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पश्चिम बंगाल : ‘मुस्लिम राष्ट्र के कुछ आचार-विचार होते हैं’: जिस मुस्लिम महिला की खुलेआम हुई पिटाई उसे TMC विधायक हमीदुल रहमान ने बताया ‘दुष्ट जानवर’; कहाँ है #mob lynching गैंग?

चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान ने इस्लाम का हवाला देकर मुस्लिम महिला की पिटाई का किया बचाव
पश्चिम बंगाल में एक मुस्लिम महिला की खुलेआम पिटाई होने पर #mob lynching गैंग क्यों खामोश है? क्या बंगाल में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री होते मुस्लिम राज स्थापित हो गया है? 

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर में खुलेआम एक भीड़ के सामने एक मुस्लिम महिला की पिटाई की गई। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या राज्य में शरिया कानून लागू हो गया है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि जिस ताजेमुल उर्फ़ JCB ने इस घटना को अंजाम दिया है वो ‘त्वरित न्याय’ के लिए जाना जाता है, पुलिस-कोर्ट तक की उसके सामने कोई कीमत नहीं। वो चोपरा से TMC विधायक हमीदुल रहमान का करीबी है। अब विधायक ने इस पर और निंदनीय बयान दिया है।

BJP और CPI(M) – दोनों ही विपक्षी दलों ने कहा कि ताजेमुल तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता है। वीडियो में मुस्लिम महिला के अलावा एक पुरुष को भी जमीन पर पटक कर पीटे जाते हुए देखा गया। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए कि तृणमूल कांग्रेस के विधायक हमीदुल रहमान ने अपने करीबी का बचाव करते हुए जिस महिला की पिटाई हुई उसे ही ‘दुष्ट जानवर’ कह दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि उक्त महिला की गतिविधियाँ ‘असामाजिक’ थीं।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से उनका या पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC का कोई लेना-देना नहीं है। विधायक हमीदुल रहमान ने इसे गाँव का मसला बताते हुए कहा कि महिला ने भी गलती की है, उसने अपने पति और बेटा-बेटी को छोड़ दिया। चोपरा के विधायक ने कहा कि ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के हिसाब से कुछ संहिता और न्याय होते हैं। हालाँकि, उन्होंने ये भी जोड़ा कि जो हुआ वो बहुत ज़्यादा था और कानून अपना काम करेगा।

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पश्चिम बंगाल की ‘शरिया अदालत’ : मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे सर झुका चुकी ममता: महिला मुख्यमंत्

फ़िलहाल पुलिस ने आरोपित ताजेमुल को गिरफ्तार कर लिया है। इस्लामपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट जॉबी थॉमस K ने कहा कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। उन्होंने घटना के पीछे जाँच की बात कही है। TMC विधायक हमीदुल रहमान का कहना है कि पीड़िता या उसके पति ने कोई FIR नहीं दर्ज कराई है, केवल मीडिया इसे फैला रही है। उस क्षेत्र में ‘सालिशी सभा’ नाम का कंगारू कोर्ट चलता है।

शरीयत पीड़ित मोहम्मद शमी की बीवी हसीन जहां मुस्लिम औरतों का ‘दर्द’ लेकर पहुँची सुप्रीम कोर्ट, कहा- सनक में छोड़ देते हैं मर्द

मुस्लिम उलेमा एवं विद्वान भले ही महिलाओं के अधिकारों की बात कर गुमराह करते रहे, लेकिन वास्तविकता तो मुस्लिम महिला ही बता सकती है। शरीयत में कितनी कमियां हैं, गैर-मुस्लिमों से अधिक चर्चा इसी समाज में ही होती रहती है। परन्तु छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता, पार्टियां और मीडिया उसे परदे के पीछे छिपाकर रखती रहती है। 

भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बीवी हसीन जहाँ ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को शरीयत से पीड़ित बताया है। एक समान तलाक कानून की माँग की है। कहा है कि इस्लामी कानून की वजह से मर्द सनक और मर्जी से बीवियों को छोड़ देते हैं। इसलिए तलाक-उल-हसन और न्यायिक दायरे के बाहर तलाक देने की मुस्लिमों में परिपाटी को खत्म करने की अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसीन जहाँ ने वकील दीपक प्रकाश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि हसीन जहाँ शरीयत कानून के तहत मिलने वाले तलाक की एकतरफा प्रक्रिया तलाक-उल-हसन की पीड़ित हैं। शमी ने उन्हें 23 जुलाई 2022 को पहली बार तलाक का नोटिस भेजा था। यह नोटिस तलाक-उल-हसन के तहत ही भेजा गया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि शरीयत कानून में तलाक-उल-हसन और तलाक-ए-बिद्दत के अलावा तलाक देने की कई प्रक्रिया हैं। इन प्रक्रियाओं के तहत मर्द अपनी मर्जी या सनक के चलते बीवियों को छोड़ देते हैं। शरीयत के इन नियमों को चलते मर्द तलाक से पहले महिलाओं को सुलह करने का मौका नहीं देते। बिना किसी बातचीत के ही उन पर फैसला लाद दिया जाता है।

हसीन जहाँ ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरीयत एक्ट-1937 की धारा 2 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। इसलिए इस धारा को असंवैधानिक घोषित किया जाए। साथ ही तलाक को लेकर धर्म या लिंग का भेदभाव किए बिना देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र को नोटिस भेजा है। साथ ही कहा है कि वह ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं पर सुनवाई के साथ ही इस याचिका पर सुनवाई करेगा।

मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच तलाक नहीं हुआ है। लेकिन 4 साल से अधिक समय से दोनों अलग रह रहे हैं। कोर्ट के आदेश के तहत शमी हसीन जहां को हर महीने 1 लाख 30 हजार रुपए का गुजारा भत्ता देते हैं। इसमें से 80000 रुपए उनकी बेटी की पढ़ाई-लिखाई व अन्य खर्चों के लिए दिया जा रहा है।

लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने से तालिबान खफा, पैसे की कमी बता बंद की यूनिवर्सिटी

                                                  पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़िवादी बताया
सत्ताधारी तालिबान ने अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों को बंद करने की घोषणा की है। इसके पीछे तालिबान ने लड़के और लड़कियों के एक साथ पढ़ने वाली सह-शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक तंगी को प्रमुख कारण बताया है। तालिबान ने महिलाओं को बिना किसी नजदीकी रिश्तेदार को साथ लिए लंबी दूरी की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन फैसलों को लेकर पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़ीवादी और अपने मुल्क के लिए खतरा बता दिया है।

अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने रविवार (26 दिसंबर) को कहा कि विश्वविद्यालयों के बंद होने का कारण सह-शिक्षा और आर्थिक संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए अलग कक्षाएँ बनानी होंगी और उनके लिए शिक्षकों को नियुक्त करना होगा। इसमें समय और पैसा दोनों की जरूरत है।

इसी साल 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था। मुल्क में सत्ता में आते ही तालिबान ने सह-शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया था और कहा था कि लड़कियों को यूनिवर्सिटी में लड़कों के साथ क्लास में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान की महिलाओं पर प्रतिबंधों को और कठोर करते हुए उन्हें अकेले बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। अपने आदेश में तालिबान ने कहा कि महिलाएँ अपने घर से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। अगर उन्हें बाहर जाना है तो वे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ बाहर जा सकेंगी। वहीं, गाड़ी मालिकों को सिर्फ हिजाब पहनने वाली महिलाओं को गाड़ी में बैठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, महिला पत्रकारों को भी हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

महिलाओं के लिए इस तरह के आदेश जारी करने पर पाकिस्तान बिफर गया है। पाकिस्तान ने अब तालिबान को रूढ़िवादी सोच वाला और अपने लिए खतरा बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा, “हम अफगानिस्तान की आवाम की पूरी मदद करना चाहते हैं, लेकिन वो कह रहे हैं कि औरतें वहाँ अकेले सफर नहीं कर सकतीं, स्कूल नहीं जा सकतीं, कॉलेज नहीं जा सकतीं। तालिबान की इस तरह की पुरानी सोच पाकिस्तान के लिए खतरा है।”

चौधरी ने तालिबान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान अतिवादी विचारों के खिलाफ है। भारत के बँटवारे के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्ना ने पाकिस्तान को इस्लामिक मुल्क बनाया, मजहबी मुल्क नहीं।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा विवाद उभर कर भी सामने आया है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाए जा रहे कँटीले तारों की बाड़ को तालिबान लड़कों ने रोक दिया और तार को उठा कर लेते गए। इस दौरान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को गोली भी मार दी।

