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राजदीप सरदेसाई ने रथ यात्रा पर फैलाया TMC का प्रोपेगेंडा तो इंडियन एक्सप्रेस निकला एक कदम आगे: ममता सरकार के बनाए मंदिर को बता दिया पुरी जगन्नाथ धाम के बराबर

        सागरिका घोष (बाएं), द इंडियन एक्सप्रेस (दाएं) के साथ राजदीप सरदेसाई(फोटो साभार -ऑपइंडिया इंग्लिश)
‘प्रोपेगेंडा बाज’ राजदीप सरदेसाई ने ममता बनर्जी की चरणवंदना की सभी हदें पार कर दी हैं। इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल, इस बार उन्होंने ओडिशा के पुरी में बने 900 साल पुराने जगन्नाथ धाम की तुलना पश्चिम बंगाल के दीघा में ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए नए जगन्नाथ मंदिर से कर दी है।

राजदीप को पुरी जगन्नाथ धाम की तुलना दीघा से करने पहले पुरी का इतिहास पढ़ लेना चाहिए था, जबरदस्ती में उल्टियां कर गंद मत फैला। जगन्नाथ जी के मन्दिर और धाम में जमीन आसमान का फर्क है महामूर्ख पत्रकार। राजदीप जैसे जयचंदियों की वजह से गौरवमयी हिन्दू सम्राट का पतन हुआ था। इन सनातन विरोधियों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि संयम की भी एक सीमा होती है।   

मौजूदा समय में पुरी जगन्नाथ की रथ यात्रा चल रही है। इस पवित्र मौके को भी उन्होंने ममता सरकार के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने में इस्तेमाल किया। ऐसे में शुक्रवार (27 जून 2025) को राजदीप ने ट्वीट किया, “जगन्नाथ यात्रा के अब दो ठिकाने हैं: एक असली पुरी में, दूसरा नया दीघा में।”

                                                       राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ये ट्वीट एक सोची-समझी चाल का हिस्सा लगता है, जिसमें पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। बता दें, दीघा का मंदिर अभी दो महीने पहले ही (30 अप्रैल 2025) को खुला है।

माना जा रहा है कि यह ममता बनर्जी की सरकार की एक रणनीति है, जो हिंदू भावनाओं को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनावों में लाभ लेना चाहती है। टीएमसी सरकार द्वारा बनाए गए दीघा मंदिर को पुरी के पौराणिक मंदिर के समकक्ष दिखाने की यह कोशिश न केवल धार्मिक परंपराओं का अपमान है, बल्कि जनता की आस्था से भी सीधा खिलवाड़ है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संस्थानों तक विरोध हो रहा है।

कौन हैं राजदीप सरदेसाई?

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष पहले पत्रकार थीं और अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में राजदीप का ये ट्वीट TMC के लिए प्रचार करने की कोशिश माना जा रहा है। रथ यात्रा जैसे पवित्र मौके पर उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की जैसे ममता सरकार ने दीघा में भगवान जगन्नाथ के लिए कोई नया और खास ठिकाना बना दिया हो।

दरअसल, यह टीएमसी सरकार की चुनाव से पहले हिंदू वोटरों को लुभाने की कोशिश मानी जा रही है। सालों तक मुस्लिम तुष्टिकरण और ‘बाहरी बनाम बंगाली’ जैसे नैरेटिव पर चलने वाली पार्टी को अब समझ आ गया है कि सिर्फ इन्हीं बातों से चुनाव नहीं जीता जा सकता।

इसलिए अब पार्टी दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर जैसे धार्मिक प्रयासों को दिखाकर हिंदुओं को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है। राजदीप सरदेसाई के इस पोस्ट इसी एजेंडा को बढ़ावा देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी फैलाया ऐसा ही झूठ

‘द इंडियन एक्सप्रेस‘ ने भी शनिवार (28 मार्च 2025) को एक लेख छापा, जिसमें पुरी के जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। लेख का शीर्षक था, “दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर के उभरने के बीच ओडिशा ने पुरी में रथ यात्रा के लिए पूरी ताकत झोंक दी।” इस लेख में ऐसा दिखाया गया जैसे दोनों मंदिरों के बीच कोई तुलना हो सकती है।

