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राजदीप सरदेसाई ने रथ यात्रा पर फैलाया TMC का प्रोपेगेंडा तो इंडियन एक्सप्रेस निकला एक कदम आगे: ममता सरकार के बनाए मंदिर को बता दिया पुरी जगन्नाथ धाम के बराबर

        सागरिका घोष (बाएं), द इंडियन एक्सप्रेस (दाएं) के साथ राजदीप सरदेसाई(फोटो साभार -ऑपइंडिया इंग्लिश)
‘प्रोपेगेंडा बाज’ राजदीप सरदेसाई ने ममता बनर्जी की चरणवंदना की सभी हदें पार कर दी हैं। इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल, इस बार उन्होंने ओडिशा के पुरी में बने 900 साल पुराने जगन्नाथ धाम की तुलना पश्चिम बंगाल के दीघा में ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए नए जगन्नाथ मंदिर से कर दी है।

राजदीप को पुरी जगन्नाथ धाम की तुलना दीघा से करने पहले पुरी का इतिहास पढ़ लेना चाहिए था, जबरदस्ती में उल्टियां कर गंद मत फैला। जगन्नाथ जी के मन्दिर और धाम में जमीन आसमान का फर्क है महामूर्ख पत्रकार। राजदीप जैसे जयचंदियों की वजह से गौरवमयी हिन्दू सम्राट का पतन हुआ था। इन सनातन विरोधियों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि संयम की भी एक सीमा होती है।   

मौजूदा समय में पुरी जगन्नाथ की रथ यात्रा चल रही है। इस पवित्र मौके को भी उन्होंने ममता सरकार के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने में इस्तेमाल किया। ऐसे में शुक्रवार (27 जून 2025) को राजदीप ने ट्वीट किया, “जगन्नाथ यात्रा के अब दो ठिकाने हैं: एक असली पुरी में, दूसरा नया दीघा में।”

                                                       राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ये ट्वीट एक सोची-समझी चाल का हिस्सा लगता है, जिसमें पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। बता दें, दीघा का मंदिर अभी दो महीने पहले ही (30 अप्रैल 2025) को खुला है।

माना जा रहा है कि यह ममता बनर्जी की सरकार की एक रणनीति है, जो हिंदू भावनाओं को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनावों में लाभ लेना चाहती है। टीएमसी सरकार द्वारा बनाए गए दीघा मंदिर को पुरी के पौराणिक मंदिर के समकक्ष दिखाने की यह कोशिश न केवल धार्मिक परंपराओं का अपमान है, बल्कि जनता की आस्था से भी सीधा खिलवाड़ है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संस्थानों तक विरोध हो रहा है।

कौन हैं राजदीप सरदेसाई?

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष पहले पत्रकार थीं और अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में राजदीप का ये ट्वीट TMC के लिए प्रचार करने की कोशिश माना जा रहा है। रथ यात्रा जैसे पवित्र मौके पर उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की जैसे ममता सरकार ने दीघा में भगवान जगन्नाथ के लिए कोई नया और खास ठिकाना बना दिया हो।

दरअसल, यह टीएमसी सरकार की चुनाव से पहले हिंदू वोटरों को लुभाने की कोशिश मानी जा रही है। सालों तक मुस्लिम तुष्टिकरण और ‘बाहरी बनाम बंगाली’ जैसे नैरेटिव पर चलने वाली पार्टी को अब समझ आ गया है कि सिर्फ इन्हीं बातों से चुनाव नहीं जीता जा सकता।

इसलिए अब पार्टी दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर जैसे धार्मिक प्रयासों को दिखाकर हिंदुओं को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है। राजदीप सरदेसाई के इस पोस्ट इसी एजेंडा को बढ़ावा देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी फैलाया ऐसा ही झूठ

‘द इंडियन एक्सप्रेस‘ ने भी शनिवार (28 मार्च 2025) को एक लेख छापा, जिसमें पुरी के जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। लेख का शीर्षक था, “दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर के उभरने के बीच ओडिशा ने पुरी में रथ यात्रा के लिए पूरी ताकत झोंक दी।” इस लेख में ऐसा दिखाया गया जैसे दोनों मंदिरों के बीच कोई तुलना हो सकती है।

                                            इंडियन एक्सप्रेस की समाचार रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

पुरी जगन्नाथ धाम और दीघा के मंदिर की कोई तुलना नहीं

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और पश्चिम बंगाल के दीघा में बने नए जगन्नाथ मंदिर दोनों की आपस में न तो कोई तुलना हैं और न ही इनमें कोई प्रतिस्पर्धा है। पुरी का मंदिर 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने बनवाया था।
यह 900 साल पुराना है और हिंदू आस्था परंपरा और कलिंग शैली की वास्तुकला का केंद्र माना जाता है। इसका संचालन गजपति महाराजा की अध्यक्षता में एक समिति करती है। वहीं दीघा का मंदिर हाल ही में करीब दो महीने पहले खुला है और इसे पश्चिम बंगाल सरकार ने बनवाया है।
यह पुरी मंदिर की एक प्रतिकृति (रेप्लिका) मात्र भर है। इस मंदिर के उद्घाटन के समय ये विवादों में भी घिर गया था, खासकर ‘हलाल प्रसाद‘ और मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को लेकर। ममता सरकार अब इस नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम‘ कहकर राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है, जिससे लोगों को यह भ्रम हो कि यह पुरी के प्राचीन मंदिर जितना ही महत्वपूर्ण है। इससे यह भी आरोप लग रहा है कि सरकार जानबूझकर असली जगन्नाथ धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

TMC का दोहरा चरित्र हो चुका है बेनकाब

ममता सरकार ने जहाँ दीघा में नया मंदिर बनाकर हिंदुओं को लुभाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम-बहुल मालदा जिले में 629 साल पुरानी ‘रथ मेला‘ पर रोक लगा दी। ये दिखाता है कि TMC की हिंदू-समर्थक छवि सिर्फ दिखावा है।

पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि दीघा का मंदिर ‘भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति से कोई लेना-देना नहीं रखता।’ फिर भी राजदीप सरदेसाई और इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया हाउस दीघा के मंदिर को पुरी के जगन्नाथ धाम के बराबर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में गलतफहमी और नाराजगी दोनों ही बढ़ती जा रही है।

अवलोकन करें:-

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ममता सरकार कर रही हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़

ममता बनर्जी की TMC सरकार ने दीघा में मंदिर बनाकर और उसे ‘जगन्नाथ धाम’ कहकर हिंदू धर्म की परंपराओं और शास्त्रों का अपमान किया है। राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार इस प्रचार में शामिल होकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पुरी का जगन्नाथ धाम 900 साल की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जबकि दीघा का मंदिर सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए बनाया गया नया मंदिर है, जो दिखने में जगन्नाथ धाम की तरह हो सकता है। ऐसे में इस तरह का प्रचार न सिर्फ गलत है, बल्कि हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।

बेशर्म राजदीप सरदेसाई को इजरायली राजदूत ने दिखाया आईना: ‘इजरायल आतंकियों की तरह अस्पतालों का इस्तेमाल नहीं करता’: ईरान – हमास का प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिशें की फेल

               राजदीप सरदेसाई और रूवेनजार (फोटो साभार- एक्स/@sardesairajdeep/@ReuvenAzar )
इजरायल के बेयर शेवा में स्थित सोरोका मेडिकल सेंटर पर गुरुवार (19 जून 2025) को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल से हमला हुआ। इस हमले से अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचा और कई आम नागरिक घायल हो गए। इस घटना की दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई।

इस बीच, इंडिया टुडे के ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, “देर रात की सोच, जब ईरान इजरायल में किसी अस्पताल पर हमला करता है, तो इसे ‘युद्ध अपराध’ कहा जाता है… लेकिन जब इजरायल गाजा में किसी अस्पताल पर हमला करता है, तो इसे जायज ठहराया जाता है…”

उनका कहना था कि किसी भी अस्पताल पर हमला, चाहे वह बेयर शेवा में हो, गाजा में हो या तेहरान में, मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

इस पोस्ट के जवाब में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार, “जब कोई मानवीय स्थान, जैसे अस्पताल, सैन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो वह अपनी इम्यूनिटी खो देता है।”

उन्होंने साफ किया कि इजरायल ने कभी अस्पतालों को सैन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं किया, जबकि हमास आतंकवादियों ने अस्पतालों को सैन्य ठिकानों के रूप में इस्तेमाल किया, जिसके कारण इजरायल की कार्रवाई वैध थी। अजार ने यह भी कहा, “इजरायल सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए अस्पतालों का उपयोग नहीं करता, और इसलिए उन पर हमला युद्ध अपराध है।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर राजदीप सरदेसाई की जमकर आलोचना हुई। लोगों ने उन पर सवाल उठाए कि उन्होंने बिना पुख्ता सबूत के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। कुछ यूजर्स ने कहा कि राजदीप ने बिना किसी सही तथ्य के ही इजरायल पर आरोप लगाए।

राजदीप को शायद नहीं मालूम कि गाज़ा से लेकर ईरान तक इजराइल ने आम नागरिकों पर कोई बमबारी नहीं की, जबकि हमास और ईरान की तरफ से आम नागरिकों पर बमबारी की जा रही है। आखिर अपने आकाओं को खुश करने कितना नीचे गिरोगे?    

कुछ लोगों का मानना है कि राजदीप का यह बयान उनकी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित था और उन्होंने जानबूझकर इजरायल की कार्रवाइयों को गलत तरीके से पेश किया।

क्या राजदीप सरदेसाई को India Today ने नौकरी से निकाला, विदाई भी नहीं दी? कहा था- पाकिस्तान को दे दो PoK


अंग्रेजी समाचार TV चैनल India Today से पत्रकार राजदीप सरदेसाई को निकाले जाने की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार तैर रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग एक कड़ी से दूसरी कड़ी जोड़ कर राजदीप की विदाई को लेकर चर्चाएँ कर रहे हैं।

अपने दर्शकों को गुमराह कर TRP बढ़ाने में India Today का इतिहास पुराना है। याद हो अरविन्द केजरीवाल के इंटरव्यू को आजतक पर प्रसून वाजपेयी का वीडियो बहुत वायरल हुआ था 

 राजदीप सरदेसाई को लेकर इन चर्चाओं को और भी बल तब मिला जब ABP न्यूज की पत्रकार मेघा प्रसाद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मीडिया के एक बड़े और ताकतवर व्यक्ति को बाहर निकाल दिया गया… आपके कर्म लौट कर आपको वापस मिलते हैं।”

इस ट्वीट में मेघा ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन लोग तुरंत ही कयास लगाने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि यह इशारा इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई की तरफ है, जिन्होंने हाल ही में PoK पर एक विवादित टिप्पणी की थी।

इस आग में घी डालने का काम एक्स पर की गई कई और पोस्टों ने किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरदेसाई को उनके विवादास्पद रवैये और हितों के टकराव के कारण चैनल से बिना कोई सम्मानजनक विदाई दिए हटा दिया गया है।

PoK पाकिस्तान को सौंपने की दी थी सलाह

इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया था।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं। इसको लेकर राजदीप को काफी विरोध झेलना पडा था और उनकी सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी।

पहले भी फैला चुके झूठ

यह पहली बार नहीं है जब राजदीप सरदेसाई से जुड़ा कोई विवाद सामने आया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में, किसान प्रदर्शन के दौरान गलत सूचना फैलाने के कारण उन्हें इंडिया टुडे ने दो सप्ताह के लिए ऑफ एयर कर दिया था और एक महीने का वेतन काट लिया था।

सरदेसाई ने ट्वीट किया था कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान मरने वाले एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई थी। बाद में पुष्टि हुई थी कि उसकी मौत ट्रैक्टर के पलटने से हुई थी। इसके बाद इंडिया टुडे को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब सरदेसाई के साथ क्या होगा?

