महाराष्ट्र के नागपुर में इस्लामी भीड़ की हिंसा के बीच एक महिला पुलिस अधिकारी निशाना बनी। उसके साथ छेड़छाड़ की गई। महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने का प्रयास भी भीड़ ने किया। वह किसी तरह बच कर वहाँ से निकली। वहीं इस हिंसा में घायल हुए DCP निकेतन कदम ने बताया कि भीड़ में सैकड़ों लोग शामिल थे जिनके पास हथियार थे।
महाराष्ट्र टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (17 मार्च, 2025) को इस्लामी हिंसा की भीड़ को रोकने के लिए एक पुलिस टीम पहुँची थी। इसमें एक महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल थीं। दंगाई भीड़ इसी बीच एक महिला अधिकारी को दबोच लिया। उन्होंने महिला अधिकारी के साथ छेड़छाड़ चालू कर दी।
भीड़ में शामिल लोगों ने उनको तरफ अश्लील इशारे किए, इसके बाद उनके कपड़े भी फाड़ने का प्रयास किया गया। भीड़ के चंगुल से किसी तरह वह बच कर निकलीं। उन्होंने अब इस विषय में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई है। यह मामला गणेश पेठ थाने में दर्ज किया गया है। छेड़छाड़ करने वाले दंगाइयों की अब तलाश चल रही है।
पुलिस इस मामले में CCTV फुटेज खंगाल रही है। इस बीच इस दंगे में घायल हुए पुलिस अधिकारी निकेतन कदम का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया है कि दंगाई भीड़ में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे जीके पास हथियार थे।
उन्होंने बताया कि एक गली से अचानक 100 लोगों की भीड़ आई थी और वह सभी हथियारबंद थे। DCP निकेतन कदम ने बताया कि उन्होंने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो कुछ लोग पीछे हटे लेकिन एक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। उसने कुल्हाड़ी निकेतन कदम के हाथ पर मार दी। इसमें वह घायल हो गए।
DCP कदम ने कह़ा है कि पुलिस ने हमला करने वालों की पहचान चालू कर दी है। जल्द ही उन आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी। DCP कदम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी बातचीत की है और उनका हाल जाना है।
सोमवार को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया था और पार्किंग में खड़ी गाड़ियाँ भी जला दी थीं। इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी जानकारी दी थी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी शामिल हैं। पाँच आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एक अभी भी आईसीयू में है। उन्होंने खुलासा किया कि हिंसा वाली जगह से पत्थरों से भरी एक ट्रॉली मिली और तेज धार वाले हथियारों का इस्तेमाल हुआ। कुछ खास (हिंदुओं) घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि यह सब पहले से प्लान था।
रेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर हिंसा (फोटो साभार: हिंदुस्तान/दैनिक जागरण) बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।
देश में जब भी दंगे होते हैं दंगाई पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया जाता है, फिर पुलिस को सीधे blind firing आदेश देकर क्यों नहीं भेजा जाता? क्या दंगाई लाठी या अश्रु गैस से मानने वाले हैं, बल्कि उनको छुपने का मौका दिया जाता है। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र और केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को अति गंभीरता से लेना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर भी सख्ती जरुरी है। आखिर देश कब तक दंगों में जलता रहेगा? इसका अंत केवल blind firing है, लाठीचार्ज या अश्रु गैस नहीं। दूसरे दोषी पाए जाने वालो को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें मिलने वाली सारी सरकारी सुविधाएं कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद कर देनी चाहिए। क्योकि दंगाइयों ने अब बच्चों और औरतों को आगे कर अपना खेल खेलने की रणनीति बनाई हुई है, जब blind firing में बेगुनाहों की लाशें बिछाने वालों की भी लाशें बिछनी शुरू नहीं होंगी, तभी दंगों की रोकथाम संभव है। यह काम केवल तभी संभव हो पायेगा अगर केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दंगा मुक्त भारत चाहती हैं। दंगे में हमेशा से बेगुनाह-हिन्दू अथवा मुसलमान- ही मरता आया है, दंगाई या दंगे के लिए उकसाने वाला नहीं।
दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।
बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।
अजय के प्राइवेट पार्ट को चीर कर निकली गोली, माँ पूछ रही - मेरे बेटे का क्या दोष? उत्तराखंड के हल्द्वानी में हिंसा भड़की हुई है। सरकारी जमीन पर बने एक अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर लेकर आया, जिसके बाद मुस्लिम भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप को फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई महिला पुलिसकर्मी भी जख्मी हुई हैं। इसी क्रम में दंगाइयों ने कबाड़ का कारोबार करने वाले अजय नाम के शख्स को भी गोली मार दी। अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
दंगे में हमेशा बेकसूर सबसे ज्यादा मरने वालों में होते हैं। कौन किस धर्म/मजहब से है या जाति से दंगाई नहीं जानते? स्वतंत्र पत्रकारिता करते कई मुस्लिम नेताओं से कुछ प्रमुख प्रश्नों में एक प्रश्न प्रमुख होता था कि "हमेशा कहा जाता है बाहर से आये लोगों ने किया, उनको बुलाता कौन है? कहाँ से आते हैं? दूसरे, देश में इतने दंगे हो चुके हैं, क्या किसी नेता अथवा दंगा करवाने वालों के घर के किसी परिंदे को भी कुछ नहीं होता। मरने वाला बेकसूर होता है, वह चाहे हिन्दू है या मुस्लिम", बगले झांकते देखा। किसी के पास कोई जवाब नहीं होता था।
अजय की माँ बिलखती हुई पूछ रही है कि उनके बेटे का क्या दोष था? रिश्ते में अजय के चाचा लगने वाले संतोष कुमार ने बताया कि अजय गफूरबस्ती में रहते थे। उन्होंने बताया कि गफूरबस्ती से लेकर इंदिरानगर तक का इलाका मुस्लिम बहुल है। बकौल संतोष, अजय अपनी माँ के लिए आयुर्वेदिक दवा लेने के लिए जा रहा था। उसकी माँ की तबीयत ख़राब रहती है। उसके साथ उसका एक दोस्त भी था। वहाँ दोनों जिम करने लगे। वहाँ से बाहर निकले तब तक बाहर माहौल ख़राब हो चुका था।
उन्होंने बताया कि गोली अजय के प्राइवेट पार्ट में लगी है और पीछे से चीर कर पार हो गई है। उन्होंने ये भी बताया कि तब पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी, दंगाइयों की गोली ही उसे लगी है। उन्होंने बताया कि अजय अभी होश में नहीं हैं। जिस वैद्य के पास वो दवा लेने गए थे वो मुस्लिम है और जिस जिम में उन्होंने व्यायाम किया वो भी मुस्लिम है। संतोष कुमार ने बताया कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को देर रात तक सर्जरी चली। रीढ़ की हड्डी भी टूट गई है।
