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आत्महत्या करने पर तुली कांग्रेस को सेना के शौर्य पर नहीं विश्वास: बार-बार माँग रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सबूत, अब कर्नाटक MLA ने पूछा- कौन मरा, कहाँ मरा, कितने मरे?

     कांग्रेस नेता उदित राज, MLA कोथुर मंजूनाथ और राशिद अल्वी (साभार- हिंदुस्तान टाइम्स इंडिया टुडे, रिपब्लिक)
पाकिस्तान और मुस्लिम कट्टरपंथियों पर होती कार्यवाही से कांग्रेस को राष्ट्रीय समस्या दूर होने की चिंता नहीं बल्कि चिंता है मुसलमानों का वोट। एयर और सर्जिकल स्ट्राइक का भी कांग्रेस और विपक्ष ने बहुत मजाक बनाया जिसका पाकिस्तान ने खूब फायदा उठा भारत को बदनाम करता रहा। पाकिस्तान और चीन की बोली बोलने वाली कांग्रेस और INDI गठबंधन क्या एक भी वोट की हक़दार है? Operation Sindoor के तहत आतंकवादियों पर हुई कार्यवाही से समूचा विश्व दांतों में ऊँगली दबाने को मजबूर है जबकि कांग्रेस सबूत मांग क्या कहना चाहती है? ये वही कांग्रेस है जिसने हमारे सेना प्रमुख को "गली का गुंडा" कहा था।    

भारतीय सेना के मिशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पूरा होने के बाद अब कर्नाटक के कांग्रेस MLA कोथुर मंजूनाथ ने सेना पर ही सवाल खड़ेकर दिए हैं। उनका कहना है कि ये मिशन सिर्फ एक दिखावा था। पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को न्याय नहीं मिला।

कांग्रेस के कर्नाटक विधायक कोथुर मंजूनाथ ने बयान में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिखावा था। कुछ हुआ ही नहीं। बस दिखावे के लिए तीन चार विमान ऊपर भेजे और वापस बुला लिए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंजूनाथ ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के बारे में सवाल पूछते हुए आगे कहा, “क्या पहलगाम में मारे गए 26-28 लोगों को इंसाफ मिलेगा? क्या उन महिलाओं का दुख कम होगा? क्या यही तरीका है उनके सम्मान करने का?”

सेना पर सवाल क्यों?

जम्मू कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। आतंकियों ने सभी लोगों से धर्म पूछ कर उनके गैर-मुस्लिम होने के पुष्टि करने के बाद बेरहमी से उनको मार दिया था। मरने वालों में देश के अलग-अलग राज्यों से कश्मीर गए ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे।

भारत सरकार ने 7 मई 2025 को जवाबी एक्शन में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके तहत तड़के ही भारतीय सेना ने एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल से बर्बाद कर दिया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सेना ने कही थी।

सेना के इस बयान पर मंजूनाथ ने सवाल किया है। उन्होंने कहा, “इस बात की क्या पुष्टि है कि 100 आतंकवादी मारे गए? हमारी सीमा में जो घुसे, उन आतंकवादियों की पहचान क्या है?”

उन्होंने इंटेलिजेंस सिस्टम प्रणाली की सफलता पर भी तंज कसा। मंजूनाथ ने पूछा, “सीमा पर सुरक्षा क्यों नहीं थी और आतंकी कैसे भाग गए? हमें आतंकवाद की जड़ समेत तने और शाखों को भी पहचान कर खत्म करना चाहिए।”

कार्रवाई में भी परेशानी

कोथुर मंजूनाथ यही नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने मीडिया पर भी सवाल खड़े कर दिए। वह बोले, “सारी टीवी चैनल अलग-अलग कहानी बता रहे हैं। कोई यह नहीं बता रहा है कि असल में कौन मारा गया, कहाँ मारा गया और कितने मारे गए।”

मंजूनाथ के इस बयान को सुनकर कांग्रेस की पुरानी आदत फिर फिर याद आ रही है। असल में कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। उन्हें सरकार की आलोचना के लिए जब कुछ नहीं मिल रहा तो सेना पर ही सवाल उठा दिया। दिलचस्प बात तो ये है कि इस तरह की हरकतें सिर्फ कांग्रेस के विधायक या छुटभय्ये नेता ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर वाले नेता तक कर चुके हैं।

बात पलटने में माहिर विपक्ष

इससे पहले जब भारत सरकार पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन में समय ले रही थी तो यही विपक्ष था जिसने जमकर मोदी सरकार और भाजपा पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेला था और यहाँ तक कहा था कि सरकार कुछ नहीं करेगी। अब जब एक्शन हो चुका है और इस कार्रवाई से पूरे देश को संतुष्टि मिली है तो विपक्ष के नेता यह कह रहे हैं कि युद्ध नहीं होना चाहिए था।

इनकी दोगली बातों में मंजूनाथ का एक और बयान शामिल है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक के लोग पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश हर जगह के नागरिकों के युद्ध के खिलाफ हैं।” साथ ही ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई पर ये कह दिया कि जिन महिलाओं के सामने उनके पतियों को मारा गया यह कार्रवाई उनका दुख नहीं मिटा सकती और यह समाधान नहीं है।

शायद मंजूनाथ ने कर्नाटक के ही शिवमोगा के रहने वाले मंजूनाथ समेत कानपुर के शुभम द्विवेदी, पुणे के संतोष जगदाले और कौस्तुभ गणबोटे के घरवालों की वो खुशी और संतुष्टि का भाव चेहरे पर नहीं देखा जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनके मन में था और उन्होंने इस एक्शन पर सरकार को धन्यवाद कहा था।

एक तरफ नहीं रह पा रहा विपक्ष

अगर मंजूनाथ की बात पर गौर किया जाए तो असल में एक सवाल उन्हीं से पूछा जाना बनता है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर जैसा एक्शन आतंकी हमलों का समाधान नहीं है तो कॉन्ग्रेस के अनुसार समाधान क्या होना चाहिए।

आतंकी जब तब भारत में निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं। भारत के दिल में घुसकर 26/11 के मुंबई हमले कर देते हैं। सीमा की रक्षा करने वाले देश के 40 जवानों को मौत की घाट उतार देते हैं। साथ ही बेखौफ होकर यह सोचते हैं कि भारत कभी कोई एक्शन नहीं ले सकता।

ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई कांग्रेस को क्यों परेशान कर रही है और वह भी तब जबकि इसमें सिर्फ आतंकियों को ही निशाना बनाया गया और दुश्मन देश पाकिस्तान की सैन्य रक्षा प्रणाली को कमजोर करने की कोशिश की गई। आम लोगों को जरा-सा भी हताहत नहीं किया गया।

सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे

मंजूनाथ कोई इकलौते कांग्रेसी नहीं हैं जो ऑपरेशन सिंदूर या सरकार पर सवाल उठा रहे होंं। विपक्ष के राजनेताओं में भारतीय सेना को लेकर कोई न कोई परेशानी होती ही रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ऑपरेशन सिंदूर को भावनात्मक लाभ लेने की का बयान दिया था। उन्होंने यह कहा था कि ऑपरेशन मिशन का नाम सिंदूर रखकर सरकार भावनात्मक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर में क्या सभी आतंकवादी मारे गए हैं? और क्या मोदी सभी आतंकियों को खत्म कर पाएँगे। इसी तरह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता उदित राज को भी इस मिशन के नाम पर ही परेशानी हो गई थी। उन्होंने यह बयान दे डाला था इस मिशन का नाम कुछ और होना चाहिए था क्योंकि यह एक धर्म विशेष को बताता है।

बात यही नहीं रुकती। सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठाने में देर नहीं की थी और इस मिशन का पूरा हिसाब माँग लिया था। इमरान मसूद ने तो उरी में मारे गए जवानों के लिए जवाबी कार्रवाई में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल खड़े कर दिए थे और यह कह दिया था कि पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भारत का मजाक उड़ाता है।