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अकेले बाहर नहीं जा सकेंगी महिलाएँ, महिला पत्रकारों को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, गाड़ी में गाना नहीं ब
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अकेले बाहर नहीं जा सकेंगी महिलाएँ, महिला पत्रकारों को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, गाड़ी में गाना नहीं ब

तालिबान को सत्ता में लाने के लिए हर तरह की मदद करने वाला पाकिस्तान अब तालिबान को रूढ़िवादी बताते हुए उसे पाकिस्तान के लिए खतरा बता रहा है। वर्तमान हालातों को देखकर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

उत्तर प्रदेश : भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो : दारोगा मंसूर अहमद, कानपुर पुलिस

ट्रिपल तलाक पीड़िता हिना परवीन
पीड़िता हिना परवीन 
उत्तरप्रदेश के कानपुर में हिना परवीन को उसके शौहर नूरजादे ने सऊदी अरब जाकर मोबाइल से तीन तलाक दे दिया। ससुराल वालों ने पीट-पीटकर घर से भगा दिया। देवर ने ‘छपाक-2’ बनाने की धमकी दी। जब न्याय की गुहार लगाई तो इंसाफ की जगह उसे शरीयत मानने की सलाह दी गई।
कार्रवाई के बदले थाने के मुस्लिम दारोगा मंसूर अहमद ने उसे बताया कि तीन तलाक कानून कुछ नहीं होता। शरीयत के हिसाब से उसका तलाक हो गया है। अब वह उसी को माने। दरोगा ने महिला के विरोध पर यह भी कहा कि उसके जैसी लड़कियों के कारण ही लोग मुस्लिमों के मामले में हस्तक्षेप करते हैं।
दारोगा ने महिला से यह भी कहा, “तुम पहली लड़की नहीं हो, जिसे तीन तलाक मिला। ये मुस्लिमों में शरिया कानून के तहत होता आया है, जिसे तुम्हें मानना चाहिए, भारत के कानून को भूल जाओ, सिर्फ़ शरिया को मानो।”
क्या है पूरा मामला 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर के सुजातगंज निवासी हिना परवीन का निकाह पिछले साल 5 जुलाई को अजीतगंज के नूरजादे उर्फ इशान से हुआ था। निकाह के तीन माह बाद ही नूरजादे सऊदी अरब चला गया। 27 अक्टूबर को उसने परवीन को मोबाइल के जरिए तीन तलाक दिया। ससुराल ने भी तलाक की जानकारी पाते ही उसे पीट-पीटकर घर से निकाल दिया।
इसके बाद हिना ने पति नूरजादे, सास-ससुर, देवर, नंद, बहनोई समेत 8 लोगों के ख़िलाफ़ 4 नवंबर को बाबूपुरवा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। हिना ने आरोप लगाया कि निकाह के बाद उसके ससुराल वाले 5 लाख रुपए की माँग कर रहे थे। लेकिन उसके पिता ये बड़ी रकम देने असमर्थ थे। इसलिए साजिश के चलते उसका तलाक करवाया गया।
महिला के मुताबिक जब उसे ससुराल वालों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई तो उसके देवर फैसल ने एसिड अटैक करके छपाक-2 बनाने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने इसी साल जनवरी में वीडियो बनाकर मदद माँगी थी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिना परवीन को डर था कि उनके मामले की जाँच में बाधा आ जाएगी, क्योंकि उनके ससुराल वाले बाबू पुरवा थाने में पुलिस को प्रभावित कर सकते हैं। इसकी वजह से, उसने अधिकारियों से उसका मामला रेल बाजार पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने की माँग की। फिर उसका केस रेल बाजार में स्थांतरित करवाया गया। वहाँ मंसूर अहमद को जाँच सौंपी गई। लेकिन उन्होंने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। फिर ये केस पवन दुबे को दिया गया।
तीन तलाक पर कानपुर पुलिस की निष्क्रियता 
11 अगस्त को इस मामले में इंस्पेक्टर पवन दुबे ने हिना के पति नूरजादे को गिरफ्तार करके जेल भेजा। हैरानी की बात ये है कि एफआईआर से नूरजादे को छोड़कर सभी का नाम हटा दिया गया है। हिना ने इसके लिए पुलिस की निष्क्रियता को आरोप लगाया। उसने कहा कि उसे अपने शौहर और उसके परिवार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाए 9 महीने हो गए हैं। लेकिन उनके खि़लाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हिना का यह भी कहना है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि उसके पति ने पुलिस को 50 हजार की घूस दी ताकि उसके परिवार वालों का नाम एफआईआर से हटा दिया जाए। फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए हिना ने बताया कि उससे साफ पता चल रहा है कि उसके शौहर ने अपने परिवार के साथ मिल कर कर उसके ख़िलाफ़ साजिश रची। उसने उस रिकॉर्डिंग में माना है कि उसने हिना से निकाह भी पैसों के लिए किया था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में नूरजादे को पुलिस प्रशासन और प्रधानमंत्री को लेकर भी घटिया भाषा का प्रयोग करते सुना जा सकता है। ऐसे में हिना का सवाल है कि इतना पुख्ता सबूत होने के बाद भी पुलिस एक्शन क्यों नहीं ले रही।
हिना यह भी पुष्टि करती है कि वह बाबू पुरवा थाने के सीओ आलोक सिंह से मिली थी और यह पूछा था कि पुलिस ने आरोपितों का नाम एफआईआर से क्यों हटाया। आलोक सिंह ने कथित तौर पर हिना को आश्वासन दिया कि वह इस मामले में तेजी लाएँगे। उसने कहा कि आलोक सिंह के निर्देश पर, IO पवन दुबे ने उसे फोन किया और कॉन्फ्रेंस कॉल पर पूर्व IO मंसूर अहमद को ले लिया। हिना के मुताबिक, पहले पवन दुबे ने ही उसे बताया कि मॅंसूर अहमद ने मामले के अन्य आरोपितों के नाम हटा दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया।
हिना परवीन जो पिछले 9 महीनों से पर्याप्त सबूतों के आधार पर न्याय माँग रही हैं, उसकी अब भी यही माँग है कि पुलिस को सारे आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए।

