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‘बरेली में 320 करोड़ रूपए का वक्फ घोटाला’: मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रशासन को 100 पन्नों के दस्तावेज सौंपे, निष्पक्ष जाँच की माँग की

                          मौलाना शहाबुद्दीन ने दिया सबूत, जाँच की उठाई माँग (फोटो साभार: News 18)
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ संपत्तियों में बड़ा घोटाला होने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिला प्रशासन को इस घोटाले से जुड़े कई पक्के सबूत सौंपे हैं। मौलाना शहाबुद्दीन का दावा है कि बरेली में करीब 320 करोड़ रुपए की वक्फ संपत्ति में गड़बड़ी की गई है।

मौलाना शहाबुद्दीन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके। मौलाना शहाबुद्दीन 31 जुलाई को सीधे कलेक्ट्रेट पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपर जिलाधिकारी यानी ADN (प्रशासन) से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रशासन को लगभग 100 पन्नों के दस्तावेज दिए हैं। इन कागजों में जमीनों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, राजस्व विभाग की जानकारियाँ और घोटाले के ठोस प्रमाण शामिल हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले मुख्यमंत्री को भी भेजी थी। मुख्यमंत्री तक बात पहुँचने के बाद प्रशासन ने उनसे इस मामले के सबूत माँगे थे।

अब मौलाना शहाबुद्दीन ने सभी संबंधित दस्तावेज और सबूत अधिकारियों के सामने रख दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इन सबूतों के आधार पर जल्द ही सख्त और निष्पक्ष जाँच शुरू करेगा।

दो स्थानों की जमीनों को बनाया जाँच का आधार, निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई की माँग

मौलाना ने दावा किया कि बरेली जिले की बहेड़ी तहसील के जाम सामंत क्षेत्र में करीब 1400 बीघा वक्फ भूमि से जुड़ी गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। उनके अनुसार, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत लगभग 220 करोड़ रुपए है। इसके अलावा सदर तहसील के चंद्रपुर बिचपुरी क्षेत्र की वक्फ भूमि का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपए है।

उनका आरोप है कि इन संपत्तियों के लेनदेन में नियमों की अनदेखी की गई और वक्फ की जमीन को नुकसान पहुँचाया गया। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां समाज और जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए होती हैं, इसलिए यदि उनमें किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जाँच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही कहा कि उनके द्वारा सौंपे गए दस्तावेज जाँच एजेंसियों को मामले की सच्चाई तक पहुँचने में मदद करेंगे।

उनका आरोप है कि इन संपत्तियों के लेनदेन में नियमों की अनदेखी की गई और वक्फ की जमीन को नुकसान पहुँचाया गया। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां समाज और जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए होती हैं, इसलिए यदि उनमें किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जाँच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही कहा कि उनके द्वारा सौंपे गए दस्तावेज जाँच एजेंसियों को मामले की सच्चाई तक पहुँचने में मदद करेंगे।

इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा था, कि वक्फ की जमीनों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियाँ समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान हुईं और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा था।

बेटा UP पुलिस में SI, बाप लोगों को बनाता है ईसाई: मीडिया रिपोर्ट, शिकायत के बाद प्रेमपाल गिरफ्तार, बरेली SP ने क्या बताया, मजहबी किताबें हुई बरामद

उत्तर प्रदेश के बरेली में ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। पुलिस ने ईसाई मिशनरी के एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 09 जुलाई 2026 को गाँव में एक प्रार्थना सभा के दौरान लोगों को ईसाई बनने के लिए लालच दिया जा रहा था। इसी शिकायत के आधार पर थाना मीरगंज में मुकदमा दर्ज किया गया और अगले ही दिन आरोपित प्रेमपाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित प्रेमपाल शीशगढ़ थाना क्षेत्र के भुडासी गाँव का रहने वाला है। उसके पास से बाइबल समेत 6 ईसाइयत की किताबें, एक हाथ से लिखी नोटबुक और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। यह भी सामने आया कि प्रेमपाल यादव वर्षों पहले खुद धर्मांतरण कर चुका है और अब हिंदुओं को धर्मांतरण करवाने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

सैजना गाँव में प्रार्थना सभा से FIR तक, जानिए कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र के सैजना गाँव में धर्मांतरण का मामला 09 जुलाई 2026 को सामने आया। थाना मीरगंज में दर्ज FIR के मुताबिक, गाँव के रहने वाले अंकित पुत्र खूबकरन ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि शीशगढ़ थाना क्षेत्र के भुडासी गाँव निवासी 51 वर्षीय प्रेमपाल ने गाँव में गजेंद्र पुत्र छेदालाल के घर पर एक प्रार्थना सभा आयोजित की थी।

शिकायत में कहा गया कि इस प्रार्थना सभा के दौरान हिंदुओं को ईसाई बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। बताया गया कि वहाँ मौजूद लोगों को ईसाइयत से जुड़ी प्रचार सामग्री दी गई, नौकरी और पैसों का लालच दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सभा के दौरान हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की गईं।

इसी शिकायत के आधार पर थाना मीरगंज पुलिस ने प्रेमपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 62 और 299 के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध संपरिवर्तन अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी।

भागने की फिराक में प्रेमपाल को पुलिस ने धरा, ईसाइयत की किताबें बरामद

प्रेमपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना मीरगंज पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपित प्रेमपाल इलाके से निकलने की फिराक में है। इसके बाद पुलिस टीम ने नगरिया सादात फाटक के सामने अंडरपास के नीचे घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित की पहचान प्रेमपाल पुत्र पातीराम, निवासी ग्राम भुडासी, थाना शीशगढ़, जनपद बरेली के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास से एक बाइबल, ‘शास्त्र भजनसंहिता और नीतिवचन’, ‘नया नियम’, ‘मुक्तिदाता कौन’, ‘बेदारी के गीत’ नाम से 6 ईसाइयत की किताबें, एक हस्तलिखित नोटबुक और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। पुलिस ने इन सभी सामानों को कब्जे में लेकर उन्हें जाँच का हिस्सा बनाया है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी की कार्रवाई उपनिरीक्षक नितिन शिरीष, उपनिरीक्षक राजवीर सिंह, हेड कांस्टेबल मोहम्मद उमर और कॉन्स्टेबल अमित कुमार की टीम ने की। पुलिस का कहना है कि आरोपित के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पुलिस हिरासत में माफी माँगने लगा आरोपित प्रेमपाल

मामले में पुलिस की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित प्रेमपाल ने खुद को ईसाई धर्म का प्रचारक बताया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि 09 जुलाई 2026 को सैजना गाँव में गजेंद्र पुत्र छेदालाल के घर पर ईसाइयत के प्रचार और धर्म परिवर्तन के संबंध में एक सभा आयोजित की गई थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने पूछताछ में बताया कि उस सभा में अमित, रोहित, धर्मेंद्र और तीरथराम समेत कई लोग मौजूद थे। उसका यह भी कहना था कि काफी प्रयास करने के बावजूद वहाँ मौजूद ये लोग ईसाई नहीं बने। पुलिस को आरोपित ने यह भी बताया कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वहाँ से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपित ने अपने किए पर पछतावा जताते हुए कहा कि उससे गलती हो गई।