यह कोई पहली बार नहीं है कि जब कांग्रेसियों ने इस तरह की बयानबाजी की हो। पार्टी के बड़े नेता सामने से तो सरकार के काम की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन उनके नीचे बैठे विधायक और राज्य स्तरीय नेता लगातार इस तरह के बयान देकर सेना का मनोबल तोड़ने और लोगों के बीच कायम शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करते रहते हैं।

नीतीश के MLA गोपाल मंडल ने कर दी होली पवित्र : महिला के गाल पर नोट चिपकाया, कहा- रोज लेते हैं चुम्मा, गाया- पानी में बुनका बुनकै छै…

                                               जदयू विधायक गोपाल मंडल (साभार: हिंदुस्तान)
पूरे देश में फगुआ की बयार चल रही है, लेकिन बिहार के सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक गोपाल मंडल पर इसकी खुमारी कुछ ज्यादा ही है। गोपाल मंडल ने होली मिलन समारोह में माइक लेकर ऐसा जोगीरा गा दिया कि लोगों को त्योहार का नशा ही उतर गया। इसके बाद तो उन्होंने सफाई में ऐसा बयान दे दिया कि राजनीतिक गलियारे से लेकर सोशल मीडिया तक में उनकी थू-थू होने लगी।

भागलपुर के गोपालपुर से विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल का होली मिलन दौरान के वीडियो वायरल हो रहे हैं। दरअसल, नवगछिया हाईस्कूल में 10 मार्च को एनडीए के होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस दौरान लोक गायक छैला बिहारी को बुलाया गया था। छैला बिहारी फागुन के माहौल को देखकर गानों से लोगों को सराबोर कर रहे थे।

इसी दौरान गोपाल मंडल स्टेज के पास आए और उस पर चढ़ गए। छैला बिहारी फाग ‘पानी में बुनका बुनकेय छेय भौजी…’ नाम का फाग गा रहे थे। उस दौरान गोपाल मंडल अपनी कमर लचका कर नाचने लगे। इस दौरान आए लोगों ने जमकर सीटियाँ बजाईं तो वे पूरे जोश में आ गए और छैला बिहारी से माइक लेकर जोगीरा गाने लगे। यह जोगीर पूरी तरह अश्लील था। वहाँ मंच महिलाएँ भी थीं।

गोपाल मंडल ने गाया, “भौजी च$$$$ ले भसुरा से….।” इस अश्लील जोगीरा सुनकर मंच में मौजूद महिला डांसर शर्म से पानी-पानी हो गईं। वहीं, पुरुष भी शर्मा गए और उनके समर्थक हँस-हँस कर उनका जोश बढ़ाने लगे। वहीं, एक वीडियो में दिख रहा है कि महिला डांसर स्टेज पर होली गाने पर डांस कर रही होती है। उसके बाद गोपाल मंडल उसका हाथ पकड़कर कमर हिलाने लगते हैं।

इसके बाद उसके कंधे पर अपने दोनों हाथ रखकर जोश में नाचते हैं। इससे पहले जोश में आए गोपाल मंडल का एक महिला डांसर को नोट देने के बजाय उसके गाल पर नोट चिपकाते नजर आए। मीडिया रिपोर्ट में चुम्मा लेने की बात भी सामने आ रही है। जोगारी गाकर और नाचकर मन नहीं भरा तो गोपाल मंडल ने मस्ती में चूर होकर कह दिया, “हम रोज डांस करते हैं और रोज चुम्मा लेते हैं।”

गोपाल मंडल स्टेज पर अपनी नेतागिरी की झलकियाँ पेश कर रहे थे और लोग अपने फोन के कैमरे में इसे कैद कर रहे थे। यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर आया तो लोगों ने उसकी जमकर खिंचाई करनी शुरू कर दी। राजनीतिक गलियारे में भी उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। उन पर बिहार के साथ-साथ राजनीतिक मर्यादा को भी तार-तार करने के आरोप लगने लगे, लेकिन मंडल को फर्क नहीं पड़ा।

अपना बचाव करते हुए गोपाल मंडल ने कहा, “मैं एक कलाकार हूँ। नेता के साथ-साथ अभिनेता भी हूँ। मैं रोज चुम्मा लेता हूँ। बच्ची को आगे बढ़ाने के लिए चुम्मा ले लिया तो क्या हुआ? हम चुम्मा लेते रहते हैं। कभी इसको तो कभी उसको। मैंने बच्ची को चुम्मा दिया और उसका उत्साह बढ़ाया है।” उन्होंने कहा कि जिसको जितना वीडियो वायरल करना है, कर दे। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

गोपाल मंडल के पुराने करनामे

नाचने और अश्लीलता फैलाने का गोपाल मंडल पर आरोप बहुत पुराना है। तीन साल पहले भी उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे डांसर के साथ ‘दिलबर-दिलबर’ और ‘बुलेट पर जीजा’ गाने पर नाच करते हुए दिखे थे। भोजपुरी गाने पर डांसर को नाच करते देख वे अपने आपको रोक नहीं सके और कुर्ता उठाकर नाचने लगे थे। वे बार-बालाओं का हाथ पकड़कर और उन्हें फ्लाइंग किस देकर डांस करते रहे।
वे वही गोपाल मंडल हैं, जो साल 2021 में एक ट्रेन की बोगी में चड्डी और गंजी पहनकर टहलते नजर आए थे। विरोधियों ने आरोप लगाया था कि वे नशे में चूर होकर बदतमीजी कर रहे थे, जबकि गोपाल मंडल का कहना था कि उनका पेट खराब था, इसलिए वे बाथरूम की ओर जल्दी से भाग रहे थे। इसको लेकर एक शख्स ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
गोपाल मंडल पर आरोप लगा था कि चलती ट्रेन में उनकी इस हरकत पर आपत्ति जताने वाले एक यात्री से उन्‍होंने गाली-गलौज भी की थी। हालात बिगड़ने पर RPF को हस्‍तक्षेप करना पड़ा था। यात्रियों के साथ इस दौरान धक्‍का-मुक्‍की भी की थी। बाद में विधायक ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि उनका पेट खराब था और जल्‍दबाजी में शौचालय जाने के दौरान वे तौलिया नहीं लपेट सके। 
गोपाल मंडल नाच-गान में ही नहीं, रंगबाजी में भी अव्वल हैं। अक्टूबर 2023 में वे अस्पताल में रिवॉल्वर लेकर घूमते नजर आए थे। इसको लेकर जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो वो भड़क गए। उन्होंने कहा था, “अरे पिस्तौल तो अभियो है मेरे पास। दिखावे। दिखावे पिस्टल… क्या कहना चाहते हो… रखते हैं पिस्टल… तुम लोग हमारे बाप हो?… भक्क साला, भागो।” गोपाल मंडल के ऐसे कई कारनामे हैं।

अश्लील गानों को लेकर बिहार पुलिस का निर्देश

जदयू विधायक गोपाल मंडल का स्टेज से खुलेआम अश्लील जोगीरा गाना, हाल में जारी किए गए निर्देश की धज्जियाँ उड़ाने वाला है। दरअसल 4 मार्च को बिहार पुलिस मुख्यालय ने द्विअर्थी या अश्लील भोजपुरी गानों को सार्वजनिक रूप से बजाने पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। अश्लील गाना बजाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश सभी क्षेत्रीय IG और DIG को दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने अपने आदेश में कहा था कि आमतौर पर ये देखने में आता है कि सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक या निजी समारोहों में और बस, ट्रक, वैन, ऑटो रिक्शा आदि वाहनों में दोहरे अर्थ वाले अश्लील भोजपुरी गानों को धड़ल्ले से बजाया जाता है। इसका समाज पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे छोटे-छोटे बच्चे गलत दिशा में जाने के लिए प्रेरित होते हैं।
ऐसे अश्लील गानों का सबसे अधिक प्रभाव महिला पर पड़ता है। उनका सार्वजनिक स्थानों पर चलना मुश्किल हो जाता है। पुलिस मुख्यालय की तरफ से आगे कहा गया था कि इस तरह के गीतों को बजाने से महिलाओं की सुरक्षा एवं गरिमा प्रभावित होती है। महिलाएँ लज्जा के साथ-साथ असुरक्षा महसूस करती हैं। इसलिए विशेष अभियान चलाकर ऐसे गाने रोके जाएँ।
इस तरह का बिहार पुलिस की ओर से निर्देश जारी होने के दो दिन बाद ही सत्ताधारी पार्टी के विधायक गोपाल मंडल ने स्टेज पर चढ़कर ना सिर्फ अश्लील गाने गाए, बल्कि अश्लील हरकत की। जिस दौरान गोपाल मंडल ने ऐसी हरकत की, उस समय वहाँ महिलाएँ एवं बुजुर्ग भी शामिल थे। इतना ही नहीं, बच्चे भी थे। अब विपक्षी दल गोपाल मंडल पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

गोपाल मंडल पर होगी कार्रवाई?