                                            इंडियन एक्सप्रेस की समाचार रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

पुरी जगन्नाथ धाम और दीघा के मंदिर की कोई तुलना नहीं

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और पश्चिम बंगाल के दीघा में बने नए जगन्नाथ मंदिर दोनों की आपस में न तो कोई तुलना हैं और न ही इनमें कोई प्रतिस्पर्धा है। पुरी का मंदिर 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने बनवाया था।
यह 900 साल पुराना है और हिंदू आस्था परंपरा और कलिंग शैली की वास्तुकला का केंद्र माना जाता है। इसका संचालन गजपति महाराजा की अध्यक्षता में एक समिति करती है। वहीं दीघा का मंदिर हाल ही में करीब दो महीने पहले खुला है और इसे पश्चिम बंगाल सरकार ने बनवाया है।
यह पुरी मंदिर की एक प्रतिकृति (रेप्लिका) मात्र भर है। इस मंदिर के उद्घाटन के समय ये विवादों में भी घिर गया था, खासकर ‘हलाल प्रसाद‘ और मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को लेकर। ममता सरकार अब इस नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम‘ कहकर राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है, जिससे लोगों को यह भ्रम हो कि यह पुरी के प्राचीन मंदिर जितना ही महत्वपूर्ण है। इससे यह भी आरोप लग रहा है कि सरकार जानबूझकर असली जगन्नाथ धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

TMC का दोहरा चरित्र हो चुका है बेनकाब

ममता सरकार ने जहाँ दीघा में नया मंदिर बनाकर हिंदुओं को लुभाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम-बहुल मालदा जिले में 629 साल पुरानी ‘रथ मेला‘ पर रोक लगा दी। ये दिखाता है कि TMC की हिंदू-समर्थक छवि सिर्फ दिखावा है।

पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि दीघा का मंदिर ‘भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति से कोई लेना-देना नहीं रखता।’ फिर भी राजदीप सरदेसाई और इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया हाउस दीघा के मंदिर को पुरी के जगन्नाथ धाम के बराबर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में गलतफहमी और नाराजगी दोनों ही बढ़ती जा रही है।

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ममता सरकार कर रही हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़

ममता बनर्जी की TMC सरकार ने दीघा में मंदिर बनाकर और उसे ‘जगन्नाथ धाम’ कहकर हिंदू धर्म की परंपराओं और शास्त्रों का अपमान किया है। राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार इस प्रचार में शामिल होकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पुरी का जगन्नाथ धाम 900 साल की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जबकि दीघा का मंदिर सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए बनाया गया नया मंदिर है, जो दिखने में जगन्नाथ धाम की तरह हो सकता है। ऐसे में इस तरह का प्रचार न सिर्फ गलत है, बल्कि हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।

बंगाल : खेला होबे, संदेशखाली, मुर्शिदाबाद… वैचारिक विष्ठा करने से पहले सब भूल गईं सागरिका जी, बंगाल-हिंदुओं के लिए ‘M-O-D-I सिंड्रोम यानी Misinformation, Opacity, Distractions, and Incompetence या T-R-A-G-E-D-Y’ सिंड्रोम है TMC

      टीएमसी सांसद सागरिका घोष (बाएँ), पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (दाएँ), (साभार : FB_sagarikaghose & PTI)
सागरिका घोष ने ‘द प्रिंट’ पर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए एक लेख लिखा है, जिसमें सागरिका घोष ने 11 साल में हुई ‘दुर्घटनाओं’ और प्राकृतिक आपदाओं के लिए भी सरकार को घेरा है। आइए जानते हैं कि सागरिका घोष की बातों में कितनी सच्चाई है।

सागरिका घोष का ‘सच’ और हकीकत: दीदी के चश्मे से देश देखना

सागरिका घोष अपने लेख में मोदी सरकार पर ‘सत्यमेव जयते’ का सम्मान न करने और केवल ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ पर ध्यान देने का आरोप लगा रही हैं। सागरिका घोष M-O-D-I सिंड्रोम यानी Misinformation, Opacity, Distractions, and Incompetence (गलत सूचना, अस्पष्टता, भटकाव और अक्षमता) का जिक्र कर रही हैं।

लेकिन, सागरिका घोष की अपनी बातों में ही कितनी सच्चाई है, यह हमें देखना होगा। लगता है सागरिका जी को अपनी ‘दीदी’ यानी ममता बनर्जी को छोड़कर कोई और काम करता हुआ पसंद ही नहीं आता।

M-O-D-I सिंड्रोम या टीएमसी का ‘T-R-A-G-E-D-Y’ सिंड्रोम?