ईसाई धर्मांतरण करवाने वाले प्रेमपाल का बेटा सब-इंस्पेक्टर: रिपोर्ट्स

धर्मांतरण का मामले सामने आने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कई दावे भी किए गए हैं, जिनका उल्लेख पुलिस की FIR या आधिकारिक प्रेस नोट में नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार प्रेमपाल वर्षों पहले ईसाई में परिवर्तित हुआ था। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि उसका बेटा उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि प्रेमपाल लंबे समय से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ा हुआ था और गाँवों में प्रार्थना सभाएँ आयोजित करता था। कुछ रिपोर्ट्स में इसे धर्म परिवर्तन के नेटवर्क पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई बताया गया है। हालाँकि, पुलिस ने इसको लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल पुलिस केवल आरोपों और जाँच के आधार पर आगे बढ़ रही है।

‘सर तन से जुदा’ का नारा भारत की संप्रभुता-अखंडता को खुली चुनौती: इलाहाबाद हाई कोर्ट


बरेली हिंसा मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा’ नारे को भारत की संप्रभुता, अखंडता और भारतीय न्याय व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा नारा न केवल कानून के शासन को चुनौती देता है, बल्कि लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत एक संवैधानिक देश है जहाँ सजा का निर्धारण कानून करता है, न कि कोई भीड़। इसी आधार पर कोर्ट ने बरेली हिंसा का आरोपि रिहान की जमानत याचिका खारिज कर दी।

कानून और देश के खिलाफ नारा

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा’ जैसा नारा, चाहे कोई अकेला व्यक्ति लगाए या कोई भीड़, यह सीधे तौर पर कानून की ताकत को चुनौती देता है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसे नारे लोगों को हिंसा और हथियार उठाने के लिए उकसाते हैं, जिससे देश की एकता और सुरक्षा को खतरा होता है।

कोर्ट ने बताया कि इसी कारण ऐसा नारा लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध है। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी नारा जो कानून की प्रक्रिया के बाहर मौत की सजा की वकालत करता है, वह सीधे तौर पर भारतीय कानूनी व्यवस्था के अधिकार को चुनौती देता है।

नारों का धार्मिक और आपराधिक अंतर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ शब्दों में समझाया कि अलग-अलग धर्मों में बोले जाने वाले नारों का उद्देश्य क्या होता है और कब वे गलत माने जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर ये नारे ईश्वर या गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए होते हैं।

कोर्ट के अनुसार, इस्लाम में ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, सिख धर्म में ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ और हिंदू धर्म में ‘जय श्रीराम’ या ‘हर-हर महादेव’ जैसे नारे श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक हैं। इन्हें खुशी, आस्था और धार्मिक भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बोला जाता है, इसलिए अपने आप में ये किसी भी तरह से अपराध नहीं हैं।

हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन्हीं नारों का इस्तेमाल किसी दूसरे धर्म के लोगों को डराने, धमकाने या हिंसा भड़काने के मकसद से किया जाए, तो वह अपराध की श्रेणी में आ जाता है। कोर्ट ने कहा कि नारे तभी तक स्वीकार्य हैं, जब तक उनका उपयोग गलत इरादे और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के लिए न किया जाए।

कुरान में नहीं है ‘सर तन से जुदा’ का जिक्र

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कहा कि ‘सर तन से जुदा’ जैसा नारा कुरान या इस्लाम के किसी भी प्रामाणिक मजहबी ग्रंथ में कहीं नहीं मिलता। अदालत के अनुसार, इस नारे को इस्लाम से जोड़ना गलत है, क्योंकि इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है।

                                                  कुरान में नहीं है ‘सर तन से जुदा’ का जिक्र- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने अपने जीवन में अपमान और तकलीफ सहने के बावजूद हमेशा दया, करुणा और क्षमा का रास्ता चुना। उन्होंने कभी भी किसी के खिलाफ हिंसा करने या सिर कलम करने की बात नहीं कही।

कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पैगंबर के नाम पर हत्या या हिंसा की बात करना उनके आदर्शों के खिलाफ है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसी सोच पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का पालन नहीं, बल्कि उनका अपमान है।

‘सर तन से जुदा’ नारे की जड़ें कहाँ से जुड़ी हैं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में इस नारे की पृष्ठभूमि पर भी विस्तार से बात की। कोर्ट ने बताया कि अविभाजित भारत में ईशनिंदा से जुड़ा कानून वर्ष 1927 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था, ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मामलों को रोका जा सके।

कोर्ट ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान ने इसी कानून में बदलाव किए और उसमें ईशनिंदा के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान जोड़ दिया। कोर्ट के अनुसार, ‘सर तन से जुदा’ का नारा वहीं से पैदा हुआ और धीरे-धीरे पाकिस्तान से भारत समेत अन्य देशों में फैल गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ असामाजिक तत्व इस नारे का इस्तेमाल धार्मिक भावना के नाम पर राज्य की सत्ता को चुनौती देने और दूसरे समुदायों में डर का माहौल बनाने के लिए कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत और कानून के खिलाफ है।

बरेली हिंसा और जमानत याचिका खारिज

यह पूरा मामला सितंबर में बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है, जहाँ इत्तेफाक मिन्नत काउंसिल (INC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर भीड़ जमा हुई थी। आरोप है कि इस दौरान ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए, पुलिस पर हमला हुआ और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।

आरोपित रिहान ने जमानत माँगते हुए खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन कोर्ट ने केस डायरी के सबूतों को देखते हुए कहा कि आरोपित रिहान उस अवैध भीड़ का हिस्सा था जिसने न केवल आपत्तिजनक नारे लगाए बल्कि सार्वजनिक शांति को भी भंग किया। साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता और याचिका खारिज कर दी।

बरेली में ‘डेंटिंग-पेंटिंग’ होते ही दर्द से छटपटाने लगी ‘डिजिटल पत्थरबाज’ आरफा खानम-राणा अय्यूब; अब भूल जाओ दंगाइयों के सामने सजदा वाला दौर…

                                      योगी आदित्यनाथ, राणा अय्यूब और आरफा खानम शेरवानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़वी दवाई से कट्टरपंथी बिलबिला रहे हैं। बरेली की हिंसा पर जो बिल में जाकर बैठ गए थे, वे सीएम योगी के आक्रामक बयानों के बाद जुबानी हमलों पर उतर आए हैं। उन्हें कट्टरपंथियों और दंगाइयों के लिए भी ऐसी भाषा की अपेक्षा है कि जिसमें फूल बरसते हों।

आरफा खानम शेरवानी और राणा अय्यूब जैसी कथित पत्रकार जो पत्रकारिता की आड़ में इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाती हैं, वो सीएम योगी के डेंटिंग-पेंटिग वाले तीखे बयानों से खफा है। हालाँकि, यह पूरी जमात बरेली में इस्लामिक कट्टरपंथियों के बवाल पर खामोश बैठी थी।