गोपाल मंडल जिस समय स्टेज से अश्लील गाने गा रहे थे, उस समय वहाँ एनडीए के जिला स्तर के तमाम महिला-पुरुष नेता मौजूद थे। हालाँकि, किसी ने गोपाल मंडल के इस कारनामे का विरोध नहीं किया। बिहार अश्लील गाने के लेकर पूरे देश में बदनाम है। हालाँकि, अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बॉलीवुड से लेकर तमाम फिल्म इंडस्ट्री में बजते हैं, लेकिन भोजपुरी विशेष रूप से बदनाम है।
ऐसे में जब गोपाल मंडल स्टेज से द्विअर्थी और अश्लीलता की सीमा को पार करते हुए पूरी नग्नता पर उतर कर जोगीरा गाया है, तो क्या बिहार पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया तक पर बिहार से लेकर पूरे देश के लोग इस तरह के सवाल उठा रहे हैं। क्योंकि, चलती ट्रेन में चड्ढी गंजी पहनकर गाली-गलौज करने पर भी उनके खिलाफ FIR हुई, लेकिन आगे क्या हुआ किसी को पता नहींं।
सोशल मीडिया पर कुछ राष्ट्रवादी एवं दक्षिणपंथी समूह के लोग सवाल ये भी उठा रहे हैं कि होली से दो दिन पहले बिहार पुलिस द्विअर्थी एवं अश्लीलता के नाम पर डीजे एवं वाहनों में भोजपुरी गीतों को क्यों रोक रही है? अगर सरकार/पुलिस को अश्लीलता के खिलाफ कार्रवाई करनी ही थी तो होली से बहुत पहले या होली के कुछ दिन बाद भी ये निर्देश दिए जा सकते थे।
सोशल मीडिया के लोगों का कहना है कि दरअसल होली में डीजे पर गाने को रोकने के लिए बिहार पुलिस इस तरह का आदेश जारी की है, जो कि जदयू की मुस्लिम राजनीति से मेल खाती है। कुछ लोगों का यह भी सवाल है कि होली के दौरान बजने वाले गानों को द्विअर्थी कैसे निर्धारित किया जाएगा? उसके लिए बिहार पुलिस क्या मानदंड अपनाएगी, इसको लेकर स्पष्टता नहीं है।
साफ है कि ये पुलिस कर्मी पर निर्भर करेगा कि कौन सा गाना उसे द्विअर्थी या अश्लील लगता है और कौन सही। खैर, जो भी हो अश्लीलता के खिलाफ बिहार सरकार एवं पुलिस का यह कार्य बेहद प्रशंसनीय है, लेकिन लागू करे के समय को लेकर लोगों के मन में आशंका है। वहीं, गोपाल मंडल जैसे विधायक खुले मंच से अश्लील जोगीरा गाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करके बिहार पुलिस संदेश दे सकती है कि ये आदेश आम लोगों के लागू किया गया है, ना कि किसी राजनीतिक लाभ को देखते हुए।
बिहार पुलिस को यह भी चाहिए कि गाने को बजाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाए गानों को लिखने वाले, उसे गाने वाले और उसे रिकॉर्ड करने वाले स्टूडियो के खिलाफ कार्रवाई करे, ताकि बिहार में महिलाओं की गरिमा को सुरक्षित किया जा सके। इससे बिहार पुलिस को अपने संसाधनों का कम-से-कम उपयोग करना पड़ेगा और द्विअर्थी एवं अश्लील गानों पर आसानी से अंकुश भी लग जाएगा।

पश्चिम बंगाल : ‘मुस्लिम राष्ट्र के कुछ आचार-विचार होते हैं’: जिस मुस्लिम महिला की खुलेआम हुई पिटाई उसे TMC विधायक हमीदुल रहमान ने बताया ‘दुष्ट जानवर’; कहाँ है #mob lynching गैंग?

चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान ने इस्लाम का हवाला देकर मुस्लिम महिला की पिटाई का किया बचाव
पश्चिम बंगाल में एक मुस्लिम महिला की खुलेआम पिटाई होने पर #mob lynching गैंग क्यों खामोश है? क्या बंगाल में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री होते मुस्लिम राज स्थापित हो गया है? 

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर में खुलेआम एक भीड़ के सामने एक मुस्लिम महिला की पिटाई की गई। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या राज्य में शरिया कानून लागू हो गया है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि जिस ताजेमुल उर्फ़ JCB ने इस घटना को अंजाम दिया है वो ‘त्वरित न्याय’ के लिए जाना जाता है, पुलिस-कोर्ट तक की उसके सामने कोई कीमत नहीं। वो चोपरा से TMC विधायक हमीदुल रहमान का करीबी है। अब विधायक ने इस पर और निंदनीय बयान दिया है।

BJP और CPI(M) – दोनों ही विपक्षी दलों ने कहा कि ताजेमुल तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता है। वीडियो में मुस्लिम महिला के अलावा एक पुरुष को भी जमीन पर पटक कर पीटे जाते हुए देखा गया। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए कि तृणमूल कांग्रेस के विधायक हमीदुल रहमान ने अपने करीबी का बचाव करते हुए जिस महिला की पिटाई हुई उसे ही ‘दुष्ट जानवर’ कह दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि उक्त महिला की गतिविधियाँ ‘असामाजिक’ थीं।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से उनका या पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC का कोई लेना-देना नहीं है। विधायक हमीदुल रहमान ने इसे गाँव का मसला बताते हुए कहा कि महिला ने भी गलती की है, उसने अपने पति और बेटा-बेटी को छोड़ दिया। चोपरा के विधायक ने कहा कि ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के हिसाब से कुछ संहिता और न्याय होते हैं। हालाँकि, उन्होंने ये भी जोड़ा कि जो हुआ वो बहुत ज़्यादा था और कानून अपना काम करेगा।

अवलोकन करें:-

पश्चिम बंगाल की ‘शरिया अदालत’ : मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे सर झुका चुकी ममता: महिला मुख्यमंत्

फ़िलहाल पुलिस ने आरोपित ताजेमुल को गिरफ्तार कर लिया है। इस्लामपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट जॉबी थॉमस K ने कहा कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। उन्होंने घटना के पीछे जाँच की बात कही है। TMC विधायक हमीदुल रहमान का कहना है कि पीड़िता या उसके पति ने कोई FIR नहीं दर्ज कराई है, केवल मीडिया इसे फैला रही है। उस क्षेत्र में ‘सालिशी सभा’ नाम का कंगारू कोर्ट चलता है।

कोई निकाला गया, कोई निकल गया, कांग्रेस अब 40 सीट बचाएगी दंगाइयों और मोदी की हत्या की धमकी देने वाले किसानों के भरोसे

