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धर्मद्रोहियों द्वारा बागेश्वर महाराज जी से परेशानी क्यों ? क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

जब कभी हिन्दू हित के समर्थन में कोई महन्त, साधु अथवा साध्वी सनातन की रक्षा में खड़े होते हैं, विदेशी भीख के मौताज़ हिन्दू विरोधी सियापा करने लगते हैं। और सनातन विरोधी परदे के पीछे बैठ जयचन्दी हिन्दुओं को भीख देकर हिन्दुओं में फूट डालने का कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। लेकिन ये हिन्दू विरोधी किस आधार पर टेरेसा को संत की उपाधि देते हैं? जिसने सेवा के नाम पर ईसाई धर्माकरण को बढ़ावा दिया। कई लेख लिखे जा चुके है, परन्तु सब ऐसे चुप्पी साधे बैठे हैं, जैसे पारिवारिक शोक में डूबे हैं। अभी आने वाले समय में ये सनातन विरोधी गैंग और भी गमगीन होने वाले हैं। 
हिन्दू विरोधियों के मकड़जाल में फंसने वाले हिन्दुओं बाबा रामदेव का रामलीला ग्राउंड कांड याद है कि भूल गए। बहुत रामदेव को महिला के वस्त्र पहन भागने वाला ढोंगी बाबा कहते थे, रामदेव को ढोंगी बताने वालों से किसी ने यह नहीं पूछा कि मध्य रात्रि बिजली काट क्या अनर्थ करने गए थे? सब खोजी पत्रकार और चैनल हिन्दू विरोधियों की पत्तल चाटने में लगे हुए थे। आज तक किसी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने का साहस नहीं किया, क्यों? दूसरे, जब दीपावली के शुभावसर के दिन परमपूजनीय शंकराचार्य को झूठे आरोप में गिरफ्तार करने पर तत्कालीन सारे चैनल शंकराचार्य पर कीजड़ उछाल हिन्दू धर्म को  बदनाम करने में लगे थे, लेकिन उनकी रिहाई होने पर किसी भी चैनल ने सच्चाई से जनता को अवगत करवाने का साहस नहीं किया। आज पांसे बदल चुके हैं, हिन्दू ने जागृत होना शुरू कर दिया है, फिर भी कुछ जयचंदी हिन्दू जेहादियों, पादरियों का गुणगान करने में लगे हैं। 

हिन्दुओं को जातियों में बाँट मालपुए खाने के दिन लदने जा रहे हैं, क्योकि ये गैंग अब आवाज़ ईसाई और मुस्लिम समाज में सैकड़ों जाति को लेकर उठनी शुरू होने से भयभीत है। क्यों नहीं ईसाई एक ही चर्च में प्रार्थना और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दे को दफ़न कर सकते? क्यों नहीं मुस्लिम एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ सकते और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न कर सकते?   

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में एक और हनुमानभक्त का आँखों देखा व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहा हूँ। स्थान पत्थर वाले, चांदनी चौक स्थित महाराज हनुमान मन्दिर, महन्त गौरव शर्मा, विश्व रेसलिंग चैंपियन, एक पति इस्लामिक चुंगल में फंसी अपनी पत्नी को लेकर आया। पत्नी पति को पहचानने के अलावा अपने ही देवी-देवताओं को नहीं पहचान रही थी। महंत गौरव के उपचार करते ही उस महिला ने तुरंत गले में पड़े दोनों ताबीजों को तोड़ मन्दिर से बाहर सड़क पर फेंके। ताबीज़ मोटे काले धागे से बंधे होने के बावजूद ऐसे टूटे जैसे कच्चा धागा हो। बजरंगबली की शक्ति देख मैं स्तब्ध हो गया। उपचार उपरान्त महन्त जी बजरंगबली स्तुति पर जाने हुए, मुझे 5 मिनट तक हनुमान जाप करने का आग्रह किया, क्योकि उस समय मै महिला के निकट बैठा महंत गौरव द्वारा बजरंगबली का चमत्कार देख रहा था। और पति-पत्नी को 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहा।  ऐसे ही दूर से दूर लोग हर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को हनुमान मन्दिर दर्शन के लिए नहीं आते। यह शुभ काम महन्त गौरव के पिताश्री महंत श्रवण कुमार शर्मा के समय से देखता आ रहा हूँ।  