बरेली में ‘I Love Muhammad’ को लेकर इस्लामी भीड़ ने खूब बवाल किया। इस भीड़ को मौलाना तौकीर रजा उकसा रहा था। वो चाहता था कि बवाल मचे चाहे इसके लिए पुलिसकर्मियों की हत्या ही क्यों ना करनी पड़े। पेट्रोल बम, बंदूक, पत्थर, डंडों से लैस इस भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। खूब पत्थर चलाए, फायरिंग की और फिर… फिर पुलिस ने इस कट्टरपंथियों की ठीक से खबर ली।

पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस हमले के मुख्य साजिशकर्ता तौकीर रजा को गिरफ्तार कर लिया, उसके अलावा भी दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 2000 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने उपद्रवियों को साफ संदेश दिया की उत्तर प्रदेश में यह दंगा-फसाद नहीं चलेगा। सीएम योगी ने रजा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “बरेली में एक मौलाना भूल गया कि राज्य में सत्ता किसकी है। हमने जो सबक सिखाया है, उससे आने वाली पीढ़ियाँ दंगे करने से पहले दो बार सोचेंगी।”

योगी दंगाइयों को चेताने में यही नहीं रुके, उन्होंने कहा, “जब भी कोई हिंदू पर्व और त्यौहार आता है, उनको गर्मी आने लगती है और उनकी गर्मी को शांत करने के लिए हमें डेंटिंग-पेंटिंग का सहारा लेना पड़ता है।” साथ ही, उन्होंने भारत में गजवा-ए-हिंद का ख्वाब देखने वालों का जहन्नुम का टिकट काटने की बात भी कहीं।

 अब यही खरी-खरी बात कुछ कट्टरपंथियो को नागवार गुजरी, तो वो राशन-पानी लेकर ज्ञान देने चले आए। राणा अय्यूब ने X पर सीएम योगी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये भारत के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया है।” अय्यूब ने लिखा, “मुसलमानों के खिलाफ नफरत के इस खुले मौसम में न्यायपालिका, संस्थाओं, मीडिया और हमारे बुद्धिजीवियों की खामोशी ही इसे सामान्य बना रही है।”

अब, एक और कट्टरपंथियो को देखिए, आरफा खानम शेरवानी भी योगी की तल्ख बयानी से बिलबिला गई हैं। आरफा ने लिखा, “आदित्यनाथ को मुसलमानों के खिलाफ खुलेआम ‘नाजी’ भाषा का प्रयोग करते हुए सुनकर, यह सवाल उठता है, क्या भारत का संविधान अब भी उत्तर प्रदेश में लागू होता है?”

एक कट्टरपंथी है मारिया खान, उसकी बौखलाहट इन दोनों से भी ज्यादा है। वो X पर लिखती है, “मुसलमानों को ऐसे ‘डेंटिंग-पेंटिंग’ करने की बात करता है जैसे वे इंसान न होकर कोई कबाड़ हों। सत्ता ने उसे बेशर्म बना दिया है और खामोशी ने खतरनाक।”

ये सारे डिजिटल पत्थरबाज, बरेली की हिंसा पर तौकीर रजा और उस कट्टरपंथी भीड़ की हिंसा पर खामोश बैठे तमाशा देख रहे थे। इन्हें अब लगता है कि दंगाइयों का इलाज डंडा ना हो, ये चाहते हैं कि कोई दंगाइयों के सामने जाकर सजदा करे और वो ‘बेचारे’ सुधर जाएँ।

इन दंगाइयों और उनके प्रेमियों को उन तुष्टिकरण करने वाली सरकारों की आदत लग गई है जो इनके बवाल के बाद भी वोट के लिए इन दंगाइयों को छूने की हिम्मत नहीं करते थे। इसी उत्तर प्रदेश में दंगे के आरोपियों को लेने के लिए पिछली सपा सरकार में विशेष विमान भेजा जाता था। अब इन दंगाइयों पर कार्रवाई हो रही है तो ये बिलबिला उठे हैं।

अब दंगाइयों को मिठाइयाँ खिलाकर या फूल माला पहनाकर या कोई दोहे सुनाकर तो नहीं सुधारा जा सकता है। दंगाइयों का इलाज तो डंडा ही होना चाहिए और ऐसे दंगाई जो देश और उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान और बांग्लादेश हालात बनाना चाहते हैं, उन पर किसी भी तरह का रहम क्यों ही किया जाए?

योगी राज में पुलिस पर पथराव का जवाब सजदा से देने की परंपरा खत्म हो गई है। ऐसे दंगाइयों से समाज की सुरक्षा फूलों की थाल से नहीं बल्कि कानून के डंडे से ही होती है। अगर इन पत्थरबाजों और उनके हिमयातियों को इस साफ-साफ लेकिन कठोर भाषा से दिक्कत है तो बेहतर है कि दंगाई और पत्थरबाज कानून को हाथ में लेने के बजाय जो समाज की अपेक्षा है वैसा काम करें।

उत्तर प्रदेश : मुस्लिम बनो, 3 बीवी पाओ… बरेली में अब्दुल मजीद का जो मदरसा था ‘धर्मांतरण का मरकज’, वह भी निकला अवैध: व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील तस्वीर-वीडियो पोस्ट कर फँसाते थे

मदरसे का संचालक अब्दुल मजीद (बाएँ), मदरसे से होने वाले हिंदुओं का धर्मांतरण (दाएँ), (साभार : Dainik Bhaskar)
बरेली में धर्मांतरण के बड़े गिरोह का खुलासा होने के बाद अब रोज़ नई परतें खुल रही हैं। ताजा जानकारी ये है कि गिरोह जिस मदरसे से हिंदुओं का धर्मांतरण करता था, वो मदरसा अवैध निकला है। इस मदरसे पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही के भी आदेश दिए जा चुके हैं।

धर्मांतरण गिरोह ने हिंदू युवकों को फँसाने के लिए 20+ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जाते थे। इसके बाद लड़कों को शादी, जन्नत और ‘तीन बीवियाँ’ मिलने का लालच दिया जाता था। जो युवक दिलचस्पी दिखाते थे, उन्हें मदरसे में बुलाकर ब्रेनवॉश किया जाता था। अब तक कई युवक इस जाल में फँस चुके हैं।

किस तरह चलता था व्हाट्सएप वाला जाल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह ने अलग-अलग नामों से कई व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। शुरू में इनमें सामान्य बातें होती थीं। फिर धीरे-धीरे ग्रुप में अश्लील वीडियो और लड़कियों की फोटो डाली जाती थीं। हिंदू लड़कों को शादी का झाँसा दिया जाता था। कहा जाता, ‘अगर मुस्लिम बन जाओगे तो तीन-चार बीवियाँ भी मिलेंगी और जन्नत भी।’ जो लड़के इस लालच में आ जाते, उन्हें मदरसे में बुलाकर लड़कियों और मौलानाओं के जरिए मानसिक रूप से तोड़ा जाता था।

मदरसे के अंदर युवकों को बताया जाता कि इस्लाम अपनाने से सारी परेशानियाँ खत्म हो जाएँगी। उन्हें कहा जाता कि मुस्लिम बनने पर नौकरी, घर, पैसा और खूबसूरत बीवी जैसी चीजें आसानी से मिलेंगी। कुछ युवकों को उर्दू सिखाई जाती थी। कुरान और हदीस पढ़ने को दी जाती थी। जब कोई युवक थोड़ा बहुत मजहबी जानकारी सीख जाता, तो उसे मौलवी बनने का सपना दिखाया जाता।