 सुभाष चन्द्र

इतिहास साक्षी है, सनातन विरोधियों का कोई नामलेवा नहीं। मुग़ल आक्रांताओं का नाम सिर्फ उन ज़ालिमों के नाम पर अपनी रोजी-रोटी कमाने वालों की वजह से सिर्फ भारत में जिन्दा है, लेकिन गंभीरता से देखा जाए तो वह भी अपने पतन की ओर अग्रसर हो चुके हैं। जितना बुरा हाल भाजपा विरोधियों का अब हो रहा है, जिसे देख लगता है, एक/दो लोकसभा चुनावों के बाद लगभग शून्य होने को है। जहां तक कांग्रेस की बात है, इसका पतन तो उसी दिन से शुरू हो चुका था, जिस दिन अध्यक्ष सीताराम केसरी को बाहर पटक कर सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बना दिया था।  

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने असम में अपनी पार्टी के किसी भी विधायक से नहीं मिले थे। असम में उत्तरी करीमगंज से कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने आरोप लगाया है कि असम में एक सप्ताह तक राहुल गाँधी उन पार्टियों से मिलते रहे, जिनका कोई जनाधार नहीं है। उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी को तोहफा दिया है।

लेखक 
पुरकायस्थ ने कहा, “यहाँ हमारे 24 विधायक हैं। वह (राहुल गाँधी) यहाँ 15 पार्टियों से मिले, जो कि INDI गठबंधन में शामिल हैं। इनकी अपनी कोई पहचान नहीं है और लोगों ने इनका नाम तक नहीं सुना है। अब ये पार्टियाँ 2-3 सीट माँग रही हैं। जब इनसे गठबंधन हुआ तब भूपेन बोरा (असम कांग्रेस के अध्यक्ष) ने हमसे कोई सलाह नहीं ली।”

पुरकायस्थ ने राहुल गाँधी को लेकर निराशा व्यक्त की और कहा, “राहुल गाँधी को यहाँ के 24 विधायकों के साथ कम-से-कम आधे घंटे तक बातचीत करनी चाहिए थी। वह यहाँ आठ दिनों तक थे। इस बीच उनकी विधायकों से कोई बातचीत नहीं हुई। आखिरी दिन भी उनकी बस में एक मीटिंग हुई और मुझे नहीं मालूम उसमें क्या बात हुई।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के कई विधायक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के संपर्क में हैं।

लेकिन अब कांग्रेस में बड़ी तेजी से पतझड़ चल रहा है, जिसे देख लगता है कांग्रेस में केवल परिवारभक्त ही रहेंगे। प्रमोद कृष्णनम चले गए प्रधानमंत्री के पीछे क्योंकि उन्हें राम से कोई बैर नहीं था और इसलिए कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया अलबत्ता संसद में कांग्रेस ने कहा भगवान राम कण कण में हैं लेकिन यह बात सोनिया गांधी ने नहीं कही और फिर भी कृष्णम को निकाल दिया। उधर मराठा मिलिंद देवड़ा निकल गए और जाकर मिल गए एकनाथ शिंदे से और बाबा सिद्दीकी निकल कर जा मिले अजित पवार से।

महाराष्ट्र के एक दिग्गज अशोक चह्वाण 40 साल कांग्रेस की सेवा करने के बाद निकल कर भाजपा में मिल गया। उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि अशोक को लेकर भाजपा ने सैनिकों का अपमान किया है जबकि यही चह्वाण कल उद्धव का मंत्री था। तहसीन पूनावाला कह रहा है- उद्धव जी, संजय राउत की जुबान पर लगाम लगाइए जिसकी वजह से महाविकास अघाड़ी सरकार ख़त्म हुई थी। अभी खबरे निकल कर आ रही हैं कि कमलनाथ भी “हाथ” छोड़ कर अपने हाथ में “कमल” पकड़ेंगे विवेक तनखा के साथ।

कुछ दिन पहले एक तरफ तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस को पूछ लिया था कि 40 सीट भी बचा सकते हो क्या और दूसरी तरफ खड़गे राज्यसभा में बोल गए NDA 400 पार और आज जिस तरह 5 बार रायबरेली से लोकसभा सांसद रह कर सोनिया गांधी भाग खड़ी हुई और राजस्थान से राज्यसभा के लिए नामांकन भर दिया, उसे देख कर साफ़ लगता है कांग्रेस मान चुकी है कि इस बार “40 पार” भी नहीं हो सकती।

अब कहा यह भी जा रहा है कि रायबरेली से दादी की नाक वाली “लड़की हूं लड़ सकती हूं” प्रियंका वाड्रा को खड़ा किया जाएगा। प्रमोद कृष्णम की माने तो प्रियंका पार्टी में अपमानित है और सोनिया का खुद रायबरेली से भागना प्रियंका को सीट देकर कहीं प्रियंका को “बलि की बकरी” बनाने की साजिश तो नहीं है क्योंकि जब माँ ही नहीं जीत सकती तो बेटी की क्या औकात जीतने की।

कांग्रेस का अब बस भरोसा है तो केवल मुस्लिम वोटरों पर है जिनके दम पर हल्द्वानी को आग लगाईं गई और ऐसा देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा। दूसरा भरोसा है आतंकी धमकी देने वाले कथित किसानों पर जो खुलकर कह रहे हैं कि अबकी मोदी पंजाब आया तो जिंदा वापस नहीं जाएगा। कांग्रेस और केजरीवाल को ऐसे ही लोगों का सहारा है। ये धमकी देने वाले पंजाब के हैं जहां भगवंत मान बैठा है। पहले चन्नी मोदी के लिए महामृत्युंजय जाप कराने की बात करता था और अब केजरीवाल का मान तो गरुण पाठ ही कराने के चक्कर में है मोदी के लिए।

कांग्रेस को रोज ऐसे सदमें मिल रहे हैं जो बर्दाश्त नहीं हो रहे। पहले श्री राममंदिर से परेशानी हुई और फिर उम्मीद से थे कि क़तर वाले 8 पूर्व सैनिक फंसे रहेंगे लेकिन वो सभी छूट गए। कल तक सारे कांग्रेसी और उसके दलाल पत्रकार मोदी को कोस रहे थे लेकिन आज सजा माफ़ी पर ख़ुशी तो जता रहे हैं लेकिन मोदी सरकार को श्रेय नहीं दे रहे।

और आज इस्लामिक देश UAE में मोदी ने हिन्दू मंदिर का उद्घाटन कर दिया। अभी 19 को कल्कि धाम का भी उद्घाटन करना है।

बिहार हाथ से निकल गया और कल तक हिन्दुओं को गाली बकने वाला स्वामी प्रसाद मौर्य का अब सपा से मोह भंग हो रहा है क्योंकि उसे लगता है भेदभाव हो रहा है। महासचिव पद छोड़ा है अभी, कल पार्टी छोड़ेगा और घुसेगा बसपा में क्योंकि ऐसे लोगों के ठिकाने बड़े limited होते हैं।लेकिन सनातन पर कटाक्ष करने के कारण मायावती भी शायद घास न डाले।  

कुल मिला कर भगदड़ मची हुई है और यह तमाशा देख कर कांग्रेस देश भर में कुछ भी गड़बड़ कर सकती है जिसके लिए विशेषज्ञ राहुल “कालनेमि” बैठा है। 

दिल्ली के MLA को अब मिलेंगे 7 करोड़, RRTS और अदालत में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड नहीं, केजरीवाल को फिर सुप्रीम कोर्ट से फटकार

दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध भ्रष्टाचार के विरुद्ध 370 भ्रष्टाचार आरोपों से जनता को भ्रमित और मुफ्त की रेवड़ियों बाँट कर सत्ता हथियाकर  मुख्यमंत्री बने स्वयं अरविन्द केजरीवाल और इनकी मण्डली भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। 

