Showing posts with label #Lord Hanuman. Show all posts
Showing posts with label #Lord Hanuman. Show all posts

माँ दुर्गा को बताया ‘मू*ने वाली देवी’, देवी काली को कहा- ‘डरावना’: पुलिस ने अर्चना बौद्ध को पकड़ा, भीम कथावाचन के नाम पर कैसे फैला रही थी हिंदू घृणा

                    (साभार: यूट्यूब @Archana Singh Buddh Hathras, Gautam Studio Gyanpurwa)

खुद को भीम कथा वाचक बताने वाली अर्चना सिंह बौद्ध कथा के मंच से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का पाठ पढ़ाकर वैचारिक जहर परोस रही है। अर्चना सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह भगवान हनुमान, भगवान गणेश, माँ दुर्गा और माँ काली को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियाँ करती नजर आ रही है।

इस वायरल वीडियो में वह माँ दुर्गा के आठ हाथ, भगवान गणेश के सिर, माँ काली के रुप और भगवान हनुमान के चेहरे का ना केवल मखौल उड़ा रही है बल्कि वह लोगों से कह रही है कि इससे अच्छा तो घर में हीरो-हीरोइन की फोटो लगाओ। हिंदू आस्था को नीचा दिखाकर सस्ती तालियाँ बटोरने की कोशिश कर रही अर्चना का यह वीडियो उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहाँ मलखानपुर गाँव में अंबेडकर पार्क में भीम कथा का आयोजन किया गया था।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वायरल वीडियो के आधार पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रसूलाबाद कोतवाली पहुँचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन गुलाब राम नामक व्यक्ति द्वारा कराया गया था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और कथावाचक अर्चना सिंह बौद्ध और कार्यक्रम आयोजक गुलाब राम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन से ली गई थी लेकिन कथा के दौरान तय की गई मर्यादाओं और शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि उसे जमानत भी दे दी गई है।

काली किसी बच्चे के सामने आ जाए तो एक महिने तक उसका बुखार ना उतरे: अर्चना सिंह बौद्ध

वायरल वीडियो में वह कह रही है, “आठ हाथ हैं दुर्गा महारानी के, हमें तो यहीं नहीं पता है भईया आठ हाथ वाली देवी पैदा हुई होंगी तो कैसे पैदा हुईं होंगी। जिस समय दुर्गा महारानी की मम्मी ने उनको जनम दिया होगा, पता नहीं उनके प्राण कहा रहें होंगे? पता नहीं कौन सा हॉस्पिटल बना है, उस हॉस्पिटल में आठ हाथ वाली देवी का जन्म हुआ होगा। इनके अम्मा-दादा तक का पता नहीं है कि इनके अम्मा-दादा हैं कौन? अगर आठ हाथ वाली देवी तुम्हारे घर में पैदा हो जाए फिर तुम्हें कैसी लगेगी?”
वीडियो में वह आगे कहती है, “तुम लोगों को तो दो हाथ वाले पैदा हों तो दो-दो महिना उठती नहीं, अरे आठ-आठ हाथ वाली देवी मईया कैसे पैदा हुईं होंगी? दिमाग लगाओ तुमलोग अपना, अगर आठ हाथ वाली देवी, ऐसी लड़की तुम्हारे घर में आ जाए तो अच्छी लगेगी? अच्छी नहीं लगेगी ना तो फिर इनकी अपने घर में फोटो और इनकी पूजा भी नहीं करनी चाहिए आप लोगों को। अब हनुमान की कोई सूरत है? हनुमान का मुँह कैसा है? अगर हनुमान जैसा संतान तुम्हारे घर में मिल जाए तो तुम्हें कैसी लगेगी वो संतान? ऐसा गलफुल्ला जैसा हो जाए तुम्हारे घर में तो तुम्हें वो बेटा कैसा लगेगा, अच्छा लगेगा? अच्छा लगेगा आपको हनुमान जैसा लड़का नहीं अच्छा लगेगा ना।”
माँ काली पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए वह कह रही है, “काली मईया का तो रूप ही ऐसा है कि बच्चे को बुखार इतनी जोर का आएगा कि एक महीने तक बुखार नहीं जाएगा उसका है ना? और आप ऐसी काली मईया की पूजा करती हो…अरे अच्छे लोगों का अपने घर में फोटो लगाओ, बाबा साहब का लगाओ, बड़े सुंदर थे बाबा साहब।”

भगवान गणेश का मजाक उड़ाते हुए हीरो-हीरोइन की फोटो लगाने की कही बात

अर्चना बौद्ध की यह घटिया बातें यहीं नहीं रुकी, वह आगे भगवान गणेश का भी मजाक उड़ाती है और कहती है, “अब गणेश भगवान हैं हमे तो यहीं समझ में नहीं आता कि गणेश भगवान आधे इंसान हैं और आधे जानवर हैं अब हमे यहीं नहीं पल्ले पड़ता है कि देखो हाथी का बच्चा भले छोटा हो लेकिन गर्दन उसकी छोटे पर भी मोटी होती है? अब गणेश की गर्दन और हाथी की गर्दन कैसे मैच खाई होगी?”
आगे कहती है, “इंसान की गर्दन तो इतनी सी होती है चार इंची की और गणेश भगवान के ऊपर का जो सर है वो हाथी का लगा है। अब हाथी का बच्चा भी तुम समझ लो तो गर्दन उसकी मोटी होती, लेकिन गणेश भगवान से कैसे मैच खा गया हाथी का सर? सोचने वाली बात है ना। अब हाथी का सर है और पेट इंसान का है अब हमें यहीं नहीं समझ आता है कि वो भोजन कौन सा करते होंगे हाथी वाला करते होंगे या इंसान वाला भोजन खाते होंगे? इन देवी-देवताओं की ना सूरत है, ना अकल है ना शक्ल है, इनसे अच्छा तो आप हीरो-हीरोइन की फोटो लगा लो ताकि अच्छे-अच्छे बच्चे तो पैदा हों।”

कौन है अर्चना सिंह बौद्ध?

अर्चना सिंह हाथरस की रहने वाली है। उसके वीडियोज यूट्यूब पर कई चैनल्स ने अपलोड किए है। हालाँकि, उसका अपना भी एक चैनल है जिसका नाम ‘Archana Singh Buddh Hathras’ है। इस चैनल पर उसके ऐसे ही कुल 554 वीडियोज अपलोड हैं। उसके करीब 4,000 सब्सक्राइबर्स हैं। उसका यह चैनल 25 सितंबर 2019 से चल रहा है।
इसके अलावा एक और चैनल है, जिससे उसके वीडियो शेयर किए गए हैं। इस चैनल का नाम ‘Gautam Studio Gyanpurwa’ है। इस पर अर्चना के अलावा ज्ञानसिंह बौद्ध कासगंज नाम के एक व्यक्ति का भी वीडियो शेयर किया गया है।
वीडियो में वह कह रहा है, “पूड़ी-कचौरी करे गोलगुला और करो गुलभत्ता और पथरा पूज के आई ढोकरिया, ओन्हें चाट गए कुत्ता।” इस वीडियो के थंबनेल में माँ काली की फोटो है, जिसके सामने एक कुत्ते को उन्हें चाटते हुए दिखाया गया है।
इस चैनल पर अर्चना का एक और वीडियो भी है, जिसके थंबनेल में लिखा है, ‘मूतादेवी का अविष्कार’ और नीचे लिखा है ‘कैसे मू**ने वाली देवी का जन्म हुआ।’ वीडियो मे वह माँ दुर्गा के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रही है।

महिषासुर को बताया राजा, माँ दुर्गा को बताया राक्षस की पत्नी

इस लड़की का इसी तरह का एक वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड है। इस वीडियो में वह कह रही है, “हमारा एक राजा हुआ यादव वंश में, जिनका नाम था महिषासुर राजा। जो हमारे समाज के लोग नौ दुर्गा मनाया करते हैं, आखिर ये नौ दुर्गा क्यों मनाया जाता है? कौन थी वो नौ दुर्गा? क्योंकि हमारी माताओं बहनों जो बिहार का राजा था बड़ा वीर बलवान, यादव समाज में जन्मा महिषासुर महाराज।”

वह कहती है, “महिषासुर राजा जब पहाड़ों से कूदा करते थे तो ऐसा लगता था, जमीन चटक जाती थी, ऐसा बल था उनके अंदर। इन मनुवादी लोगों को अच्छा नहीं लगा, इनलोगों को हमारे राजाओं का राज-पाठ अच्छा नहीं लगा तो इनलोगों ने क्या काम किया? ब्राह्मण समाज ने लड़की थी, जिसका नाम था दुर्गा। दुर्गा की शादी, इन्होंने सुंदर-सुंदर लड़कियाँ हमारे राजाओं-पुरखों को लाकर दी, हमारे राजा-पुरखे उन सुंदर-सुंदर लड़कियों में मस्त हो गए लेकिन ये नहीं पता था हमारे राजाओं को कि हमारे साथ में दुर्घटना भी घट सकती है।”

महिषासुर को माँ दुर्गा ने शराब पिलाकर मारा: अर्चना सिंह बौद्ध

वीडियो में वह आगे कहती है, “अपनी लड़की ब्राह्मण लोगों ने महाराज महिषासुर के साथ में शादी कर दी और उस लड़की से कहा देखो हम तुम्हारी शादी कर रहे हैं, लेकिन तुम्हें वहाँ घर नहीं पालना है तुम्हें पानी नहीं पीना है जब तक वो राजा मर ना जाए। दुर्गा की जब शादी महिषासुर के साथ हुई, यादव वंश का राजा था महिषासुर। महिषासुर महाराज के साथ में शादी होने के बाद ये मनुवादी विदेश से शराब बनाकर के लेते आए।”

उसने कहा, “जब शराब बनाकर लेते आए, वो अपनी लड़कियों को शराब दे दी बनाकर के और कहा कि इसे भगवान का प्रसाद बताकर के तुम्हें पिलाना होगा तो महिषासुर से वो लड़की दुर्गा बोली कि ये देखिए ये हमारे यहाँ भगवानों का प्रसाद है। ये प्रसाद तो पी लीजिए तो तुम्हें भगवान की तरफ से आराम मिलेगा। दुर्गा ने उसे इतना नशा करा दिया कि राजा को होश नहीं रहने दिया। एक दिन हाथों में तलवार उठाकर के राजा महिषासुर का बेहोशी में कत्ल कर दिया। कत्ल करने के बाद मेरे धम्मबंधुओं उससे पहले दुर्गा ने क्या काम किया था?”