फैजनगर का मदरसा बना था धर्मांतरण की फैक्ट्री

बरेली से 30 किलोमीटर दूर फैजनगर का यह मदरसा 2014 में शुरू हुआ था। लेकिन असलियत में यह कोई शिक्षा देने वाली जगह नहीं थी। यह एक धर्मांतरण की फैक्ट्री बन चुका था, जहाँ युवकों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।

इस मदरसे का कोई सरकारी रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। यानी यह अवैध रूप से चलाया जा रहा था। यहाँ से बरामद हुआ अब्दुल मजीद का पैन कार्ड भी फर्जी निकला है।

कैसे टारगेट किए जाते थे युवक

गिरोह का टारगेट वे युवक होते थे जो अकेले रहते थे, आर्थिक रूप से कमजोर थे या फिर तलाकशुदा थे। गाँव-शहरों में ऐसे युवकों पर निगरानी रखी जाती थी। फिर धीरे-धीरे उन्हें जाल में फँसाया जाता था। गिरोह का संचालन अब्दुल मजीद करता था। सलमान, आरिफ और फहीम जैसे लोग उसका साथ देते थे।

पुलिस ने कुछ दिन पहले प्रोफेसर प्रभात उपाध्याय को एक मदरसे से बंधक बना कर छुड़ाया। वो नेत्रहीन हैं और उनका जबरन धर्मांतरण करवाया जा रहा था। प्रभात का नाम बदलकर ‘हामिद’ रख दिया गया था और उनका खतना किया जा रहा था। इसी कार्रवाई के दौरान चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अब्दुल मजीद भी शामिल था।

पुलिस को आरोपितों के पास से ज़ाकिर नाइक की किताबें और 21 से ज़्यादा बैंक खातों का पता चला है, जिनमें ₹13 लाख से ज़्यादा का लेनदेन हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं, बल्कि देश के 13 राज्यों तक फैला है और इसमें 200 से ज़्यादा मौलाना भी शामिल हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश : मोहम्मद साजिद ने फेसबुक पर लहराया पाकिस्तान का झंडा, बरेली पुलिस के डंडे पड़ते ही बदले सुर : चिल्लाते हुए बोला – ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’, देखिए Video; पाकिस्तान और आतंकवादियों की सबसे ताकत भारत में बैठे उनके समर्थक हैं


पाकिस्तान और आतंकवादियों की सबसे ताकत भारत में बैठे उनके समर्थक हैं। 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान महान गायक मोहम्मद रफ़ी का चर्चित "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभलकर रहना देश में छिपे गद्दारों से . .."  गीत आज 60 वर्षों बाद भी सही साबित हो रहा है। यह देश का दुर्भाग्य है कि ताशकंत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जीवित नहीं आये। अगर जीवित आ गए होते पता नहीं कितने एक से बढ़कर एक धुरन्दर जेलों में सड़ रहे होते। जिनको कांग्रेस मुस्लिम चेहरा बनाकर अपना वोटबैंक को भुनाती रही। स्वतंत्र पत्रकारिता करते इस विषय पर विस्तार से लिखा था और उस लेख को अपनी पुस्तक में भी शामिल किया था। शायद यही कारण की शास्त्री जी मृत्यु की जाँच नहीं करवाई गयी थी, जो आज तक रहस्यमयी बनी हुई है।  
भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए हालात के बाद एक तरफ जहां पूरा देश एकजुट है तो वहीं कुछ देश विरोधी मानसिकता वाले लोग पाकिस्तान परस्ती से बाज नहीं आ रहे। देवरनियां थाना क्षेत्र के एक युवक अपनी फेसबुक पोस्ट में पाकिस्तान समर्थित बातें कीं तो लोगों में आक्रोश फैल गया।

शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। वहीं अब आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस हिरासत में आरोपी का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह लंगड़ाते पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते दिखाई दे रहा है। 

हिमांशु पटेल ने शिकायत की थी कि मोहम्मद साजिद ने अपने फेसबुक पर एक भ्रामक पोस्ट साझा की, जिससे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरा पैदा होता है। यह पोस्ट सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, नफरत और वैमनस्यता फैलाने वाली है, जिससे दूसरे समुदाय में आक्रोश व्याप्त है और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। बरेली के एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि आरोपी के भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट करने की पुष्टि हुई है। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

उत्तर प्रदेश के बरेली में मोहम्मद साजिद ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ से संबंध में पोस्ट किया। सुर तब बदले जब पुलिस का डंडा पड़ा। बरेली पुलिस ने वीडियो जारी किया, जिसमें वहीं आरोपित पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने लगा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

दरअसल मोहम्मद साजिद ने फेसबुक पर वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें कुछ युवक झंडा लहराते हुए पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे। इस पोस्ट के कैप्शन में पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा गया। पोस्ट से हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। संगठन के नेता हिमांशु पटेल ने एक्स पर साजिद की शिकायत पुलिस से की।

पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए साजिद को दबोच लिया। इसके बाद एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में साजिद रोते हुए पाकिस्तान मुर्दाबाद चिल्ला रहा है। पुलिस ने बताया कि साजिद दर्जी का काम करता है। उसके मोबाइल फोन से कई भड़काऊ वीडियो मिले हैं।

संभल में भी पकड़ा गया था युवक

इससे पहले संभल जिले में भी इस तरह की घटना हुई थी। हजरत नगर गढ़ी क्षेत्र के गांव मुकर्रब पुर निवासी जमात अली ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान समर्थित पोस्ट साझा की थी। जमात अली ने 10 मई को सऊदी अरब के एक युवक साकिब राजा की फेसबुक आईडी से भारत विरोधी वीडियो को शेयर किया था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी लंबे समय से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पाकिस्तान समर्थक और भारत विरोधी पोस्ट शेयर करता आ रहा था।

उत्तर प्रदेश : 9 साल से बरेली में पाकिस्तानी महिला कर रही थी सरकारी टीचर की नौकरी, पोल खुलने पर बर्खास्त: जाँच में फर्जी निकले सारे प्रमाण-पत्र, 2021 में अम्मी भी ऐसे ही पकड़ी गई थी

                                  शुमायला खान की सेवाएँ समाप्त, कानूनी कार्रवाई शुरू (फोटो साभार: भास्कर)
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुमायला खान नाम की महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। यह नौकरी उन्होंने 2015 में शुरू की और 9 साल तक सरकारी वेतन भी लिया। मामला तब खुला जब एक शिकायत के बाद प्रशासन ने उनके निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जाँच की। फिलहाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 अक्तूबर, 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया। इसके बाद, उन्हें नियुक्ति की तिथि से ही पद से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुमायला ने रामपुर के एसडीएम कार्यालय से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। तहसीलदार की जाँच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र गलत तथ्यों पर आधारित था। तहसीलदार की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि शुमायला वास्तव में पाकिस्तान की नागरिक हैं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शुमायला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