लोकसभा चुनाव 2024 में अब चार महीने का समय रह गया है वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब एक साल है। इसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली में विकास के काम के लिए दिल्ली के विधायकों को मिलने फंड को 3 करोड़ रुपये बढ़ाकर अब 7 करोड़ दिया गया है। अब दिल्ली के विधायकों को विधानसभा के विकास कार्यों के लिए सात करोड़ रुपये मिलेंगे। यह पूरे देश में सबसे ज्यादा है। दिल्ली में 70 विधानसभा हैं और हर विधायक 7 करोड़ रुपये खर्च करेंगे यानि दिल्ली के विकास पर विधायकों द्वारा 490 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बहरहाल, सवाल यह है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने विधायकों को खर्च करने के लिए करीब 500 करोड़ दे रहे हैं लेकिन रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के लिए उनके पास 415 करोड़ रुपये फंड नहीं था। इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने फटकार भी लगाई थी। लेकिन केजरीवाल इससे भी नहीं सुधरे और दिल्ली जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे के लिए फंड देने में आनाकानी करते रहे। इस मुद्दे पर भी कुछ ही दिन पहले 11 दिसंबर को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को जमकर लताड़ लगाई।

केजरीवाल ने कभी कहा था- एमपी, एमएलए फंड नहीं होना चाहिए
कभी केजरीवाल ने खुद ही कहा था कि एमपी, एमएलए फंड नहीं होना चाहिए। कोई बड़ी लालबत्ती नहीं होनी चाहिए उसके पास। कोई बड़ा बंगला नहीं होना चाहिए उसके पास। वो एक कमरे के फ्लैट में रहे आम आदमी की तरह। कोई सिक्यूरिटी नहीं होनी चाहिए, सिक्यूरिटी जनता के लिए होनी चाहिए। इन नेताओं के लिए नहीं होनी चाहिए। उसका जितना कोटा है वो सब कैंसिल होना चाहिए। जबकि सच्चाई ये है कि आज वह खुद शीशमहल में रहते हैं।

विधायक फंड 500 करोड़, विज्ञापन फंड 500 करोड़, विकास के लिए फंड नहीं
दिल्ली में 70 विधानसभा हैं और हर विधायक 7 करोड़ रुपये खर्च करेंगे यानि दिल्ली के विकास पर विधायकों द्वारा 490 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी केजरीवाल सरकार ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट (RRTS प्रोजेक्ट्स) के लिए अपने हिस्से का 400 करोड़ रुपया देने हाथ खड़े कर दिए थे। उसने कहा था फंड की कमी है। जब सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा तो उसने में विज्ञापन में खर्च का ब्योरा मांगा। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था क‍ि 2020 से 2023 तक विज्ञापन के लिए 1073.16 करोड़ रुपया खर्च किया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था कि विकास के लिए फंड जारी करें नहीं तो विज्ञापन फंड रोक दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामे में इस खर्च का बचाव करते हुए कहा कि सरकारी नीतियों के प्रचार के लिए ये खर्च वाजिब और किफायती है। दिल्ली सरकार का विज्ञापन बजट सालाना औसतन 500 करोड़ रुपये है।

केजरीवाल सरकार ने 3 करोड़ बढ़ाया MLA फंड, अब 7 करोड़ मिलेंगे
राजधानी दिल्ली में विधायक निधि (Delhi MLA Fund) को चार से बढ़ाकर सात करोड़ रुपये कर दिया गया है। दिल्ली सरकार ने विधायक निधि बढ़ाने का फैसला 15 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के पहले दिन किया। दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के निर्देश पर एमएलए फंड को 4 करोड़ से बढ़ाकर 7 करोड़ कर दिया गया है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी विधायकों को मौजूदा 4 करोड़ से 3 करोड़ रुपये अधिक दिए जाएंगे। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे विधायकों को अपने स्थानीय क्षेत्रों के विकास के लिए अधिक कार्य कराने में मदद मिलेगी।

केजरीवाल के पास अदालतों में बुनियादी ढांचा के लिए फंड नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जिला कोर्ट्स में बुनियादी ढांचे के लिए धन उपलब्ध कराने के प्रति उदासीन रवैये के लिए दिल्ली सरकार की आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को केजरीवाल सरकार से कहा है कि यह क्या हो रहा है? आपकी सरकार क्या कर रही है? आप दिल्ली हाईकोर्ट को कोई फंड नहीं देना चाहते? जज प्रशिक्षण ले रहे हैं और कोई कोर्ट रूम नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दिल्ली सरकार को 14 दिसंबर तक निचली अदालत के बुनियादी ढांचे के लिए धन जारी करने का निर्देश दिया है।

अदालतों में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को मंजूरी 2021 में, मगर फंड नहीं मिला
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा क‍ि मार्च 2021 तक चार में से तीन परियोजनाओं के लिए मंजूरी दे दी गई थी। फिर भी, परियोजनाओं के लिए धन जारी नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 5 दिसंबर तक हाईकोर्ट की स्टेट्स रिपोर्ट में 887 न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या, 15 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों और 813 अधिकारियों की संख्या को स्वीकृति दी गई है।

दिल्ली में 118 कोर्ट रूम और जजों के लिए 114 न्यायालय कक्षों की जरूरत
कोर्ट ने कहा क‍ि स्वीकृत संख्या को समायोजित करने के लिए 118 कोर्ट रूम की आवश्यकता थी और कार्य करने वाले जजों के 114 न्यायालय कक्षों की जरूरत थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धनराशि स्वीकृत करने में देरी खेदजनक है और दिल्ली ज्यूडिशियरी के प्रति दिल्ली सरकार के ढुलमुल रवैये का कोई औचित्य नहीं है। सीजेआई ने सरकार से सवाल किया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट को फंड क्यों नहीं दे रही है?

उपराज्यपाल ने मंगाई फाइल, कैलाश गहलोत से कानून विभाग वापस लिया
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने शहर में न्यायिक बुनियादी ढांचे और प्रशासन से संबंधित फाइल मंगाई थीं,क्योंकि ये फाइल कई महीनों से कानून मंत्री कैलाश गहलोत के पास लंबित थीं। प्रधान सचिव (विधि और न्याय) की एक रिपोर्ट में 4 दिसंबर को 18 ऐसी फाइल उपराज्यपाल सचिवालय के संज्ञान में लाई गईं थी जो लंबित थीं। उपराज्यपाल के फाइल मंगाते ही केजरीवाल ने 8 दिसंबर को कैलाश गहलोत से कानून विभाग का प्रभार वापस लिया और कानून विभाग आतिशी को सौंप दिया। यह मामले को लटकाने की चाल है। क्योंकि अब आतिशी कह सकती है कि उसे तो अभी इस विभाग की जिम्मेदारी मिली है, वह अभी फाइलों को देख रही है।

RRTS प्रोजेक्ट के लिए फंड नहीं देने पर केजरीवाल को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के लिए दो महीने के अंदर 415 करोड़ रुपए देने का निर्देश दिया है। 24 जुलाई 2023 को सुनवाई के दौरान जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा- आपका एक साल का विज्ञापन बजट उस पैसे से ज्यादा है, जो आप दे रहे हैं। बेंच ने यह भी कहा कि अगर सरकार पिछले 3 साल में विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपए खर्च कर सकती है, तो निश्चित रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी फंड दिया जा सकता है। इसके पहले हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कहा था कि वह प्रोजेक्ट लिए पैसा नहीं दे सकती। जिसके बाद अदालत ने 2 हफ्ते में विज्ञापनों पर खर्च का हिसाब मांगा था। कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर प्रोजेक्ट के लिए पैसे नहीं दिए तो विज्ञापन का बजट सीज करने का आदेश भी दिया जा सकता है।

केजरीवाल के पास विकास के लिए धन नहीं, विज्ञापन के लिए पैसे बहाए
दिल्ली सरकार के आरआरटीएस परियोजना के लिए धन देने में असमर्थता जताने के बाद जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने केजरीवाल सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो हफ्ते के अंदर फंड्स की गणना की जानकारी के साथ एफिडेविट मुहैया कराएं। पीठ ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने ‘कॉमन प्रोजेक्ट’ के लिए कोष देने में असमर्थता जताई है। चूंकि इस परियोजना में धन की कमी एक बाधा है। इसलिए हम दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार से एक हलफनामा दाखिल करने को कहते हैं, जिसमें विज्ञापन के लिए खर्च किए गए धन का ब्योरा दिया जाए क्योंकि यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। इसमें पिछले वित्तीय वर्षों का ब्योरा दिया जाए।

