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जो शांति भंग करे, उसे देखते ही गोली मारो… असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पुलिस को दिया सख्त आदेश: धुबरी में हनुमान मंदिर के बाहर ‘गाय का सिर’ मिलने से भड़का था तनाव


असम के धुबरी ज़िले में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार (13 जून 2025) को शाम 6 बजे के बाद शूट-एट-साइट यानी देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर मुख्य न्यायाधीश को हर दंगाग्रस्त क्षेत्र के लिए स्थायी रूप से ऐसे आदेश देने चाहिए, क्योकि जब तक जेहादियों को उन्ही की भाषा में जवाब नहीं मिलेगा ये और इनके आका सुरमा भोपाली बने रहेंगे। फिर कोई यह कहने की हिम्मत करेगा कि दंगा बाहरी लोगों ने किया क्योकि गोली का शिकार होने पर स्थानीय ही निकलकर आएंगे कोई बाहरी नहीं। इनके बचाव आने वाले किसी भी मानवाधिकारी और वकीलों के साथ कोर्ट को सख्ती से पेश आकर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए।   

बांग्लादेश सीमा से सटे मुस्लिम-बहुल इस कस्बे में हाल ही में एक समूह ने भड़काऊ पोस्टर लगाने और धार्मिक स्थलों के पास गोमांस के टुकड़े फेंके थे, जिसके बाद माहौल गरमा गया। हालात को काबू में करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और CRPF की तैनाती की जा रही है।

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि धुबरी में हनुमान मंदिर के पास फेंके गए गोमांस के टुकड़े पर कार्रवाई करते हुए रात भर में 38 लोग गिरफ्तार किए गए है।

धार्मिक स्थल के पास मिला गोमांस

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, नबीन बांग्ला नामक एक समूह ने धुबरी को बांग्लादेश में मिलाने की माँग करते हुए भड़काऊ पोस्टर लगाए। यह कार्य ‘सांप्रदायिक उकसावे’ के रूप में देखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईद के अगले दिन, हनुमान मंदिर के सामने एक गाय का कटा हुआ सर मिला था, जिसके बाद शहर में तनाव बढ़ गया। रात में पथराव की घटनाएँ भी हुईं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘गंदे हथकंडों से माहौल बिगाड़ने’ की साजिश बताया।

सीएम का सख्त संदेश

सीएम सरमा खुद शुक्रवार (13 जून 2025) को धुबरी पहुँचे और कहा, “जो कोई भी धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाएगा या पथराव करेगा, उसे तुरंत गोली मारी जाएगी।”

सीएम सरमा ने घोषणा की कि वे अगले साल (2026) ईद पर खुद धुबरी में रहेंगे और ज़रूरत पड़ी तो मंदिर की पहरेदारी भी करेंगे।

‘बीफ माफिया’ पर कार्रवाई का आदेश

सरमा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में मवेशी अवैध रूप से धुबरी लाए गए है। सीएम ने इसे भी तनाव की वजह बताते हुए जाँच और गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं।

वहीं मामले को देखते हुए RAF, CRPF, और स्थानीय पुलिस की बड़ी तैनाती की जा रही है। व्यापारियों और धार्मिक स्थलों पर CCTV लगाने को कहा गया है। सरकार ज़रूरतमंद मंदिरों और मस्जिदों को कैमरे मुहैया कराएगी।

क्यों है धुबरी संवेदनशील?

धुबरी जिला असम का मुस्लिम-बहुल इलाका है, जहाँ लगभग 90% आबादी मुस्लिम है। बांग्लादेश की सीमा से सटा होने के कारण लंबे समय से यह इलाका अवैध घुसपैठ, पहचान और राजनीतिक विवादों का केंद्र रहा है।

सरमा ने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि जो भी सांप्रदायिकता फैलाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।

गोमांस खाने पर साथ आए कांग्रेसी सांसद गोगोई और AIDUF विधायक रफीकुल इस्लाम: हिमंता सरकार के गोमांस खाने पर सार्वजनिक बैन; विवादों की जननी कांग्रेस फिर दिखा रही अपना रंग


असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के सार्वजनिक जगहों पर गोमांस परोसे जाने के बैन पर कॉन्ग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF गुस्सा हो गई है। कांग्रेस की तरफ से असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई ने गोमांस पर बैन की आलोचना का जिम्मा संभाला है।

असम सरकार के इस फैसले को लेकर AIUDF के विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा, “मैं समझता हूँ इसका ज्यादा महत्व नहीं है। भाजपा ने गोवा और नार्थईस्ट में बीफ पर बैन नहीं जबकि सब जगह उनकी सरकार है, वहाँ लोग बीफ खाते और खिलाते हैं… किसके घर में क्या पकेगा, कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा यह कैबिनेट का विषय नहीं है।”