 शुमायला ने अपनी अम्मी से प्रेरणा लेते हुए फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई। जाँच में पाया गया कि शुमायला के माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे। रामपुर तहसील से निवास प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्होंने यह तथ्य छिपाया।

फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी थाने में शुमायला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की हेराफेरी के आरोपों में कानूनी कार्रवाई हो रही है। पुलिस शुमायला की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को साल 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था, जब वो रिटायरमेंट से सिर्फ 2 दिन दूर थी। 11 मार्च 2021 को रिटायर होने जा रही शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को 9 मार्च 2021 को बर्खास्त किया गया था, जबकि शुमायरा को सस्पेंड किया गया था। माहिरा अख्तर ने भी खुद को भारतीय नागरिक बताया था, लेकिन जाँच में वे पाकिस्तानी पाई गईं। माहिरा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा और अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक संगठित तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

बहरहाल, शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है और इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में सुधार की कितनी जरूरत है।

कांग्रेस के हारते ही शुरू हो गई दिल्ली को ब्लॉक करने की साजिश, बरेली के जहरीले मौलाना ने खोला ‘टूलकिट’: तौकीर रजा ने कहा- देशभर से मुस्लिम पहुँचे रामलीला मैदान


इस्लामी संगठन इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के प्रमुख और बरेली के रहने वाले मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर धमकी दी है। उसने कहा है कि मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयान के विरोध में दिल्ली मार्च किया जाएगा और देश को जाम किया जाएगा। इसके पहले वो इस्लामी धर्मांतरण कराने और देश विरोधी भड़काऊ बयान दे चुका है।

 हरियाणा चुनाव में कांग्रेस के हारते ही काउंसिल के 24वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में तौकीर रजा ने अपना एजेंडा खोल दिया। उसने कहा कि यति नरसिंहानंद जैसे लोग पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी कर रहे हैं। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कोई धरना या फिर ज्ञापन नहीं होगा। अब दशहरा होने के बाद दिल्ली जाकर रामलीला मैदान में घेराव करके प्रदर्शन किया जाएगा।

मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन बरेली के आसपास के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कोने-कोने से लोग आएँगे। मौलाना तौकीर ने कहा, “इस समय देश के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है। नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले आजाद घूम रहे हैं। हमारे नौजवानों के साथ मॉब लिंचिंग हो रही है। दाढ़ी वाले को ट्रेन के अंदर पीटने की घटना हो रही है।”

अपनी उत्तेजक एवं कट्टरपंथी बयानों के लिए कुख्यात मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया। उसने कहा कि देश के वजीरे आजम समुदाय विशेष (मुस्लिम) के साथ पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि महापुरुषों की शान में गुस्ताखी करते हैं।

इतना ही नहीं, बरेली दंगे के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर ने इस्लाम छोड़कर दूसरे धर्म में शादी करने वाली मुस्लिम लड़कियों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “मजहब छोड़कर दूसरे धर्म के लोगों के साथ शादी करने वाली लड़कियों की इस्लाम में कोई जरूरत नहीं है। ऐसे कमजोर लोगों की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। अच्छा रहा कि वे खुद ही इस्लाम को छोड़कर चली गईं।”

इससे पहले इस मौलाना ने कहा था, “हम 20 करोड़ हैं या 30 करोड़…मैं नहीं जानता, लेकिन हम में से सिर्फ 1 प्रतिशत ही घरों से बाहर निकल आएँ और दिल्ली कूच कर दें और ऐलान करें कि जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे। हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है। अगर जो पैमाना छलक गया तो नतीजे बहुत खराब हो सकते हैं।”

बता दें कि कुछ दिन पहले तौकीर रजा ने कुछ हिंदू लड़कियों का सार्वजनिक तौर पर इस्लाम में धर्मांतरण कराने का ऐलान किया था। इसके साथ ही उनका निकाह मुस्लिम युवकों से कराने की बात भी कही थी। इसको लेकर बड़े पैमाने पर बवाल हुआ था। तौकीर रजा ने कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है।

मौलाना ने कहा था कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी है। तौकीर ने कहा था इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं।

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उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े। हालाँकि, हिंदुओं के विरोध के बाद प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। इतना ही नहीं, प्रशासन ने भी कहा था कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश : खतना ने ले ली डेढ़ साल के बच्चे की जान

         बरेली में खतना करवाते डेढ़ माह के बच्चे की नस कटने से हुई मौत (चित्र साभार- Youtube/बरेली न्यूज़)
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में गलत ढंग से खतना करने पर डेढ़ महीने के एक नवजात बच्चे की मौत हो गई है। आरोप है कि शद्दीक के बेटे कबीर हज्जाम ने खतने के दौरान बच्चे की गलत नस काट दी थी। कई घंटे तक लगातार खून बहने की वजह से आखिरकार बच्चे की मौत हो गई। घटना रविवार (11 अगस्त 2024) की है। बच्चे के दादा की तहरीर पर पुलिस ने कबीर हज्जाम पर FIR दर्ज कर ली है। घटना के बाद आरोपित फरार हो गया है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

यह घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र फतेहगंज पूर्वी की है। यहाँ सोमवार (12 अगस्त, 2024) को मृतक के दादा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनका पोता डेढ़ माह का था। रविवार को सुबह लगभग 11:30 पर वो अपने पोते का खतना करवाने के लिए शद्दीक के बेटे कबीर हज्जाम के पास गए थे। कबीर ने बच्चे का खतना करने के दौरान गलत नस काट दी। इस वजह से बच्चे का लगातार खून बहने लगा। काफी कोशिशों के बावजूद भी खून नहीं रुका और इसी दिन शाम 7:30 पर बच्चे की जान चली गई।

मीडिया से बात करते हुए मृतक के दादा ने कहा, “मुसलमानी करवाई थी, उसने नस गलत काट दी। पहला बच्चा था। बड़े ऑपरेशन से हुआ था। घर में बड़ी खुशहाली थी।” उनके साथ ही खड़े दूसरे परिजन ने कहा कि सब मामला खराब हो गया। खुद को सँभालते हुए मृतक के दादा ने फिर कहा, “उसकी (कबीर) की लापरवाही है। वो हमें बता देता तो हम ले कर बरेली आ जाते। वो तो भाग गया वहाँ से।” मृतक के परिजनों ने गलत नस काटने वाले कबीर हज्जाम पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने मृतक बच्चे के परिजन की तहरीर पर शद्दीक के बेटे कबीर को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। वहीं इस घटना पर क्षेत्र के डिप्टी एसपी ने बताया कि मृतक बच्चे का पोस्टमार्टम करवा कर जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फरार चल रहे आरोपित कबीर को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें लगा दी गईं हैं।

उत्तर प्रदेश : ‘मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी…’: बरेली के हसीब अंसारी ने WhatsApp स्टेट्स लगा कर किया मौलवियों और फिरकों का जिक्र


उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भड़काऊ व्हाट्सएप्प स्टेट्स लगा कर माहौल खराब करने का मामला सामने आया है। यहाँ हिन्दू संगठनों ने हसीब अंसारी नाम के एक युवक की शिकायत पुलिस से की है। स्टेट्स में हसीब ने मुस्लिमों के एकजुट हो जाने के बाद सभी के काबू से बाहर हो जाने जैसी बातें लिखी हुई हैं। हसीब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठ रही है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ के रहने वाले हसीब अंसारी ने शनिवार को अपने व्हाट्सएप्प पर भड़काऊ स्टेटस लगाया। इस में हसीब ने लिखा, “मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।” हसीब अंसारी ने इस स्टेट्स के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में लिख कर लोगों से इसे हर हाल में शेयर करने की गुजारिश भी की है।

हसीब अंसारी की इस हरकत को ‘कट्टर हिन्दू गौ सेवक बरेली उत्तर प्रदेश’ नाम के हैंडल ने अपने X प्रोफ़ाइल @Surenda83898725 से शेयर किया है। उन्होंने इस हरकत को माहौल को खराब करने वाली बताया और बरेली पुलिस को टैग करते हुए हसीब अंसारी पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को निर्देशित किया जा चुका है।

जिस स्टेट्स को हसीब अंसारी ने अपने व्हाट्सएप पर लगाया है उसके बैकग्राउंड में किसी मज़हबी इबादतगाह के आगे कुछ लोग खड़े दिख रहे हैं। एक लाल रंग का झंडा भी दिखाई दे रहा है। बैकग्राउंड में दिख रहा दृश्य कहाँ और कब की घटना है इस बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बरेली के VHP कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने जानकारी दी कि हसीब अंसारी ने मौलाना वाली पढ़ाई कर रखी थी, और पूर्व में मौलाना वाला कार्य भी कर चुका है।

उत्तर प्रदेश : बागेश्वर बाबा की तस्वीर लगा, अपशब्द लिख दी ‘सर तन से जुदा’ की धमकी: बरेली पुलिस ने फैज रजा और सलमान को गिरफ्तार किया

बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के पीछे कट्टरपंथी हाथ धोकर पड़े हैं। अकेले यूपी के बरेली से ही ‘सर तन से जुदा’ की ख्वाहिश रखने वाले दो कट्टरपंथी मुस्लिम गिरफ्तार किए गए हैं, वो भी अलग-अलग मामलों में… मकसद साझा है, ‘सर तन से जुदा’।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली के आँवला इलाके के रहने वाले फैज रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धीरेंद्र शास्त्री का ‘सर तन से जुदा’ करने का पोस्ट डाला। इस पोस्ट में बाकायदा म्यूजिक और डॉयलॉग भी था। फैज रजा के खिलाफ हिंदू संगठन एकजुट हो गए और प्रशासन से कार्रवाई की माँग की, जिसके बाद फैज रजा को पुलिस ने पकड़ लिया।

जानकारी के मुताबिक, बरेली के आँवला कोतवाली में सैकड़ों की संख्या में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इकठ्ठा होकर एक शिकायती पत्र सौंपा। शिकायती पत्र में कहा गया है कि हिंदू सनातन धर्म के गुरु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की फोटो लगाकर अशोभनीय तरह से एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। जिसमें सिर तन से जुदा का ऑडियो भी लगाया गया है।

राष्ट्रीय बजरंग दल के आंवला जिला अध्यक्ष पवन ने बताया कि फैज राजा ने फेसबुक पर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का फोटो लगाकर उनका सिर तन से जुदा करने और अपशब्द लिखते हुए स्टेट्स लगाया है। इसमें सिर तन से जुदा का गाना भी शामिल किया है। इससे माहौल खराब हो सकता है। पुलिस ने फैज रजा को गिरफ्तार कर लिया है। बरेली के वरीय पुलिस अधिकारी वीरेश कुमार ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने फैज की गिरफ्तारी की पुष्टि की।

वहीं, बरेली के ही इज्जतनगर के सलमान को भी धीरेंद्र शास्त्री का ‘सर तन से जुदा’ करने का शौक चढ़ा। इस मामले में भी पुलिस सक्रिय हुई और सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में भी हिंदू संगठनों ने कार्रवाई की माँग की थी।

सलमान ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था। सलमान खान धीरेंद्र शास्त्री का सर काटने और जमीन में गाड़ने की धमकी दे रहा था, साथ ही उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल भी कर रहा था। इस मामले में लोगों की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।


उत्तर प्रदेश : मुस्लिम महिला की मांग : ‘मौलाना तौकीर को विदेश से हो रही फंडिंग, ED करे जाँच’: जीते हैं ऐश की जिंदगी, हिंदू और मुस्लिम के बीच फैलाते हैं नफरत

मुस्लिम महिला द्वारा मौलाना तौकीर पर देश विरोधी ताकतों से फंडिंग मिलने का आरोप (चित्र साभार- Z न्यूज़)
कालचक्र जब घूमता है, अच्छे-अच्छे सुरमा भोपाली नप जाते हैं। 2014 से भारत में जितने भी प्रदर्शन, धरने और सनातन पर प्रहार हो रहे हैं, सभी विदेशी भीख पर। 'सर तन से जुदा' गैंग भी भूल रहा है कि इस्लाम के ही विरुद्ध एक्स-मुस्लिम खड़ा हो चुका है। जो नूपुर शर्म विवाद से अधिक सक्रिय हो गया है। सबूत के तौर पर नूपुर विवाद के दिनों के Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation पर "इस्लाम क्या कहता है" देखकर आँखों खोलो। इन एक्स-मुसलमानों के तीखे सवालों के आगे बड़े-बड़े मौलानाओं/मौलवियों को वातानुकूलित कमरों में बैठे होने के बावजूद पसीने पोंछते देखा जा सकता है। 

अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात बरेली के मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच की माँग उठी है। यह माँग आला हजरत खानदान की बहू और आला हजरत हेल्पिंग समिति चलाने वाली निदा खान द्वारा उठाई गई है। निदा ने मौलाना तौकीर के खिलाफ ED की जाँच की माँग करते हुए कहा कि उन्हें बाहर से फंडिंग हो रही है और हिन्दुओं और मुस्लिमों में दरार डालते रहते हैं।

निदा खान ने तमाम केस होने के बावजूद अब तक मौलाना तौकीर की गिरफ्तारी न होने पर हैरानी जताई है। शनिवार (6 मार्च 2024) को एक वीडियो जारी करते हुए निदा खान ने कहा कि उन्हें धमकी मिल रही। बुर्का पहन कर बनाए गए इस वीडियो की शुरुआत निदा ने अपना परिचय आला हजरत खानदान की बहू के रूप में दिया है। उनके इस बयान को वीडियो में 3:07 मिनट पर सुना जा सकता है।

निदा खान ने वीडियो में कहा है कि वो मौलाना तौकीर के बारे में ये पढ़ती और सुनती आई हैं कि उन्होंने बहुत सारे धरने-प्रदर्शन किए हैं। उदहारण के तौर पर निदा ने CAA और NRC का नाम लिया। मौलाना तौकीर पर हिन्दू और मुस्लिमों को आपस में लड़ाने का आरोप लगाते हुए निदा ने उनके अंतिम धरने में साम्प्रदायिक तनाव फैलने की बात कही है।

