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क्या राजदीप सरदेसाई को India Today ने नौकरी से निकाला, विदाई भी नहीं दी? कहा था- पाकिस्तान को दे दो PoK


अंग्रेजी समाचार TV चैनल India Today से पत्रकार राजदीप सरदेसाई को निकाले जाने की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार तैर रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग एक कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ कर राजदीप की विदाई को लेकर चर्चाएँ कर रहे हैं।

अपने दर्शकों को गुमराह कर TRP बढ़ाने में India Today का इतिहास पुराना है। याद हो अरविन्द केजरीवाल के इंटरव्यू को आजतक पर प्रसून वाजपेयी का वीडियो बहुत वायरल हुआ था 

 राजदीप सरदेसाई को लेकर इन चर्चाओं को और भी बल तब मिला जब ABP न्यूज की पत्रकार मेघा प्रसाद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मीडिया के एक बड़े और ताकतवर व्यक्ति को बाहर निकाल दिया गया… आपके कर्म लौट कर आपको वापस मिलते हैं।”

इस ट्वीट में मेघा ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन लोग तुरंत ही कयास लगाने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि यह इशारा इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई की तरफ है, जिन्होंने हाल ही में PoK पर एक विवादित टिप्पणी की थी।

इस आग में घी डालने का काम एक्स पर की गई कई और पोस्टों ने किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरदेसाई को उनके विवादास्पद रवैये और हितों के टकराव के कारण चैनल से बिना कोई सम्मानजनक विदाई दिए हटा दिया गया है।

PoK पाकिस्तान को सौंपने की दी थी सलाह

इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया था।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं। इसको लेकर राजदीप को काफी विरोध झेलना पडा था और उनकी सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी।

पहले भी फैला चुके झूठ

यह पहली बार नहीं है जब राजदीप सरदेसाई से जुड़ा कोई विवाद सामने आया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में, किसान प्रदर्शन के दौरान गलत सूचना फैलाने के कारण उन्हें इंडिया टुडे ने दो सप्ताह के लिए ऑफ एयर कर दिया था और एक महीने का वेतन काट लिया था।

सरदेसाई ने ट्वीट किया था कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान मरने वाले एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई थी। बाद में पुष्टि हुई थी कि उसकी मौत ट्रैक्टर के पलटने से हुई थी। इसके बाद इंडिया टुडे को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब सरदेसाई के साथ क्या होगा?

अगर सरदेसाई को बाहर निकाले जाने की बात आगर सच साबित होती है तो वह ऐसे ही लोगों की एक लम्बी लाइन में शामिल हो जाएँगे। इससे पहले कई को हस्तियों पत्रकारिता की आड़ में दुष्प्रचार करने के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

इसके बाद वह रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम की तरह पीड़ित होने का नाटक कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्हें ‘असहज सवाल’ पूछने के लिए बर्खास्त कर दिया गया था और बस यूट्यूब पर चले जाएँ। यहाँ वह अपना प्रोपेगेंडा खुल कर चला सकते हैं।

पाकिस्तान की बोली बोलता India Today का राजदीप सरदेसाई : PoK पाकिस्तान को दे दे भारत और LoC को चाहते हैं ‘इंटरनेशनल बॉर्डर’ बनाना

भारत में पाकिस्तानी गद्दारों के साथ-साथ गद्दार पत्रकारों की भी कमी नहीं। India Today पहले भी कई बार विवादों में घिर चुका है। लेकिन अब तो सीधे-सीधे पाकिस्तान के लिए बैटिंग करते दिख रहा है और पाकिस्तान अपने डोसियर में इसी बात लेकर अपना पक्ष रखेगा। आखिर राजदीप सरदेसाई क्यों पाकिस्तान के लिए बैटिंग कर रहा है? क्या सरदेसाई अपने मकान या बंगले के  किसी हिस्से पर कोई कब्ज़ा कर ले तो क्या छोड़ देंगे? अगर नहीं फिर क्यों भारत PoK से अपना हक़ छोड़े? जब तक देश में गद्दारों के साथ सरदेसाई जैसे पत्रकारों पर कार्यवाही नहीं होगी संकट के बादल मंडराते रहेंगे।      
विवादित पत्रकार राजदीप सरदेसाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर विवादित सुझाव देते दिख रहे हैं। इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं।

राजदीप के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ बटोरीं, जहाँ लोग इसे भारत की संप्रभुता के खिलाफ मान रहे हैं। कई लोगों ने इसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया। यह वीडियो इंडिया टुडे के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर 22 मई 2025 को पोस्ट हुआ था।