रफीकुल इस्लाम ने इस मामले में कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। गोमांस के सार्वजनिक खाए जाने पर जाने पर बैन से नाराज कांग्रेस के एक विधायक शेरमन अली ने आरोप लगा दिया कि असम सरकार आरएसएस के एजेंडे पर चल रही है। उन्होंने इसे संविधान पर हमला बता दिया। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे झारखंड के चुनाव से जोड़ दिया।

गोमांस पर बैन को लेकर गोगोई ने कहा, “झारखंड में भाजपा को करारी शिकस्त दिलाने के बाद असम के मुख्यमंत्री अपने फेल्यर को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। झारखंड की समझदार जनता की तरह असम की जनता भी अगले चुनाव में असम के भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार, कुशासन और उनके द्वारा अर्जित बेहिसाब संपत्ति की सजा देगी।”

असम कैबिनेट ने बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को राज्य के भीतर रेस्टोरेंट और होटल में गोमांस परोसे जाने पर बैन लगा दिया। सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इसे नहीं खाया जा सकेगा। यह फैसला हाल ही में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच गोमांस को लेकर चली जुबानी जंग के बाद सामने आया है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा था कि वह समर्थन दे तो उनकी सरकार राज्य में पूर्ण रूप से गोमांस पर पाबंदी लगा देगी। असल में सामागुरी में बीजेपी की जीत के बाद कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन ने गोमांस बाँटने के आरोप लगाए थे। कहा था कि इसी कारण बीजेपी को इस सीट पर जीत मिली है।

रकीबुल हुसैन पिछले लगभग ढाई दशक से सामागुरी से विधायक थे। लोकसभा चुनाव में वे धुबरी से सांसद बन गए थे। इसके बाद उपचुनावों में इस सीट से कांग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को मैदान में उतारा था। लेकिन करीब 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट को कांग्रेस बचा नहीं सकी।

रकीबुल हुसैन के आरोपों पर मुख्यमंत्री सरमा ने पूछा था कि क्या कांग्रेस अब तक गोमांस बाँट कर सामागुरी में जीत रही थी? उन्होंने कहा था, क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है। अगर ऐसा है तो क्या कांग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

साथ ही उन्होंने कहा था कि वे राज्य में गोमांस पर बैन लगाने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा सहमत हों। उन्होंने कहा कि अगर रिपुन बोरा सहमत हों तो अगली विधानसभा की बैठक में ही गोमांस पर बैन लगा दिया जाएगा।

सहिष्णु हिंदू खुद के लिए खतरा? : तिरुपति बालाजी प्रसाद में चर्बी: 189 साल पहले रची गई साजिश का नतीजा, आज भी भोग रहा हिंदू समाज


गुरुकुल पद्धति को तहस-नहस कर कॉन्वेंट शिक्षा पद्धति की नींव रखा था लॉर्ड मैकाले ने। क्यों उसने ऐसा किया था, यह इतिहास की बात है। वर्तमान में भी उसका कितना असर पड़ रहा है, यह सीखने-समझने की जरूरत है। उसके द्वारा लिखे पत्रों से इस बात का खुलासा होता है कि अपनी शिक्षा पद्धति के माध्यम से वह कौन से विष बीज बो रहा था भारतीय समाज में, जिनकी फसल निकट भविष्य में आनी ही थी, वो आज दिख भी रही है।

मैकाले लिखता है कि आने वाले वक्त में भारतीय समाज शरीर से हिन्दुस्तानी होगा लेकिन आत्मा उसकी एक अंग्रेज की होगी। आज वही सब परिलक्षित होता दिखाई दे रहा है।

सनातन आस्था के सबसे बड़े केन्द्र तिरुपति बालाजी के प्रसादम् में गाय और सुअर की चर्बी की मिलावट का मामला बेहद निंदनीय और गहरा षड्यंत्र है। यह सनातन आस्था पर गहरी चोट करता है। बड़ी चिंता का विषय लेकिन यह है कि ऐसे घृणित मामले पर समाज के उस बड़े तबके से विरोध के जो स्वर उठने चाहिए थे, वह नज़र नहीं आते।

ऐसे ही मसले पर इतिहास में हिंदू समाज की क्या प्रतिक्रिया थी, वह जानने लायक है। 1857 में एक अफ़वाह उठी थी (जिसके पुख़्ता प्रमाण नहीं हैं) कि अंग्रेज कारतूसों में चर्बी मिलाते थे। इस एक अफवाह पर पूरी क्रान्ति की ज्वाला भड़क उठी थी। तब की क्रान्ति की तुलना वर्तमान मामले से कर लेते हैं। तिरुपति बालाजी प्रसादम् में चर्बी वाली बात लैब टेस्टिंग में प्रमाणित हो चुकी है। बावजूद इसके एक सन्नाटा पसरा है हिंदू समाज में।

