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जिस भारत की खाते हैं उसी से जंग की बात कर गए राहुल गाँधी, फिर भी क्लीनचिट दे रहा था ‘द लल्लनटॉप’; क्या राहुल को विपक्षी नेता बने रहने का अधिकार है? आखिर किस भारत विरोधी देश के लिए कांग्रेस राष्ट्र से लड़ाई लड़ रही है?

सौरभ द्विवेदी, राहुल गाँधी (फोटो साभार : Kalinga Literature Festival / ANI)
मोदी-योगी विरोध में राहुल गाँधी और समूचा विपक्ष समझबूझ भूल ऊलजलूल बोल रहे हैं। लोक सभा में विपक्ष नेता राहुल गाँधी ने कांग्रेस कार्यालय उदघाटन के अवसर पर राष्ट्र से लड़ाई लड़ने पर समूचा विपक्ष क्यों चुप है? अगर यही बात बीजेपी के किसी नेता ने बोल दी होती, इसी विपक्ष ने देश में कोहराम मचा दिया होता, लेकिन राहुल द्वारा राष्ट्र से लड़ाई पर चुप्पी साधे रखना साबित करता है कि किसी को देश नहीं अपनी तिजोरी और कुर्सी की चिंता है। अगर विपक्ष इस घोर आपत्तिजनक बयान पर कांग्रेस के साथ खड़ी रहती है कांग्रेस के साथ-साथ इनका भी बहुत जल्दी पाताललोक में जाना तय है। आखिर किस भारत विरोधी देश के लिए कांग्रेस राष्ट्र से लड़ाई लड़ रही है? देश में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी आदि मुद्दों पर लड़ाई लड़ना अलग बात है लेकिन राष्ट्र से लड़ाई किसके लिए? 

द लल्लनटॉप के संपादक ‘पत्रकार’ सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के विवादित बयान का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन उनका यह प्रयास उल्टा पड़ गया। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में भारतीय राज्य (Indian State) के खिलाफ अपनी लड़ाई की बात कही थी, जिस पर विवाद हो गया था। इस मामले में लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने बीजेपी को ही घेरने की कोशिश की और राहुल गाँधी के बयान का बचाव किया। ये अलग बात है कि शो में मौजूद राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी ने उन्हें आईना दिखाने में देरी नहीं की, जिसके बाद सौरभ द्विवेदी अपने दावे से पीछे हटते नजर आए।

राहुल गाँधी के बयान और बीजेपी के हमलों के बीच सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को अपने शो ‘नेता नगरी’ में राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी का बचाव किया। सौरभ ने कहा, “जेपी नड्डा कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने भारत के खिलाफ लड़ाई की बात की है। जबकि राहुल गाँधी ने अपने भाषण में भारतीय सरकार (Indian Government) के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था। भाजपा उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।” सौरभ ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने ‘बीजेपी, आरएसएस और भारतीय सरकार के खिलाफ’ लड़ाई की बात कही।

हालाँकि, रजत सेठी ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को तुरंत गलत ठहराया। उन्होंने कहा, “सौरभ जी, राहुल गाँधी ने भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) का जिक्र किया था। उन्होंने यह बयान अंग्रेजी में दिया था और उनके शब्द साफ-साफ थे।”

रजत सेठी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “भारतीय राज्य का मतलब भारतीय संविधान, उसकी संस्थाएँ और उसकी संरचना से है। राहुल गाँधी ने जो कहा, वह एक बड़ी चूक हो सकती है, लेकिन इसके निहितार्थ गंभीर हैं। अगर कोई भारतीय राज्य के खिलाफ बोलता है, तो यह देशद्रोह के दायरे में आता है। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उनकी लड़ाई और युद्ध भारतीय राज्य के खिलाफ है। वो कोई आम आदमी नहीं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं।”

सौरभ द्विवेदी ने आखिरकार रजत सेठी की बात मानते हुए कहा, “हाँ, राहुल गाँधी ने अपने बयान में भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य कहा था। यह मेरे द्वारा दी गई जानकारी में गलती थी।”

14 जनवरी को नई दिल्ली में कांग्रेस के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के अवसर पर राहुल गाँधी ने अपने संबोधन में कहा, “यह मत सोचिए कि हम एक निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर आप यह मानते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस जैसे एक राजनीतिक संगठन से लड़ाई लड़ रहे हैं, तो यह सही नहीं है। उन्होंने देश की लगभग हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फ भाजपा और आरएसएस से नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) से लड़ रहे हैं।”

राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी खुलकर देश के खिलाफ बोल रहे हैं। यह कांग्रेस की मानसिकता को दिखाता है, जो देश के खिलाफ षड्यंत्र कर रही है।”

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “राहुल गाँधी का यह बयान देश के खिलाफ है। भारतीय राज्य का मतलब संविधान और उसकी संरचनाओं से है। ऐसे में राहुल गाँधी का यह बयान संविधान का अपमान है। कांग्रेस को इस पर तुरंत सफाई देनी चाहिए।”

बहरहाल, राहुल गाँधी के ‘भारतीय राज्य से लड़ाई’ वाले बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे देशविरोधी बयान करार दे रही है, जबकि कांग्रेस इसे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रही है। इस विवाद में सौरभ द्विवेदी का राहुल गाँधी का बचाव करना और फिर अपनी गलती मानना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का आगामी चुनावों में कांग्रेसऔर राहुल गाँधी पर क्या असर पड़ता है।

नुपूर शर्मा ने लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी को किया बेनकाब : कहा- लल्लनटॉप से किसी ने नहीं किया संपर्क

लगभग 2 सालों बाद मई 25 को वोट डालने जाते हुए नूपुर शर्मा को देखा। हकीकत में मुस्लिम कट्टरपंथियों और सेकुलरिज्म का फटा ढोल पीटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों के अलावा कोई नहीं जानता कि असली मुद्दा है क्या? टीवी चैनलों पर नपुंसक पत्रकार चर्चा तो कर नूपुर को ही कसूरवार बताते रहे। इसमें कसूरवार बीजेपी भी है। बीजेपी को प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों वीडियो दिखानी चाहिए थीं और साथ में 'सिर तन से जुदा' मुस्लिम कट्टरपंथियों के गैंग पर प्रहार करना था। अगर बीजेपी ने हर चैनल को प्रेस कांफ्रेंस को live न दिखाने पर एक या दो महीने के लिए बैन कर दिया जाएगा, किसी कन्हैया लाल का क़त्ल नहीं होता। TimesNow के 'नवभारत' के एंकर सुशांत सिन्हा के अलावा किसी भी डरपोक चैनल ने सच्चाई दिखाने की हिम्मत नहीं की। सिन्हा ने अपने शो में सारे मुल्ला, मौलवी,इमाम और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि 'बताएं नूपुर शर्मा गलत है या हदीस?' नूपुर ने कोई अपने मन से नहीं कहा, उसने वही कहा जो उनकी हदीस में लिखा है।  
लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने हाल ही में एक शो में दावा किया है कि उन्होंने पूर्व भाजपा नेता नुपूर शर्मा को उनके बयान पर सफाई देने का मौका अपने चैनल पर दिया था। नुपूर शर्मा ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को झूठ बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया।

यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई।

इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ ने इस मामले में अपनी बात नीचे लगे वीडियो में 2 घंटे 11 मिनट से 2 घंटे 19 मिनट के रखी।

 द्विवेदी ने दावा किया कि उन्होंने एक बार भाजपा के एक कार्यक्रम और एक बार एक IAS के घर आयोजित निजी कार्यक्रम में नुपूर शर्मा को अपने चैनल पर आकर इस पूरे मुद्दे को रखने का मौका दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यह पूरा प्रकरण आनंद रंगनाथन के इस मुद्दे को उठाने के बाद चालू हुआ था।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 1 और नुपूर शर्मा का पक्ष

