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हल्द्वानी : दलित-दलित रोने वाली भीम आर्मी दलितों को पीटने वालों का केस वापस लेने की माँग पर अड़ी, वाल्मीकि-सोनकर परिवारों की बजाए मुस्लिमों के लिए माँगा मुआवजा

हल्द्वानी में दलितों को पीटने के आरोपित दंगाइयों का केस वापस लेने पर अड़ी 'भीम आर्मी' (चित्र साभार- X/@DrRituSingh_)
उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हिंसा भड़क गई थी। पुलिस और नगर निगम स्टाफ के खिलाफ भड़की यह हिंसा अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी। अब तक 58 दंगाइयों की गिरफ्तारी हो चुकी जबकि बाकियों की धरपकड़ के प्रयासों के साथ कुर्की जैसी कानूनी प्रक्रियाएँ जारी हैं। विगत 10 दिनों में प्रशासन के प्रयासों से हालात तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं। हालाँकि इस बीच कुछ समूह और गिरोह अस्थिरता फ़ैलाने की फ़िराक में लगे हैं।

जहाँ 2 दिन पहले एक कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जा कर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की तो वहीं अब ‘भीम आर्मी’ भी हिंसा पीड़ित मुस्लिमों से न मिलने देने पर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रही है। सबसे खास बात तो यह है कि दलितों के हितों के नाम पर राजनीति कर रही भीम आर्मी नगर निगम के उन दलित स्टाफ के घर नहीं जा रही जिन्हे हिंसक भीड़ ने बेरहमी से मारा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (17 फरवरी, 2024) को ‘भीम आर्मी’ का 60 सदस्यीय प्रतिनिध मंडल वनभूलपुरा के मुस्लिमों से मिलने निकला। इस प्रतिनिधि मंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत नौटियाल के अलावा सोनू लाठी आदि मौजूद थे। प्रतिनिधि मंडल को उत्तराखंड पुलिस ने वनभूलपुरा क्षेत्र से काफी पहले ही हाईवे पर रोक दिया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लागू होने की जानकारी दी और हालत सामान्य करने में उनसे सहयोग की अपील की। हालाँकि प्रतिनिधि मंडल ने प्रशासन की बात नहीं मानी। तब प्रशासन ने इस समूह को थोड़े समय तक एहतियातन थाने में रोका और बाद में वापस लौटा दिया।

भीम आर्मी के अन्य सदस्य इस बात को ले कर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वापस लौटाए जाने से भड़के मनजीत नौटियाल ने अपनी माँगों के न माने जाने पर आंदोलन तक का ऐलान कर दिया। उनकी माँगों में बेगुनाह मुस्लिमों के मुकदमे वापस लेना और वनभूलपुरा के पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 60 लाख रुपए देना शामिल है। ‘भीम आर्मी’ राष्ट्रीय अध्यक्ष यह भी चाहते हैं कि नैनीताल प्रशासन ध्वस्त किए गए अवैध मदरसे और मस्जिद के लिए फिर से जमीन दिलाए।

दंगाइयों के हमले में सबसे अधिक दलित ही पीड़ित

हल्द्वानी हिंसा में सबसे अधिक नुकसान पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों को उठाना पड़ा है। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई थी कि हिंसा के शिकार नगर निगम के अधिकतर स्टाफ अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से हैं। इनमें से मनोज और मिथुन वाल्मीकि के अलावा सागर सोनकर ने तो ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंसक भीड़ की करतूत बताई थी। मनोज, मिथुन और सागर के हाथों और पैरों में फैक्चर तब हैं जिसका इलाज सरकार करवा रही है। इन सभी ने बताया कि उस दिन दंगाइयों ने उन्हें मार कर जिन्दा जलाने के लिए रास्ते में कँटीले तार तक बिछा कर रखे हुए थे।
वहीं SC वर्ग से ही आने वाले कॉन्ग्रेस नेता गब्बर वाल्मीकि ने भी माना कि वनभूलपुरा की हिंसक भीड़ ने कानून को तोडा था। गब्बर वाल्मीकि ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की भी माँग प्रशासन से की थी। इन सभी के अलावा वनभूलपुरा से निकली हिंसक भीड़ जिस रिहायशी बस्ती गांधीनगर में घुसना चाह रही थी, वहाँ भी अधिकतर परिवार दलित समुदाय के ही हैं। इन परिवारों के तमाम सदस्य दंगाइयों के हमले में पुलिसकर्मियों, नगर निगम स्टाफ और अपने खुद के परिवार की रक्षा करते हुए घायल हुए हैं।
घायलों में अनुसूचित जाति के अमरदीप सोनकर को गंभीर चोटें आईं हैं और वो अभी तक बिस्तर पर ही हैं। उनके अलावा मनीष सोनकर का सिर फट गया, ऋतिक सोनकर के चेहरे पर कई घाव लगे और आर्यन सोनकर का हाथ टूट गया है। इन सभी के अलावा गाँधीनगर की SC वर्ग की महिलाओं ने हमें बताया कि आज भी उनके मन में हिंसक भीड़ का उन्मादी रूप घूमता है। यह सारा मोहल्ला पुलिस के साथ अपनी खुद की रक्षा के लिए एकजुट हो गया था। इसी मोहल्ले पर न सिर्फ गोलियाँ चलाई गईं बल्कि पत्थरों के साथ पेट्रोल बम भी फेंके गए थे।
घायलों की जानकारी ऑपइंडिया सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों पर प्रकाशित की गई है। हालाँकि भीम आर्मी का प्रतिनिधि मंडल वनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिमों के लिए संघर्ष कर रहा है। अभी तक उनके माँग पत्र में दलित वर्ग से आने वाले नगर निगम के स्टाफ व इसी वर्ग के गाँधीनगर के घायलों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है।