‘हिन्दू मंदिरों में लूटी जाती है बहन-बेटियों की इज्जत, होती है हत्या’: केजरीवाल के विधायक ने फिर उगला ज़हर, भड़काते हुए कहा – वहाँ जाना बंद करो

अरविंद केजरीवाल के विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने हिन्दू मंदिरों पर उगला ज़हर
मुफ्त रेवड़ियों के लालच में 'हनुमान भक्त' अरविन्द केजरीवाल पार्टी की पार्टी को वोट देने वाले हिन्दुओं शर्म करो , देखों  इसका विधायक किस तरह मंदिरों जाने वालों के खिलाफ जहर उगल रहा है, और पार्टी खामोश है। अभी 5 राज्यों में हुए चुनावों में देखा कि पांचों राज्यों ने मुफ्त की रेवड़ियों को ठोकर मार दी। NOTA से भी कम वोट मिले, यानि लोगों ने घास तक नहीं डाली। इसका मतलब साफ है कि जलसे और जुलुस में जो भीड़ देखी, सब पैसे देकर लाए हुए थे। पार्टी समर्थक नहीं। दूसरे, NOTA से भी कम वोट मिलने का यह भी अर्थ निकाला जा सकता है कि स्वयं पार्टी उम्मीदवार और उसके परिवार ने भी वोट नहीं दिया। 

‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म और हिन्दू मंदिरों के विरुद्ध एक बार फिर जहर उगला है। राजेन्द्र पाल का कहना है कि मंदिरों में जाने पर लोगों की हत्या होती है और बहन बेटियों की इज्जत लूटी जाती है। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

दिल्ली सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “आप ऐसी चीजों में भरोसा मत करो जो आपको नुकसान पहुँचाती हो। आप एक बात बताइए, अगर कहीं मंदिर में जाने से हमारे लोगों की हत्या होती हो, अगर मूर्ति छू लेने से हमारे युवाओं की हत्या हो गई हो, तो आप ऐसी जगह क्यों जाते हो जहाँ आपका अपमान हो।”

आगे राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में आगे कहते हैं, “जहाँ आपकी बहन-बेटी की इज्जत लूटी जाए, जहाँ आपका क़त्ल कर दिया जाए, जहाँ अपमान हो वहाँ जाना बंद कर दो।” अब राजेंद्र गौतम के लगभग 30 सेकंड इस वीडियो पर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो हरियाणा के सोनीपत जिले का है जहाँ वह लहराड़ा गाँव में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस प्रश्न उठाया है कि आखिर खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम को अपनी पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं कर रहे हैं जो कि लगातार हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलते आए हैं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया हो या हिन्दू धर्म का अपमान किया हो। इससे पहले वह कई मौकों पर ऐसा ही कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में एक हिन्दू विरोधी कार्यक्रम में शामिल होने के कारण उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था।

अक्टूबर 2022 में AAP नेता ने झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10,000 हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था – “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

भगवा वस्त्र पहने हुए व्यक्ति ने इस शपथ को दिलाते हुए कहा था, “मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”

कार्यक्रम के दौरान, AAP के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और उस व्यक्ति के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। उनके इस वीडियो के कारण केजरीवाल को गुजरात में काफी विरोध झेलना पड़ा था। राजेन्द्र पाल गौतम ने इसके पश्चात इस्तीफ़ा दिया था।

नवम्बर 2022 में राजेन्द्र पाल गौतम ने भारत में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने को लेकर भी बयान दिया था। प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की एंकर आरफा खान शेरवानी के साथ के इंटरव्यू में राजेन्द्र पाल ने कहा था, “इस देश के 110 करोड़ लोग अनुसूचित जाति/जनजाति समाज से हैं, वो सभी 5-6 वर्षों में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। उसके बाद देखते हैं कि कौन बहुसंख्यक होता है।”

जनवरी 2023 में एक कार्यक्रम में राजेन्द्र पाल ने श्रीरामचरितमानस पर भी विवादित बयान दिया था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह कहते हुए दिखते हैं, “क्या रामचरितमानस में नहीं लिखा है ‘ढोल गँवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी।’ वो व्याख्या कर रहे हैं कि ताड़न का मतलब देखना है, जबकि क्लीयर है कि ताड़न का मतलब पीटना। यदि इसका मतलब देखना ही है तो क्या नारी को घूरना चाहिए? क्या पीटना चाहिए? आपके धर्मशास्त्र हमें इंसान का दर्जा देने को तैयार नहीं है।”

राजेन्द्र पाल गौतम लगातार ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं जहाँ हिन्दू धर्म, मंदिरों और ग्रन्थों के विरुद्ध अपमानजनक बातें की जाती हैं। अब मंदिरों में बलात्कार और हत्या वाले वीडियो को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल या पार्टी की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं सामने आया है। राजेन्द्र पाल गौतम ने भी अब तक इस बयान पर माफ़ी नहीं माँगी है।


तेलंगाना : ‘T राजा सिंह का मर्डर कर दूँगी’: असदुद्दीन ओवैसी के सामने मुस्लिम महिला ने BJP विधायक को धमकी

                             असदुद्दीन ओवैसी के सामने महिला ने की T राजा सिंह की हत्या की बात
तेलंगाना में 30 नवंबर, 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सत्ताधारी BRS, हैदराबाद में प्रभाव रखने वाली BRS, विपक्षी कॉन्ग्रेस और उभरती हुई भाजपा – सब मैदान में डटे हुए हैं। चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने अपने विधायक T राजा सिंह का निलंबन वापस लेकर उन्हें हैदराबाद के गोशमहल से प्रत्याशी बनाया। वहीं असदुद्दीन ओवैसी अपना हैदराबाद का गढ़ मचाने में लगे हैं। वहाँ उनके 7 विधायक हैं। साथ ही वहाँ की नगरपालिका पर भी उनकी ही पार्टी का कब्ज़ा है।

असदुद्दीन ओवैसी के भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी हिन्दुओं के खिलाफ घृणात्मक बयान देने के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने हिन्दुओं को धमकाते हुए 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की धमकी दी थी। वहीं अब असदुद्दीन ओवैसी का एक नया वीडियो सामने आया है। चुनाव प्रचार के दौरान के इस वीडियो में एक महिला विधायक टी राजा सिंह की हत्या की बात कह रही है। महिला ओवैसी को देख कर बार-बार कहती है, “शेर माँ का बच्चा है ये।”

इसके बाद वो कहती है, “दुश्मनों को खत्म करो। मुसलमानों की दुआ है बेटा आपलोगों को। सारी दुनिया आपलोगों के पीछे है। उस मजलूम कमीने, राजा सिंह के मोहल्ले से मुझे खड़ा करो। मैं उसका मर्डर कर दूँगी।” असल में असदुद्दीन ओवैसी उस महिला के घर पर वोट माँगने पहुँचे थे। खास बात ये है कि इस वीडियो में हत्या की धमकी वाले बयान पर उस महिला को ओवैसी टोकते भी नहीं हैं। महिला उनके कामयाब होने की दुआ भी देती है।

उधर राजा सिंह भी गोशमहल से बतौर विधायक हैट्रिक लगाने के लिए तैयार हैं। उनके खिलाफ BRS ने नंदकिशोर व्यास को उतारा है। राजा सिंह ने तेलंगाना में भाजपा सरकार बनने की बात भी कही है। उन्होंने ओवैसी भाइयों पर केवल अपनी संपत्ति बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इनके कारण पुराने हैदराबाद शहर के मुस्लिम पिछड़े ही रह गए। उन्होंने कहा कि ओवैसी मुस्लिमों के वोट बीआरएस को बेचते हैं। राजा सिंह ने कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा।

‘राम मंदिर में बम ब्लास्ट कर मुस्लिमों को फँसाएँगे’: उद्धव के बाद कांग्रेस विधायक ने उगला जहर, हिंदू घृणा के पीछे INDI गठबंधन की मंशा है क्या?