टाइम्स नाउ पर डिबेट के दौरान नुपूर शर्मा ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का अपमान करने पर तस्लीम रहमानी को जवाब दिया था। सौरभ द्विवेदी का दावा है कि इसके बाद वे बीजेपी के एक कार्यक्रम में नुपूर से मिले और लल्लनटॉप पर आकर उनसे अपना पक्ष रखने को कहा।
इस दावे की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने नुपूर शर्मा से बात की। द्विवेदी बीजेपी के जिस कार्यक्रम की बात कर रहे हैं वह मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता थी। यह प्रेस वार्ता 31 मई 2022 को हुई थी। मोहम्मद जुबैर द्वारा नुपूर को टारगेट करने के लिए कांटछांट कर वीडियो ट्वीट करने के करीब एक सप्ताह बाद। जुबैर के इसी ट्वीट के बाद नुपूर को दुनिया भर से हत्या और बलात्कार की धमकी मिली थी।
ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है।
सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था। ऐसे में कोई तुक समझ नहीं आता कि सौरभ द्विवेदी प्रस्ताव दें और नुपूर इनकार कर दें।
थोड़ी देर के लिए यह मान भी लें कि सौरभ ने प्रस्ताव दिया था तो भी वह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसमें ढेर सारे पत्रकार मौजूद थे। ऐसी मेल मुलाकात के दौरान अनौपचारिक बातचीतों को औपचारिक न्योता नहीं माना जाता है। यदि सौरभ द्विवेदी वास्तव में नुपूर को अपना पक्ष रखने के लिए लल्लनटॉप का प्लेटफॉर्म मुहैया कराना चाहते थे तो उन्हें औपचारिक तरीके से उनसे संपर्क करना चाहिए था। उनसे बातचीत करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी किया ही नहीं।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 2 और नुपूर शर्मा का पक्ष

सौरभ द्विवेदी ने एक आईएएस अधिकारी की पार्टी में नुपूर शर्मा से मुलाकात और दोबारा प्रस्ताव देने की बात कही है। यह पार्टी अप्रैल 2023 की है। यह एक निजी पार्टी थी और इसके आयोजक IAS दंपती नुपूर शर्मा के पारिवारिक दोस्त हैं।
नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं। फिर से थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि सौरभ द्विवेदी ने नुपूर को लल्लनटॉप पर आने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वह एक निजी पार्टी थी और संवाद की पहल भी नुपूर की ओर से हुई थी।
ऐसे में द्विवेदी का यह दावा सफेद झूठ है कि उन्होंने पहल कर नुपूर को प्रस्ताव दिया था। जाहिर है कि सौरभ द्विवेदी की नुपूर का पक्ष जानने में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। यदि ऐसा होता तो वे सीधे नुपूर से संपर्क करते जैसा अमूमन पत्रकार करते हैं।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 3 और नुपूर शर्मा का पक्ष

यह दावा सरासर झूठ है। नुपुर शर्मा ने ऑपइंडिया को बातचीत में बताया है कि पिछले महीने आनद रंगनाथन की वीडियो वायरल होने के बाद, सौरभ द्विवेदी या उनकी लल्लनटॉप टीम में से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं साधा है।
एक माह पहले डॉ आनंद रंगनाथन आरजे रौनक के पॉडकास्ट में गए थे। यहाँ उन्होंने नुपूर शर्मा के मामले में द लल्लनटॉप के रवैये पर प्रश्न उठाए थे। डॉ रंगनाथन ने प्रश्न उठाया था कि सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप ने दृष्टि कोचिंग के मुखिया डॉ विकास दिव्यकीर्ति को हाथों हाथ अपने प्लेटफार्म पर बुलाकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था जब डॉ दिव्यकीर्ति की रामायण का अपमान करने के कारण आलोचना हो रही थी। लेकिन लल्लनटॉप ने यही नुपूर शर्मा के मामले में नहीं किया।
डॉ रंगनाथन ने कहा कि लल्लनटॉप को विकास दिव्यकीर्ति के दावों का फैक्ट चेक करने में कोई खतरा नहीं नजर आया था क्योंकि उन्हें हिन्दू समुदाय से कोई धमकियाँ नहीं मिलती। हालाँकि, वह नुपूर शर्मा की बातों का फैक्ट चेक करने में डरे हुए थे क्योंकि अगर वह कह देते कि नुपूर शर्मा की बातें इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार सही हैं तो उन्हें कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलती।
डॉ रंगनाथन ने सौरभ द्विवेदी के झूठों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “वाह, नुपूर शर्मा से माफ़ी माँगने के बजाय द लल्लनटॉप के कायर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने फैक्ट चेक इसलिए नहीं किया क्योंकि वह उनके प्लेटफॉर्म पर नहीं आईं। उनके प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं आते, तो क्या वह लोग उनका फैक्ट चेक नहीं करते?”