अगर सरदेसाई को बाहर निकाले जाने की बात आगर सच साबित होती है तो वह ऐसे ही लोगों की एक लम्बी लाइन में शामिल हो जाएँगे। इससे पहले कई को हस्तियों पत्रकारिता की आड़ में दुष्प्रचार करने के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

इसके बाद वह रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम की तरह पीड़ित होने का नाटक कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि उन्हें ‘असहज सवाल’ पूछने के लिए बर्खास्त कर दिया गया था और बस यूट्यूब पर चले जाएँ। यहाँ वह अपना प्रोपेगेंडा खुल कर चला सकते हैं।

पाकिस्तान की बोली बोलता India Today का राजदीप सरदेसाई : PoK पाकिस्तान को दे दे भारत और LoC को चाहते हैं ‘इंटरनेशनल बॉर्डर’ बनाना

भारत में पाकिस्तानी गद्दारों के साथ-साथ गद्दार पत्रकारों की भी कमी नहीं। India Today पहले भी कई बार विवादों में घिर चुका है। लेकिन अब तो सीधे-सीधे पाकिस्तान के लिए बैटिंग करते दिख रहा है और पाकिस्तान अपने डोसियर में इसी बात लेकर अपना पक्ष रखेगा। आखिर राजदीप सरदेसाई क्यों पाकिस्तान के लिए बैटिंग कर रहा है? क्या सरदेसाई अपने मकान या बंगले के  किसी हिस्से पर कोई कब्ज़ा कर ले तो क्या छोड़ देंगे? अगर नहीं फिर क्यों भारत PoK से अपना हक़ छोड़े? जब तक देश में गद्दारों के साथ सरदेसाई जैसे पत्रकारों पर कार्यवाही नहीं होगी संकट के बादल मंडराते रहेंगे।      
विवादित पत्रकार राजदीप सरदेसाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर विवादित सुझाव देते दिख रहे हैं। इंडिया टुडे के डिबेट शो में उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान को सौंप देना चाहिए और नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए। सरदेसाई ने इसे कश्मीर समस्या का ‘स्थायी समाधान’ बताया।

राजदीप ने कहा कि आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन पीओके वापस लेना संभव नहीं।

राजदीप के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ बटोरीं, जहाँ लोग इसे भारत की संप्रभुता के खिलाफ मान रहे हैं। कई लोगों ने इसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया। यह वीडियो इंडिया टुडे के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर 22 मई 2025 को पोस्ट हुआ था।

आतंकवाद समर्थक IMF से पाकिस्तान को मिली 8500 करोड़ रूपए की ‘भीख’, वोटिंग से किनारा करने पर राजदीप सरदेसाई और कांग्रेस भारत को बदनाम करने में जुटे

                           इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई (लेफ्ट), कांग्रेस नेता जयराम रमेश (राइट)
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने शुक्रवार (9 मई 2025) को पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए 8,500 करोड़ रूपए की मंजूरी दी है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश और इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भारत सरकार पर हमला बोला है।
पाकिस्तान को कर्जा देने वाले किस मुंह से आतंकवाद का विरोध करते हैं? क्या इन देशों पर विश्वास किया जा सकता है? इन देशों की जनता को अपनी सरकारों से पूछना चाहिए। कौन कहता है कि पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर है? सत्ता मुक्त होते ही पाकिस्तान के नेता और फौजी विदेशों में रह रहे होते हैं, वह क्या वहां भीख मांगकर रहते हैं? अपनी जनता को पागल बनाकर विदेशों में अपनी तिजोरियां भरने वालों का देश क्या भुखमरी के कागार पर हो सकता है?       

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस ने पहले ही माँग की थी कि भारत आईएमएफ में पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध करे, लेकिन मोदी सरकार ‘डर’ गई और उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ‘नहीं’ में वोट करता तो यह एक मजबूत संदेश होता।

वहीं पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी भारत सरकार के बारे में गलत जानकारी को आगे बढ़ाया और सवाल किया कि भारत ने आईएमएफ मीटिंग में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया। सरदेसाई ने 9 मई 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भारत ने आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के लिए वोटिंग से किनारा किया है। सवाल: हमने इस्लामाबाद के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया, जबकि इसमें हमारे हित जुड़े हुए थे?”

सोशल मीडिया पर भी आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध किया जा रहा है। कुछ यूजर्स आईएमएफ को आतंकवाद की मदद करने वाली संस्था बता रहे है और इसी के साथ #IMFSupportsTerrorism, #IMFSupportsTerrorist, #ShameOnIMF जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

भारत ने शुक्रवार (9 मई 2025) को IMF की बैठक में पाकिस्तान को और ज्यादा पैसे देने का खुलकर विरोध किया था। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और जो भी पैसा दिया जाएगा, उसका इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

आईएमएफ की बैठक में पाकिस्तान को 8,500 करोड़ रूपए का नया कर्ज देने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया। भारत ने बताया कि पिछले 35 सालों में से 28 साल पाकिस्तान को IMF से मदद मिली है, लेकिन फिर भी वहाँ कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी फौज का देश के आर्थिक मामलों में बहुत ज्यादा दखल है, जिससे सुधार करना मुश्किल है। भारत ने ऐसे देश को पैसा देने पर आपत्ति जताई जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से आईएमएफ जैसे बड़े संस्थानों की बदनामी हो सकती है और दुनिया के नियमों का मजाक उड़ सकता है।

आईएमएफ के नियमों के तहत, सदस्य देश सीधे तौर पर किसी देश को कर्ज देने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं कर सकते हैं। वे या तो इसके पक्ष में वोट कर सकते हैं या वोटिंग से दूर रह सकते हैं। भारत ने इसी नियम के तहत वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अपनी असहमति दर्ज कराई।

अगर वो CD चल जाती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती… अब साथी पत्रकार ने खोली राजदीप सरदेसाई की पोल, कहा- उन्होंने ही ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबाया

                                          राजदीप सरदेसाई ने छिपाया था यूपीए सरकार के खिलाफ स्टिंग
अपने आपको ‘निष्पक्ष’ कहकर कांग्रेस के लिए रोना रोने वाले राजदीप सरदेसाई का एक बार फिर काला सच सामने आया है। उनके पूर्व साथी और वरिष्ठ पत्रकार मनोज रंजन त्रिपाठी ने कहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में राजदीप ने ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबा दिया था। त्रिपाठी ने यह बात शुभांकर मिश्रा के पॉडकॉस्ट के दौरान की। बातचीत 1 घंटे 22 मिनट से लेकर 1 घंटे 26 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

2014 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के जाने और मोदी सरकार आने के बाद से प्रसून वाजपेयी और राजदीप सरदेसाई आदि कई महारथी पत्रकारों की बहुत किरकिरी हो रही है। कांग्रेस के हाथ का खिलौना रहे इन पत्रकारों का एजेंडा सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करते रहते हैं। हालाँकि कई बार जनता के बीच मोदी विरोध करने पर अपमानित भी होना पड़ा। लेकिन जो पत्रकार एक सेट एजेंडे पर काम कर अपने आकाओं को खुश करना ही अपनी योग्यता मानते हों, फिर उन्हें किसी तरह की बेइज्जती की परवाह नहीं होती।   

मनोज रंजन त्रिपाठी ने मीडिया इंडस्ट्री के ‘दिग्गज’ पत्रकार को लेकर बताया कि कैसे संसद में जब ये स्कैम उजागर हुआ, उससे पहले 2008 में इस पर स्टिंग हो चुका था। लेकिन, तब राजदीप सरदेसाई उनके बॉस थे और उन्होंने इस स्टिंग ऑपरेशन को दबा दिया।

मनोज रंजन ने कहा कि अगर वो सीडी चल जाती तो अमर सिंह से लेकर कई बड़े नेता इसमें फँसते… लेकिन राजदीप बॉस थे। मनोज रंजन ने बातचीत में साफ तौर पर कहा कि अगर ये पॉडकॉस्ट राजदीप देख लें तो भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि जो वो बोल रहे वो सच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजदीप ने स्टिंग को दबाया और वो ऐसे सौ लोग को जानते हैं जिन्हें पता है राजदीप ने स्टिंग को दबाया।

इस खुलासे के बाद अब लोग राजदीप सरदेसाई से जवाब माँग रहे हैं।

ये पहली बार नहीं है कि राजदीप के ऊपर यूपीए काल में इस स्टिंग को दबाने का आरोप लगा हो। इससे पूर्व दूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर खुलासा किया था।

उन्होंने कहा था, जब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव के बाद ये खुलासा मनोज रंजन त्रिपाठी ने किया है जो बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार सेवा दे चुके हैं और राजदीप के साथ काम करने का अनुभव रखते हैं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री पर भी बात की। बताया कि उनके सामने ऐसा हुआ है कि वो लाशों के बीच खड़े रहे और उन्हें कैमरे पर आने से पहले TIE पहनने को कहा गया है कि कितने भी वीभत्स विजुअल हों, पहले टाई पहनकर ही सामने आएँगे।

राजदीप सरदेसाई का बजट पर U-turn : पहले मोदी सरकार की योजना की तारीफ़ की, आका से सन्देश मिलते ही कांग्रेस को देने लगे श्रेय: पत्नी हैं TMC सांसद


विपक्ष भी अंदरखाने मान 
रहा मोदी सरकार का लोहा। विपक्ष बजट का विरोध केवल अपनी हैसियत दिखाने के लिए कर रहा है, जिसका प्रमाण राजदीप सरदेसाई द्वारा बजट पर पहले प्रशंसा करते ही आकाओं से आदेश मिलते ही U-turn लेने से साफ हो गया। जैसाकि चर्चा है कि 'अगर राहुल गाँधी ने खटखट हर महीने 8500 रूपए खातों में जाने का शोशा नहीं छोड़ा होता, कांग्रेस हर हाल में 50 से नीचे ही रहती।' और बीजेपी तीसरी बार अपने ही दम पर सरकार बना लेती। जहाँ तक मुसलमानों की बात है इस कौम ने तो अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय आने के बाद से बीजेपी को हराने का मन बना लिया था और इससे बीजेपी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और संघ का राष्ट्रीय मुस्लिम मंच भी अछूता नहीं रहा।  

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड सातवीं बार संसद में बजट पेश किया। इस बजट में सभी का ख्याल रखा गया। युवाओं, महिलाओं, किसानों, नौकरी पेशा सभी के लिए बजट सकारात्मक रहा। इस बीच, कांग्रेस इकोसिस्टम ने मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की और सरकार पर कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र के नकल का आरोप लगाया, खासकर युवाओं के लिए 1 करोड़ इंटर्नशिप की घोषणा पर। हालाँकि इन सबके बीच लोकतंत्र के कथित ‘चौथे’ खंबे, खासकर कांग्रेस इकोसिस्टम से जुड़े ‘पत्रकारों’ का विचलन भी सामने आ गया। ऐसे ही एक कथित पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पहले तो मोदी सरकार के बजट की तारीफ की, लेकिन कुछ ही देर में ‘आकाओं’ का संदेश मिलते ही मोदी सरकार पर कांग्रेस आरोपों को दोहराने लगे।

हालाँकि राजदीप सरदेसाई की चालाकी तुरंत ही पकड़ ली गई। समीर नाम के एक्स यूजर ने इस कांग्रेस इकोसिस्टम की तरफ लोगों का ध्यान खींचा। समीर ने लिखा, “आप क्रोनोलॉजी को समझें: राजदीप ने युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन के लिए मोदी सरकार की प्रशंसा की, लेकिन जयराम रमेश ने ट्वीट किया कि यह कांग्रेस से लिया गया है, तुरंत ही राजदीप ने ट्वीट को एडिट करके कांग्रेस को श्रेय दे दिया। एकदम जयराम की लिखी लाइनों की तरह…!!!”