उत्तराखंड : जहाँ से चले पत्थर उन्हीं इलाके में दूध-दवाई बाँट रहे पुलिस वाले; सोशल मीडिया पर उपद्रवी परोस रहे झूठ

                                       हल्द्वानी के दंगाग्रस्त क्षेत्र में दूध और सहायता पहुंचाती पुलिस 
उत्तराखंड के हल्द्वानी में अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए मदरसे और मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन पहुँचा तो बवाल हो गया। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए। चश्मदीदों का कहना है कि छतों पर पानी की टंकी में पत्थर जमा कर के रखे गए थे। वहीं अब एक गिरोह विशेष द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया है।

नेहा दीक्षित नाम की तथाकथित पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक नोट जारी कर के दावा किया कि हल्द्वानी में पुलिस हिंसक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड पुलिस लोगों के घरों में घुस कर उन्हें पीट रही है। महिलाओं को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए। नेहा दीक्षित ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि पुलिस के डर से बनभूलपुरा के मुस्लिमों ने पलायन कर के जंगल में शरण लेना शुरू कर दिया है। दावा किया गया कि कई घरों में बच्चों के पीने के लिए दूध तक नहीं है।

ऐसी भ्रमित और भड़काऊ झूठी खबर फ़ैलाने से पहले नेहा को बताना होगा, कि पहल किसकी तरफ से हुई, घरों से पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम फेंकने वालों पर कार्यवाही होने से तुम्हे क्यों दर्द हो रहा है? तुम्हारा कर्तव्य यह होना चाहिए था कि सरकार और पुलिस को उन सभी स्थानों, जहाँ से पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम आए, पर सख्त से सख्त कार्यवाही, ताकि भविष्य में कोई उपद्रवी ऐसा करने से पहले हज़ार बार सोंचे। मुस्लिम कट्टरपंथी तो है ही बदनाम, लेकिन तुम्हारे जैसे भड़काऊ लोगों की भी कमी नहीं। तुम क्षेत्र में शांति क्यों नहीं बनाना चाहती? तुम्हारे ऐसे भ्रमित ट्वीट से आग भड़केगी, शांत नहीं होगी। इतना कुछ उपद्रव हुआ, तुम्हे शर्म नहीं आयी? 

   

लेकिन, ग्राउंड पर स्थिति इसके एकदम उलट है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खुद पुलिस के अधिकारी कर्फ्यू वाले इलाकों में दूध और खाने-पीने की वस्तुएँ वितरित कर रहे हैं। ये वही इलाके जहाँ, इसी पुलिस को निशाना बनाया गया था। छतों से पत्थर चले थे। कर्फ्यू वाले इलाकों में एम्बुलेंस भेजी गई हैं, दवाएँ भेजी गई हैं। इसके अलावा डॉक्टरों को भी तैनात किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कैसे पुलिस मुस्लिमों को मदद सामग्रियाँ बाँट रही है।

वहीं नैनीताल पुलिस ने भी बयान जारी कर के चेताया है कि अफवाह फैला कर माहौल ख़राब न किया जाए। महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की खबरों को लेकर नैनीताल पुलिस ने कहा कि ये भ्रामक हैं और इनके माध्यम से अनावश्यक रूप से समाज में संवेदनशीलता पैदा की जा रही है। इस पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है। नियमानुसार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरें न पोस्ट करें, न कमेंट करें। बता दें कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है

हल्द्वानी दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक दिल्ली से गिरफ्तार, उसने ही बनवाया था अवैध मदरसा-मस्जिद : दंगाइयों में सपा नेता का भाई और 2 पार्षद भी

मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार
उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

अब्दुल मलिक हिंसा के बाद से फरार हो गया था। 75 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिंसा में जिन महिलाओं को आगे किया गया था, उन्हें भी चिह्नित किया जा रहा है। 19 नामजद और 5000 अज्ञातों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपित जावेद सिद्दीकी का भाई अब्दुल मतीन सपा का उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी है। लाइन नंबर 16 का पार्षद महबूब आलम और लाइन नंबर 14 इंद्रानगर निवासी जीशान परवेज पार्षद हैं।

वहीं खनन कारोबारी अरशद अय्यूब लाइन नंबर 12 में रहता है। असलम चौधरी डेयरी संचालक है और लाइन नंबर 3 में उसका घर है। ये सब वो हैं जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पाँचों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। अब्दुल मलिक ने ही मलिक बगीचा पर अवैध कब्ज़ा कर के निर्माण करवाया था, जहाँ स्थित अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने प्रशासन आया तो हिंसा भड़की। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा विरोध अब्दुल मलिक ही कर रहा था।

फरार अब्दुल मलिक को पकड़ने के लिए पुलिस दबिश दे रही थी, जिसमें अब सफलता मिली है। उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, जमीन पर कब्ज़ा करने, लोगों को भड़काने और साजिश रचने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसने ही अवैध मदरसे और नमाज स्थल का निर्माण करवाया था। नगर निगम ने 8 महीने पहले भी मलिक का बगीचा नाम स्थान पर अवैध निर्माण तोड़े थे। यहाँ छोटे-छोटे प्लॉट बना कर बेच दिए गए, मकान खड़ा कर दिया गया।