आतंकवाद समर्थक IMF से पाकिस्तान को मिली 8500 करोड़ रूपए की ‘भीख’, वोटिंग से किनारा करने पर राजदीप सरदेसाई और कांग्रेस भारत को बदनाम करने में जुटे

                           इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई (लेफ्ट), कांग्रेस नेता जयराम रमेश (राइट)
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने शुक्रवार (9 मई 2025) को पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए 8,500 करोड़ रूपए की मंजूरी दी है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश और इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भारत सरकार पर हमला बोला है।
पाकिस्तान को कर्जा देने वाले किस मुंह से आतंकवाद का विरोध करते हैं? क्या इन देशों पर विश्वास किया जा सकता है? इन देशों की जनता को अपनी सरकारों से पूछना चाहिए। कौन कहता है कि पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर है? सत्ता मुक्त होते ही पाकिस्तान के नेता और फौजी विदेशों में रह रहे होते हैं, वह क्या वहां भीख मांगकर रहते हैं? अपनी जनता को पागल बनाकर विदेशों में अपनी तिजोरियां भरने वालों का देश क्या भुखमरी के कागार पर हो सकता है?       

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस ने पहले ही माँग की थी कि भारत आईएमएफ में पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध करे, लेकिन मोदी सरकार ‘डर’ गई और उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ‘नहीं’ में वोट करता तो यह एक मजबूत संदेश होता।

वहीं पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी भारत सरकार के बारे में गलत जानकारी को आगे बढ़ाया और सवाल किया कि भारत ने आईएमएफ मीटिंग में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया। सरदेसाई ने 9 मई 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भारत ने आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के लिए वोटिंग से किनारा किया है। सवाल: हमने इस्लामाबाद के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया, जबकि इसमें हमारे हित जुड़े हुए थे?”

सोशल मीडिया पर भी आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध किया जा रहा है। कुछ यूजर्स आईएमएफ को आतंकवाद की मदद करने वाली संस्था बता रहे है और इसी के साथ #IMFSupportsTerrorism, #IMFSupportsTerrorist, #ShameOnIMF जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

भारत ने शुक्रवार (9 मई 2025) को IMF की बैठक में पाकिस्तान को और ज्यादा पैसे देने का खुलकर विरोध किया था। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और जो भी पैसा दिया जाएगा, उसका इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

आईएमएफ की बैठक में पाकिस्तान को 8,500 करोड़ रूपए का नया कर्ज देने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया। भारत ने बताया कि पिछले 35 सालों में से 28 साल पाकिस्तान को IMF से मदद मिली है, लेकिन फिर भी वहाँ कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी फौज का देश के आर्थिक मामलों में बहुत ज्यादा दखल है, जिससे सुधार करना मुश्किल है। भारत ने ऐसे देश को पैसा देने पर आपत्ति जताई जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से आईएमएफ जैसे बड़े संस्थानों की बदनामी हो सकती है और दुनिया के नियमों का मजाक उड़ सकता है।

आईएमएफ के नियमों के तहत, सदस्य देश सीधे तौर पर किसी देश को कर्ज देने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं कर सकते हैं। वे या तो इसके पक्ष में वोट कर सकते हैं या वोटिंग से दूर रह सकते हैं। भारत ने इसी नियम के तहत वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अपनी असहमति दर्ज कराई।

आज हुए आम चुनाव तो BJP अकेले पार कर जाएगी बहुमत का आँकड़ा, NDA भी होगा 300 पार: कांग्रेस की 80 सीट भी नहीं, सर्वे ने बताया- 9 महीने में ही उतरा INDI गठबंधन का पानी


लोकसभा चुनाव अगर 2025 में करवा लिया जाए तो भाजपा को फिर एक बार देश बहुमत देगा। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(NDA) को 300 से अधिक सीटें मिलेंगी। इन चुनावों में कांग्रेस का हाल और बिगड़ जाएगा। वह 80 सीट भी नहीं ला सकेगी। यह सारी जानकारी इंडिया टुडे के मूड ऑफ़ द नेशन(MOTN) में सामने आई है।