अब इस पूरे खेल को समझिए। सबसे पहले राजदीप सरदेसाई ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए लिखा, “युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन और कौशल विकास योजनाओं को वित्त मंत्री के भाषण में प्राथमिकता दी गई। अच्छा! 
10 साल लग गए लेकिन उम्मीद है कि मोदी सरकार युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती को नकारने की मुद्रा से बाहर आ गई है!”

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट के काफी देर बाद जयराम रमेश का ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर कांग्रेस की नकल के आरोप लगाए।

जयराम रमेश ने 11.42 बजे लिखा, “वित्त मंत्री ने कांग्रेस के न्याय पत्र 2024 से सीख ली है। उनका इंटर्नशिप कार्यक्रम स्पष्ट रूप से कांग्रेस के प्रस्तावित अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम पर आधारित है, जिसे हमने पहली नौकरी पक्की कहा था‌। लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेडमार्क शैली में इसे हेडलाइन बनाने के लिए डिज़ाइन किया है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में सभी डिप्लोमा धारकों और स्नातकों के लिए प्रोग्रामेटिक गारंटी थी, जबकि सरकार की योजना में मनमाने ढंग से लक्ष्य (1 करोड़ इंटर्नशिप) रख दिया गया है।”

शायद ‘आका’ का मैसेज पहुँचते ही राजदीप की आँखें खुल गईं। क्योंकि जयराम रमेश के ट्वीट के बाद राजदीप सरदेसाई ने तुरंत अपने ट्वीट को एडिट कर दिया। जयराम रमेश ने 11.42 ट्वीट किया और इसके एक मिनट के अंदर ही यानी 11.43 बजे राजदीप सरदेसाई ने अपना ट्वीट एडिट करते हुए मोदी सरकार की घोषणा का श्रेय कॉन्ग्रेस को दे दिया। एकदम उसी बोली में, जैसा जयराम रमेश ने लिखा है।

राजदीप सरदेसाई ने एडिटेड ट्वीट में लिखा, “युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन और कौशल योजनाओं को वित्त मंत्री के भाषण में प्राथमिकता दी गई। अप्रेंटिसशिप के अधिकार पर कांग्रेस के न्याय पत्र की तरह 1 करोड़ युवाओं के लिए इंटर्नशिप योजना। इसमें 10 साल लग गए, लेकिन उम्मीद है कि मोदी सरकार नौकरी की चुनौती पर इनकार करने की मुद्रा से बाहर आ गई है।”

                                                       राजदीप सरदेसाई का एडिटेड ट्वीट

राजदीप सरदेसाई जैसे बहुत सारे कथित ‘पत्रकार’ खास ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा हैं। जो अपने आकाओं के एक इशारे पर मुद्दों में हेर-फेर करने की आदत से परेशान रहे हैं। खुद राजदीप सरदेसाई की पूर्व ‘पत्रकार’ पत्नी सागरिका घोष मौजूदा समय में इंडी गठबंधन की सबसे अहम पार्टी टीएमसी की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में साफ दिखता है कि एक ओर पत्नी अपनी घोषित राजनीतिक पार्टी के लिए खुलकर काम करती हैं, तो पति राजदीप अघोषित आकाओं के लिए दिन-रात एक किए रखते हैं।

पश्चिम बंगाल : ‘शरिया कोर्ट’ पर पर्दा डाल रही बंगाल पुलिस? मोदी को तानाशाह बताने वाले ममता की तानाशाही पर खामोश क्यों? मुस्लिम महिला की पिटाई का वीडियो डालने वालो पर हो रही कार्यवाही

                                   राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर किया सवाल, बंगाल पुलिस एक्शन में आई
पश्चिम बंगाल के उत्तर दीनाजपुर से 30 जून 2024 को ताजेमुल उर्फ जेसीबी द्वारा की जा रही एक महिला की निर्ममता से पिटाई की वीडियो वायरल हुई थी। सोशल मीडिया पर इसे तमाम लोगों द्वारा शेयर किया गया था। सवाल उठाए गए थे कि क्या ये तालिबान शासन जैसा नहीं है जहाँ शरिया कोर्ट में महिलाओं के साथ बर्बरता होती है। बाद में बंगाल पुलिस ने वीडियो संज्ञान में आने पर आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसे अरेस्ट भी किया। हालाँकि अब खबर है कि ताजेमुल नाम के आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब बंगाल पुलिस उन लोगों के खिलाफ एक्शन ले रही है जिन्होंने घटना की वीडियो शेयर करके सबको मामले से अवगत कराया था। इस लिस्ट में कई लोगों के नाम हैं। हैरानी की बात ये है कि इसमें शहजाद जयहिंद भी हैं जिन्होंने इस मामले में सिर्फ टीएमसी सांसद के पति पत्रकार राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

