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बिहार : क्या होटल के बाहर सरकारी बदमाशों ने फाड़ डाले बागेश्वर बाबा के पोस्टर? क्या मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़ने पर फुटेज के बावजूद पुलिस खाली हाथ रहती?

पटना में फिर फाड़े गए बाबा बागेश्वर के पोस्टर 
बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार की राजधानी पटना के करीब नौबतपुर में हनुमंत कथा सुना रहे हैं। इस बीच एक बार फिर उनका पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई। धीरेंद्र शास्त्री जिस होटल में रुके हुए हैं, उसके पास में ही यह पोस्टर लगा हुआ था। इस घटना पर आयोजकों ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दरअसल, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पटना के पनाश होटल में रुके हुए हैं। इस होटल के पास लगे एक पोस्टर को अज्ञात लोगों द्वारा फाड़ दिया गया। हालाँकि इसके बाद पोस्टर की मरम्मत कर उसे सही कर दिया गया। लेकिन इस घटना से आयोजकों और बाबा बागेश्वर के भक्तों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया है। वे आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में आयोजकों ने पुलिस से शिकायत भी की है। हालाँकि अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

पोस्टर फाडे जाने से हिन्दुओं के मन में सरकार के विरुद्ध हिन्दू विरोधी छवि मुखरित होनी शुरू हो गयी है। उनका मानना है कि अगर किसी मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़े जाने पर cctv फुटेज होने के बाद भी उत्पादितों को नहीं पकड़ती? इसे सरकार की विफलता कही जाए या हिन्दू विरोध? 

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के पटना पहुँचने से पहले भी कई जगहों पर उनके पोस्टर फाड़े गए थे। रात के अंधेरे में पोस्टर फाड़ने वालों की हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालाँकि, फुटेज हाथ लगने के बाद भी पुलिस अब तक आरोपितों तक नहीं पहुँच पाई है।

बिहार सरकार के मंत्रियों ने किया था बाबा की कथा का विरोध

धीरेंद्र शास्त्री की कथा की जानकारी सामने आने के बाद राजद नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। नीतीश सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री का घेराव करने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने अपने धर्म निरपेक्ष सेवक संघ (DSS) के सदस्यों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इन तस्वीरों को भी बागेश्वर सरकार के विरोध में तैयारियों के रूप में देखा जा रहा था।
यही नहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर यादव ने तो उन्हें जेल में डालने की बात कह दी थी। उन्होंने कहा था, “बाबा बागेश्वर अगर गंदे काम करने आएँगे तो बिहार इजाजत नहीं देगा, अगर नफरत फैलाने आए हो तो आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे। बागेश्वर बाबा हो या कोई बाबा हों, उनके पास कोई तिलस्म या चमत्कार नहीं है।”
धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। 5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी।

‘बाप को बाप कहना घातक तो यह रहना चाहिए’: बाबा बागेश्वर ने ‘कट्टरता’ पर लल्लनटॉप की बाँधी ‘ठठरी’

आखिर भारत में ही क्यों हिन्दू धर्म का विरोध किया जाता है? हिन्दू धर्म को अपमानित किया जाता है? जब बेशर्म हिन्दू ही 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम से हिन्दू को अपमानित करने वाले हिन्दुओं को किस संतान की श्रेणी में डालेंगे? कोई हिन्दू कुछ बोल देगा, एकदम सारे चील-कौए निकल आते हैं, लेकिन जब दूसरे मजहब के लोग जहरीली बोल निकालते हैं, तब बेशर्मों के मुंह में दही जम जाती है, शर्म करो। असली जहरीले और देश के दुश्मन यही लोग हैं। पहचानो इन मीर ज़ाफरों और जयचन्दों को, और परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार होना जरुरी है। जिस हिसाब से हिन्दू जागृति होनी शुरू है, संभव है वह दिन भी दूर नहीं।  

इंडिया टुडे ग्रुप के पोर्टल दी लल्लनटॉप (The Lallantop) ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक इंटरव्यू किया है। लल्लनटॉप उन संस्थानों में है जो श्याम मानव के आरोपों के बाद ‘बागेश्वर सरकार’ के मीडिया ट्रायल में आगे था। वैसे श्याम मानव के आरोपों को खारिज करते हुए नागपुर पुलिस पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को क्लीनचिट दे चुकी है।

