराना है। सलमान रुश्दी को चाकू से मारने की घटना नई है। वो सोच-विचार जिसके तहत चाकू मारी गई है, वो नई नहीं है। इसी सोच के साथ पाकिस्तान में फिल्म भी बन चुकी है। नाम है इंटरनेशनल गोरिल्ले (International Gorillay)
।

पाकिस्तानी फिल्म इंटरनेशनल गोरिल्ले में कुरान और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ किताब लिखने वाले सलमान रुश्दी को उनके किए की सजा देने का काल्पनिक चित्रण दिखाया गया है। उस समय का तो पता नहीं लेकिन काल्पनिक चित्रण भी इस फिल्म में ऐसा कि आपको देख कर हँसी छूट जाएगी।

तब के समय फिल्म इंटरनेशनल गोरिल्ले (International Gorillay) पाकिस्तान की सबसे सफल फिल्मों में से एक साबित हुई थी। फिल्म में बाबरा शरीफ, नीली और जावेद शेखी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान और इस्लाम के खिलाफ साजिश रचने वालों को ये सब पात्र ही मिल कर उनके अंजाम तक पहुँचाते हैं। फिल्म की कहानी में जबरदस्त इस्लाम प्रेम ठूँसा हुआ है। तब ब्रिटेन में इस फिल्म को बैन भी किया गया था।

इस फिल्म के माध्यम से पूरी दुनिया को ‘इस्लाम की ताकत’ दिखाने कोशिश की गई है। फिल्म के मुख्य किरदारों को भी देशभक्त और महानायक की तरह पेश किया गया है। फिल्म में विलेन के रूप में सलमान रुश्दी को ही काल्पनिक ढंग से दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है जिसमें सलमान रुश्दी का मकसद होता है कि वह पूरी दुनिया से इस्लाम का सम्पूर्ण विनाश कर दे। इसके लिए वह अपनी एक फौज भी तैयार करता है और पाकिस्तान में बैठे अपने एक एजेंट को खूब सारा पैसा भी भेजता है।

International Gorillay की कहानी

इंटरनेशनल गोरिल्ले फिल्म के शुरुआती कुछ मिनटों में ही सलमान रुश्दी की लिखी किताब के विरुद्ध एक जुलूस निकलता है। लेकिन उस जुलूस पर पुलिस द्वारा फायरिंग करवा दी जाती है और कई लोगों की मौत हो जाती है। इसके साथ ही फिल्म की कहानी आगे बढ़ने लगती है। पूरी फिल्म में सलमान रुश्दी को कुत्ता बोला जाता है।
यह फिल्म हीरो और उसके दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। दोनों भाई शुरू में अलग-अलग विचारों में रहते हैं। मगर अंत में सब एक हो जाते हैं और ‘इस्लाम के दुश्मन’ को मारने के मिशन पर निकल पड़ते हैं।
फिल्म का क्लाइमेक्स इतना विचित्र है कि उसे समझना कुछ लोगों के बस का नहीं। दरअसल अंत में फिल्म के सभी नायकों की हत्या के लिए उन्हें रस्सियों से बाँध दिया जाता है। तभी वे लोग अल्लाह को समर्पित एक गाना गाते हैं। फिर क्या था… अचानक आसमान से बिजलियाँ गिरने लगती हैं… सब की रस्सियाँ खोल देती हैं।
क्लाइमेक्स अभी बाकी है… मजे से पढ़ते जाइए। इसके बाद आसमान से किताब उतरती है और फिल्म के खलनायक को ये उड़ती हुई किताब (कुरान) जलाकर भस्म कर देती है। वहाँ खड़े कलाकार तब उसे याद दिलाते हैं कि उसे इस्लाम के खिलाफ बोलने की सजा मिल रही है।

द सेटेनिक वर्सेज़ किताब के कारण बनी फिल्म

यह फिल्म वास्तव में सलमान रुश्दी की एक किताब के कारण बनाई गई थी। उस किताब का नाम ‘द सेटेनिक वर्सेज़’ है। सलमान ने इस किताब का प्रकाशन सितंबर 1988 में किया। ‘द सैटेनिक वर्सेज़’ के प्रकाशन ने इस्लामी दुनिया में तत्काल विवाद को जन्म दिया और इसका कारण बना पैगंबर मोहम्मद का अपमानजनक समझा जाने वाला चित्रण। क़िताब की कौन सी बात इस्लाम को मानने वालों को बुरी लगी, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है क्योंकि यह किताब भारत में कॉन्ग्रेसी सरकार ने प्रतिबंधित कर दी थी।
द सेटेनिक वर्सेज़ किताब के प्रकशन के बाद 14 फ़रवरी 1989 को सलमान रुश्दी को मारने के फतवे जारी किए गए। इसके बाद ईरान और ब्रिटेन के बीच राजनीतिक स्तर पर भी विवाद हुआ। वहीं किताब पर मचा बवाल अभी तक खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हुए जानलेवा हमले पर भी कुछ कट्टरपंथियों ने जश्न मनाया और उनके मरने की दुआएँ भी माँगी।