माँ दुर्गा और महिषासुर के बेटे ने किए दुर्गा के नौ टुकड़े

वह कह रही है, “कत्ल करने के बाद दुर्गा ने महाराजा महिषासुर को मारने के बाद ये महिषासुर की गर्भवती हो गई थी, इसके बाद इसको एक लड़का पैदा हुआ, उसी लड़के का नाम था लांगुरिया। बड़े होने के बाद वो लड़का पूछने लगा कि माँ आज तक तुमने मेरे पिता का नाम नहीं बताया, मेरे पिता कहाँ हैं? तो दुर्गा बताया नहीं करती थी। एक दिन वो लड़का पीछे पड़ गया, आज मेरे पिता जी का पता बताओ।”

अर्चना आगे कहती है, “दुर्गा ने बताया कि तेरे पिता को मैंने मार दिया, जब मारने की खबर सुनी तो उसी लड़के ने हाथों में तलवार उठाकर के दुर्गा के नौ टुकड़े नौ दिशा में जब फेंक दिए, नौ टुकड़े कर के फेंके तब भी मनुवादी लोगों ने अपनी लड़की का पीछा नहीं छोड़ा, तब भी उन नौ टुकड़ों को इकट्ठा कर के नौ नाम दे दिए और कहा इसकी पूजा करो। उसे कहा गया नौ दुर्गा। उसकी हमारी माता-बहनें नौ दुर्गा कह कर पूजा करती हैं यानी तुम्हारे पुरखों का कत्ल किया गया और आप लोगों से उनकी पूजा करवाई गई।”

हिंदुओं के त्यौहार ना मनाने के लिए भड़काया

वीडियो में वह लोगों को भड़काते हुए कहती है, “मेरे समाज के लोगों आप जितने हिंदूवादी सनातनी त्यौहार करते हैं वो हमारे त्यौहार नहीं हैं याद रखना जो जो त्यौहार आता है, उसमें कोई ना कोई तुम्हारे राजाओं-पुरखों का कोई ना कोई रहस्य जरूर छिपा हुआ है। हमारे राजाओं को छल-कपट से मारने का काम किया। धीरे-धीरे इनलोगों ने हमारे दस राजा मार दिए गए, दस राजा मारने के बाद इन लोगों ने भारत पर कब्जा किया।”
वह सबको बताते हुए कहती है, “भारत भूमि बौद्धों की धरती थी, यहाँ हमारे राजा-पुरखों का राज रहा हमेशा और कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था लेकिन हमारी माताओं-बहनों 85% ज्यादा है, 15% कम है लेकिन भारत देश में शासन सत्ता किसका होना चाहिए 15% का होना चाहिए, लेकिन अभी किसका सत्ता चल रहा है? ये लोग ताक में है कि संविधान को खत्म कर दिया जाए। लोगों के दिल में संविधान चुभता है, जैसे काँटा पैर में चुभता है।”

मणिपुर हिंसा पर गीत गाते सत्ता चलाने वालों को कहा दुष्ट

इसी तरह मणिपुर हिंसा को लेकर भी उसका एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड है, जिसमें वह मणिपुर हिंसा का दोष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दे रही है और कह रही कि इन दुष्टों को धूल चटाना होगा। इस वीडियो में वो गाना गा रही है, “आग लगी है भारत में और सत्ता सो रही दिल्ली में, चप्पा-चप्पा राख हुआ है जाकर देखो मणिपुर में।” इस वीडियो के थंबनेल में प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी की फोटो लगी हुई है।

अर्चना ने सरोज सरगम से सीखा माँ दुर्गा का अपमान करना?

गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जापुर पुलिस ने माँ दुर्गा पर आपत्तिजनक गाने के मामले में मुख्य आरोपित गायिका सरोज सरगम और उनके पति राममिलन बिंद को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी लोगों के भारी विरोध और सोशल मीडिया पर उठी माँगों के बाद की गई थी। सरोज सरगम ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने माँ दुर्गा के लिए वै$% और रं₹$ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश था। वह भी अर्चना की तरह ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काऊ और अभद्र टिप्पणी कर के पैसे बटोर रही थी। दरअसल इन लोगों का एक उद्देश्य तो ये होता है कि ये लोगों के अंदर से भगवान के प्रति आस्था को खत्म कर सकें और दूसरा उद्देश्य होता है पैसे कमाना, वो भी इस तरह की ओछी हरकतें कर के, क्योंकि ऐसे थंबनेल से ये लोगों को मजबूर करते है कि लोग इनके वीडियो को ओपन करें।

सूर्य का आकार इतना बड़ा, फिर हनुमान जी ने कैसे निगला? – हिन्दू विरोधी पूछ रहे सवाल, जान लीजिए सनातन धर्म-दर्शन में छिपा जवाब


कुछ दिनों से सोशल मीडिया में सूर्य की तस्वीर वायरल की जा रही है और पूछा जा रहा है कि सूर्य का तो आकार फलाँ-फलाँ है तो हनुमान जी ने इसे कैसे निगल लिया? ऐसे प्रपंचियों को समझाना इस लेख का लक्ष्य नहीं, लेकिन कम से कम हिन्दुओं को तो चीजें पता होनी चाहिए। ख़ास बात ये है कि ये फ़ैलाने वाले कोई इस्लामी कट्टरपंथी नहीं हैं, बल्कि कई हिन्दू नाम वाले हैंडल भी हैं। इनका दलित हितों से कोई लेना-देना नहीं, लेकिन ये स्वयं को दलितों का ठेकेदार बताते हैं।

 दिमागी स्तर मापने के जो भी मापदंड हों, इनका स्तर शून्य से भी नीचे जाता है। अब समय आ गया है जब हनुमान जी वाली कथा को क्रमवार देखें और समझें कि ऐसा क्या है जो सनातन धर्म पर हमला करने वालों को समझ नहीं आ रहा है। कथा संक्षेप में यूँ है कि हनुमान जी भूखे थे तो उन्होंने उगते हुए सूर्य को फल समझकर उसे निगल लिया। वो धरती से कूदकर सीधे सूर्य के पास गए। इससे दुनिया में अँधेरा हो गया और इंद्र ने उनपर वज्रप्रहार किया। बाद में वायुदेव के रुष्ट होने के बाद सब देवताओं ने उन्हें वरदान दिया।

हनुमान जी सूर्य को देखकर उसे निगलने के लिए उद्यत होते हैं

सनातन धर्म में सूर्य केवल ऊपर जो दिखता है वही सूर्य नहीं है। वेदों में सूर्य ब्रह्माण्ड का नेत्र है, जो ब्रह्म के चक्षु हैं उन्हें भी सूर्य ही कहा गया है। हनुमान जी उस समय बालक थे, लेकिन ज्ञानप्राप्ति को लेकर वो इतने व्यग्र थे कि एक ही झटके में सारा ज्ञान पा लेना चाहते थे। कथा कुछ यूँ है कि हनुमान जी ने उदित होते सूर्य को देखा और उसे निगलने के लिए उद्यत हो उठे। अर्थात, उन्हें आत्मज्योति की हल्की झलक दिखाई दी और वो तुरंत ही उसे पूरा पाने के लिए निकल पड़े।

वेदांत में ब्रह्म को ‘चक्षुः सूर्य इवोदितः’ कहकर संबोधित किया गया है, अर्थात वो ब्रह्म को ज्ञान का स्रोत बताकर कहा गया है कि वो कुछ उस तरह उदित होते हैं जैसे सूर्य। सूर्योदय का दृश्य काफ़ी सुंदर होता है, लेकिन उस सुंदरता और मद्धिम किरणों के पीछे सूर्य भयंकर ज्वाला का स्रोत है। ठीक वैसे ही, ज्ञान का प्रकाश बहुत अच्छा लगता है लेकिन उसे पाने निकलने पर पता चलता है कि ये अथाह है। कोई सीधे ब्रह्मज्ञानी नहीं बन सकता, उसके लिए प्रक्रिया से गुजरनी होती है।

वायु हनुमान जी की रक्षा करते हैं

वायु का तात्पर्य यहाँ अदृश्य जीवनरक्षक से है, जो ज्ञानप्राप्ति के लिए यात्रा करने वालों की सुरक्षा करता है। इसके पीछे ये सन्देश है कि अगर आप ज्ञानप्राप्ति के लिए बड़ी से बड़ी कूद भी लगाएँगे, तो इस ब्रह्माण्ड की प्राणवायु आपका साथ देगी। आपकी साँसें सार्थक लक्ष्य के लिए उपयोग में लाई जा रही हैं, इसीलिए वो आपका साथ नहीं छोड़ेंगी। योगी श्री M कहते हैं कि ये श्वास ही है जो आपकी आत्मा और आपके शरीर के बीच की सेतु है, अगर इसपर आपका नियंत्रण है तो आपके मस्तिष्क पर भी आपका नियंत्रण है।

अतः, हनुमान जहाँ भी जाते हैं वायुदेव उनका साथ देते हैं, उनकी रक्षा करते हैं। हनुमान वायुपुत्र भी हैं। यही कारण है कि वो लंका से उड़कर हिमालय पर पहुँच जाते हैं और वहाँ से पूरे पर्वत को उठाकर वापस लौटते हैं। लंका में आग लगाकर भी वो जलते नहीं, ‘मरुत उनचास’ पूरी लंका जला देते हैं लेकिन हनुमान जी नहीं जलते। ये वायु संपूर्ण ब्रह्माण्ड में है, पृथ्वी के वातावरण में ये हवा के रूप में है। हनुमान को पवन-पुत्र कहा गया है।