राम मंदिर में क्यों बम ब्लास्ट चाहते हैं कॉन्ग्रेस नेता? (फोटो साभार: X/@ChampatRaiVHP)
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता मुखिया उद्धव ठाकरे के अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर को लेकर दिए गए बयान के बाद एक और कांग्रेसी नेता ने बम धमाके की आशंका जताई है। कर्नाटक के कांग्रेस विधायक बी आर पाटिल ने कहा है कि राम मंदिर पर लोकसभा चुनावों से पहले हमला हो सकता है। बी आर पाटिल का यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी द्वारा साझा किया गया है। बीआर पाटिल कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की अलंद सीट से विधायक हैं। बी आर पाटिल के इस विवादित बयान के पश्चात कांग्रेस की राम मंदिर को लेकर मंशा के ऊपर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

बी आर पाटिल इस वीडियो में कहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को जिताने के लिए वह लोग (भाजपा) राम मंदिर में धमाका करेंगे और इसका दोष मुस्लिमों पर डाला जाएगा जिससे हिन्दू वोट इकट्ठा हो। ऐसे नेता इस तरह के बयान देकर ये जताना चाहते हैं कि जिन भी आतंकी घटनाओं में अपराधी मुस्लिम निकल जाते हैं, असल में उन्होंने कुछ नहीं किया होता है और वो ‘फँसाए गए’ होते हैं। याद कीजिए, पुलवामा में जिस आतंकी हमले में 40 CRPF जवान बलिदान हो गए थे, उन्हें लेकर भी इसी तरह की बातें की गई थीं।

कर्नाटक भाजपा ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है, “कांग्रेस के लोग हिंदुत्व के मूल पर प्रश्न खड़ा कर रहे थे और अब उनके निशाने पर राम मंदिर है। राम मंदिर को अस्थिर करके हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवा कर सरकार को दोष देने के लिए कांग्रेस ने पहले ही मैदान तैयार कर लिया है।”

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर बन रहे श्रीराम मंदिर में जनवरी 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी और इसके लिए भव्य कार्यक्रम के आयोजन की भी योजना है। इस बात की पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री मोदी 14 जनवरी, 2024 (मकर संक्रांति) के दिन मंदिर का लोकार्पण कर देंगे। राम मंदिर के शिलान्यास में प्रधानमंत्री मोदी के शामिल होने को ओवैसी जैसे नेताओं ने सेक्युलरिज्म की पराजय और हिंदुत्व की विजय बताया था।

जहाँ राम मंदिर देश के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का केंद्र है वहीं विपक्षी दल इसे राजनीति में खींचने में जुटे हैं और मंदिर के लिए अनिष्ट की भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे ने कहा था कि राम मंदिर के उद्घाटन के पश्चात करोड़ों हिन्दू पूरे देश से दर्शन के लिए जाएँगे और इस दौरान कोई गोधरा जैसा कांड हो सकता है। आखिर क्यों ये नेता चाहते हैं कि राम मंदिर की शुरुआत खून बहने से हो? क्या ऐसा कर के वो उन आतंकियों को क्लीन चिट नहीं दे रहे, जिन्होंने गुजरात के अक्षर धाम मंदिर से लेकर वाराणसी के संकट मोचन मंदिर तक में हमले कर कइयों का खून बहाया।

हालाँकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस या उसके सहयोगी दल, जो कि अब I.N.D.I. गठबंधन में शामिल हैं, राम मंदिर को लेकर अड़ंगा लगा रहे हों। हाल ही में DMK नेता उदयानिधि स्टालिन द्वारा सनातन को डेंगू-मलेरिया बताना और इसे खत्म करने की बातें करना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। सोचने वाली बात ये है कि राम मंदिर के उद्घाटन की चर्चाओं के बाद ही इस तरह के बयान आने क्यों शुरू हुए? राम मंदिर के लिए पूरे देश ने चंदा दिया, फिर इन नेताओं को क्यों दिक्कत हो रही?

कांग्रेस राम मंदिर निर्माण के लिए शुरुआत से ही समस्याएँ पैदा करते आई है। जहाँ जवाहर लाल नेहरू ने गर्भगृह से मूर्तियाँ हटवाने के लिए दबाव डाला था तो वहीं नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान पूजा स्थल अधिनियम लाया गया था। इसके तहत 1947 तक जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखने का कानून बनाया गया। कई मंदिरों को ध्वस्त कर उन्हें मस्जिदों में तब्दील किया गया था। इस कानून से मंदिरों को मुक्त कराए जाने के अभियान को धक्का लगा।

इसके अलावा कांग्रेस ने ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा था कि राम काल्पनिक हैं। कांग्रेस नेता श्रीराम ही नहीं बल्कि माता सीता पर भी भद्दे भद्दे बयान देते आए हैं। गुजरात कांग्रेस के नेता भरत सिंह सोलंकी ने कहा था कि राम मंदिर के लिए लाई गई ईंटों पर कुत्ते पेशाब करते हैं। रामसेतु को भी काल्पनिक बताते हुए DMK के मुखिया रहे करुणानिधि ने भी ये पूछा था कि भगवान श्रीराम को किस इंजीनियर कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री मिली?

बयान देने के अलावा कांग्रेस कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने राम मंदिर के लिए धन संग्रह को लेकर चलाए गए अभियान का भी मजाक उड़ाया था। पवन बंसल ने कहा था कि उनसे राम मंदिर को लेकर चंदा माँगा गया था लेकिन उन्होंने नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं घर में हिन्दू हूँ केवल बाहर मैं सेक्युलर हो जाता हूँ। मंदिर उद्घाटन के बाद लोकसभा चुनाव भी होना है, ऐसे में इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर हिन्दू विरोधी बयानबाजी और बढ़ती हुई दिखे।

वर्ष 2002 में अयोध्या से गुजरात लौट रही कारसेवकों की ट्रेन पर गोधरा शहर में मुस्लिम भीड़ ने हमला कर के दो डिब्बों में आग लगा दी थी जिसमें 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी। मरने वालों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। हत्यारों में मुस्लिम भीड़ थी, फिर आज ‘भाजपा राम मंदिर में बम ब्लास्ट करवाएगी’ जैसी बातें कर के उन्हें क्लीन चिट नहीं दे रही? खास बात ये है कि कांग्रेस की संगत में जाकर उद्धव ठाकरे जैसे नेता भी ऐसी भाषा बोल रहे हैं, जो पहले कट्टर हिंदुत्व का चोला ओढ़ कर संविधान से सेक्युलर शब्द ही हटाने की बात करते थे।

बंगाल : ममता बनर्जी द्वारा विधायक-मंत्रियों की 40000 रूपए बढ़ाई सैलरी: कर्मचारियों की DA बढ़ाने की माँग पर बोलीं- मेरा सिर काट लो

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के विधायकों और मंत्रियों के वेतन में 40,000 रुपए की मासिक वृद्धि का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद अब बंगाल के विधायकों को हर महीने 50,000 रुपए वेतन के रूप में मिलेंगे। वहीं, मंत्रियों का मासिक वेतन 51,000 रुपए हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (7 सितंबर 2023) को विधायकों एवं मंत्रियों को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन यह सौगात दी। विधायकों का वेतन बढ़ाने का एलान करते हुए सीएम ममता ने कहा कि देश में सबसे कम बंगाल के विधायकों का वेतन था।