संतोष कुमार भाजपा के नेता भी हैं। उन्होंने बताया कि वो दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सरकारी खर्च से अजय का इलाज चल रहा है। अजय नगर निगम की गाड़ी में कूड़े का कारोबार करते थे। 22-23 वर्ष उनकी उम्र थी। उनकी शादी को 2 साल हुए हैं, उनका एक बच्चा भी है। संतोष ने बताया कि इलाके में छोटी-छोटी झोपड़ियाँ हैं, फ़िलहाल पुलिस ने मामले को नियंत्रित कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है, थाना जला दिया गया है।
संतोष कुमार का कहना है कि गफूरबस्ती में हिन्दुओं की 200 झोपड़ियाँ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वाल्मीकि समाज का एक सोनकर नामक शख्स भी घायल हुआ था, इलाज के पास उसे घर भेज दिया गया है। इलाके के एक अन्य हिन्दू ने बताया कि फ़िलहाल वो लोग सुरक्षित हैं। अजय की माँ का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो कह रही हैं, “मेरे बेटे को दंगाइयों ने गोली मार दी। मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।”
अजय का इलाज साईं अस्पताल में चल रहा है। डॉ सिद्धार्थ पांडेय अजय का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजय के शरीर में गोली लग कर डैमेज कर के बाहर निकल गई। उनके शरीर में पेशाब का थैला फट गया था और किडनी से जो पाइप आता है वो भी फट गया था। खोल कर उसे रिपेयर किया गया है। उन्होंने बताया कि अंदर ब्लीडिंग भी बहुत ज़्यादा थी, जिसे रोकी गई है। आँतों के पास सूजन था, वहाँ इकट्ठे खून को भी निकाला गया। अजय की माँ ने बताया कि रात के अँधेरे में हंगामा हुआ कि किसी का बच्चा पड़ा हुआ है, वो दौड़ती गईं तो अपने बेटे को उठा कर ले आईं।
NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक (बाएँ), इस्लामी भीड़ का प्रदर्शन (दाएँ/फोटो साभार: ग्रेटर कश्मीर) जम्मू कश्मीर के श्रीनगर स्थित ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)’ कॉलेज की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। NIT श्रीनगर की वेबसाइट ‘nitsri.ac.in’ को खोलने पर होमपेज पर लिखा हुआ आ रहा है – “हम तुरंत वापस आएँगे। असुविधा के लिए खेद है लेकिन हम इस समय कुछ मेंटेनेंस की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। अगर आपको ज़रूर है तो आप हमेशा हमसे संपर्क कर सकते हैं, अन्यथा हम तुरंत ऑनलाइन वापस आएँगे। – CSC वेब टीम।”
साफ़ है, NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। दूसरी बात ये भी ध्यान देने लायक है कि वेबसाइट पर अन्य पेज खुल रहे हैं, लेकिन ये समस्या होमपेज पर ही है। NIT श्रीनगर अभी चर्चा में है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम भीड़ प्रदर्शन कर रही है। पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप एक छात्र पर लगाया गया है। उक्त छात्र के खिलाफ पुलिस ने मुस्लिम समाज की भावनाओं को आहत करने के लिए FIR भी दर्ज कर ली है। नीग्रीन पुलिस थाने में ये मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने आम लोगों को भी सावधान किया है कि वो अफवाहों से बचें। प्रदर्शन में शामिल मुस्लिम छात्रों ने आरोपित छात्र को ‘बाहरी’ बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाते हुए कट्टरपंथी भीड़ ने प्रदर्शन किया। इस मामले पर राजनीति भी हो रही है और पूर्व मेयर शेख इमरान ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। NIT की अनुशासनात्मक समिति ने उक्त छात्र को कॉलेज से 1 साल के लिए निकाल दिया है।
जम्मू कश्मीर स्थित NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक
कॉलेजों की वेबसाइट हैक करने का ये पहला मामला नहीं है। गाजियाबाद के जिस इंजीनियरनिंग कॉलेज ABSE में जय श्री राम के नारे बोलने पर छात्र को मंच से उतारा गया था, वहाँ की वेबसाइट हैक हो गई थी। इसी तरह दिल्ली के जिस स्कूल में छात्रों ने ‘जय श्री राम’ बोलने पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, उसकी वेबसाइट हैक हो गई थी। अब नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है।
अहमदाबाद में मुस्लिम भीड़ ने रोकी हिंदू बस, धमकाया (फोटो साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनग्रैब) गुजरात के अहमदाबाद से इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ की नापाक हरकत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें कई कट्टरपंथी मुस्लिम हिंदू कार्यकर्ताओं से भरी एक बस को बीच सड़क पर घेरकर धमकाते नजर आ रहे हैं।
बजरंग दल ने 8 अक्टूबर, 2023 को अहमदाबाद के रिवरफ्रंट पर ‘शौर्य यात्रा’ का आयोजन किया था। यात्रा समाप्त होने के बाद हिंदू कार्यकर्ता अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान यह घटना सामने आई। शुरुआत में यह वीडियो जमालपुर का बताया जा रहा था। लेकिन, ऑपइंडियाकी पड़ताल में सामने आया कि वीडियो डानिलिमडा के चंदोला इलाके का है।
बताया जा रहा है कि हिंदू यात्री बस में बैठकर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए रामधुन गा रहे थे। बस जैसे ही डानिलिमडा के चंदोला पहुँची, वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने बस को रोक लिया। इसके बाद उन कट्टरपंथियों ने हिंदुओं से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया। वीडियो में मुस्लिमों को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “तुम हमारे क्षेत्र में (‘जय श्री राम’ के) नारे क्यों लगा रहे हो? अगर नारे लगाना चाहते हो तो अपने क्षेत्र में जाओ वहाँ लगाओ।” बता दें कि चंदोला मुस्लिम बाहुल्य इलाका है।
वहीं, वीडियो में एक अन्य मुस्लिम धमकी भरे लहजे में हिंदुओं से सवाल करता नजर आ रहा है। वह कहता है, “अगर हम तुमलोगों के इलाके में नारा-ए-तकबीर और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाएँ तो क्या होगा?” इस वीडियो में पुलिसकर्मी भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ के आगे वे भी बेबस नजर आए।”
इस मामले में ऑपइंडियाने ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) गुजरात के प्रवक्ता हितेंद्र सिंह राजपूत से बात की। इसमें उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। क्या अब गुजरात में हिंदुओं के ‘जय श्री राम’ बोलने पर प्रतिबंध है? मुस्लिम भीड़ का हिंदू तीर्थयात्रियों की बस रोकने के पीछे आखिर क्या मकसद था?”