भगवान हनुमान भक्त धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के विरुद्ध ये साजिश उसी दिन से आरम्भ हो गयी थी जिस दिन महाराज जी ने हजारों अवेध धर्मानंतरण के विरोध में हिंदुओं की घर वापसी कराई थी।

भारत में कोरोना फैलाने वाले मुहम्मद साद का विरोध नही होता राष्ट्रद्रोही आतंकियो का विरोध नही होता है बलात्कारी पादरियों का विरोध करने की औकात नही है।

दिन भर पानी पी पीकर बागेश्वर धाम को बदनाम करने वाले तथाकथित पत्तलकारों को ये वीडियो देखना चाहिए। जब सुधारों की बात कर रहे हो तो हर जगह का बीड़ा उठाओ न, बताओ  अंडरगारमेंट्स में हाथ डालकर कौन सी झाड़ फूंक होती है। देखिए वीडियो, यही वीडियो ट्विटर पर भी, दोनों प्रस्तुत

 

लेकिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का विरोध होता है और करने वाले दो कौड़ी के जयचंद हिन्दू ही है।क्योकि हिन्दू सर तन से जुदा की धमकी नही देता, चुपचाप सहन कर लेता है क्योंकि उसे डीजल पेट्रोल सस्ता चाहिए और उन्हें भारत पर कब्जा(गज़वा ए हिन्द) चाहिए।

नागपुर की अंधश्रृद्धा उन्मूलन संस्था ने बुंदेलखंड छत्तरपुर में स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी पर मीडिया के माध्यम से ये आरोप लगाया है कि वो अपने दरबार के माध्यम से अंधविश्वास फैला रहे हैं और किसी भी शख्स के बारे में बिना परिचय के किए जा रहे उनके सजीव वर्णन दरअसल धोखेबाजी है । इस अंधश्रृद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने कोर्ट में जाकर कोई याचिका नहीं लगायी और ना ही कोई केस ही दर्ज करवाया । सिर्फ एक पत्र लिखकर मीडिया में जारी कर दिया और बागेश्वर धाम को बदनाम करने की कोशिश शुरू कर दी ।

आम तौर पर राम कथाएँ 9 दिन की होती हैं लेकिन विशेष परिस्थितियों में दिन कम भी कर दिए जाते हैं । 4 जनवरी को बागेश्वर धाम के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर ये पोस्ट की गई थी कि धीरेंद्र शास्त्री जी की श्री राम चरित्र चर्चा 5 से 11 जनवरी तक होगी । यानी पहले ही कथा 7 दिन की थी लेकिन जिहादी और कम्युनिस्ट धूर्तों ने ये दावा करना शुरू कर दिया कि कथा तो 9 दिन की थी लेकिन चुनौती की वजह से बागेश्वर बाबा 2 दिन पहले ही नागपुर से कथा छोड़कर भाग गए । कई जिहादियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हुए उनको भागेश्वर बाबा कहना शुरू कर दिया । सवाल ये है कि आखिर जिहादी, कम्युनिस्ट और पादरी बाबा के खिलाफ झूठा प्रोपागेंडा क्यों खड़ा कर रहे हैं?

इसलिए क्योंकि बाबा बागेश्वर सोए हुए हिंदुओं को जगाने के काम में लगे हुए हैं । आचार्य धीरेंद्र जी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 2 महीने पहले एक सभा की थी जिसमें 4 लाख हिंदुओं को उन्होंने धर्मपरिवर्तन के खिलाफ लड़ने की शपथ दिलाई थी । 25 दिसंबर को जब पूरी दुनिया क्रिसमस मना रही थी तब बाबा बागेश्वर ने दमोह में 150 से ज्यादा हिंदू परिवारों की घर वापसी करवाई थी जिनको धोखे से ईसाई बनाया गया था । इस घटना से क्रिश्चियन्स मिशिनिरीज को काफी झटका लगा।

इसके अलावा पठान मूवी और लव जिहाद के बहिष्कार के लिए आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी के आह्वान से भी कराची से दुबई तक जिहादियों को जबरदस्त मिर्ची लग गई यही वजह है कि जिहादी और पादरी यानी फादर और चादर मिलकर आचार्य जी के खिलाफ झूठ फैलाने में लग गए हैं।