'सुकन्या समृद्धि योजना' को शरिया के मुताबिक बताया 'अवैध' : मुफ्तियों के एक वर्ग ने किया प्रस्ताव पारित

Sukanya Samrudhi Yojanaइस्लामिक मुफ्तियों के एक वर्ग ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) शरिया के मुताबिक 'अवैध' है क्योंकि योजना के हिस्से के रूप में ब्याज अर्जित किया जाता है। जमीयत उलेमा ए हिन्द के मीडिया प्रभारी अजीमुल्लाह सिद्दीकी ने बताया कि इस हफ्ते की शुरूआत में संगठन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में बच्चियों के लिए चलायी जा रही छोटी बचत योजना पर यह प्रस्ताव पारित किया गया।
सिद्दीकी ने बताया कि एसएसवाई ब्याज पर आधारित है, इसलिए यह इस्लामिक शरिया के अनुसार अवैध है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2015 में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत यह योजना आरंभ की थी।
इससे पूर्व अन्नपूर्णा खाद्य योजना का भी कुछ लोगों ने यह कह कर विरोध किया था की यह हिन्दुओं की अन्नपूर्णा देवी के नाम से है, इसलिए मुस्लिमों को इसका बहिष्कार करना चाहिए।  एक अन्य प्रस्ताव में विभिन्न मोबाइल ऐप के जरिये आर्थिक लेनदेन को अनुमति प्रदान की गयी। शरिया के मुताबिक कैशबैक या रिवार्ड प्वाइंट और ऐप से कैब बुकिंग करने को वैध करार दिया गया। इसी प्रस्ताव में कहा गया मुफ्तियों ने घोषणा की कि वैध वस्तुओं के विज्ञापन के लिए गुगल एडसेंस के उपयोग किया जाना उचित है।
इस स्कीम की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें जमा सारा पैसा भारत सरकार के अकाउंट में जाता है। इसकी रकम और ब्याज के लिए सीधे भारत सरकार जिम्मेदार होती है। इस अकाउंट को खुलवाने के लिए लड़की की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 21 साल में ये अकाउंट मैच्योर हो जाता है। आप इस अकाउंट में कम से कम 250 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा कर सकते हैं।
इस स्कीम में निवेश किए गई रकम पर टैक्स छूट भी मिलती है। मतलब अगर आप इसमें 50 हजार रुपए डालेंगे तो इतनी पूरी रकम का फायदा आप टैक्स छूट के तौर पर उठा सकते हैं। इस योजना में ब्याज भी बैंक एफडी से ज्यादा मिलता है। इसलिए सुकन्या समृद्धि योजना में अकाउंट खुलवाना आपके लिए दोहरे फायदे की बात होगा।
कन्या समृद्धि योजना का अकाउंट खोलना बहुत ही आसान है। आप किसी भी अधिकृत पोस्ट ऑफिस में इसका अकाउंट खुलवा सकते हैं। कई सरकारी और प्राइवेट बैंक भी ये अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं। नए नियम के मुताबिक अब आप इसमें सिर्फ 250 रुपए से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। सुकन्या समृद्धि अकाउंट पोस्ट ऑफिस, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक में जाकर खुलवा सकते हैं।