वीडियो में आगे कहा गया है कि अभी उत्तर प्रदेश में लॉ एन्ड आर्डर बेहद सख्त है, जिसकी वजह से मौलाना तौकीर रजा दंगा फैलाने में नाकाम हैं। साल 2010 में हुए बरेली दंगों की याद दिलाते हुए निदा ने उसके आरोपित के तौर पर मौलाना तौकीर का नाम लिया है। निदा ने हैरानी जताते हुए कहा है कि 3 गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद मौलाना तौकीर रजा खुलेआम घूम रहे हैं।

तौकीर की कथित बीमारी पर भी निदा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तौकीर रजा की मेडिकल रिपोर्ट कभी बाहर नहीं आती है। इस बार भी मेडिकल रिपोर्ट गायब बताई गई है। निदा ने आगे बताया है कि मौलाना तौकीर रज़ा और उनका बेटा दोनों ही ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जीते हैं। तौकीर का बेटा ऑस्ट्रेलिया में रहता है। उन्होंने मौलाना तौकीर को मिलने वाले पैसों के स्रोत पर सवाल उठाया है।

निदा ने पूछा कि तौकीर के पास न तो कोई व्यापार है और न ही कोई फैक्ट्री, फिर वे भारत में और उनका बेटा ऑस्ट्रेलिया में मजे की जिंदगी कैसे बीता रहा है? उन्होंने सरकार से पैसों की जाँच ED से कराने की माँग की। तौकीर को मिल रहे पैसों को निदा ने ‘नफरत फैलाने वाली फंडिंग’ बताया है। उन्होंने तौकीर को विक्टिम कार्ड खेलने में माहिर और लोगों को अपनी बातों से ब्रेनवॉश करने वाला बताया।

निदा खान का यह भी दावा है कि मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उनको लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। इनमें निदा के कत्ल की भी धमकी शामिल है। निदा ने मौलाना तौकीर रजा के समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया और अंत में कहा कि मौलाना तौकीर के पास कोई फंडिंग तो है। इस फंडिंग उन्होंने देश के लिए हानिकारक बताई है।

उत्तर प्रदेश : जुमे से पहले ही बँट गया था पर्चा…मौलाना तौकीर रज़ा के भड़काने के बाद बरेली में हिंसा; दंगाई क्षेत्र में पुलिस को blind firing आर्डर देकर भेजा जाए, लाठी या अश्रु गैस के भरोसे नहीं

                      रेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर हिंसा (फोटो साभार: हिंदुस्तान/दैनिक जागरण)
बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।
देश में जब भी दंगे होते हैं दंगाई पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया जाता है, फिर पुलिस को सीधे blind firing आदेश देकर क्यों नहीं भेजा जाता? क्या दंगाई लाठी या अश्रु गैस से मानने वाले हैं, बल्कि उनको छुपने का मौका दिया जाता है। राज्य सरकारों से लेकर केंद्र और केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को अति गंभीरता से लेना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर भी सख्ती जरुरी है। आखिर देश कब तक दंगों में जलता रहेगा? इसका अंत केवल blind firing है, लाठीचार्ज या अश्रु गैस नहीं। दूसरे दोषी पाए जाने वालो को ब्लैकलिस्ट कर उन्हें मिलने वाली सारी सरकारी सुविधाएं कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद कर देनी चाहिए। क्योकि दंगाइयों ने अब बच्चों और औरतों को आगे कर अपना खेल खेलने की रणनीति बनाई हुई है, जब blind firing में बेगुनाहों की लाशें बिछाने वालों की भी लाशें बिछनी शुरू नहीं होंगी, तभी दंगों की रोकथाम संभव है। यह काम केवल तभी संभव हो पायेगा अगर केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दंगा मुक्त भारत चाहती हैं। दंगे में हमेशा से बेगुनाह-हिन्दू अथवा मुसलमान- ही मरता आया है, दंगाई या दंगे के लिए उकसाने वाला नहीं।   

दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।

बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।

उत्तर प्रदेश : हलाला के डर से अस्मत बनी नेहा सिंह, मुस्लिम शिक्षिका : महाकाल का आशीर्वाद लेकर बोली- इस्लाम में औरतों की इज्जत नहीं

                          मुस्लिम शिक्षिका ने अपनाया हिंदू धर्म, बनीं नेहा सिंह (फोटो साभार: अमर उजाला)
बरेली के एक प्राइवेट स्कूल की 33 साल की शिक्षिका नेहा असमत ने इस्लाम में हलाला और ‘तीन तलाक’ के डर से हिंदू धर्म अपना लिया है। अब नेहा सिंह बन चुकी इस टीचर का कहना है कि उसने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाया है। वो भगवान शंकर को अपना आराध्य मानती हैं।

उन्होंने इस बात का ऐलान किया कि उज्जैन के महाकाल के दरबार में आशीर्वाद लेकर उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया। दरअसल, इस टीचर के परिवार ने उनके साथी शिक्षक मोहित सिंह पर उन्हें अगवा करने का शक जताते हुए सोमवार (11 नवंबर, 2023) को बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब इस टीचर ने अपनी और अपने साथी मोहित को जान का खतरा बताकर बरेली एसएसपी, डीएम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई है। जानकारी के मुताबिक, नेहा की अम्मी रानी बेगम ने सोमवार को बारादरी थाने में नेहा के अपहरण की रिपोर्ट कराई थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर बारादरी पुलिस नेहा की तलाश कर रही थी। इस दौरान नेहा का उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस दौरान नेहा सिंह बन चुकी टीचर ने बरेली SSP के दफ्तर में अपनी सुरक्षा के लिए पत्र लिखा है।

इस पत्र के मुताबिक, उसने लिखा है कि वो बरेली के मुस्लिम बाहुल्य इलाके फाइक एनक्लेव की रहने वाली है। शुरू से ही उनका सनातन धर्म के लिए झुकाव था। उन्होंने बरेली कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और उसके बाद बीएड कर रही हैं और इसके साथ ही स्कूल में पढ़ा रही हैं। नेहा सिंह के मुताबिक, वो पढ़ी-लिखी और नौकरीपेशा है और खुद अच्छा-बुरा सब समझती हैं। उनके मुताबिक, बीज विकास निगम में लेखाकार रहे अब्बा असमत अली की मौत हो चुकी है।

                   मुस्लिम शिक्षिका नेहा असमत का पुलिस को दिया शिकायत पत्र (फोटो साभार: दैनिक भास्कर )

उनका आरोप है कि इसके बाद से ही उनकी अम्मी रानी बेगम के साथ मिलकर उनकी बहन गजाला, शबाना, बहनोई डॉ आसिफ और तनवीर अहमद उनका निकाह एक ऐसे अधेड़ शख्स से कराने की साजिश रच रहे हैं जो अपनी बीवी से तलाक लेने के बाद उसका हलाला करा चुका है। टीचर नेहा के मुताबिक, उन्हें यह शादी पसंद नहीं थी और परिवार ने अधिक दबाव बनाया तो उन्होंने घर छोड़ दिया। नेहा ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में अपने धर्म परिवर्तन का प्रमाणपत्र नत्थी किया है लेकिन इसमें अपनी शादी का जिक्र नहीं किया है।