झूठ से परे – लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी की धूर्तता

सौरभ द्विवेदी ने अपनी कायरता को सही ठहराने के लिए उसके ऊपर झूठ की चादर डाल दी है। उन्होंने नुपूर शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए पिछले 2 साल में एक बार भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया। उन्होंने गाहे-बगाहे होने वाली बातचीत को साक्षात्कार के लिए अनुरोध का ढोंग रचा। यही कारण है कि नुपूर शर्मा को यह वाकया याद भी नहीं है।
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता को देखेंगे तो पाएँगे कि यह झूठ से भी दो कदम आगे जाती है, धूर्तता की सीमा तक। सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप को किसी खबर के फैक्ट चेक के लिए उससे संबंधित लोगों को अपने शो में बुलाने की जरूरत नहीं। उदाहरण देखिए। क्या लल्लनटॉप ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने शो में बुलाया था? अगर नहीं तो, “भारत के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार” वाली खबर का फैक्ट चेक कैसे किया?
लल्लनटॉप ने कई ऐसे ‘फैक्ट-चेक’ भी किए हैं, जहाँ वे पीएम मोदी या बीजेपी द्वारा कई बयानों और भाषणों में कही गई बातों के बारे में सच्चाई पेश करने का दावा करते हैं। क्या इन सब फैक्ट चेक के लिए सौरभ द्विवेदी के शो में पीएम मोदी आए?
आखिर सौरभ द्विवेदी इस बात पर क्यों जोर दे रहे हैं कि नुपूर शर्मा को उनके बयान के दावों की फैक्ट चेक के लिए उनके शो में आना चाहिए? नुपूर शर्मा ने जो कहा, वह इस्लामी किताबों के अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही है या नहीं, इस पर चर्चा करते हुए इसका फैक्ट चेक किया जा सकता है। क्यों नहीं किया? लल्लनटॉप के शो में हदीस को क्यों नहीं खोल कर पढ़ा गया? क्यों नहीं मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामी ट्रोल्स का फैक्ट चेक किया, जिसने दावा किया था कि नुपूर शर्मा ने ‘इस्लाम का अपमान’ किया? सौरभ द्विवेदी बिना नुपूर शर्मा के एक शो क्यों नहीं कर सके, यह दिखाते हुए कि नुपूर शर्मा का बयान झूठ नहीं था, बल्कि जाकिर नाइक ने भी वही बात कही थी?
यह वीडियो कुछ और नहीं बल्कि सौरभ द्विवेदी की कायरता का प्रतीक है। कट्टर ढंग से फैल चुके वैश्विक इस्लामी तंत्र के डर से सौरभ द्विवेदी एक पीड़ित महिला के पक्ष में खड़ा होने से डर गया।
भाजपा प्रवक्ता की हैसियत से नुपूर शर्मा ने एक टीवी चैनल पर बहस में हिस्सा लिया था। यह बहस ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने को लेकर रखी गई थी। इसमें एक मुस्लिम वक्ता के शिवलिंग के विषय में अभद्र भाषा बोलने पर नुपूर शर्मा ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ देश भर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रदर्शन किए थे। उनको ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ दी गई थीं। भाजपा ने उन्हें निलम्बित कर दिया था।
नुपूर शर्मा ने इस विवाद के बाद उनको मिली धमकियों और उनके जीवन में आई कठिनाइयों पर ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपुर जे शर्मा से बात की थी। उन्होंने इस दौरान बताया था कि ऑल्टन्यूज के फाउंडर और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले मुहम्मद जुबैर उनके जीवन पर आए खतरे के लिए जिम्मेदार है।

‘बाप को बाप कहना घातक तो यह रहना चाहिए’: बाबा बागेश्वर ने ‘कट्टरता’ पर लल्लनटॉप की बाँधी ‘ठठरी’

आखिर भारत में ही क्यों हिन्दू धर्म का विरोध किया जाता है? हिन्दू धर्म को अपमानित किया जाता है? जब बेशर्म हिन्दू ही 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम से हिन्दू को अपमानित करने वाले हिन्दुओं को किस संतान की श्रेणी में डालेंगे? कोई हिन्दू कुछ बोल देगा, एकदम सारे चील-कौए निकल आते हैं, लेकिन जब दूसरे मजहब के लोग जहरीली बोल निकालते हैं, तब बेशर्मों के मुंह में दही जम जाती है, शर्म करो। असली जहरीले और देश के दुश्मन यही लोग हैं। पहचानो इन मीर ज़ाफरों और जयचन्दों को, और परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार होना जरुरी है। जिस हिसाब से हिन्दू जागृति होनी शुरू है, संभव है वह दिन भी दूर नहीं।  