श्रीराम के नाम पर सत्ता में बैठे लोगों को आज स्पष्ट करना होगा कि क्या गुजरात मे जय श्रीराम कहने पर प्रतिबंध है..?आज कर्णावती-रिवरफ्रंट से #बजरंग_दल की शौर्य यात्रा का समापन करके अपने घर लौट रहे कार्यकरों की बस को मुस्लिम बहुल जमालपुर में कट्टरपंथियों ने रोक लिया। क्यों रोका..… pic.twitter.com/PlK5tXCGyr
साल 2002 में हिंदू कारसेवकों से भरी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की कोच में आगे लगाने की घटना को याद करते हुए हितेंद्र ने आगे कहा, “हिंदू तीर्थयात्री अपने घर लौट रहे थे। इसको रोकने का क्या मतलब था? इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है? कहीं ये लोग एक और गोधरा कांड को तो अंजाम नहीं देना चाहते थे?”
इसके अलावा उन्होंने गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी और गुजरात पुलिस के डीजीपी से मामले की गहराई से जाँच करने का अनुरोध किया है। उन्होंने वायरल वीडियो के आधार पर इसमें दिख रहे इस्लामी कट्टरपंथियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बता दें कि इस मामले में अब तक किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। लेकिन, इसको लेकर सोशल मीडिया में हिंदू अपना गुस्सा दिखाते नजर आ रहे हैं।
झारखंड के हजारीबाग में हिन्दू श्रद्धालुओं की बस पर मस्जिद के पास हमला
झारखंड के हजारीबाग में हिन्दुओं पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। राज्य की राजधानी राँची में आयोजित ‘शौर्य जागरण यात्रा’ से लौट रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर पेलावल इलाके में पत्थर बरसाए गए। इसमें एक महिला समेत 10 लोग घायल हो गए हैं। ये घटना एक मस्जिद के पास रविवार (8 अक्टूबर, 2023) को रात पौने 9 के करीब हुई। स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है और इस आधार पर गिरफ्तारियाँ की जाएँगी।
वहीं ‘अमर उजाला’ की खबर में बताया गया है कि पत्थरबाजी करने वाले समुदाय के लोगों का कहना है कि मस्जिद के सामने हिन्दू श्रद्धालुओं की बस रुकी थी और वहाँ धार्मिक नारे लगाए गए। SP ने दावा किया कि समय पर पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुँच गए, जिस कारण एक बड़ी घटना होने से बच गई। हिंसा कर रहे लोगों को पुलिस ने खदेड़ा, जिसके बाद बस को जहाँ जाना था वहाँ के लिए रवाना किया गया। पुलिस का कहना है कि पत्थरबाजों की पहचान कर ली गई है।
साथ ही जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया है। बता दें कि जनवरी 2024 में राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है और इसके लिए देश के लाखों गाँवों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना चल रही है। ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ की युवा शाखा ‘बजरंग दल’ ने राँची में ‘शौर्य जागरण’ नाम से 4 यात्राएँ निकाली हैं। हजारों कार्यकर्ता इन यात्राओं का हिस्सा बने। इस घटना के बाद ‘झारखंड मानवाधिकार महासभा’ ने पुलिस से अपील की है कि इन रैलियों पर कड़ी नज़र रखी जाए।
हज़ारीबाग में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं पर जो हमला हुआ है उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है…
तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी हेमंत सरकार में एक ख़ास समुदाय के गुंडों को गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिल चुकी है…अभी तक राँची में हुए उत्पात में कोई गिरिफ़्तारी…
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हज़ारीबाग में ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिंदू परिषद’ के कार्यकर्ताओं पर जो हमला हुआ है उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी हेमंत सोरेन सरकार में एक ख़ास समुदाय के गुंडों को गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिल चुकी है। अभी तक राँची में हुए उत्पात में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है और अब हज़ारीबाग़ में ये हमला हो गया।”
उन्होंने माँग की कि झारखंड पुलिस जल्द से जल्द हमलावरों को गिरफ़्तार करके क़ानून का राज स्थापित करे। बता दें कि इसी तरह जुलाई 2023 के अंत में हरियाणा के मेवात स्थित नूँह में भी हिन्दुओं की यात्रा पर न सिर्फ पत्थरबाजी की गई थी, बल्कि इसके बाद बड़े स्तर पर हिंसा भड़क गई थी और अस्पतालों तक में घुस तक तोड़फोड़ मचाई गई थी। कॉन्ग्रेस नेता मामन खान को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब उन्हें जमानत मिल चुकी है।
मुस्लिमों की भीड़ ने घेरकर किया शिव यात्रा पर हमला (तस्वीर- ऑपइंडिया गुजराती) गुजरात के खेड़ा जिले के थसरा में शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को श्रावण के आखिरी दिन आयोजित भगवान शिव यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। यह हमला तब किया गया जब यात्रा मदरसे के पास से गुजर रही थी तभी अचानक से शिव यात्रा पर पथराव शुरू हो गया, जिससे वहाँ अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। अब इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
आज हिन्दू जानना चाहता है कि कहीं न कहीं हिन्दुओं की शोभा यात्राओं पर होती मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा की जाने वाली पत्थरबाज़ी पर सरकार कब प्रहार करेगी? क्यों नहीं सरकार और न्यायालय इन जेहादियों और इनके समर्थकों को ब्लैकलिस्ट कर सरकारी सुविधाओं से वंचित करती? हिन्दू अपने त्यौहार भारत में नहीं मनाएंगे तो कहाँ मनाने जाएं? सरकार और न्यायालय पेट्रोल बम और पत्थर सप्लाई करने वालों पर प्रहार करेगी? एकदम इतने पत्थर कहाँ से आये? पत्थरबाज़ी कोई अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित षड़यंत्र है। बाहरी दुश्मनों से निपटने से साथ-साथ देश में पल रहे इन जेहादियों से निपटने के लिए सरकार और न्यायालय को सख्त होना पड़ेगा। हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं और नेताओं को टीवी पर बैठ प्रवचन देने की बजाये इन जेहादियों के विरुद्ध सड़क पर आकर राज्य, केंद्र और न्यायालय को इन पर प्रहार करने के बाध्य करें।
घटना के संबंध में थसरा पुलिस स्टेशन में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से सभी की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। एफआईआर से पता चलता है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने पहले डीजे को लेकर जुलूस पर हमला कर दिया।
इस मामले में थसरा पुलिस ने विजय परमार नाम के युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। जिसमें बताया गया कि हर साल की तरह इस बार भी शुक्रवार को श्रावण मास की समाप्ति पर भगवान शिव की शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके लिए कानूनी मंजूरी भी ले ली गई थी।