सेकुलरिजम का रोग, नेताओं से अधिक पॉलिटिकल करेक्टनेस का भूत शायद हिंदू समाज पर हद से ज्यादा हावी है। अफसोस यह कि इस समाज को चुनाव भी नहीं लड़ना है। फिर भी विदेशी शिक्षा के संंस्कार शायद इस कदर घर कर चुके हैं कि हम गंभीर से गंभीर मामले का भी सरलीकरण करने के अभ्यासी हो चुके हैं।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि यह हमारे पूर्वजों का पौरुष और बलिदान ही था कि गुरु गोविन्द सिंह जैसे तपस्वियों ने अपने दो पुत्रों को बलि वेदी पर जाते हुए भी धर्म नहीं बदला। वंदा वैरागी को उनके पुत्र का सीना चीरकर उसके धड़कते हृदय को खाने पर मजबूर किया लेकिन फिर भी उन्होंने मतांतरण स्वीकार नहीं किया। ऐसे बलिदानियों के बदौलत ही आज भी यह समाज सनातन है!

एक समाज के तौर पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज कई तरह के खतरों की आहट है। आज के समय में भी ताड़का और पूतना की राक्षसी वृत्तियाँ निगलना चाहती हैं हमको। एक का औज़ार हथियार है और दूसरे का प्यार। फिलहाल पूतना वक्ष में विष लपेटकर निकली है मातृत्व के दिखावे के साथ।

वक्त है अभी चेत जाने का। विरोधी स्वर बुलंद करने का। अन्यथा आने वाला वक्त यह अवसर भी छीन लेगा। सेकुलरिज्म का रोग दीमक बन कर खा रहा है। अब सेकुलर नहीं, मुखर होने की माँग कर रहा वक्त आपसे और हमसे। यहाँ रूसी विचारक लियोन ट्रॉट्स्की का विचार  प्रसंगिक है: “You may not be interested in war, but war is interested in you.”

मतलब समाज में कुछ सड़-गल रहा हो, कुछ अनैतिक हो रहा हो… और आप यह सोच कर बैठ जाएँ कि उसका प्रभाव आप तक नहीं होगा, यह मूर्खतापूर्ण है। आपके इर्द-गिर्द जो भी हो रहा है, आप उसकी चपेट में परोक्ष या प्रत्यक्ष तौर पर आएँगे ही, यह निश्चित है। 

आप भले ही किसी से जलन न रखें, उन्हें नुक़सान न पहुँचाएँ, लेकिन कुछ विचार धाराएँ हैं, जो आप पर आघात करने को आतुर हैं। इसीलिए हों सावधान, रहें सतर्क… और सबसे जरूरी – रहें एकजुट!

आंध्र प्रदेश : ‘100 करोड़ लोगों ने खाया बीफ वाला लड्डू, मजा आ गया’: तिरुपति के प्रसाद पर कांग्रेस समर्थक ने हिंदुओं का उड़ाया मजाक, कहा- अब दूसरे की प्लेट में मत झाँकना

                                                    तिरुपति लड्डू (फोटो साभार: द कम्यून)
आखिर की आड़ में सनातन पर हमला करने वालों के धर्म की जाँच करने का समय आ गया है? आंध्र प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के पिता YS Rajshekhar Reddy ने क्या कांग्रेस में रहते ईसाई धर्म अपना लिया था? गूगल पर इनके धर्म की जाँच करने पर निम्न जानकारी प्राप्त हुई :

वाई एस जगन्मोहन रेड्डी యెదుగూరి సందింటి జగన్మోహన్ రెడ్డి
संबंधवाई एस राजशेखर रेड्डी (पिता)
बच्चे2 पुत्रियाँ
निवासविशाखपट्णम, आन्ध्रप्रदेश, भारत, हैदराबाद, तेलंगाना, भारत बेंगलूरु, कर्नाटका, भारत
धर्मईसाई
शायद यही कारण है कि इतने प्रतिष्ठित मंदिर तिरुपति बाला जी प्रसाद को मछली का तेल, बीफ  और पोर्क की चर्बी मिलाने का जो घिनौना अपराध किया है, जिसका हर पार्टी को विरोध करना चाहिए और पूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन, प्रसाद को दूषित करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर बिना किसी देरी से सभी सनातन विरोधी दोषियों पर सख्त कार्यवाही करने के लिए दबाव बनाना चाहिए, क्योकि रिपोर्ट में लिखा है- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है।        

