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‘रामचरितमानस घोषित हो राष्ट्रीय ग्रन्थ’: बागेश्वर धाम में मिशनरियों के चंगुल में फंसे 220 लोगों ने की घर-वापसी

बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने की घर-वापसी (साभार; आज तक)
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की मौजूदगी में 220 धर्मांतरित ईसाइयों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। इससे पहले भी वहाँ बालाजी के दरबार में घर-वापसी के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। बता दें की दशकों से मिशनरियों ने गरीब इलाकों, खासकर दलितों और जनजातीय समाज को निशाना बनाया हुआ है। उन्हें लालच देकर उनका धर्म-परिवर्तन कराया जाता है। उनमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा भरी जाती है।

सभी 220 लोगों को पीले रंग की पट्टिका पहनाई गई थी, जिसके बाद उनकी घर-वापसी कराई गई। ‘हिन्दू जागरण मंच’ की इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका रही, जो इन लोगों को लेकर यहाँ पहुँची थी। बुंदेलखंड इलाके के टपरियन, बनापुर, चितौरा और बम्हौरी सहित कई गाँवों के लोग घर-वापसी करने वालों में शामिल हैं, जिन्हें मिशनरियों ने बरगला लिया था। पीठाधीश्वर शास्त्री ने इस दौरान उन लोगों से अपील की कि वो प्रतिदिन मंदिर जाएँ।

घर-वापसी करने वालों ने बताया कि ईसाई मिशनरियों ने उन्हें घर देने का लालच दिया था, जिसके बाद उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़ दिया था। हालाँकि, वादा नहीं निभाया गया और उन्हें घर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वो अपनी मर्जी से घर-वापसी कर रहे हैं। धीरेन्द्र कृष्ण ने कहा कि शनिवार और मंगलवार को लोग हनुमान जी के मंदिर जाया करें। उन्होंने दोहराया कि वो किसी पंथ के विरोधी नहीं, लेकिन अपने धर्म के कट्टर हैं।

उन्होंने कहा कि भूल सबसे होती है। उन्होंने खुद के बारे में कहा कि उन्हें लोकप्रियता नहीं चाहिए। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने और भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की भी माँग की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक पार्टियाँ आशीर्वाद के अलावा उनसे और कोई अपेक्षा न रखें। घर-वापसी करने वालों में 62 परिवार के लोग शामिल हैं। ये लोग बसों में सवार होकर आए थे। उन्होंने बताया कि ईसाइयों के प्रभाव में आकर वो चर्च तक जाने लगे थे।

हाल ही में बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के मौके पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में 125 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। इसमें शामिल हुई 125 लड़कियों में से 58 ऐसी लड़कियाँ थीं, जिनके माता या पिता का निधन हो चुका है, यानी वो अनाथ थीं। इससे पहले यहीं एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम ने सनातन धर्म अपनाते हुए कहा था कि यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती। क्रिसमस 2022 के दिन पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा के दौरान भी दमोह में 300 लोगों ने घर-वापसी की थी।

‘यहाँ भाई-बहन की आपस में शादी नहीं होती’: बागेश्वर धाम के मंच पर सुल्ताना बेगम ने अपनाया हिन्दू धर्म

                                                             फोटो क्रेडिट: बागेश्वर धाम सरकार फेसबुक पेज
बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र शास्त्री (Mahant Pandit Dhirendra Shastri) के मँच पर 21 जनवरी 2023 को एक मुस्लिम महिला सुल्ताना बेगम (Sultana Begum) ने सनातन धर्म अपना लिया। धीरेन्द्र शास्त्री ने इनदिनों छत्तीसगढ़ में अपना दरबार लगाया हुआ है। वहीं पर सुल्ताना बेगम ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपना लिया। उल्लेखनीय है कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री पर कुछ लोग अंधविश्वास फैलाने के आरोप लग रहे थे।

इस संबंध में ‘रिपब्लिक टीवी’ ने एक ट्वीट किया है, जिसमे मुस्लिम महिला सनातन धर्म को स्वेच्छा से अपनाती हुई देखी जा सकती है। वीडियो में 26 सेकेंड के बाद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कहते हैं कि आज यह बहन ने अपनी इच्छा से बालेश्वर बालाजी का चमत्कार देखकर और सनातन हिंदू धर्म को सर्वोपरि मानकर हिंदू धर्म में आना चाह रही हैं। इसके बाद मुस्लिम महिला कहती हैं, “मेरा नाम सुल्ताना है। मैं छतीसगढ़ बिलासपुर से हूँ। मेरे पिता का नाम आमिर खान है और माता का नाम सरवरी बेगम है। मैं मूर्ति पूजा करती हूँ, इसलिए मेरे घर वालों ने मुझे त्याग दिया है। मुझे ये लोग कहते हैं कि मैं मुस्लिम के नाम पर कलंक हूँ। मरूँगी तो जहन्नुम जाऊँगी।”

महिला आगे कहती हैं, “मेरा मन बोलता है कि हिन्दू धर्म से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है। क्योंकि यह धर्म सभ्यता वाला धर्म है, संस्कारों वाला धर्म है। इसमें भाई-बहन में शादियाँ नहीं होती। इसमें औरतों की जिंदगी बर्बाद नहीं होती। इसमें तीन तलाक नहीं होता। इसमें एक बार शादी होती है सात फेरों की, जिसमें सिंदूर का महत्व होता है, मंगलसूत्र का महत्व होता है। पूरे सोलह श्रृंगार का महत्व होता है। मैं लड्डू गोपाल की भी पूजा करती हूँ।”