हर साल यह यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होती है और बाघी, बलियादेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला, तीनबत्ती और आशापुरी मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति रखकर नागेश्वर मंदिर वापस लौटती है।
जानकारी के मुताबिक यात्रा सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और थसरा और आसपास के गाँवों से करीब 1000 हिंदू श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। जिसमें महिला-पुरुष, बच्चे सभी शामिल थे। यात्रा में दो डीजे बुलाये गए थे तथा पूरे मार्ग पर थसरा थाने से आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर तय रूट के अनुसार ही बालीदेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला होते हुए करीब साढ़े तीन बजे तीनबत्ती पहुँची।
मुस्लिमों ने मदरसे का हवाला देकर बंद कराया डीजे
यात्रा के दौरान लगातार भक्ति गीत बजते रहे। शिकायत में कहा गया है कि जब जुलूस तीनबत्ती चौक स्थित मदरसे के पास पहुँचा, तो थसरा नगर पालिका सदस्य मोहम्मद अबरार रियाजुद्दीन सैयद, अस्पाक मजिम्मियान बेलीम और लगभग पचास अन्य मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस के पास पहुँचे और आयोजकों से कहा, “हमारा मदरसा बगल में है, अपना डीजे बजाना बंद करो।” और इतना कहने के बाद ही मारपीट कर डीजे बंद कर दिया गया।
मदरसे और आसपास के घरों की छतों से हुआ पथराव
जैसा कि FIR में बताया गया है कि जब ये लोग लौट रहे थे, तो मदरसे और आसपास के घरों की छतों पर इकट्ठा हुए मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, ‘हिन्दुओं को रोको… हिन्दुओं के जुलूस को रोको’ और ‘कोई हिन्दू जिन्दा नहीं जाना चाहिए। तभी पथराव शुरू हो गया था और जुलूस पर ईंटें और बड़े-बड़े पत्थर फेंके जाने लगे।
इस बीच जुलूस में साथ चल रहे पुलिसकर्मियों और यात्रा के नेताओं ने पथराव रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन उत्तेजित मुस्लिमों की भीड़ ने पथराव नहीं रोका। इससे थसरा थाने के कई पुलिसकर्मी और यात्रा में शामिल कई लोग घायल हो गए। तभी हालात बिगड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का काफिला भी मौके पर पहुँच गया, जिसे देखकर पथराव करने वाले लोग मदरसे और आसपास के घरों की छतों से उतरकर भाग निकले।
17 के खिलाफ नामजद और पचास अन्य की भीड़ के खिलाफ शिकायत
थसरा में शिव यात्रा पर हमले के बाद इस मामले में कुल 17 मुस्लिमों को नामजद किया गया है और बाकी 50 मुस्लिम लोगों पर धारा 143, 147, 148, 149, 153A, 295A, 323, 324, 504, 505, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। थसरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उनके नाम इस प्रकार हैं :
मुहम्मद अबरार रियाज़ुद्दीन सैयद
अस्पाक मजिम्मियान बेलीम
ज़ैद अली मुहम्मद अली सैयद
अतीक मालेक
अहद सैयद
हारून पठान
रुकमुद्दीन रियाकतअली सैयद
फ़िरोज़ मजीत खान पठान
इदरीश
नावेद
जुनैद
तनवीर सैयद
फैजान सैयद
फ़ोम बैटरी
जाबिर खान इनायत खान पठान
मुर्गा
अल्ताफ खान मुख्तयार खान पठान
15 सितंबर को, श्रावण के शुभ महीने के आखिरी दिन, गुजरात के खेड़ा जिले के थसरा इलाके में भगवान शिव की बारात पर क्रूरता से हमला हुआ। खबरों के मुताबिक, जब हिंदू श्रद्धालु इलाके से जुलूस निकाल रहे थे तो एक मदरसे से पथराव किया गया। इस मामले में “शिवजी की सवारी” यात्रा के आयोजक विजय दास जी महाराज ने कहा कि हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। हमला इस तरह से किया गया कि इस शिव यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को यात्रा बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं इस घटना में दो अधिकारी और एक पीएसआई समेत तीन पुलिस अधिकारियों को भी घायल हुए हैं।
गुजरात के खेड़ा में हिंदू त्योहारों पर पथराव आम बात
खेड़ा गुजरात का वही इलाका है जहाँ पिछले साल नवरात्रि का उत्सव तब हिंसक हो गया था जब आरिफ और जहीर नाम के दो युवकों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू भक्तों पर पथराव किया था।
रिपोर्टों में कहा गया था कि आरिफ और जहीर के साथ आई मुस्लिम भीड़ ने नवरात्रि उत्सव के दौरान हंगामा किया था। इससे पहले, यह बताया गया था कि कैसे खेड़ा में एक मुस्लिम शिक्षक ने छात्रों को नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा करने के बजाय मुहर्रम-शैली के शोक में अपनी छाती पीटने और ‘या हुसैन’ का नारा लगाने के लिए कहा था। ऐसी भी खबरें आई थी कि जहाँ मुस्लिम पुरुषों ने फर्जी नामों के तहत नवरात्रि स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। साथ ही कुछ इलाकों में स्थानीय मुस्लिमों ने नवरात्रि मनाने का विरोध भी किया था।
बिहार के पश्चिम चम्पारण स्थित बगहा में महावीरी झंडा यात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला
हरियाणा के नूँह और राजस्थान के अलवर के बाद अब बिहार के पूर्वी एवं पश्चिम चम्पारण में हिन्दुओं की यात्रा पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले की खबर सामने आई है। बिहार में यूँ तो नागपंचमी के दिन महावीरी झंडे को लेकर कई जगह झड़प की खबर सामने आई, लेकिन पश्चिम चम्पारण के बगहा में मामला हाथ से निकल गया। बगहा में शोभायात्रा पर पत्थरबाजी के बाद दोनों पक्ष भिड़ गए, फिर खूब आगजनी और तोड़फोड़ हुई। मुख्य घटना बगहा के रतनमाला की है, जहाँ सोमवार (21 अगस्त, 2023) को महावीरी अखाड़े ने जुलूस निकाला था।
इसके बाद दोनों ही पक्ष उग्र होकर आपस में भिड़ गए। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। तोड़फोड़ भी हुई। पुलिस के जवानों समेत इस घटना में एक दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है। पूरे इलाके में पुलिस बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है, लेकिन अब भी तनाव बना हुआ है। उधर पूर्वी चम्पारण के मेहसी, कल्याणपुर और दरपा थाना क्षेत्रों में भी यात्रा को लेकर झड़प हुई। तीनों जगहों पर पुलिस की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। हालाँकि, स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अब हिन्दुओं में यह बात धारण करने लगी है कि जब हिन्दुओं की कोई शोभा यात्रा मुस्लिम क्षेत्रों से नहीं निकल सकती फिर हिन्दू क्षेत्रों से मुस्लिमों की कोई धार्मिक यात्रा क्यों? यदि यह धारणा ज़मीन पर उतर आयी, उस स्थिति में गंगा-जमुनी तहजीब से जनता को गुमराह करने वालों को बोलने का कोई हक़ नहीं। जिस तरह आज मस्जिदों और मुस्लिम घरों से पत्थरबाज़ी होती है, क्यों नहीं उन स्थानों को जमींदोज़ किया जाता? आखिर किन की शह पर पत्थरबाज़ी होती है और कौन पत्थर सप्लाई करता/करवाता है? कौन इन को वित्तीय सहायता दे रहा है? क्यों नहीं पत्थरबाजों पर shoot at sight के आदेश दिए जाते? क्यों नहीं इनको और इनके परिवारों को सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जाता?