तिरुपति मंदिर के पवित्र प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी मिली होने की बात सामने आने के बाद कथिततौर पर कॉन्ग्रेस समर्थक व सोशल मीडिया के पोस्टों से जाहिर होते हिंदू विरोधी, पीयूष मानुष ने हिंदुओं का मजाक उड़ाया है। पीयूष ने अपनी वीडियो में कहा कि 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे, क्या उन्हें बीफ पसंद आया।

पीयूष ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए हिंदुओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “क्या तुमको अच्छे लड्डू मिले?… इतने दिनों तक तुम दूसरों की प्लेट देखते रहे कि कहीं वो बीफ तो नहीं खा रहे, तुमने उनके टिफिन चेक किए, उनके रेफ्रिजरेटर भी चेक किए, उन्हें मार भी डाला। अब कम से कम 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे। उन्हें लड्डू मिले होंगे। क्या हुआ? अब तुमको बीफ अच्छा लगा? मजा आया? तुम्हारा काम हो गया। कम से कम अब दूसरे की प्लेट तो मत देखिए। जाओ अपना काम करो। पेरुमल ने खुद आपको अच्छे लड्डू दिए हैं।”

पीयूष की ये वीडियो ऐसे समय में सामने आई है जब हाल में प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर खुलासा किया और जाँच रिपोर्ट से पता चला कि उसमें मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ आदि है। इस जानकारी के सामने आते ही बवाल शुरू हो गया।

हिंदुओं ने सोशल मीडिया पर विरोध करते हुए कहना शुरू किया कि जो कोई भी इस घृणित पाप का भागीदार था उन्हें भगवान वेंकटेश्वर कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की गई। कहा गया कि ये मामला साफ तौर पर हिंदू घृणा से जुड़ा है। हिंदुओं की आस्था को जानबूझकर ठेस पहुँचाया गया है।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

अवलोकन करें :-

आंध्र प्रदेश : लैब रिपोर्ट ने किया कन्फर्म : जिस घी से बनता था तिरुपति का मशहूर लड्डू, उसमें मिला


गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में लिखा था- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहू के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है।

हैदराबाद : ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ ‘काटते रहो’: असदुद्दीन ओवैसी का वीडियो वायरल; दलित हिन्दुओं आंखे खोलो, और ओवैसी से पूछो : "क्या हिन्दू दलित बीफ खाता है?"

'रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद' कहकर वोट माँगते दिखे ओवैसी (फोटो साभार : X_SVishnuReddy)
हैदराबाद वाकई hot Lok Sabha सीट बन गयी है। तेलंगाना में हैदराबाद लोक सभा सीट का परिणाम चाहे कुछ भी हो, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी उम्मीदवार माधवी लता के प्रचार और ओवैसी पर नितरोज हमलों से अपना दिमागी संतुलन खोते जा रहे हैं। अगर ओवैसी जीत भी जाता है, तो इसने अपनी जीत का आधार भी बौखलाहट में बता दिया है, और इस गंभीर बात पर केंद्र में मोदी सरकार द्वारा वापस आने पर हैदराबाद में रह रहे रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को देश से निकालना होगा। जो शायद इन दोनों भाइयों को वोट देकर इनको जितवाते हैं। लता जो लगभग 8 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही है, उनको भी और अधिक सक्रिय होकर उन अधिकारियों और नेताओं पर कार्यवाही करवाने के लिए संघर्ष करने होगा, जिन्होंने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को सरकारी सुविधाएं दिलवाने में मदद की। 
ये दोनों ओवैसी भाई मुस्लिम क्षेत्रों में मुसलमानों को भड़काने और हिन्दू क्षेत्रों में दलित कार्ड खेल हिन्दुओं को विभाजित करने की गन्दी सियासत करते हैं। उम्मीदवार लता, गोशामहल से विधायक टी राजा सिंह और केंद्रीय गृह मंत्रालय को ओवैसी द्वारा बौखलाहट में दिए जा बयानों का संज्ञान लेना होगा। यदि हैदराबाद ही नहीं तेलंगाना राज्य से रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों को खदेड़ने में राज्य और केंद्र सरकारें सफल होती है, तुष्टिकरण पर जबरदस्त प्रहार होगा।   
दूसरे, जब छद्दम सेक्युलरिस्ट्स हिन्दुओं को विभाजित कर रहे हैं, फिर सेक्युलरिस्ट्स ईसाई और मुस्लिम समाज में जाति भेदभाव को क्यों नहीं उछालते? क्यों एक जाति का ईसाई दूसरी जाति के चर्च और कब्रिस्तान में क्यों नहीं जा सकता? ठीक यही स्थिति मुस्लिम समाज में। हिन्दुओं जागो और इन तुष्टिकरण करने वालों को इन्हीं की भाषा में जवाब दो। सनातन को अपमानित करने और 'सर तन से जुदा' के लिए उकसाने वालों के विरुद्ध भी सड़क पर आना होगा।