वीडियो शेयर करने वालों पर कार्रवाई

सबसे पहले रश्मि सामंत का ट्वीट देखिए। रश्मि सामंत ने अपने ट्वीट में वीडियो को शेयर करते हुए कहा था कि सरेआम महिला को मारा जा रहा है ये अफगानिस्तान नहीं बंगाल है।
कुछ देर बाद रश्मि को पता चला कि बंगाल पुलिस ने उनका ट्वीट हटवाने के लिए एक्स को संपर्क किया है। उन्होंने इसका स्कीनशॉट शेयर कर लिखा कि असली तानाशाही ये होती है।
इसी प्रकार अश्विनी श्रीवास्तव ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था ममता का बंगाल महिलाओं के लिए तालिबान से अधिक खतरनाक है।
अश्विन भी थोड़ी देर बाद जानकारी देते हैं आईटी एक्ट के उल्लंघन के तहत उनके इस ट्वीट को हटवाने के लिए बंगाल पुलिस ने एक्स को अनुरोध किया है।
इसी प्रकार से एक नेटिजन्स ऋषि बागरी का तो कहना है कि उनपर इस मामले में बंगाल पुलिस ने केस किया है। अपने ट्वीट में बागरी ने कहा कि उन्होंने सीपीआईएम नेता मोहम्मद सलीम का एक वीडियो को शेयर किया था। अब बंगाल पुलिस ने उनपर केस कर कर लिया है। ऋषि इस संबंध में लिखते हैं- आरोपितों के विरुद्ध एक्शन लेने की बजाय ये लोग जानकारी देने वालों को गिरफ्तार करने में लगे हैं। असल में तानाशाही का रूप ऐसा होता है। मालूम हो कि ऋषि ने अपने ट्वीट में पुलिस से कार्रवाई की बात कही है, मगर उन्होंने स्क्रीनशॉट वैसा ही लगाया है जैसा बाकी यूजर्स ने यानी X द्वारा प्राप्त मेल का।
वहीं वकील शशांक शेखर झा के पोस्ट को भी बंगाल पुलिस ने एक्स से हटाने को कहा है। इस पर शशांक झा लिखते हैं, “बंगाल पुलिस क्या सच में तुम में कोई शर्म नहीं बची है। तुम वाकई इस पोस्ट को डिलीट करवाने को कह रहे हो?”
शुभम नाम का एक यूजर भी एक्स से आए मेल का स्क्रीनशॉट शेयर करके कहता है कि बंगाल पुलिस ने उसके पोस्ट पर भी नोटिस भेजा है। शुभम लिखते हैं- ऐसा लग रहा है कि बंगाल पुलिस को समझना मुश्किल नहीं हैं, वो सिर्फ लोगों को नोटिस भेजकर आवाजें दबाने का काम करते हैं। इनके कड़ी मेहनत को प्रणाम। बंगाल पुलिस 24X7 सेवा में तत्पर है, पर लोगों के नहीं, टीएमसी के।
पत्रकार प्रदीप भंडारी को भी ऐसे वीडियो शेयर करने पर एक मेल आया है। इस पर प्रदीप लिखते हैं- अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई- नहीं, जो पत्रकार अपराध को रिपोर्ट करें उनपर एक्शन- हाँ.. बंगाल में आपका स्वागत है।
इसके अलावा बंगाल पुलिस ने एक्स से ये कार्रवाई भाजपा नेता शहजाद जय हिंद के खिलाफ भी करने को कहा है जबकि उन्होंने अपनी वीडियो में राजदीप सरदेसाई की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सिर्फ ये पूछा था कि आखिर राजदीप इस मामले में 9 बजे कोई डिबेट क्यों नहीं करते जहाँ महिला को मारा गया और टीएमसी करीबी ने इसे जायज ठहराया।
राजदीप सरदेसाई टीएमसी सांसद सागरिका घोष के पति हैं लेकिन साथ में पत्रकार भी हैं। वे अक्सर ऐसे मुद्दों को तब उठाते हैं जब मामला भाजपा शासित प्रदेश का हो, मगर इस बार उन्होंने चर्चा नहीं की। इसी को लेकर शहजाद ने सवाल किया। हालाँकि बंगाल पुलिस को इसमें भी आईटी एक्ट का उल्लंघन दिखा और उन्होंने एक्स से कार्रवाई को बोला। वहीं शहजाद ये मेल पाने के बाद कहते दिखे- “टीएमसी सांसद का ऐसा रुतबा है कि बंगाल पुलिस मुझपर कार्रवाई करना चाहती है। क्या ये लोकतंत्र और सहिष्णुता है। जेल चला जाऊँगा, लेकिन पोस्ट नहीं हटाऊँगा।”
रविवार को सामने आई वीडियो में दिख रहा था कि ताजेमुल महिला को डंडे से मार रहा था। महिला बार-बार उसे छोड़ने की गुहार लगा रही थी लेकिन ताजेमुल रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसने महिला को तब तक मारा जब तक वो बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद उसने महिला के अचेत होते ही उसे लात मार दी। वीडियो में महिला के अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी पीटते हुए देखा जा रहा है।

नूहं : गुरुकुल पर हमला करने वाले जेहादियों की पहचान क्यों छिपा रहे राजदीप सरदेसाई?


हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस भीड़ ने वहाँ चुन-चुन कर हिन्दुओं, उनके प्रतिष्ठानों और संस्थाओं को निशाना बनाया था। इस दौरान नूहं के भादस में गुरुकुल पर भी हमला था। इसी मामले से शक्ति सैनी की हत्या की कड़ी भी जुड़ती है। इसी गुरुकुल पर हमला करने वालों को अपनी रिपोर्ट में ‘बाहरी’ बताकर राजदीप सरदेसाई मुस्लिमों का बचाव करने की कोशिश कर रहे थे।

ऑपइंडिया को जो जानकारी मिली है कि उसके अनुसार शक्ति सैनी को मुस्लिम भीड़ के हमले की जानकारी मिलने के बाद अपने भाई को बचाने मेवात के भादस स्थित गुरुकुल गए थे। उनके भाई यहाँ शिक्षक हैं। शक्ति गुरुकुल जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन कथित तौर पर रास्ते में ही दंगाई मुस्लिम भीड़ ने उन्हें उठा लिया। दोबारा अगले दिन 1 अगस्त की सुबह उनकी मौत की खबर घरवालों को मिली।

ऑपइंडिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि 31 जुलाई को 200-250 की मुस्लिम भीड़ ने दो बार गुरुकुल पर हमला किया था। पहले दोपहर के 2-2.30 के बीच हमला हुआ। यही से हमला कर लौट रही भीड़ ने बाद में कथित तौर पर बड़कली स्थित एक सरसों के तेल की फ़ैक्ट्री जला दी थी। यह फ़ैक्ट्री बीजेपी नेता शिवकुमार बंटी की बताई जा रही है। दंगाइयों ने बंटी के फ़ैक्ट्री में लूटपाट कर आग लगा दी। सैकड़ों कनस्तर तेल या तो लूट लिया गया या जला दिया गया। वहाँ कई टन खली भी मौजूद थी। आग इतनी भीषण थी कि दमकल विभाग इस पर अगली सुबह ही काबू पा सकी।

