धीरेंद्र शास्त्री के साथ जयवर्धन सिंह (फोटो साभार: प्रभा साक्षी) मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) में ‘हिंदू एकता यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की एकता को बढ़ावा देना और जात-पात की दीवारें गिराना है। इस यात्रा में राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने इसमें शिरकत की। जयवर्धन ने यात्रा में हिस्सा लेकर सनातन धर्म और हिंदू एकता के प्रति अपना समर्थन जताया।
'भगवा आतंकवाद' कहकर हिन्दू और सनातन धर्म को बदनाम करने वाले दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह द्वारा धीरेन्द्र शास्त्री की हिन्दू एकता यात्रा में शामिल होना क्या कांग्रेस में हिन्दुत्व को लेकर खींचतान चल रही है?
धर्म के लिए एकजुटता जरूरी: जयवर्धन सिंह
जयवर्धन सिंह ने यात्रा के दौरान कहा, “यह यात्रा किसी पार्टी की नहीं बल्कि सनातन धर्म की है। जात-पात को खत्म कर समाज को एकजुट करना जरूरी है। संत अगर सनातन बोर्ड बनाने की बात करते हैं, तो यह विचार सही दिशा में है। हम सनातन के भक्त हैं और हमेशा रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास है, जिसमें सभी समाजों को समान सम्मान दिया जाना चाहिए। जयवर्धन ने हिंदू धर्म को भारत की आत्मा बताते हुए कहा, “हर धर्म की शुरुआत किसी न किसी स्थान से हुई है, और हिंदू धर्म की शुरुआत भारत से हुई है। इसलिए भारत स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र है।”
जहाँ जयवर्धन सिंह सनातन धर्म की बात कर रहे हैं, वहीं उनके पिता दिग्विजय सिंह का भगवा आतंकवाद पर बयान अक्सर चर्चा में रहा है। जयवर्धन की इस यात्रा में भागीदारी को उनके पिता से अलग विचारधारा के तौर पर देखा जा रहा है। जयवर्धन ने जाति आधारित भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारे कर्म सबसे अहम हैं। भगवान कृष्ण ने भी यही कहा है कि कर्मों के जरिए समाज का कल्याण होगा। अगर जात-पात की सीमाओं को खत्म करेंगे, तो समाज और देश दोनों आगे बढ़ेंगे।”
धीरेंद्र शास्त्री ने 21 नवंबर को इस यात्रा की शुरुआत बागेश्वर धाम से की, जो 160 किलोमीटर की दूरी तय करके 29 नवंबर को ओरछा में समाप्त होगी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और हिंदुओं को एकजुट करने के लिए है। जात-पात, बोली और भाषा के विभाजन को मिटाने के लिए हमें एकता के मार्ग पर चलना होगा।” शास्त्री ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को बचाने और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों को इस यात्रा का हिस्सा बनने का न्योता दिया।
धीरेंद्र शास्त्री और जयवर्धन सिंह के बयानों ने हिंदू एकता और जातिवाद के खिलाफ खड़े होने के संदेश को एक नया आयाम दिया है। यह यात्रा धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर कॉन्ग्रेस के भीतर।
बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के पीछे कट्टरपंथी हाथ धोकर पड़े हैं। अकेले यूपी के बरेली से ही ‘सर तन से जुदा’ की ख्वाहिश रखने वाले दो कट्टरपंथी मुस्लिम गिरफ्तार किए गए हैं, वो भी अलग-अलग मामलों में… मकसद साझा है, ‘सर तन से जुदा’।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली के आँवला इलाके के रहने वाले फैज रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धीरेंद्र शास्त्री का ‘सर तन से जुदा’ करने का पोस्ट डाला। इस पोस्ट में बाकायदा म्यूजिक और डॉयलॉग भी था। फैज रजा के खिलाफ हिंदू संगठन एकजुट हो गए और प्रशासन से कार्रवाई की माँग की, जिसके बाद फैज रजा को पुलिस ने पकड़ लिया।
जानकारी के मुताबिक, बरेली के आँवला कोतवाली में सैकड़ों की संख्या में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इकठ्ठा होकर एक शिकायती पत्र सौंपा। शिकायती पत्र में कहा गया है कि हिंदू सनातन धर्म के गुरु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की फोटो लगाकर अशोभनीय तरह से एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। जिसमें सिर तन से जुदा का ऑडियो भी लगाया गया है।