 

 

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक मीट शॉप पर पहुँचते हैं और ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ कहते हैं। इस वीडियो में वो माँस काटने वाले लोगों के साथ हाथ मिलाते हैं और फिर कहते हैं ‘काट ते रहो।’ ये वीडियो असदुद्दीन ओवैसी के चुनाव प्रचार के दौरान का है, जब वो हैदराबाद के अंदरुनी इलाकों में पैदल ही चुनाव प्रचार कर रहे थे और लोगों से मिल रहे थे। उनका ये वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी ने उन पर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति का यही स्टाइल है। 

ओवैसी का ‘काट ते रहो’ वीडियो वायरल

असदुद्दीन ओवैसी वायरल हो रहे वीडियो में कहते दिख रहे हैं, “रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद, खैरियत है भाई? सलाम अलैकुम। काटते रहो।”
इस वीडियो को शेयर करते हुए विष्णु वर्धन रेड्डी नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी द्वारा विभाजनकारी बयानबाजी का एक खतरनाक पैटर्न सामने आया है। वो बेशर्मी से हिंदू भावनाओं को भड़काने और अपमानित करने वाले शब्दों और भाषा का इस्तेमाल करता है। इस वीडियों में वो ‘रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद’ बोल कर बीफ का समर्थन कर रहा है और हिंसा की वकालत कर रहा है। इस तरह की जानबूझकर की गई हरकतें केवल नफरत को बढ़ावा देती हैं और हमारे समाज में खाईं को बढ़ाती हैं।”
इस वीडियो को शेयर करते हुए शीतल कुमार नेहरा ने लिखा, “रेहान बीफ शॉप जिंदाबाद. देखें-कैसे ओवैसी जानबूझकर हिंदुओं का मजाक उड़ा रहा है।”
इस घटना को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ओवैसी पर तंज कसा है। निर्मला सीतारमण ने अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “असदुद्दीन ओवैसी अभद्र राजनीतिक बयान देते हैं। उनके ऐसे बयानों से मुझे आश्चर्य नहीं होता। सांसद असदुद्दीन ओवैसी और विधायक व उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ऐसे ही एक्सट्रीम बयान देने में माहिर हैं। इसलिए मुझे ऐसे बयान पर आश्चर्य नहीं होता।”

बीफ के नाम पर पहले भी वोट माँग चुके हैं ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी पहले भी बीफ के नाम पर वोट माँग चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने कहा था, “अगर ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसपल कॉरपोरेशन के आगामी चुनावों में एमआइएम हारी तो इस शहर में बीफ खाने और उसकी बिक्री पर पाबंदी लग जाएगी।”
तेलंगाना की हैदराबाद लोकसभा सीट से 4 बार के सांसद असदुद्दीन ओवैसी चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी ने सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदू शेरनी के तौर पर पहचान रखने वालीं माधवी लता को टिकट दिया है। इन दोनों नेताओं के बीच लगातार जुबानी जंग छिड़ी हुई है। तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों पर 13 मई को चौथे चरण में वोटिंग होनी है।

 


वडोदरा : गोमांस भरकर समोसा बेच रहा था ‘हुसैनी समोसे वाला’

                                               वडोदरा में बीफ भरकर बनाया जा रहा था समोसा
गुजरात के वडोदरा में एक मशहूर समोसे वाला समोसों में स्टफिंग के नाम पर बीफ भरकर बेच रहा था। पुलिस ने उसकी दुकान पर रेड मारकर 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं समोसे की स्टफिंग के लिए तैयार किया गया सामान भी बोरी में जब्त किया गया।

जानकारी के मुताबिक, वडोदरा के चिपवाड़ स्थित इस समोसे की दुकान का नाम ‘हुसैनी समोसा वाला’ है। दुकान से कई सौ किलो (कुछ जगह मौजूद जानकारी के अनुसार 350 किलो) बीफ की स्टफिंग बरामद हुई, जिसके बाद पुलिस ने इसका सैंपल फॉरेंसिंक टेस्ट के लिए भेजा और रिपोर्ट आने पर स्पष्ट हुआ कि समोसे में गोमांस ही भरा जा रहा था।

सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों की पहचान युसूफ शेख, नसीम शेख, हनीफ भाटियारा, दिलावर पठान मोइन हबदल और मोबिन शेख के तौर पर हुई है।

पुलिस ने कहा कि शहर में बीफ समोसे बेचे जा रहे थे और कुछ ग्राहक इसे ये सोचकर खरीद रहे थे कि ये मीट वाला समोसा है। इस मामले में डीसीपी पन्ना मोमाया ने बताया कि आरोपित बड़ी तादाद में कच्चा समोसा तैयार करते थे और फिर इन्हें दुकानों पर बेचा जाता था। वहाँ दुकानदार इसे तलकर ग्राहकों को देते थे।

डीसीपी ने बताया कि ये पूरा बिजनेस बिना लाइसेंस के 5 मंजिला बिल्डिंग में चल रहा था। पुलिस ये पता लगा रही है कि ये कबसे बीफ वाले समोसे बेच रहे थे और कहाँ से बीफ खरीदा जा रहा था। अब तक पूछताछ में युसूफ शेख ने बताया है कि उसके अब्बा इस काम को करते थे बाद में उसने भी इसे काम को शुरू कर दिया। उसने ये जानकारी भी दी कि वो लोग अपने समोसो में गोमांस इसलिए डालते थे क्योंकि वो भैंस या फिर गाय के मीट से ज्यादा सस्ता था और उसे इससे ज्यादा फायदा होता था।

एनिमल एक्टिविस्ट नेहा पटेल ने इस दुकान में चल रहे अवैध काम का खुलासा करने में पुलिस की मदद की। नेहा ने बताया कि ये शहर की मशहूर समोसा की दुकान है, लेकिन फिर भी दुकान पर कहीं नहीं लिखा हुआ कि ये मीट समोसा बेचते हैं। ऐसे में नेहा को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लोगों से जानना चाहा कि क्या उन्हें इस बारे में पता है? जब नेहा को लगा कि ये काम लोगों की जानकारी के बिना हो रहा है तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की और माँग की कि ऐसी दुकानों को सील किया जाए। साथ ही खाने-पीने की दुकानों की चेकिंग नियमित होती रहे।

मध्य प्रदेश : सगाई दावत से 70 किलो गोमांस बरामद : पुलिस छापेमारी में बछड़े के आठ पाँव भी मिले; गिरफ़्तारी क्यों नहीं?

                                                              खंडवा में सगाई दावत में गोमांस
मध्य प्रदेश के खंडवा में खुलेआम गौ-हत्या कर सगाई समारोह में उसके मांस की दावत उड़ाई जा रही थी। आरोपितों को न तो प्रशासन का डर है और न ही कानून का। जानकारी मिलते ही पुलिस ने आरोपितों के घर पहुँचकर 60 किलोग्राम अधपका मांस बरामद किया है। इसके साथ ही 10 किलोग्राम कच्चा मांस भी फ्रिज से बरामद किया है। पुलिस को हत्या की गई गायों के 8 पैर भी पॉलिथीन में बरामद किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, मामला खंडवा के जावर थाना क्षेत्र का है। यहाँ के फोकटपुरा मुंदवाड़ा में मंगलवार (02 जनवरी 2023) को शबनम बीबी की बेटी यासरा (19 वर्ष) की सगाई का कार्यक्रम था। इसमें अतिथियों के लिए गौमांस पकाई गई थी। हालाँकि, सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने मांस को अपने कब्जे में लेकर उसकी जाँच के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही मामला दर्ज करके घरवालों से पूछताछ की है।

अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं

पुलिस से पूछताछ में शबनम बीबी ने बताया कि उसने 4000 रुपए देकर जावेद पुत्र शेख बाबू से ये मांस मंगाया था। जावेद ही पशुओं को काटने का काम करता है। शबनम ने कहा कि उसे नहीं पता था कि ये गौमांस है या कुछ और। पुलिस ने मामले में शबनम बीबी की बेटी को मुख्य आरोपित बनाया है और अपराध एफआईआर नंबर 0004/2024 में धारा 5/9 गौवंश प्रतिशेध अधिनियम 2004 के तहत केस दर्ज किया है।
चूँकि सगाई समारोह का आयोजन था, इसलिए पुलिस ने नरमी बरती। प्रतिबंधित मांस को जब्त होने के बावजूद किसी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया। अभी जाँच की जा रही है और आरोपितों को बुधवार (03 जनवरी 2023) को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। खंडवा के जावर थाना प्रभारी गंगा प्रसाद वर्मा ने ऑपइंडिया से बातचीत में मामले की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि पुलिस टीम दूसरे केस में छापेमारी के लिए इलाके में गई थी। वहाँ मुखबिर से सूचना मिली थी कि फोकटपुरा मुंडवारा में एक सगाई समारोह में गौमांस बनाया जा रहा है। इसके बाद पुलिस टीम वहाँ पहुँची। उन्होंने बताया कि घटनास्थल से 60 किलो अधपका और 10 किलो फ्रिज में रखा हुआ गोमांस मिला। इसके अलावा मौके पर 8 पैर भी मिले हैं, जो पॉलिथीन में रखे गए थे।
टीआई गंगा प्रसाद वर्मा ने बताया कि पुलिस द्वारा खंडवा के पशु चिकित्सालय में बरामद मांस के सैंपल को जाँच के लिए भेजा गया है। वहाँ, पशु डॉक्टर- डॉक्टर प्रिया सिसोदिया, डॉक्टर नीरज कुमुद और डॉक्टर नवीन तिवारी की टीम ने सैंपल की जाँच की। जाँच की मौखिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि हुई। इसकी विस्तृत रिपोर्ट 36 घंटे बाद देने के लिए कहा है।
गंगा प्रसाद वर्मा ने कहा कि बचे हुए गोवंश के अवशेषों को वापस थाने लाया गया और विधिपूर्वक कार्रवाई कर नष्टीकरण किया गया। किसी के गिरफ्तार के न होने के सवाल पर गंगा प्रसाद वर्मा ने बताया कि मामला सगाई समारोह का था, इसलिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। कहीं सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़ जाए, इसी वजह से सावधानी बरती गई।
उन्होंने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि जाँच के साथ ही जरूरी हुई तो आगे भी धाराएँ बढ़ाई जाएँगी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि किसी भी आरोपित को छोड़ा नहीं जाएगा।

कर्नाटक : मिशनरी स्कूल में हिन्दू बच्चों को खाने में दिया जा रहा था गोमांस

    कर्नाटक के दावणगिरे स्थित डॉन बॉस्को स्कूल में बच्चों को दी जा रही थी बीफ? (साभार: X/NCPCR/Justdial)
कर्नाटक के दावणगिरे स्थित ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित डॉन बॉस्को स्कूल में कई अनियमितताएँ हैं, जिनकी जाँच ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ कर रहा है। इस दौरान बच्चों के आश्रय गृह ओपन सेंटर में भी NCPCR की टीम पहुँची। संस्था के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस दौरान मिले एक पर्चे की तस्वीर शेयर की है। इस पर्चे में आइटम के नाम, तारीख़ और उनकी कीमत लिखी हुई हैं। इसमें जिन चीजों के नाम लिखे हैं, उनमें बीफ भी है।

प्रियंक कानूनगो ने इसे हाइलाइट करते हुए अपने ट्वीट में जानकारी दी कि किचन में निरीक्षण के दौरान ये संदिग्ध मांस मिला है। टीम की सदस्य एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्या गुप्ता ने कचरे में से गोमांस का ये बिल ढूँढ कर निकाला। होम में बड़ी संख्या हिंदू बच्चों की है, इसके बावजूद सभी बच्चों से ईसाई मजहब की प्रैक्टिस कराई जा रही है तथा गोमांस पकाया जा रहा है। आवश्यक कार्यवाही हेतु संस्था द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया है।

कर्नाटक में एनसीपीसीआर की टीम सक्रिय है। बता दें कि इससे पहले निरीक्षण के बाद NCPCR के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था, “कर्नाटक में डॉन बॉस्को मिशनरी के एक चिल्ड्रेन होम के निरीक्षण में राजस्थान के जोधपुर का एक बालक मिला जो कि घर से भटक कर यहाँ आ गया था और यहाँ कई महीनों से रह रहा था, इसको वापस जोधपुर भेजने का निर्देश दिया है।”

NCPCR अध्यक्ष ने बताया कि नियमों के मुताबिक बच्चे को घर भेजा जाना चाहिए था लेकिन बाल गृह ने इसका पालन नहीं किया। साथ ही वीडियो में वह वहाँ काम करने वाली दो महिलाओं से पूछताछ करते नजर आ रहे हैं। वह महिलाओं से आश्रय गृह में मजहबी शिक्षा को लेकर सवाल कर रहे हैं। मिशनरीज द्वारा बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध आश्रय गृहों में रखने की बार-बार आने वाली समस्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “धन के लालच में, कुछ बाल आश्रय गृह बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रखते हैं और उन्हें उनके परिवारों से दूर रखते हैं। यह सब स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से किया जाता है।

लल्लनटॉप ने उस इरा त्रिवेदी से ली योग की क्लास, जिसके लिए कुरान प्रोग्रेसिव-हिंदू धर्म दकियानूसी