कई बार देखा गया है कि समय पूर्व सर्वे का परिणामों के समय बिलकुल भी चर्चा नहीं होती। कोई चैनल दूसरे चैनल के सर्वे या किसी और बात पर बात करने में अपनी बेइज्जती समझते हैं। अगर यह गन्दी मानसिकता नहीं होती तो नूपुर शर्मा विवादित नहीं बनती। नूपुर को विवादित बनाने में कट्टरपंथियों से कहीं ज्यादा दोषी वो सभी चैनल है जो अपने आपको निडर और बेबाक कहकर समय बर्बाद करते हैं। खैर, बात करते हैं सर्वे की। कोरोना काल में एक मोदी विरोधी चैनल ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का दावा कर दिया था।   

इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार, अगर वर्तमान में देश में लोकसभा चुनाव करवाए जाते हैं तो भाजपा को 280 सीट मिलेंगी। यानी भाजपा चौथी बार बहुमत पाने में सफल रहेगी। वहीं भाजपा के सहयोगियों की 51 सीट आएँगी। सर्वे बताता है कि भाजपा के नेतृत्व वाला NDA 343 सीट पाएगा। NDA का वोट शेयर भी 3% बढ़ने का अनुमान है।

इंडिया टुडे के इस सर्वे के अनुसार, वर्तमान में चुनाव होने पर कॉन्ग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों को भारी नुकसान होगा। कॉन्ग्रेस को जहाँ इन चुनावों में 78 सीट मिलने का अनुमान है जबकि बाकी विपक्षी पार्टियाँ 184 सीट पाएँगी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियों के INDI गठबंधन का वोट महज 1% बढ़ेगा।

यह सर्वे जनवरी-फरवरी 2025 के बीच किया गया है। इसमें 1 लाख 23 घार लोगों ने हिस्सा लिया है। इंडिया टुडे के सर्वे से साफ़ हो गया है कि अप्रैल-मई, 2024 में हुए देश में लोकसभा चुनाव से अच्छे नतीजे भाजपा और NDA को देखने को मिलेंगे। इस सर्वे और लोकसभा चुनाव 2024 में 9 महीने का अंतर है।

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को 240 सीट मिली थीं जबकि NDA की कुल सीटें 292 थीं। भाजपा बहुमत से थोड़ा दूर रह गई थी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को 99 सीट मिली थीं। वह लगातार तीसरी बार 100 सीट का आँकड़ा पार करने में नाकाम रही थी।

इसी चुनाव में INDI गठबंधन की बाकी पार्टियों को 232 सीट मिलीं थी। इंडिया टुडे के सर्वे ने यह भी साफ़ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हुई है और वह फिर से अच्छा प्रदर्शन करने को तैयार है। इसके साथ ही इन आँकड़ों से मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के शुरूआती कामकाज पर भी मुहर लग गई है।

भाजपा की मजबूत स्थिति बीते कुछ चुनावों में देखने को भी मिली है। भाजपा और NDA ने महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्य बड़े बहुमत के साथ जीते हैं। वहीं 99 सीट पाकर आत्मविश्वास में आई कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र, हरियाणा में बुरी तरह हारी है तो वहीं दिल्ली में उसको तीसरी बार 0 सीट मिली हैं।

जिस भारत की खाते हैं उसी से जंग की बात कर गए राहुल गाँधी, फिर भी क्लीनचिट दे रहा था ‘द लल्लनटॉप’; क्या राहुल को विपक्षी नेता बने रहने का अधिकार है? आखिर किस भारत विरोधी देश के लिए कांग्रेस राष्ट्र से लड़ाई लड़ रही है?

सौरभ द्विवेदी, राहुल गाँधी (फोटो साभार : Kalinga Literature Festival / ANI)
मोदी-योगी विरोध में राहुल गाँधी और समूचा विपक्ष समझबूझ भूल ऊलजलूल बोल रहे हैं। लोक सभा में विपक्ष नेता राहुल गाँधी ने कांग्रेस कार्यालय उदघाटन के अवसर पर राष्ट्र से लड़ाई लड़ने पर समूचा विपक्ष क्यों चुप है? अगर यही बात बीजेपी के किसी नेता ने बोल दी होती, इसी विपक्ष ने देश में कोहराम मचा दिया होता, लेकिन राहुल द्वारा राष्ट्र से लड़ाई पर चुप्पी साधे रखना साबित करता है कि किसी को देश नहीं अपनी तिजोरी और कुर्सी की चिंता है। अगर विपक्ष इस घोर आपत्तिजनक बयान पर कांग्रेस के साथ खड़ी रहती है कांग्रेस के साथ-साथ इनका भी बहुत जल्दी पाताललोक में जाना तय है। आखिर किस भारत विरोधी देश के लिए कांग्रेस राष्ट्र से लड़ाई लड़ रही है? देश में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी आदि मुद्दों पर लड़ाई लड़ना अलग बात है लेकिन राष्ट्र से लड़ाई किसके लिए? 