करीब 44 मिनट के इस इंटरव्यू में लल्लनटॉप के पत्रकारों ने बागेश्वर पीठाधीश्वर को अपनी मंशा के साथ घेरने की पूरी कोशिश की है। लेकिन उन्होंने अपने चिर परिचित मुस्कुराने के अंदाज में इन सवालों की ठठरी बाँधकर लल्लनटॉप पत्रकारों की बोलती बंद कर दी।

कट्टरता फैलाने के आरोपों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “हम मानते हैं कि पूरी दुनिया में सबसे प्राचीन धर्म सनातन है। इसलिए सब सनातनी हैं। बाकी को हम धर्म नहीं पंथ मानते हैं। हम चादर या फादर के विरोधी नहीं हैं। हम अपने धर्म के कट्टर हैं।” इस पर लल्लनटॉप के पत्रकार ने पूछा यदि आप अपने धर्म के कट्टर हैं तो उनके विरोधी नहीं हुए? इस सवाल के जवाब में धीरेंद्र कृष्ण ने कहा, “यदि वे विरोध मान रहे हैं तो यह उनका दृष्टिकोण है। उनको अपने धर्म का कट्टर होना चाहिए। हम अपने धर्म को मान रहे हैं ये हमारी कट्टरता है। हम किसी के विरोधी नहीं हैं।”

इसके बाद पत्रकार कहता है कि कट्टरता तो घातक हो सकती है। इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “यदि दावे के साथ बाप को बाप मानना घातक है तो अच्छी बात है।” उन्होंने आगे कहा है, “यदि कट्टरता के साथ बाप को बाप कहना घातक है तो फिर इस दुनिया का प्रत्येक वह व्यक्ति घातक है, जो अपने बाप को बाप कहता है। भगवान राम इस दुनिया के प्रत्येक हिंदू व्यक्ति के पिता हैं, परमपिता हैं, जगदीश्वर हैं, जगन्नाथ हैं तो वो बाप हैं। इसलिए, ललकार कर बाप को बाप कहना यदि लल्लनटॉप की नजर में घातक है तो ये घातकपन रहना चाहिए। ऐसे में तो प्रत्येक व्यक्ति घातक है।” https://www.facebook.com/100088185814024/videos/2737651276366786/

इंटरव्यू के आखिरी हिस्से में जिसे आप 39 मिनट के बाद सुन सकते हैं बागेश्वर धाम में होने वाले सामूहिक विवाह आयोजन और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खुद के विवाह को लेकर भी सवाल किया गया।

जब पत्रकार पूछता है कि आपको विवाह का आदेश मिल गया है तो उसके जवाब में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वे विवाह करेंगे। गृहस्थ परंपरा में जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई मिशनरी उनको टारगेट करते रहेंगे। वे कुछ भी साजिश कर सकते हैं। वे कहते हैं कि साधु को गिराने के दो तरीके हैं। पैसा और स्त्री। पैसा हम लेते नहीं और गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने उनके दूसरे ट्रिक को भी खत्म कर देंगे।

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‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना

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‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी से नाम नहीं जोड़ने को कहते हैं, बावजूद लल्लनटॉप का पत्रकार जया किशोरी का जिक्र करता है। इसके जवाब में बागेश्वर सरकार ने कहा कि उनकी देखने की दृष्टि बहन की है। साथी ही बताया कि जया किशोरी से उन्होंने आज तक न कभी बात की है। न कभी उनसे मिले हैं।

‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी उगला ज़हर, कहा – सत्यानाश हो ऐसे धर्म का

     समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास कहा (चित्र साभार newstrack.com)
बुजुर्गों की कहावत है कि "जैसा खाए, वैसा हो जाए मन" जिसे सनातन धर्म पर प्रहार करने वाले सिद्ध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा हिन्दू ग्रन्थ रामचरित्रमानस पर बकवास करना कोई हैरानी की बात नहीं। रामजन्मभूमि मंदिर पर हो रहे निहत्ते रामभक्त प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाने वाले इसी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। जिन विदेशी भीख पर सनातन का अपमान करने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि संत तुलसीदास से हज़ारों वर्ष पूर्व राम जन्म से पूर्व ही महर्षि वाल्मीकि ने त्रेता युग में ही रामायण लिख दी थी। जबकि संत तुलसीदास ने वर्तमान कलयुग में यानि प्रभु श्रीराम के हज़ारों वर्ष बाद। शर्म आती है उन हिन्दुओं पर जो इस पार्टी को अपना समर्थन एवं वोट देते हैं। 

ये ढोंगी हिन्दू सनातन धर्म पर प्रहार कर सकते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के विरुद्ध बोलने पर इनके घरों में शोक हो जाता है। हिन्दुओं बेशक अनेक वर्ग हैं, लेकिन सभी एक ही मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं, इतना ही नहीं मृतक का भी एक ही शमशान पर दाह-संस्कार होता है, जबकि अन्य मजहबों में एकदम विपरीत। ये विदेशी भीख पर पलने वाले 'हिन्दू आतंकवाद', 'भगवा आतंकवाद' आदि बयानों से हिन्दुओं को अपमानित करने का घिनौना काम करते आ रहे हैं। ऐसे हिन्दू विरोधियों का, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा जाति से हो, परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार जरुरी है। जब तक हिन्दू विरोधियों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, इनका दुस्साहस बंद नहीं होगा। हिन्दुओं को जागृत होना पड़ेगा, अन्यथा वह दिन दूर नहीं होगा जब सनातन धर्म के दुश्मन घर में भी आरती करने पर कुत्तों की तरह भोंकना शुरू कर देंगे।    

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के बाद अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी रामचरितमानस के खिलाफ विवादित बयान दिया है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दुओं के इस ग्रंथ को बकवास किताब बताते हुए बैन करने की माँग कर डाली है। मौर्य ने रामचरित मानस को तुलसीदास द्वारा अपनी ख़ुशी के लिए लिखी गई किताब करार दिया है। स्वामी प्रसाद ने यह बयान 22 जनवरी, 2023 को दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भले ही वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जाति के नाम पर जो भी विशेष वर्ग को अपमानित करे उस पर आपत्ति जताते हैं। मौर्य ने सीधे रामचरितमानस का नाम लेते हुए कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

स्वामी प्रसाद ने अपनी बयानबाजी इसके बाद भी जारी। उन्होंने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

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मौलाना साजिद रशीदी का ज़हर : ‘सोमनाथ मंदिर में होता था गलत काम, इसीलिए गजनवी ने तोड़ दिया’: राम मंदि
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मौलाना साजिद रशीदी का ज़हर : ‘सोमनाथ मंदिर में होता था गलत काम, इसीलिए गजनवी ने तोड़ दिया’: राम मंदि

अपने बयान में सपा नेता ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री पर भी नकारात्मक टिप्पणी की। स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म का प्रचार नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे दफनाने का काम कर रहे हैं। धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यों को ढोंग और ढकोसला बताते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रशासन से उनके ऊपर अंधविश्वास फैलाने के आरोप में एक्शन लेने की भी माँग की। इसी दौरान उन्होंने साल 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश में 80 सीटें जीतने के दावे को ‘मुंगेरीलाल का सपना’ बताया।

घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम

बागेश्वर धाम और वहाँ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने कथित चमत्कारों के लिए विवादों में हैं। उन पर समाज में अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा है। धीरेंद्र शास्त्री ने इन अंधविश्वास फैलाने के आरोपों को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हैं। इसलिए कुछ लोगों को समस्या हो रही है।

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है, “धर्म विरोधी लोग ये सब कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के होने और अयोध्या का सबूत माँगा था। हर बार सनातनी साधुओं को ही टारगेट किया जा रहा है। हमने जबसे लोगों की घर वापसी करवाई है, तब से इन लोगों को समस्या हो रही है। हमने छतारी की कथा में ऐलान किया था कि हमारे खिलाफ साजिशें होंगीं। लेकिन, हमें इनसे डर नहीं है। वो अपनी जगह बोलते ही रहते हैं। वो अपनी जगह भोंक रहे हैं। सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “सनातन के लिए सनातनी जाग रहे हैं। इसका प्रमाण यही है कि धर्म विरोधी मुँह चला रहे हैं। हमने इन सब पर बात करना बंद कर दिया है। उन्हें साफ कह दिया है कि यदि आपको हमारे दरबार से दिक्कत है तो आकर देखिए और समझिए। आपकी चुनौती हमें कानूनी रूप से नहीं मिली है।”

उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव की चुनौती पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हम वहाँ (नागपुर) में 7 दिन थे, तब चुनौती क्यों नहीं दी? उन्होंने व्यक्ति क्यों नहीं भेजा? उन्होंने लेटर क्यों नहीं भेजा?”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा है, “हमारे पास किसी प्रकार की सिद्धि नहीं है, लेकिन जो दरबार है उसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है। वो और उनके जैसे लोग आएँ और दरबार में बैठें। हमें जो प्रेरणा मिलेगी हम बेझिझक बताएँगे, क्योंकि न तो हम कमरे में मिलते हैं और न हम अंधविश्वास फैला रहे हैं। हम तो सिर्फ हनुमान जी से जोड़ रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। हमारे पूर्वजों ने संविधान स्वीकार किया है।”

सुदर्शन न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा, “इन लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा, फिर हम तो आम हैं। ये हमें कब छोड़ेंगे। हमें इनसे डिगना या डरना नहीं है। हम सभी ये प्रार्थना करेंगे कि इन लोगों की कोई भी बात सुनने से पहले एक बार हमारा तथ्य जरूर जान लेना। तब इनको मानना, क्योंकि ये सोची समझी साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम घर वापसी करवा रहे हैं। वो लोग धर्मांतरण पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। फिर हम पर 10 करोड़ खर्च करने में क्या बुराई है।” कहा जाता है कि क्रिसमस के दिन अपने पैतृक गाँव में स्थित बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री ने 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी।

उन्होंने आगे कहा है, “लोगों से हम यही कहना चाहते हैं कि हम वचन देते हैं कि ऐसा कोई कृत्य नहीं करेंगे जिससे हिंदुओं की नाक और साख को नुकसान हो। चाहे हमें उसके लिए प्राणों की आहुति देना पड़े।” उन्होंने कहा कि यदि अपने धर्म का प्रचार करने पर एफआईआर दर्ज होती है तो देश के सभी हनुमान भक्तों पर एफआईआर होनी चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा है, “भारत में चादर चढ़ाना श्रद्धा है, लेकिन हनुमान जी की भक्ति बताना अंधविश्वास है। भारत में कैंडल जलाना श्रद्धा है, लेकिन कलावा बाँधना और हनुमान चालीसा का उपाय बताना या सनातन की बात करना अंधविश्वास है। ये दोगलापन लाते कहाँ से हैं भारत में?”

उन्होंने आगे कहा है कि जिन लोगों को भी समस्या है वह रायपुर में 20 और 21 फरवरी 2023 को दिव्य दरबार लग रहा है, वहाँ पहुँच सकते हैं। वे उनके आने-जाने का किराया और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेते हैं कि उनकी पुजाई (मारपीट) नहीं होगी।

दरअसल, बागेश्वरधाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नागपुर में 5 जनवरी से 11 जनवरी तक तक रामकथा के लिए पहुँचे थे। पहले यह कथा 13 फरवरी तक होनी थी। हालाँकि, किन्हीं कारणों से यह कथा 2 दिन पहले ही समाप्त हो गई थी।

इस कथा के समापन के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए।

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धर्मद्रोहियों द्वारा बागेश्वर महाराज जी से परेशानी क्यों ? क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध ह

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धर्मद्रोहियों द्वारा बागेश्वर महाराज जी से परेशानी क्यों ? क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध ह

श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर दरबार के दौरान चमत्कार दिखाने पर 30 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

धर्मद्रोहियों द्वारा बागेश्वर महाराज जी से परेशानी क्यों ? क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