इस संबंध में बागेश्वर धाम सरकार के फेसबुक पेज से भी पोस्ट किया गया है। पोस्ट के कैप्शन में लिख है, “आज (21 जनवरी, 2023) दिव्य दरबार में बागेश्वर धाम सरकार के मंच पर मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया।”    

कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं।

इसलिए, मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वहीं अब धीरे-धीरे महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मिल रहा समर्थन बढ़ता जा रहा है। बाबा रामदेव भी अब उनके समर्थन में आगे आ गए हैं।

बाबा रामदेव का पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को समर्थन, कहा : ‘जो आँखों से दिख रहा, वो तो बस 1% है’: सब जगह पाखंड मत देखो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना स्वाभाविक है। जो हिन्दू अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण का पालन करने वाले के दुष्प्रचार के आगे नतमस्तक होता हो, श्रीराम को काल्पनिक कहने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्षों को शांतिदूत मानते हों, उनकी बुद्धि को क्या कहा जा सकता है? ऐसे बेशर्म और बुद्धिविहीन हिन्दुओं को मुसलमानों से धर्म सीखना चाहिए, जो फरेब को सच साबित करने को आमादा है। जबकि पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के के मोहम्मद, जिनकी निगरानी में कोर्ट के आदेश पर मंदिर के सबूत जुटाने खुदाई हुई थी, ने सेवानिर्वित होने उपरांत लिखी अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि "अयोध्या में राम मंदिर कभी का बन गया होता, अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने खुदाई में मिले मंदिर के इतने अधिक मिले सबूतों को छिपाकर केवल एक खम्बा ही नहीं दिखाया होता।" 

इतने चैनल महंत की सच्चाई जानने गए, लेकिन सभी उनका गुणगान करते नज़र आए। ABP News जो दुष्प्रचार करने में पीछे नहीं था, "जब महंत जी भरे दरबार में पूछा कि क्या कोई मेरे चाचा जानता है तो बताए, सन्नाटा छाते देख बोले, यहाँ जिस रिपोर्टर के चाचा का ये नाम है, सामने आए।" रिपोर्टर बिन बोले उसके प्रश्नों का उत्तर देने के बाद उसको दुष्प्रचार बंद करने के लिए कहा। 

इतना ही नहीं, महंत शास्त्री का विरोध करने वालों को शायद रामभक्त हनुमान के चमत्कारों का ज्ञान नहीं। रामभक्त हनुमान के एक चमत्कार, पत्थरवाले, चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर के महंत गौरव शर्मा का पिछले लेख में उल्लेख किया था। अब कटनी, मध्य प्रदेश में हनुमान मंदिर है, जहाँ टूटी हड्डियों को जड़ीबूटियों के खिलाने से तुरंत जोड़ा जाता है। जबकि किसी भी उपचार में संभव नहीं कि दवाई खाते ही टूटी हड्डी जुड़ जाए, लेकिन रामभक्त हनुमान इसे संभव कर रहे हैं। जड़ीबूटी खाने के बाद पंडित जी कहते हैं कि जिनके प्लास्टर चढ़ा है, एक्सरे करवा लो हड्डी जुड़ गयी है। यह मंदिर हड्डी वाले मंदिर के नाम से मशहूर है। दोनों में व्यक्तिगत अनुभव है।    

बाबा रामदेव ने बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ पाखंडी लोग टूट के उनके पीछे पड़ गए हैं। ऐसे लोग पूछ रहे हैं कि ये भगवान की कृपा क्या होती है? बालाजी की कृपा क्या होती है? पूछते हैं हनुमान जी की कृपा क्या है? स्वामी रामदेव ने कहा, जिन्हें बाहर की आंखों से देखना हो वो धीरेन्द्र शास्त्री से पूछें. जिन्हें तर्क-वितर्क करना हो वो रामभद्राचार्य जी के पास आ जाओ और जिन्हें चमत्कार देखना हो तो इनके शिष्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास चले जाओ.

दरअसल बाबा रामदेव धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य जी के पास पहुँचे थे और वहीं मंच से उन्होंने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “ये सब अगर बिना आँखों की देखनी हो तो आप पूज्य भद्राचार्य जी में देख लो। अगर आपको बाहर की आँखों से देखना हो तो यह आप धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री में देख लो। भगवान के अनुग्रह से व्यक्ति को सूक्ष्म जगत की अनुभूति होती है। लेकिन यह गुरु की कृपा और भगवत की कृपा से होता है। गुरु की कृपा, भगवत कृपा से बालाजी महाराज की कृपा होती है।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब गुरु और भगवान की शरण में रहने वाला और दैवीय कृपा संपन्न जब कोई महापुरुष आशीर्वाद दे देता है तो व्यक्ति संकटों से मुक्त हो जाता है। यही काम धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी कर रहे हैं।” बाबा रामदेव ने कहा कि जहाँ तक बात रही तर्क-वितर्क की जिनको तर्क करना है तो वह महाराज जी (रामभद्राचार्य जी) के पास आ जाएँ। जिनको चमत्कार देखना हे वह महाराज जी के चेले (महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) के पास चले जाएँ।

बाबा ने आगे कहा, “मैं तो ज्यादा मीडिया के लोगों को फोन नहीं करता हूँ। लेकिन, मैंने कुछ को बोला है कि सब जगह पाखंड मत देखो। कुछ यह भी देख लो कि जो सच है, जो दिख रहा है आँखों से – वह केवल एक प्रतिशत है। अदृष्ट 99 प्रतिशत है।” उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

अवलोकन करें:-

घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम
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साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। इसलिए मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वे इन साजिशों से नहीं डरते हैं। उन्होंने कहा था कि अब जनजातीय इलाकों में दरबार लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से उनके खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और वामपंथी पीछे पड़ गए हैं।