विवाद बढ़ने पर स्वयं धीरेंद्र शास्त्री जी ने नागपुर वाले अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव जी को ये प्रस्ताव दिया है कि आप रायपुर आ जाओ यहाँ कथा चल रही है दरबार लगा है आप स्वयं आकर चमत्कार देख लो । और धीरेंद्र शास्त्री जी ने ये भी कहा है कि वो टिकट का खर्चा भी उनको देंगे। लेकिन इसके बावजूद श्याम मनोज ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की बजाय भागना ज़्यादा पसंद किया है।

हिंदू समाज पूरी तरह बागेश्वर धाम के साथ खड़ा है और जो लोग भी बागेश्वर को भागेश्वर कह रहे हैं वो सावधान हो जायें क्योंकि उनके खिलाफ आस्था को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज हो सकता है।

बात गहरी है पर धीरे धीरे समझ आती है !

चर्च ने टेरेसा को संत बनाना था, ताकि उनका प्रयोग करके कन्वर्शन किया जा सके इसके लिए सिद्ध करना था कि उन्होंने कम से कम दो चमत्कार किये हैं। और यकीन मानिये उन्होंने ये सिद्ध भी कर दिया ! वो दो चमत्कार थे।

1 . उनकी फोटो देखकर एक महिला की पथरी गायब हो गई !

2. एक आदमी का ब्रेन tumour उनकी मूर्ति को छूते ही गायब हो गया

कमाल कि बात डॉक्टरों ने दोनों चमत्कारों के सर्टिफिकेट तक दे दिया। 

उसके बाद ईसाइयों के धर्म गुरु पोप ने चमत्कारों को मानते हुए टेरेसा को संत की उपाधि दे दी ! आज सारे देश, सारा मीडिया टेरेसा के आगे संत लगता है, मतलब हर कोई मानता है टेरेसा ने ये चमत्कार किये थे ! 

किसी की क्या हिम्मत कि चमत्कारों पर सवाल तक उठा दे !

अब दसरी तरफ देखे आज हिन्दुओ का बड़ा वर्ग बागेश्वर धाम के खिलाफ खड़ा होने को तैयार बैठा है ! क्योंकि उसे चमत्कारों पर विश्वास नहीं ! हो सकता है चमत्कार फर्जी हो ! 

हिंदुओं के विरुद्ध अब ईसाईयों का इकोसिस्टम फिर से प्रारंभ हो गया है। अब यह ईसाईयों की नयी टूलकिट है जिसमें बीबीसी और एबीपी न्यूज़ भी शामिल है व अन्य चैनल भी शामिल है. जिसमें यह बाबा के चमत्कारों को अंधविश्वास वगैरह बतला रहा है। जबकि बाबा ने किसी भी चमत्कार से इनकार कियाहै। सर्वप्रथम हिंदुओं के विरुद्ध एक सोची-समझी टूलकिट फिर से प्रारंभ हो गई है और हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए एक बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है क्योंकि कुछ दिनों पहले बाबा बागेश्वर धाम में  कुछ ईसाई दोबारा हिंदू धर्म में शामिल हुए थे तो इस विषय में अब सभी हिंदुओं को एकजुट होना है और  बाबा बागेश्वर धाम का समर्थन करना है और जो भी चैनल इस विषय में ड्रामा करता है उसका बहिष्कार करना है, ताकि हमारी जो एकजुटता है वह सब को एक बार फिर से पता लगे।  

बारी बारी से धर्माचार्यों को निशाना बनाया जा रहा। कुतर्क के सहारे बदनाम किया जा रहा, अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने निर्थक आरोपों की पोलखोल दी। 

हिंदुओं को बांटने की षड्यंत्रगत भरसक कोशिश 

जो लोग हिंदुंओ का मजाक उड़ाते हुए उन पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाते हैं वो जरा ईसाईयों व मौलवियों को भी सुने।