हनुमान सूर्य के प्रकाश से जलते नहीं

इसका अर्थ है कि सच्चा ज्ञान कभी भी आपको हानि नहीं पहुँचाता है, ये आपको शुद्ध करता है। हनुमान एक निर्दोष बालक हैं, भले ही वो ज्ञान रूपी प्रकाश के परम स्रोत के पास पहुँच जाते हैं लेकिन वो जलते नहीं। भगवद्गीता (4.38) में भी श्रीकृष्ण कहते हैं – ‘न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते‘, दूसरी कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो ज्ञान की तरह आपको निर्मल कर सके। हनुमान जी द्वारा सूर्य के समीप जाकर भी न जलने के पीछे का अर्थ यही है कि आप तैयार नहीं हैं फिर भी सत्य या परमज्ञान आपको कोई नुक़सान नहीं पहुँचाएगा।

राहु सूर्य को निगलने के लिए लपकता है

कथा कुछ यूँ है कि उसी समय सूर्य को खाने के लिए राहु भी आया था, लेकिन हनुमान के भय से वो भाग जाता है। राहु, यानी – माया, शंका, भय। जब हनुमान यहाँ पवित्रता और साहस के प्रतीक हैं, तो राहु यहाँ माया है। माया से अध्यात्म के माध्यम से ही निपटा जा सकता है। माया को ‘महाठगिनी’ भी कहा गया है, जैसे-जैसे ज्ञान की प्राप्ति होती है वैसे-वैसे माया के बादल छँटते चले जाते हैं। हनुमान जी की तरह ही अपने डर का सामना कीजिए, मस्तिष्क में ‘सत्व’ होगा तब राहु नाम का तमस भागता फिरेगा।

योग वशिष्ठ में श्रीराम को उपदेश देते हुए वशिष्ठ मुनि समस्त संसार को माया बताते हुए कहते हैं कि इसमें जो कुछ भी है सब माया है। राहु उसी माया का प्रतीक है यहाँ। राहु ने ग्रहण लगा दिया, मतलब आपका चित्त आपके वश में नहीं है और ज्ञानप्राप्ति नहीं हो पाएगी। हनुमान जी इससे बच गए।

इंद्र द्वारा हनुमान को ख़तरा समझकर उनपर वज्र प्रहार करना

हनुमान जी को भूख लगी, उन्होंने उदित होते सूर्य का सुंदर रूप देखा, उसे निगलने के लिए उड़ लिए, पास पहुँचकर भी जले नहीं, राहु भाग निकला – अब कथा आगे बढ़ती है। इंद्र ने हनुमान जी को ख़तरा मानकर उनपर वज्र प्रहार किया। ज्ञानप्राप्ति के मार्ग में भी सज़ा? इंद्र यहाँ दैवीय कर्म, व्यवस्था और अनुशासन के प्रतीक हैं। ज्ञान तो आपको नहीं जलाएगा, लेकिन दैवीय शक्तियाँ आपकी परीक्षा अवश्य लेंगी। दुःख ज़रूर आएँगे, लेकिन अगर आप सही रास्ते पर हैं तो ये सज़ा नहीं बल्कि बदलाव की प्रक्रिया का माध्यम बनेंगे।

इसके बाद जो रामायण में होता है, वो हम सबको पता है। मान लीजिए, हमें इतिहास की किसी घटना के बारे में जानना है। जो पुरातत्वविद होंगे, वो सीधे उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करेंगे। जो इतिहासकार होंगे, वो समकालीन साहित्य देखेंगे। जो छात्र होंगे, वो उन इतिहासकारों को पढ़ेंगे। जो आम लोग होंगे, वो उस घटना पर आधारित उपन्यास पढ़ेंगे। जो बच्चे होंगे, उन्हें चित्रकथा के रूप में वो घटना पढ़ाई जाएगी। जिसका ज्ञान का जो स्तर, कंटेंट उसके लिए उसी रूप में दिमाइज किया जाता है। सनातन धर्म में भी ऐसा ही है।

जिन्हें शंका है, वो हनुमान जी पर लिखे गए इस लेख को पढ़ सकते हैं। श्रीराम ने हनुमान जी की बातों से ही अंदाज़ा लगा लिया कि वो तीनों प्रमुख वेदों के ज्ञाता हैं। जब पहली बार श्रीराम उनसे मिले, उस प्रसंग में हनुमान जी काफी देर तक बोलते हैं। श्रीराम ने पाया कि इसके बावजूद उनके मुँह से एक भी अशुद्धि नहीं निकली। हनुमान जी की भौहें, ललाट, मुख और नेत्र के अलावा सभी अंग उनकी बातों के हिसाब से उनका साथ देते थे। यानी, सभी अंगों में और उनकी बातों में तालमेल दिखता था।

बिहार : किसे कहते हैं ‘इराज’, लेकिन ‘चाराबुद्धि’ ही समझने को नहीं तैयार: तेजस्वी यादव ने हिंदुओं को कोसते हुए बेटे के नाम पर फिर फैलाया झूठ

तेजस्वी ने कहा बेटे का नाम हनुमान के नाम पर, नित्यानंद ने दिया प्रमाण, बताया हनुमान नहीं कामदेव का नाम (साभार: हिंदुस्तान, इंस्टाग्राम)
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के घर में उनके बेटे के नाम पर जितनी चर्चा नहीं हुई होगी उससे अधिक चर्चा उस नाम को लेकर देश के अन्य हिस्सों में होने लगी है। कोई इसे संस्कृत का शब्द कह रहा है तो कोई ऊर्दू का। इतना ही नहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने तो ‘इराज’ नाम का मजाक उड़ाते हुए तेजस्वी को ईरान और इराक नाम रखने की भी सलाह दे दी थी।

अब एक इंटरव्यू में तेजस्वी ने जहाँ फिर एक बार इस नाम को भगवान ‘हनुमान’ का नाम बताया है, वहीं दूसरी तरफ संस्कृति के जाने-माने विद्वान, शोधकर्ता और संपादक नित्यानंद मिश्रा ने तेजस्वी के बेटे के नाम ‘इराज’ को ‘कामदेव’ का नाम बताया है।

न्यूज एजेंसी ANI के तेजस्वी यादव से लिए गए एक इंटरव्यू की वीडियो में 31 मिनट 9 सेकेंड से 33 मिनट 10 सेकेंड तक उनके बेटे के इराज नाम पर चले सवाल-जवाब वाली क्लिप में तेजस्वी यादव से पूछा गया कि बीजेपी आप पर हमेशा आरोप लगाती है कि आप मुस्लिमों के हितैषी हैं, आपने बेटी का नाम कात्यायानी रखा है जो कि माँ दुर्गा के नाम पर है। वहीं बेटे का नाम इराज रखा है, जो कि भगवान हनुमान के नाम पर है। तो आप इसके जरिए क्या मैसेज देना चाह रहे हैं?

इस पर जवाब देते हुए तेजस्वी ने कहा कि जब हमने अपने बेटे का नाम इराज रखा और लालूजी ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। इसके बाद कई भक्त लोग ऐसे थे जिन्होंने कमेंट में लिखा कि इराज क्यों नाम रख रहे हो, एजाज खान नाम रख लेते। ईरान और इराक रख लेते।

तेजस्वी ने कहा “लोगों को ये नहीं पता है कि ‘इराज’ संस्कृत का शब्द है और इसका मतलब है ‘पवनपुत्र’। जो कि हनुमान जी का नाम है। उन लोगों को कोई ज्ञान नहीं है सनातन का।” भाजपा पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि पार्टी के लोगों को ना ही संविधान का ज्ञान है ना ही धर्म का।

वहीं हिंदू धर्म और संस्कृत पर एक दर्जन से अधिक किताबें लिख चुके संपादक नित्यानंद मिश्रा ने यूट्यूब पर एक वीडियो जारी करते हुए बताया है कि इराज नाम तो बेशक संस्कृत का शब्द है, लेकिन इसका भगवान हनुमान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि लालू यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इराज नाम रखने के पीछे कारण बताया था कि क्योंकि उनके पोते का जन्म मंगलवार को हुआ है और मंगलवार भगवान हनुमान का दिन माना जाता है, इसलिए उन्होंने हनुमान जी के ही एक नाम इराज पर अपने पोते का नाम रखा है।

 नित्यानंद ने कहा कि उसके बाद से लगातार उनसे सवाल किया जा रहा था कि इराज नाम को लेकर काफी चर्चा है, वो बताएँ कि असल में यह शब्द हिंदी का ही है या संस्कृत का। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ये भी शक है कि ये उर्दू का शब्द है। नित्यानंद ने इस पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इंटरनेट भी इराज को भगवान हनुमान का नाम बता रहा है जबकि इराज संस्कृत का शब्द तो है, लेकिन यह हनुमान जी का नहीं बल्कि कामदेव का नाम है।

नित्यानंद ने बकायदा प्रमाण देते हुए बताया, “संस्कृत के दो प्रामाणिक कोश शब्दकल्पद्रुम और वाचस्पत्यम में इराज शब्द है। इन दोनों कोशों में हलायुध कोश का उद्धरण देते हुए बताया गया है कि इराज का अर्थ है कन्दर्प अर्थात कामदेव। इस प्रकार इराज एक संस्कृत नाम तो है पर कामदेव का, ना कि हनुमान का।”  

एक नहीं नित्यानंद ने अपनी वीडीयो में अनेक ऐसे साक्ष्य पेश किए जो इराज नाम का संबंध कामदेव से होने की पुष्ट करते हैं। अपनी वीडियो में उन्होंने ‘आप्टे संस्कृत हिंदी कोश’ और ‘मोनियर विलियम्स संस्कृत अंग्रेजी कोश’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें ईरज शब्द है और उसका मतलब है जिसका जन्म वायु से हुआ है, अर्थात भगवान हनुमान। उनका कहना है कि एक जैसे लगने वाले इन शब्दों में ईरज हनुमान का नाम है और इराज कामदेव का।