राष्ट्रीय बजरंग दल के आंवला जिला अध्यक्ष पवन ने बताया कि फैज राजा ने फेसबुक पर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का फोटो लगाकर उनका सिर तन से जुदा करने और अपशब्द लिखते हुए स्टेट्स लगाया है। इसमें सिर तन से जुदा का गाना भी शामिल किया है। इससे माहौल खराब हो सकता है। पुलिस ने फैज रजा को गिरफ्तार कर लिया है। बरेली के वरीय पुलिस अधिकारी वीरेश कुमार ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने फैज की गिरफ्तारी की पुष्टि की।
वहीं, बरेली के ही इज्जतनगर के सलमान को भी धीरेंद्र शास्त्री का ‘सर तन से जुदा’ करने का शौक चढ़ा। इस मामले में भी पुलिस सक्रिय हुई और सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में भी हिंदू संगठनों ने कार्रवाई की माँग की थी।
सलमान ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था। सलमान खान धीरेंद्र शास्त्री का सर काटने और जमीन में गाड़ने की धमकी दे रहा था, साथ ही उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल भी कर रहा था। इस मामले में लोगों की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम से पहले नेपाल में मुस्लिमों का उपद्रव (फोटो साभार: FB/Namaste Bhaktapur) नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद सीमा से सटे भारतीय इलाकों में अलर्ट है। सुनसरी के रामनगर भुटाहा में कर्फ्यू लगाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम का प्रचार कर रहे हिंदू संगठन के सदस्यों पर हमले के बाद माहौल बिगड़ा है। इसके बाद जीवन मेहता नाम के एक हिंदू युवक की बुरी तरह पिटाई की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही कट्टरपंथी भड़के हुए थे। अभी तक इस मामले में मुस्लिम समुदाय के दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है।
अब चर्चा है कि आखिर मुस्लिम कट्टरपंथी और इनके समर्थक नेता/पार्टियां सनातन के संयम की कब तक अग्नि परीक्षा लेते रहेंगे? आखिर कब तक जेहादी सनातन/हिन्दू पर जानलेवा हमले करते रहेंगे? क्या जेहादी और इनको समर्थन दे रहे नेता और पार्टियां सनातन के संयम की ज्वालामुखी के फटने का इंतज़ार कर रहे हैं? इन लोगों को इतना भी ज्ञान नहीं कि सनातन/हिन्दू भ्रमित करने वाले सेकुलरिज्म को कुचलने की ओर अग्रसर है। अब और अधिक सनातन/हिन्दू इस भ्रमित जाल में नहीं फंसने को तैयार। भारत का वास्तविक इतिहास बड़ी तेजी खुलना शुरू हो चुका है। सेकुलरिज्म को अपनाने से पहले इसका अर्थ इन छद्दम सेक्युलरिस्ट्स को समझना होगा। दंगों में हमेशा बेगुनाह मरता रहा है, किसी जेहादी और इनको समर्थन देने वाले नेता/पार्टियों के घर के पक्षी तक को कुछ नहीं होता। कर्फ्यू में परेशान जनमानस होता है, उसकी चिंता करो।
आजकल चुनावी दौर चल रहा है, हर नेता/पार्टी आपसे वोट मांगने आने पर उनसे प्रश्न करिए कि जिस तरह जाति के आधार पर हिन्दुओं को विभाजित किया जाता रहा है, अगर 'माँ का दूध पीया है तो इसी तरह दूसरे धर्मों पर बोलकर दिखाओ' तुरंत साम्प्रदायिक तत्व कहकर धमकाने का प्रयास किया जाएगा। हिन्दू फिर एक ही मंदिर में जाता है, अंतिम संस्कार भी एक ही शमशान घाट पर होता है, लेकिन अन्य मजहबों में नहीं। मस्जिदें, चर्च और कब्रस्तान अलग है। क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बागेश्वर सरकार का कार्यक्रम 17 अप्रैल को सुनसरी के चतरा में होना है। इस कार्य्रकम का प्रचार कर रहे विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया, जिसके बाद हालत तनावपूर्ण हो गए। नेपाली प्रशासन ने पीस कमेटी की मीटिंग बुलाई थी, लेकिन उसमें मुस्लिम समुदाय के जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा नहीं लिया। नेपाल में तनाव को देखते भारत की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
इस विवाद की शुरुआत 4 अप्रैल 2024 (गुरुवार) को हुई। जीवन मेहता नाम का युवक हरिनगर इलाके के रामनगर के एक स्कूल से अपनी बहन को घर ले जाने के लिए बाइक से गया था। यहाँ पर लगभग 150-200 की तादाद में मुस्लिमों की भीड़ जमा हो गई। इन सभी ने जीवन मेहता को बेरहमी से मारा। जान बचाने के लिए जीवन मेहता स्कूल में घुस गया, लेकिन भीड़ ने वहाँ भी उसे नहीं छोड़ा। हमलावरों में बच्चे, बूढ़े और जवान सभी उम्र के लोग शामिल थे।
घटना के एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि भीड़ ने जीवन मेहता को स्कूल से निकाल कर रामनगर भुटहा बाजार में दौड़ा-दौड़ा कर मारा। आरोप है कि इस दौरान पुलिस-प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी मूकदर्शक बना रहा। बताया जा रहा है कि भीड़ ने जीवन मेहता को पुलिस से छीनने का भी प्रयास किया। उसे अस्पताल ले जाने के दौरान भी रास्ते में रुकावट डाली गई। जीवन मेहता को सुनसरी जिले के सरकारी अस्पताल के ICU वार्ड में भर्ती करवाया गया। मारने वाली भीड़ का नेतृत्व फय्याज अंसारी कर रहा था।
फय्याज अंसारी के अब्बा गफ्फार हरिनगर गाँवपालिका का अध्यक्ष है। हरिनगर गाँवपालिका भारत से सटा हुआ मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। इस घटना के विरोध में अगले दिन शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। सड़क जाम कर के हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पर भी मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। हमलावरों की तादाद 500 के आसपास थी। हिंसक भीड़ ‘नारा ए तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रही थी। दोनों पक्षों की भिड़ंत में दर्जनों लोग घायल हो गए।
हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रशासन ने हवाई फायरिंग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस फायरिंग में 2 हिन्दू युवकों को गोली लग गई। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फिलहाल दोनों की हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है। हिंसक भीड़ ने ब्रह्मदेव मेहता नाम के एक नेपाली पत्रकार पर भी हमला किया। उन्हें पत्थरों और लाठियों से पीटा गया। ब्रह्मदेव का कैमरा छीन कर मोबाइल को तोड़ दिया गया। पत्रकार पर हमले का मास्टरमाइंड सज्जाद को बताया जा रहा है। सज्जाद अंसारी गाँवपालिका अध्यक्ष गफ्फार का दायाँ हाथ बताया जाता है।
इस हिंसा के बाद सुनसरी जिले के हिन्दू समुदाय एकजुट हो गए। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों को चिन्हित करने का काम कर रही है। हिंसा को काबू करते हुए 17 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ स्थानीय मुस्लिम पत्रकार अपने ही समुदाय को प्रताड़ित बताने का प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।पीड़ित के तौर पर हिन्दुओं के बजाय मुस्लिमों को बता रहे हैं। इन पत्रकारों में ताबिल अंसारी, नसीम, अजमल नेपाली और मोहसीम अंसारी के नाम प्रमुख बताए गए। इन सभी पर हिन्दुओं के ही खिलाफ भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप है।
घटना के एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि मामले की शुरुआत अयोध्या में राममंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के समय से हुई थी। तब हरिनगर के ही गौतमपुर इलाके में वार्ड नंबर 3 में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने हिन्दू युवकों द्वारा लगाए गए भगवा ध्वज को नोंच कर फेंक दिया था। इस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों ने दोनों पक्षों को समझा कर मामले को दबा दिया था। इस घटना के विरोध में जीवन मेहता ने एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में जीवन मेहता ने भगवा झंडा के अपमान पर मुस्लिमों की आलोचना की थी। इसके बाद से ही वे मुस्लिमों के निशाने पर थे।
बिना अध्ययन याचिका लेकर पहुँच गया वकील, जज ने सुनाई खरी-खरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सोमवार (22 मई, 2023) को प्रदेश में बागेश्वर धाम के धार्मिक आयोजन को रोकने के लिए दायर हुई दूसरी जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया। यह आयोजन इसी माह 23 मई और 24 मई को जिला बालाघाट के गाँव लिंगा स्थित रानी दुर्गावती महाविद्यालय मैदान में होना प्रस्तावित है। यह याचिका एक वकील द्वारा कथित आदिवासी संगठन की तरफ से लगाई थी, जिसमें आयोजन से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने का आरोप था।
याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान गलत ढंग से बहस की जिस पर कोर्ट ने उसे चेतावनी भी दी।
हमारे सरकार कहते है प्रभु श्री राम जी वन गए तो बन गए…उसी वन के हृदय बनवासी भाई-बहनो के निमित पूज्य सरकार दो दिवसीय श्रीराम कथा सुनाने बालाघाट पहुँच रहे है….23-24 मई पूज्य सरकार के मुख़ारविन्द से राम के वन की संपूर्ण गाथा सुनिए सिर्फ़ बागेश्वर धाम सरकार के यूट्यूब/फ़ेसबुक पर…. pic.twitter.com/EfpfS2QCSA
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) May 22, 2023
इस याचिका पर हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में याचिकाकर्ता के वकील ने धीरेन्द्र शास्त्री की कथा आदिवासियों के धर्मस्थल बड़ा देव भगवान के बजाय कहीं और करवाने की माँग की। इस माँग पर जस्टिस विवेक अग्रवाल ने सवाल किया कि जहाँ अभी कथा होनी है वहाँ किस बात से आदिवासी लोगों की भावनाएँ आहत होंगी और वहाँ की मान्यताएँ क्या हैं? कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता के वकील कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
इस दौरान उन्होंने संविधान का हवाला दिया और जज पर अपनी बात न सुनने का आरोप लगा दिया। वकील ने कहा, “ये संविधान में प्रावधान हैं। वही तो बता रहा हूँ। आप समझने को तैयार नहीं हैं।"
वकील के जवाब पर जस्टिस विवेक ने उन्हें ठीक से बात करने के लिए कहा। हालाँकि, इसके बाद भी वकील ने कोर्ट में जज से कहा, “आप सुनने को तैयार नहीं हैं। कुछ भी बोले जा रहे हैं।” वकील के इन शब्दों पर जज ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने के आदेश दिए। जस्टिस विवेक ने कहा, “आपको हाईकोर्ट में बहस करने का तरीका नहीं मालूम है। अपना जवाब आप नोटिस में दीजिएगा।” जज ने आगे से गलत बहस करने पर वकील को जेल भेजने की भी चेतावनी दी।
इस वीडियो में आगे जस्टिस विवेक ने वकील से ‘सर्व आदिवासी समाज’ के बारे में पूछते हुए सवाल किया कि उन्हें बहस के लिए किसने अधिकृत किया। साथ ही कहा, “ध्यान रहे। जरा सी भी उल्टी-सीधी बहस की तो यहीं से जेल भेजूँगा। वकालत ख़त्म हो जाएगी। तहजीब से बात करना सीखो। बदतमीजी करना भूल जाओगे सारी। तुम लोगों ने ये सोच लिया है कि बदतमीजी करके अपने आप के लिए बहुत बड़ी TRP जमा कर लोगे? ये भूल जाते हो कि जिस दिन हमने जेल भेज दिया उस दिन सारी वकालत बंद हो जाएगी। तुम लोगों को सिखा कर भेजा जाता है कि बदतमीजी करो।”
जज ने वकील से माफ़ी माँगने के लिए भी कहा। एक सवाल के सवाब में वकील ने खुद के हाईकोर्ट में साल 2007 से प्रैक्टिस किए जाने की बात कही। याचिकाकर्ता के नाम के तौर पर हेमलता दुर्वे और कर्नल हरनाम का नाम था। याचिकाकर्ता समूह सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष का नाम के तौर पर सादे कागज में मंशाराम मरावी दर्ज था। जस्टिस विवेक ने इस संगठन के रजिस्ट्रेशन और लेटर हेड आदि के बारे में पूछा तो वकील ने रजिस्ट्रेशन होने पर कोर्ट में न लगाने की जानकारी दी। इस जवाब पर जस्टिस विवेक ने टिप्पणी करते हुए ऐसी याचिका को ‘स्पॉन्सर पेटिशन’ कहा।
आखिरकार हाईकोर्ट ने यह याचिका ख़ारिज कर दी। जस्टिस विवेक ने वकील से रजिस्ट्रेशन लगा कर केस फिर से फाइल करने की सलाह दी। साथ ही अंत में कहा, “पक्षकार को बताइएगा कि हमारी गर्मी दिखाने की वजह से कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया।” अपने आदेश में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने इस बात का भी जिक्र किया कि तथाकथित ‘सर्व आदिवासी समाज’ के वकील ने सवालों के जवाब देने के बजाय बेवजह की बहस की। आदेश के मुताबिक, अधूरे कागजातों के साथ पेश हुआ याचिकाकर्ता ये साबित नहीं कर पाया कि प्रस्तावित कथा से आदिवासी समाज की भावनाएँ कैसे आहत होंगी।
खास बात ये रही कि यह याचिका दायर करने वाले वकील को इसी मामले में जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा 18 मई को दिए गए आदेश की जानकारी नहीं थी। तब जस्टिस विवेक ने धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम को रोकने की याचिका ख़ारिज कर दी थी।
18 मई को ख़ारिज हुई थी पहली याचिका
गौरतलब है कि धीरेन्द्र शास्त्री के 23-24 मई वाले इसी कार्यक्रम को रद्द करवाने संबंधी एक याचिका 18 मई को जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने ख़ारिज कर दी थी। तब दिवासी विकास परिषद के दिनेश कुमार ध्रुव की ओर से पेश हुए वकील प्रह्लाद चौधरी ने कथा से आदिवासी क्षेत्रों के प्रभावित होने, आदिवासियों की मर्जी के विरुद्ध आयोजन होने, ग्रामसभा की अनुमति न होने और साल 2023 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने जैसी दलीलें दी थीं। एडवोकेट चौधरी ने धीरेन्द्र शास्त्री पर धार्मिक वैमनस्यता फैलाने का भी आरोप लगाया था।
इन दलीलों के जवाब में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने आपत्ति होने पर किसी संगठन की बजाय सीधे ग्रामसभा को कोर्ट आने की बात कही थी। आयोजन के लिए ग्रामसभा की अनुमति की जरूरत न होने की जानकारी देते हुए उन्होंने याचिका को प्रायोजित बताया था। साथ ही जस्टिस विवेक ने बताया था कि इस बात के भी सबूत नहीं हैं कि कथा से आदिवासियों पर असर पड़ेगा। कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी उन्होंने राज्य सरकार की बताई थी।
गौरतलब है कि हिन्दू धर्म को बढ़ावा देने वाले वीडियो के वायरल होने के बाद से बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र शास्त्री को फायरब्रांड कथावाचक कहा जाने लगा है। अभी कुछ समय पहले ही बिहार सरकार द्वारा उनके एक कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया गया था। खुद पर हो रहे इन हमलों पर टिप्पणी करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने उस हाथी का उदाहरण दिया जिसके गाँव में जाने पर कई लोग उसे केले, पूड़ी और तरह-तरह के पकवान खिलाते कर गणेश मानकर उसकी पूजा करते हैं तो दूसरी तरफ आवारा कुत्ते भौंकने लगते हैं।
बकौल धीरेन्द्र शास्त्री, अगर हाथी कुत्तों को जवाब देने लगे तो लोग हाथी को पागल ही कहेंगे, इसलिए हाथी उन कुत्तों को अनदेखा करते हुए अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहता है।
महंत धीरेन्द्र शास्त्री के बिहार प्रवास के दौरान सनातन विरोधियों द्वारा जिस प्रकार विरोध किया गया, उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उन्हें किसी हिन्दुत्व नहीं बल्कि तुष्टिकरण कर कुर्सी प्यारी है। इतना ही नहीं, एक मुस्लिम विधायक द्वारा यह कहना कि बाबा 'या अली' और 'अल्लाह हु अकबर' भी बोलें। जिसका मीडिया ने भी खूब प्रचार-प्रसार किया। लेकिन किसी ने उस मुस्लिम विधायक एवं उसकी पार्टी से यह पूछने का साहस नहीं किया कि इस तरह के नारे कब लगते हैं? दूसरे, क्या किसी मुस्लिम अधिवेशन में 'हिन्दू धर्म की जय' या 'जय श्रीराम' बुलवाने का साहस कर सकते है, यदि नहीं, फिर किसी हिन्दू धर्म सभा में मुस्लिम नारों की मांग क्यों? इनके इस षड्यंत्र को समझना होगा। देश में शांति बनाये रखने के लिए इन षड्यंत्रकारियों का बहिष्कार करना होगा। तमाम विवादों के बीच मध्य प्रदेश के बागेश्वर के महंत धीरेंद्र शास्त्री का बिहार की राजधानी पटना में आयोजन हनुमंत कथा का बुधवार (17 मई 2023) को समापन हो गया। इस बीच पटना में उनके पोस्टर्स पर कालिख पोत दी गई और उस पर 420 और चोर लिख दिया गया है। हालाँकि, ऐसा करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘दिल से कैसे निकालोगे’।
पटना में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कथा सुनने आए श्रद्धालुओं से ‘माला और भाला’ साथ रखने का आह्वान किया। भगवान हनुमान को शास्त्र और अंगद को शस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में शास्त्र और शस्त्र दोनों की जरूरत है। शास्त्र और शस्त्र दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। एक डंडा निकाला तो शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए माला और भाला दोनों होना जरूरी है।”
पटना में पोस्टर फाड़े जाने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “पोस्टर तो फाड़ा जा सकता है, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे।” इस दौरान उन्होंने शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “सितारों को आँखों में महफूज रखना, क्योंकि बहुत देर तक रात ही रात होगी। मुसाफिर हो तुम भी… मुसाफिर हैं हम भी, बालाजी ने चाहा तो किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।।”
अंतिम में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी पहुँचीं और उनसे मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी पास बैठे हुए थे। कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री पटना एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से चार्टर्ड प्लेन में सवार होकर मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। पटना में उनकी कथा में जुटे लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट पर सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी थी।
कहा जा रहा है कि पटना के नौबतपुर के तरेत पाली मठ के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा गया में आयोजित की जाएगी। उन्होंने 15 मई 2023 को ऐलान किया था कि 29 सितंबर 2023 को गया में हनुमंत कथा का आयोजन होगा और दरबार लगेगा।
राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म से। उन्होंने कहा कि बिहार में बाबा बागेश्वर ने जिस तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई है, यह ठीक नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर कालिख पोतने और चोर लिखने पर भाजपा और लोजपा (रामविलास) भड़क गई है। भाजपा ने कहा कि यह काम राजनीतिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है और वोट की राजनीति को लेकर किया है। वहीं, चिराग पासवान ने भी इसकी निंदा की है।
हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन ने दिसंबर 2022 में झारखंड में जनजाति समुदाय के खिलाफ लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिन्दू एक हाथ में माला ले तो दूसरे हाथ में भाला ले, ताकि धर्मांतरण करने वाले सचेत हो जाएँ।
पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को मोहरा बनाकर सनातन धर्म पर हमला करने वाले पाखंडी धर्म-निरपेक्ष मौलवी और पादरियों द्वारा धर्मांतरण करने पर क्यों चुप्पी साधे रहते हैं? जबकि धीरेन्द्र किसी मजहब के विरुद्ध नहीं बोल रहे, बल्कि अपने दरबार में अपने उस मुसलमान मित्र का वर्णन करना भी नहीं भूलते, जिसने अपनी बहन समझ उनकी बहन की शादी करवाई थी। 20,000 रूपए देने के अलावा बहन का सारा दहेज़। मै और मेरी बहन हिन्दू और मुसलमान।
बापू आसाराम जिन्हें बलात्कार के आरोप में जेल में डाला गया, पाखंडी धर्म-निरपेक्ष जवाब दो कि पीड़िता और उसके माँ-बाप से घंटों पहले मीडिया कमला मार्केट थाने कैसे पहुंचा? क्या मीडिया इतनी अन्तरयामी है कि पीड़िता पुलिस में शिकायत करने आ रही है? सारे चैनल सुबह से लेकर शाम आसाराम को आरोपी सिद्ध करते रहे। रपट कमला मार्केट थाने में ही क्यों? क्या मीडिया ने कभी सच्चाई जानने की कोशिश की? यदि नहीं तो क्यों? देखिए संलग्न मेरी प्रकाशित रपट। जिसका आज तक किसी ने खंडन नहीं किया।
बापू के विरुद्ध षड्यंत्र जून 2012 से चल रहा था, जब अपने एक समागम में उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी की छत्रसाया में ईसाई मिशनरी देश में धर्मान्तरण करने पर कहा था कि "सोनिया मैडम बहुत हो चूका तुम हिन्दुओं को ईसाई बनवाओगी आसाराम और उसके चेले उन्हें वापस हिन्दू बनाएंगे..." क्यों नहीं मीडिया ने सच्चाई सामने लेकर आयी? कहाँ थी खोजी पत्रकारिता? क्या खोजी पत्रकारिता हिन्दुओं के ही विरुद्ध जागती है?
बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आजकल चर्चा में हैं। हर चैनल पर बाबा बागेश्वर धाम छाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके बारे में ही चर्चा हो रही है। अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर जादू-टोने और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है। अगर इस आरोप को सकारात्मक रूप में देखा जाये तो अब उंगलियां दूसरे मजहबों में हो रहे धर्मांतरण पर चर्चा करनी शुरू कर प्रश्नचिन्ह लगाने शुरू कर दिए हैं। यही कारण है कि इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के पक्ष में भी लोग सामने आ गए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स बागेश्वर धाम सरकार के समर्थन में खड़े हो गए हैं।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का साफ कहना है कि जब से उन्होंने धर्मांतरण और घर वापसी का मुद्दा उठाया है, तब से इससे जुड़े कुछ लोग उनके पीछे पड़ गए हैं। विदेशी फंडिंग प्राप्त संस्थाओं की ओर से हो रहे धर्मांतरण के खिलाफ अभियान चलाने के कारण बागेश्वर धाम का विरोध हो रहा है। अंधविश्वास के सवाल पर लोगों का साफ कहना है कि क्या पादरियों के सामने पागल बन कर नाचना और दरगाहों पर चादर चढ़ाना सही है?
हिन्दू लड़कियों से लव जेहादियों से सतर्क रहने की बात करते उन्हें 'बहन' कहकर सम्बोधित करते हैं। इतना ही नहीं, जिस मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया, उसे भी 'बहन' कहकर सम्बोधित किया।
सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे है कि अगर ताबीज- झाड़-फूंक और ईसाई मिशनरियों की ओर से आयोजित चंगाई सभा ठीक है तो फिर धीरेंद्र शास्त्री गलत कैसे हैं? लोगों का कहना है कि सनातन धर्म पर सवाल उठाने वाले ईसाई मिशनरियों और पीर-बाबाओं के चमत्कार पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं? इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग ईसाई मिशनरियों और पीर-बाबाओं के चमत्कार वाले कई वीडियो शेयर पर तंज कस रहे हैं।
बागेश्वरधाम बाबा सही या गलत, मैं नहीं जानता। लेकिन उन पर सवाल उठाने वालों, दोहरे चरित्र से बाहर निकलो। ये मौलाना-मौलवी जो ताबीज़ और झाड़-फूंक करते हैं, जो ईसाइयों की 'चंगाई सभा' होती है, इस पर भी बोल लो। अन्य धर्म पर बोलने में 'लकवा' मार जाता है?#BageshwarDham#DhirendraShastri
— Abhishek Katyayan (कात्या) (@AbhisheKatyayan) January 22, 2023
बताशा खिलाकर कैंसर ठीक करने वाली मदर टेरेसा पर तर्कवादियो का क्या कहना है? क्या इन्हें बलजिंदर सिंह, अंकुर नरूला और पॉल दिनाकरन के अस्तित्व की जानकारी नहीं है? या फिर इनका मानना यह है कि चमत्कार सिर्फ ईसा मसीह के नाम पर किया जा सकता है?
दरअसल ईसाई मिशनरी और मुसलमान तबके के विरोध में बोलना घातक हो सकता है, इसीलिए ये लोग फेविकोल चबाए रहते है जब भी इनकी बारी आती है। वही हिंदू भावनाओ का मजाक उड़ाना, उनके धर्म गुरुओं को कुछ भी बोल देना आसान माना जाता है।
#बागेश्वर_धाम_सरकार#BageshwarDham#DhirendraShastri Living in India, if any🚩Hindu saint and monk is doing something for his religion, then he is a blind devotee, it is a miracle, it is mind reading! If a person of other religion is doing the same, then he is not a blind devotee pic.twitter.com/5P7FfFk3BM