इंडिया टुडे ग्रुप के पोर्टल दी लल्लनटॉप (The Lallantop) ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक इंटरव्यू किया है। लल्लनटॉप उन संस्थानों में है जो श्याम मानव के आरोपों के बाद ‘बागेश्वर सरकार’ के मीडिया ट्रायल में आगे था। वैसे श्याम मानव के आरोपों को खारिज करते हुए नागपुर पुलिस पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को क्लीनचिट दे चुकी है।

करीब 44 मिनट के इस इंटरव्यू में लल्लनटॉप के पत्रकारों ने बागेश्वर पीठाधीश्वर को अपनी मंशा के साथ घेरने की पूरी कोशिश की है। लेकिन उन्होंने अपने चिर परिचित मुस्कुराने के अंदाज में इन सवालों की ठठरी बाँधकर लल्लनटॉप पत्रकारों की बोलती बंद कर दी।

कट्टरता फैलाने के आरोपों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “हम मानते हैं कि पूरी दुनिया में सबसे प्राचीन धर्म सनातन है। इसलिए सब सनातनी हैं। बाकी को हम धर्म नहीं पंथ मानते हैं। हम चादर या फादर के विरोधी नहीं हैं। हम अपने धर्म के कट्टर हैं।” इस पर लल्लनटॉप के पत्रकार ने पूछा यदि आप अपने धर्म के कट्टर हैं तो उनके विरोधी नहीं हुए? इस सवाल के जवाब में धीरेंद्र कृष्ण ने कहा, “यदि वे विरोध मान रहे हैं तो यह उनका दृष्टिकोण है। उनको अपने धर्म का कट्टर होना चाहिए। हम अपने धर्म को मान रहे हैं ये हमारी कट्टरता है। हम किसी के विरोधी नहीं हैं।”

इसके बाद पत्रकार कहता है कि कट्टरता तो घातक हो सकती है। इस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “यदि दावे के साथ बाप को बाप मानना घातक है तो अच्छी बात है।” उन्होंने आगे कहा है, “यदि कट्टरता के साथ बाप को बाप कहना घातक है तो फिर इस दुनिया का प्रत्येक वह व्यक्ति घातक है, जो अपने बाप को बाप कहता है। भगवान राम इस दुनिया के प्रत्येक हिंदू व्यक्ति के पिता हैं, परमपिता हैं, जगदीश्वर हैं, जगन्नाथ हैं तो वो बाप हैं। इसलिए, ललकार कर बाप को बाप कहना यदि लल्लनटॉप की नजर में घातक है तो ये घातकपन रहना चाहिए। ऐसे में तो प्रत्येक व्यक्ति घातक है।” https://www.facebook.com/100088185814024/videos/2737651276366786/

इंटरव्यू के आखिरी हिस्से में जिसे आप 39 मिनट के बाद सुन सकते हैं बागेश्वर धाम में होने वाले सामूहिक विवाह आयोजन और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खुद के विवाह को लेकर भी सवाल किया गया।

जब पत्रकार पूछता है कि आपको विवाह का आदेश मिल गया है तो उसके जवाब में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वे विवाह करेंगे। गृहस्थ परंपरा में जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई मिशनरी उनको टारगेट करते रहेंगे। वे कुछ भी साजिश कर सकते हैं। वे कहते हैं कि साधु को गिराने के दो तरीके हैं। पैसा और स्त्री। पैसा हम लेते नहीं और गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने उनके दूसरे ट्रिक को भी खत्म कर देंगे।

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‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना

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‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी से नाम नहीं जोड़ने को कहते हैं, बावजूद लल्लनटॉप का पत्रकार जया किशोरी का जिक्र करता है। इसके जवाब में बागेश्वर सरकार ने कहा कि उनकी देखने की दृष्टि बहन की है। साथी ही बताया कि जया किशोरी से उन्होंने आज तक न कभी बात की है। न कभी उनसे मिले हैं।

लल्लनटॉप ने उस इरा त्रिवेदी से ली योग की क्लास, जिसके लिए कुरान प्रोग्रेसिव-हिंदू धर्म दकियानूसी