वहीं भादस के गुरुकुल पर हमले के मामले में बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ पेट्रोल बम, लाठी और हथियारों से लैश थी। उन्मादी भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रही थी। दंगाई भीड़ में छोटे बच्चे भी थे जो दो छोटे समूहों में आकर घटना स्थल पर इकट्ठे हुए थे। दंगाई अपनी गाड़ियों के नंबर प्लेट पर पहले से ही ग्रीस लगा कर आए थे, जिससे उनकी तैयारियों का पता चलता है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुकुल पर जब मुस्लिम भीड़ ने पहली बार हमला किया तो वहाँ 3 टीचर, 35 स्टूडेंट, आसपास के हिन्दुओं के अलावा नल्हड़ मंदिर के कई श्रद्धालुओं सहित करीब 150 लोग मौजूद थे। लोगों ने खुद को गुरुकुल के अंदर बंद कर लिया था, जबकि मुस्लिम भीड़ बाहर नारे लगा रही थी। उस समय कुछ स्थानीय लोगों और गुरुकुल में रहने वाले परिवारों के प्रतिरोध की वजह से मुस्लिम भीड़ पीछे हट गई थी। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, जब गुरुकुल पर हमला हुआ, तब वहाँ कोई पुलिस वाला नहीं था क्योंकि अधिकांश पुलिसकर्मी नल्हड़ मंदिर में श्रद्धालुओं को बचाने गए थे। शाम के करीब 6-6.30 बजे मुस्लिम भीड़ नेफिर से गुरुकुल पर हमला बोल दिया। हालाँकि, तब तक स्थानीय हिन्दू और आश्रम निवासी अपनी रक्षा को लेकर अलर्ट हो गए थे। इसके कारण थोड़े से प्रतिरोध के बाद मुस्लिम भीड़ को वापस लौटना पड़ा।

बताया जाता है कि शाम को हुए दूसरे हमले की जानकारी मिलने के बाद ही शक्ति सैनी घर से गुरुकुल के लिए निकले थे। कथित तौर पर मुस्लिम भीड़ ने उन्हें रास्ते से ही अगवा कर लिया। अगले दिन उनकी लाश मिली। शक्ति के एक भाई के अनुसार, “वे अपने भाई को बचाने गुरुकुल गए थे जो वहाँ टीचर हैं। लेकिन वे खुद ही मुस्लिम भीड़ के शिकार हो गए।” इस मामले में दर्ज FIR में उनके भाई ने बताया है कि पूरी घटना का विवरण दिया है।

गुरुकुल पर हमले के साजिशकर्ता का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन स्थानीय विधायक मम्मन खान का घर गुरुकुल से करीब 50 मीटर ही दूर है। दावा है कि गुरुकुल पर हमला होते ही उनका परिवार घर से निकल गया। गौर करने वाली बात यह है कि नूहं हिंसा के बाद से मम्मन खान विवादों में हैं। हरियाणा विधानसभा में मोनू मानेसर को लेकर दिया गया उनका बयान भी मुस्लिमों को भड़काने की एक वजह बताई जा रही है।

गुरुकुल पर हमले का एक सिरा भादस गाँव के ही अख्तर के बेटे आमीन से भी जुड़ा है। उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन के भाई राशिद पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि राशिद को गो रक्षकों ने ही पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। उस समय जब उसके घर पर छापेमारी हुई थी तो गो मांस भी बरामद हुआ था।

राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ, गाँव वालों ने बताई हकीकत

गुरुकुल के पुजारी से बात करते हुए राजदीप सरदेसाई बार-बार यही पूछ रहे थे कि हमला करने वाले बाहरी थे। पुजारी ने आस-पास के गाँव वाले जवाब को अनसुना करके वो फिर बचाने वाले मुस्लिम सरपंच की ओर बात ले गए।
हकीकत ये है कि जिस भादस गाँव में गुरुकुल है, उसी गाँव के अख्तर के बेटे अमीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन का भाई राशिद गोहत्यारा है। उस पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं।
राजदीप सरदेसाई के अनुसार नूहं में हिंदुओं पर हमले को लेकर केवल दो सिद्धांत हैं: 1. बजरंग दल ने मेवातियों को भड़काया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। 2. मेवाती मुस्लिम गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ जवाबी हमला करने का इंतजार कर रहे थे।
हकीकत यह है कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले ही दंगाई मुस्लिम भीड़ गुरुकुल पर हमला कर चुकी थी। अगर बजरंग दल की जवाबी कार्रवाई और गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ ही दंगा किया गया तो बड़कली चौक पर दंगा जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले कैसे हो गई? गुरुकुल पर पहला हमला 2 से 2:30 बजे दोपहर के समय क्यों हुई? उस समय तो जलाभिषेक यात्रा आई भी नहीं थी।

‘देश विरोधी है भारत का इलीट क्लास’ ; बदनाम की जा रही भारत की छवि : ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर ने लिबरल गिरोह को धोया, उतर गया राजदीप का चेहरा

                                                            ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर बेबोनेस (फोटो साभार: आजतक)
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एसोसिएट प्रोफेसर सोशियोलॉजिस्ट सैल्वाटोर बेबोनेस ने कहा है भारत का बुद्धिजीवी वर्ग मोदी और भाजपा विरोधी के साथ-साथ देश विरोधी भी है। उन्होंने कहा कि भारत को फासीवादी दर्शाने के पीछे भारत का बुद्धिजीवी वर्ग और ग्लोबल मीडिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया और दुनिया के पास के पास भारत के बारे में सही जानकारी नहीं है।

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा देशभक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रोफेसर बेबोेनेस ने कहा कि भारत में सांप्रदायिक हिंसा की खूब बातें होती हैं, खासकर उत्तर प्रदेश के बारे में। उन्होंने कहा कि रवांडा और बुरुंडी में भी उतनी ही सांप्रदायिक हिंसा हुई है, जितनी यूपी में हुई है। उन्होंने कहा कि इन सांप्रदायिक घटनाओं में यूपी का नाम जोर-शोर से लिया जाता है।