बताया जा रहा है कि तीनों इलाकों में ईंट-पत्थर भी जम कर चले हैं। पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारी दिनेश राय भी बगहा पहुँचे हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। बगहा में घायलों में एक पत्रकार भी शामिल है। बताया जा रहा है कि शोभा यात्रा जैसे ही एक मस्जिद से होकर गुजरी, वहाँ मौजूद मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। वो कहने लगे कि इधर से महावीरी झंडा नहीं ले जाया जा सकता है। झड़प में एक व्यक्ति के घर में भी तोड़फोड़ मचाई गई।
SDM डॉ अनुपमा सिंह भी घटनास्थल पर कैम्प कर रही हैं। जहाँ यात्रा में 400 लोग शामिल थे, वहीं दूसरी तरफ से भी 200 के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। शोभा यात्रा अपने निर्धारित रास्ते से ही जा रही थी। घायलों में होमगार्ड सिपाही नगीना यादव, रतनमाला निवासी अमित कुमार, बनकटवा निवासी आयुष कुमार, रतनमाला निवासी पहावरी प्रसाद, राधेश्याम माँझी, पत्रकार मुन्ना राज, गोलू कुमार, बिहार पुलिस के सिपाही हरीश राम, रतनवाला निवासी भगवान चौधरी शामिल हैं।
नूंह (मेवात) के बाद अब जिहादियों ने बिहार के बगहा में "हिंदू यात्रा" पर पथराव किया है!
पत्थरबाजी में कई लोग घायल हो गए हैं! जैसे हीं "महावीरी यात्रा" मस्जिद के सामने से गुजरा जिहादियों ने पथराव शुरू कर दिया!
अनुमंडल अस्पताल में इन सभी का इलाज चल रहा है। अस्पताल ने बताया है कि भगवान चौधरी की स्थिति गंभीर है, बाकियों की हालत खतरे से बाहर है। प्रभारी एसपी अशोक चौधरी कह रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है, रतनमाला में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं दरपा के पिपरा गाँव में कचहरी टोला होकर शोभा यात्रा पछियारी टोला पहुँची, इसके बाद मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दरपा के SHO धर्मेंद्र यादव को भी चोट लगी है।
#WATCH | Bihar: SDPO Nand Parsad says, "...Force and Magistrate are present everywhere. It is peaceful now...We are keeping an eye...I request everybody to participate in the Mahaviri Yatra peacefully." (21.08) https://t.co/EZYLX3yuFNpic.twitter.com/PuNabPt0HV
हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमले के बाद हरियाणा के नूहं में हिंसा फैल गई थी। 31 जुलाई 2023 को धार्मिक शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए। नूहं का मुस्लिम बहुल इलाका अशांति का केंद्र था, जो धीरे-धीरे राज्य गुरुग्राम और सोहना जैसे अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।
इस हिंसा के दौरान कई लोगों ने अपने कटु अनुभवों को साझा किया है। इसी कड़ी में, एक हिंदू महिला ने अपने एक साक्षात्कार में उस दिन की दिल दहला देने वाली घटना को बयान किया है। महिला ने बताया कि कैसे स्त्रियाँ अपनी इज्जत बचाने में कामयाब रहीं।
महिला ने अपने इंटरव्यू में बताया, “जब आसपास की झाड़ियों से गोलियाँ चलने लगीं तो हिंदू भाई बाहर थे। बिजली विभाग द्वारा बिजली काट दी गई। वे (मुस्लिम) हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने (रेप) के लिए सूरज डूबने और रात होने का इंतजार कर रहे थे। ये हम ही जानते हैं कि कैसे हमने अपनी इज्जत बचाई।”
घटना के बारे में बताते हुए हिंदू महिला कई बार रो पड़ी। उसने बताया, “हमने अपने भाइयों को मरते देखा। हम जानते हैं कि हमारे भाइयों को कैसे गोली मारी गई। हमारे पास उनके घावों को ढँकने के लिए पट्टियाँ भी नहीं थीं। इसलिए हमने उन पर अपनी चुन्नी और दुपट्टा बाँध दिया।” हिंदुओं पर की जाने चौतरफा गोली-बारी को याद करके महिला अब भी सिहर उठती है।
महिला ने सवालिया लहजे में आगे कहा, “क्या हम मरने के लिए वहाँ गए थे? क्या हम वहाँ दर्शन नहीं कर सकते? ये लोग (मुस्लिम) अपना जुलूस निकालते हैं। क्या हम में से किसी को उन पर आपत्ति है? हमारे पास पीने का पानी तक नहीं था। हमने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल से अपना गला तर किया।”
महिला ने कहा, “उस दौरान बिजली काट दी गई थी। हम क्या कर सकते थे? वे हिंसा के लिए हम पर आरोप लगा रहे हैं। यदि हम ऐसा करना चाहते तो क्या हम अपने बच्चों को साथ लाते? क्या हम मरने के लिए अपनी माताओं और बुजुर्गों को अपने साथ वहाँ लाएँगे? क्या महिलाओं और बच्चों का हमारे लिए कोई मूल्य नहीं है?”