सागरिका घोष मोदी सरकार को M-O-D-I सिंड्रोम (Misinformation, Opacity, Distractions, and Incompetence) का शिकार बता रही हैं। लेकिन, अगर हम पश्चिम बंगाल में उनकी ही पार्टी TMC के राज को देखें, तो हमें एक नया और अधिक भयावह सिंड्रोम दिखाई देता है, जो T-R-A-G-E-D-Y (त्रासदी) है।

  • T (Terror) आतंक का राज- पश्चिम बंगाल में वामपंथियों के शासनकाल से भी कई गुना ज्यादा अत्याचार TMC के राज में हो रहा है। हिंदुओं की जान की दुश्मन बनी हुई है TMC सरकार। हिंदुओं के घरों पर बम फेंके जाते हैं, पत्थर बरसाए जाते हैं, आग लगाई जाती है। महिलाओं के साथ दुष्कर्म और पुरुषों को मार डालने, उनके प्राइवेट पार्ट देखने जैसी घिनौनी हरकतें आम हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया गया, राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पीड़ितों से मिलने जाना पड़ा। वहीं, संदेशखाली में TMC के गुंडे महिलाओं के साथ रेप-गैंगरेप की घटनाओं को अंजाम देते और टीएमसी महिलाओं को भी हवस का शिकार बनाते। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की टीमें भी पीड़ितों से मिलीं, जिन्होंने डर और उत्पीड़न की भयावह कहानियाँ सुनाईं।
  • R (Riot) सुनियोजित दंगे– रामनवमी पर हुई हिंसा सुनियोजित थी, जैसा कि पटना हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस नरसिम्हा रेड्डी की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया। पुलिस ने खुद पीड़ितों से मिलने जा रही टीम को रोका, यह दिखाता है कि सरकार क्या छुपाना चाहती थी। हावड़ा और बाँकुड़ा में हिंदुओं के जुलूस पर हमला हुआ और उलटा हिंदुओं को ही गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि मुहर्रम के जुलूस में ऐसी हिम्मत नहीं दिखाई जाती।
  • A (Anarchy) अराजकता और कानून का अभाव- 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हुई। टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमले किए, उनकी हत्याएँ कीं। हजारों लोग डर के मारे अपने घर छोड़कर भाग गए, जिनमें से कई आज भी विस्थापित हैं। जॉय प्रकाश यादव, कुश खेत्रपाल और अभिजीत सरकार जैसे भाजपा कार्यकर्ताओं की बर्बर हत्याएँ हुईं, जिन पर सागरिका घोष जैसे पत्रकारों की चुप्पी सवाल खड़ा करती है। अभिजीत सरकार की हत्या तो फेसबुक लाइव पर हुई थी। TMC के गुंडों ने परिवारों को जान से मारने की धमकी दी, और मुख्य आरोपित खुले घूम रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी TMC कार्यकर्ताओं के जरिए एक हिंदू परिवार पर हमला करने के मामले में उनकी जमानत रद्द करते हुए इसे ‘लोकतंत्र पर गंभीर हमला’ बताया था।
  • G (Grooming Jihad) धर्मांतरण का खतरा– सागरिका घोष ने खुद ग्रूमिंग जिहाद के खतरे को ‘मानसिक उन्माद’ यानि पागलपन कहकर खारिज कर दिया, जबकि यह हिंदू परिवारों के लिए एक गंभीर खतरा है। यह दिखाता है कि सागरिका घोष सच्चाई को कैसे तोड़-मरोड़ कर पेश करती हैं और पीड़ितों को ही दोषी ठहराती हैं।
  • E (Electoral Violence) चुनावी हिंसा का नंगा नाच- चुनावों के बाद TMC की जीत के नशे में चूर गुंडों ने भाजपा समर्थकों को निशाना बनाया, उनके घरों पर हमला किया और उन्हें उजाड़ दिया। यहाँ तक कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी भाजपा समर्थकों को नहीं मिलता है।
  • D (Demographic Change) जनसंख्या असंतुलन का खेल- पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों को जानबूझकर बसाया जा रहा है, रोहिंग्या मुस्लिमों को आधार कार्ड और घर दिए जा रहे हैं। यह सब वोट बैंक की राजनीति के लिए किया जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की Demographic पर पड़ रहा है और हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।
  • Y (Yield to Lies) झूठ के आगे घुटने टेकना- पश्चिम बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री को TMC ने पूरी तरह से कंट्रोल कर रखा है। जो सरकार की तारीफ करता है उसे काम मिलता है, विरोधियों को बाहर कर दिया जाता है। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने खुद बताया है कि कैसे उन्हें काम नहीं मिलता क्योंकि वह भाजपा में हैं। राष्ट्रीय मीडिया में पश्चिम बंगाल की हिंसा को उस स्तर की कवरेज नहीं मिलती, क्योंकि TMC सरकार सच्चाई को दबाने का काम करती है।

    दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं पर बचकानी सोच

सागरिका घोष ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना, ट्रेन पटरी से उतरने और कुंभ मेले में भगदड़ जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। सागरिका घोष का यह तर्क कि ऐसी दुर्घटनाएँ और प्राकृतिक आपदाएँ (जैसे कोविड-19 से हुई मौतें) सीधे सरकार की ‘खामियाँ’ हैं, पूरी तरह से बेतुका और बचकाना है।
क्या किसी सरकार का कंट्रोल विमान दुर्घटनाओं या कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में होने वाली भगदड़ पर हो सकता है, जब लाखों लोग एक साथ आते हैं? ऐसी घटनाएँ दुनिया भर में होती हैं और अक्सर नियति और अप्रत्याशित परिस्थितियों के अधीन होती हैं।
यह तो भगवान की माया और नियति का खेल है, जिसे किसी भी सरकार के पाले में डालना नासमझी और बचकानापन है। यदि सागरिका जी यह मानती हैं कि उनकी ‘ममता दीदी’ के राज में ऐसी दुर्घटनाएँ नहीं होतीं या प्राकृतिक आपदाएँ नहीं आतीं, तो यह उनकी संकीर्ण सोच का प्रमाण है।

कोविड-19 के आँकड़ों पर आरोप

कोविड-19 से हुई मौतों के आँकड़ों को लेकर भी सागरिका घोष ने सवाल उठाए हैं। यह सच है कि वैश्विक महामारी के दौरान आँकड़ों को लेकर बहस हुई है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि ऐसी अभूतपूर्व स्थिति में सटीक आँकड़ों का संग्रह एक जटिल चुनौती थी।
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए हर संभव प्रयास किया, और दुनिया के कई देशों में भी ऐसे ही आँकड़े सामने आए थे, जो बाद में संशोधित हुए। क्या वह यह कहना चाह रही हैं कि दुनिया की किसी भी सरकार ने कोविड से हुई मौतों के सही आँकड़े नहीं दिए?

क्या सागरिका घोष ममता दीदी को भारत का पीएम बनाने का सपना देख रही हैं?

सागरिका घोष को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा भेजा है। उनके पति राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए जाना जाता है, जिन्होंने ममता बनर्जी से पश्चिम बंगाल की हिंसा पर कभी कड़े सवाल नहीं पूछे, ताकि उनके ‘चाय पर चर्चा’ में ‘रसगुल्ले’ मिलते रहें। यह सब देखकर तो यही लगता है कि सागरिका घोष ममता दीदी को भारत का प्रधानमंत्री बनाने का ख्वाब देख रही हैं।
लेकिन, क्या उन्हें यह नहीं दिखता कि जिस ममता दीदी के राज में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में है, महिलाएँ असुरक्षित हैं, और पूरी कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, वह भारत को कैसे चला सकती हैं? क्या उनका सपना भारत को एक इस्लामी मुल्क बनाने का है, जहाँ हिंदुओं को अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाए?
जिस सरकार के राज में रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी होती है, धर्मांतरण के खतरे को ‘मानसिक उन्माद’ यानि पागलपन बताया जाता है, और अपने ही नागरिकों को घर छोड़ने पर मजबूर किया जाता है, क्या ऐसी सरकार देश को आगे ले जा सकती है?