भारत में भेड़चाल का अजीब आलम है। कुछ वर्ष पूर्व एक चैनल ने धर्म का शो किया, दूसरे चैनलों ने भी अपनी TRP के लिए धर्म शो शुरू कर दिया, चलो, कोई बात नहीं, धर्म का प्रसारण हो रहा है। फिर शुरू हुआ ज्योतिष कार्यक्रम। हर ज्योतिष की अपनी अलग गणना है। अब जनता माने भी किसको? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने के बाद से योग शो की अंधी दौड़ शुरू हो चुकी है। 

इंडिया टुडे समूह का एक लहंगरा पोर्टल है - द लल्लनटॉप (The Lallantop)। इस पोर्टल की पहचान ‘हिटलर का लिंग’ नापने वाली वेबसाइट के तौर पर भी है। लल्लनटॉप ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। नाम है- गेस्ट इन द न्यूजरूम (Guest in the Newsroom)।

इस कार्यक्रम में आने वाले मेहमान से सवाल-जवाब किए जाते हैं। कुछ उनकी जीवन यात्रा को लेकर। कुछ उनके काम को लेकर। कुछ उनके अनुभवों को लेकर। वगैरह वगैरह। इस कार्यक्रम के हालिया एपिसोड में इरा त्रिवेदी (Ira Trivedi) मेहमान बनकर आईं थी। इरा त्रिवेदी वही कुख्यात योग इंस्ट्रक्टर हैं, जो बीफ सेवन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के मकसद से उसे प्रोटीन का सस्ता स्रोत बता चुकी हैं।

अमूमन ‘गेस्ट इन द न्यूजरूम’ को सौरव द्विवेदी (Saurabh Dwivedi) होस्ट करते हैं। वे संपादक हैं। ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य से करियर बनाने वाले संपादक के तौर पर पहचान रखते हैं। एक बार अपने ही पिता की पार्टी को कंडोम बाँटते भी धराए थे। लेकिन इरा त्रिवेदी वाला एपिसोड हर्षिता ने होस्ट किया है। बकायदा बताया है कि कैसे सौरव ने उनको इसका मौका प्रदान किया है।

इरा त्रिवेदी वाले एपिसोड का वीडियो 29 अक्टूबर 2022 को अपलोड किया गया है। आप नीचे इसे देख सकते हैं। इस दौरान इरा ‘द लल्लनटॉप’ के न्यूजरूम में योगा टिप्स बाँटती और वहाँ मौजूद लोगों को योग करवाती भी दिख रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान वह कहती हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत हुई तो युवाओं को जोड़ने की पहल की गई। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसमें रूचि दिखाई। फिर दूरदर्शन से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहती हैं, “दूरदर्शन पर योग कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले यह धीरेन्द्र ब्रह्मचारी के साथ शुरू हुआ। उसके बाद आए बाबा रामदेव। फिर मैं आई। अब कितना कल्चर चेंज हुआ होगा दूरदर्शन में। वो मुझसे कहते थे कि आप स्लीवलेस मत पहनिए। थोड़ा सा आप… अब बाबा रामदेव तो कुछ भी नहीं पहनते हैं, और आप मुझको स्लीवलेस का बोल रहे हो।” इतना कहकर वह जोड़ से खिलखिला पड़ती हैं।

इस दौरान इरा ने यह नहीं बताया कि दूरदर्शन से उनकी छुट्टी क्यों हुई थी। न लल्लनटॉप ने इसकी वजह जानने की दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि इससे उसके गेस्ट की हिंदू घृणा सामने आने का डर जो था।

इरा त्रिवेदी वामपंथी और लिबरल गिरोह को खुश करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं। एक झूठे आँकड़े को आधार बनाकर उन्होंने बताया था कि गाय का माँस प्रोटीन का सबसे बेहतर स्रोत होता है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी के बाद ही उनकी दूरदर्शन से छुट्टी हुई थी। इस प्रकरण के बाद वो ट्विटर पर माफ़ी माँगती भी नजर आईं थी। वह हिन्दू धर्म को पिछड़ा और दकियानूसी सोच वाला, जबकि कुरान को प्रोग्रेसिव भी बता चुकी हैं।

वैसे फेक न्यूज और हिंदूफोबिया लल्लनटॉप के लिए नई बात नहीं है। हाल ही में मोरबी पुल हादसे के बाद संस्थान इसे छठ से जोड़कर झूठ फैलाते पकड़ा गया था। शायद यही कारण है कि नेटिजन्स इस संस्थान को दल्लनटॉप भी कहते हैं।