यूपी के हाथरस में अंबेडकरवादी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को गाली दे रहे हैं और तोड़ रहे हैं। वे घर-घर जाकर ब्राह्मणों के प्रति अपनी घृणा प्रदर्शित कर रहे हैं, जब किसी ने इन गतिविधियों की शिकायत की तो उन्होंने उसे एससी-एसटी एक्ट की धमकी दी। कोई मीडिया आपको ये नहीं दिखाएगा। देखिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो 

बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री

बागेश्वर धाम बुंदेलखंड का एक  गांव जो मुख्य सड़क से लगभग 6 से 7km अंदर है, आज से चार पांच साल पहले तक, खुद उस गांव (गड़ा) के लोगों और उनके रिश्तेदारों के अलावा उस गांव और उस हनुमान मंदिर को कोई नहीं जानता था। फिर उसी ठेठ गांव का एक इक्कीस बाइस साल का ठेठ बुंदेलखंडी नौजवान जो श्री श्री रामभद्राचार्य महाराज का शिष्य है और कलयुग में सर्वाधिक पूजे जाने वाले भगवान श्री हनुमान जी का अनन्य भक्त है अपनी शास्त्री की शिक्षा दीक्षा पूरी करके अपने गांव लौटता है।

ठेठ गांव का ठेठ लड़का जिस गांव को कोई नहीं जानता था उसने पिछले चार पांच साल में अपने Aura, वाकपटुता, धर्म ज्ञान, कथा करने का रोचक अंदाज, और भगवान हनुमान के आशीर्वाद से लोगों के मन में भगवान, हिंदू धर्म, सनातन और राष्ट्रवाद की एक ऐसी अलख जगानी शुरू की जिसमें न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा, न कोई ऊंचा था न कोई नीचा, उसकी कथाओं में सिर्फ और सिर्फ धर्म था, सनातन था, हिंदू था, राष्ट्रवाद था। 

आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच बैठकर रामकथा करना हो या सैकड़ों लड़कियों की हर साल शादी कराने का महायज्ञ, बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में कैंसर हॉस्पिटल शुरू करने की वकालत हो उसने न सिर्फ इसका सपना दिखाया बल्कि उसे करके भी दिखाया और सबसे बड़ी बात ये सब कुछ निःशुल्क, स्वेच्छा से जो देना है दे दो नही तो कोई बात नहीं। 

क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

उसने बिना किसी ऊंच नीच की परवाह किए सभी को एक पंडाल के नीचे इकट्ठा कर दिया, साथ ही साथ वो गरीब लोग जो किसी लालचवश या मजबूरी में किसी और धर्म मेंं जाने को मजबूर हो गए थे उन्हें भी पुनः वापिस लाने का काम किया। बस यही गलती हो गई उस छब्बीस साल के लड़के से सभी जाति को एक साथ एक पंडाल में बैठाकर रामकथा, आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच में रामकथा करना और उनको अहसास दिलाना की आप प्रभु राम के वंशज हो.... राम राम इतना बड़ा घोर पाप...... ये कतई नहीं चलेगा लड़के, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को वापिस लाने का जघन्य पाप...... आप अपराधी है बाबा

जात पात, अंगड़ा पिछड़ा को छोड़कर सिर्फ सनातन की बात करना और लोगों को उस पर चलने को प्रेरित करना...... पगला गए हो का धीरेंद्र शास्त्री

छब्बीस साल की उम्र में यदि इस अत्यंत पिछड़े हुए इलाके के बेहद ठेठ गांव से निकला यह लड़का जिसने खुद की प्रतिभा से अपना लोहा पूरे देश विदेश में मनवाया है तो यह निश्चित है की इसके ऊपर अत्यंत ईश्वरीय कृपा है और जिस पथ पर यह आगे निकला है तो ऐसे आरोप और कीचड़ उछलना तो महज एक शुरुआत है, अभी आरोपों की तीव्रता और स्तर बहुत नीचे जाने वाला है। धीरेंद्र शास्त्री से व्यक्तिगत तौर पर कभी नहीं मिला और न ही मिलने की कोई तीव्र इच्छा है, उनके चमत्कार सही होते हैं या गलत इस पर भी में कुछ नही कहना चाहता, में तो इतना कहना चाहता हूं की एक गांव से निकले इस नौजवान ने सनातन को उठाने, बढ़ाने और देश को सशक्त बनाने का जो काम शुरू किया है वो विरले लोग ही करते है।