जीवित बचने के सवाल पर महिला ने बताया, “उस समय तक वहाँ कोई पुलिस नहीं थी। बाद में प्रशासन के पहुँचने के पर हम वहाँ से किसी तरह बच के निकले। हमें अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों के नीचे और खेतों के बीच से रेंगकर निकलना पड़ा। हमें जानवरों की तरह सरकारी बसों में ठूँस दिया गया था।”
उन्होंने कहा, “हमारे जले हुए गाड़ियों के धुएँ से आसमान काला हो गया था। इतना काला कि मौसम ख़राब होने पर भी आसमान में इतना अंधेरा नहीं होता। मैं सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी से हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहती हूँ कि हम 2024 में तभी वोट करेंगे, जब आप मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बर्खास्त करेंगे।”
महिला ने आगे कहा, “हम भाजपा को तभी वोट देंगे, जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे योग्य और कुशल किसी व्यक्ति को यहाँ रखेंगे। वर्तमान मुख्यमंत्री 2000-2500 महिलाओं को नहीं बचा सके तो दूसरों को कैसे बचाएँगे? हमने सोमवार का व्रत किया था और पानी भी नहीं पी थी। हम वहाँ बेहोश हो रहे थे।”
सुनिए इस हिंदू महिला का दर्द।
कैसे जिहादियों ने अंधेरा करने के लिए बिजली तक काट दी गई थी।
जिन जिन भाइयों को चोटे लगी थी बहनों ने अपने शरीर से दुपट्टे तक उतार उतार कर उन भाइयों के शरीर पर बांधी थी। pic.twitter.com/Vp1S37pE19
— Sagar Kumar “Sudarshan News” (@KumaarSaagar) August 2, 2023
कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। अभिषेक की बहादुरी को लेकर एक अन्य महिला ने कहा था कि वह महिलाओं को बचाने के खातिर अपनी जान गँवा दी।
पानीपत की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए खुद को हिंसा की भुक्तभोगी बताया। महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) हमारे बस पर पथराव किया। हमारे बच्चे हमें बचाने के लिए नीचे उतरे। निहत्थे होने के बावजूद भी उन्होंने (अभिषेक चौहान ने) हमें बचाने की पूरी कोशिश की। वो डरे नहीं कि उनके हाथ में हथियार नहीं है।”
महिला ने आगे कहा, “बस में सारी औरतें और बच्चे थे। उन्होंने (अभिषेक राजपूत) ने बहादुरी से मुकाबला किया। हमारा बच्चा बलिदान हो गया। हमें गर्व है कि ये बच्चा हमारे पानीपत का था।” लोगों ने अभिषेक के लिए बलिदानी का दर्जा देने की माँग की।
मीडिया में मुस्लिमों और उनके सेक्युलर सहयोगियों ने हिंसा के लिए बार-बार बजरंग दल के सदस्य मोनू मानेसर उर्फ मोहित यादव को दोषी ठहराया। मोनू मानेसर ने एक वीडियो संदेश जारी करके साफ कहा कि वह जुलूस में मौजूद नहीं थे। उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
वहीं, VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खाँ ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे।
वीएचपी महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक और कॉन्ग्रेसी नेता हैं आफताब साहब। उन्होंने कहा कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।
मुस्लिम दंगाइयों को कवर देने में लगे पड़े हैं लिबरल गैंग हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। करीब 800-900 हथियारबंद इस्लामवादियों ने मंदिर में जल चढ़ाने आए हजारों भक्तों पर हमला किया। इससे मंदिर के कुछ हिस्से छतिग्रस्त हो गए। हालाँकि वामपंथी लिबरल कट्टरपंथियों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
अब चर्चा यह है कि आखिर मुंह ढककर या खुले मुंह पत्थरबाज़ी करने वालों पर जब तक Shoot at sight के आदेश नहीं होंगे, टूलकिट वाले अशांति फैलाते रहेंगे। इसमें शामिल चाहे बच्चे हो, महिलाएं हो या फिर व्यस्क किसी को नहीं बख्शना चाहिए। जब तक इस तरह के कानून नहीं बनेंगे, दंगाई अशांति फैलाते रहेंगे। दूसरे, यह कि पत्थर सप्लाई करने वाला कौन है और इस काम के लिए कितने पैसे मिले और किसने दिए?
इस्लामवादियों के काले चेहरे को छिपाने में ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद ज़ुबैर का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की मंदिर के पुजारी के बयान वाली रिपोर्ट से 21 सेकंड की क्लिप के जरिए यह बताने की कोशिश की कि दंगाइयों ने मंदिर पर हमला नहीं किया था। हालाँकि इस मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुकुल कथूरिया की शिकायत पर दर्ज FIR कुछ और ही कहती है।
इस्लामी भीड़ द्वारा मंदिर पर पथराव, गोलियाँ: FIR
नूहं हिंसा को लेकर दर्ज की गई कई एफआईआर ऑपइंडिया के पास है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा के कार्यकारी इंजीनियर मुकुल कथूरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक में साफ तौर पर कहा गया है कि 800-900 इस्लामवादियों ने मंदिर में मौजूद भक्तों पर पथराव किया और गोलियाँ चलाईं। हमले में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
हमले के समय डीएम कथूरिया, उनके ड्राइवर खुर्शीद, इंस्पेक्टर राजबाला और अन्य लोग जलाभिषेक यात्रा के दौरान ड्यूटी के लिए नल्हड़ मंदिर में तैनात थे। जब भक्त मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तभी स्थानीय मेवाती और राजस्थानी बोलने वाली इस्लामवादियों की भीड़ प्लानिंग के हिसाब से पास के खेतों और पहाड़ों से मंदिर की ओर आई।
(साभार:हरियाणा पुलिस)
कथूरिया ने दर्ज कराया है कि दंगाइयों के हाथों में डंडे, पत्थर और अवैध हथियार थे। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहे थे। भीड़ ने मंदिर में पहुँचकर पूजा में खलल डालने के लिए पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और इस्लामिक भीड़ से पीछे हटने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाइयों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर के करीब जाने लगे। इस दौरान फिर एक बार हिंदुओं को निशाना बनाकर फायरिंग की।
यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 186, 188, 295 ए, 153 ए, 452, 427, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज की गई। एफआईआर में आदिल, तामिल, अरसाद, अजहरुद्दीन, कासिर, सकील, जुनैद, सलामुद्दीन, इकबाल, आजाद, इलियास, अकबर, राहुल पुत्र जूना, सलीम, इक्का उर्फ काला, तौहीद, याहाय, जावेद, शाहरुख, हारीस, अहमद, आसिफ, शोएब समेत कई दंगाइयों को नामजद किया गया।
वामपंथियों और लिबरलों का दावा: मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं
मंदिर में हमले की खबरों के बीच ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की रिपोर्ट की 21 सेकंड की क्लिप को रीट्वीट किया। इस क्लिप में मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि हमला मंदिर के करीब नहीं हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि जब ऑपइंडिया ने 4 मिनट से अधिक के वीडियो को देखा तो सामने आया कि पुजारी ने साफ तौर पर कहा था कि हमले के दौरान प्रशासन ने उन्हें बाहर आने से मना किया था। इसलिए वह बाहर नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर तक उन्होंने आवाजें सुनी थी। लेकिन हमला मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर हुआ। पुजारी के ये दावे किसी भी तरह से मेल नहीं खाते।
मंदिर के पुजारी ने जो कहा, उसमें से 3 मूल बातों को पढ़िए:
पुजारी ने यह भी कहा, “मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि हमें अंदर रहने के लिए कहा गया था। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता था। मैं बाहर नहीं गया।”
पहाड़ों से हो रही पत्थरबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर कहा, “मैं फिर कहना चाहता हूँ कि मैं बाहर नहीं आया। मैं एक पुजारी हूँ। हम अंदर ही रहते हैं।”
यह पूछे जाने पर कि उन्हें अंदर रहने के लिए क्यों कहा गया था, उन्होंने बताया, “लगभग 4,000 लोग अंदर फँसे हुए थे। इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ भी शामिल थीं। अंदर रहना ही बेहतर था। मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जो कुछ भी हुआ हो।”
‘लल्लनटॉप’ के एक अन्य वीडियो में, रिपोर्टर ने मंदिर के पास मचाए गए आतंक को दिखाया है। जब वह जले हुए वाहनों, पथराव और टूटी हुई काँच की बोतलों के निशान दिखाते हुए सड़क पर जा रहे थे, तो यह स्पष्ट था कि दंगे मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर नहीं हुए। यही नहीं, इस वीडियो में ‘लल्लनटॉप’ ने मंदिर में भंडारे के लिए प्रसाद बनाने आए लोगों से भी बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे घण्टों तक मंदिर में ही फँसे थे। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बचाया गया।
‘द वायर’ की संदिग्ध पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। आरफा ने कहा कि हरियाणा के गृह मंत्री कह रहे हैं कि मंदिर में भक्तों को बंधक बनाया गया था। लेकिन पुजारी दावों का खंडन कर रहे हैं।
‘द वायर’ ने पुजारी के हवाले से कहा, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे? वे परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला की माहौल खराब है। इन लोगों को बंधक कैसे बनाया जा सकता है? वे सर्वशक्तिमान की शरण में थे। लेकिन उन्हें अचानक पता चला कि बाहर की स्थिति अच्छी नहीं है। चूँकि बाहर की स्थिति खराब हो गई थी, इसलिए लोग अंदर फँस गए।”
वामपंथी मीडिया रिपोर्टिंग को अगर हम फिर से पढ़ें तो पुजारी ने कहा है कि लोग मंदिर के अंदर फँसे हुए थे क्योंकि बाहर की स्थिति खराब थी। यह तो ठीक ऐसा ही हुआ कि लुटेरों द्वारा हमला किए गए बैंक में लोगों को ‘बंधक’ नहीं बनाया गया था, बल्कि वे सिर्फ ‘अंदर फँस गए’ थे।
दूसरी और महत्वपूर्ण बात – किसी भी 21 सेकंड के वीडियो के जरिए मेवात में हुई हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं दिखाया जा सकता। पूरे वीडियो को देखें तो इस्लामिक भीड़ द्वारा मचाए गए आतंक से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने कहा है कि हमला प्री-प्लान्ड लगता है। मतलब साफ है कि इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। लेकिन उन्हें बचाने की जल्दी में ज़ुबैर, आरफा जैसे लोगों ने पूरी बात पर ध्यान नहीं दिया… क्योंकि इन्हें फैलाना है प्रोपेगेंडा, मुस्लिमों को दिखाना है पीड़ित।
पूर्व नियोजित था जूनागढ़ में पुलिस पर हमला (चित्र साभार: संदेश) गुजरात के जूनागढ़ में 16 जून 2023 को दरगाह के आगे पुलिस बल पर इस्लामी भीड़ के हमले की जाँच में अहम खुलासे हुए हैं। यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। पुलिस पर हमला करने के लिए बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था। हमले से पहले ही लोगों को लाठी-डंडे और पत्थर थमा दिए गए थे। पत्थरों को घटनास्थल पर लाने के लिए ट्रक का प्रयोग किया गया था।
दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की जाँच में यह बात निकल कर सामने आई है कि हिंसा से पहले पूरी तैयारियाँ की गईं थी। नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण को चिन्हित करते हुए कुल 8 जगहों की लिस्ट बनाई थी। इसमें दरगाह के साथ मंदिर भी थे। माना जा रहा है कि नगर निगम में जब इन स्थलों को चिन्हित किया जा रहा था तभी वहाँ के किसी कर्मचारी ने इसकी सूचना बाहरी लोगों को कर दी थी। हालाँकि अभी तक सूचना लीक करने वाले कर्मचारी का नाम सार्वजानिक नहीं किया गया है।
जानकारी लीक होने के बाद कुछ लोगों ने पूरी प्लानिंग के साथ 16 जून की तारीख हंगामे के लिए तय की। इसकी तैयारी के लिए लाठी-डंडे, धारदार हथियार और पत्थर जमा किए गए थे। पत्थरों को ट्रक और डम्पर में भर कर घटनास्थल के आसपास रखा गया था। हमले से ठीक पहले बाहर से हिंसक भीड़ बुलाई गई थी। जूनागढ़ के डीएसपी हतेश धंडालिया ने भी हमले से पहले साजिश का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि सब कुछ थोड़े ही समय में घटित हुआ।
दरगाह मजावाड़ी गेट के पास है और यह खुला हुआ है। आसपास CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि ऐसे में अगर पत्थर खुले में रखे जाते तो वे नजर में आ जाते। ऐसे में ईंट-पत्थर रखने के लिए ट्रकों और डम्परों का इस्तेमाल किया गया। ट्रकों को भी ऐसे स्थान देखकर खड़ा किया गया जहाँ वो कैमरे की नजर में न आएँ। कहा जा रहा है कि इन्हीं डम्परों में हथियार भी छिपा कर रखे गए थे जिसे पुलिस पर हमले के लिए प्रयोग किया गया।
दरगाह पर अवैध अतिक्रमण के लगे नोटिस के विरोध में 16 जून को गुजरात के जूनागढ़ में हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में अल्लाह हू अकबर और नारा ए तकबीर चिल्लाती 500 से 600 की भीड़ ने पुलिस बल पर हमला किया था। हमले में महिलाएँ भी शामिल थीं। भीड़ पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए ललकार रही थी। इस हमले में एक हिन्दू नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि आधे दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। महिला पुलिस स्टाफ की शिकायत पर हिंसा में शामिल 31 लोगों को नामजद कर जाँच की जा रही है।