प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि जो स्थिति बिहार की है, वही स्थिति कॉन्गो की है, लेकिन बिहार की बात ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि भारत को लेकर एक छवि गढ़ ली गई है, जो कि बेहद खतरनाक बात है। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी के आधार पर भारत की छवि प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति को लेकर प्रोफेसर बेबोेनेस ने कहा कि यह गलत तरीके से तैयार किया गया है। दरअसल, इन रैंकिंग्स को सर्वे के आधार पर तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब सवाल ये है कि ये सर्वे किन लोगों पर किए जाते हैं। इनमें बुद्धिजीवी वर्ग के लोग, विदेश और भारत के छात्र, एनजीओ और मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग होते हैं। इन रैंकिंग्स में भारत को गलत आँका जाता है।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए भारत पहली बार आए प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत ने उपनिवेशवाद से निकल कर पर ग्लोबल स्तर पर खुद को साबित किया है।

बंगाल : अब गाड़ी में कैश, इंडिया टुडे कर रहा ममता के लिए बैटिंग ; धराए कांग्रेस के 3 MLA, एक ने कहा था – ‘देश खून से लथपथ हो जाएगा’

ममता बनर्जी और जयंतो घोषाल और कांग्रेस MLA से बरामद पैसे
झारखंड कांग्रेस के तीन विधायकों को भारी मात्रा में कैश के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया कि विधायकों के पास इतनी रकम मिली है कि इसकी गिनती के लिए मशीन मँगवाया गया है। उधर, इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल बंगाल की ममता बनर्जी का लगातार बचाव कर रहे हैं। इसी काम के लिए उन्हें बंगाल सरकार द्वारा नियुक्त करने की जानकारी सामने आई है।

हावड़ा की एसपी स्वाती भंगालिया ने बताया कि जिन तीन विधायकों को पकड़ा गया है, वो हैं झारखंड के जामताड़ा से विधायक इरफान अंसारी, खिजरी से विधायक राजेश कच्छप और कोलेबिरा से विधायक नमन बिक्सल।

31 जुलाई 2022 की देर रात हावड़ा पुलिस को कैश से भरी गाड़ियों के जाने की सूचना मिली। हालाँकि, ये नहीं पता चला कि इनमें कौन लोग हैं। पुलिस ने तीनों विधायकों की गाड़ियों को रोका और उनकी तलाशी ली तो उसमें भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया और पता चला कि ये तीनों विधायक हैं। इसके बाद पुलिस ने ड्राइवर सहित कार में सवार पाँच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

झारखंड के जामताड़ा से कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा था कि ‘देश खून से लथपथ हो जाए, लेकिन अग्निपथ लागू नहीं होने देंगे।’

उन्होंने पैगंबर मुहम्मद को लेकर जुमे की नमाज के बाद राँची में हुए दंगे में मारे गए दंगाइयों का समर्थन भी किया था। इरफान अंसारी ने दंगाइयों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का विरोध करते हुए मृतक दंगाइयों के परिजनों को 50 लाख रुपए देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग थी। 

इस घटना के बाद झारखंड भाजपा के महासचिव आदित्य साहू ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इससे पहले भी झारखंड में अधिकारियों के घरों में बड़ी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी। वे जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल दूसरे कामों में करते हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और यह सामने आया।”

उधर, झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “जब तक जाँच नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में बात करना मुनासिब नहीं होगा, लेकिन देश के हालात को देखते हुए… पकड़े गए विधायक मामले को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। बहरहाल घटना दुखद है। हम अपने आलाकमान को एक रिपोर्ट सौंपेंगे।”

इंडिया टुड़े के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल को साल 2020 में ममता बनर्जी की सरकार ने सूचना विभाग में लाइजनिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया था। घोषाल का काम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ राज्य सरकार के लिए लाइजनिंग करना है। इसके साथ ही राज्य के कार्यों और उसकी नजरिए को मीडिया के जरिए देश के सामने पेश करना है।

एक ट्विटर यूजर ने घोषाल बंगाल सरकार द्वारा घोषाल की की नियुक्ति का नोटिफिकेशन ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है घोषाल को इसके लिए हर महीने 1.5 लाख रुपए दिए जाएँगे और उनका कार्यालय दिल्ली में पश्चिम बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर के कार्यालय में होगा।

जयंतो घोषाल ने यह इंडिया टुडे के पैनल डिस्कशन में यह काम किया भी। बहस के दौरान घोषाल ने हाल में TMC नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के यहाँ से भारी मात्रा में कैश और जेवरात की बरामदगी पर उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बचाव करने की कोशिश की।

डिबेट में घोषाल ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सीएम एसएससी घोटाले और उसमें अपने मंत्री पार्थ चटर्जी एवं उनके सहयोगियों की मिलीभगत से बेखबर थीं। बता दें कि पार्थ चटर्जी को मंत्रालय और पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था, जब ईडी ने उनकी ‘करीबी’ अर्पिता मुखर्जी से सोने और आभूषणों के साथ 50 रुपये से अधिक नकद बरामद किया था, और यह माना जाता है कि अवैध धन शिक्षा में एसएससी भर्ती घोटाले की आय है। विभाग जब चटर्जी मंत्री थे।

इस मुद्दे पर एक पैनल चर्चा के दौरान इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए सलाहकार संपादक जयंतो घोषाल ने कहा, “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि इसके बारे में ममता बनर्जी को नहीं पता था।” अपने दावे को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि मैंने समझने की कोशिश की, मैं कल कलकत्ता में था, मैंने उनसे बात की। वह बहुत परेशान थीं और उन्होंने कार्रवाई करने में समय इसलिए लिया, क्योंकि वह पार्थ का समर्थन कर रही थी, बल्कि इसलिए कि वह समझने की कोशिश कर रही थी कि क्या हो रहा है।”