28 दिसंबर, 2023 को सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह से किसी ने अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत की थी। फिर नगर आयुक्त तक बात पहुँची। नगर आयुक्त गणेश भट्ट के नेतृत्व में 28 दिसंबर को ही अतिक्रमण हटाया गया था। नमाज स्थल और मदरसा हटाने की तैयारी शुरू की गई, बात उच्च न्यायालय तक पहुँची। जब नगर निगम की टीम पहुँची तो हिंसा हो गई। अब्दुल मलिक की गिरफ़्तारी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 2 टीमें भेजी गई थीं।

उत्तर प्रदेश : जुमे से पहले ही बँट गया था पर्चा…मौलाना तौकीर रज़ा के भड़काने के बाद बरेली में हिंसा; दंगाई क्षेत्र में पुलिस को blind firing आर्डर देकर भेजा जाए, लाठी या अश्रु गैस के भरोसे नहीं

                      रेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर हिंसा (फोटो साभार: हिंदुस्तान/दैनिक जागरण)
बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।
देश में जब भी दंगे होते हैं दंगाई पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया जाता है, फिर पुलिस को सीधे blind firing आदेश देकर क्यों नहीं भेजा जाता? क्या दंगाई लाठी या अश्रु गैस से मानने वाले हैं, बल्कि उनको छुपने का मौका दिया जाता है। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र और केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को अति गंभीरता से लेना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर भी सख्ती जरुरी है। आखिर देश कब तक दंगों में जलता रहेगा? इसका अंत केवल blind firing है, लाठीचार्ज या अश्रु गैस नहीं। दूसरे दोषी पाए जाने वालो को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें मिलने वाली सारी सरकारी सुविधाएं कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद कर देनी चाहिए। क्योकि दंगाइयों ने अब बच्चों और औरतों को आगे कर अपना खेल खेलने की रणनीति बनाई हुई है, जब blind firing में बेगुनाहों की लाशें बिछाने वालों की भी लाशें बिछनी शुरू नहीं होंगी, तभी दंगों की रोकथाम संभव है। यह काम केवल तभी संभव हो पायेगा अगर केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दंगा मुक्त भारत चाहती हैं। दंगे में हमेशा से बेगुनाह-हिन्दू अथवा मुसलमान- ही मरता आया है, दंगाई या दंगे के लिए उकसाने वाला नहीं।   

दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।

बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।

हल्द्वानी दंगा: दलित कबाड़ी अजय के प्राइवेट पार्ट को चीर कर निकली गोली, फट गया पेशाब का थैला, आँत भी डैमेज, रीढ़ की हड्डी भी टूट गई

                        अजय के प्राइवेट पार्ट को चीर कर निकली गोली, माँ पूछ रही - मेरे बेटे का क्या दोष?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में हिंसा भड़की हुई है। सरकारी जमीन पर बने एक अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर लेकर आया, जिसके बाद मुस्लिम भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप को फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई महिला पुलिसकर्मी भी जख्मी हुई हैं। इसी क्रम में दंगाइयों ने कबाड़ का कारोबार करने वाले अजय नाम के शख्स को भी गोली मार दी। अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

दंगे में हमेशा बेकसूर सबसे ज्यादा मरने वालों में होते हैं। कौन किस धर्म/मजहब से है या जाति से दंगाई नहीं जानते? स्वतंत्र पत्रकारिता करते कई मुस्लिम नेताओं से कुछ प्रमुख प्रश्नों में एक प्रश्न प्रमुख होता था कि "हमेशा कहा जाता है बाहर से आये लोगों ने किया, उनको बुलाता कौन है? कहाँ से आते हैं? दूसरे, देश में इतने दंगे हो चुके हैं, क्या किसी नेता अथवा दंगा करवाने वालों के घर के किसी परिंदे को भी कुछ नहीं होता। मरने वाला बेकसूर होता है, वह चाहे हिन्दू है या मुस्लिम", बगले झांकते देखा। किसी के पास कोई जवाब नहीं होता था।  

अजय की माँ बिलखती हुई पूछ रही है कि उनके बेटे का क्या दोष था? रिश्ते में अजय के चाचा लगने वाले संतोष कुमार ने बताया कि अजय गफूरबस्ती में रहते थे। उन्होंने बताया कि गफूरबस्ती से लेकर इंदिरानगर तक का इलाका मुस्लिम बहुल है। बकौल संतोष, अजय अपनी माँ के लिए आयुर्वेदिक दवा लेने के लिए जा रहा था। उसकी माँ की तबीयत ख़राब रहती है। उसके साथ उसका एक दोस्त भी था। वहाँ दोनों जिम करने लगे। वहाँ से बाहर निकले तब तक बाहर माहौल ख़राब हो चुका था।

उन्होंने बताया कि गोली अजय के प्राइवेट पार्ट में लगी है और पीछे से चीर कर पार हो गई है। उन्होंने ये भी बताया कि तब पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी, दंगाइयों की गोली ही उसे लगी है। उन्होंने बताया कि अजय अभी होश में नहीं हैं। जिस वैद्य के पास वो दवा लेने गए थे वो मुस्लिम है और जिस जिम में उन्होंने व्यायाम किया वो भी मुस्लिम है। संतोष कुमार ने बताया कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को देर रात तक सर्जरी चली। रीढ़ की हड्डी भी टूट गई है।

संतोष कुमार भाजपा के नेता भी हैं। उन्होंने बताया कि वो दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सरकारी खर्च से अजय का इलाज चल रहा है। अजय नगर निगम की गाड़ी में कूड़े का कारोबार करते थे। 22-23 वर्ष उनकी उम्र थी। उनकी शादी को 2 साल हुए हैं, उनका एक बच्चा भी है। संतोष ने बताया कि इलाके में छोटी-छोटी झोपड़ियाँ हैं, फ़िलहाल पुलिस ने मामले को नियंत्रित कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है, थाना जला दिया गया है।