द लल्लनटॉप के संपादक ‘पत्रकार’ सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के विवादित बयान का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन उनका यह प्रयास उल्टा पड़ गया। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में भारतीय राज्य (Indian State) के खिलाफ अपनी लड़ाई की बात कही थी, जिस पर विवाद हो गया था। इस मामले में लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने बीजेपी को ही घेरने की कोशिश की और राहुल गाँधी के बयान का बचाव किया। ये अलग बात है कि शो में मौजूद राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी ने उन्हें आईना दिखाने में देरी नहीं की, जिसके बाद सौरभ द्विवेदी अपने दावे से पीछे हटते नजर आए।

राहुल गाँधी के बयान और बीजेपी के हमलों के बीच सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को अपने शो ‘नेता नगरी’ में राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी का बचाव किया। सौरभ ने कहा, “जेपी नड्डा कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने भारत के खिलाफ लड़ाई की बात की है। जबकि राहुल गाँधी ने अपने भाषण में भारतीय सरकार (Indian Government) के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था। भाजपा उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।” सौरभ ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने ‘बीजेपी, आरएसएस और भारतीय सरकार के खिलाफ’ लड़ाई की बात कही।

हालाँकि, रजत सेठी ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को तुरंत गलत ठहराया। उन्होंने कहा, “सौरभ जी, राहुल गाँधी ने भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) का जिक्र किया था। उन्होंने यह बयान अंग्रेजी में दिया था और उनके शब्द साफ-साफ थे।”

रजत सेठी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “भारतीय राज्य का मतलब भारतीय संविधान, उसकी संस्थाएँ और उसकी संरचना से है। राहुल गाँधी ने जो कहा, वह एक बड़ी चूक हो सकती है, लेकिन इसके निहितार्थ गंभीर हैं। अगर कोई भारतीय राज्य के खिलाफ बोलता है, तो यह देशद्रोह के दायरे में आता है। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उनकी लड़ाई और युद्ध भारतीय राज्य के खिलाफ है। वो कोई आम आदमी नहीं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं।”

सौरभ द्विवेदी ने आखिरकार रजत सेठी की बात मानते हुए कहा, “हाँ, राहुल गाँधी ने अपने बयान में भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य कहा था। यह मेरे द्वारा दी गई जानकारी में गलती थी।”

14 जनवरी को नई दिल्ली में कांग्रेस के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के अवसर पर राहुल गाँधी ने अपने संबोधन में कहा, “यह मत सोचिए कि हम एक निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर आप यह मानते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस जैसे एक राजनीतिक संगठन से लड़ाई लड़ रहे हैं, तो यह सही नहीं है। उन्होंने देश की लगभग हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फ भाजपा और आरएसएस से नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) से लड़ रहे हैं।”

राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी खुलकर देश के खिलाफ बोल रहे हैं। यह कांग्रेस की मानसिकता को दिखाता है, जो देश के खिलाफ षड्यंत्र कर रही है।”

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “राहुल गाँधी का यह बयान देश के खिलाफ है। भारतीय राज्य का मतलब संविधान और उसकी संरचनाओं से है। ऐसे में राहुल गाँधी का यह बयान संविधान का अपमान है। कांग्रेस को इस पर तुरंत सफाई देनी चाहिए।”

बहरहाल, राहुल गाँधी के ‘भारतीय राज्य से लड़ाई’ वाले बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे देशविरोधी बयान करार दे रही है, जबकि कांग्रेस इसे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रही है। इस विवाद में सौरभ द्विवेदी का राहुल गाँधी का बचाव करना और फिर अपनी गलती मानना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का आगामी चुनावों में कांग्रेसऔर राहुल गाँधी पर क्या असर पड़ता है।

राहुल गाँधी के कार्यक्रम में पत्रकार के साथ हुई मारपीट पर सैम पित्रौदा ने कहा , ‘हमें कुछ नहीं पता’ कहकर निकले: बोले- पहले हमसे बात करते, फिर पब्लिक को बताते; LoP बनते ही दिखने लगे इमरजेंसी/तानाशाही के लक्षण


इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के फिर से अध्यक्ष बने सैम पित्रोदा ‘हुआ तो हुआ’ बयान को लेकर चर्चा में रहे थे। अब उनके कार्यक्रम में राहुल गाँधी और सैम पित्रोदा से सवाल पूछने पर इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ मारपीट की गई है, तो वो ये कह कर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं कि मारपीट के बारे में ‘मुझे नहीं पता’। सैम पित्रोदा ने कहा कि पत्रकार को मारपीट के मामले को सार्वजनिक करने से पहले ‘मुझसे’ बात करनी चाहिए थी।

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने सैम पित्रोदा से यह सवाल किया कि क्या राहुल गाँधी अमेरिका में बांग्लादेशी हिंदुओं पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाएँगे, तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। इसके बाद उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उनसे इंटरव्यू डिलीट करने के लिए कहा गया। रोहित शर्मा का दावा है कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट भी की गई।

इंडिया टुडे टीवी से विशेष बातचीत में सैम पित्रोदा ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि वह उस समय जल्दी में थे और उन्हें कहीं और जाना था, इसलिए वह रोहित शर्मा से मिलकर निकल गए। पित्रोदा ने कहा, “मुझे इस घटना की जानकारी नहीं है। मैं वहाँ मौजूद नहीं था। अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो मैं इसकी जाँच करूँगा।”

व्हाइट हाउस में काम करने वाली मैरी बिलमेन का कहना है कि मैने राहुल के कई स्पीच को सुना।
मुझे यह सोच कर हैरानी होती है कि भारत के कुछ लोग राहुल को भी वोट देते हैं जो अपने ही देश के बारे में अच्छा नहीं बोलता है।

 https://fb.watch/uAXVWcDBUJ/

पित्रोदा ने प्रेस की स्वतंत्रता का दिखावा करते हुए कहा कि रोहित को मामले को सार्वजनिक करने से पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी। पित्रोदा ने कहा, “मैं किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि रोहित शर्मा पहले मुझसे बात करते, बजाय इसके कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मामला उठाया।”

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छीन लेते है। इस पूरी घटना में खुद राहुल गाँधी का निजी सचिव अलंकार भी शामिल था।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस(IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। अब सैम पित्रोदा कह रहे हैं कि वो प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। वो भी इस तरह कि पत्रकार को पहले सैम पित्रोदा से बताना चाहिए था कि वो इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर रखे भी या न? सैम को सीधे-सीधे बताना चाहिए कि उनका जो इंटरव्यू रोहित शर्मा ने रिकॉर्ड किया, वो कहाँ है?

क्या राहुल गाँधी बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे? यही सवाल पूछने पर कांग्रेसियों ने इंडिया टुडे के पत्रकार को अमेरिका में धमकाया, पीड़ित ने बताया- गला पकड़ा, फोन छीना

                          पत्रकार रोहित शर्मा और राहुल गाँधी (साभार: इंडिया टुडे/ipanewspack)
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छिन लेते है। इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ अमेरिका में ऐसा हुआ था।

राहुल गाँधी की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस(IOC) के चेयरमैन सैम पित्रोदा से बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर सवाल किया तो वहाँ बैठे कांग्रेस समर्थक लोगों ने पत्रकार का मोबाइल फोन लिया और फुटेज को डिलीट करने के लिए धमकाने लगे।

कहा जा रहा है कि ऐसा करने वालों में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार भी शामिल थे। एक X यूजर अंकुर सिंह ने इसको लेकर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, “अलंकार ने इंटरव्यू रोक दिया। रिकॉर्डिंग डिलीट करने को कहा। पत्रकार ने मना कर दिया तो अलंकार ने उनका आईफोन छीन लिया और उनकी गर्दन पकड़ी। इसके बाद फोन को जबरन अनलॉक करके रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने इस पूरे वाकये को बताया है। उन्होंने लिखा है कि वे 7 सितंबर 2024 को भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की बहुप्रतीक्षित यात्रा को कवर करने के लिए अमेरिका के डलास स्थित टेक्सास गए थे। यहाँ राहुल गाँधी आने वाले थे और भारतीय प्रवासियों, छात्रों, प्रेस और कैपिटल हिल के नेताओं के साथ मुलाकात करने वाले थे।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे। कमरे में मौजूद एक व्यक्ति ने चिल्लाकर कहा कि यह सवाल ‘विवादास्पद’ है। वहाँ मौजूद अन्य लोगों भी उस व्यक्ति के हाँ में हाँ मिलाई।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। हालाँकि, रोहित के जिस सवाल को लेकर यह बवाल किया गया, उस सवाल को उनके ही एक मित्र ने राहुल गाँधी से पूछ लिया और कॉन्ग्रेस ने इसे अपने X हैंडल पर इसे पोस्ट भी किया।