जब कभी हिन्दू हित के समर्थन में कोई महन्त, साधु अथवा साध्वी सनातन की रक्षा में खड़े होते हैं, विदेशी भीख के मौताज़ हिन्दू विरोधी सियापा करने लगते हैं। और सनातन विरोधी परदे के पीछे बैठ जयचन्दी हिन्दुओं को भीख देकर हिन्दुओं में फूट डालने का कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। लेकिन ये हिन्दू विरोधी किस आधार पर टेरेसा को संत की उपाधि देते हैं? जिसने सेवा के नाम पर ईसाई धर्माकरण को बढ़ावा दिया। कई लेख लिखे जा चुके है, परन्तु सब ऐसे चुप्पी साधे बैठे हैं, जैसे पारिवारिक शोक में डूबे हैं। अभी आने वाले समय में ये सनातन विरोधी गैंग और भी गमगीन होने वाले हैं। 
हिन्दू विरोधियों के मकड़जाल में फंसने वाले हिन्दुओं बाबा रामदेव का रामलीला ग्राउंड कांड याद है कि भूल गए। बहुत रामदेव को महिला के वस्त्र पहन भागने वाला ढोंगी बाबा कहते थे, रामदेव को ढोंगी बताने वालों से किसी ने यह नहीं पूछा कि मध्य रात्रि बिजली काट क्या अनर्थ करने गए थे? सब खोजी पत्रकार और चैनल हिन्दू विरोधियों की पत्तल चाटने में लगे हुए थे। आज तक किसी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने का साहस नहीं किया, क्यों? दूसरे, जब दीपावली के शुभावसर के दिन परमपूजनीय शंकराचार्य को झूठे आरोप में गिरफ्तार करने पर तत्कालीन सारे चैनल शंकराचार्य पर कीजड़ उछाल हिन्दू धर्म को  बदनाम करने में लगे थे, लेकिन उनकी रिहाई होने पर किसी भी चैनल ने सच्चाई से जनता को अवगत करवाने का साहस नहीं किया। आज पांसे बदल चुके हैं, हिन्दू ने जागृत होना शुरू कर दिया है, फिर भी कुछ जयचंदी हिन्दू जेहादियों, पादरियों का गुणगान करने में लगे हैं। 

हिन्दुओं को जातियों में बाँट मालपुए खाने के दिन लदने जा रहे हैं, क्योकि ये गैंग अब आवाज़ ईसाई और मुस्लिम समाज में सैकड़ों जाति को लेकर उठनी शुरू होने से भयभीत है। क्यों नहीं ईसाई एक ही चर्च में प्रार्थना और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दे को दफ़न कर सकते? क्यों नहीं मुस्लिम एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ सकते और एक ही कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न कर सकते?   

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में एक और हनुमानभक्त का आँखों देखा व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहा हूँ। स्थान पत्थर वाले, चांदनी चौक स्थित महाराज हनुमान मन्दिर, महन्त गौरव शर्मा, विश्व रेसलिंग चैंपियन, एक पति इस्लामिक चुंगल में फंसी अपनी पत्नी को लेकर आया। पत्नी पति को पहचानने के अलावा अपने ही देवी-देवताओं को नहीं पहचान रही थी। महंत गौरव के उपचार करते ही उस महिला ने तुरंत गले में पड़े दोनों ताबीजों को तोड़ मन्दिर से बाहर सड़क पर फेंके। ताबीज़ मोटे काले धागे से बंधे होने के बावजूद ऐसे टूटे जैसे कच्चा धागा हो। बजरंगबली की शक्ति देख मैं स्तब्ध हो गया। उपचार उपरान्त महन्त जी बजरंगबली स्तुति पर जाने हुए, मुझे 5 मिनट तक हनुमान जाप करने का आग्रह किया, क्योकि उस समय मै महिला के निकट बैठा महंत गौरव द्वारा बजरंगबली का चमत्कार देख रहा था। और पति-पत्नी को 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहा।  ऐसे ही दूर से दूर लोग हर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को हनुमान मन्दिर दर्शन के लिए नहीं आते। यह शुभ काम महन्त गौरव के पिताश्री महंत श्रवण कुमार शर्मा के समय से देखता आ रहा हूँ।  