उन्होंने ये भी साफ किया कि उनके परिवारवालों की संजयनगर के रहने वाले मोहित सिंह के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट झूठी है। जबकि उन्होंने खुद की मर्जी से घर छोड़ा और बगैर किसी दबाव के सनातन धर्म अपनाया है।

नेहा का कहना है कि उनके परिवार से उन्हें, मोहित और उसके परिवार को भी जान का खतरा है। वो उनका कत्ल करा सकते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके और मोहित के साथ कुछ भी अनहोनी हुई तो इसके लिए उनका मुस्लिम परिवार जिम्मेदार होगा।

इस्लाम में महिलाएँ बच्चा पैदा करने की मशीन, तलाक-हलाला जैसी कुरीति : शिवानी बन शिवभक्त शबाना

                                                  शिवानी और अरविंद के विवाह के दौरान की तस्वीर
उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली शबाना ने हिंदू धर्म अपनाकर अपने प्रेमी अरविंद से शादी कर ली है। शबाना ने इस्लाम त्यागने के बाद अपना नाम बदलकर शिवानी कर लिया है। शिवानी ने बरेली के मढ़ीनाथ स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। पंडित केके शंखधार ने शुद्धिकरण के बाद मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न करवाया।

 इस्लाम में महिलाएँ बच्चा पैदा करने की मशीन

अरविंद से विवाह के बाद शिवानी ने इस्लाम के बारे में खुलकर बात की। शिवानी बनी शबाना ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन माना जाता है। उसकी माँ भी बच्चे पैदा करते करते मर गई थी। वो खुद 8 भाइयों की इकलौती बहन है।

21 साल की शबाना ने कहा कि तीन तलाक, बहु विवाह, बुर्का, हिजाब, हलाला जैसी कुरीतियाँ खराब हैं और ये इस्लाम का हिस्सा हैं। महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनना पड़ता है, जबकि हिंदू धर्म में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। शिवानी का कहना है कि हिंदू धर्म में महिलाओं को सम्मान मिलता है।
शिवानी ने बताया कि वह हिंदू धर्म से उनका लगाव है और वह भगवान शंकर की भक्त हैं। वह ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप भी करती हैं। शिवानी का कहना है कि वह साल भर पहले अरविंद से मिली थी। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया। शिवानी के माता-पिता, दोनों की मौत हो चुकी है।

शादी के लिए मान नहीं रहे थे शिवानी के परिजन

शिवानी ने कहा कि अरविंद के घर वाले शादी के लिए तैयार थे, लेकिन उसके परिवार वाले नहीं मान रहे थे। अरविंद से प्यार की बात जब उसके भाइयों को पता चली तो वे नाराज हो गए और शिवानी के घर से निकलने पर प्रतिबंध भी लगा दिया। हालाँकि, इस दौरान भी शिवानी अपने प्रेमी अरविंद से चुपके से मिलती थी।
जानकारी के मुताबिक, शिवानी मूल रूप से फरीदपुर के भगवंतापुर की निवासी है। वहीं, अरविंद सागर पड़ोस के कैरुआ गाँव के रहने वाले हैं। दोनों के गाँवों की दूरी करीब एक किलोमीटर ही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवानी भगवान शिव की भक्त हैं और रोजाना भगवान शिव का जलाभिषेक करती हैं।

उत्तर प्रदेश : बरेली के होली फैमिली कान्वेंट स्कूल की मुस्लिम टीचर ने छात्रों की राखी कैंची से काटी, कहा- हिंदू धर्म का प्रचार यहाँ नहीं होगा

छात्रों की राखी काटने पर बरेली के स्कूल ने माँगी माफी (फोटो साभार: ABP न्यूज)
उत्तर प्रदेश के बरेली के एक मिशनरी स्कूल में छात्रों की राखी कैंची से कटवाने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर छात्रों से कहा गया कि स्कूल में हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता है। अभिभावाकों और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद स्कूल ने माफी माँग ली है।

इस स्कूल का नाम होली फैमिली कॉन्वेंट स्कूल है। स्कूल बरेली के आंवला सर्किल क्षेत्र के भमोरा रोड पर स्थित है। छात्रों की राखी काटने की घटना सोमवार (28 अगस्त 2023) की है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ छात्र सोमवार को राखी बाँधकर स्कूल आए थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद एक शिक्षिका ने कैंची मँगवाकर छात्रों की राखी और कलावा काट दी।

प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए शगुफ्ता अंसारी नाम की एक शिक्षिका को जिम्मेदार बताया है। बताया है कि वह इस स्कूल में बच्चों को विज्ञान पढ़ाती है। हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस स्कूल का संचालन केरल का कोई ईसाई करता है। हालाँकि उसके बारे में विस्तार से वे हमें जानकारी नहीं दे पाए।

स्कूल से घर जाने के बाद छात्रों ने राखी काटे जाने की घटना के बारे में अपने अभिभावकों को बताया। पीड़ित छात्रों के परिजन अगले दिन 29 अगस्त को शिकायत ले कर स्कूल पहुँचे। मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो वे भी अभिभावकों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो गए। स्कूल के सामने हो रहे हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुँची। इस बीच स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती मानी और लिखित तौर पर भविष्य में दोबारा ऐसी गलती न होने का आश्वासन दिया। लिखित आश्वासन के बाद हिन्दू संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया।

विरोध-प्रदर्शन में शामिल हरेंद्र फौजी ने मिशनरी स्कूलों पर धर्म परिवर्तन का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। होली फैमिली स्कूल में हुई घटना को भी उन्होंने इसी का हिस्सा बताया। एक अन्य प्रदर्शनकारी आशीष ने कहा कि स्कूल के अंदर क्रिसमस का सेलिब्रेशन 15 दिनों तक चलता है। लेकिन इसका हिन्दू समाज विरोध नहीं करता। अब भविष्य में किसी हिंदू छात्र को प्रताड़ित किया गया तो स्कूल बंद करवा दिया जाएगा।

स्कूल में बाइबिल की पढ़ाई, लेकिन जय श्री राम प्रतिबंधित

विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले बरेली के सामाजिक कार्यकर्ता ओमेंद्र पाल से ऑपइंडिया को बताया कि स्कूल में कई हिन्दू बच्चों को उनकी मर्जी के खिलाफ स्कूल में बाइबिल पढ़ाई जाती है। लेकिन जय श्रीराम बोलना प्रतिबंधित है। उन्होंने स्कूल का प्रबंधक केरल के किसी ईसाई को बताया। उनके अनुसार बच्चों की राखियाँ उतरवाने वाली टीचर मुस्लिम है। उसके शौहर कपड़ा व्यवसायी हैं।
हिन्दू संगठन से जुड़े सुनील सौरभ ने बताया कि शगुफ्ता मैडम ने स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में शामिल सिस्टर एंजोज के कहने पर छात्रों की राखी काटे थे। ओमेंद्र पाल का यह भी कहना है कि होली फैमिली स्कूल में अक्सर छात्रों को कलावा और तिलक लगाने पर टोका जाता है। माफीनामे पर स्कूल की उप प्रधानाचार्या सिस्टर सोफी मारिया के हस्ताक्षर हैं। ऑपइंडिया के पास माफीनामे की कॉपी मौजूद है।