इंडिया टुडे का ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे : प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार पीएम बनेंगे नरेन्द्र मोदी

इंडिया टुडे द्वारा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के सर्वे से हैरान होने की बात नहीं, यह बात तो पहले से ही दीवारों पर अंकित है। मोदी के घोर विरोधी NDTV ने कोरोना काल में ही भाजपा को 350+ सीटें दे दी थी। जबकि हर तरफ ऑक्सीजन को लेकर कोहराम मचा हुआ था। जैसे ही मोदी सरकार ने ऑक्सीज़न ऑडिट की बात कही, तुरंत सब हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन की पूर्ति हो गयी, हॉस्पिटलों के बाहर ऑक्सीजन के बिना तड़प रहे मरीज गायब होने शुरू हो गए। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने भी बोलना शुरू कर दिया कि दिल्ली के पास पर्याप्त ऑक्सीजन है, हमारे हिस्से की उन राज्यों को दी जाए जहाँ बहुत ज्यादा जरुरी है। 

दूसरे, जिस तरह महन्त धीरेन्द्र शास्त्री को मोहरा बनाकर सनातन के विरुद्ध बयानबाज़ी हो रही है, उससे आशाओं के विपरीत बड़ी तेजी से ध्रुवीकरण हो रहा है। तीसरे, ध्रुवीकरण का श्रीगणेश तो वास्तव में CAA प्रोटेस्ट के दिनों से, आज तक रुकने का नाम नहीं ले रहा। विरोध CAA का था, उसमे हिन्दू विरोधी नारेबाजी का होना। तीसरे, यही स्थिति कृषि कानून के विरोध में हुए धरने में भी हिन्दू विरोध और खालिस्तान की उपस्थिति। चार, कट्टरपंथियों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा नूपुर शर्मा के बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रसारित कर 'सर तन से जुदा' गैंग द्वारा हंगामा करना। पांच, वर्षों से विवादों में रहे अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के पुनः निर्माण होने के साथ-साथ अन्य धार्मिक स्थलों का विकास एवं सौन्दर्यकरण करने। छह, आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को चारों खाने चित करना। सात, नोटबंदी कर देश को डूबने से बचाना आदि आदि।   
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीब नौ साल से देश के सबसे शक्तिशाली पद पर विराजमान है। इस दौरान तमाम चुनौतियां आईं और गईं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के दिलों पर राज कर रहे हैं। उनकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता आज भी कायम है और आगे भी जारी रहेगी। इसका संकेत इंडिया टुडे के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे से मिलता है। इस सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव हुए तो नरेन्द्र मोदी प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार प्रधानमंत्री बन सकते हैं। सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत लोगों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया है। वहीं लोगों की राय में अब तक देश के जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उनमें सबसे लोकप्रिय नरेन्द्र मोदी हैं।

तीसरी बार पीएम बनेंगे नरेन्द्र मोदी, अकेले बीजेपी को 284 सीटें

दरअसल इंडिया टुडे ने सी-वोटर के साथ मिलकर ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे किया है, जिसमें देश की जनता का मूड जानने का प्रयास किया गया है। सर्वे के अनुमान बताते हैं कि अगर आज चुनाव हों तो बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को 298 सीटें जीत सकती है। इसमें अकेले बीजेपी को 284 सीटें मिल सकती है, जो स्पष्ट बहुमत से 12 सीटें अधिक है। इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री पूर्ण बहुमत के साथ तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वहीं इस सर्वें में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए को 153 सीटें मिलने का दावा किया गया है। अन्य दूसरी पार्टियों के खाते में 92 सीटें जा सकती हैं।

नरेन्द्र मोदी 52 प्रतिशत लोगों की पसंद

सर्वे के ताजातरीन आंकड़ों में प्रधानमंत्री मोदी लोकप्रियता के मामले में अपने विरोधियों से काफी आगे नजर आ रहे हैं। सर्वे में करीब 52.5 प्रतिशत लोगों ने अगली बार भी प्रधानमंत्री के लिए नरेन्द्र मोदी का समर्थन किया है। वहीं, सर्वे में 14 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। 5 प्रतिशत लोगों ने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और 4 प्रतिशत लोगों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा।