दरअसल, बंगाल के विधायकों को हर महीने वेतन के रूप में 10,000 हजार रुपए मिलते हैं। वहीं, राज्य मंत्रियों को यह मासिक वेतन 10,900 रुपए मिलते हैं, जबकि पूर्ण प्रभार वाले मंत्रियों को 11,000 रुपए वेतन मिलते हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एलान के बाद विधायकों का वेतन बढ़कर 50,000 रुपए महीना हो गया है। वहीं, राज्य मंत्रियों का वेतन 50,900 रुपए महीना और पूर्ण प्रभार वाले मंत्रियों का वेतन 51,000 रुपए हो जाएगा।

कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और विधायकों को मासिक वेतन के अलावा जो अन्य भत्ते मिलते थे, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के वेतन में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। ममता का कहना है कि वह लंबे समय से वेतन नहीं ले रही हैं। इसलिए इसमें संशोधन की जरूरत नहीं है।

राज्य के विधायकों को वेतन, भत्ते और समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए अब तक कुल मासिक 81,000 रुपए मिलते थे। बढ़ोतरी के बाद अब से उन्हें कुल एक लाख 21 हजार रुपए मिलेंगे। इसी तरह मंत्रियों को मिलने वाला कुल मासिक भुगतान 1.10 लाख रुपए से बढ़कर लगभग 1.50 लाख रुपए प्रतिमाह हो जाएगा।

ममता बनर्जी ने राज्य के मंत्रियों और विधायकों का वेतन तो बढ़ा दिया, लेकिन राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा लंबे से महंगाई भत्ते में की जा रही वृद्धि की माँग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। राज्य सरकार के कर्मचारी लंबे समय से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर बढ़े हुए महंगाई भत्ते और एरियर की माँग कर रहे हैं।

मार्च 2023 में बंगाल के सरकारी कर्मचारियों ने महंगाई भर्ता और एरियर की माँग में बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन किया था। तब ममता बनर्जी ने कहा था, “आप (आंदोलनकारी सरकारी कर्मचारी) कितना चाहते हैं? आपको कितना संतुष्ट करेगा? आप मेरा सिर काट दें, लेकिन केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता नहीं दे पाऊँगी।”

राजस्थान शर्मनाक पेशाब कांड: गहलोत सरकार के कांग्रेस विधायक गोपाल मीणा ने दलित से जूते चटवाए

राजस्थान में अभी तक तो दलित बेटियों के साथ दुष्कर्म, दलितों के खिलाफ आपराधिक कृत्य के मामले ही सामने आ रहे थे। लेकिन अब दलित के खिलाफ एक ऐसा शर्मनाक कृत्य सामने आया है, जिससे मानवता भी शर्मसार हो जाएगी। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि यह अमानवीय कृत्य करने वाला कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस का ही विधायक है। इस कांग्रेसी विधायक ने न सिर्फ जमीन के विवाद में
एक दलित का अपहरण करवाकर उसकी जीभ से अपने जूते चटवाए, बल्कि उसकी शह पर डिप्टी एसपी ने दलित के मुंह पर पेशाब तक कर दिया। जिस पुलिस को दलित की रक्षक बनना था, वो कांग्रेस विधायक की दरबारी बनकर भक्षक की भूमिका निभाने लगी। इतना ही नहीं इस दुष्कृत्य के बाद पुलिस ने दलित की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की और इसके लिए उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

 कांग्रेस विधायक गोपाल मीणा पर जीभ से जूते चटवाने का आरोप

कांग्रेस की गहलोत सरकार का यह मामला कहीं सुदूर गांव-धाणी का नहीं है, बल्कि जयपुर जिले का ही है। यहां के जमवारामगढ़ इलाके में एक दलित ने आरोप लगाया कि उसका अपहरण करके उसे पीटा गया। यहां तक कि नेता के इशारे पर डिप्टी एसपी शिवकुमार भारद्वाज ने उसके मुंह पर पेशाब तक कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक गोपाल मीणा ने उनसे जूते चटवाए। कोर्ट के आदेश के बाद विधायक और डिप्टी एसपी समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विधायक गोपाल मीणा का कहना है कि उसका मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। ये जमीन से जुड़ा विवाद है। आरोप तो कोई भी लगा सकता है। मामले की जांच में दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा।
पुलिस वालों ने ही किया किडनैप, विधायक के घर मारपीट कर पेशाब किया
दलित पीड़ित जिसकी उम्र करीब पचास साल है, ने पुलिस को बताया कि गांव टोडालडी आंधी में वह जमीन की सार-संभाल करता है। 30 जून दोपहर करीब 1 बजे वह पत्नी और साथी के साथ खेत पर काम कर रहा था। अचानक पुलिस वाले आए और जबरदस्ती गाड़ी में पटककर किडनैप कर एमएलए गोपाल मीणा के घर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद कमरे में आए पुलिसकर्मियों ने उसे नीचे पटक दिया और गालियां देते हुए उसके साथ खूब मारपीट की।
जमवारामगढ़ के राजा कांग्रेस विधायक मीणा को नजराना क्यों नहीं दिया
पीड़ित के मुताबिक वह मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन जालिम बने पुलिस वालों ने उसकी एक न सुनी। उसके काफी देर गिड़गिड़ाने के बाद डिप्टी एसपी शिव कुमार भारद्वाज ने उसके मुंह पर पेशाब कर दिया। इसके साथ ही उसने धमकी भरे लहजे में कहा कि जमवारामगढ़ के राजा गोपाल मीणा को बिना नजराना दिए टोडालडी में तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई खेत में आने की। भारद्वाज ने मारपीट कर उसे धमकाया कि एमएलए की अवहेलना करने का परिणाम तूने देख लिया है। उसे फिर हॉल में ले गए।
कांग्रेस की पूर्व विधायक और पूर्व डीजी की जमीन से जुड़ा है मामला
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक विधायक गोपाल मीणा का कहना है कि मामला पूर्व डीजी नवदीप सिंह और उनकी पत्नी परम नवदीप की जमीन से जुड़ा है। ये लोग मुझ पर दबाव बनवाकर जमीन पर कब्जा दिलवाना चाहते थे। मैं पीड़ित को नहीं जानता। विधायक पर आरोप होने के चलते मामले की जांच के लिए सीबी सीआईडी को सौंपा गया है। सीबी सीआईडी अब दलित के अपहरण, मारपीट, मुंह पर पेशाब करने और जूते चटवाने के आरोपों की जांच कर रही है।
पुलिस ने गुहार नहीं सुनी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब हुआ केस दर्ज
पीड़ित ने बताया है कि उसने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस नेताओं के दबाव के चलते पुलिस ने उसका केस ही दर्ज नहीं किया। पुलिस के बड़े अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी मामला केस दर्ज नहीं किया गया। जिसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट के माध्यम से जमवा रामगढ़ थाने में केस दर्ज करवाया गया है। पीड़ित व्यक्ति का कहना है कि वह डर की वजह से अब तक चुप रहा। केस दर्ज हो जाने के बाद उसने मीडिया के सामने अपनी व्यथा रखी और कांग्रेस विधायक और डिप्टी एसपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
खुली पुलिस की पोल, पीड़ितों के केस दर्ज करने में ऐसे करती है टालमटोल
पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने कांग्रेस विधायक और डिप्टी एसपी समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला जून है। एक ओर राज्य सरकार दावा करती है कि उसने हर शिकायत को दर्ज करने के आदेश दिए हुए हैं, इसलिए राज्य में अपराध ज्यादा नजर आते हैं। दूसरी ओर इस केस में साफ हो गया कि पुलिस किस तरह मजबूर लोगों का केस ही दर्ज नहीं करती है। यह मामला चूंकि कांग्रेस विधायक और पुलिस से संबंधित था, इसलिए पुलिस टालमटोल करती रही। हैरानी की बात यह भी है कि कांग्रेस विधायक मीणा ने जमीनी विवाद को जिससे संबंधित बताया है, वो भी कांग्रेस की सांगरिया क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं। उनके पति एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं।