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धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा में शामिल दिग्विजय सिंह के कांग्रेसी MLA बेटे जयवर्धन सिंह, ने कहा - ‘हिंदुओं में एकता जरूरी, भारत है हिंदू राष्ट्र’, 'सनातन बोर्ड की मांग उचित'

                                            धीरेंद्र शास्त्री के साथ जयवर्धन सिंह (फोटो साभार: प्रभा साक्षी)
मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) में ‘हिंदू एकता यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की एकता को बढ़ावा देना और जात-पात की दीवारें गिराना है। इस यात्रा में राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने इसमें शिरकत की। जयवर्धन ने यात्रा में हिस्सा लेकर सनातन धर्म और हिंदू एकता के प्रति अपना समर्थन जताया। 

'भगवा आतंकवाद' कहकर हिन्दू और सनातन धर्म को बदनाम करने वाले दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह द्वारा धीरेन्द्र शास्त्री की हिन्दू एकता यात्रा में शामिल होना क्या कांग्रेस में हिन्दुत्व को लेकर खींचतान चल रही है?  

धर्म के लिए एकजुटता जरूरी: जयवर्धन सिंह

जयवर्धन सिंह ने यात्रा के दौरान कहा, “यह यात्रा किसी पार्टी की नहीं बल्कि सनातन धर्म की है। जात-पात को खत्म कर समाज को एकजुट करना जरूरी है। संत अगर सनातन बोर्ड बनाने की बात करते हैं, तो यह विचार सही दिशा में है। हम सनातन के भक्त हैं और हमेशा रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास है, जिसमें सभी समाजों को समान सम्मान दिया जाना चाहिए। जयवर्धन ने हिंदू धर्म को भारत की आत्मा बताते हुए कहा, “हर धर्म की शुरुआत किसी न किसी स्थान से हुई है, और हिंदू धर्म की शुरुआत भारत से हुई है। इसलिए भारत स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र है।”

जहाँ जयवर्धन सिंह सनातन धर्म की बात कर रहे हैं, वहीं उनके पिता दिग्विजय सिंह का भगवा आतंकवाद पर बयान अक्सर चर्चा में रहा है। जयवर्धन की इस यात्रा में भागीदारी को उनके पिता से अलग विचारधारा के तौर पर देखा जा रहा है। जयवर्धन ने जाति आधारित भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारे कर्म सबसे अहम हैं। भगवान कृष्ण ने भी यही कहा है कि कर्मों के जरिए समाज का कल्याण होगा। अगर जात-पात की सीमाओं को खत्म करेंगे, तो समाज और देश दोनों आगे बढ़ेंगे।”

धीरेंद्र शास्त्री ने 21 नवंबर को इस यात्रा की शुरुआत बागेश्वर धाम से की, जो 160 किलोमीटर की दूरी तय करके 29 नवंबर को ओरछा में समाप्त होगी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और हिंदुओं को एकजुट करने के लिए है। जात-पात, बोली और भाषा के विभाजन को मिटाने के लिए हमें एकता के मार्ग पर चलना होगा।” शास्त्री ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को बचाने और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों को इस यात्रा का हिस्सा बनने का न्योता दिया।

धीरेंद्र शास्त्री और जयवर्धन सिंह के बयानों ने हिंदू एकता और जातिवाद के खिलाफ खड़े होने के संदेश को एक नया आयाम दिया है। यह यात्रा धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर कॉन्ग्रेस के भीतर।

दुबई में चल रही हनुमत कथा, शेखों ने गुलाब के फूल बरसा कर बागेश्वर बाबा का किया स्वागत: गोल्डन वीजा पर अबुधाबी के मंदिर में सुपरस्टार रजनीकांत

सुपरस्टार रजनीकांत पहुँचे अबुधाबी के BAPS मंदिर (बाएँ), बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का दुबई में भव्य स्वागत (दाएँ)
सुपरस्टार रजनीकांत और बागेश्वर धाम वाले बाबा पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री UAE (संयुक्त अरब अमीरात) पहुँचे हैं। दोनों अलग-अलग यहाँ पहुँचे और उनका भव्य स्वगात हुआ। अरब देश हाल के दिनों में लिबरल हो रहे हैं और इससे भारत के इस्लामी कट्टरपंथी भी चिढ़ते हैं। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत हैं, वहीं सुपरस्टार रजनीकांत पिछले 5 दशक से दक्षिण भारत में बॉक्स ऑफिस सफलता की गारंटी माने जाते हैं।

दुबई में बागेश्वर धाम वाले बाबा का भव्य स्वागत

दुबई में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का भव्य स्वागत हुआ। वायरल तस्वीरों में उनके साथ कई शेख भी दिख रहे हैं। दुबई स्थित दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज खलीफा का भी उन्होंने दौरा किया। वहाँ वो ऊपर से नज़रों को निहारते हुए भी दिखे। इसके बाद वो श्रद्धालुओं से मिले। 22 से 26 मई तक दुबई में उनका दरबार लग रहा है, साथ ही हनुमत कथा का भी आयोजन हो रहा है। इसमें हजारों श्रद्धालु जुट रहे हैं।

भारत में इस्लामी कट्टरपंथी पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का विरोध करते हैं, जबकि अरब के इस्लामी मुल्क में उनका स्वागत हो रहा है। अब्दुल्ला ग्रुप के चेयरमैन डॉ BU अब्दुल्ला ने उनका स्वागत किया। उन पर गुलाम के फूल बरसाए गए। BU अब्दुल्ला ने इसे एक विशेष अवसर बताते हुए कहा कि भारत-UAE के बीच सांस्कृतिक संबंधों एवं आध्यात्मिक एकता का जश्न मनाने के रूप में इसे देखा जाना चाहिए। धीरेन्द्र शास्त्री लंदन में भी कथा कर चुके हैं।

सुपरस्टार रजनीकांत को UAE का गोल्डन वीजा, पहुँचे अबुधाबी

सुपरस्टार रजनीकांत को UAE ने गोल्डन वीजा दिया है। बता दें कि गोल्डन वीजा एक लॉन्ग टर्म वीजा होता है, जिसके तहत कोई विदेशी नागरिक UAE में न सिर्फ रह सकता है बल्कि वहाँ काम और अध्ययन भी कर सकता है। BAPS मंदिर ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सुपरस्टार वहाँ पहुँच कर दर्शन करते और लोगों से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने घूम कर पूरे मंदिर को भी देखा। इस मंदिर का उद्घाटन फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
सुपरस्टार रजनीकांत ने हाल ही में ‘जय भीम’ (2021) के निर्देशक TJ गोंजाल्व्स के निर्देशन में बनी फिल्म ‘Vettaiyan’ की शूटिंग पूरी की है। इसके बाद वो क्राइम पर फ़िल्में बनाने वाले लोकेश कनगराज के निर्देशन में बन रही फिल्म फिल्म ‘कुली’ में काम करेंगे, जो उनकी 171वीं फिल्म होगी। सुपरस्टार रजनीकांत कभी भी अपनी धार्मिक पहचान छिपाते नहीं। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी पाँव छुए थे, क्योंकि वो गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर हैं।

सनातन के संयम की अग्नि परीक्षा कब तक? राम मंदिर से सुलग रहे मुस्लिम बाबा बागेश्वर के दरबार से पहले हिंसा पर उतरे, ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए किया हमला: नेपाल में कर्फ्यू, भारत में अलर्ट

      बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम से पहले नेपाल में मुस्लिमों का उपद्रव (फोटो साभार: FB/Namaste Bhaktapur)
नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद सीमा से सटे भारतीय इलाकों में अलर्ट है। सुनसरी के रामनगर भुटाहा में कर्फ्यू लगाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम का प्रचार कर रहे हिंदू संगठन के सदस्यों पर हमले के बाद माहौल बिगड़ा है। इसके बाद जीवन मेहता नाम के एक हिंदू युवक की बुरी तरह पिटाई की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही कट्टरपंथी भड़के हुए थे। अभी तक इस मामले में मुस्लिम समुदाय के दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है।

अब चर्चा है कि आखिर मुस्लिम कट्टरपंथी और इनके समर्थक नेता/पार्टियां सनातन के संयम की कब तक अग्नि परीक्षा लेते रहेंगे? आखिर कब तक जेहादी सनातन/हिन्दू पर जानलेवा हमले करते रहेंगे? क्या जेहादी और इनको समर्थन दे रहे नेता और पार्टियां सनातन के संयम की ज्वालामुखी के फटने का इंतज़ार कर रहे हैं? इन लोगों को इतना भी ज्ञान नहीं कि सनातन/हिन्दू भ्रमित करने वाले सेकुलरिज्म को कुचलने की ओर अग्रसर है। अब और अधिक सनातन/हिन्दू इस भ्रमित जाल में नहीं फंसने को तैयार। भारत का वास्तविक इतिहास बड़ी तेजी खुलना शुरू हो चुका है। सेकुलरिज्म को अपनाने से पहले इसका अर्थ इन छद्दम सेक्युलरिस्ट्स को समझना होगा। दंगों में हमेशा बेगुनाह मरता रहा है, किसी जेहादी और इनको समर्थन देने वाले नेता/पार्टियों के घर के पक्षी तक को कुछ नहीं होता। कर्फ्यू में परेशान जनमानस होता है, उसकी चिंता करो। 

आजकल चुनावी दौर चल रहा है, हर नेता/पार्टी आपसे वोट मांगने आने पर उनसे प्रश्न करिए कि जिस तरह जाति के आधार पर हिन्दुओं को विभाजित किया जाता रहा है, अगर 'माँ का दूध पीया है तो इसी तरह दूसरे धर्मों पर बोलकर दिखाओ' तुरंत साम्प्रदायिक तत्व कहकर धमकाने का प्रयास किया जाएगा। हिन्दू फिर एक ही मंदिर में जाता है, अंतिम संस्कार भी एक ही शमशान घाट पर होता है, लेकिन अन्य मजहबों में नहीं। मस्जिदें, चर्च और कब्रस्तान अलग है। क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है? 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बागेश्वर सरकार का कार्यक्रम 17 अप्रैल को सुनसरी के चतरा में होना है। इस कार्य्रकम का प्रचार कर रहे विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया, जिसके बाद हालत तनावपूर्ण हो गए। नेपाली प्रशासन ने पीस कमेटी की मीटिंग बुलाई थी, लेकिन उसमें मुस्लिम समुदाय के जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा नहीं लिया। नेपाल में तनाव को देखते भारत की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है।

इस विवाद की शुरुआत 4 अप्रैल 2024 (गुरुवार) को हुई। जीवन मेहता नाम का युवक हरिनगर इलाके के रामनगर के एक स्कूल से अपनी बहन को घर ले जाने के लिए बाइक से गया था। यहाँ पर लगभग 150-200 की तादाद में मुस्लिमों की भीड़ जमा हो गई। इन सभी ने जीवन मेहता को बेरहमी से मारा। जान बचाने के लिए जीवन मेहता स्कूल में घुस गया, लेकिन भीड़ ने वहाँ भी उसे नहीं छोड़ा। हमलावरों में बच्चे, बूढ़े और जवान सभी उम्र के लोग शामिल थे।

घटना के एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि भीड़ ने जीवन मेहता को स्कूल से निकाल कर रामनगर भुटहा बाजार में दौड़ा-दौड़ा कर मारा। आरोप है कि इस दौरान पुलिस-प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी मूकदर्शक बना रहा। बताया जा रहा है कि भीड़ ने जीवन मेहता को पुलिस से छीनने का भी प्रयास किया। उसे अस्पताल ले जाने के दौरान भी रास्ते में रुकावट डाली गई। जीवन मेहता को सुनसरी जिले के सरकारी अस्पताल के ICU वार्ड में भर्ती करवाया गया। मारने वाली भीड़ का नेतृत्व फय्याज अंसारी कर रहा था।

फय्याज अंसारी के अब्बा गफ्फार हरिनगर गाँवपालिका का अध्यक्ष है। हरिनगर गाँवपालिका भारत से सटा हुआ मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। इस घटना के विरोध में अगले दिन शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। सड़क जाम कर के हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पर भी मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। हमलावरों की तादाद 500 के आसपास थी। हिंसक भीड़ ‘नारा ए तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रही थी। दोनों पक्षों की भिड़ंत में दर्जनों लोग घायल हो गए।

हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रशासन ने हवाई फायरिंग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस फायरिंग में 2 हिन्दू युवकों को गोली लग गई। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फिलहाल दोनों की हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है। हिंसक भीड़ ने ब्रह्मदेव मेहता नाम के एक नेपाली पत्रकार पर भी हमला किया। उन्हें पत्थरों और लाठियों से पीटा गया। ब्रह्मदेव का कैमरा छीन कर मोबाइल को तोड़ दिया गया। पत्रकार पर हमले का मास्टरमाइंड सज्जाद को बताया जा रहा है। सज्जाद अंसारी गाँवपालिका अध्यक्ष गफ्फार का दायाँ हाथ बताया जाता है।

इस हिंसा के बाद सुनसरी जिले के हिन्दू समुदाय एकजुट हो गए। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों को चिन्हित करने का काम कर रही है। हिंसा को काबू करते हुए 17 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ स्थानीय मुस्लिम पत्रकार अपने ही समुदाय को प्रताड़ित बताने का प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।पीड़ित के तौर पर हिन्दुओं के बजाय मुस्लिमों को बता रहे हैं। इन पत्रकारों में ताबिल अंसारी, नसीम, अजमल नेपाली और मोहसीम अंसारी के नाम प्रमुख बताए गए। इन सभी पर हिन्दुओं के ही खिलाफ भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप है।

घटना के एक चश्मदीद ने ऑपइंडिया को बताया कि मामले की शुरुआत अयोध्या में राममंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के समय से हुई थी। तब हरिनगर के ही गौतमपुर इलाके में वार्ड नंबर 3 में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने हिन्दू युवकों द्वारा लगाए गए भगवा ध्वज को नोंच कर फेंक दिया था। इस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों ने दोनों पक्षों को समझा कर मामले को दबा दिया था। इस घटना के विरोध में जीवन मेहता ने एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में जीवन मेहता ने भगवा झंडा के अपमान पर मुस्लिमों की आलोचना की थी। इसके बाद से ही वे मुस्लिमों के निशाने पर थे।


हिन्दू धर्म सभा में 'अल्लाह-हु-अकबर' और 'या अली' नारों की मांग करने वाले क्या मुस्लिम सम्मलेन में 'जय श्रीराम' या 'जय हिन्दुत्व' बुलवा सकते हैं?

महंत धीरेन्द्र शास्त्री के बिहार प्रवास के दौरान सनातन विरोधियों द्वारा जिस प्रकार विरोध किया गया, उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उन्हें किसी हिन्दुत्व नहीं बल्कि तुष्टिकरण कर कुर्सी प्यारी है। इतना ही नहीं, एक मुस्लिम विधायक द्वारा यह कहना कि बाबा 'या अली' और 'अल्लाह हु अकबर' भी बोलें। जिसका मीडिया ने भी खूब प्रचार-प्रसार किया। लेकिन किसी ने उस मुस्लिम विधायक एवं उसकी पार्टी से यह पूछने का साहस नहीं किया कि इस तरह के नारे कब लगते हैं? दूसरे, क्या किसी मुस्लिम अधिवेशन में 'हिन्दू धर्म की जय' या 'जय श्रीराम' बुलवाने का साहस कर सकते है, यदि नहीं, फिर किसी हिन्दू धर्म सभा में मुस्लिम नारों की मांग क्यों? इनके इस षड्यंत्र को समझना होगा। देश में शांति बनाये रखने के लिए इन षड्यंत्रकारियों का बहिष्कार करना होगा।   
तमाम विवादों के बीच मध्य प्रदेश के बागेश्वर के महंत धीरेंद्र शास्त्री का बिहार की राजधानी पटना में आयोजन हनुमंत कथा का बुधवार (17 मई 2023) को समापन हो गया। इस बीच पटना में उनके पोस्टर्स पर कालिख पोत दी गई और उस पर 420 और चोर लिख दिया गया है। हालाँकि, ऐसा करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘दिल से कैसे निकालोगे’।

पटना में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कथा सुनने आए श्रद्धालुओं से ‘माला और भाला’ साथ रखने का आह्वान किया। भगवान हनुमान को शास्त्र और अंगद को शस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में शास्त्र और शस्त्र दोनों की जरूरत है। शास्त्र और शस्त्र दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। एक डंडा निकाला तो शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए माला और भाला दोनों होना जरूरी है।”

पटना में पोस्टर फाड़े जाने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “पोस्टर तो फाड़ा जा सकता है, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे।” इस दौरान उन्होंने शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “सितारों को आँखों में महफूज रखना, क्योंकि बहुत देर तक रात ही रात होगी। मुसाफिर हो तुम भी… मुसाफिर हैं हम भी, बालाजी ने चाहा तो किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।।”

अंतिम में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी पहुँचीं और उनसे मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी पास बैठे हुए थे। कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री पटना एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से चार्टर्ड प्लेन में सवार होकर मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। पटना में उनकी कथा में जुटे लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट पर सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी थी।

कहा जा रहा है कि पटना के नौबतपुर के तरेत पाली मठ के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा गया में आयोजित की जाएगी। उन्होंने 15 मई 2023 को ऐलान किया था कि 29 सितंबर 2023 को गया में हनुमंत कथा का आयोजन होगा और दरबार लगेगा।

राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म से। उन्होंने कहा कि बिहार में बाबा बागेश्वर ने जिस तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई है, यह ठीक नहीं है। 

धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर कालिख पोतने और चोर लिखने पर भाजपा और लोजपा (रामविलास) भड़क गई है। भाजपा ने कहा कि यह काम राजनीतिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है और वोट की राजनीति को लेकर किया है। वहीं, चिराग पासवान ने भी इसकी निंदा की है।

हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन ने दिसंबर 2022 में झारखंड में जनजाति समुदाय के खिलाफ लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिन्दू एक हाथ में माला ले तो दूसरे हाथ में भाला ले, ताकि धर्मांतरण करने वाले सचेत हो जाएँ।

‘रामचरितमानस घोषित हो राष्ट्रीय ग्रन्थ’: बागेश्वर धाम में मिशनरियों के चंगुल में फंसे 220 लोगों ने की घर-वापसी

बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने की घर-वापसी (साभार; आज तक)
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। इससे पहले भी वहाँ बालाजी के दरबार में घर-वापसी के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। बता दें की दशकों से मिशनरियों ने गरीब इलाकों, खासकर दलितों और जनजातीय समाज को निशाना बनाया हुआ है। उन्हें लालच देकर उनका धर्म-परिवर्तन कराया जाता है। उनमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा भरी जाती है।

सभी 220 लोगों को पीले रंग की पट्टिका पहनाई गई थी, जिसके बाद उनकी घर-वापसी कराई गई। ‘हिन्दू जागरण मंच’ की इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका रही, जो इन लोगों को लेकर यहाँ पहुँची थी। बुंदेलखंड इलाके के टपरियन, बनापुर, चितौरा और बम्हौरी सहित कई गाँवों के लोग घर-वापसी करने वालों में शामिल हैं, जिन्हें मिशनरियों ने बरगला लिया था। पीठाधीश्वर शास्त्री ने इस दौरान उन लोगों से अपील की कि वो प्रतिदिन मंदिर जाएँ।

घर-वापसी करने वालों ने बताया कि ईसाई मिशनरियों ने उन्हें घर देने का लालच दिया था, जिसके बाद उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़ दिया था। हालाँकि, वादा नहीं निभाया गया और उन्हें घर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वो अपनी मर्जी से घर-वापसी कर रहे हैं। धीरेन्द्र कृष्ण ने कहा कि शनिवार और मंगलवार को लोग हनुमान जी के मंदिर जाया करें। उन्होंने दोहराया कि वो किसी पंथ के विरोधी नहीं, लेकिन अपने धर्म के कट्टर हैं।

उन्होंने कहा कि भूल सबसे होती है। उन्होंने खुद के बारे में कहा कि उन्हें लोकप्रियता नहीं चाहिए। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने और भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की भी माँग की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक पार्टियाँ आशीर्वाद के अलावा उनसे और कोई अपेक्षा न रखें। घर-वापसी करने वालों में 62 परिवार के लोग शामिल हैं। ये लोग बसों में सवार होकर आए थे। उन्होंने बताया कि ईसाइयों के प्रभाव में आकर वो चर्च तक जाने लगे थे।

हाल ही में बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के मौके पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में 125 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। इसमें शामिल हुई 125 लड़कियों में से 58 ऐसी लड़कियाँ थीं, जिनके माता या पिता का निधन हो चुका है, यानी वो अनाथ थीं। इससे पहले यहीं एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम ने सनातन धर्म अपनाते हुए कहा था कि यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती। क्रिसमस 2022 के दिन पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा के दौरान भी दमोह में 300 लोगों ने घर-वापसी की थी।

बागेश्वर धाम सरकार को जान से मारने की धमकी : ‘धीरेंद्र शास्त्री की तेरहवीं की तैयारी कर लेना’

कहते हैं कि 'गांव बसा नहीं, लुटेरे पहले आ गए', महंत धीरेन्द्र शास्त्री ने अभी ठीक से अंगड़ाई भी नहीं ली कि सनातन विरोधियों की रोटी हराम हो गयी। धीरेन्द्र की तेहरवीं की तैयारी करने की धमकी दे डाली। धमकी देने से पहले धमकी देने वाले और उसके आकाओं ने अनहोनी के दुष्परिणाम के बारे में नहीं सोंचा। जब सनातन विरोधी अपनी नीचता पर आ रहे हैं, सनातन प्रेमियों को भी ऐसे लोगों को उनकी औकात दिखानी होगी। कानून हाथ में लिए बिना ऐसे लोगों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार करें। ये लोग चंद चांदी के टुकड़ों के लालच में ये कुछ भी कर सकते पर आ रहे हैं, क्योकि जो अपने धर्म का नहीं किसी का भी नहीं हो सकता। दूसरे पाले में उसकी किसी पशु से कम नहीं होती, इसीलिए इनका सामाजिक बहिष्कार जरुरी है। सनातन विरोधी पता नहीं किस भ्रम में है? जब हिन्दुओं का मिशनरियों और मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा धर्म-परिवर्तन किये जाने पर क्यों दही में मुंह जमा लेते हो या फिर क्या परिवार में शोक छाया होता है? सनातन धर्म को नुकसान इसी दोगलेपन से हुआ है।    

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों चर्चा में है। उनको जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी उनके चचेरे भाई लोकेश के मोबाइल पर 22 जनवरी 2023 की रात कॉल कर दी गई है। धमकी देने वाले ने अपना नामा अमर सिंह बताते हुए धीरेंद्र शस्त्री की तेरहवीं की तैयारी करने को कहा। लोकेश की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

यह मामला छतरपुर के थाना बमीठा क्षेत्र का है। धीरेंद्र शास्त्री के चचेरे भाई लोकेश ने तहरीर दे कर बताया है कि उनके मोबाइल नंबर पर रविवार को एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। जब उन्होंने फोन उठाया तो कॉल करने वाले ने धीरेंद्र से बात करवाने को कहा। जब लोकेश ने पूछा कि वह किस धीरेंद्र की बात कर रहा है तो कॉलर ने बागेश्वर धाम के महंत का नाम लिया। जवाब में लोकेश ने बात करवाने में असमर्थता जताई।

लोकेश के अनुसार यह सुनने के बाद कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को अमर सिंह बताते हुए कहा कि धीरेंद्र की तेरहवीं की तैयारी कर लेना। इसके बाद उसने फोन काट दिया। लोकेश ने पुलिस को दी गई तहरीर में कॉलर का नंबर बताते हुए उस पर अनर्गल बातें करने का आरोप लगाते हुए वैधानिक कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस तहरीर पर 23 जनवरी 2023 को अज्ञात व्यक्ति अमर सिंह के खिलाफ IPC की धारा 504 और 507 के तहत FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

जब ऑपइंडिया ने कॉल करने वाले आरोपित के नंबर पर कॉल किया तब वह बंद आया। ट्रू कॉलर पर यह नंबर मुंबई का और ‘बच्चा’ नाम से दिख रहा है। इसे 31 लोगों ने स्पैम भी कर रखा है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले महाराष्ट्र के नागपुर में ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इस पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं, जिसकी वजह से उनके विरुद्ध साजिशें रची जा रहीं हैं।

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उधर धीरेन्द्र शास्त्री पर केस दर्ज करवाने वाले श्याम मानव की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। श्याम मानव की सुरक्षा में पहले महाराष्ट्र प्रोटेक्शन यूनिट के 2 सशस्त्र जवान तैनात रहा करते थे .लेकिन अब उनकी सुरक्षा में 2 अन्य गनमैन और महाराष्ट्र के 3 अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। कुल मिला कर अब श्याम मानव 4 गनमैन और 3 अन्य पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में रहेंगे। हाल ही में नागपुर में सुरेश भट सभागृह में श्याम मानव के कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इसके अलावा उन्हें जान से मारने की भी धमकी मिलने की भी खबर है।

विदेशी फंडिंग वाली इन संस्थाओं का विरोध कीजिए, वरना कल को बड़ों के पाँव छूना भी कहलाएगा ‘अंधविश्वास’; देखिए वीडियो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना कोई नयी बात नहीं, वास्तव में हिन्दुओं को जागृत करने का शंखनाद किया था बाबा रामदेव ने। आधी रात को अनर्थ करने गए लोगों की बुद्धि ऐसी भ्रष्ट हुई कि  टैंटों में जाने में जाने से पहले से बिजली काट घुसने पर क्या हुआ, यह तो वही अपने श्रीमुख से बताएं तो अधिक उचित होगा। खैर, धीरेन्द्र की भांति बाबा का भी खूब विरोध हुआ था, परिणाम 2014 चुनावों में विरोधियों को धूल चाटने के लिए विवश होना पड़ा और आज तक धूल ही चाट रहे हैं। अब धीरेन्द्र का उठ रहा विवाद क्या 2024 में विरोधी मोदी को 350+ पार करवाएगी? आभास ऐसा ही हो रहा है। यह भी संभव हो सकता है 2024 चुनाव देश में हुए  प्रथम चुनाव को दोहराएगा? जिस तरह उस समय कोई मजबूत विपक्ष यानि हिन्दू महासभा नहीं था, वही स्थिति आज है। मोदी विरोधियों का दिलो-दिमाग इतना अधिक भ्रष्ट हो चूका है कि हिन्दुओं की धार्मिक पुस्तकों का अपमान करने से हिन्दुओं में शंका घर करने लगी है कि अगर यही हाल रहा तो विरोधियों की वर्तमान पीढ़ी के अलावा भावी पीढ़ी भी उन्हें पहचानने से इंकार न कर दें। 
याद करिए, बाबा रामदेव के पदापर्ण से पहले विदेशी कंपनियां नमक, हल्दी, तेल और कोयला आदि से मंजन करने के दुष्प्रभावों से डराने के साथ-साथ सरसों के तेल से होने वाले शरीर को नुकसान से जनता को डराया जा रहा था, जिसका इन विदेशी के गुलाम विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) भी समर्थन कर रहा था। आज वही विदेशी कंपनियां हैं जो बाबा रामदेव के पदचिन्हों पर चल टूथ पेस्ट बना रही हैं। कल तक जो डॉक्टर सरसों का तेल इस्तेमाल न करने की सलाह देते थे, आज कहते हैं refind की बजाए सरसों का तेल खाओ। 
दूसरे, महंत धीरेन्द्र द्वारा या कहना कि "तुम मेरा साथ दो, मै हिन्दू राष्ट्र बनाऊंगा", विषय समझ और नसमझ(eye or no eye) का है। यह तो वर्षों पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी गयी थी कि 2014 चुनाव के बाद भारत पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। भारत विश्वगुरु बन भगवा फहराएगा। हमें तुष्टिकरण की पुजारी सरकारों द्वारा पढ़ाया गया गलत इतिहास ही देश में सांप्रदायिक दंगे होते रहे। मुग़ल आक्रांताओं को महान बताया गया, जो सरासर गलत है। 
मुग़ल आक्रांताओं को महान बताने वालों से पूछिए कि अकबर मीना बाजार क्यों लगाता था? इस अय्याशी के बाजार में किसी भी उम्र के लड़के पर पाबन्दी थी, लेकिन अय्याश अकबर बुर्के में खूबसूरत और हसीन लड़की/औरत को देखते ही बुर्के में साथ चल रहे अपने सिपाहियों को उसे हरम में ले जाने के लिए कहता। इस अय्याशी के इस बाजार को बंद करवाने वाली वह राजपूत महिला किरण देवी कौन है? जब इस महिला ने अकबर को ज़मीन पर पटककर छाती पर पैर रख कटार निकलते अय्याश ने इस राजपूत से अपनी ज़िंदगी की भीख मांगते हुए हरम में कैद सभी महिलाओं को आज़ाद कर, अय्याशी बाजार यानि मीना बाजार लगाना बंद किया था। देखिए वीडियो
 
प्रमाण देखिए, नाथूराम गोडसे पर बनी फिल्म का कट्टरपंथियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। क्यों? जानते है क्यों, क्योकि मुस्लिम कट्टरपंथी और तुष्टिकरण पुजारी सच्चाई सामने आने से डर रहे हैं। और जो लोग गोडसे को पहला आतंकवादी कहते हैं, इनसे पूछो कि महात्मा गाँधी की किस साल हुई थी? और स्वामी श्रद्धानन्द की किस वर्ष हुई थी? दूसरे "रंगीला रसूल" के लेखक राजपाल की हत्या किस वर्ष हुई थी? तुष्टिकरण जनक गाँधी दोनों ही बार कातिलों के बचाव में नज़र आये थे। स्मरण हो, स्वामी श्रद्धानन्द और राजपाल की मुसलमानो द्वारा मॉब लिंचिंग में हत्या हुई थी, यानि पहला आतंकवादी कौन हिन्दू या मुसलमान? मॉब लिंचिंग किसकी देन है? आज क्यों उसी मॉब लिंचिंग पर सियापा किया जा रहा है? आइने में असलियत देख क्यों डर लग रहा है? आज victim card खेलने में शर्म क्यों नहीं आती? वैसे बेशर्मों और शैतानों को किस बात की शर्म?  देखिये वीडियो 
इन भड़काऊ नेताओं से यह भी पूछो कि 1. क्या कारण था कि कोर्ट ने गोडसे को माइक से बयान पढ़ने की क्यों दी थी? यह विश्व इतिहास है। 2. गोली लगने के बाद 40 मिनट तक गाँधी जीवित थे, क्यों नहीं उन्हें निकटतम तत्कालीन विलिंग्डन वर्तमान डॉ राम मनोहर लोहिया 
हॉस्पिटल लेकर गए? 5. क्या कारण था कि कोर्ट में दर्ज गोडसे के 150 बयान सार्वजानिक होने पर प्रतिबन्ध लगाया था? 6. 1984 सिख दंगों पर हर पार्टी छाती पीटती नज़र आती है, लेकिन गाँधी द्वारा स्वर्ग सिधारते ही आज़ाद भारत का सबसे भयंकर नरसंहार चितपावन ब्राह्मणों का हुआ था, क्यों नहीं आज तक जाँच करवाई गयी? 7. क्यों नहीं दोषियों को फांसी की मांग हुई? 8. गोडसे के 150 सुनने के बाद क्यों जस्टिस खोसला को कहना पड़ा कि 'अगर कोर्ट में और कोर्ट से बाहर मौजूद सभी लोगों को जज बना दिया जाये, सभी यही कहेंगे गोडसे निर्दोष है', तारीख पर हज़ारों की संख्या में लोग कोर्ट पहुँचते थे। गोडसे से बयानों को  साहित्य सदन, नई सड़क, दिल्ली से खरीद कर पढ़ सच्चाई का बोध करने पर गोडसे को आतंकवादी बताने वालों को जितना अपमानित किया जा सकता है, करिए।  
प्रतिदिन सूर्योदय होना भी चमत्कार है। फिर सूर्य का अस्ताचलगामी हो जाना भी चमत्कार है। बुद्ध ग्रह पर 243 दिनों का तक सूर्य का अस्त न होना भी चमत्कार है और बृहस्पति पर 10 घंटे में ही दिन-रात का बीत जाना भी चमत्कार है। आप कहेंगे कि ये ग्रह तो स्पिन हो रहे हैं अपने ही अक्ष पर, तो मैं कहूँगा कि ये भी चमत्कार है। आप इसके पीछे विश्व ज्यादा इनर्शिया, मोशन और ग्रेविटी समझा देंगे, मैं इसे भी चमत्कार बता दूँगा।

इसीलिए, समस्या ये नहीं है कि कोई चमत्कार करता है, बल्कि मुद्दा ये है कि आपकी नज़र में चमत्कार क्या है। एक अँधे को आँख आ जाने पर उसे जो दुनिया दिखाई देती है, वो चमत्कार ही चमत्कार है। हमने टीवी शोज में कई ऐसे मनोवैज्ञानिक देखे हैं, मन को पढ़ने वाले देखे हैं जो सामने वाले के भावों को तुरंत बता देते हैं। ये एक अध्ययन है, अभ्यास है, कला है। कभी शत-प्रतिशत सही भी हो सकता है तो कभी ऐसा भी हो सकता है कि कोई अनुमान ही न लग पाए।

ऐसे व्यक्ति को सारा सेटअप अपने हिसाब से चाहिए होता है, माहौल अनुकूल चाहिए होता है। जैसे Astrology विज्ञान है, वैसे ही मनोविज्ञान भी है। अगर कोई किसी के मन को पढ़ कर भगवान से उनके लिए प्रार्थना कर रहा है, अब ये चमत्कार है तो है। ये वही ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ है, जिसने मदर टेरेसा की तारीफ़ की थी और कहा था कि वो अनाथों, बुजुर्गों और रोगियों की काफी मदद करती हैं। ये वही समिति है, जिसने जल में प्रतिमा विसर्जन के विरुद्ध अभियान चलाया था।

ये वही संस्था है, जिसे विदेश से फंडिंग प्राप्त होती है और इसे छिपाने के लिए उसे केंद्र सरकार से नोटिस भी जारी हुआ था। विदेश से इस संस्था को फंडिंग किसलिए आ रही है, सोचने वाली बात है। आज अगर हमने इनका विरोध नहीं किया तो कल को ऐसी संस्थाएँ बहुतायत में खड़ी हो जाएँगी और कहेंगी कि मंदिरों का अस्तित्व ही अंधविश्वास है और बड़ों के पाँव छूना भी अंधविश्वास है। आप उसके पीछे का विज्ञान साबित करते रह जाएँगे और ये एक कानून पारित करवा कर ऐसी चीजों को प्रतिबंधित भी करवा दें तो कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है।

हाँ, पादरियों के सामने पागल बन कर नाच करना और दरगाहों पर चादर चढ़ाना इसकी श्रेणी में नहीं आएगा। असली समस्या ये है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के गरीब व जनजातीय इलाकों में ईसाई मिशनरियों के प्रभाव को वहाँ के एकाध लोग कम कर रहे हैं। एक राजपरिवार से है, एक संत है। घर-वापसी के इन अभियानों ने उस खेमे की बेचैनी बढ़ा दी है, जिसे सबसे ज्यादा विदेशी फंडिंग प्राप्त होती है। उनके ‘चमत्कार’ से अवाक होकर जो लोग उधर जाते हैं, उन्हें इधर रोकने के लिए भी थोड़ा ‘चमत्कार’ आवश्यक है।

एक वर्ग के मन में ये भाव रहना चाहिए कि साधु-संतों के सामने ये पादरी कुछ भी नहीं हैं। जिस इलाके से पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री आते हैं और जैसे लोगों को उन्हें सनातन में रोक कर रखना है, ‘चमत्कार’ उनकी मजबूरी भी है और कलाकारी भी। अब समस्या तो यहाँ ये रह भी नहीं गई है कि वो जो करते हैं उसे चमत्कार कहा जाए या नहीं। समस्या ये है कि आप किसकी तरफ हैं – ईसाई मिशनरियों के या फिर बागेश्वर धाम सरकार के? एक 27 वर्ष का युवक इतना बड़ा कार्य कर रहा है तो उसका समर्थन तो बनता है।

कम से कम व्यास पीठ से अली मौला करने वालों और ‘दम-दम अली अली’ पर नाचने वालों से तो वो बेहतर है (हालाँकि, विरोध मैं ऐसे कथावाचकों या संतों का भी नहीं करता, क्योंकि अगर वो कुछ बहुत अच्छा वृहद् स्तर पर कर रहे हैं तो हल्का-फुल्का विरोध कर के इन चीजों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है)। अक्सर जो नास्तिक होते हैं वो ये चुनौती देते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व साबित कर के दिखाओ। असली चुनौती उन्हें दी जानी चाहिए कि वो ईश्वर के अस्तित्व को नकारने का सबूत दें, साबित करें।

इससे पूरा मुद्दा ही बदल जाता है। ऐसे ही धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर आरोप लगाने वालों को उन्होंने भी चुनौती दी है कि ‘दरबार’ में आएँ और उन्हें गलत साबित करें। जो समर्थन कर रहे हैं उन्हें साबित करने की ज़रूरत ही नहीं है कि वो चमत्कार करते भी हैं नहीं। असल में चमत्कार कुछ नहीं है, ये तो अध्यात्म है या फिर विज्ञान। तुलसीदास के घर रामचरितमानस की चोरी करने गए लोगों को वहाँ तीर-धनुष लिए 2 लोग कुटिया की रक्षा करते दिखे थे।

इसी आसपास के जमाने में एक योगी ऐसे थे जो महीनों तक नदी में तैरते रहते थे। शंकराचार्य से लेकर महावतार बाबाजी तक, चमत्कार और रहस्य तो भरे परे हैं। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की पीढ़ियाँ वहाँ पर सिद्धि करती आई हैं और छत्तरपुर की उस धरती पर हनुमानजी विराजमान हैं। वहाँ जाकर उनकी बातें सुनना, भगवान का दर्शन करना और पीठाधीश्वर द्वारा अपने लिए प्रार्थना करवाने में गलत कुछ भी नहीं है।ताज़ा घटनाक्रम से उनका फायदा ही हुआ है, न सिर्फ उनके भक्तों/समर्थकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि धाम पर पहुँचने वालों की तादाद में भी वृद्धि होगी।

जो उन्हें न मानते हों ये पोंगा-पंडित ही समझते हों, घर-वापसी के अभियान के लिए उनका समर्थन तो कर ही सकते हैं। जो ये भी नहीं कर सकते, वो बागेश्वर बालाजी के दर्शन तो कर ही सकते हैं। जिनकी हनुमानजी में भी आस्था नहीं, अब उनके बारे में क्या ही कहना! तुलसीदास ने भी कहा है – “कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।” अर्थात, कलियुग में ईश्वर का नाम लेने भर से काम हो जाएगा, वेद-वेदाङ्ग का अध्ययन करने का समय न तो।

अगर बागेश्वर धाम के महंत के कहने पर कुछ लोग हनुमान और राम का नाम ही ले रहे हैं तो ये बहुत बड़ी बात है। जनजातीय और गरीब वर्ग को ये एहसास दिलाना है कि सनातन ही श्रेष्ठ है। एक तरफ पादरियों का ‘हल्लिलूय्याह’ है, एक तरफ बालाजी का नाम। एक तरफ भक्ति है, एक तरफ लालच। एक तरफ घर-वापसी है, एक तरफ धर्मांतरण। एक तरफ राष्ट्रभक्ति है, एक तरफ विदेशी फंडिंग। एक तरफ एक निर्दोष और सरल साधु है, एक तरफ चालबाज मिशनरी।

‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी उगला ज़हर, कहा – सत्यानाश हो ऐसे धर्म का

     समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास कहा (चित्र साभार newstrack.com)
बुजुर्गों की कहावत है कि "जैसा खाए, वैसा हो जाए मन" जिसे सनातन धर्म पर प्रहार करने वाले सिद्ध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा हिन्दू ग्रन्थ रामचरित्रमानस पर बकवास करना कोई हैरानी की बात नहीं। रामजन्मभूमि मंदिर पर हो रहे निहत्ते रामभक्त प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाने वाले इसी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। जिन विदेशी भीख पर सनातन का अपमान करने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि संत तुलसीदास से हज़ारों वर्ष पूर्व राम जन्म से पूर्व ही महर्षि वाल्मीकि ने त्रेता युग में ही रामायण लिख दी थी। जबकि संत तुलसीदास ने वर्तमान कलयुग में यानि प्रभु श्रीराम के हज़ारों वर्ष बाद। शर्म आती है उन हिन्दुओं पर जो इस पार्टी को अपना समर्थन एवं वोट देते हैं। 

ये ढोंगी हिन्दू सनातन धर्म पर प्रहार कर सकते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के विरुद्ध बोलने पर इनके घरों में शोक हो जाता है। हिन्दुओं बेशक अनेक वर्ग हैं, लेकिन सभी एक ही मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं, इतना ही नहीं मृतक का भी एक ही शमशान पर दाह-संस्कार होता है, जबकि अन्य मजहबों में एकदम विपरीत। ये विदेशी भीख पर पलने वाले 'हिन्दू आतंकवाद', 'भगवा आतंकवाद' आदि बयानों से हिन्दुओं को अपमानित करने का घिनौना काम करते आ रहे हैं। ऐसे हिन्दू विरोधियों का, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा जाति से हो, परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार जरुरी है। जब तक हिन्दू विरोधियों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, इनका दुस्साहस बंद नहीं होगा। हिन्दुओं को जागृत होना पड़ेगा, अन्यथा वह दिन दूर नहीं होगा जब सनातन धर्म के दुश्मन घर में भी आरती करने पर कुत्तों की तरह भोंकना शुरू कर देंगे।    

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के बाद अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी रामचरितमानस के खिलाफ विवादित बयान दिया है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दुओं के इस ग्रंथ को बकवास किताब बताते हुए बैन करने की माँग कर डाली है। मौर्य ने रामचरित मानस को तुलसीदास द्वारा अपनी ख़ुशी के लिए लिखी गई किताब करार दिया है। स्वामी प्रसाद ने यह बयान 22 जनवरी, 2023 को दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भले ही वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जाति के नाम पर जो भी विशेष वर्ग को अपमानित करे उस पर आपत्ति जताते हैं। मौर्य ने सीधे रामचरितमानस का नाम लेते हुए कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

स्वामी प्रसाद ने अपनी बयानबाजी इसके बाद भी जारी। उन्होंने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

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अपने बयान में सपा नेता ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री पर भी नकारात्मक टिप्पणी की। स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म का प्रचार नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे दफनाने का काम कर रहे हैं। धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यों को ढोंग और ढकोसला बताते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रशासन से उनके ऊपर अंधविश्वास फैलाने के आरोप में एक्शन लेने की भी माँग की। इसी दौरान उन्होंने साल 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश में 80 सीटें जीतने के दावे को ‘मुंगेरीलाल का सपना’ बताया।

बाबा रामदेव का पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को समर्थन, कहा : ‘जो आँखों से दिख रहा, वो तो बस 1% है’: सब जगह पाखंड मत देखो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना स्वाभाविक है। जो हिन्दू अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण का पालन करने वाले के दुष्प्रचार के आगे नतमस्तक होता हो, श्रीराम को काल्पनिक कहने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्षों को शांतिदूत मानते हों, उनकी बुद्धि को क्या कहा जा सकता है? ऐसे बेशर्म और बुद्धिविहीन हिन्दुओं को मुसलमानों से धर्म सीखना चाहिए, जो फरेब को सच साबित करने को आमादा है। जबकि पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के के मोहम्मद, जिनकी निगरानी में कोर्ट के आदेश पर मंदिर के सबूत जुटाने खुदाई हुई थी, ने सेवानिर्वित होने उपरांत लिखी अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि "अयोध्या में राम मंदिर कभी का बन गया होता, अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने खुदाई में मिले मंदिर के इतने अधिक मिले सबूतों को छिपाकर केवल एक खम्बा ही नहीं दिखाया होता।" 

इतने चैनल महंत की सच्चाई जानने गए, लेकिन सभी उनका गुणगान करते नज़र आए। ABP News जो दुष्प्रचार करने में पीछे नहीं था, "जब महंत जी भरे दरबार में पूछा कि क्या कोई मेरे चाचा जानता है तो बताए, सन्नाटा छाते देख बोले, यहाँ जिस रिपोर्टर के चाचा का ये नाम है, सामने आए।" रिपोर्टर बिन बोले उसके प्रश्नों का उत्तर देने के बाद उसको दुष्प्रचार बंद करने के लिए कहा। 

इतना ही नहीं, महंत शास्त्री का विरोध करने वालों को शायद रामभक्त हनुमान के चमत्कारों का ज्ञान नहीं। रामभक्त हनुमान के एक चमत्कार, पत्थरवाले, चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर के महंत गौरव शर्मा का पिछले लेख में उल्लेख किया था। अब कटनी, मध्य प्रदेश में हनुमान मंदिर है, जहाँ टूटी हड्डियों को जड़ीबूटियों के खिलाने से तुरंत जोड़ा जाता है। जबकि किसी भी उपचार में संभव नहीं कि दवाई खाते ही टूटी हड्डी जुड़ जाए, लेकिन रामभक्त हनुमान इसे संभव कर रहे हैं। जड़ीबूटी खाने के बाद पंडित जी कहते हैं कि जिनके प्लास्टर चढ़ा है, एक्सरे करवा लो हड्डी जुड़ गयी है। यह मंदिर हड्डी वाले मंदिर के नाम से मशहूर है। दोनों में व्यक्तिगत अनुभव है।    

बाबा रामदेव ने बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ पाखंडी लोग टूट के उनके पीछे पड़ गए हैं। ऐसे लोग पूछ रहे हैं कि ये भगवान की कृपा क्या होती है? बालाजी की कृपा क्या होती है? पूछते हैं हनुमान जी की कृपा क्या है? स्वामी रामदेव ने कहा, जिन्हें बाहर की आंखों से देखना हो वो धीरेन्द्र शास्त्री से पूछें. जिन्हें तर्क-वितर्क करना हो वो रामभद्राचार्य जी के पास आ जाओ और जिन्हें चमत्कार देखना हो तो इनके शिष्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास चले जाओ.

दरअसल बाबा रामदेव धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य जी के पास पहुँचे थे और वहीं मंच से उन्होंने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “ये सब अगर बिना आँखों की देखनी हो तो आप पूज्य भद्राचार्य जी में देख लो। अगर आपको बाहर की आँखों से देखना हो तो यह आप धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री में देख लो। भगवान के अनुग्रह से व्यक्ति को सूक्ष्म जगत की अनुभूति होती है। लेकिन यह गुरु की कृपा और भगवत की कृपा से होता है। गुरु की कृपा, भगवत कृपा से बालाजी महाराज की कृपा होती है।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब गुरु और भगवान की शरण में रहने वाला और दैवीय कृपा संपन्न जब कोई महापुरुष आशीर्वाद दे देता है तो व्यक्ति संकटों से मुक्त हो जाता है। यही काम धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी कर रहे हैं।” बाबा रामदेव ने कहा कि जहाँ तक बात रही तर्क-वितर्क की जिनको तर्क करना है तो वह महाराज जी (रामभद्राचार्य जी) के पास आ जाएँ। जिनको चमत्कार देखना हे वह महाराज जी के चेले (महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) के पास चले जाएँ।

बाबा ने आगे कहा, “मैं तो ज्यादा मीडिया के लोगों को फोन नहीं करता हूँ। लेकिन, मैंने कुछ को बोला है कि सब जगह पाखंड मत देखो। कुछ यह भी देख लो कि जो सच है, जो दिख रहा है आँखों से – वह केवल एक प्रतिशत है। अदृष्ट 99 प्रतिशत है।” उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

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घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम
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घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम

साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। इसलिए मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वे इन साजिशों से नहीं डरते हैं। उन्होंने कहा था कि अब जनजातीय इलाकों में दरबार लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से उनके खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और वामपंथी पीछे पड़ गए हैं।

घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम

बागेश्वर धाम और वहाँ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने कथित चमत्कारों के लिए विवादों में हैं। उन पर समाज में अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा है। धीरेंद्र शास्त्री ने इन अंधविश्वास फैलाने के आरोपों को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हैं। इसलिए कुछ लोगों को समस्या हो रही है।

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है, “धर्म विरोधी लोग ये सब कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के होने और अयोध्या का सबूत माँगा था। हर बार सनातनी साधुओं को ही टारगेट किया जा रहा है। हमने जबसे लोगों की घर वापसी करवाई है, तब से इन लोगों को समस्या हो रही है। हमने छतारी की कथा में ऐलान किया था कि हमारे खिलाफ साजिशें होंगीं। लेकिन, हमें इनसे डर नहीं है। वो अपनी जगह बोलते ही रहते हैं। वो अपनी जगह भोंक रहे हैं। सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “सनातन के लिए सनातनी जाग रहे हैं। इसका प्रमाण यही है कि धर्म विरोधी मुँह चला रहे हैं। हमने इन सब पर बात करना बंद कर दिया है। उन्हें साफ कह दिया है कि यदि आपको हमारे दरबार से दिक्कत है तो आकर देखिए और समझिए। आपकी चुनौती हमें कानूनी रूप से नहीं मिली है।”

उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव की चुनौती पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हम वहाँ (नागपुर) में 7 दिन थे, तब चुनौती क्यों नहीं दी? उन्होंने व्यक्ति क्यों नहीं भेजा? उन्होंने लेटर क्यों नहीं भेजा?”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा है, “हमारे पास किसी प्रकार की सिद्धि नहीं है, लेकिन जो दरबार है उसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है। वो और उनके जैसे लोग आएँ और दरबार में बैठें। हमें जो प्रेरणा मिलेगी हम बेझिझक बताएँगे, क्योंकि न तो हम कमरे में मिलते हैं और न हम अंधविश्वास फैला रहे हैं। हम तो सिर्फ हनुमान जी से जोड़ रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। हमारे पूर्वजों ने संविधान स्वीकार किया है।”

सुदर्शन न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा, “इन लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा, फिर हम तो आम हैं। ये हमें कब छोड़ेंगे। हमें इनसे डिगना या डरना नहीं है। हम सभी ये प्रार्थना करेंगे कि इन लोगों की कोई भी बात सुनने से पहले एक बार हमारा तथ्य जरूर जान लेना। तब इनको मानना, क्योंकि ये सोची समझी साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम घर वापसी करवा रहे हैं। वो लोग धर्मांतरण पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। फिर हम पर 10 करोड़ खर्च करने में क्या बुराई है।” कहा जाता है कि क्रिसमस के दिन अपने पैतृक गाँव में स्थित बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री ने 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी।

उन्होंने आगे कहा है, “लोगों से हम यही कहना चाहते हैं कि हम वचन देते हैं कि ऐसा कोई कृत्य नहीं करेंगे जिससे हिंदुओं की नाक और साख को नुकसान हो। चाहे हमें उसके लिए प्राणों की आहुति देना पड़े।” उन्होंने कहा कि यदि अपने धर्म का प्रचार करने पर एफआईआर दर्ज होती है तो देश के सभी हनुमान भक्तों पर एफआईआर होनी चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा है, “भारत में चादर चढ़ाना श्रद्धा है, लेकिन हनुमान जी की भक्ति बताना अंधविश्वास है। भारत में कैंडल जलाना श्रद्धा है, लेकिन कलावा बाँधना और हनुमान चालीसा का उपाय बताना या सनातन की बात करना अंधविश्वास है। ये दोगलापन लाते कहाँ से हैं भारत में?”

उन्होंने आगे कहा है कि जिन लोगों को भी समस्या है वह रायपुर में 20 और 21 फरवरी 2023 को दिव्य दरबार लग रहा है, वहाँ पहुँच सकते हैं। वे उनके आने-जाने का किराया और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेते हैं कि उनकी पुजाई (मारपीट) नहीं होगी।

दरअसल, बागेश्वरधाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नागपुर में 5 जनवरी से 11 जनवरी तक तक रामकथा के लिए पहुँचे थे। पहले यह कथा 13 फरवरी तक होनी थी। हालाँकि, किन्हीं कारणों से यह कथा 2 दिन पहले ही समाप्त हो गई थी।

इस कथा के समापन के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए।

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श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर दरबार के दौरान चमत्कार दिखाने पर 30 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।