पीएम मोदी अब तक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री 

प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हैं। ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में एक महत्वपूर्ण सवाल था कि भारत का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री कौन है? इसके जवाब में 47 प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को अब तक का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री बताया। वहीं, अटल बिहारी बाजपेयी को 16 प्रतिशत लोगों ने वोट दिए। सर्वे में शामिल 12 प्रतिशत लोगों ने इंदिरा गांधी को अब तक का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री बताया। वहीं, मनमोहन सिंह को 8 प्रतिशत और जवाहर लाल नेहरू को 4 प्रतिशत वोट मिले।

26 प्रतिशत ने माना अमित शाह को पीएम मोदी का उत्तराधिकारी

सर्वे में प्रधानमंत्री मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर भी सवाल किया गया था। अगस्त 2022 से लेकर जनवरी 2023 के बीच कराए गए इस सर्वे में लोगों से पूछा गया कि बीजेपी में प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराधिकारी कौन है? जिसमें अमित शाह को 26 प्रतिशत लोगों ने अपनी पसंद बताया है। वहीं योगी आदित्यनाथ भी 25 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हुए हैं। सर्वे में 16 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा।

67 प्रतिशत लोगों की नजर में एनडीए सरकार का कामकाज बहुत अच्छा

एनडीए सरकार के कामकाज को 67 प्रतिशत लोगों ने बहुत अच्छा और 11 प्रतिशत लोगों ने अच्छा बताया जबकि 18 प्रतिशत लोगों ने खराब बताया है। 20 प्रतिशत लोगों ने कोरोना से निपटने को मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलता बताया है जबकि अनुच्छेद 370 हटाने को 14 प्रतिशत, राम मंदिर निर्माण को 11 प्रतिशत लोगों ने सफलता बताया है।

‘देश विरोधी है भारत का इलीट क्लास’ ; बदनाम की जा रही भारत की छवि : ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर ने लिबरल गिरोह को धोया, उतर गया राजदीप का चेहरा

                                                            ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर बेबोनेस (फोटो साभार: आजतक)
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एसोसिएट प्रोफेसर सोशियोलॉजिस्ट सैल्वाटोर बेबोनेस ने कहा है भारत का बुद्धिजीवी वर्ग मोदी और भाजपा विरोधी के साथ-साथ देश विरोधी भी है। उन्होंने कहा कि भारत को फासीवादी दर्शाने के पीछे भारत का बुद्धिजीवी वर्ग और ग्लोबल मीडिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया और दुनिया के पास के पास भारत के बारे में सही जानकारी नहीं है।

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा देशभक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रोफेसर बेबोेनेस ने कहा कि भारत में सांप्रदायिक हिंसा की खूब बातें होती हैं, खासकर उत्तर प्रदेश के बारे में। उन्होंने कहा कि रवांडा और बुरुंडी में भी उतनी ही सांप्रदायिक हिंसा हुई है, जितनी यूपी में हुई है। उन्होंने कहा कि इन सांप्रदायिक घटनाओं में यूपी का नाम जोर-शोर से लिया जाता है।

प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि जो स्थिति बिहार की है, वही स्थिति कॉन्गो की है, लेकिन बिहार की बात ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि भारत को लेकर एक छवि गढ़ ली गई है, जो कि बेहद खतरनाक बात है। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी के आधार पर भारत की छवि प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति को लेकर प्रोफेसर बेबोेनेस ने कहा कि यह गलत तरीके से तैयार किया गया है। दरअसल, इन रैंकिंग्स को सर्वे के आधार पर तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब सवाल ये है कि ये सर्वे किन लोगों पर किए जाते हैं। इनमें बुद्धिजीवी वर्ग के लोग, विदेश और भारत के छात्र, एनजीओ और मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग होते हैं। इन रैंकिंग्स में भारत को गलत आँका जाता है।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए भारत पहली बार आए प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत ने उपनिवेशवाद से निकल कर पर ग्लोबल स्तर पर खुद को साबित किया है।

बंगाल : अब गाड़ी में कैश, इंडिया टुडे कर रहा ममता के लिए बैटिंग ; धराए कांग्रेस के 3 MLA, एक ने कहा था – ‘देश खून से लथपथ हो जाएगा’

ममता बनर्जी और जयंतो घोषाल और कांग्रेस MLA से बरामद पैसे
झारखंड कांग्रेस के तीन विधायकों को भारी मात्रा में कैश के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया कि विधायकों के पास इतनी रकम मिली है कि इसकी गिनती के लिए मशीन मँगवाया गया है। उधर, इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल बंगाल की ममता बनर्जी का लगातार बचाव कर रहे हैं। इसी काम के लिए उन्हें बंगाल सरकार द्वारा नियुक्त करने की जानकारी सामने आई है।

हावड़ा की एसपी स्वाती भंगालिया ने बताया कि जिन तीन विधायकों को पकड़ा गया है, वो हैं झारखंड के जामताड़ा से विधायक इरफान अंसारी, खिजरी से विधायक राजेश कच्छप और कोलेबिरा से विधायक नमन बिक्सल।

31 जुलाई 2022 की देर रात हावड़ा पुलिस को कैश से भरी गाड़ियों के जाने की सूचना मिली। हालाँकि, ये नहीं पता चला कि इनमें कौन लोग हैं। पुलिस ने तीनों विधायकों की गाड़ियों को रोका और उनकी तलाशी ली तो उसमें भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया और पता चला कि ये तीनों विधायक हैं। इसके बाद पुलिस ने ड्राइवर सहित कार में सवार पाँच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

झारखंड के जामताड़ा से कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा था कि ‘देश खून से लथपथ हो जाए, लेकिन अग्निपथ लागू नहीं होने देंगे।’

उन्होंने पैगंबर मुहम्मद को लेकर जुमे की नमाज के बाद राँची में हुए दंगे में मारे गए दंगाइयों का समर्थन भी किया था। इरफान अंसारी ने दंगाइयों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का विरोध करते हुए मृतक दंगाइयों के परिजनों को 50 लाख रुपए देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग थी। 

इस घटना के बाद झारखंड भाजपा के महासचिव आदित्य साहू ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इससे पहले भी झारखंड में अधिकारियों के घरों में बड़ी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी। वे जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल दूसरे कामों में करते हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और यह सामने आया।”

उधर, झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “जब तक जाँच नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में बात करना मुनासिब नहीं होगा, लेकिन देश के हालात को देखते हुए… पकड़े गए विधायक मामले को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। बहरहाल घटना दुखद है। हम अपने आलाकमान को एक रिपोर्ट सौंपेंगे।”

इंडिया टुड़े के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल को साल 2020 में ममता बनर्जी की सरकार ने सूचना विभाग में लाइजनिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया था। घोषाल का काम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ राज्य सरकार के लिए लाइजनिंग करना है। इसके साथ ही राज्य के कार्यों और उसकी नजरिए को मीडिया के जरिए देश के सामने पेश करना है।

एक ट्विटर यूजर ने घोषाल बंगाल सरकार द्वारा घोषाल की की नियुक्ति का नोटिफिकेशन ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है घोषाल को इसके लिए हर महीने 1.5 लाख रुपए दिए जाएँगे और उनका कार्यालय दिल्ली में पश्चिम बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर के कार्यालय में होगा।

जयंतो घोषाल ने यह इंडिया टुडे के पैनल डिस्कशन में यह काम किया भी। बहस के दौरान घोषाल ने हाल में TMC नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के यहाँ से भारी मात्रा में कैश और जेवरात की बरामदगी पर उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बचाव करने की कोशिश की।

डिबेट में घोषाल ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सीएम एसएससी घोटाले और उसमें अपने मंत्री पार्थ चटर्जी एवं उनके सहयोगियों की मिलीभगत से बेखबर थीं। बता दें कि पार्थ चटर्जी को मंत्रालय और पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था, जब ईडी ने उनकी ‘करीबी’ अर्पिता मुखर्जी से सोने और आभूषणों के साथ 50 रुपये से अधिक नकद बरामद किया था, और यह माना जाता है कि अवैध धन शिक्षा में एसएससी भर्ती घोटाले की आय है। विभाग जब चटर्जी मंत्री थे।

इस मुद्दे पर एक पैनल चर्चा के दौरान इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए सलाहकार संपादक जयंतो घोषाल ने कहा, “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि इसके बारे में ममता बनर्जी को नहीं पता था।” अपने दावे को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि मैंने समझने की कोशिश की, मैं कल कलकत्ता में था, मैंने उनसे बात की। वह बहुत परेशान थीं और उन्होंने कार्रवाई करने में समय इसलिए लिया, क्योंकि वह पार्थ का समर्थन कर रही थी, बल्कि इसलिए कि वह समझने की कोशिश कर रही थी कि क्या हो रहा है।”