सोचने वाली बात है कि जिन्हें हिंदू धर्म और संस्कृति पर ज्ञान देने का शौक हो कम से कम उन्हें तो इससे संबंधित फैसले भली-भाँति जाँच कर के ही लेने चाहिए। असल में बात तो ये है कि लोगों की मानसिकता इतने तक ही सिमट कर रह गई है कि हम समाज में अपने किसी फैसले से समाज में एक उदाहरण पेश करें, भले ही बाद में उसकी आलोचना हो या वह पूर्ण असत्य और निराधार ही साबित क्यों ना हो जाए।

कर्नाटक : बस में हनुमान जी की फोटो देख भड़का कट्टर मुस्लिम, सरकार कराएगी जाँच: मुस्लिम तुष्टिकरण के बाद अब हिंदू-घृणा पर उतरी कांग्रेस सरकार

                     बस में हनुमान जी की फोटो (बाएँ) देख भड़कने वाला कट्टर मुस्लिम आरिफ (फोटो साभार:                                                                                                             instagram.com/arif.arwah.sdpi)
कर्नाटक में अभी कांग्रेस की सरकार है। मतलब मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर। और यह सिर्फ आरोप नहीं है, ना ही किसी राजनीतिक दल ने ऐसा आरोप लगाया है। मुस्लिम तुष्टिकरण सच में वहाँ किया जा रहा है, वो भी विभागीय स्तर पर। एक सरकारी बस पर बजरंग बली की फोटो क्यों और कैसे लगी, किसने लगाई… ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट अब इसकी जाँच करेगी।

KA-10 F-0455, यह एक बस का नंबर है। कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC: Karnataka State Road Transport Corporation) की यह बस गुंडलूपेट से चिकमगलूर तक चलती है। इस बस पर बजरंग बली की फोटो क्यों लगी, विभाग अब इसकी जाँच करेगा।

बजरंग बली की फोटो से दिक्कत किसे? क्यों कर्नाटक का ट्रांसपोर्ट विभाग इसकी जाँच करने जा रहा? यह सब हुआ आरिफ अरवाह नाम के एक कट्टर इस्लामी की वजह से। 31 जुलाई 2024 को आरिफ को यह बस दिख गई। उसने इसकी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। साथ ही KSRTC को टैग करके उसने हनुमान जी की फोटो से संबंधित सवाल भी पूछ लिया।

हिंदू-घृणा से सना कोई कट्टर मुस्लिम हनुमान जी की फोटो देखे और फट पड़े, यह आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन खबर यह है कि ऐसे कट्टर मुस्लिम और उसकी सोच को कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की तरफ से जवाब भी मिला। जवाब भी ऐसा, जिससे हिंदू-घृणा की बू आए।

आरिफ अरवाह के ट्वीट पर KSRTC ने जवाब दिया, “आपने जो पोस्ट किया, उसके लिए धन्यवाद। हम इसे (हनुमान जी की फोटो लगे बस को) संबंधित डिपो में फॉर्वर्ड कर रहे हैं, इसकी जाँच करवाएँगे।”

कौन है आरिफ अरवाह?

सोशल मीडिया पर उसने जो प्रोफाइल लगाई है, उसके अनुसार वो चिकमगलूर विधानसभा क्षेत्र में SDPI (Social Democratic Party of India) का महासचिव है। आखिर SDPI क्या है? भारत में जिस आतंकी संगठन PFI को बैन किया जा चुका है, SDPI उसी की राजनीतिक फ्रंट है।
आरिफ अरवाह के एक्स हैंडल पर जो हेडर में लगा फोटो/ग्राफिक्स है, उसमें वो फ्री फिलिस्तीन की उम्मीद लगाए बैठा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जो डीपी इसने लगाई है, उसमें यह भूख और भय से आजादी की बात करता है। अगर ऐसा है तो हनुमान जी की फोटो देख कर कांग्रेसी  आकाओं तक को क्यों याद करने लगे आरिफ?

कर्नाटक, कांग्रेस और मुस्लिम तुष्टिकरण

जनता की याददाश्त अपने घर-परिवार संभालने के चक्कर में 2-4-10 दिनों की ही होती है। इसलिए याद दिलाना जरूरी है कि कर्नाटक में मुस्लिम रिजर्वेशन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी ने ही किया था। जब इसे BJP की सरकार ने खत्म कर दिया तो साल 2023 में कांग्रेस ने इस आरक्षण को फिर से देने की बात अपने मेनिफेस्टो में भी कह डाली थी।
कर्नाटक में 2011 की जनगणना के हिसाब से मुस्लिम कुल जनसंख्या का 12% हैं। आरक्षण के नियमों की कैटेगरी 2B में मुस्लिमों की सभी जातियों को शामिल किया गया है। कैटेगरी 2A में भी मुस्लिमों की 19 जातियाँ हैं। जबकि कैटेगरी 1 में 17 जातियाँ इस्लामी हैं। स्थानीय निकाय के चुनावों में भी जो सीटें OBC समाज के लिए आरक्षित हैं, वहाँ भी मुस्लिमों को चुनाव लड़ने की इजाजत है।

बजरंगबली के 11 नामों का अर्थ


हम सब हनुमान जी को कई नामों से पुकारते हैं उनके अनेकों नामों में से आज 11 नाम अर्थ के साथ जानते है ..

1. मारुति: मारुत शब्द का अर्थ है वायु . मारूत (वायु देव) के पुत्र होने के कारण हनुमान जी को मारुति कहते हैं।
2. अंजनी पुत्र: हनुमान जी की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है।
3. केसरीनंदन: हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है।
4. हनुमान: जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा।
5. पवन पुत्र: उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ।
6. शंकरसुवन: भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार होने के कारण हनुमान जी शंकर सुवन कहलाए।
7. बजरंगबली: वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें बजरंगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली।
8. 
कपिश्रेष्ठ: हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ 'वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम' आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए।
9. वानर यूथपति: हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे।
10. रामदूत: प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत।
11. पंचमुखी हनुमान: पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख,आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया

जय माँ भवानी, जय श्री बाबा महाकाल


महाकाल मंदिर परिसर में प्रमुख 42 देवताओं के मंदिर है इस मन्दिर का लगभग साढ़े सात एकड़ में फैला विशाल परिसर संभवत भारत के किसी अन्य ज्योतिर्लिंग का नहीं है।

देश के 12 ज्योर्तिलिंगो में एक श्री महाकाल पृथ्वी लोक के अधिपति है। उज्जैन पूरी दुनिया से इस अर्थ में अलग है कि आकाश में उज्जैन को जो मध्य स्थान प्राप्त है, वहीं धरती पर भी प्राप्त है। आकाश व धरती दोनेां के केन्द्र बिन्दु पर उज्जैन स्थित है। महाकाल का अर्थ समय और मृत्यु के देवता दोनों रूपों में लिया जाता है। इसी स्थान से पूरी पृथ्वी की काल गणना होती रही है। प्राचीन श्री महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ। श्री महाकाल पृथ्वी के नाभी केन्द्र पर स्थित दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो दुनिया का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है। तंत्र मन्त्र की दृष्टि से भी इस दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग का बडा महत्व है।

विश्व में अकेले श्री महाकाल है जो विविध रूपों में भक्तों को दर्शन देते है। कभी प्राकृतिक रूप में तो कभी राजसी रूप में आभूषण धारण कर। कभी भांग, कभी चंदन और सूखे मेवे से तो कभी फल, फूल से सजते है राजाधिराज। हनुमान, शिव, देवी सरस्वती, अवंतिका, भद्रकाली, नवग्रह, शनि, राधा-कृष्ण, गणेश के मंदिरों से विभूषित यह परिसर आध्यात्मिक अनुभूति का पावन आंगन है।श्री महाकाल मंदिर परिसर में यू तो छोटे-बडे अनेकों देवी देवताओं के मंदिर है परंतु परिसर में प्रमुख 42 मंदिर स्थापित है जो निम्नानुसार हैः- श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर है जो मंदिर परिसर के गलियारे में स्थित हैं। ऋद्धि- सिद्धी गणेश जी का मंदिर है जो लक्ष्मी नृसिंह मंदिर के आगे ही स्थित है। विट्ठल पण्ढ़रीनाथ मंदिर है जो मंदिर के गलियारे में स्थित है। श्री राम दरबार मंदिर गलियारे से कोटीतीर्थ की ओर नीचे उतरने पर स्थित है। श्री अवंतिका देवी का मंदिर जो उज्जैन का एक प्राचीन नाम अवंतिका है। इसका मंदिर श्री रामदरबार मंदिर के पीछे स्थापित हैं। श्री चन्द्रादिप्तेश्वर मंदिर श्री रामदरबार मंदिर से आगे बढने पर बायें हाथ पर स्थित है। श्री मंगलनाथ का मंदिर चन्द्रादिप्तेश्वर मंदिर से आगे भूमि पुत्र मंगल शिवलिंग के रूप में यहां विराजमान है। श्री अन्नपूर्णा देवी का मंदिर मंगलनाथ शिवलिंग से आगे स्थापित है। वाच्छायन गणपति महाकाल मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार (चांदी द्वार) के पास पूर्व दिशा में प्रतिमा स्थिापित है। प्रवेश द्वार के गणेश जी की मूर्ति चांदी द्वार के उपर गणेश प्रतिमा विराजित है।
इसी तरह महाकाल मंदिर परिसर में ही गर्भगृह में विराजित ज्योर्तिलिंग के रूप में भगवान श्री महाकालेश्वर विराजमान है जो चांदी द्वार से नीचे उतरने पर गर्भगृह स्थापित है। गर्भगृह में ही देवी पार्वती, श्री गणेश व श्री कार्तिकेय की रजत प्रतिमाएं है। गर्भगृह में ही दो अखंड नदा दीप है। श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर है जो श्री महाकालेश्वर के ठीक उपर स्थित है। श्री नागचन्द्रेश्वर महादेव का मंदिर है जो ओंकारेश्वर महादेव के उपर यानी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर से तीसरी मंजिल पर स्थित है। इस मंदिर के पट वर्ष में एक बार नागपंचमी को ही खुलते है। नागचन्द्रेश्वर प्रतिमा के रूप में भी दर्शन होते है जो तीसरी मंजिल पर स्थापित है। सिद्धी विनायक मंदिर महाकालेश्वर प्रांगण में ओकारेश्वर मंदिर के सामने उत्तर दिशा की ओर स्थित है। साक्षी गोपाल मंदिर परिसर में सिद्धी विनायक के पास स्थित है। संकट मोचन सिद्धदास हनुमान मंदिर प्रांगण में उत्तर दिशा में स्थित है। स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर सिद्धदास हनुमान मंदिर के सामने स्थापित है।
महाकाल परिसर में ही बृहस्पतेश्वर महादेव मंदिर है जो प्रांगण के उत्तर में स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित हैं। शिव की प्राचीन प्रतिमाएं त्रिविष्टपेश्वर महादेव मंदिर श्री महाकाल मंदिर के पीछे स्थित है। मां भद्रकाल्ये मंदिर ओंकारेश्वर मंदिर से सटे उत्तरी कक्ष में है। नवग्रह मंदिर श्री महाकाल के निर्गम द्वार के पास स्थित है। मारूतिनंदन हनुमान मंदिर महाकाल परिसर के आग्नेय कोण में स्थित है। श्री राम मंदिर मारूतिनंदन हनुमान के पीछे स्थिापित है। नीलकंठेश्वर मंदिर महाकाल मंदिर के निर्गम द्वार के पीछे स्थित है। मराठों का मंदिर नीलकंठेश्वर महादेव के पास स्थित है। इसका निर्माण देवास के नरेश द्वारा कराया गया था। गोविन्देश्वर महादेव मंदिर वृद्धकालेश्वर महाकाल मंदिर के समीप स्थित है। सूर्यमुखी हनुमान मंदिर कोटितीर्थ के प्रदक्षिणा मार्ग पर श्री महाकाल के प्रमुख द्वार के पास स्थित है। लक्ष्मीप्रदाता मोढ़ गणेश मंदिर कोटितीर्थ के उत्तर दिशा में स्थित है। कोटेश्वर महादेव मंदिर यह महाकाल के गण तथा कोटितीर्थ के अधिष्ठाता है। यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है। प्रदोष के दिन श्री महाकाल की संध्या-पूजा के पहले कोटेश्वर की पूजा की जाती है।
सप्तऋषि मंदिर महाकाल परिसर के पीछे की ओर सप्तऋषियों के सात मंदिर है। अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर सप्तऋषि मंदिर के ठीक सामने है। श्री बाल विजय मस्त हनुमान मंदिर अनादिकल्पेश्वर महादेव के सामने स्थित है। यह एक चैतन्य देव स्थान माना जाता है। श्री ओंकारेश्वर महादेव का मंदिर परिसर में ही स्थित है। श्री वृद्धकालेश्वर महाकाल (जूना महाकाल) श्री बाल हनुमान मंदिर के पास स्थित है। पवित्र कोटितीर्थ महाकाल के आंगन का जल तीर्थ है। महाभारत इस तीर्थ का उल्लेख है। कोटितीर्थ के पवित्र जल से नित्य महाकाल का अभिषेक होता है।
भगवान श्री महाकाल की प्रतिदिन पांच आरती होती है। भस्मार्ती प्रतिदिन प्रातः होती है । भस्मार्ती का समय केवल श्रावण मास में परिवर्तन किया जाता है। इसी प्रकार महाशिवरात्रि पर्व पर भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होती है। विश्वभर में एक मात्र श्री महाकाल है जिनकी प्रातः 4 से 6 बजे तक वैदिक मंत्रों, स्त्रोत-पाठ, वाद्य यंत्रों, शंख, डमरू, घंटी घडियालों के साथ भस्मार्ती होती है। दद्दयोदय आरती प्रातः काल 7 बजे से होती है। इस आरती में समय पर परिवर्तन होता रहता है। तीसरी आरती प्रातः 10 बजे से नैवेद्य आरती होती है। शाम 5 बजे गर्भगृह में बाबा महाकाल का जलाभिषेक बंद रहता है और इस समय पूजन श्रंगार किया जाता है। इसके बाद शाम को संध्या आरती 7 बजे से की जाती है। शयन आरती रात्रि 10.30 बजे से होती है इसके बाद गर्भगृह के पट बंद हो जाते है। जेा अगले दिन प्रातः 4 बजे खुलते है। आरतियों में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है।
मंदिर परिसर के बाहर ही सिद्ध विनायक गणेश जी की विशाल प्रतिमा है ।इसी से थोड़ा आगे माँ हरसिद्धि का मंदिर है जो देवी के 52 शक्तिपीठो में से एक है ।प्रसिद्द शिप्रा का घाट रामघाट भी हरसिध्दि मंदिर के समीप ही है ।समीप ही चार धाम मंदिर है ।एक तरह से देखा जाय तो यह देवताओ की नगरी है जहाँ भी नजर दौड़ाये मंदिर नजर आएंगे!
यहां के कण कण में भगवान है 84 महादेव, 9 नारायण,सप्तसागर , कालभैरव, सिद्धवट, सांदीपनि आश्रम,गोपाल मंदिर,भर्तहरि गुफा, इस्कॉन मंदिर, गढ़कालिका,चिन्तामण गणेश, हनुमानजी के सेकड़ो सिद्ध मंदिर यहां की शोभा बढ़ाते है।
इसीलिये कहा जाता है महाकाल यहाँ सपरिवार विराजित है। बोहरा,जैन समुदाय के प्रसिद्ध स्थल भी इस धरती पर है

व्याकरण की दृष्टि से हनुमत् शब्द - हनुमान और हनूमान दोनों ही नाम सही हैं।


व्याकरण की दृष्टि से हनुमत् शब्द -

हनुमान और हनूमान दोनों ही नाम सही हैं।
हन्+उन्=हनु+मतुप्=हनुमत्=हनुमान्।
अथवा स्त्रीत्वपक्षे ऊङ्-
हन्+ऊङ्=हनू+मतुप्=हनूमत्=हनूमान्।

श्रीहनुमानजी के जन्म के विषय में शास्त्रीय एकाधिक मान्यताएं 
1.चैत्र शुक्ला पूर्णिमा मंगलवार के दिन में
चैत्रे मासि सितेपक्षे पौर्णिमास्यां कुजेऽहनि।
2. कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी भौमवार स्वाति नक्षत्र मेष लग्न में महानिशा में अंजना देवीने हनुमानजीको जन्म दिया था।
 ऊर्जस्य चासिते पक्षे स्वात्यां भौमे कपीश्वरः।
मेषलग्नेऽञ्जनीगर्भाच्छिवः प्रादुर्भूत् स्वयम्।।
(उत्सवसिन्धु)
कार्तिकस्यासिते पक्षे भूतायां च महानिशि।
भौमवारेऽञ्जना देवी हनुमंतमजीजनत्।।
( वायुपुराण )
3. कल्पभेद से कुछ विद्वान इनका प्राक़ट्य काल चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन मघा नक्षत्रमें मानते हैं।
चैत्रे मासि सिते पक्षे हरिदिन्यां मघाभिधे।
नक्षत्रे समुत्पन्नो हनुमान् रिपुसूदनः।।
(आनंदरामायण,सारका० 13.162)
श्रीहनुमानजीके प्राकट्यको लेकरके और भी कई विकल्प शास्त्रोंमें उपलब्ध होते हैं।
हनुमानजी का जन्म मूँजकी मेखला से युक्त,कौपीन से संयुक्त और यज्ञोपवीत से विभूषित ही हुआ था। और ये सब शृंगार सदा हनुमान जी के साथ ही रहता है।
चैत्रे मासि सिते पक्षे पौर्णमास्यां कुजेऽहनि।
मौञ्जीमेखलया युक्तः कौपीनपरिधारकः।।
(हनुमदुपासनाकल्पद्रुमे)


हनुमानजी के पांच और सगे भाई भी थे -

केसरी ने कुंजर की पुत्री अंजना को भार्या रूप में ग्रहण करके, स्वर्ग लोक तथा भूतल पर विख्यात 6 पुत्र उत्पन्न किए।
उनमें हनुमान जेष्ठ थे। इनके बाद क्रमशः - मतिमान्, श्रुतिमान्, केतुमान्, गतिमान् और धृतिमान् थे।
ये जो हनुमान के भाई हैं, ये सभी स्त्रियों से संयुक्त अर्थात विवाहित थे।
ये सभी अपने ही अनुरूप पुत्री, पुत्र और प्रपौत्र से संयुक्त थे ।
परंतु हनुमान जी ब्रह्मचारी थे। इन्होंने दार परिग्रहण नहीं किया था।
ये संग्राम में संपूर्ण लोकों से लोहा लेने का उत्साह रखते थे। और वेग में तो मानो दूसरे गरुड़ ही थे।
ज्येष्ठस्तु हनुमांस्तेषां मतिमांस्तु ततः स्मृतः।
श्रुतिमान् केतुमांश्चैव गतिमान् धृतिमानपि।।
हनुमद्भ्रातरो ये वै ते दारैः सुप्रतिष्ठिताः।।
(ब्रह्मांडपुराण 3.7. 223/224)


हनुमानजी के आयुध विशेष

खड्ग, त्रिशूल, खट्वांग, पाश, अंकुश, पर्वत, स्तंभ, मुष्टि, गदा, वृक्ष,और भी वज्र ध्वजा, नख और अट्टहास (घोर गर्जना) इत्यादि कई आयुध की चर्चा हनुमान जी के विषय में तंत्रशास्त्रों में विद्यमान है।

हनुमानजी से पंचमुखी रूप 
पंचमुखी स्वरूप में हनुमान जी का पूर्व की तरफ वानर का,
दक्षिण की दिशा में नृसिंहमुख है ।
पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख है।
उत्तर दिशा में सूकर मुख है।
और ऊपर की ओर घोड़े का मुख है।