मैनपुरी में अपना घर बेच कर कहीं और बसने की बात कर रहे हिन्दू क्या केंद्र में और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी हिन्दू पहले की भांति प्रताड़ित होते रहेंगे? क्यों नहीं केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें इन छद्दम धर्म-निरपेक्ष और साम्प्रदायिक तत्वों और इनके आकाओं पर नकेल कसती? उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में हिन्दुओं ने पलायन के पोस्टर लगाए हैं। ये घटना कुसमरा कस्बे की है। बता दें कि मैनपुरी समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है। पिछले 9 चुनावों से यहाँ सपा की ही जीत हुई है, जिसमें से 5 बार खुद पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद बने। फ़िलहाल वही यहाँ से सांसद हैं। कुसमरा कस्बे में एक मुस्लिम समाज की लड़की गायब हो गई, जिसके बाद कोरी समुदाय के लोगों ने अपने घर के बाहर पलायन के पोस्टर लगाए।
‘दैनिक जागरण’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर कोरी समुदाय ने हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है, इसीलिए वो अपने घर और संपत्ति बेच कर यहाँ से चले जाएँगे। गुरुवार (जून 24, 2021) को इस घटना के सामने आने के बाद यूपी पुलिस वहाँ पहुँची और लोगों की बात सुनी। पुलिस ने सुरक्षा का आश्वासन देकर समझाया-बुझाया और पोस्टर उतरवाए। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि मंगलवार को दूसरे समुदाय की एक 13 साल की लड़की गायब हो गई थी।
नाबालिग लड़की के गायब होने के बाद परिवार ने पुलिस में शिकायती पत्र दिया और पुलिस ने इस आधार पर लड़की की तलाश शुरू की। इसी बीच मोहल्ले में अल्पसंख्यक हिन्दुओं ने प्रताड़ित किए जाने की वजह से अपने घरों के बाहर पलायन के पोस्टर लगा दिए। पुलिस ने लोगों से पूछा कि अगर कोई समस्या है तो वो बताएँ। पुलिस ने समाधान का आश्वासन दिया और पोस्टर हटवा कर स्थिति को नियंत्रित किया।
हिन्दुओं का कहना है कि नाबालिग लड़की दिल्ली में मिल गई थी, लेकिन इसके बाद भी बुधवार की रात 50-60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ ने उनके घरों में घुस कर तलाशी ली। घर के लोग बेहद डर गए थे। महिलाएँ खासकर डरी हुई थीं। सोनू, शंभूदयाल, मुकेश, प्रमोद कुमार और संतोष कुमार सहित कई स्थानीय हिन्दुओं ने पलायन के पोस्टर लगाए। पुलिस ने इसे माहौल बिगाड़ने की साजिश बताते हुए कहा कि अराजक तत्वों पर कार्रवाई की जाएगी।
‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, क्षेत्राधिकारी (CO) अमर बहादुर सिंह ने दावा किया कि अब वहाँ पर किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों के बहकावे में आकर ये पोस्टर लगाए गए हो सकते हैं। स्थानीय महिलाओं ने माँग की कि उन्हें ठीक से रहने दिया जाए, वरना घर छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने न्याय की माँग की। एक लड़की ने बताया कि घर के सभी लोग सो रहे थे और किसी को कुछ खबर नहीं थी, तभी मुस्लिम भीड़ ने घरों में घुस कर तलाशी लेनी शुरू कर दी।
उसने बताया कि घरों में घुस कर एक-एक सामान, यहाँ तक कि कबाड़ निकलवा कर भी तलाशी ली गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर तलाशी के दौरान साथ में पुलिस होती तो वो कुछ नहीं बोलते। जिसकी बेटी गायब हुई थी, उसका नाम गियासुद्दीन बताया जा रहा है। वो अपने-आप दिल्ली गई थी या किसी के साथ, इस बारे में लोगों को कुछ नहीं पता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी कुछ कार्रवाई नहीं की है।
एक हिन्दू बुजुर्ग ने बताया, “हमलोग कमजोर हैं। कोरी जाति के लोग हैं। हमलोगों को सबकी बात माननी ही है। इसीलिए, जब पुलिस ने आकर जो कहा हमने मान लिया। हम शांति चाहते हैं।” एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि पूरे मोहल्ले के हिन्दुओं (12-13 घरों) की कुण्डी जबरन खुलवा कर तलाशी ली। हिन्दुओं ने कहा कि वो इंतजार कर रहे थे कि लड़की मिल जाए, फिर कोई एक्शन लेंगे। महिलाओं ने बताया कि तलाशी के दौरान उन्हें भी नहीं बख्शा गया।
उन्होंने पूछा कि इस इलाके में हम कैसे सुरक्षित हैं? महिलाओं ने स्पष्ट बताया कि ‘मुस्लिमों’ ने ऐसा किया है। अगले दिन रात को उनके घरों में रोटी तक नहीं बनी। आधी रात को घरों में घुस कर तलाशी ली गई थी। एक परिवार के घर में मुस्लिम भीड़ रात के 1 बजे घुसी। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के पदाधिकारी भी मोहल्ले में पहुँचे और न्याय की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब तक इस मामले में मुकदमा भी दर्ज नहीं किया है।
हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इलाके के मुस्लिम माँस की सप्लाई भी करते हैं। उन्होंने चौकी पहुँच कर शिकायत दर्ज करने की माँग की। कोरी समुदाय अनुसूचित जाति (SC) में आते हैं। मैनपुरी के कैथपुर में भी हिन्दुओं के प्रताड़ित होने की बात कही जा रही है। ‘हिन्दू जागरण मंच’ ने इन घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही है। फ़िलहाल इलाके में शांति है।
ऑपइंडिया ने भी स्थानीय लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके घर में महिलाएँ हैं, लड़कियाँ हैं – ऐसे में किसी भीड़ का घर में घुस जाने से वो लोग सहमे हुए। हैं। उन्होंने पूछा कि उनके पास पुलिस या ‘बड़े लोगों’ बात मानने के अलावा और क्या विकल्प है? उन्होंने कहा कि पुलिस आकर अगर 10 बार भी तलाशी लेती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि आगे भी ऐसा किया जा सकता है।
हमने इस पूरे मामले के बारे में पुलिस का पक्ष जानने के लिए किशनी थाने से भी संपर्क किया। प्रभारी निरीक्षक एके सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने लिखित में दे दिया है कि वो आपस में मिलजुल कर रहते हैं और उनमें सामंजस्य है, इसीलिए अब इस मामले में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों के बहकावे में आकर वो पोस्टर लगाए गए थे। घर में घुस कर तलाशी लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने आपस में मिल-बैठ कर मामला सुलझाने की बात कही है।
हाल ही में कानपुर से भी ऐसी ही खबर सामने आई थी। कर्नलगंज में 10 हिन्दू परिवारों ने अपने घर छोड़ने का निर्णय ले लिया था। वहाँ के हिन्दू परिवारों का कहना था कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि या तो वो इस्लाम मजहब अपना कर मुस्लिम बन जाएँ, या फिर घर छोड़ कर चले जाएँ। एक परिवार ने बताया कि उनके घर की बेटी के साथ छेड़छाड़ की गई और जब भाइयों ने मना किया तो घर में घुस कर मारपीट की गई।