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उत्तर प्रदेश : जुमे से पहले ही बँट गया था पर्चा…मौलाना तौकीर रज़ा के भड़काने के बाद बरेली में हिंसा; दंगाई क्षेत्र में पुलिस को blind firing आर्डर देकर भेजा जाए, लाठी या अश्रु गैस के भरोसे नहीं

                      रेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर हिंसा (फोटो साभार: हिंदुस्तान/दैनिक जागरण)
बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।
देश में जब भी दंगे होते हैं दंगाई पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया जाता है, फिर पुलिस को सीधे blind firing आदेश देकर क्यों नहीं भेजा जाता? क्या दंगाई लाठी या अश्रु गैस से मानने वाले हैं, बल्कि उनको छुपने का मौका दिया जाता है। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र और केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को अति गंभीरता से लेना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर भी सख्ती जरुरी है। आखिर देश कब तक दंगों में जलता रहेगा? इसका अंत केवल blind firing है, लाठीचार्ज या अश्रु गैस नहीं। दूसरे दोषी पाए जाने वालो को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें मिलने वाली सारी सरकारी सुविधाएं कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद कर देनी चाहिए। क्योकि दंगाइयों ने अब बच्चों और औरतों को आगे कर अपना खेल खेलने की रणनीति बनाई हुई है, जब blind firing में बेगुनाहों की लाशें बिछाने वालों की भी लाशें बिछनी शुरू नहीं होंगी, तभी दंगों की रोकथाम संभव है। यह काम केवल तभी संभव हो पायेगा अगर केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दंगा मुक्त भारत चाहती हैं। दंगे में हमेशा से बेगुनाह-हिन्दू अथवा मुसलमान- ही मरता आया है, दंगाई या दंगे के लिए उकसाने वाला नहीं।   

दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।

बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।