इत्यादि व्यवस्था मंत्र महार्णव इत्यादि तांत्रिक ग्रंथों में हनुमान जी के स्वरूप की बताई गई है।
और भी हनुमान जी के विषय में कुछ गूढचर्चा करना चाहते थे।
परंतु लेख बहुत लंबा हो जाएगा इसलिए कभी फिर चर्चा करेंगे।

हनुमान् का आध्यात्मिक अर्थ


हनुमान् का आध्यात्मिक अर्थ तैत्तिरीय उपनिषद् में दिया है-दोनों हनु के बीच का भाग ज्ञान और कर्म की 5-5 इन्द्रियों का मिलन बिन्दु है। जो इन 10 इन्द्रियों का उभयात्मक मन द्वारा समन्वय करता है, वह हनुमान् है। शरीर के भीतर नाभि का मणिपूर चक्र सूर्य केन्द्र (solar plexus) है। वहां से वाणी का जन्म होता है। कण्ठ तक बाल्य अवस्था में रहती है। वही बन्द कर दिया जाय तो ज्ञान बाहर नहीं प्रकट होगा, अन्धकार हो जायेगा। हनुमान् की तरह ज्ञान-कर्म का जिसने संयोग कर रखा है, उसके द्वारा यह सूर्य तेज बाहर निकलने पर प्रकाश होगा। साधक ब्राह्मण की वाणी से ही प्रकाश होता है।

अथाध्यात्मम्। अधरा हनुः पूर्वरूपम्। उत्तरा हनुरुत्तररूपम्। वाक् सन्धिः। जिह्वा सन्धानम्। इत्यध्यात्मम्। (तैत्तिरीय उपनिषद्, 1/3/5)

आधिभौतिक रूप में पृथ्वी सतह पर सूर्य की गति 2 प्रकार दिखती है, वार्षिक गति मकर से कर्क रेखा तक है जिनको नेमि कहते हैं उत्तर में इसकी सीमा नैमिषारण्य है, दक्षिण विन्दु अरिष्टनेमि है)। दैनिक गति में पूर्व क्षितिज पर उदय तथा पश्चिम क्षितिज पर अस्त होता है। ये दोनों क्षितिज हनु या हारियोजन हैं।
अथ हारियोजनं गृह्णाति । छन्दांसि वै हारियोजनश्छ्न्दांस्येवैतत् सन्तर्पयति तस्माद्धारियोजनं गृह्णाति (शतपथ ब्राह्मण, 4/4/3/2) एवा ते हारियोजना सुवृक्ति ऋक् 1/61/16, अथर्व 20/35/16)
जब सूर्य पूर्व क्षितिज पर आता है, तो क्षितिज से 2000 योजन (युग-सहस्र योजन पर भानू) नीचे रहने पर ही वह प्रकाश के वलन (वायुमण्डल में किरण मुड़ने से) दिखने लगता है। सूर्य सिद्धान्त में सूर्य व्यास 6500 योजन (यहां योजन = 214किमी) है। अर्थात् प्राय्ः 30% भाग क्षितिज से नीचे रहने पर दिखता है। उस समय काल का सूर्य बाल सूर्य है जो हनु के भीतर रहता है।
आकाश में 49 मरुत् की सीमा ब्रह्माण्ड है। उसकी सन्तान या बाहरी आवरण हनुमान् है जिसके भीतर ब्रह्माण्ड या सूर्य का परम पद है (जहां तक वह विन्दु रूप में दिख सकता है) सौर मण्डल में भी वायु 22 अहर्गण तक अर्थात् यूरेनस कक्षा तक है। उसका आवरण भी हनुमान् है जिसके भीतर सूर्य रूप विष्णु है।

शनिदेव का हनुमान और शिव जी के साथ सम्बन्ध


शनिदेव निष्पक्ष दण्डाधिकारी है। चाहे देव हों या असुर, मनुष्य हो या पशु सबको उनके कर्मो के आधार पर यह दण्ड देते हैं।
एक बार शनि ने शिव को भी नहीं छोड़ा :
कैलाश पर्वत पर एक दिन शिवजी विराजमान थे तभी शनिदेव उनके दर्शन करने आ गये।
अपने गुरु को प्रणाम करके शनिदेव ने बताया कि महादेव मुझे क्षमा करें , कल मैं आपकी राशि में प्रवेश करने वाला हूँ और मेरी वक्र दृष्टि से आप बच नहीं पायेंगे।
शिवजी जानकर हैरान हो गये कि उनका शिष्य अपने कर्म दंड के लिये उन्हें भी नहीं छोड़ रहा।
शिव जी ने शनिदेव से पूछा कि कितने समय तक उनको शनिदेव की वक्र दृष्टि का सामना करना पड़ेगा।
शनिदेव बोले कि उनकी दृष्टि कल सवा पहर तक रहेगी।
अगले दिन चिंतित महादेव सुबह ही धरती लोक पर चले गये और शनि से बचने के लिये हाथी का वेश बनाकर इधर उधर छिपते रहे।
जब दिन ढला गया तो पुनः शिव वेश में कैलाश आ गये। शिवजी मन ही मन खुश हो रहे थे कि उन्होंने आज शनिदेव को अच्छे से चकमा दे दिया।
शाम को शनि देव उनसे पुनः मिलने कैलाश आये।
शिवजी ने शनिदेव से कहा कि आज आपकी वक्र दृष्टि से तो बच गये हैं।
यह सुनकर शनि मुस्कुराये और बोले कि यह मेरी ही दृष्टि का प्रभाव था कि आज पूरे दिन आप हाथी बनकर धरती पर फिर रहे थे। आपको पशु योनि झेलनी पड़ी यह भी मेरा ही प्रभाव था।
यह सुनकर महादेव को शनि और भी प्यारे लगने लगे और कैलाश पर शनि देव के जयकारे लगने लगे।
हम मनुष्यों में शनिदेव का भय है क्योंकि यह मनुष्यों के अच्छे बुरे कर्मो का फल देते हैं।
कलियुग में पाप चरम पर है अत: हमारे द्वारा पाप भी अधिक होते है और शनिदेव इसका भुगतान करने आ जाते है। पर ऐसे शनिदेव भी ऐसे दो व्यक्तियों से भय खाते हैं।
धार्मिक शस्त्रों के अनुसार शनिदेव एक तो शिव के ग्यारवें अवतार हनुमानजी से डरते हैं और दूसरे ऋषि पिप्लाद से।
हनुमानजी की तरह ही ऋषि पिप्लाद को भी भगवान शिव का अवतार माना जाता है। ऋषि पिप्लाद के जन्म लेते ही शनिदेव की उन पर दशा पड़ गयी और इसी कारण उन्हें बचपन में ही अनाथ होना पड़ा।
यह बात उन्हें जब पता चली तो उन्हें शनिदेव पर अत्यधिक क्रोध आया और उन्होंने प्रतिशोध लेने की भावना से ब्रह्मा जी की पूजा और तपस्या की। उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा ।
पिप्लाद ने शनि को सबक सिखाने के लिये ब्रह्मदंड मांग लिया और शनिदेव को खोजने लगे।
एक पीपल के पेड़ पर उन्हें शनिदेव दिखाई दिये और उन्होंने आव देखा ना ताव सीधे उन्हें पैर पर हमला कर दिया। इसकी कारण शनि अपंग हो गये। उन्होंने शनि को ही उनकी करनी का दंड दे दिया। इसी कारण शनि आज भी पिप्लाद से भय खाते हैं।
पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और उन्होंने इसी पीपल के पेड़ के नीचे ब्रह्माजी की तपस्या की और इसी पीपल के पत्ते भी खाये।
अत: उनके जीवन पर पीपल के वृक्ष का अधिक प्रभाव रहा है। शनिवार शनि और हनुमान जो दोनों का वार है और पीपल का वृक्ष पिप्लाद की याद दिलाता है अत: इस दिन पीपल की पूजा करने से शनि का प्रकोप कम हो जाता है ।
सार

इस कथा का सार है कि मनुष्य को बुरे कर्मों से डरना चाहिए, लेकिन लोग बुरे कर्मों का त्याग न करके दंडाधिकारी का डर मन में रखते हैं और उस डर के कारण वे डर और पाप दोनों का फल भोगते हैं। 

बाबा रामदेव का पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को समर्थन, कहा : ‘जो आँखों से दिख रहा, वो तो बस 1% है’: सब जगह पाखंड मत देखो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना स्वाभाविक है। जो हिन्दू अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण का पालन करने वाले के दुष्प्रचार के आगे नतमस्तक होता हो, श्रीराम को काल्पनिक कहने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्षों को शांतिदूत मानते हों, उनकी बुद्धि को क्या कहा जा सकता है? ऐसे बेशर्म और बुद्धिविहीन हिन्दुओं को मुसलमानों से धर्म सीखना चाहिए, जो फरेब को सच साबित करने को आमादा है। जबकि पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के के मोहम्मद, जिनकी निगरानी में कोर्ट के आदेश पर मंदिर के सबूत जुटाने खुदाई हुई थी, ने सेवानिर्वित होने उपरांत लिखी अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि "अयोध्या में राम मंदिर कभी का बन गया होता, अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने खुदाई में मिले मंदिर के इतने अधिक मिले सबूतों को छिपाकर केवल एक खम्बा ही नहीं दिखाया होता।" 

इतने चैनल महंत की सच्चाई जानने गए, लेकिन सभी उनका गुणगान करते नज़र आए। ABP News जो दुष्प्रचार करने में पीछे नहीं था, "जब महंत जी भरे दरबार में पूछा कि क्या कोई मेरे चाचा जानता है तो बताए, सन्नाटा छाते देख बोले, यहाँ जिस रिपोर्टर के चाचा का ये नाम है, सामने आए।" रिपोर्टर बिन बोले उसके प्रश्नों का उत्तर देने के बाद उसको दुष्प्रचार बंद करने के लिए कहा। 

इतना ही नहीं, महंत शास्त्री का विरोध करने वालों को शायद रामभक्त हनुमान के चमत्कारों का ज्ञान नहीं। रामभक्त हनुमान के एक चमत्कार, पत्थरवाले, चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर के महंत गौरव शर्मा का पिछले लेख में उल्लेख किया था। अब कटनी, मध्य प्रदेश में हनुमान मंदिर है, जहाँ टूटी हड्डियों को जड़ीबूटियों के खिलाने से तुरंत जोड़ा जाता है। जबकि किसी भी उपचार में संभव नहीं कि दवाई खाते ही टूटी हड्डी जुड़ जाए, लेकिन रामभक्त हनुमान इसे संभव कर रहे हैं। जड़ीबूटी खाने के बाद पंडित जी कहते हैं कि जिनके प्लास्टर चढ़ा है, एक्सरे करवा लो हड्डी जुड़ गयी है। यह मंदिर हड्डी वाले मंदिर के नाम से मशहूर है। दोनों में व्यक्तिगत अनुभव है।    

बाबा रामदेव ने बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ पाखंडी लोग टूट के उनके पीछे पड़ गए हैं। ऐसे लोग पूछ रहे हैं कि ये भगवान की कृपा क्या होती है? बालाजी की कृपा क्या होती है? पूछते हैं हनुमान जी की कृपा क्या है? स्वामी रामदेव ने कहा, जिन्हें बाहर की आंखों से देखना हो वो धीरेन्द्र शास्त्री से पूछें. जिन्हें तर्क-वितर्क करना हो वो रामभद्राचार्य जी के पास आ जाओ और जिन्हें चमत्कार देखना हो तो इनके शिष्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास चले जाओ.

दरअसल बाबा रामदेव धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य जी के पास पहुँचे थे और वहीं मंच से उन्होंने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “ये सब अगर बिना आँखों की देखनी हो तो आप पूज्य भद्राचार्य जी में देख लो। अगर आपको बाहर की आँखों से देखना हो तो यह आप धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री में देख लो। भगवान के अनुग्रह से व्यक्ति को सूक्ष्म जगत की अनुभूति होती है। लेकिन यह गुरु की कृपा और भगवत की कृपा से होता है। गुरु की कृपा, भगवत कृपा से बालाजी महाराज की कृपा होती है।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब गुरु और भगवान की शरण में रहने वाला और दैवीय कृपा संपन्न जब कोई महापुरुष आशीर्वाद दे देता है तो व्यक्ति संकटों से मुक्त हो जाता है। यही काम धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी कर रहे हैं।” बाबा रामदेव ने कहा कि जहाँ तक बात रही तर्क-वितर्क की जिनको तर्क करना है तो वह महाराज जी (रामभद्राचार्य जी) के पास आ जाएँ। जिनको चमत्कार देखना हे वह महाराज जी के चेले (महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) के पास चले जाएँ।

बाबा ने आगे कहा, “मैं तो ज्यादा मीडिया के लोगों को फोन नहीं करता हूँ। लेकिन, मैंने कुछ को बोला है कि सब जगह पाखंड मत देखो। कुछ यह भी देख लो कि जो सच है, जो दिख रहा है आँखों से – वह केवल एक प्रतिशत है। अदृष्ट 99 प्रतिशत है।” उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

अवलोकन करें:-

घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम

साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। इसलिए मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वे इन साजिशों से नहीं डरते हैं। उन्होंने कहा था कि अब जनजातीय इलाकों में दरबार लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से उनके खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और वामपंथी पीछे पड़ गए हैं।

धर्मद्रोहियों द्वारा बागेश्वर महाराज जी से परेशानी क्यों ? क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

जब कभी हिन्दू हित के समर्थन में कोई महन्त, साधु अथवा साध्वी सनातन की रक्षा में खड़े होते हैं, विदेशी भीख के मौताज़ हिन्दू विरोधी सियापा करने लगते हैं। और सनातन विरोधी परदे के पीछे बैठ जयचन्दी हिन्दुओं को भीख देकर हिन्दुओं में फूट डालने का कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। लेकिन ये हिन्दू विरोधी किस आधार पर टेरेसा को संत की उपाधि देते हैं? जिसने सेवा के नाम पर ईसाई धर्माकरण को बढ़ावा दिया। कई लेख लिखे जा चुके है, परन्तु सब ऐसे चुप्पी साधे बैठे हैं, जैसे पारिवारिक शोक में डूबे हैं। अभी आने वाले समय में ये सनातन विरोधी गैंग और भी गमगीन होने वाले हैं। 
हिन्दू विरोधियों के मकड़जाल में फंसने वाले हिन्दुओं बाबा रामदेव का रामलीला ग्राउंड कांड याद है कि भूल गए। बहुत रामदेव को महिला के वस्त्र पहन भागने वाला ढोंगी बाबा कहते थे, रामदेव को ढोंगी बताने वालों से किसी ने यह नहीं पूछा कि मध्य रात्रि बिजली काट क्या अनर्थ करने गए थे? सब खोजी पत्रकार और चैनल हिन्दू विरोधियों की पत्तल चाटने में लगे हुए थे। आज तक किसी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने का साहस नहीं किया, क्यों? दूसरे, जब दीपावली के शुभावसर के दिन परमपूजनीय शंकराचार्य को झूठे आरोप में गिरफ्तार करने पर तत्कालीन सारे चैनल शंकराचार्य पर कीजड़ उछाल हिन्दू धर्म को  बदनाम करने में लगे थे, लेकिन उनकी रिहाई होने पर किसी भी चैनल ने सच्चाई से जनता को अवगत करवाने का साहस नहीं किया। आज पांसे बदल चुके हैं, हिन्दू ने जागृत होना शुरू कर दिया है, फिर भी कुछ जयचंदी हिन्दू जेहादियों, पादरियों का गुणगान करने में लगे हैं। 

हिन्दुओं को जातियों में बाँट मालपुए खाने के दिन लदने जा रहे हैं, क्योकि ये गैंग अब आवाज़ ईसाई और मुस्लिम समाज में सैकड़ों जाति को लेकर उठनी शुरू होने से भयभीत है। क्यों नहीं ईसाई एक ही चर्च में प्रार्थना और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दे को दफ़न कर सकते? क्यों नहीं मुस्लिम एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ सकते और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न कर सकते?   

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में एक और हनुमानभक्त का आँखों देखा व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहा हूँ। स्थान पत्थर वाले, चांदनी चौक स्थित महाराज हनुमान मन्दिर, महन्त गौरव शर्मा, विश्व रेसलिंग चैंपियन, एक पति इस्लामिक चुंगल में फंसी अपनी पत्नी को लेकर आया। पत्नी पति को पहचानने के अलावा अपने ही देवी-देवताओं को नहीं पहचान रही थी। महंत गौरव के उपचार करते ही उस महिला ने तुरंत गले में पड़े दोनों ताबीजों को तोड़ मन्दिर से बाहर सड़क पर फेंके। ताबीज़ मोटे काले धागे से बंधे होने के बावजूद ऐसे टूटे जैसे कच्चा धागा हो। बजरंगबली की शक्ति देख मैं स्तब्ध हो गया। उपचार उपरान्त महन्त जी बजरंगबली स्तुति पर जाने हुए, मुझे 5 मिनट तक हनुमान जाप करने का आग्रह किया, क्योकि उस समय मै महिला के निकट बैठा महंत गौरव द्वारा बजरंगबली का चमत्कार देख रहा था। और पति-पत्नी को 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहा।  ऐसे ही दूर से दूर लोग हर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को हनुमान मन्दिर दर्शन के लिए नहीं आते। यह शुभ काम महन्त गौरव के पिताश्री महंत श्रवण कुमार शर्मा के समय से देखता आ रहा हूँ।  

भगवान हनुमान भक्त धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के विरुद्ध ये साजिश उसी दिन से आरम्भ हो गयी थी जिस दिन महाराज जी ने हजारों अवेध धर्मानंतरण के विरोध में हिंदुओं की घर वापसी कराई थी।

भारत में कोरोना फैलाने वाले मुहम्मद साद का विरोध नही होता राष्ट्रद्रोही आतंकियो का विरोध नही होता है बलात्कारी पादरियों का विरोध करने की औकात नही है।

दिन भर पानी पी पीकर बागेश्वर धाम को बदनाम करने वाले तथाकथित पत्तलकारों को ये वीडियो देखना चाहिए। जब सुधारों की बात कर रहे हो तो हर जगह का बीड़ा उठाओ न, बताओ  अंडरगारमेंट्स में हाथ डालकर कौन सी झाड़ फूंक होती है। देखिए वीडियो, यही वीडियो ट्विटर पर भी, दोनों प्रस्तुत

 

लेकिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का विरोध होता है और करने वाले दो कौड़ी के जयचंद हिन्दू ही है।क्योकि हिन्दू सर तन से जुदा की धमकी नही देता, चुपचाप सहन कर लेता है क्योंकि उसे डीजल पेट्रोल सस्ता चाहिए और उन्हें भारत पर कब्जा(गज़वा ए हिन्द) चाहिए।

नागपुर की अंधश्रृद्धा उन्मूलन संस्था ने बुंदेलखंड छत्तरपुर में स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी पर मीडिया के माध्यम से ये आरोप लगाया है कि वो अपने दरबार के माध्यम से अंधविश्वास फैला रहे हैं और किसी भी शख्स के बारे में बिना परिचय के किए जा रहे उनके सजीव वर्णन दरअसल धोखेबाजी है । इस अंधश्रृद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने कोर्ट में जाकर कोई याचिका नहीं लगायी और ना ही कोई केस ही दर्ज करवाया । सिर्फ एक पत्र लिखकर मीडिया में जारी कर दिया और बागेश्वर धाम को बदनाम करने की कोशिश शुरू कर दी ।

आम तौर पर राम कथाएँ 9 दिन की होती हैं लेकिन विशेष परिस्थितियों में दिन कम भी कर दिए जाते हैं । 4 जनवरी को बागेश्वर धाम के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर ये पोस्ट की गई थी कि धीरेंद्र शास्त्री जी की श्री राम चरित्र चर्चा 5 से 11 जनवरी तक होगी । यानी पहले ही कथा 7 दिन की थी लेकिन जिहादी और कम्युनिस्ट धूर्तों ने ये दावा करना शुरू कर दिया कि कथा तो 9 दिन की थी लेकिन चुनौती की वजह से बागेश्वर बाबा 2 दिन पहले ही नागपुर से कथा छोड़कर भाग गए । कई जिहादियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हुए उनको भागेश्वर बाबा कहना शुरू कर दिया । सवाल ये है कि आखिर जिहादी, कम्युनिस्ट और पादरी बाबा के खिलाफ झूठा प्रोपागेंडा क्यों खड़ा कर रहे हैं?

इसलिए क्योंकि बाबा बागेश्वर सोए हुए हिंदुओं को जगाने के काम में लगे हुए हैं । आचार्य धीरेंद्र जी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 2 महीने पहले एक सभा की थी जिसमें 4 लाख हिंदुओं को उन्होंने धर्मपरिवर्तन के खिलाफ लड़ने की शपथ दिलाई थी । 25 दिसंबर को जब पूरी दुनिया क्रिसमस मना रही थी तब बाबा बागेश्वर ने दमोह में 150 से ज्यादा हिंदू परिवारों की घर वापसी करवाई थी जिनको धोखे से ईसाई बनाया गया था । इस घटना से क्रिश्चियन्स मिशिनिरीज को काफी झटका लगा।

इसके अलावा पठान मूवी और लव जिहाद के बहिष्कार के लिए आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी के आह्वान से भी कराची से दुबई तक जिहादियों को जबरदस्त मिर्ची लग गई यही वजह है कि जिहादी और पादरी यानी फादर और चादर मिलकर आचार्य जी के खिलाफ झूठ फैलाने में लग गए हैं।

विवाद बढ़ने पर स्वयं धीरेंद्र शास्त्री जी ने नागपुर वाले अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव जी को ये प्रस्ताव दिया है कि आप रायपुर आ जाओ यहाँ कथा चल रही है दरबार लगा है आप स्वयं आकर चमत्कार देख लो । और धीरेंद्र शास्त्री जी ने ये भी कहा है कि वो टिकट का खर्चा भी उनको देंगे। लेकिन इसके बावजूद श्याम मनोज ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की बजाय भागना ज़्यादा पसंद किया है।

हिंदू समाज पूरी तरह बागेश्वर धाम के साथ खड़ा है और जो लोग भी बागेश्वर को भागेश्वर कह रहे हैं वो सावधान हो जायें क्योंकि उनके खिलाफ आस्था को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज हो सकता है।

बात गहरी है पर धीरे धीरे समझ आती है !

चर्च ने टेरेसा को संत बनाना था, ताकि उनका प्रयोग करके कन्वर्शन किया जा सके इसके लिए सिद्ध करना था कि उन्होंने कम से कम दो चमत्कार किये हैं। और यकीन मानिये उन्होंने ये सिद्ध भी कर दिया ! वो दो चमत्कार थे।

1 . उनकी फोटो देखकर एक महिला की पथरी गायब हो गई !

2. एक आदमी का ब्रेन tumour उनकी मूर्ति को छूते ही गायब हो गया

कमाल कि बात डॉक्टरों ने दोनों चमत्कारों के सर्टिफिकेट तक दे दिया। 

उसके बाद ईसाइयों के धर्म गुरु पोप ने चमत्कारों को मानते हुए टेरेसा को संत की उपाधि दे दी ! आज सारे देश, सारा मीडिया टेरेसा के आगे संत लगता है, मतलब हर कोई मानता है टेरेसा ने ये चमत्कार किये थे ! 

किसी की क्या हिम्मत कि चमत्कारों पर सवाल तक उठा दे !

अब दसरी तरफ देखे आज हिन्दुओ का बड़ा वर्ग बागेश्वर धाम के खिलाफ खड़ा होने को तैयार बैठा है ! क्योंकि उसे चमत्कारों पर विश्वास नहीं ! हो सकता है चमत्कार फर्जी हो ! 

हिंदुओं के विरुद्ध अब ईसाईयों का इकोसिस्टम फिर से प्रारंभ हो गया है। अब यह ईसाईयों की नयी टूलकिट है जिसमें बीबीसी और एबीपी न्यूज़ भी शामिल है व अन्य चैनल भी शामिल है. जिसमें यह बाबा के चमत्कारों को अंधविश्वास वगैरह बतला रहा है। जबकि बाबा ने किसी भी चमत्कार से इनकार कियाहै। सर्वप्रथम हिंदुओं के विरुद्ध एक सोची-समझी टूलकिट फिर से प्रारंभ हो गई है और हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए एक बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है क्योंकि कुछ दिनों पहले बाबा बागेश्वर धाम में  कुछ ईसाई दोबारा हिंदू धर्म में शामिल हुए थे तो इस विषय में अब सभी हिंदुओं को एकजुट होना है और  बाबा बागेश्वर धाम का समर्थन करना है और जो भी चैनल इस विषय में ड्रामा करता है उसका बहिष्कार करना है, ताकि हमारी जो एकजुटता है वह सब को एक बार फिर से पता लगे।  

बारी बारी से धर्माचार्यों को निशाना बनाया जा रहा। कुतर्क के सहारे बदनाम किया जा रहा, अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने निर्थक आरोपों की पोलखोल दी। 

हिंदुओं को बांटने की षड्यंत्रगत भरसक कोशिश 

जो लोग हिंदुंओ का मजाक उड़ाते हुए उन पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाते हैं वो जरा ईसाईयों व मौलवियों को भी सुने।

यूपी के हाथरस में अंबेडकरवादी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को गाली दे रहे हैं और तोड़ रहे हैं। वे घर-घर जाकर ब्राह्मणों के प्रति अपनी घृणा प्रदर्शित कर रहे हैं, जब किसी ने इन गतिविधियों की शिकायत की तो उन्होंने उसे एससी-एसटी एक्ट की धमकी दी। कोई मीडिया आपको ये नहीं दिखाएगा। देखिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो 

बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री

बागेश्वर धाम बुंदेलखंड का एक  गांव जो मुख्य सड़क से लगभग 6 से 7km अंदर है, आज से चार पांच साल पहले तक, खुद उस गांव (गड़ा) के लोगों और उनके रिश्तेदारों के अलावा उस गांव और उस हनुमान मंदिर को कोई नहीं जानता था। फिर उसी ठेठ गांव का एक इक्कीस बाइस साल का ठेठ बुंदेलखंडी नौजवान जो श्री श्री रामभद्राचार्य महाराज का शिष्य है और कलयुग में सर्वाधिक पूजे जाने वाले भगवान श्री हनुमान जी का अनन्य भक्त है अपनी शास्त्री की शिक्षा दीक्षा पूरी करके अपने गांव लौटता है।

ठेठ गांव का ठेठ लड़का जिस गांव को कोई नहीं जानता था उसने पिछले चार पांच साल में अपने Aura, वाकपटुता, धर्म ज्ञान, कथा करने का रोचक अंदाज, और भगवान हनुमान के आशीर्वाद से लोगों के मन में भगवान, हिंदू धर्म, सनातन और राष्ट्रवाद की एक ऐसी अलख जगानी शुरू की जिसमें न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा, न कोई ऊंचा था न कोई नीचा, उसकी कथाओं में सिर्फ और सिर्फ धर्म था, सनातन था, हिंदू था, राष्ट्रवाद था। 

आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच बैठकर रामकथा करना हो या सैकड़ों लड़कियों की हर साल शादी कराने का महायज्ञ, बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में कैंसर हॉस्पिटल शुरू करने की वकालत हो उसने न सिर्फ इसका सपना दिखाया बल्कि उसे करके भी दिखाया और सबसे बड़ी बात ये सब कुछ निःशुल्क, स्वेच्छा से जो देना है दे दो नही तो कोई बात नहीं। 

क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

उसने बिना किसी ऊंच नीच की परवाह किए सभी को एक पंडाल के नीचे इकट्ठा कर दिया, साथ ही साथ वो गरीब लोग जो किसी लालचवश या मजबूरी में किसी और धर्म मेंं जाने को मजबूर हो गए थे उन्हें भी पुनः वापिस लाने का काम किया। बस यही गलती हो गई उस छब्बीस साल के लड़के से सभी जाति को एक साथ एक पंडाल में बैठाकर रामकथा, आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच में रामकथा करना और उनको अहसास दिलाना की आप प्रभु राम के वंशज हो.... राम राम इतना बड़ा घोर पाप...... ये कतई नहीं चलेगा लड़के, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को वापिस लाने का जघन्य पाप...... आप अपराधी है बाबा

जात पात, अंगड़ा पिछड़ा को छोड़कर सिर्फ सनातन की बात करना और लोगों को उस पर चलने को प्रेरित करना...... पगला गए हो का धीरेंद्र शास्त्री

छब्बीस साल की उम्र में यदि इस अत्यंत पिछड़े हुए इलाके के बेहद ठेठ गांव से निकला यह लड़का जिसने खुद की प्रतिभा से अपना लोहा पूरे देश विदेश में मनवाया है तो यह निश्चित है की इसके ऊपर अत्यंत ईश्वरीय कृपा है और जिस पथ पर यह आगे निकला है तो ऐसे आरोप और कीचड़ उछलना तो महज एक शुरुआत है, अभी आरोपों की तीव्रता और स्तर बहुत नीचे जाने वाला है। धीरेंद्र शास्त्री से व्यक्तिगत तौर पर कभी नहीं मिला और न ही मिलने की कोई तीव्र इच्छा है, उनके चमत्कार सही होते हैं या गलत इस पर भी में कुछ नही कहना चाहता, में तो इतना कहना चाहता हूं की एक गांव से निकले इस नौजवान ने सनातन को उठाने, बढ़ाने और देश को सशक्त बनाने का जो काम शुरू किया है वो विरले लोग ही करते है।