भारत में भेड़चाल का अजीब आलम है। कुछ वर्ष पूर्व एक चैनल ने धर्म का शो किया, दूसरे चैनलों ने भी अपनी TRP के लिए धर्म शो शुरू कर दिया, चलो, कोई बात नहीं, धर्म का प्रसारण हो रहा है। फिर शुरू हुआ ज्योतिष कार्यक्रम। हर ज्योतिष की अपनी अलग गणना है। अब जनता माने भी किसको? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने के बाद से योग शो की अंधी दौड़ शुरू हो चुकी है। 

इंडिया टुडे समूह का एक लहंगरा पोर्टल है - द लल्लनटॉप (The Lallantop)। इस पोर्टल की पहचान ‘हिटलर का लिंग’ नापने वाली वेबसाइट के तौर पर भी है। लल्लनटॉप ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। नाम है- गेस्ट इन द न्यूजरूम (Guest in the Newsroom)।

इस कार्यक्रम में आने वाले मेहमान से सवाल-जवाब किए जाते हैं। कुछ उनकी जीवन यात्रा को लेकर। कुछ उनके काम को लेकर। कुछ उनके अनुभवों को लेकर। वगैरह वगैरह। इस कार्यक्रम के हालिया एपिसोड में इरा त्रिवेदी (Ira Trivedi) मेहमान बनकर आईं थी। इरा त्रिवेदी वही कुख्यात योग इंस्ट्रक्टर हैं, जो बीफ सेवन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के मकसद से उसे प्रोटीन का सस्ता स्रोत बता चुकी हैं।

अमूमन ‘गेस्ट इन द न्यूजरूम’ को सौरव द्विवेदी (Saurabh Dwivedi) होस्ट करते हैं। वे संपादक हैं। ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य से करियर बनाने वाले संपादक के तौर पर पहचान रखते हैं। एक बार अपने ही पिता की पार्टी को कंडोम बाँटते भी धराए थे। लेकिन इरा त्रिवेदी वाला एपिसोड हर्षिता ने होस्ट किया है। बकायदा बताया है कि कैसे सौरव ने उनको इसका मौका प्रदान किया है।

इरा त्रिवेदी वाले एपिसोड का वीडियो 29 अक्टूबर 2022 को अपलोड किया गया है। आप नीचे इसे देख सकते हैं। इस दौरान इरा ‘द लल्लनटॉप’ के न्यूजरूम में योगा टिप्स बाँटती और वहाँ मौजूद लोगों को योग करवाती भी दिख रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान वह कहती हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत हुई तो युवाओं को जोड़ने की पहल की गई। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसमें रूचि दिखाई। फिर दूरदर्शन से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहती हैं, “दूरदर्शन पर योग कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले यह धीरेन्द्र ब्रह्मचारी के साथ शुरू हुआ। उसके बाद आए बाबा रामदेव। फिर मैं आई। अब कितना कल्चर चेंज हुआ होगा दूरदर्शन में। वो मुझसे कहते थे कि आप स्लीवलेस मत पहनिए। थोड़ा सा आप… अब बाबा रामदेव तो कुछ भी नहीं पहनते हैं, और आप मुझको स्लीवलेस का बोल रहे हो।” इतना कहकर वह जोड़ से खिलखिला पड़ती हैं।

इस दौरान इरा ने यह नहीं बताया कि दूरदर्शन से उनकी छुट्टी क्यों हुई थी। न लल्लनटॉप ने इसकी वजह जानने की दिलचस्पी दिखाई, क्योंकि इससे उसके गेस्ट की हिंदू घृणा सामने आने का डर जो था।

इरा त्रिवेदी वामपंथी और लिबरल गिरोह को खुश करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं। एक झूठे आँकड़े को आधार बनाकर उन्होंने बताया था कि गाय का माँस प्रोटीन का सबसे बेहतर स्रोत होता है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी के बाद ही उनकी दूरदर्शन से छुट्टी हुई थी। इस प्रकरण के बाद वो ट्विटर पर माफ़ी माँगती भी नजर आईं थी। वह हिन्दू धर्म को पिछड़ा और दकियानूसी सोच वाला, जबकि कुरान को प्रोग्रेसिव भी बता चुकी हैं।

वैसे फेक न्यूज और हिंदूफोबिया लल्लनटॉप के लिए नई बात नहीं है। हाल ही में मोरबी पुल हादसे के बाद संस्थान इसे छठ से जोड़कर झूठ फैलाते पकड़ा गया था। शायद यही कारण है कि नेटिजन्स इस संस्थान को दल्लनटॉप भी कहते हैं।