आईना देखना जरूरी है

सागरिका घोष मोदी सरकार पर ‘झूठ’ बोलने और ‘जवाबदेही से बचने’ का आरोप लगा रही हैं। लेकिन, उन्हें सबसे पहले कहीं और झांकना होगा। जिस पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा है, वह पश्चिम बंगाल में अराजकता, हिंसा और तुष्टिकरण का प्रतीक बन चुकी है।
भारत में मोदी सरकार ने विकास के कई आयाम गढ़े हैं, चाहे वह सड़कें हों, एयर पोर्ट हों या डिजिटल इंडिया का सपना। हाँ, कोई भी सरकार पूर्ण नहीं होती और गलतियाँ भी होती हैं, लेकिन उन्हें ऐसे पेश करना जैसे हर आपदा और दुर्घटना के लिए सिर्फ सरकार जिम्मेदार है, यह निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
भारत की जनता मोदी के कामकाज से प्रेरित होकर उन्हें वोट देती है, जबकि ममता दीदी दादागिरी करके वोट छीनती हैं।
सागरिका घोष जी, आपको यह समझना होगा कि पत्रकारिता का धर्म सच्चाई दिखाना होता है, न कि किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देना। अगर आपको ‘M-O-D-I सिंड्रोम’ दिखाई देता है, तो अपनी ही पार्टी के ‘T-R-A-G-E-D-Y सिंड्रोम’ पर भी नजर डालनी चाहिए।

कांग्रेसी ECOSYSTEM में कलह, ट्रोल पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने TMC सांसद सागरिका घोष को कहा ‘चोर-बेशर्म’

                                  सागरिका घोष पर भड़कीं स्वाति चतुर्वेदी, वीडियो चुराने का आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कांग्रेसी पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी और TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के बीच लड़ाई चल रही है। पूरा मामला सागरिका घोष द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ, जिसमें बताया गया था कि राज्यसभा के नियम 238 के हिसाब से जब कोई सदस्य को बोलते हुए किसी अन्य सदस्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। इसमें सभापति जगदीप धनखड़ पर इस नियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनके वो वीडियो शेयर किए जिसमें वो हंगामेबाज सांसदों को डाँटते दिख रहे हैं।

उन्होंने सागरिका घोष से भी कहा था कि आप हर सप्ताह अख़बार में लेख लिखती हो और आपने ये कमाया है? इस वीडियो में जगदीप धनखड़ के कई क्लिप्स को काट-काट कर सन्दर्भ के बिना ही शेयर किया गया।

इसके बाद स्वाति चतुर्वेदी ने सागरिका घोष को डाँटते हुए पोस्ट किया, “इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। सागरिका घोष मैडम, कुछ तो शर्म करो। मैंने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जो वीडियो शेयर किया है वो Exclusive है। क्या आप बृजभषण शरण सिंह जैसे यौन कुण्ठितों को मंच देने वाले अपने पति राजदीप सरदेसाई की तरह मतलबी परजीवी बनने से पहले एक कथित पत्रकार नहीं थीं? इस वीडियो को हटाओ बेशर्म।” उन्होंने इस वीडियो में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और सागरिका घोष की पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी को भी टैग किया।

इस वीडियो को जहाँ स्वाति चतुर्वेदी ने मंगलवार (13 अगस्त, 2024) को सुबह के 10:51 बजे शेयर किया था, वहीं सागरिका घोष ने इस वीडियो को 11:28 बजे शेयर किया, यानी 37 मिनट बाद।

इतना ही नहीं, स्वाति चतुर्वेदी इससे इतना भड़क गईं कि उन्होंने राहुल गाँधी के सलाहकार जयराम पर भी भड़क गईं, उन्होंने उन्होंने सागरिका घोष द्वारा शेयर किए गए वीडियो को रीट्वीट किया। उन्होंने सागरिका घोष को ‘चोर’ भी कहा। उन्होंने इस दौरान राहुल गाँधी और सुप्रिया श्रीनेत को भी टैग किया और उन्हें ये सब रोकने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने लिखा कि दक्षिणपंथी समूह सागरिका घोष को बेकार बताता है, ये बिलकुल सही है।