‘तीन तलाक पर कुरान की चलेगी, कानून या संविधान की नहीं’--पश्चिम बंगाल सरकार के राज्यमंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी

केंद्र सरकार ने तीन तलाक को अपराध मानने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। पश्चिम बंगाल सरकार के राज्यमंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी ने गुरुवार (20 सितंबर) को कहा कि कुरान शरीफ ही सर्वोपरि है और ये उससे टकरानेवाले किसी भी संवैधानिक प्रावधान और कानून से ऊपर है ! राज्य में कई मुस्लिम संगठनों ने इस अध्यादेश का विरोध करने का फैसला किया है। जबकि कई अल्पसंख्यक नेताओं ने कहा है कि वह धार्मिक मामलों में किसी किस्म का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे !
चौधरी ने कहा, ‘‘हमारे लिए, हमारी पवित्र किताब, कुरान शरीफ सर्वोपरि है और कोई संवैधानिक प्रावधान और कानून कुरान से मेल नहीं खाता है तो हमारे धर्मग्रंथ की बात ही मानी जाएगी न कि कानून और संविधान की ! भाजपा धर्म का कार्ड खेलकर संविधान से खेल रही है। इस अध्यादेश का मुस्लिमों पर कोई असर नहीं होनेवाला है। कोई भी इस कानून को नहीं मानेगा लेकिन धर्म और हमारी पवित्र कुरान को जरूर मानेगा !” बता दें कि चौधरी जमायत ए इस्लामी हिंद के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वह पहले ही सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तुरंत तीन तलाक पर दिए गए फैसले को असंवैधानिक करार दे चुके हैं !
राज्य मंत्री ने आगे कहा, ‘‘भाजपा चाहें जो भी पैंतरे आजमा ले, वे हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रभावित करने में कामयाब नहीं होंगे। 2019 में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। ये अध्यादेश केवल हिन्दू वोटों को जीतने का तरीका भर है, ये कामयाब नहीं होनेवाला है। हिन्दू और मुस्लिम उन्हें सत्ता से बाहर कर देंगे !” चौधरी ने कहा कि भाजपा नीत केंद्र सरकार को महिलाओं के साथ बढती हिंसा पर भी चिंतित होना चाहिए।
चौधरी ने कहा, ‘‘हर रोज, महिलाओं और लडकियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। हर रोज महिलाओं को जलाया जा रहा है और क्रूरता हो रही है। केंद्र सरकार क्या कर रही है ? वे इस बारे में कुछ नहीं कर रहे हैं। लेकिन सस्ती वोट बैंक की राजनीति करने के लिए वे मुस्लिमों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं !” हालांकि मुस्लिम संगठन इस अध्यादेश का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं आॅल इंडिया अल्पसंख्यक यूथ फोरम के महासचिव मोहम्मद कमरूज्जमां ने कहा, ‘‘भारत बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष देश है लेकिन भाजपा के द्वारा लाया गया ये अध्यादेश मुस्लिमों के मूल अधिकारों के साथ ही संविधान का भी उल्लंघन करता है। हम जल्दी ही इस मामले में बैठक बुलाएंगे और आगे की रणनीति तैयार करेंगे !”