भगवान हनुमान भक्त धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के विरुद्ध ये साजिश उसी दिन से आरम्भ हो गयी थी जिस दिन महाराज जी ने हजारों अवेध धर्मानंतरण के विरोध में हिंदुओं की घर वापसी कराई थी।

भारत में कोरोना फैलाने वाले मुहम्मद साद का विरोध नही होता राष्ट्रद्रोही आतंकियो का विरोध नही होता है बलात्कारी पादरियों का विरोध करने की औकात नही है।

दिन भर पानी पी पीकर बागेश्वर धाम को बदनाम करने वाले तथाकथित पत्तलकारों को ये वीडियो देखना चाहिए। जब सुधारों की बात कर रहे हो तो हर जगह का बीड़ा उठाओ न, बताओ  अंडरगारमेंट्स में हाथ डालकर कौन सी झाड़ फूंक होती है। देखिए वीडियो, यही वीडियो ट्विटर पर भी, दोनों प्रस्तुत

 

लेकिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का विरोध होता है और करने वाले दो कौड़ी के जयचंद हिन्दू ही है।क्योकि हिन्दू सर तन से जुदा की धमकी नही देता, चुपचाप सहन कर लेता है क्योंकि उसे डीजल पेट्रोल सस्ता चाहिए और उन्हें भारत पर कब्जा(गज़वा ए हिन्द) चाहिए।

नागपुर की अंधश्रृद्धा उन्मूलन संस्था ने बुंदेलखंड छत्तरपुर में स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी पर मीडिया के माध्यम से ये आरोप लगाया है कि वो अपने दरबार के माध्यम से अंधविश्वास फैला रहे हैं और किसी भी शख्स के बारे में बिना परिचय के किए जा रहे उनके सजीव वर्णन दरअसल धोखेबाजी है । इस अंधश्रृद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने कोर्ट में जाकर कोई याचिका नहीं लगायी और ना ही कोई केस ही दर्ज करवाया । सिर्फ एक पत्र लिखकर मीडिया में जारी कर दिया और बागेश्वर धाम को बदनाम करने की कोशिश शुरू कर दी ।

आम तौर पर राम कथाएँ 9 दिन की होती हैं लेकिन विशेष परिस्थितियों में दिन कम भी कर दिए जाते हैं । 4 जनवरी को बागेश्वर धाम के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर ये पोस्ट की गई थी कि धीरेंद्र शास्त्री जी की श्री राम चरित्र चर्चा 5 से 11 जनवरी तक होगी । यानी पहले ही कथा 7 दिन की थी लेकिन जिहादी और कम्युनिस्ट धूर्तों ने ये दावा करना शुरू कर दिया कि कथा तो 9 दिन की थी लेकिन चुनौती की वजह से बागेश्वर बाबा 2 दिन पहले ही नागपुर से कथा छोड़कर भाग गए । कई जिहादियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हुए उनको भागेश्वर बाबा कहना शुरू कर दिया । सवाल ये है कि आखिर जिहादी, कम्युनिस्ट और पादरी बाबा के खिलाफ झूठा प्रोपागेंडा क्यों खड़ा कर रहे हैं?

इसलिए क्योंकि बाबा बागेश्वर सोए हुए हिंदुओं को जगाने के काम में लगे हुए हैं । आचार्य धीरेंद्र जी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 2 महीने पहले एक सभा की थी जिसमें 4 लाख हिंदुओं को उन्होंने धर्मपरिवर्तन के खिलाफ लड़ने की शपथ दिलाई थी । 25 दिसंबर को जब पूरी दुनिया क्रिसमस मना रही थी तब बाबा बागेश्वर ने दमोह में 150 से ज्यादा हिंदू परिवारों की घर वापसी करवाई थी जिनको धोखे से ईसाई बनाया गया था । इस घटना से क्रिश्चियन्स मिशिनिरीज को काफी झटका लगा।

इसके अलावा पठान मूवी और लव जिहाद के बहिष्कार के लिए आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी के आह्वान से भी कराची से दुबई तक जिहादियों को जबरदस्त मिर्ची लग गई यही वजह है कि जिहादी और पादरी यानी फादर और चादर मिलकर आचार्य जी के खिलाफ झूठ फैलाने में लग गए हैं।