संतोष कुमार का कहना है कि गफूरबस्ती में हिन्दुओं की 200 झोपड़ियाँ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वाल्मीकि समाज का एक सोनकर नामक शख्स भी घायल हुआ था, इलाज के पास उसे घर भेज दिया गया है। इलाके के एक अन्य हिन्दू ने बताया कि फ़िलहाल वो लोग सुरक्षित हैं। अजय की माँ का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो कह रही हैं, “मेरे बेटे को दंगाइयों ने गोली मार दी। मेरे बेटे की कोई गलती नहीं थी। वो जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।”

अजय का इलाज साईं अस्पताल में चल रहा है। डॉ सिद्धार्थ पांडेय अजय का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजय के शरीर में गोली लग कर डैमेज कर के बाहर निकल गई। उनके शरीर में पेशाब का थैला फट गया था और किडनी से जो पाइप आता है वो भी फट गया था। खोल कर उसे रिपेयर किया गया है। उन्होंने बताया कि अंदर ब्लीडिंग भी बहुत ज़्यादा थी, जिसे रोकी गई है। आँतों के पास सूजन था, वहाँ इकट्ठे खून को भी निकाला गया। अजय की माँ ने बताया कि रात के अँधेरे में हंगामा हुआ कि किसी का बच्चा पड़ा हुआ है, वो दौड़ती गईं तो अपने बेटे को उठा कर ले आईं।

उत्तराखंड : बेशर्म कांग्रेस कह रही – कोर्ट के बजाय मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेते: हल्द्वानी में कट्टरपंथियों के साथ खड़ी पार्टी

                     हल्द्वानी दंगा और विधायक सुमित हृदयेश (साभार: अमर उजाला/X-SumitHridayesh)
जिस तरह कांग्रेस इस्लामिक कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक सेकुलरिज्म का ढोल पीट हिन्दुओं को पागल बना राज करती रही, वही काम भाजपा से उम्मीद कर रही है। दूसरे, देश में जितने दंगे कांग्रेस ने करवाए है, और हज़ारों मुसलमानों की जानें गयी, फिर भी मुसलमान कांग्रेस पर विश्वास करता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, वक़्फ़ बोर्ड, शाहबानो के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निरस्त करने, पाकिस्तानी/बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों को सरकारी सुविधाएं देकर आबाद करना और अतिक्रमण आदि से मुस्लिम हितैषी नहीं। अब कांग्रेस का इस्लामिक चेहरा हल्द्वानी दंगों में सामने आ गया है। समस्त हिन्दुओं और शांतिप्रिय मुसलमानों को कांग्रेस से सतर्क रहने की जरुरत है। देश में कानून का राज होगा, शरीयत का नहीं, जो अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेने को कांग्रेस बोल रही है। 

कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने इतना उपद्रव मचाया कि इसमें कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है। ये अभियान कई दिनों से चल रहा था, जिसके तहत सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए बनाए गए इमारतों को ध्वस्त किया जा रहा था। इन इमारतों में मकानों और धार्मिक स्थल भी थे।

प्रशासन गुरुवार (8 फरवरी 2024) को हल्द्वानी के बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँचा और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चला दिया। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में कई पुलिस वाले घायल भी हो गए हैं।

हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। उन्मादी भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अधिकारी हैं। हालात को देखकर हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर की गई प्रशासन द्वारा अवैध मस्जिदों और मदरसों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ के बाद कट्टरपंथियों की कार्रवाई का कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से समर्थन कर दिया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने जिस लहजे में इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उससे यही लगता है कि कोर्ट के आदेश बजाय प्रशासन को मौलवी एवं मौलानाओं से आदेश लेना चाहिए था और उनकी सहमति होती, तभी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अधिकारियों को उतावला बताते हुए कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, “ये प्रशासन और अधिकारियों की बहुत बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों, मौलानाओं को कॉन्फिडेंस में लेकर बात की जानी चाहिए थी। आप (प्रशासन) एकदम से वहाँ पहुँच जाते हैं और बिना इन्फॉरमेशन के वहाँ ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया। जो भी हुआ, अनुचित हुआ। आजादी के बाद से ऐसा हमने हल्द्वानी शहर में ऐसा कभी नहीं देखा। ये बड़ा काला दिन है।”

ये वही सुमित हृदयेश हैं, जो रेलवे की जमीन पर कब्जा करके बसे हजारों लोगों की बस्तियाँ को हटाने के खिलाफ खड़े हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ 20 इबादतगाह भी बनाए गए हैं। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया तो अवैध कब्जाधारियों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के सलमान खुर्शीद खड़े हो गए। वहीं, कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश भी खड़े हो गए।

लोगों का तो ये भी कहना है कि इन अवैध बस्तियों को बसाने में सुमित हृदयेश की माँ इंदिरा हृदयेश का भी बड़ा हाथ था। कहा जाता है कि वहाँ जब गफूर बस्ती के सीमांकन का काम होता था, तब भी यहाँ के लोग इसका विरोध करते थे और इंदिरा हृदयेश भी इसमें साथ रहती थीं। इंदिरा हृदयेश भी उत्तराखंड कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता रही हैं। इस पूरे मामले में एकमुश्त वोट पाने की नीति की बहुत बड़ी भूमिका है।

दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा में हाल में समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किया गया है, जिसको लेकर भी विपक्षी दलों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कहा था कि UCC से राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था।

इतना ही नहीं, मुस्लिम मौलानाओं ने भी सड़कों पर उतरने की धमकी दी थी। इसके बाद मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताने वाला शादाब चौहान मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी। शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धमकी देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा था।

अपने पोस्ट में शादाब ने लिखा था, “किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीय लोगों से बात करके हालात को जानने का प्रयास किया था। हमें स्थानीय लोगों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए वे आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। इनमें अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों की भी बड़ी संख्या है।

दरअसल, हल्द्वानी में जिस बनफूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था।

प्रशासन की कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी, तभी वहाँ कट्टरपंथियों की भारी भीड़ पहुँची। इनमें महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया और हमला बोल दिया गया।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए।”

डीएम वंदना सिंह ने कहा, “पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढाँचे को तोड़ने में लगी रही।”

उत्तराखंड : पुलिस वालों को जिंदा जला रहे थे कट्टरपंथी मुस्लिम दंगाई, पत्थरबाजों, पेट्रोल बम फेंकने वालों-नाबालिग, पुरुष या महिला-पर blind firing कानून कब?

हमले की आपबीती सुनाते पुलिसकर्मी (चित्र साभार: @MrSinha_ & @scribe9104/X)
उत्तराखंड के हल्द्वानी में हर तरफ तनाव फैला है। इंटरनेट बंद है। कर्फ्यू लागू है और देखते ही गोली मारने के आदेश डीएम की तरफ से दिए गए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि हल्द्वानी का बनभूलपुरा थाना इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुँची पुलिस-प्रशासन पर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला बोल दिया। इस हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाया गया। अभी तक मिल रही जानकारियों के मुताबिक, इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो करीब 300 लोग घायल हो चुके हैं, जिसमें अधिकाँश पुलिस कर्मी और अधिकारी हैं।

हल्द्वानी में नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। दंगाई मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर कर जलाने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों के हमले की करतूत कैमरे पर आकर बताई है। इसमें कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।

हल्द्वानी हिंसा में घायल एक महिला पुलिसकर्मी ने मीडिया को बताया, “वहाँ से हम बच कर आए। एक घर के अंदर घुस गए हम, जिसमें आग लगाने की उन्होंने कोशिश की। पथराव किया। हम मुश्किल से वहाँ से जान बचा कर आए। हमारी फ़ोर्स काफी देर बाद आई, तब हम निकल कर आए। हर गलियों से, हर जगह से भी पथराव हो रहा था। उन लोगों ने गलियाँ घेर ली थीं। हमलोग 15-20 लोग एक घर के भीतर दबे पड़े थे। जिन्होंने हमें शरण दी, उसको भी गालियाँ दी गईं। उसका घर तोड़ा गया, जब हम वापस आ रहे थे तब शीशे, बोतलें और ईंट फेंकी।”

सरकार को जितनी जल्दी हो पत्थरबाजों और पेट्रोल बम फेंकने पर अश्रु गैस की बजाए सीधे blind firing करने वालों, वह चाहे नाबालिग हो, महिला हो या पुरुष, पर कानून बनाना चाहिए, अन्यथा ऐसी अप्रिय घटनाएं बढ़ती जाएँगी और सुरक्षाकर्मी एवं अन्य बेकसूर अकाल मृत्यु का ग्रास बनते रहेंगे। इस उपद्रवियों की समस्त सरकारी सुविधाएं जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, BPL कार्ड आदि समाप्त कर देनी चाहिए। इन सबके बैंक खातों की जाँच होनी चाहिए, क्योकि बिना लालच के कोई अपनी जान जोखिम में नहीं डालेगा। 

बताया गया है कि इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। हल्द्वानी में अभी कर्फ्यू लगाया गया है।

हल्द्वानी में हुए इस हमले से बच कर आए एक अन्य पुलिसकर्मी ने बताया है कि इन दंगाइयों ने गलियों से आकर पथराव किया। पुलिसकर्मी ने बताया है कि उनके वापस आते वक्त उन पर गोलियाँ बरसाई गईं। मुस्लिम दंगाइयों ने कट्टों से उन पर गोलियाँ चलाई। उन्होंने नगर निगम का ट्रैक्टर, एक गश्ती वाहन और कई मोटरसाइकिल जला दी।

एक अन्य वीडियो में एक पुलिसकर्मी अपने घाव को दिखाते हुए बताता है कि कैसे वह दंगाइयों से बच कर आया। एक सिख पुलिसकर्मी भी इन दंगों में घायल हुआ है।

हमले के बाद घायल हुए पुलिसकर्मियों का वीडियो भी आया है। इसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं। पुलिसवालों का इलाज चल रहा है। वीडियो में दिखता है कि किसी पुलिसकर्मी के सर पर चोट लगी तो किसी के हाथ पर चोट आई है।

हल्द्वानी में इन्टरनेट सुविधाओं को भी बंद कर दिया गया है। हल्द्वानी में स्कूल कॉलेज भी बंद हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है। 

रोती महिला पुलिसकर्मी, धधकती आग, जलता थाना, टूटी गाड़ियाँ…अवैध अतिक्रमण हटाने पर उग्र हुई कट्टर इस्लामी भीड़; जिन नेताओं और अधिकारीयों के कार्यकाल में हुए अवैध निर्माण उन पर कार्यवाही कब?

उत्तराखंड हो या अन्य राज्य आखिर ये अवैध निर्माण अथवा अतिक्रमण कैसे और क्यों होते हैं? जब सरकार ने घर अथवा दुकान में मरम्मत, छत पलटवाने, प्लास्टर आदि करने की छूट दी हुई है, फिर भी पुलिस एवं नगर निगम भवन विभाग के लोग रूपए वसूलने पहुँच जाते हैं, नहीं देने पर मिस्त्री और मकान स्वामी को धमकाने लगते हैं, यह कटु सच्चाई है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। स्पष्ट है पुलिस और अधिकारियों की मिली भगत से अवैध निर्माण और अतिक्रमण होते हैं, उन पर कार्यवाही कब और क्यों नहीं होती। कुछ दिन पहले दिल्ली में आज़ाद पुर फ्लाईओवर पर कबर बना दी गयी, उसको हटाने की कार्यवाही होने पर जो कुछ हुआ रिकॉर्ड पर है। सरकार को इस बात को अच्छी तरह समझना होगा अवैध निर्माण हो या अतिक्रमण मुफ्त नहीं होता, जनता को रिश्वत देने पड़ती है। 

दूसरे, सरकार द्वारा पारिवारिक घरों को बिना नक़्शे में बदलाव किये, मरम्मत आदि करवाने की छूट देने के बावजूद पुलिस/भवन अधिकारी वसूली करने से नहीं चूकते। रूपए वसूलने के लिए कोई न कोई कमी बता वसूली की जाती है और जब स्वामी रिश्वत देता है, उसी आड़ में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होते है। जब तक सरकार जड़ को नहीं पकड़ेगी, तब तक ये धंधे चलते रहेंगे और उपद्रवी अपना काम कर बेगुनाह सुरक्षाकर्मी और अधिकारिओं को निशाना बनाते रहेंगे। कुछ वर्ष पूर्व घरेलू मरम्मतों पर कोई हस्तक्षेप नहीं करता था, लेकिन जब से वसूली का धंधा शुरू हुआ है तभी से अवैध निर्माण और अतिक्रमण शुरू हुए है। 

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बवाल हो गया है, जहाँ कट्टर इस्लामी भीड़ ने पुलिस पर धावा बोल दिया। थाना घेर लिया गया, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और जम कर पत्थरबाजी की गई। कारण – वहाँ स्थित एक अवैध मस्जिद व मदरसे पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था। मामला बनभूलपुरा क्षेत्र का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले पर बड़ी बैठक की है, दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है। हल्द्वानी सरकारी जमीन, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण के कारण भी चर्चा में आया था।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। ये अभियान कई दिनों से सरकारी जमीनों पर हो चुके अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहा था, जिसमें अवैध मकानों और अवैध धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है। इसी क्रम में गुरुवार (8 फरवरी 2024) को बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँची और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चलाया। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस वालों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिसवाले घायल भी हो गए। इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।

सीएम की मीटिंग के बाद लगा कर्फ्यू, देखते ही गोली मारने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के हालात पर चर्चा के लिए हाई लेवर मीटिंग बुलाई। बैठक में शासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी के साथ नैनीताल जिला प्रशासन ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया गया है।

अवैध मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर को घेर लिया थाना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामिक भीड़ ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाने को चारों ओर से घेर लिया और जमकर पथराव किया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल रही। कट्टरपंथियों की भीड़ ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। यही नहीं, ट्रांसफॉर्मर को आग के हवाले करके उन्होंने बिजली आपूर्ति भी रोक दी है। इस बवाल में पुलिस प्रशासन के साथ ही पत्रकार भी फंस गए। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी, तो गैस के गोले भी दागने पड़े। हल्द्वानी के हिंसाग्रस्त इलाके में कई थानों की पुलिस फोर्स पहुँची है।

जिस मदरसे और मस्जिद को लेकर कट्टर मुस्लिम भीड़ सड़क पर उतरी है, वो मलिका बगीचा में स्थित है। उत्तराखंड पुलिस प्रवक्ता और IG नीलेश भरने ने जानकारी दी है कि कई जिलों की पुलिस फ़ोर्स और पैरामिलिट्री को भी हल्द्वानी में लगाया गया है। साथ ही शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद हो रही थी।

पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारी घायल हुए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। सीएम धामी ने आश्वासन दिया है कि तोड़फोड़ व हिंसा करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा, उनमें से कई घायल होकर अस्पताल पहुँच गईं। मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के अलावा ख़ुफ़िया विभाग को भी मुख्यमंत्री ने तलब किया। अवैध मदरसा और नमाज स्थल को सील कर दिया गया था। 3 एकड़ जमीन प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ली थी।

नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि पत्थरबाजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। घायलों में SDM भी शामिल हैं। DCP अभिनव कुमार ने बताया कि अराजक तत्वों ने गोलीबारी भी की है। इलाके में 4000 से अधिक मकान अवैध अतिक्रमण कर के बनाए गए हैं। घायल पुलिसकर्मियों की संख्या 20 से अधिक बताई जा रही है। JCB का शीशा तोड़ डाला गया। ट्रैक्टर पलट दिया गया। टायर जला कर रास्ता बंद कर दिया गया। थाने में आग लगा दी गई।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने बताया अवैध मदरसे से एवं नमाज वाले जगह पूरी तरह अवैध है। जिसके पास एक तीन एकड़ जमीन पर नगर निगम ने कब्जा पूर्व में ले लिया था, लेकिन अवैध मदरसे एवं नमाज स्थल को सील कर दिया था और अब इसे ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और लोग घायल हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

कुमाऊँ मंडल के नैनीताल जनपद में स्थित हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा रहेगा।

हल्द्वानी : रेलवे की जमीन को कब्जाए, बांग्लादेशी-रोहिंग्या को बचाने उतरे इस्लामिक कट्टरपंथी : Video में कब्जाधारियों ने कबूला सच, बताया कांग्रेस नेता का कनेक्शन

        कब्जा कर रहने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या भी, प्रदर्शन करने वाला मौलवी भी बाहरी... कितनी गहरी साजिश?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने फ़िलहाल यहाँ बसे लोगों को सात दिन के अंदर हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है। अब अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी। महिलाओं-बच्चों को आगे करके यहाँ जो इमोशनल कार्ड खेला गया, जिस ‘मानवता’ के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड पर जाकर इससे जुड़ी स्थिति का जायजा लिया, लोगों से बात कर सच्चाई को सामने लाने का सफल प्रयास किया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट को गंभीरता से विचार कर विदेशियों को बसाने एवं समर्थन करने वाले नेताओं को दण्डित करने में संकोच नहीं करना चाहिए। क्योकि इस काम से उनकी सरकार एवं जन विरोधी गतिविधि सामने आई है। ये तो अपनी कुर्सी की खातिर 
अपने ही देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। क्या ऐसे नेताओं को नेता कहा जाना चाहिए?

प्रस्तुत है ऑपइंडिया रपट:-

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब हमने लोगों से पूछा कि आप लोगों ने कहीं और जमीन वगैरह खरीद रखी है। इस पर एक मुस्लिम नौजवान ने कहा कि जब खाने के लिए कुछ नहीं है तो जमीन कहाँ से खरीदेंगे। उसने कहा कि रोज कुआँ खोदना है, रोज पानी पीना है। उसने आगे बताया कि जो पैसे इकट्ठा किए, सब यहीं घर में लगा दिए। मतलब उसने कबूल लिया कि जमीन बिना खरीदे ही वो घर बना लिया।

वहीं जब हमने प्रदर्शन के दौरान मंच पर बैठे इमाम/मौलवी के बारे में पूछा तो वहाँ मौजूद महिला अख्तरी ने कहा, ”वह इमाम यहाँ के किसी मस्जिद से नहीं आए थे। वह बाहर के थे।” वहीं नौजवान ने कहा, ”यहाँ तो और कौमें भी है। क्या सबको लपेट दोगे।”

वहीं अख्तरी ने स्वीकार करते हुए कहा कि कई मुस्लिम महिलाएँ अपने छोटे-छोटे बच्चे को लेकर धरना स्थल गईं थीं। उस धरने में वह भी मौजूद थीं। अख्तरी का कहना था, “यहाँ रेलवे लाउडस्पीकर लगाकर हमें बस्ती खाली करने को कह रहा है।” उसने कहा कि अगर यह जमीन रेलवे की थी तो पहले क्यों नहीं उन लोगों को हटाया गया।

वहीं जब हमने रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बारे में पूछा तो उन्होंने इनकार नहीं किया। इसके जवाब में कहा, “यहाँ तो कई कौमें रहती हैं। किस-किस के बारे में आपको बताएँ। यहाँ बंगाली सब रहते हैं। यहाँ बंगाली-नेपाली सब मिलेंगे। वहीं धरने में बाहरी लोगों के भाग लेने के बारे में वहाँ मौजूद राशिद और अशरफ से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह खुद धरने में शामिल थे और मौलवी व उनके कुछ रिश्तेदार भी धरने में शामिल थे।”

वहीं यह पूछे जाने पर कि क्या अब तो सब कुछ शांत है यहाँ पर। इस पर उन्होंने कहा कि उन लोगों को पार्षद लईक कुरैशी ने शांत रहने और एक-दूसरे से बात नहीं करने को कहा है। आपको बता दें कि लईक कांग्रेस पार्षद हैं।

जब हम कुछ आगे बढ़े तो हमें एक बुजुर्ग मिले। हमने उनसे पूछा कि क्या यहाँ सही में बाहरी लोग आकर बसे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में अधिकतर लोग बाहर के हैं। लेकिन वे काफी पहले आए थे। एक बार फिर बाहर से आए मौलाना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह अभी यहीं हैं। इतने में वहाँ आया एक व्यक्ति असमंजस में दिखा और कहा नहीं मौलाना यहाँ नहीं हैं।

इससे पहले जब हम हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में पहुँचे तो वहाँ हमें विरोध-प्रदर्शन वाली भीड़ गायब दिखी। घूमते-घूमते एक आदमी दिखा, जो 8-10 लोगों को कुछ समझा रहा था। यह शख्स लोगों से आरफा (खानम शेरवानी) का नाम लेकर कुछ कह रहा था। आरफा के मजहब से इस भीड़ (जमा हुए लोग में कुछ दाढ़ी रखे हुए, कुछ इस्लामी टोपी लगाए हुए थे) के मजहब को जोड़ रहा था। ‘आरफा कितना अच्छा बोलती हैं’ – यह कह कर लोगों से बोलने की अपील भी कर रहा था। खुद को पत्रकार बताने वाले इस शख्स ने यह भी कहा कि वो TheWire पर भी इस खबर को चलवाएगा।

एक अन्य रिपोर्ट में हम यह बता चुके हैं कि कैसे हल्द्वानी के धरना-प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल किया गया। मदरसे के हाफिज से लेकर वहाँ के एक लोकल नेता तक की पोल इन बच्चों ने ही खोली।

अवलोकन करें:-

हल्द्वानी : धरना-प्रदर्शन में बच्चों के इस्तेमाल की बच्चों ने ही खोली पोल : मदरसे के हाफिज से लेक

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
हल्द्वानी : धरना-प्रदर्शन में बच्चों के इस्तेमाल की बच्चों ने ही खोली पोल : मदरसे के हाफिज से लेक