विवाद बढ़ने पर स्वयं धीरेंद्र शास्त्री जी ने नागपुर वाले अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव जी को ये प्रस्ताव दिया है कि आप रायपुर आ जाओ यहाँ कथा चल रही है दरबार लगा है आप स्वयं आकर चमत्कार देख लो । और धीरेंद्र शास्त्री जी ने ये भी कहा है कि वो टिकट का खर्चा भी उनको देंगे। लेकिन इसके बावजूद श्याम मनोज ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की बजाय भागना ज़्यादा पसंद किया है।

हिंदू समाज पूरी तरह बागेश्वर धाम के साथ खड़ा है और जो लोग भी बागेश्वर को भागेश्वर कह रहे हैं वो सावधान हो जायें क्योंकि उनके खिलाफ आस्था को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज हो सकता है।

बात गहरी है पर धीरे धीरे समझ आती है !

चर्च ने टेरेसा को संत बनाना था, ताकि उनका प्रयोग करके कन्वर्शन किया जा सके इसके लिए सिद्ध करना था कि उन्होंने कम से कम दो चमत्कार किये हैं। और यकीन मानिये उन्होंने ये सिद्ध भी कर दिया ! वो दो चमत्कार थे।

1 . उनकी फोटो देखकर एक महिला की पथरी गायब हो गई !

2. एक आदमी का ब्रेन tumour उनकी मूर्ति को छूते ही गायब हो गया

कमाल कि बात डॉक्टरों ने दोनों चमत्कारों के सर्टिफिकेट तक दे दिया। 

उसके बाद ईसाइयों के धर्म गुरु पोप ने चमत्कारों को मानते हुए टेरेसा को संत की उपाधि दे दी ! आज सारे देश, सारा मीडिया टेरेसा के आगे संत लगता है, मतलब हर कोई मानता है टेरेसा ने ये चमत्कार किये थे ! 

किसी की क्या हिम्मत कि चमत्कारों पर सवाल तक उठा दे !

अब दसरी तरफ देखे आज हिन्दुओ का बड़ा वर्ग बागेश्वर धाम के खिलाफ खड़ा होने को तैयार बैठा है ! क्योंकि उसे चमत्कारों पर विश्वास नहीं ! हो सकता है चमत्कार फर्जी हो ! 

हिंदुओं के विरुद्ध अब ईसाईयों का इकोसिस्टम फिर से प्रारंभ हो गया है। अब यह ईसाईयों की नयी टूलकिट है जिसमें बीबीसी और एबीपी न्यूज़ भी शामिल है व अन्य चैनल भी शामिल है. जिसमें यह बाबा के चमत्कारों को अंधविश्वास वगैरह बतला रहा है। जबकि बाबा ने किसी भी चमत्कार से इनकार कियाहै। सर्वप्रथम हिंदुओं के विरुद्ध एक सोची-समझी टूलकिट फिर से प्रारंभ हो गई है और हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए एक बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है क्योंकि कुछ दिनों पहले बाबा बागेश्वर धाम में  कुछ ईसाई दोबारा हिंदू धर्म में शामिल हुए थे तो इस विषय में अब सभी हिंदुओं को एकजुट होना है और  बाबा बागेश्वर धाम का समर्थन करना है और जो भी चैनल इस विषय में ड्रामा करता है उसका बहिष्कार करना है, ताकि हमारी जो एकजुटता है वह सब को एक बार फिर से पता लगे।  

बारी बारी से धर्माचार्यों को निशाना बनाया जा रहा। कुतर्क के सहारे बदनाम किया जा रहा, अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने निर्थक आरोपों की पोलखोल दी। 

हिंदुओं को बांटने की षड्यंत्रगत भरसक कोशिश 

जो लोग हिंदुंओ का मजाक उड़ाते हुए उन पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाते हैं वो जरा ईसाईयों व मौलवियों को भी सुने।

यूपी के हाथरस में अंबेडकरवादी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को गाली दे रहे हैं और तोड़ रहे हैं। वे घर-घर जाकर ब्राह्मणों के प्रति अपनी घृणा प्रदर्शित कर रहे हैं, जब किसी ने इन गतिविधियों की शिकायत की तो उन्होंने उसे एससी-एसटी एक्ट की धमकी दी। कोई मीडिया आपको ये नहीं दिखाएगा। देखिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो 

बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री

बागेश्वर धाम बुंदेलखंड का एक  गांव जो मुख्य सड़क से लगभग 6 से 7km अंदर है, आज से चार पांच साल पहले तक, खुद उस गांव (गड़ा) के लोगों और उनके रिश्तेदारों के अलावा उस गांव और उस हनुमान मंदिर को कोई नहीं जानता था। फिर उसी ठेठ गांव का एक इक्कीस बाइस साल का ठेठ बुंदेलखंडी नौजवान जो श्री श्री रामभद्राचार्य महाराज का शिष्य है और कलयुग में सर्वाधिक पूजे जाने वाले भगवान श्री हनुमान जी का अनन्य भक्त है अपनी शास्त्री की शिक्षा दीक्षा पूरी करके अपने गांव लौटता है।

ठेठ गांव का ठेठ लड़का जिस गांव को कोई नहीं जानता था उसने पिछले चार पांच साल में अपने Aura, वाकपटुता, धर्म ज्ञान, कथा करने का रोचक अंदाज, और भगवान हनुमान के आशीर्वाद से लोगों के मन में भगवान, हिंदू धर्म, सनातन और राष्ट्रवाद की एक ऐसी अलख जगानी शुरू की जिसमें न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा, न कोई ऊंचा था न कोई नीचा, उसकी कथाओं में सिर्फ और सिर्फ धर्म था, सनातन था, हिंदू था, राष्ट्रवाद था। 

आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच बैठकर रामकथा करना हो या सैकड़ों लड़कियों की हर साल शादी कराने का महायज्ञ, बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में कैंसर हॉस्पिटल शुरू करने की वकालत हो उसने न सिर्फ इसका सपना दिखाया बल्कि उसे करके भी दिखाया और सबसे बड़ी बात ये सब कुछ निःशुल्क, स्वेच्छा से जो देना है दे दो नही तो कोई बात नहीं। 

क्या हिन्दुओं को एकजुट करना अपराध है?

उसने बिना किसी ऊंच नीच की परवाह किए सभी को एक पंडाल के नीचे इकट्ठा कर दिया, साथ ही साथ वो गरीब लोग जो किसी लालचवश या मजबूरी में किसी और धर्म मेंं जाने को मजबूर हो गए थे उन्हें भी पुनः वापिस लाने का काम किया। बस यही गलती हो गई उस छब्बीस साल के लड़के से सभी जाति को एक साथ एक पंडाल में बैठाकर रामकथा, आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच में रामकथा करना और उनको अहसास दिलाना की आप प्रभु राम के वंशज हो.... राम राम इतना बड़ा घोर पाप...... ये कतई नहीं चलेगा लड़के, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को वापिस लाने का जघन्य पाप...... आप अपराधी है बाबा

जात पात, अंगड़ा पिछड़ा को छोड़कर सिर्फ सनातन की बात करना और लोगों को उस पर चलने को प्रेरित करना...... पगला गए हो का धीरेंद्र शास्त्री

छब्बीस साल की उम्र में यदि इस अत्यंत पिछड़े हुए इलाके के बेहद ठेठ गांव से निकला यह लड़का जिसने खुद की प्रतिभा से अपना लोहा पूरे देश विदेश में मनवाया है तो यह निश्चित है की इसके ऊपर अत्यंत ईश्वरीय कृपा है और जिस पथ पर यह आगे निकला है तो ऐसे आरोप और कीचड़ उछलना तो महज एक शुरुआत है, अभी आरोपों की तीव्रता और स्तर बहुत नीचे जाने वाला है। धीरेंद्र शास्त्री से व्यक्तिगत तौर पर कभी नहीं मिला और न ही मिलने की कोई तीव्र इच्छा है, उनके चमत्कार सही होते हैं या गलत इस पर भी में कुछ नही कहना चाहता, में तो इतना कहना चाहता हूं की एक गांव से निकले इस नौजवान ने सनातन को उठाने, बढ़ाने और देश को सशक्त बनाने का जो काम शुरू किया है वो विरले लोग ही करते है।