उत्तराखंड : उच्च न्यायालय द्वारा रेलवे लाइनों पर अतिक्रमण हटाने का आदेश आने पर शाहीन बाग़ जैसे उपद्रव की साजिश: विवादित जुबैर दे रहा हवा

                                      अवैध प्रदर्शनकारी कब्जेदारों को कांग्रेस का भी समर्थन
उत्तराखंड के हल्द्वानी में 31 दिसंबर, 2022 को सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रेलवे की जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के आदेश के खिलाफ हो रहा था। अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर खुद को बेघर करने का आरोप लगाया। हाथों में ली गई तख्तियों में उन्होंने पहले खुद को बसाने की लाइनें लिखी थीं।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों के मुताबिक, शाहीन बाग़ वाले अंदाज में हो रहे इस प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया गया था। ऑल्ट न्यूज़ के कथित फैक्ट चेकर विवादित मोहम्मद जुबैर द्वारा प्रदर्शनकारियों के समर्थन में शेयर किए गए एक वीडियो से पता चलता है कि लगभग 4500 परिवारों ने रेलवे की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर रखा है, जो अब बेघर होने की दुहाई दे रहे हैं। यहाँ ध्यान रखने योग्य है कि विवादित मोहम्मद जुबैर द्वारा शेयर हुए नूपुर शर्मा के एडिटेड वीडियो से देश के अलग-अलग हिस्सों में तनाव का माहौल बन गया था। सरकार को जुबेर के विरुद्ध भी कार्यवाही करनी चाहिए। 

वायरल करवाए जा रहे वीडियो के साथ ट्विटर पर #StandWithPeopleOfHaldwani व #SpeakUpForPeopleOfHaldwani नाम से हैशटैग भी चलाए जा रहे हैं। ज्यादातर वीडियो में लड़कियों को पढ़ाई से वंचित किए जाने व महिलाओं को बेघर होने की दुहाई देते सुना जा सकता है।

पूरा मामला

दरअसल, 27 दिसम्बर, 2022 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए न्यायालय ने प्रशासन को सप्ताह भर की समय सीमा दी थी। इसी आदेश में कोर्ट ने प्रशासन से वनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लाइसेंसी हथियार भी जमा करवाने को कहा था। दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को ले कर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने के आदेश दे चुका है। रेलवे लाइनों पर अतिक्रमण सिर्फ उत्तराखंड नहीं, सभी जगह है। सरकार को इन अतिक्रमण को हटाने के साथ-साथ उन सभी नेताओं और अधिकारियों पर भी सख्त कार्यवाही की जरुरत है, जिन्होंने हर प्रकार की सरकारी सुविधा देकर धन का दुरूपयोग कर कानून का मजाक उड़ाया है। इन लोगों को मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधायें तुरंत वापस लेकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई का आगाज करना चाहिए।   

1975 से हो रहा कब्ज़ा

एक दावे के मुताबिक, हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्ज़े की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। पहले कच्ची झुग्गियाँ बनाई गईं, जो बाद में पक्के निर्माण में तब्दील हो गए। बाद में इसी अवैध कब्ज़े में न सिर्फ इबादतगाहें बल्कि अस्पताल तक बना डाले गए। आरोप है कि यह सब देखने के बाद भी तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल खामोश रहा। साल 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पहला केस दर्ज करवाया, लेकिन तब तक लगभग 50 हजार लोग अवैध तौर पर वहाँ रहना शुरू कर चुके थे।
नैनीताल हाईकोर्ट के साल 2016 में आए आदेश के चलते कब्जेदारों ने लम्बी मुकदमे बाजी की। हालाँकि, वो अपने कब्ज़े का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश कर पाए। बताया जा रहा है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ डेढ़ दशक पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। तब भारी फ़ोर्स के साथ सिर्फ कुछ हिस्सों को खाली करवा पाया गया था। इस दौरान कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें तक निकली थीं। कुछ समय की शांति के बाद खाली करवाए गए स्थान पर फिर से अवैध कब्ज़ा हो गया।

कांग्रेस नेताओं पर अतिक्रमणकारियों के संरक्षण का आरोप

सोशल मीडिया पर सक्रिय अभिषेक सेमवाल ने कांग्रेस पार्टी पर अवैध कब्ज़ा करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। अभिषेक के मुताबिक, इसकी शुरुआत दिवंगत कांग्रेस नेत्री इंदिरा हृदयेश ने की थी जिस राह पर अब उनके बेटे सुमित हृदयेश भी हैं। यहाँ ये जानना जरूरी है कि कांग्रेस पार्टी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ और कब्जेदारों के समर्थन में कैंडल मार्च निकाला है।

कोरोना काल में पुलिस पर किया था हमला

‘सुदर्शन न्यूज़’ ने 15 अप्रैल, 2022 को एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में एक भीड़ को सड़क पर हंगामा करते देखा जा सकता है। ‘सुदर्शन न्यूज़’ ने दावा किया था कि यह भीड़ लॉकडाउन 2 समय की है। तब हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में मुस्लिम भीड़ ने सड़कों पर उतर कर न सिर्फ डाक्टरों को बंधक बना लिया था, बल्कि उन्हें बचाने आई पुलिस से भी झड़प की थी।
अपनी कार्रवाई के पीछे रेलवे ने तर्क दिया है कि अवैध कब्ज़े से न सिर्फ विकास में दिक्कत आ रही बल्कि विस्तार भी प्रभावित हो रहा है। रेलवे का यह भी कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वालों को कई नोटिस भेजी गई थी, लेकिन उस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही किसी ने खुद से अतिक्रमण हटाया।